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राजधानी रांची में पीएनजी सप्लाई की रफ्तार हुई धीमी 78 हजार घरों में ढांचा तैयार पर हजारों उपभोक्ता अब भी परेशान

रांची झारखंड की राजधानी रांची के कई इलाकों में पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) की पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन हजारों उपभोक्ता आज भी कनेक्शन के इंतजार में हैं. कहीं तकनीकी बाधाएं हैं, तो कहीं मैनपावर की कमी है. शहर में अब तक लगभग 78,000 घरों के लिए घरेलू पीएनजी (डीपीएनजी) का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है. इनमें से कुल 54,000 घरों में पीएनजी पहुंचाना अभी बाकी है. अलग-अलग विभागों से अनुमति नहीं मिलने के कारण गैस पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं. कई घरों के किचन में पाइपलाइन लग चुकी है, लेकिन गैस सप्लाई नहीं होने से कनेक्शन चालू नहीं हो पा रहा है. किचन तक पहुंची पाइपलाइन, पर गैस नहीं रांची के सुरेंद्रनाथ सेंटेनरी स्कूल के सामने हेरिटेज गार्डन निवासी कुमुद झा बताती हैं कि तीन साल से अधिक समय हो गए हैं. किचन तक पाइपलाइन लग चुकी है. मुख्य सड़कों तक भी पाइपलाइन बिछ गई है, लेकिन अब तक गैस सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है. 24,000 घरों में गैस आपूर्ति शुरू खबर यह भी है कि पेट्रोलियम कंपनी गेल ने रांची शहर में लगभग 24,000 घरों तक गैस आपूर्ति शुरू कर दी है. इनमें लगभग 18,000 उपभोक्ता ही पीएनजी का नियमित इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं, 6,000 घरों में उपभोक्ताओं ने अब तक पीएनजी चालू नहीं कराया है. इनमें कई लोग किरायेदार हैं, तो कई लोग इन घरों में नहीं रह रहे हैं. रोजाना दिए जा रहे 60-75 घरेलू पीएनजी कनेक्शन इस समय रांची में रोजाना औसतन लगभग 60-75 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए जा रहे हैं. पिछले 15 दिनों में लगभग 900 घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं. वहीं, हर दिन औसतन लगभग 100 नए उपभोक्ता रजिस्ट्रेशन और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा कर रहे हैं. कनेक्शन देने के लिए 20 एजेंसियों को लगाया गया है, लेकिन काम की गति धीमी है. इनसे हर दिन लगभग 60-75 कनेक्शन हो पा रहे हैं, जबकि लक्ष्य हर दिन 200-300 कनेक्शन देने का है. इसके लिए लगभग 150 लोगों की जरूरत है. सेल सिटी में 1808 फ्लैट, लेकिन पीएनजी कनेक्शन नहीं रांची की सेल सिटी में रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी है. यहां कुल 1808 फ्लैट हैं, लेकिन अब तक पीएनजी कनेक्शन की सुविधा नहीं है. इसी तरह बोड़ेया रोड स्थित बैंक कॉलोनी के एसोटेक हिल्स के कई फ्लैटों में भी यह सुविधा शुरू नहीं हुई है. इन इलाकों में अधूरा है पीएनजी कनेक्शन रांची में पुलिस लाइन कांके, लालपुर, टाटीसिल्वे, किशोरगंज, कांटाटोली से बूटी मोड़ रोड, बोड़ेया रोड सहित कई इलाकों में पीएनजी कनेक्शन अधूरा है. इन इलाकों में पीएनजी चालू होने से कनेक्शन की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो सकती है. कई क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क चार्ज गेल अधिकारियों ने बताया कि रांची के कई क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क चार्ज किया जा चुका है. इनमें बरियातू, हरमू, अशोक नगर, मेकन कॉलोनी, अरगोड़ा, पुंदाग, हटिया, धुर्वा, तुपुदाना, पटेल नगर, प्रेम नगर, दिनकर नगर, नामकुम, अमेठिया नगर, खेलगांव, टाटीसिल्वे, चायबागान, काली नगर, खरसीदाग और कांके शामिल हैं. लालपुर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भी गैस आपूर्ति शुरू हो चुकी है. बाकी क्षेत्रों में कार्य प्रगति पर है. कटहल मोड़ से अरगोड़ा तक, चेशायर होम रोड में कई अपार्टमेंट हैं. किरायेदार होने या अपार्टमेंट खाली होने के कारण कनेक्शन नहीं हो पा रहा है, जबकि इन इलाकों में पीएनजी सप्लाई चालू है. रजिस्ट्रेशन के समय सिक्योरिटी डिपॉजिट जरूरी घरेलू पीएनजी कनेक्शन का रजिस्ट्रेशन कराते समय केवल 500 रुपये या 4500 रुपये (विभिन्न योजनाओं के अनुसार) का सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होता है. यह भुगतान ऑनलाइन, पीओएस मशीन या चेक से किया जा सकता है. गेल नकद भुगतान स्वीकार नहीं करता है. यदि कोई नकद मांग करता है, तो उपभोक्ता टोल फ्री नंबर 1800123121111 पर संपर्क कर सकते हैं. कई क्षेत्रों में पाइपलाइन के लिए अनुमति मिली गेल को फिरायालाल चौक, सुजाता चौक से सिरमटोली होते हुए स्टेशन रोड, जेल मोड़ से लालपुर चौक तक और करमटोली चौक से जेल मोड़ तक पाइपलाइन बिछाने की पथ निर्माण विभाग से अनुमति मिली है. इस क्षेत्र में काम होने से 10 हजार से अधिक लोगों को कनेक्शन मिल सकेगा. रातू रोड तक पीएनजी पहुंच चुका है, लेकिन बजरा, पिस्का मोड़, पंडरा और कमड़े तक पाइपलाइन पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं. गेल झिरी रिंग रोड के पीछे-पीछे पाइपलाइन बिछाने पर विचार कर रहा है.

