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राहुल गांधी के निवास पर विपक्ष की महाबैठक, 7 अगस्त को INDIA गठबंधन के दिग्गज होंगे शामिल

नई दिल्ली विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक की अगली बैठक 7 अगस्त को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आवास पर होगी। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक डिनर के दौरान होगी और इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बता दें कि, विपक्षी इंडिया गठबंधन की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विपक्ष केंद्र सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर गंभीर आरोप लगा रहा है। 7 अगस्त की डिनर मीटिंग में आने वाले दिनों की राजनीतिक रणनीति और संभावित आंदोलन की रूपरेखा भी बन सकती है। बता दें कि, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि 2024 के लोकसभा चुनावों में करीब 70-80 सीटों पर धांधली हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बहुत मामूली बहुमत से जीते हैं और यदि 15 सीटें भी सही तरीके से हुई होतीं, तो वो प्रधानमंत्री नहीं बन पाते। इसके साथ ही, बैठक में कई मुद्दे उठाए जा सकते हैं। जिसमें बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया, महाराष्ट्र में फर्जी वोटर जोड़ने का आरोप, ऑपरेशन सिंदूर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से संभावित टैरिफ धमकी शामिल है। बता दें कि, इससे पहले इंडिया गठबंधन की पिछली बैठक 19 जुलाई को वर्चुअल हुई थी, जिसमें 24 से ज्यादा दलों के नेता शामिल हुए थे। संसद के मानसून सत्र की रणनीति बनाने को लेकर यह बैठक वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से हुई थी।  

शरद पवार के विधायक का विवादित बयान: ‘देश की बरबादी का कारण सनातन धर्म’

मुंबई  मालेगांव ब्लास्ट मामले में प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित सहित सात आरोपियों को बरी किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। एनसीपी (SC) विधायक जितेंद्र अव्हाड़ ने सनातन धर्म को लेकर ही विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि सनातन की विचारधारा ही विकृत है और इसने पूरे देश को बर्बाद कर दिया है। पत्रकारों से बात करते हुए अव्हाड़ ने कहा, कभी किसी धर्म को सनातन धर्म नहीं कहा गया। हम सब हिंदू धर्म को मानते हैं। यह वही तथाकथित सनातन धर्म है जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी खारिज कर दिया था। सनातन धर्म ने हमारे छत्रपति शिवाजी महाराज को भी बदनाम किया था। इसी सनातन धर्म वाले लोगों ने ज्योतिराव फुले को मारने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, उन लोगों ने सावित्रीबाई फुले पर गोबर फेंक दिया। सनातन धर्म वालों ने ही साहू महाराज को मारने की साजिश रची। यहां तक कि इन लोगों ने डॉ. आंबेडकर को स्कूल में पानी नहीं पीने दिया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा से ही मनुस्मृति का जन्म हुआ है। इसलिए किसी को सनातनी विचारधारा को विकृत कहने से परहेज नहीं करना चाहिए। वहीं बीजेपी ने सनातन आतंकवाद और भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों पर कांग्रेस को घेरा है। उन्होंने कहा, कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा था कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। तब वह तुष्टीकरण में लगे थे। अब वही भगवा आतंकवाद और हिंदू आतंकवाद पर बयान दे रहे हैं। बता दें कि गुरुवार को एक विशेष अदालत ने मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी पुख्ता सबूत उपलब्ध नहीं करवा पाई है। इसके अलावा एजेंसी की कार्यप्रणाली भी ही नहीं थी। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को मालेगांव ब्लास्ट के पीड़ितों को मदद देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए। इस मामले में कुल सात आरोपी थे जिनमें साध्वी प्रज्ञा, मेजर रिटायर्ड रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी का नाम था। इस मामले में कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के 323 और आरोपी पक्ष के 8 गवाहो की भी सुनवाई की। 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक वाहन में बम ब्लास्ट होने के बाद कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं 95 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

