samacharsecretary.com

कोलकाता में ED की छापेमारी, ममता बनर्जी बोलीं – गृहमंत्री लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर पा रहे

  कोलकाता  केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर छापेमारी के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद प्रतीक जैन के घर पहुंचने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है. सूत्रों के अनुसार, ईडी यह छापेमारी कथित वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में कर रही है. जांच टीम एक साथ प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय में दस्तावेजों की जांच और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं कर रही है. इस कार्रवाई के दौरान ममता बनर्जी का मौके पर आना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मालूम हो कि ममता बनर्जी सीधे उस स्थान पर पहुंचीं जहां ईडी टीम जांच चल रही. उनके आने से माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के खिलाफ एक सियासी निशान के तौर पर देखा जा रहा है. इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच विवाद की स्थिति बनी रही है. ईडी छापे पर ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, कहा- पार्टी दस्तावेज और रणनीति चुराने आए ईडी की रेड पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ईडी हमारी पार्टी के आईटी सेक्टर कार्यालय में इस प्रकार से दस्तावेज लेने आई. मुख्यमंत्री ममता ने इस कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न बताया और कहा कि यह सब गृहमंत्री की स्क्रिप्ट के तहत हो रहा है, जो स्वयं देश की सुरक्षा बनाए रखने में असमर्थ हैं. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ईडी द्वारा उनके पार्टी दस्तावेजों को बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के जब्त किया गया और इस बीच, कुछ मामलों में लोगों के नामों को हटाया जा रहा है. उन्होंने खास तौर पर SIR केस का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाए कि नाम गायब किए जा रहे हैं और दस्तावेजों का दुरुपयोग किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां और गृह मंत्रालय देश और लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में दो समानांतर प्रयास किए जा रहे हैं – एक तरफ मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की कोशिशें और दूसरी तरफ अवैध तरीके से संवेदनशील डेटा इकट्ठा करना. मुख्यमंत्री ने इसे लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया. ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि उन्हें इस तरह की कार्रवाई की पहले से सूचना थी. इसलिए पार्टी से जुड़े सभी हार्ड डिस्क और जरूरी डेटा पहले ही सुरक्षित कर लिया गया था ताकि किसी भी प्रकार की जब्ती से पार्टी के आंतरिक कार्यों और रणनीतियों को नुकसान न पहुंचे. उन्होंने कहा कि उनका आईटी ऑफिस पहले भी निशाने पर रहा है और वह खुद वहां जाकर पूरी स्थिति की समीक्षा करेंगी. मुख्यमंत्री ने साफ़ किया कि यह देखना उनकी जिम्मेदारी है कि यह कार्रवाई किस उद्देश्य से और किस स्तर पर की गई है. ममता बनर्जी ने केंद्र की एजेंसियों पर विपक्षी दलों को डराने और कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस राजनीतिक साजिश के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूती से संघर्ष करती रहेगी.

हरियाणा में राजनीतिक हलचल, कांग्रेस को मिलेगा एक और झटका; राज्यसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति

चंडीगढ़ हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने दिसंबर 2024 में बड़ा खेल किया था। उसके पास एक ही सीट जीतने के लिए विधायकों की संख्या थी, लेकिन उसने अपने समर्थन वाले एक निर्दलीय कैंडिडेट को जिता दिया था और इस तरह कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। अब मार्च 2026 में एक बार फिर से दो सीटों पर राज्यसभा का चुनाव होने वाला है और यहां भी भाजपा पहले की तरह ही खेल कर सकती है। हरियाणा की दो राज्यसभा सीटें 9 अप्रैल को खाली हो रही हैं। भाजपा की किरण चौधरी और रामचंदर जांगड़ा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। विधायकों की मौजूदा संख्या के अनुसार हरियाणा में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही एक-एक सीट जीतने की स्थिति में हैं। एक सीट पर जीत के लिए 31 विधायकों की संख्या चाहिए। भाजपा के पास अपने 48 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 37 की संख्या है। इसके अलावा इनेलो के पास भी दो विधायक हैं और तीन निर्दलीय हैं, जो भाजपा को ही समर्थन करते रहे हैं। इस तरह भाजपा की ताकत 51 हो जाती है। ऐसे में दो सीटों को जीतने के लिए यदि 62 विधायक चाहिए तो भाजपा की ओर से कोशिश हो सकती है कि 9 और विधायकों का जुगाड़ करके कांग्रेस को जीरो पर रोक दिया जाए। फिलहाल हरियाणा की पांचों राज्यसभा सीटें भाजपा के पास ही हैं। इनमें से दो किरण चौधरी और रामचंदर जांगड़ा रिटायर हो रहे हैं। इसके अलावा तीन अन्य सांसद रेखा शर्मा, कार्तिकेय शर्मा और सुभाष बराला है। कार्तिकेय भाजपा समर्थित सांसद हैं। हरियाणा की राजनीति समझने वाले नेताओं का कहना है कि इस बार भाजपा किसी जाट नेता अथवा किसी अन्य ओबीसी या दलित को ही भेजेगी। फिलहाल दो ब्राह्मण नेता पहले ही राज्यसभा में हैं। इसके अलावा सुभाष बराला जाट हैं। राज्य में जाट केंद्रित राजनीति होने के चलते एक चेहरा जाट हो सकता है और किसी अन्य पिछड़ी या दलित बिरादरी के नेता को भी भेजा जा सकता है। इसके अलावा एक और चर्चा राजीव जेटली के नाम की भी है। वह सीएम नायब सिंह सैनी के मीडिया सलाहकार हैं और राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। ओपी धनखड़ और जेपी दलाल के नाम भी हैं चर्चा में जाट चेहरे के तौर पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ और पूर्व मंत्री जेपी दलाल का नाम भी चर्चा में है। फिलहाल यह भी कहा जा रहा है कि किरण चौधरी खुद भी अपने लिए एक कार्यकाल चाहती हैं। उन्हें दो साल ही हुए हैं और वह एक पूरा कार्यकाल चाहती हैं। चर्चा तो मोहन लाल बड़ौली और रामविलास शर्मा के नाम की भी है, लेकिन दोनों ब्राह्मण नेता हैं। पहले से ही दो ब्राह्मण नेता राज्यसभा सांसद हैं। इसलिए शायद ही इन लोगों का नंबर लग पाए। किसी दलित नेता के नाम की भी चर्चा चल रही है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि दलित चेहरों के नाम पर किस पर विचार चल रहा है।

विकसित भारत जी राम जी कानून 2025: भाजपा करेगी लोगों को जागरूक, प्रदेशभर में अभियान शुरू

भोपाल  विकसित भारत जी राम जी कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी प्रदेशभर में जन जागरूकता अभियान चलाएगी। ये अभियान गांव-गांव तक पहुंचेगा। इसके माध्यम से भाजपा आमजन को बताएगी कि ये कानून पहले के मनरेगा से कितना अच्छा है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने  मुख्यमंत्री निवास में मंत्रियों के साथ बैठक की। इस दौरान भाजपा पदाधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विपक्षी दल इस कानून को लेकर जनता में भ्रम फैला रहे है। विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का जवाब देने के लिए भाजपा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर इस कानून की विशेषताएं बताएंगे। मंत्रियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है कि वे अपने प्रभार के जिलों जाकर जी राम जी कानून की जनहितैषी विशेषताएं बताएंगे। मुख्यमंत्री डा. यादव ने कहा कि जी राम जी कानून की मूल भावना पारदर्शी प्रक्रिया, रोजगार की अधिकतम गारंटी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर आधारित है। यही अधिनियम विकसित भारत-2047 के विजन की मजबूत आधारशिला बनेगा। नए कानून में रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। साप्ताहिक भुगतान होगा और देरी पर मुआवजा व अतिरिक्त ब्याज दिया जाएगा। समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार बन गया है। खेती के मौसम में मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुवाई और कटाई के समय 60 दिन तक कार्य स्थगित करने का अधिकार दिया गया है। बता दें कि केंद्र सरकार ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005) के नाम में संशोधन कर विकसित भारत-गारंटी फार रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी विकसित भारत जी राम जी कानून 2025 किया है।

धर्मेंद्र के निधन के बाद बदली हेमा मालिनी की तस्वीर, गम को पीछे छोड़ काम पर लौटीं ‘ड्रीम गर्ल’