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स: अरुणाचल की नेडी न्गी, महाराष्ट्र के गोविंद पाडेकर ने 5000 मीटर में जीते स्वर्ण पदक

रायपुर. अरुणाचल प्रदेश की मिडिल-डिस्टेंस धाविका नेडी न्गी ने महिलाओं की 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता, जबकि महाराष्ट्र ने पुरुष वर्ग में शानदार 1-2 स्थान हासिल किया। वहीं, बेमौसम बारिश के कारण सोमवार को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के छठे दिन एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के उद्घाटन दिन का शाम का सत्र रद्द करना पड़ा। नेडीन्गी ने अधिकांश दौड़ में खुद को संयमित रखा और अंतिम 200 मीटर में जोरदार स्प्रिंट लगाते हुए 18:24.66 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में महाराष्ट्र के गोविंद पाडेकर (15:11.35 सेकंड) और सूरज माशी (15:11.64 सेकंड) ने बेहतरीन तालमेल के साथ दौड़ते हुए क्रमशः स्वर्ण और रजत पदक जीते। नेडीन्गी ने दौड़ के बाद साई मीडिया से कहा, “मैं अकादमियों पर ध्यान देने के बाद वापसी कर रही हूं और यहां स्वर्ण पदक जीतकर बेहद खुश हूं। अब जब मेरी ग्रेजुएशन पूरी हो गई है, तो मैं नेशनल कैंप में जगह बनाने और आगे चलकर बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय टीम में चयनित होने पर ध्यान देना चाहती हूं।” अरुणाचल प्रदेश की नेडी न्गी के स्वर्ण पदक जीतने से राज्य ने पदक तालिका में अपना तीसरा स्थान मजबूत किया, जहां उसके खाते में अब छह स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक हो गए हैं। अंबिकापुर में कुश्ती से मिले दो स्वर्ण पदकों के साथ कर्नाटक ने तालिका में अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। रोहन डोड्डामनी ने स्विमिंग पूल के बाहर कर्नाटक का पहला स्वर्ण पदक दिलाया, जब उन्होंने 60 किग्रा ग्रीको-रोमन फाइनल में राजस्थान के दिनेश सोलंकी को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराया। इसके बाद मनीषा ने दिन का समापन करते हुए हिमाचल प्रदेश की मुस्कान को कड़े मुकाबले में 12-8 से हराकर कर्नाटक के लिए एक और स्वर्ण पदक जीता। कर्नाटक के अब कुल 17 स्वर्ण, छह रजत और पांच कांस्य पदक हो गए हैं। ओडिशा नौ स्वर्ण, चार रजत और 10 कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है। वहीं, मुलायम खरवार ने पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल फाइनल में राजस्थान के राकेश मीणा को एकतरफा मुकाबले में हराकर बिहार को दिन का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। कर्नाटक के केवी केम्प्पन्नावर ने इस वर्ग में कांस्य पदक जीता। रायपुर के अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में पसंदीदा टीम ओडिशा ने फाइनल में जगह बनाते हुए मिजोरम से मुकाबला तय किया। सेमीफाइनल में ओडिशा ने मध्य प्रदेश को 8-0 से हराया, जबकि मिजोरम ने झारखंड को 3-2 से मात दी। परिणाम एथलेटिक्स महिला 5000 मीटर: स्वर्ण – नेडी न्गी (अरुणाचल प्रदेश) 18:24.66 सेकंड; रजत – आरती दावर (मध्य प्रदेश) 18:29.28 सेकंड; कांस्य – त्सुचोई टी (नागालैंड) 18:35.60 सेकंड पुरुष 5000 मीटर: स्वर्ण – गोविंद पाडेकर (महाराष्ट्र) 15:11.35 सेकंड; रजत – सूरज माशी (महाराष्ट्र) 15:11.64 सेकंड; कांस्य – रंगलाल डोडियार (मध्य प्रदेश) 15:22.48 सेकंड हॉकी (सेमीफाइनल) महिला: मिजोरम ने झारखंड को 3-2 से हराया; ओडिशा ने मध्य प्रदेश को 8-0 से हराया कुश्ती महिला 53 किग्रा: स्वर्ण – नेहा उरांव (झारखंड); रजत – प्रीतीमा खाखलारी (असम); कांस्य – मैनारी खाखलारी (असम), लालवेनहिमी (मिजोरम) 76 किग्रा: स्वर्ण – मनीषा सिद्दी (कर्नाटक); रजत – मुस्कान (हिमाचल प्रदेश); कांस्य – लालहमंगाईहसांगी (मिजोरम) पुरुष 65 किग्रा फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – मुलायम खरवार (बिहार); रजत – राकेश मीणा (राजस्थान); कांस्य – केवी केम्प्पन्नावर (कर्नाटक) 97 किग्रा फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – हमाम हुसैन (जम्मू-कश्मीर); रजत – मोहित कुमार (हिमाचल प्रदेश); कांस्य – मोहम्मद वसीम चौधरी (जम्मू-कश्मीर) 60 किग्रा ग्रीको-रोमन: स्वर्ण – रोहन डोड्डामनी (कर्नाटक); रजत – दिनेश सोलंकी (राजस्थान); कांस्य – जुह पा यू जुह नोंगतडू (मेघालय) 87 किग्रा ग्रीको-रोमन: स्वर्ण – पियूष गुज्जर (हिमाचल प्रदेश); रजत – रियाज हुसैन (जम्मू-कश्मीर); कांस्य – टेक चंद (हिमाचल प्रदेश)