मणिशंकर अय्यर का विवादित बयान: ‘PAK पर यकीन नहीं’, BJP ने बताया शर्मनाक

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाकर मणिशंकर अय्यर ने विवाद खड़ा कर दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ था, इसका कोई सबूत नहीं है। इतना ही नहीं अय्यर ने कहा कि भारत ने जिन 33 देशों में अपने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को भेजा था, उन्होंने ने भी इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार नहीं माना। आईएएनएस से बात करते हुए मणिशंकर अय्यर ने ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार का साथ देने वाले कांग्रेसी शशि थरूर पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "थरूर और उनकी टीम ने जिन 33 देशों का दौरा किया था, उनमें से किसी ने भी पहलगाम आतंकी हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। न ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने और न ही अमेरिका ने पाकिस्तान को इसके लिए दोषी माना। हम ही दुनिया भर में कहते घूम रहे हैं कि इसके पीछे पाकिस्तान था लेकिन हमारी बात पर किसी को भी यकीन नहीं है।" कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा, "हम अभी तक ऐसा कोई भी सबूत पेश नहीं कर पाए हैं, जिससे यह साबित हो जाए कि यह हमला पाकिस्तानी एजेंसी की दिमाग की उपज था या उन्होंने ही इसे अंजाम दिया।" मणिशंकर अय्यर के इस बयान के बाद भाजपा भी भड़क गई है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने अय्यर पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "शायद कांग्रेस पार्टी को यह नहीं पता कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निगरानी पैनल ने इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की एक शाखा, टीआरएफ की भूमिका पर चिंता जताई है। शायद कांग्रेस को यह नहीं पता कि आतंकवाद का जन्म पाकिस्तान में हुआ था, चाहे वह लश्कर हो या जैश, जिनके शिविर हमने ऑपरेशन सिंदूर में नष्ट कर दिए थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस पाकिस्तान का बचाव कर रही है और हमारे सशस्त्र बलों का अपमान कर रही है।" भाजपा के एक और प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा, “कांग्रेस पार्टी और उसके नेता पाकिस्तान के सबसे बड़े समर्थक बने हुए हैं और भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक दुष्प्रचार में ही अपना असली मकसद तलाशते हैं। यह वाकई शर्मनाक है।”

‘विपक्ष की हार तय’, उपराष्ट्रपति पद को लेकर थरूर ने दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली  भारत के अगले उपराष्ट्रपति का चुनाव 9 सितंबर 2025 को होगा। यह घोषणा निर्वाचन आयोग (EC) ने गुरुवार को की गई। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचन मंडल का गठन पूरा हो चुका है। इस बीच कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की हार को पहले ही तय मानते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल के द्वारा जिसे उम्मीदवार बनाया जाएगा वही उपराष्ट्रपति बनेगा। शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा, “कोई अंदाजा नहीं है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। लेकिन ये तय है कि जो भी होगा वो सत्तारूढ़ पार्टी का नामित व्यक्ति होगा। चूंकि यह चुनाव केवल लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मिलकर करते हैं, इसलिए हम पहले से ही जानते हैं कि बहुमत किसके पास है।” थरूर ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्य विधानसभाएं हिस्सा नहीं लेतीं, इसलिए परिणाम लगभग तय है। जगदीप धनखड़ ने दिया था इस्तीफा भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में पदभार संभाला था। उन्होंने21 जुलाई 2025 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बताया गया है। उनका कार्यकाल आधिकारिक रूप से अगस्त 2027 तक होना था, लेकिन उन्होंने करीब दो साल पहले ही पद छोड़ दिया। उपराष्ट्रपति का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 66 के तहत होता है। लोकसभा और राज्यसभा के सांसद इस चुनाव में वोट करते हैं। मतदान गुप्त बैलेट प्रणाली के जरिए होता है। इसका संचालन निर्वाचन आयोग करता है। निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही मतदाता सूची की अंतिम प्रति सार्वजनिक की जाएगी, जिसे आयोग के कार्यालय से खरीदा जा सकेगा। 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए को बहुमत मिला था और राज्यसभा में भी उसका वर्चस्व है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि एनडीए का उम्मीदवार आसानी से उपराष्ट्रपति चुना जाएगा। हालांकि अभी तक किसी भी दल ने आधिकारिक रूप से अपने उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है, लेकिन भाजपा सूत्रों के अनुसार नामों पर मंथन जारी है और अगस्त के मध्य तक उम्मीदवार की घोषणा की जा सकती है।