मुंबई हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार धर्मेंद्र के निधन के बाद उनका पूरा परिवार और फैंस दोनों ही इस क्षति से उबर नहीं पा रहे हैं। हेमा मालिनी के लिए ये समय काफी दुख और कठिनाइयों से भरा है। हालांकि अब अभिनेता के निधन के बाद हेमा मालिनी ने अपने काम पर वापसी कर ली है, और पहली बार उनके चेहरे पर खुशी देखी गई है। हेमा मालिनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वे मथुरा में आयोजित हुए संसद खेल महोत्सव का हिस्सा बनी हैं। वीडियो में हेमा खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रही हैं और अपने गम को पीछे छोड़ अपने काम पर फोकस करने की कोशिश कर रही हैं। वीडियो में सांसद के चेहरे पर लंबे समय बाद खुशी देखी गई। उन्होंने वीडियो शेयर कर लिखा, "कल मथुरा में मैराथन संसद खेल महोत्सव का उद्घाटन हुआ। राज्य के कोने-कोने से विभिन्न विधाओं में प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। विशेष रूप से उल्लेखनीय है शूटिंग, कुश्ती और इसी तरह की अन्य बहु-विधाओं में कई लड़कियां न केवल भागीदारी कर रही हैं बल्कि शानदार प्रदर्शन भी कर रही हैं!" उन्होंने आगे लिखा, "पीएम मोदी की पहल के कारण, योग्यता को महत्व दिया जा रहा है और अब हम देखते हैं कि जीवन के हर क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। मथुरा का यह उदाहरण साबित करता है कि अब सभी को समान अवसर मिल रहे हैं।" यूजर्स भी हेमा मालिनी को वापस मुस्कुराता देखकर बहुत खुश हैं। एक यूजर ने कमेंट कर लिखा, "आप हमेशा चट्टान की तरह मजबूत, कोमल हृदय और पवित्र आत्मा वाली एक अच्छी इंसान हैं। हेमा जी, आपका हृदय कितना पवित्र और शुद्ध है, ऐसे ही हंसती-मुस्कुराती रहिए, भगवान आपको हिम्मत दे। एक अन्य यूजर ने लिखा, "आपकी शक्ति और जनसेवा के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है, हेमा जी। अपने गम को भुलाकर कर्म ही सच्ची सेवा है।" बता दें कि हाल ही में हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र की दो अलग-अलग प्रार्थना सभा रखने के सवाल पर चुप्पी तोड़ी थी और मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे दोनों परिवारों का आपसी मामला है। दरअसल, एक प्रेयर मीट हेमा मालिनी ने आयोजित की थी, जबकि दूसरी सनी देओल के घर रखी गई थी। हालांकि इसके बाद सवाल उठने लगे थे कि आज भी दोनों परिवारों के बीच मतभेद जारी है।

कांग्रेस ने तोड़ी चुप्पी: भाजपा से गठबंधन पर स्थिति साफ, शिंदे गुट को घेरने की तैयारी

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के साथ चुनाव लड़ने के दावों का कांग्रेस ने खंडन किया है। खबरें थीं कि महाराष्ट्र के स्थानीय चुनाव में दोनों दल गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे हैं। साथ ही इसके जरिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को साइडलाइन कर दिया है। इसपर शिवसेना ने कड़ी आपत्ति जताई थी। वहीं, भाजपा ने आरोप लगाए कि शिवसेना नेतृत्व ने कभी गठबंधन की बात पर जवाब नहीं दिया। कांग्रेस नेता सचिव सावंत ने एक्स पर बताया है कि भाजपा और कांग्रेस ने गठबंधन नहीं किया। उन्होंने कहा कि शिवसेना के भ्रष्टाचार के खिलाफ कई दल एकजुट हुए हैं। कहा जा रहा था कि भाजपा और कांग्रेस ने अंबरनाथ नगर परिषद के लिए हाथ मिला लिया है। उन्होंने लिखा, 'अंबरनाथ में पार्टी से संबद्धता और चिह्नों को दरकिनार करते हुए अलग-अलग पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अंबरनाथ डेवलपमेंट फ्रंट बनाया है। स्थानीय स्तर पर शिंदे सेना के भ्रष्टाचार के खिलाफ साथ आए हैं। इसमें निर्दलीय भी शामिल हैं। कांग्रेस और भाजपा के साथ आने की खबरें गलत हैं। इस बात का ध्यान रखें।' शिवसेना भड़की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना इस गठबंधन से खासी नाराज नजर आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, शिंदे सेना के विधायक बालाजी किनिकर ने कहा, 'जो पार्टी कांग्रेस मुक्त भारत की बात करती है, अब वह कांग्रेस के साथ शासन करेगी। यह कुछ नहीं, बल्कि शिवसेना की पीठ में छुरा मारने जैसा है।' भाजपा नेता गुलाबराव करनजुले पाटिल ने कहा कि शिवसेना के साथ गठबंधन अपवित्र होता। उन्होंने शिवसेना पर बीते 25 सालों से भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए हैं। पाटिल का दावा है कि भाजपा ने अमंबरनाथ में शिवसेना से गठबंधन के कई प्रयास किए, लेकिन उसके नेतृत्व की ओर से सकारात्मक जवाब नहीं मिला।  

कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन महाराष्ट्र में चंद घंटों में टूटा, हुई किरकिरी के बाद नेताओं का एक्शन

 मुंबई महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में हुआ बीजेपी-कांग्रेस का गठबंधन कुछ ही वक्त में टूट गया है. बुधवार को इससे जुड़ी खबर सामने आई थी, जिसके बाद दोनों ही पार्टियों की किरकिरी हो रही थी. अब कांग्रेस ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. दूसरी तरफ सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी इसपर आपत्ति जताई थी. बता दें कि अंबरनाथ नगर परिषद में एकनाथ शिंदे की पार्टी का खेल बिगाड़ने के लिए दोनों दल साथ आए थे. लेकिन ये समीकरण ज्यादा नहीं टिक पाया.अब कांग्रेस ने अंबरनाथ के ब्लॉक अध्यक्ष को सस्पेंड किया है. बीजेपी के साथ स्थानीय स्तर पर अलायंस करने के लिए उनपर एक्शन हुआ है. सीएम फडणवीस ने लगाई थी फटकार कांग्रेस के एक्शन से पहले सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अंबरनाथ और अकोला में कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ गठबंधन करने के आरोप में भाजपा नेताओं की कड़ी आलोचना की और कार्रवाई की चेतावनी दी थी. उन्होंने साफ किया था कि इस तरह के गठबंधन पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की मंजूरी के बिना किए गए हैं और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन करते हैं. फडणवीस ने कहा था, 'मैं यह स्पष्ट कर रहा हूं कि कांग्रेस या AIMIM के साथ किसी भी तरह का गठबंधन स्वीकार्य नहीं होगा. अगर किसी स्थानीय नेता ने ऐसा फैसला अपनी मर्जी से लिया है, तो यह अनुशासन के विरुद्ध है और इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.' उन्होंने आगे कहा कि ऐसे गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं. अंबरनाथ नगर परिषद का समीकरण अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 59 पार्षद हैं. यहां 20 दिसंबर 2025 में चुनाव हुए थे. फिर 21 को नतीजे आए. एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनी. उसने 27 सीटें जीतीं (बहुमत से सिर्फ 4 कम). वहीं, अन्य पार्टियों में बीजेपी (15), कांग्रेस (12), NCP (अजित पवार गुट) (4) को कुल 31 सीट मिली. दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी ने शिवसेना (शिंदे) को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस से गठबंधन किया. इस गठबंधन को ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम दिया गया, जिसके पास 31 पार्षदों का समर्थन है, जो बहुमत के आंकड़े 30 से एक अधिक है. अंबरनाथ में कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन को लेकर शिवसेना (शिंदे) के नेताओं में नाराजगी थी. शिवसेना (शिंदे) के विधायक डॉक्टर बालाजी किनीकर ने इसे शिवसेना के साथ विश्वासघात बताया था. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाली बीजेपी का अंबरनाथ की सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन करना शिवसेना (शिंदे) की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है.

भ्रम की अटकलों पर विराम: सिद्दारमैया को कार्यकाल पूरा करने की शुभकामनाएं — डीके शिवकुमार