योगी सरकार की पहल को बताया तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम, कहा- डिजिटल सुविधाओं से सशक्त होंगी कार्यकत्रियां

लखनऊ. योगी सरकार में अब आंगनवाड़ी सेवाएं डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनने जा रहीं हैं। आंगनवाड़ी व्यवस्था को और दुरुस्त बनाने के लिए लोकभवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम को दौरान स्मार्टफोन और नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाली लाभार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए खुद को गौरवान्वित महसूस किया। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वावलंबन को भी नई मजबूती प्रदान करती है। नवनियुक्त कार्यकत्रियों ने मुख्यमंत्री की इस पहल को लेकर सराहना करते हुए खुशी जताई।   कार्यक्रम में पहुंचीं नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकत्री अंजली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्मार्टफोन से हमारा काम सुचारु रूप से चल पायेगा, साथ ही अब डाटा संरक्षण में आसानी होगी। तो वहीं नवनियुक्त आशा कार्यकत्री सुभाषिनी ने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री के हाथों से अपना नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ जिसकी मुझे बहुत ख़ुशी है। उन्होंने कहा कि हमारी नियुक्तियां मेरिट आधार पर पूर्ण रूप से पारदर्शी तरीके से हुईं हैं।   नवनियुक्त आशा कार्यकत्री रितिका सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे मुख्यमंत्री से आज जो ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस प्राप्त हुआ है उससे आंगनवाड़ी में बच्चों का वजन अच्छे से नाप पाऊंगी। सुपरवाइजर अरुणा बाजपेयी ने बताया कि  मुझे आज स्मार्टफोन मिला है जिससे मैं अपना विभागीय कार्य को और बेहतर तरीके से कर पाऊंगी।  लाभार्थियों ने कहा कि डिजिटल आंगनवाड़ी की यह पहल न केवल कार्यकत्रियों को सशक्त बनाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की नींव भी रखेगी। यह कार्यक्रम केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश में बदलती व्यवस्था, पारदर्शी शासन और तकनीक के माध्यम से सशक्त समाज की दिशा में एक बड़ा संदेश बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री की इस पहल से प्रदेश की आंगनवाड़ी सेवाएं अब डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनेंगी। योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