8000 करोड़ की योजना लॉन्च, ममता बनर्जी का नया बूथ फोकस मिशन शुरू

कलकत्ता  विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने बड़ा दाव खेला है. सरकार ने एक अभूतपूर्व 8000 करोड़ रुपये की लागत वाले जनसंपर्क कार्यक्रम ‘आमादेर पारा, आमादेर समाधान’ (हमारा मोहल्ला, हमारा समाधान) शुरू किया. इस पहल का उद्देश्य पूरे राज्य में स्थानीय समस्याओं जैसे स्ट्रीट लैंप लगाने, सड़कों की स्थिति सुधारने और जलापूर्ति सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों का समाधान करना है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 22 जुलाई को इस योजना की घोषणा करते हुए इसे देश में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम बताया था. इस कार्यक्रम की निगरानी के लिए मुख्य सचिव मनोज पंत के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स गठित की गई है और जिला स्तर पर भी टास्क फोर्स का गठन किया गया है. कई जिलों में शनिवार से ही कैंप शुरू हो गए हैं. ममता बनर्जी ने कहा कि हम प्रत्येक बूथ के लिए 10 लाख रुपये आवंटित कर रहे हैं. कुल मिलाकर राज्य सरकार इस कार्यक्रम पर 8000 करोड़ रुपये खर्च करेगी. यह अभियान दो अगस्त से शुरू हो रहा है. दो महीने तक चलेगा कार्यक्रम सरकार के एक बयान के अनुसार यह कार्यक्रम दो महीने तक चलेगा, जिसके बाद 30 दिनों तक प्रशासनिक मूल्यांकन होगा. लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान तीन महीने की अवधि में किया जाएगा. कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में प्रत्येक दो बूथों के लिए एक कैंप आयोजित किया जा रहा है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि हमने देखा है कि स्थानीय स्तर पर छोटी-छोटी समस्याएं जैसे पानी का नल लगाना, बिजली का खंभा स्थापित करना या क्षेत्र में उचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण हैं. हालांकि, स्थानीय निकाय और जनप्रतिनिधि इन मुद्दों पर काम करते हैं, यह समावेशी पहल एक छत के नीचे सभी समस्याओं को हल करने का अवसर प्रदान करती है. आमादेर पारा, आमादेर समाधान आत्मनिर्भर बंगाल के दृष्टिकोण पर आधारित है. सरकारी अधिकारी प्रत्येक मोहल्ले में मौजूद रहकर शिकायतें सुनेंगे, मांगों को दर्ज करेंगे और प्रक्रिया की देखरेख करेंगे. यह प्रक्रिया लगभग दो महीने तक चलेगी. सरकार ने एक विज्ञापन में कहा कि आप apas.wb.gov.in पर शेड्यूल, स्थिति और प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं. आप तय करें कि आपके बूथ का बजट कैसे खर्च होगा. इस पहल को भारत के इतिहास में अभूतपूर्व बताया जा रहा है जो नीति निर्माण में जनता को केंद्र में रखने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने इसे ‘दुआरे सरकार 2.0’ करार देते हुए कहा कि यह 2021 के चुनावों से पहले शुरू किए गए ‘दुआरे सरकार’ कार्यक्रम की तरह ही प्रभावी हो सकता है. 80,000 बूथों को कवर करने वाला यह अभियान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में छोटे-छोटे मुद्दों जैसे टूटी सड़कों, पानी की कमी और खराब स्ट्रीट लाइट्स को हल करने पर केंद्रित है.

बीजेपी फिलहाल नहीं करेगी अध्यक्ष का खुलासा, क्या VP चुनाव बना देरी की वजह?