बेंगलुरु कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के पूरे कार्यकाल को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की। शिवकुमार ने कहा कि वह सिद्दारमैया को अपना कार्यकाल पूरा करने की शुभकामनाएं देते हैं और पार्टी के भीतर किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है। बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डीके शिवकुमार ने कहा, "उनके साथ हर अच्छी चीज हो। मैं उन्हें ढेरों शुभकामनाएं देता हूं। हमारे बीच कोई भ्रम नहीं है, भ्रम सिर्फ मीडिया में है। एक बार फिर मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।" मुख्यमंत्री सिद्दारमैया द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय डी. देवराज उर्स के लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड की बराबरी किए जाने पर शिवकुमार ने कहा कि वह और अधिक सफलता हासिल करें। ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अच्छा स्वास्थ्य मिले, ताकि वे जनता की और ज्यादा सेवा कर सकें। शिवकुमार ने आगे कहा, "मैं बल्लारी जा रहा हूं। मैं वहां जाकर स्थिति का जायजा लूंगा। हम राज्य में और हर जगह शांति चाहते हैं। भाजपा बेचैन हो रही है और ऐसी गतिविधियों का सहारा ले रही है।" उल्लेखनीय है कि कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प के दौरान हुई फायरिंग में राजशेखर की मौत हो गई थी। इस मामले में मंत्री जमीर अहमद खान द्वारा मृतक के परिवार को कथित रूप से 25 लाख रुपए नकद मुआवजा दिए जाने को लेकर उठे सवालों पर डीके शिवकुमार ने कहा कि वह इस विषय में मंत्री जमीर अहमद खान से बात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के पास अब आयकर विभाग और केंद्रीय एजेंसियां हैं। सोनिया गांधी के अस्पताल में भर्ती होने की खबर पर डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्हें अभी इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन वे उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। उन्होंने कहा, "हमारी प्रार्थनाएं उनके साथ हैं। उन्हें लंबा और स्वस्थ जीवन मिले ताकि वे कांग्रेस पार्टी और देश का मार्गदर्शन करती रहें। उन्होंने संकट के समय मजबूती से नेतृत्व किया है।" वहीं, नेतृत्व पर जारी अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने भी मंगलवार को बयान दिया। उन्होंने मैसूरु में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनका कार्यकाल पूरा करना पार्टी हाईकमान के फैसले पर निर्भर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि वे अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। सिद्दारमैया ने कहा, "मुझे हाईकमान पर भरोसा है। भरोसा नहीं होता, तो मुख्यमंत्री कैसे बनता?"

राजेश राम के सामने कांग्रेस कार्यालय बना रणक्षेत्र, कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट

मधुबनी बिहार कांग्रेस में आतंरिक कलह अब खुलकर सामने आने लगा है। मधुबनी में कांग्रेस दफ्तर में उस वक्त हड़कप मच गया। जब पार्टी कार्यकर्ता आपस में भि़ड़ गए। इस दौरान जमकर लात-घूंसे चले। पार्टी का झंडा लेकर ही एक-दूसरे पर टूट पड़े। हैरानी की बात ये कि हंगामा वक्त हुआ जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम भी मौजूद थे। इसके अलावा वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि चुनाव में मिली हार की समीक्षा बैठक चल रही थी। जब ये हंगामा हुआ।   इसी दौरान संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते हाथापाई शुरू हो गई। नौबत मारपीट की आ गई। इस दौरान लाठीबाजी भी होने लगी। किसी तरह वहां मौजूद अन्य लोगों ने मामले को संभालने की कोशिश की। लेकिन तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे. घटना के बाद कांग्रेस कार्यालय में तनाव का माहौल बना हुआ है। बताया जा रहा है कि बैठक में टिकट बंटवारे में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दो गुट आपस में भिड़ गए थे। जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मार-पिटाई होने लगी। आपको बता दें इससे पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते कई नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। बात अगर बिहार विधानसभा चुनाव की करें तो कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद ही खराब रहा था। 61 सीटों पर लड़कर सिर्फ 6 सीटें जीतने में पार्टी सफल रही थी। जिसके बाद पार्टी की रणनीति को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। पार्टी के ही कई नेताओं ने टिकट बंटवारे में भेदभाव और उगाही तक के आरोप लगाए थे।

सत्ता और विपक्ष आमने-सामने: बैठक के दौरान हाथापाई, विधायकों की तीखी नोकझोंक से हड़कंप