इस साल आंगनवाड़ी में 5 हजार कार्यकत्रियों व 60 हजार सहायिकाओं की भर्ती का लक्ष्य: सीएम योगी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में आयोजित आंगनवाड़ी परियोजनाओं के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम में कहा कि इस वर्ष 5,000 से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और 60,000 से अधिक सहायिकाओं की नियुक्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनकी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही 6 वर्ष से छोटे बच्चों की देखभाल करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने के लिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) का लाभ उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, आयुष्मान भारत योजना के तहत 3 लाख से अधिक कार्यकत्रियों व सहायिकाओं को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की व्यवस्थाओं पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा, पहले प्रदेश में पोषाहार वितरण पर शराब माफिया का नियंत्रण था। कुपोषित बच्चों व माताओं के हक पर डकैती डाली जाती थी। वर्तमान सरकार ने इस माफिया तंत्र को समाप्त कर पारदर्शी व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत अब आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को बिना सिफारिश नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं, साथ ही स्मार्टफोन और आधुनिक ग्रोथ मॉनिटरिंग उपकरण उपलब्ध कराकर पोषण एवं बाल विकास कार्यक्रमों को डिजिटल और प्रभावी बनाया जा रहा है। सीएम योगी ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के पास स्मार्टफोन न होने से उनके काम का रियल टाइम डाटा नहीं मिल पाता था। डाटा अपलोड ना होने की वजह से हमारी रैंकिंग कम रहती है। लखनऊ की तरह स्मार्टफोन वितरण का कार्यक्रम सभी जनपदों में होना है। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका और बड़ी होने वाली है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 3 से 5 वर्ष के बच्चों के लिए भी आंगनवाड़ी केंद्र में ही प्री-प्राइमरी स्कूल का संचालन होना है। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में बेसिक शिक्षा के तहत चलने वाले 27,000 केंद्र भी आंगनवाड़ी को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। एक बच्चे को छह वर्ष की उम्र तक विकसित करने में आंगनवाड़ी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री व सहायिका को यशोदा मैया की उपाधि दी है। यशोदा मैया ने जिस भूमिका का निर्वहन कृष्ण कन्हैया के लिए किया था, वही भूमिका आज के परिप्रेक्ष्य में आपकी है। यह अपने आप में बहुत बड़ा सम्मान है। उस सम्मान की गरिमा की रक्षा करना, उसके अनुरूप देश के भविष्य को गढ़ना, उसको तराशना, आगे बढ़ाना, उसकी नींव को मजबूत करना यह महती जिम्मेदारी आपके ऊपर है। कुपोषण रूपी दुश्मन से लड़ाई में सारथी हैं आप सीएम ने कहा कि अगर नवजात सुपोषित और मां स्वस्थ है, तो भारत का भविष्य सशक्त है। इसी के लिए पिछले 9 वर्ष में डबल इंजन सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। इन तमाम प्रयासों में और बीमारी या कुपोषण रूपी दुश्मन से लड़ाई में आप सभी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां व सहायिकाएं सारथी की भूमिका में रही हैं। इसीलिए सफल परिणाम हमारे सामने हैं।  450 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास मुख्यमंत्री ने कहा कि 137 करोड़ की लागत से आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण होना है। बाल विकास परियोजना के कार्यालय भवनों का शिलान्यास भी किया गया है। 313 करोड़ की लागत से प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों और बाल विकास कार्यालयों का निर्माण हो चुका है, उसका भी आज एक साथ यहीं से उद्घाटन संपन्न हुआ है। यह अभियान सुपोषित-साक्षर-सशक्त भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों, आशा व एएनएम ने महामारी से बचाया सीएम योगी ने कहा कि विपत्ति के समय में भी मैंने आंगनवाड़ी, आशा बहनों और एएनएम द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों को नजदीक से देखा है। कोरोना कालखंड में फ्रंटलाइन के रूप में हमारी ये कार्यकत्रियां स्वयं को बचाते हुए दूसरों को भी सुरक्षित रखने का कार्य कर रही थीं। पीएम मोदी की कोरोना प्रबंधन योजना को धरातल पर उतारते हुए ये कार्यकत्रियां स्क्रीनिंग के साथ-साथ आवश्यक सुविधाएं प्रत्येक घर तक पहुंचा रही थीं। परिणाम यह रहा कि इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य में कोविड का उत्कृष्ट प्रबंधन संभव हुआ और हमने अधिक से अधिक लोगों की जान बचाने में सफलता पाई। 1 करोड़ 70 लाख से अधिक बच्चों को स्वास्थ्य स्क्रीनिंग से जोड़ा मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में संभव अभियान के तहत हमने 1 करोड़ 70 लाख से अधिक बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण व स्क्रीनिंग से जोड़ा। डेढ़ लाख बच्चे कुपोषित पाए गए, इनमें 80 प्रतिशत बच्चे कुपोषण से मुक्त किए जा चुके हैं। बौनापन की दर 48% से घटकर 37% हो गई है। यदि यह डाटा मोबाइल फोन के माध्यम से समय पर अपलोड होता रहेगा, तो राष्ट्रीय रैंकिंग में उत्तर प्रदेश की स्थिति और बेहतर होगी। फेस रिकग्निशन सिस्टम के माध्यम से प्रतिमाह 1 करोड़ 56 लाख लाभार्थियों को अनुपूरक पोषाहार वितरित कराया जा रहा है। ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य उत्तर प्रदेश है। कुपोषित माताओं के पोषाहार पर काबिज था शराब माफिया मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आज 35 लाख बच्चों को प्रतिदिन प्रोटीन-युक्त, कैलोरी-संतुलित गर्म पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का कार्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ा है। क्या यह 2017 से पहले संभव था?  नहीं, क्योंकि 2017 से पहले पोषाहार का वितरण कौन करता था?  उत्तर भारत का सबसे बड़ा शराब माफिया जिसे सरकार ने पैसा लेकर ठेका दे रखा था, वही इसका वितरण तय करता था। मैं भौंचक था, जब 2017 में हमारी सरकार बनी, तो मुझे इस बात की जानकारी मिली कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा शराब माफिया महिला एवं बाल विकास विभाग में भी घुसा हुआ था। सभी काम शराब माफिया ही करता था। राशन भी वही तय करता था। कहीं पहुंचता था, कहीं नहीं। गुणवत्ता इतनी खराब होती थी कि कोई खाने योग्य स्थिति में नहीं होता था। यही कारण था कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य के रूप में जाना जाता था। बचपन ही कुपोषित हो जाए, तो राज्य को बीमारू होना ही था। यह पाप कौन करता था? ये वही लोग हैं जो जाति के नाम पर समाज को बांटकर समाज की सुरक्षा में सेंध लगाते हैं और कुपोषित बच्चों व माताओं के पोषाहार पर डकैती डालते थे। ये वही लोग हैं जो आज नारेबाजी करके अव्यवस्था पैदा करते हैं। 2017 से … Read more

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: कुश्ती स्पर्धा के तीसरे दिन भी जारी रहा मुकाबले का रोमांच

रायपुर.  खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत सरगुजा जिले के अम्बिकापुर में आयोजित कुश्ती स्पर्धा के तीसरे दिन भी मुकाबले का रोमांच जारी रहा। खिलाड़ियों ने एक से बढ़कर एक दांवपेंच लगाकर जीत के लिए जोर लगाया। इस दौरान विजेता प्रतिभागियों को पदक प्रदान किया गया। कड़े मुकाबले के बीच विजेता पदक प्राप्त करने वालों में आज महिला सीनियर 53 किलोग्राम में झारखंड की नेहा ओराँव ने गोल्ड, असम की प्रतिमा खाखलरी ने सिलवर, असम की मैनारी खाखलरी एवं मिज़ोरम की लालवेनहीमी ने कांस्य पदक जीता। महिला सीनियर 76 किलोग्राम भारवर्ग में कर्नाटक की मनीषा जुवाव सिद्दी ने गोल्ड, हिमाचल प्रदेश की मुस्कान ने सिल्वर, मिजोरम की लालहमंगहिसँगी ने कांस्य पदक जीता।   इसी प्रकार पुरुष वर्ग में ग्रीको रोमन सीनियर 60 किलोग्राम भारवर्ग में कर्नाटक के रोहन एम दोद्दामनी  को गोल्ड, राजस्थान के दिनेश सोलंकी को सिल्वर, मेघालय के झु पा यू झु नोंगतडु ने कांस्य पदक अपने नाम किया। फ्रीस्टाइल 97 किलोग्राम भारवर्ग में जम्मू कश्मीर के हमाम हुसैन ने गोल्ड, हिमाचल प्रदेश के मोहित कुमार ने सिल्वर, जम्मू कश्मीर के मोहम्मद वसीम चौधरी ने कांस्य पदक जीता। ग्रीको रोमन सीनियर में 87 किलोग्राम भारवर्ग में हिमाचल प्रदेश के पीयूष गुज्जर को गोल्ड,जम्मू कश्मीर के रियाज़ हुसैन को सिल्वर एवं हिमाचल प्रदेश के टेकचंद ने कांस्य पदक जीता। फ्रीस्टाइल सीनियर में 65 किलोग्राम भारवर्ग में बिहार के मुलायम खरवार को गोल्ड, राजस्थान के राकेश कुमार मीना को सिल्वर एवं कर्नाटक के कैम्पानगौड़ा वी केम्प्पणवार ने कांस्य पदक जीता।