नई दिल्ली नए बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की चर्चा लंबे समय से चल रही है। वहीं पार्टी का संविधान कहता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है जब कम से कम 50 फीसदी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठन के चुनाव पूरे हो जाते हैं। बीच में ही उपराष्ट्रपति रहे जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद पार्टी का पूरा फोकस अब शिफ्ट हो गया है। रिपोर्ट्स की मानें तो राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही अब बीजेपी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करेगी। कब है उपराष्ट्रपति का चुनाव? पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मॉनसून सेशन शुरू होते ही अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि स्वास्थ्य कारणों से वह पदमुक्त होना चाहते हैं। वहीं चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव का ऐलान भी कर दिया है। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे और इसी दिन शाम तक परिणाम भी घोषित कर दिया जाएगा। यह भी तय माना जा रहा है कि विपक्ष इंडिया गठबंधन का कोई साझा उम्मीदवार उतार सकता है। 21 अगस्त नामांकन दाखिल करने का आखिरी तारीख है। ऐसे में विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के पास उम्मीदवार घोषित करने के लिए पर्याप्त समय है। नंबरगेम की बात करें तो लोकसभा और राज्यसभा में कुल 782 सांसद हैं। एनडीए के पास लोकसभा में 293 तो इंडिया गठबंधन के पास 232 सांसद हैं। वहीं राज्यसभा में एनडीए के पास 133 और इंडिया गठबंधन के पास 107 सांसद हैं। ऐसे में सदन में एनडीए का पलड़ा भारी है। बीजेपी चीफ के चुनाव में देरी के पीछे कारण मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद ही खत्म हो रहा था हालांकि उनकी सफलताओं को देखते हुए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया। अब माना जा रहा है कि बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान के लिए उपराष्ट्रपति चुनाव पूरे होने का इंतजार कर रही है। बिहार चुनाव से पहले बीजेपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कर देना है। फिलहाल बीजेपी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए फ्लोर मैनेजमेंट में लगी हुई है। इस बार के चुनाव में लोकसभा में एनडीए के बहुमत का आंकड़ा कम हो गया था और राज्यसभा में । ऐसे में यह फाइट आसान नहीं माना जा सकती। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य, राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 सदस्य शामिल होते हैं। राज्यसभा में पांच और लोकसभा में एक सीट रिक्त है, जिससे निर्वाचक मंडल की प्रभावी संख्या 782 है और जीतने वाले उम्मीदवार को 391 मतों की आवश्यकता होगी, बशर्ते सभी पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करें। लोकसभा की 543 सीट में से एक सीट, पश्चिम बंगाल में बशीरहाट रिक्त है, जबकि 245 सदस्यीय राज्यसभा में पांच सीट खाली हैं। राज्यसभा में पांच खाली सीट में से चार जम्मू-कश्मीर से और एक पंजाब से है। लोकसभा में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 542 सदस्यों में से 293 का समर्थन प्राप्त है। सत्तारूढ़ गठबंधन को राज्यसभा (प्रभावी सदस्य संख्या 240) में 129 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, बशर्ते कि मनोनीत सदस्य राजग उम्मीदवार के समर्थन में मतदान करें। सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।

राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर सीधा निशाना, 2024 में धांधली का लगाया आरोप, EC को बताया मरा हुआ