नई दिल्ली कर्नाटक के बीदर में उस वक्त एक शर्मनाक दृश्य देखने को मिला, जब भाजपा और कांग्रेस के विधायक राज्य मंत्री के सामने ही हाथापाई पर उतर आए। यह वाकया जिला पंचायत हॉल में चल रहे कर्नाटक डेवलपमेंट प्रोग्राम की मीटिंग के दौरान हुआ। दरअसल मीटिंग में हुमनाबाद विधानसभा क्षेत्र में जंगल की जमीन के बारे में चर्चा हो रही थी। इसमें जिला प्रभारी मंत्री ईश्वर खंड्रे, भाजपा विधायक सिद्दू पाटिल और कांग्रेस MLC भीमराव पाटिल शामिल थे। तभी जमीन पर कब्जे के विवाद को लेकर दोनों नेता आपस में भिड़ गए।   हाथापाई की आई नौबत दोनों के बीच बहस होने लगी और देखते ही देखते यह बहस हाथापाई तक बढ़ गई। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो भी वायरल है, जिसमें दोनों नेता एक-दूसरे पर उंगली उठाकर चिल्लाते नजर आ रहे हैं। हंगामे के थोड़ी देर बाद कांग्रेस एमएलसी अपनी कुर्सी से उठे और भाजपा विधायक की ओर बढ़कर उन्हें मारने के लिए हाथ उठाया। लेकिन तभी एक पुलिसवाले ने उन्हें रोक लिया। कमरे में मौजूद अन्य लोगों ने भी स्थिति को संभाला और दोनों नेताओं को धक्का देकर अलग किया। आरोप है कि दोनों ने एक-दूसरे को जमकर गालियां दीं और इसके बाद प्रभारी मंत्री ने मीटिंग को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया।  

ओवैसी ने शरद पवार के सांसद बनने पर उठाए सवाल, क्या इस बार नहीं बन पाएंगे सांसद?

मुंबई   लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने वरिष्ठ नेता शरद पवार के संसदीय भविष्य को लेकर बड़ा दावा कर दिया है। उन्होंने रविवार को कहा कि पवार के पास दोबारा राज्यसभा में जाने के लिए जरूरी विधायक नहीं है। साथ ही उन्होंने दावा किया है कि आने वाले समय में इसे लेकर बड़ा 'तमाशा' होगा। AIMIM चीफ की तरफ से यह दावा ऐसे समय पर किया गया है, जब महाराष्ट्र में BMC समेत कई बड़े निकायों के चुनाव होने हैं। पवार का कार्यकाल मार्च में खत्म हो रहा है। ओवैसी ने कहा, 'पवार साहब का राज्यसभा टर्म कब तक का है? मार्च तक। उसके पास उनके पास ताकत कहां है। उनके गठबंधन में इतने विधायक कहां हैं। अगर वह जाते हैं, तो कैसे जाएंगे। यह तो उनको पूछना चाहिए…। अगर वह दोबारा राज्यसभा जाएंगे पवार साहब तो कैसे जाएंगे? नंबर चाहिए न। तो पता चल जाएगा आपको। अभी तमाशा होगा देखिए।' कई दिग्गजों का कार्यकाल पूरा होगा इन राज्यसभा चुनावों का महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि इसमें कई नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें केंद्र सरकार में मंत्री एवं विभिन्न दलों के प्रमुख नेता शामिल है। अगर मंत्री फिर से चुनकर नहीं आते हैं तो उनका सरकार में रहना मुश्किल हो जाएगा और अन्य प्रमुख नेताओं के लिए भी दिक्कतें बढ़ेगी। जिन प्रमुख नेताओं कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शरद पवार, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बी एल बर्मा, जॉर्ज कुरियन आदि शामिल है। इनके अलावा प्रेमचंद गुप्ता, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा, प्रियंका चतुर्वेदी, रामदास अठावले, रामगोपाल यादव, नीरज शेखर, राम जी, शक्ति सिंह गोहिल, अभिषेक मनु सिंघवी, थंबी दुरई, तिरुचि शिवा और मनोनीत सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई शामिल है। सबसे ज्यादा दस सीटें उत्तर प्रदेश में रिक्त होंगी 2026 में जिन 72 सीटों के लिए चुनाव होंगे उनमें अप्रैल में 37 सीटों के लिए, जून में 23 सीटों के लिए, जुलाई में एक सीट के लिए और नवंबर में 11 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। अप्रैल माह में जिन 37 सीटों के लिए चुनाव होंगे, उनमें असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल शामिल है, जबकि नवंबर में होने वाले 11 सीटों के चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश की 10 सीटें होगी। इसके अलावा जून में होने वाले 23 सीटों के चुनाव में आंध्र प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य हैं।