अग्रवाल महासभा की सक्रिय महिला प्रदेश अध्यक्ष ने पद से दिया इस्तीफा

भोपाल.  मध्य प्रदेश अग्रवाल महिला महासभा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रश्मि अग्रवाल ने आज अपने पद से स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया है। यह निर्णय उन्होंने संगठन की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता एवं नियमावली के अनुपालन को लेकर लंबे समय से उत्पन्न हो रही गंभीर चिंताओं के मद्देनज़र लिया है। डॉ. अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि विगत एक वर्ष के दौरान उन्हें महासभा से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण जानकारियाँ अन्य सदस्यों के माध्यम से प्राप्त हुईं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि संगठन में कई नियुक्तियाँ नियमावली के विरुद्ध की जा रही हैं। साथ ही, समय-समय पर आवश्यक बैठकों का एवं वार्षिक साधारण सभा आयोजन न होना एवं पदाधिकारियों को संगठन की आर्थिक गतिविधियों की जानकारी न दिया जाना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश अग्रवाल महासभा द्वारा वर्ष 2013-14 के पश्चात रजिस्टर फॉर्ब और समिति कार्यालय भोपाल मध्य प्रदेश में धारा 27, 28 एवं 29 से संबंधित आवश्यक अभिलेख एवं सदस्यता सूची प्रस्तुत नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2022 एवं 2025 में संपन्न हुए चुनावों की भी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि नियमानुसार यदि कोई संस्था तीन वर्षों तक धारा 27, 28 एवं 29 के अंतर्गत आवश्यक विवरण प्रस्तुत नहीं करती, तो उसे स्वतः निष्क्रिय माना जाता है। इन तथ्यों से वे गहरे रूप से आहत हुई हैं तथा उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची है। इन्हीं परिस्थितियों से व्यथित होकर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। उनके साथ लगभग 50 पदाधिकारियों ने भी स्वेच्छा से अपने पदों से त्यागपत्र प्रस्तुत किया है। डॉ. अग्रवाल ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में संगठन पारदर्शिता, नियमों के पालन एवं सदस्यों के विश्वास को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करेगा।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026: खेल के साथ पर्यटन का संगम, छत्तीसगढ़ की मेहमाननवाज़ी ने जीता दिल

रायपुर. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के रंग में इस समय पूरा छत्तीसगढ़ सराबोर नजर आ रहा है। खेल प्रतियोगिताओं के साथ-साथ राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य भी देशभर से आए खिलाड़ियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। अंडमान-निकोबार से आए वेटलिफ्टिंग के खिलाड़ियों के लिए सिरपुर और बारनवापारा के भ्रमण ने उनकी छत्तीसगढ़ की यात्रा को और यादगार बना दिया। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने आज खिलाड़ियों को ऐतिहासिक नगरी सिरपुर का भ्रमण कराया, जहां उन्होंने प्राचीन मंदिरों, बौद्ध विहारों और पुरातात्विक धरोहरों के माध्यम से राज्य के गौरवशाली इतिहास को करीब से जाना। सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत ने खिलाड़ियों को खासा प्रभावित किया और उन्होंने इसकी समृद्ध संस्कृति की सराहना की। बारनवापारा अभयारण्य के भ्रमण और प्रकृति की सुरम्य वादियों ने सभी खिलाड़ियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। घने जंगल, शांत वातावरण और हरियाली से भरपूर इस क्षेत्र में खिलाड़ियों ने सुकून के पल बिताए। बारनवापारा स्थित छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के हरेली इको रिसोर्ट में उन्होंने स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजनों का भी आनंद लिया।  अंडमान-निकोबार के खिलाड़ियों की इस रोमांचक यात्रा का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा बाँबू राफ्टिंग, जिसमें खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्राकृतिक जलधाराओं के बीच रोमांच का अनुभव किया। यह गतिविधि उनके लिए न केवल मनोरंजक रही, बल्कि टीम भावना को भी और मजबूत करने वाली साबित हुई।  छत्तीसगढ़ की आत्मीयता और मेहमाननवाज़ी ने सभी खिलाड़ियों का दिल जीत लिया। अंडमान-निकोबार से आए खिलाड़ियों ने राज्य सरकार एवं छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अनुभव उनके जीवन की अविस्मरणीय स्मृतियों में शामिल रहेगा। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन स्थलों और आतिथ्य की उत्कृष्टता को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रहा है। यह आयोजन राज्य की बहुआयामी सकारात्मक छवि को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

मेदिनीनगर और गिरिडीह में निकली भव्य शोभायात्रा जैन समाज ने दिया जियो और जीने दो का संदेश