नई दिल्ली राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर एक बार फिर जोरदार जुबानी हमला बोला है. राजधानी दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के 'एनुअल लीगल कॉन्क्लेव' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में चुनाव आयोग का अस्तित्व नहीं रह गया है. उन्होंने कहा कि मैं हाल के इलेक्शन सिस्टम के बारे में बोल रहा हूं. मुझे हमेशा से शक था कि इसमें कुछ गड़बड़ है, 2014 से ही. मुझे गुजरात विधानसभा चुनाव में भी शक था. किसी एक पार्टी की लैंड स्लाइड विक्ट्री का ट्रेंड शक पैदा करता है. लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी को राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात (लोकसभा चुनावों में) में एक भी सीट नहीं मिलती, ये मेरे लिए आश्चर्य की बात थी. जब भी हम बोलते थे तो लोग कहते थे, सबूत कहां है? फिर, महाराष्ट्र में कुछ हुआ. लोकसभा चुनाव में हम जीत गए और फिर चार महीने बाद, हम न सिर्फ हारे, बल्कि पूरी तरह से खत्म हो गए. तीन मजबूत पार्टियां अचानक गायब हो गईं.' देश में अब चुनाव आयोग है ही नहीं राहुल गांधी ने कहा, 'हमने चुनावी धांधलियों की गंभीरता से जांच शुरू की. हमें महाराष्ट्र में यह पता चला, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच एक करोड़ नए मतदाता सामने आते हैं. इनमें से ज्यादातर वोट भाजपा को जाते हैं… अब मैं बिना किसी संदेह के कहता हूं कि हमारे पास सबूत हैं. हमारे पास ऐसे सबूत हैं जो बताते हैं कि चुनाव आयोग है ही नहीं.' कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की डिजिटल प्रति उपलब्ध नहीं कराता. इन दस्तावेजों को स्कैन नहीं किया जा सकता. चुनाव आयोग ऐसी प्रतियां क्यों उपलब्ध कराएगा जिन्हें स्कैन नहीं किया जा सकता? उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि एक लोकसभा क्षेत्र में हमने मतदाता सूची की जांच की और पाया कि 6.5 लाख मतदाताओं में से 1.5 लाख मतदाता फर्जी थे. लोकसभा चुनावों में हुई थी धांधली राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों में धांधली का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, 'हम इसे साबित करने जा रहे हैं, हमारे पास अब डेटा है. लोकसभा चुनाव में धांधली हो सकती है और धांधली हुई भी थी. भारत में चुनाव आयोग मर चुका है. इसे साबित करने के लिए हमारे पास दस्तावेज हैं. अगर उन्हें 15-20 सीटें कम मिलतीं, तो वह (पीएम मोदी) प्रधानमंत्री नहीं बनते.' रिटायर चुनाव अधिकरियों को भी नहीं छोड़ेंगे: राहुल एक दिन पहले संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि मैं बड़ी गंभीरता के साथ कह रहा हूं कि चुनाव आयोग वोटों की चोरी कर रहा है और वह ऐसा बीजेपी के लिए कर रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में बैठकर जो भी लोग ये काम कर रहे हैं, वे देश के खिलाफ काम कर रहें हैं. ऊपर से लेकर नीचे तक कोई भी हो हम उसको छोड़ेंगे नहीं. ये राजद्रोह है. उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था, 'आप कहीं भी हो, रिटायर हो या कुछ भी हो, हम आपको ढूंढ निकालेंगे.' वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़े का दावा राहुल गांधी ने एक लोकसभा सीट का उदाहरण देते हुए कहा, "हमने एक सीट की वोटर लिस्ट की जांच की। उसमें 6.5 लाख वोटर थे, जिनमें से 1.5 लाख फर्जी निकले।" उनका दावा है कि यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि सुनियोजित योजना के तहत किया गया फर्जीवाड़ा है। कांग्रेस नेता ने पार्टी के विधि विभाग द्वारा विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान यह टिप्पणी की। "अगर 15-20 सीटें कम होतीं, मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन पाते" राहुल गांधी ने आगे कहा कि बीजेपी की बहुमत सरकार इसी गड़बड़ी के कारण बनी है। उन्होंने कहा, "अगर बीजेपी को 15-20 सीटें कम मिलतीं, तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनते।" राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, "भारत में चुनाव आयोग अब मर चुका है।" उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह संस्था स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही। "शक 2014 से था, अब सबूत मिल गए" राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें 2014 से ही चुनाव प्रणाली पर शक था, और गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान यह शक और गहराया। उन्होंने कहा, “राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में कांग्रेस को एक भी सीट न मिलना, हैरान करने वाला था। जब भी हम बोले, लोग कहते थे सबूत कहां हैं?” महाराष्ट्र बना टर्निंग पॉइंट राहुल गांधी ने दावा किया कि महाराष्ट्र में उन्हें पहली बार ठोस सुराग मिले। उन्होंने कहा, "लोकसभा में हमने जीत हासिल की, लेकिन चार महीने बाद विधानसभा में हमारी बुरी हार हुई। जब हमने जांच की तो पाया कि लोकसभा और विधानसभा के बीच 1 करोड़ नए वोटर जुड़ गए, जिनमें से अधिकतर वोट बीजेपी को गए। अब मेरे पास कोई शक नहीं कि ये चुनाव गड़बड़ी से प्रभावित था।" राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अब इन तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर पूरे देश के सामने यह सच्चाई उजागर करेगी। उन्होंने कहा कि वे इसे कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर उठाएंगे। हम ऐसी धमकियों पर ध्यान नहीं देते: चुनाव आयोग चुनाव आयोग ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा और चुनावों में धांधली के विस्फोटक आरोपों का तीखा खंडन करते हुए उनके दावों को निराधार और गैरजिम्मेदाराना बताया था. आयोग ने कहा कि जब हम राहुल गांधी को अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए बुलाते हैं तो वह नहीं आते और अब हमारे कर्मचारियों को धमकाने लगे हैं. कांग्रेस नेता के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने कहा, 'हम हर दिन लगाए जा रहे ऐसे निराधार आरोपों को नजरअंदाज करते हैं और हर दिन दी जा रही धमकियों के बावजूद, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं. हमने अपने सभी चुनाव अधिकारियों से ऐसे गैरजिम्मेदाराना बयानों पर ध्यान नहीं देने के लिए कहा है.'

‘2020 में जेटली ने धमकाया?’ राहुल गांधी के बयान पर उठा सवाल, BJP ने याद दिलाई मौत की तारीख

 नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयान ने एक बार फिर सियासी भूचाल ला दिया है. शनिवार को कांग्रेस के वार्षिक लीगल कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को लेकर ऐसा दावा कर दिया, जिसे भाजपा ने 'फेक न्यूज' करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि जब अरुण जेटली का निधन 2019 में हो गया तो वह राहुल गांधी से मिलने 2020 में कैसे आ गए? लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के इस दावे पर कि दिवंगत पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था, डीडीसीए प्रमुख रोहन जेटली ने शनिवार को कांग्रेस नेता को याद दिलाया कि उनके पिता का निधन इन कानूनों के लागू होने से पहले ही हो गया था। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था। कृषि कानून 2020 में लागू हुए थे।" एक्स पर एक पोस्ट में, रोहन जेटली ने लिखा, "राहुल गांधी अब दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था। मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था। कृषि कानून 2020 में लागू हुए थे। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पिता के स्वभाव में किसी को भी विरोधी विचार के लिए धमकाना नहीं था। वह एक कट्टर लोकतांत्रिक व्यक्ति थे और हमेशा आम सहमति बनाने में विश्वास रखते थे।" उन्होंने आगे लिखा, "अगर ऐसी कोई स्थिति आती, जैसा कि राजनीति में अक्सर होता है, तो वह सभी के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने के लिए स्वतंत्र और खुली चर्चा का आह्वान करते। वह ऐसे ही थे और आज भी उनकी यही विरासत है। मैं राहुल गांधी से कहता हूं वे उन लोगों के बारे में बोलते समय सचेत रहें जो हमारे साथ नहीं हैं। उन्होंने मनोहर पर्रिकर जी के साथ भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की, उनके अंतिम दिनों का राजनीतिकरण किया, जो भी उतना ही घटिया था। दिवंगत आत्मा को शांति मिले।'' इससे पहले दिन में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि एनडीए सरकार ने दिवंगत केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पहले लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ने की कोशिश करने पर उन्हें धमकाने के लिए भेजा था। राहुल गांधी ने कहा, "मुझे याद है कि जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, तो अरुण जेटली को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था। उन्होंने मुझसे कहा था, 'अगर आप सरकार का विरोध करते रहेंगे और कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ते रहेंगे, तो हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।' मैंने उनकी तरफ देखा और कहा, ''मुझे नहीं लगता कि आपको पता है कि आप किससे बात कर रहे हैं।'' दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान कहा, "मुझे याद है जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, वो (अरुण जेटली) अब नहीं हैं, इसलिए मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए लेकिन फिर भी कहूंगा, अरुण जेटली जी को मुझे मिलने और धमकी देने के लिए भेजा गया था." राहुल ने कहा कि जेटली जी ने मुझसे कहा, "अगर तुम इस रास्ते पर चलते रहे, सरकार का विरोध करते रहे और कृषि कानूनों पर हमसे लड़ते रहे, तो हमें तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी. मैंने जवाब दिया कि मुझे नहीं लगता कि आपको अंदाजा है कि आप किससे बात कर रहे हैं. हम कांग्रेस वाले हैं, डरते नहीं हैं, झुकते नहीं हैं. हमें तो अंग्रेज नहीं झुका पाए." भाजपा का पलटवार: फर्जी बयानों से दूर रहें राहुल राहुल गांधी के इस बयान पर सबसे तीखा जवाब आया बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय की ओर से. उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, 'Fake News Alert!' उन्होंने आगे लिखा, "राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि अरुण जेटली ने उन्हें 2020 में लाए गए कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था. लेकिन तथ्य यह है कि अरुण जेटली का निधन 24 अगस्त 2019 को हो गया था, जबकि कृषि कानूनों का मसौदा पहली बार 3 जून 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया गया था और ये कानून सितंबर 2020 में पास हुए." अमित मालवीय ने आगे कहा, "ऐसे में यह दावा सरासर झूठा और भ्रामक है कि जेटली जी ने उन्हें किसी बात के लिए संपर्क किया. यह साफ है कि राहुल गांधी एक बार फिर टाइमलाइन को तोड़-मरोड़ कर अपनी राजनीतिक कहानी गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं." पिता की आत्मा को शांति से रहने दें: रोहन जेटली अरुण जेटली के बेटे और दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष रोहन जेटली ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर तीखा पलटवार किया. उन्होंने एक्स पर लिखा, "राहुल गांधी अब यह दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने कृषि कानूनों को लेकर उन्हें धमकी दी थी. मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था, जबकि कृषि कानून 2020 में लाए गए थे. और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पिता कभी किसी को किसी विचार के विरोध के लिए धमकाने वाले नहीं थे. वह एक सच्चे लोकतांत्रिक व्यक्ति थे जो हमेशा संवाद और सहमति में विश्वास रखते थे." उन्होंने आगे कहा, "मैं राहुल गांधी से आग्रह करता हूं कि जो अब हमारे बीच नहीं हैं, उनके बारे में बोलते समय थोड़ी संवेदनशीलता दिखाएं. उन्होंने मनोहर पर्रिकर जी के अंतिम दिनों को भी राजनीति से जोड़कर अपमानजनक हरकत की थी." हर बात में झूठ, कांग्रेस कब सुधरेगी: अनुराग ठाकुर बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा, "राहुल गांधी की हर बात झूठ है. हर साल झूठ बोलते हैं, वो सुधर नहीं सकते. रोज एक नया झूठ. कांग्रेस कब तक झूठ की राजनीति करेगी? अरुण जेटली बड़े नेता थे. उनका निधन 2019 में हुआ और कृषि कानून 2020 में संसद में आया. कितने झूठ बोलेंगे राहुल गांधी? जब जेटली जी 2019 में ही गुजर गए, तो वो उनसे 2020 में मिलने कैसे आ सकते हैं? राहुल गांधी को अरुण जेटली के परिवार … Read more

INDI गठबंधन उतारेगा साझा उम्मीदवार? उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन

 नई दिल्ली उपराष्ट्रपति पद के लिए सामूहिक निर्णय के बाद आइएनडीआइए एक साझा उम्मीदवार उतार सकता है। ब्लॉक के सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के बहुमत में होने के बावजूद उसे लगता है कि संख्या बल विपक्ष के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी भावना है कि विपक्षी दलों को परिणाम की परवाह किए बिना एक मजबूत राजनीतिक संदेश देने के लिए चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटना चाहिए। जगदीप धनखड़ ने सोमवार को दिया था इस्तीफा गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम अचानक स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि उनके इस्तीफे के पीछे अन्य कारणों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। 74-वर्षीय धनखड़ ने अगस्त, 2022 में पदभार ग्रहण किया था और उनका कार्यकाल अगस्त, 2027 तक था। दोनों सदनों की प्रभावी संख्या 782 है बहरहाल, दोनों सदनों की प्रभावी संख्या 782 है और उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में विजयी उम्मीदवार को 392 वोट हासिल करने होंगे, बशर्ते सभी पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करें। लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्य, जिनमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं, उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान करते हैं। लोकसभा में, जहां भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को 542 सदस्यीय सदन में 293 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, वहीं आइएनडीआइए के पास 234 सदस्य हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन को राज्यसभा में लगभग 130 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, जिसकी प्रभावी संख्या 240 है।  आइएनडीआइए को 79 सदस्यों का समर्थन प्राप्त उच्च सदन में आइएनडीआइए को 79 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। प्रभावी रूप से, संसद में एनडीए के 423 सदस्य और इंडिया ब्लॉक के 313 सदस्य हैं, शेष गुटनिरपेक्ष हैं। चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और यह जल्द ही तारीखों की घोषणा करेगा। संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड दो के अनुसार, उपराष्ट्रपति के निधन, त्यागपत्र या पद से हटाए जाने या अन्य किसी कारण से खाली हुए इस पद को भरने के लिए चुनाव ''यथाशीघ्र'' कराया जाएगा। निर्वाचित व्यक्ति ''अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से पूरे पांच वर्ष की अवधि'' तक इस पद पर बने रहने का हकदार होगा।  

राहुल गांधी का हमला – ‘PM मोदी को मीडिया ने किया ओवरहाइप

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कई बार मिल चुके हैं और उनमें कोई दम नहीं है। उन्होंने कांग्रेस 'ओबीसी भागीदारी न्याय सम्मेलन' में यह टिप्पणी की। राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान जब यह सवाल किया कि देश में सबसे बड़ी समस्या क्या हैं तो वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने प्रधानमंत्री का नाम लिया। इस पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ''नरेन्द्र मोदी कोई बड़ी समस्या नहीं हैं। मीडिया वालों ने सिर्फ गुब्बारा बना रखा है। मैं उनसे मिल चुका हूं, उनके साथ कमरे में बैठा हूं। बस ‘शो’ हैं, कोई दम नहीं है।'' उन्होंने आगे कहा कि पहले मैं उनसे नहीं मिला था, लेकिन अब मैं उनसे 2-3 बार मिल चुका हूं। अब मुझे समझ आ गया है कि कुछ भी नहीं है – वे सिर्फ दिखावा हैं, कोई दम नहीं। आप उनसे नहीं मिले हैं, मैं मिला हूं। जनसभा को संबोधित करते हुए, राहुल गांधी ने ओबीसी युवाओं से अपनी ताकत पहचानने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ओबीसी युवाओं से मेरी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि वे अपनी ताकत नहीं समझते। एक बार जब वे अपनी ताकत समझ जाएंगे, तो पूरा परिदृश्य बदल जाएगा। राहुल गांधी ने कहा, ''आप मेरी बहन प्रियंका से पूछिएगा कि अगर राहुल ने किसी काम के लिए मन बना लिया तो उस बात को वो छोड़ेगा या नहीं? मैं नहीं छोड़ने वाला। जातिगत जनगणना तो पहला कदम है, मेरा लक्ष्य है कि आपके काम को हिंदुस्तान में सम्मान और भागीदारी मिले।'' कांग्रेस सांसद ने अंग्रेजी भाषा को लेकर भी बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ''बीजेपी के नेता कहते हैं कि अंग्रेजी को देश से मिटा देंगे। लेकिन आप उनसे पूछिए कि अंग्रेजी मिटाना चाहते हैं, आपके बच्चे कहां पढ़ते हैं। हिंदी मीडियम में पढ़ते हैं या अंग्रेजी मीडियम में पढ़ते हैं। लंदन, अमेरिका में क्या वे हिंदी में पढ़ते हैं, नहीं, क्षेत्रीय भाषा, हिंदी-तमिल, पंजाबी, कन्नड़ सब जरूरी हैं, लेकिन उसके साइड में अंग्रेजी भी जरूरी है।''