पलामू झारखंड के पलामू जिले के मेदिनीनगर और गिरीडीह जिले में जैन समाज ने 24वें तीर्थकंर भगवान महावीर की जयंती को हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया. महावीर जयंती के मौके पर मेदिनीनगर और गिरिडीह में जैन समाज द्वारा शोभा यात्राएं निकाली गईं. शोभायात्रा में जैन समाज के महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए. मेदिनीनगर में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई महावीर जयंती मेदिनीनगर में भगवान महावीर ने अनुयायियों ने सुबह में जैन मंदिर में विधि विधान से पूजा अर्चना किया. सजे हुए रथ पर भगवान महावीर को विराजमान किया गया. इसके बाद बाजे गाजे के साथ शोभायात्रा शुरू हुआ. मुख्य अतिथि नगर निगम की मेयर अरुणा शंकर ने भगवान महावीर की पूजा आरती करने के बाद शोभा यात्रा रवाना किया. मेयर ने भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपनाने की जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि उनके बताए रास्ते पर चलने से ही समाज में बेहतर वातावरण तैयार होगा और मानव जीवन का कल्याण होगा. शोभायात्रा जैन मंदिर से निकलकर शहर थाना रोड, गीता भवन, शहीद भगत सिंह चौक, सतार सेठ चौक सहित और निर्धारित रास्तों से होते हुए वापस हुआ. शोभायात्रा के पूरे होने के बाद भगवान महावीर की पूजा आरती की गई. शोभायात्रा के दौरान अनुयायियों ने भगवान महावीर के सिद्धांतों और संदेशों को बताया. कार्यक्रम में वार्ड पार्षद रौशन कुमार, जैन समाज के सरस जैन, सुभाष जैन, मनोज पहाड़िया, सुभाष चंद्र जैन, रोहित जैन सहित काफी संख्या में अनुयायी शामिल रहे. गिरिडीह में गाजे-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा गिरिडीह में भी महावीर जयंती के अवसर पर जैन समाज के लोगों ने शोभायात्रा निकाली. बड़ा चौक स्थित दिगंबर जैन मंदिर से शोभायात्रा की शुरुआत हुई. गाजे-बाजे के साथ भगवान महावरी को पालकी पर बैठाकर शोभा यात्रा निकाली. यह शोभा यात्रा शहर के टुंडी रोड, गद्दी मोहल्ला होते हुए वापस जैन मंदिर में समाप्त हुई. शोभा यात्रा के दौरान भगवान महावीर के जयकारे से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा. शोभा यात्रा के दौरान जैन समाज के लोगों ने कहा कि भगवान महावीर ने पृथ्वी पर सभी मनुष्यों को जियो और जीने दो का उपदेश दिया है. उन्होनें कहा कि विश्व कल्याण के लिए 24वें तीर्थकंर भगवान महावीर ने जन्म लिया था. महावीर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने में विजय सेठी अध्यक्ष ,अशोक पांड्या,अजय सेठी, अजय जैन, धीरज जैन, राजन जैन, राकेश जैन, सरोज सेठी, हेमलता सेठी और अन्य ने भूमिका निभाई.

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स: संघर्षों की भट्ठी में तपकर सोना बने झारखंड के अंजित मुंडा, कुश्ती में जीता गोल्ड मेडल

रायपुर.  कहते हैं कि यदि इरादे फौलादी हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। झारखंड के रामगढ़ जिले के एक छोटे से गाँव सुगिया के रहने वाले युवा पहलवान अंजित कुमार मुंडा ने इस बात को सच कर दिखाया है। अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में आयोजित 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' के दौरान अंजित ने 67 किलोग्राम भार वर्ग की कुश्ती स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। संघर्ष से सफलता तक का सफर मात्र 20 वर्ष की आयु में सफलता के शिखर को छूने वाले अंजित का जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। वर्ष 2009 में पिता के साये के उठ जाने के बाद, उनकी माता ने खेती-बारी और कठिन परिश्रम के बल पर परिवार को संभाला। अंजित ने वर्ष 2017-18 में कुश्ती की शुरुआत की और जेएसएसपीएस स्पोर्ट्स अकादमी में लगभग 6 वर्षों तक कड़ा अभ्यास किया। उनकी शारीरिक क्षमता और तकनीक को देखते हुए प्रशिक्षकों ने उन्हें कुश्ती के लिए तराशा। भारतीय सेना में 'अग्निवीर' के रूप में दे रहे हैं सेवाएं अंजित की खेल प्रतिभा और देश सेवा के जज्बे ने उन्हें भारतीय सेना तक पहुँचाया। पिछले वर्ष ही उनका चयन 'अग्निवीर जीडी' के पद पर हुआ है। अपनी इस सफलता का श्रेय वे अपने कोच को देते हैं। जनजातीय प्रतिभाओं के लिए बड़ा मंच अपनी जीत पर खुशी जाहिर करते हुए अंजित मुंडा ने कहा, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स हम जैसे जनजातीय बच्चों के लिए एक उत्कृष्ट मंच है, जो अक्सर मुख्यधारा से पीछे छूट जाते हैं। पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता में गोल्ड जीतना मेरे लिए गर्व की बात है। अब मेरा अगला लक्ष्य छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाली आगामी प्रतियोगिताओं में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।" उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद पूर्व में कांस्य पदक जीतने के कारण छात्रवृत्ति से वंचित रहे अंजित को अब स्वर्ण पदक जीतने के बाद केंद्र सरकार से सहयोग और स्कॉलरशिप मिलने की पूरी उम्मीद है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें। अम्बिकापुर में चल रहे खेलों इंडिया ट्राइबल गेम्स में अंजित की यह उपलब्धि न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के जनजातीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।

योगी सरकार फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों को बनाएगी धुरंधर

लखनऊ.  योगी सरकार उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) के विद्यार्थियों को फॉरेंसिक की फील्ड में धुरंधर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके लिए योगी सरकार फॉरेंसिक की दिग्गज यूनिवर्सिटी से एमओयू साइन करने जा रही है। यह एमओयू यूपीएसआईएफएस और चार विभिन्न संस्थानों के बीच होगा। इसमें महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखपुर, धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी गांधीनगर, उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) शामिल हैं। इन संस्थानों के साथ सहयोग से यूपीएसआईएफएस के छात्रों को इंटर्नशिप, रिसर्च और प्रैक्टिकल एक्सपोजर के व्यापक अवसर मिलेंगे। इससे जहां एक ओर छात्रों को व्यावहारिक और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में फॉरेंसिक विशेषज्ञ के रूप में तैयार करना है। केजीएमयू में विद्यार्थी मौत की परिस्थितियों और वैज्ञानिक तरीके से हुए विश्लेषण का करेंगे अध्ययन यूपीएसआईएफएस के डायरेक्टर जीके गोस्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फॉरेंसिक साइंस के छात्रों को ‘जॉब रेडी’ बनाना चाहते हैं। अब तक फॉरेंसिक शिक्षा में थ्योरी का दबदबा ज्यादा था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल पर विशेष फोकस है। इसी के तहत सीएम योगी के निर्देश पर यूपीएसआईएफएस चार विभिन्न संस्थानों महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखपुर, धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी गांधीनगर, उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमओयू करने जा रहा है। इन एमओयू के जरिए छात्रों को केस स्टडी, पोस्टमार्टम प्रक्रिया, मेडिकल-लीगल पहलुओं और अपराध अनुसंधान के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का मौका मिलेगा। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ होने वाले समझौते के तहत यूपीएसआईएफएस के छात्र फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग में पोस्टमार्टम की बारीकियों को करीब से समझ सकेंगे। इसमें पंचनामा से लेकर पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया का अध्ययन शामिल होगा। इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी घटना में मौत किन परिस्थितियों में हुई और वैज्ञानिक तरीके से उसका विश्लेषण कैसे किया जाता है। अपराध के पीछे सामाजिक व मनोवैज्ञानिक कारणों को जेल जाकर समझेंगे छात्र यूपीएसआईएफएस के डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी ने बताया कि उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं के साथ एमओयू से छात्रों को जेलों में जाकर बंदियों के केस स्टडी करने का मौका मिलेगा। छात्र यह जान सकेंगे कि बंदियों के मामलों में जमानत कैसे होती है, जेल का वातावरण कैसा होता है और अपराध के पीछे सामाजिक व मनोवैज्ञानिक कारण क्या होते हैं। यह अनुभव उन्हें अपराध की जड़ों को समझने में मदद करेगा, जो एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर के साथ एमओयू से दोनों संस्थानों के छात्रों को इंटरशिप के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही दोनों संस्थानों के फैकल्टी मेंबर दोनों संस्थानों में अपने लेक्चर दे सकेंगे। वहीं आगे चलकर, दोनों संस्थान मिलकर फॉरेंसिक साइंस की एक ज्वाइंट लैब भी स्थापित करेंगे। इस लैब में अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए अनुसंधान और परीक्षण किए जाएंगे। इससे न केवल छात्रों को नई तकनीकों का ज्ञान मिलेगा, बल्कि राज्य में फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होगा।  फैकल्टी मेंबर एक दूसरे के संस्थानों में देंगे लेक्चर धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी, गांधीनगर के साथ एमओयू से दोनों संस्थानों के बीच छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जाएंगे। यूपीएसआईएफएस के छात्र वहां जाकर इंटर्नशिप कर सकेंगे, जबकि धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी के छात्र लखनऊ आकर फॉरेंसिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इससे राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान होगा। इस पहल की एक खास बात यह भी है कि केवल छात्र ही नहीं, बल्कि फैकल्टी मेंबर्स भी एक-दूसरे के संस्थानों में जाकर लेक्चर दे सकेंगे। इससे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को विविध विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। यह पहल डिजिटल क्राइम, साइबर फ्रॉड और जटिल आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक जांच ही सटीक निष्कर्ष तक पहुंचने का सबसे विश्वसनीय माध्यम होगा।