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नशे के खिलाफ राजस्थान का बड़ा रोडमैप तैयार, तस्करी नेटवर्क तोड़ने पर जोर

जयपुर  मुख्य सचिव  वी. निवास की अध्यक्षता में शुक्रवार को शासन सचिवालय में प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं दुरुपयोग की रोकथाम के लिए तैयार किए गए ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29’ के संबंध में बैठक आयोजित हुई। बैठक में विजन के तहत निर्धारित लक्ष्यों, राज्य के रोडमैप तथा विभिन्न विभागों एवं केंद्रीय एजेंसियों के मध्य समन्वय की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्रीय विजन के अनुरूप प्रदेश में प्रशासनिक एवं विभागीय समन्वय के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने इस विजन के चार प्रमुख स्तंभों—प्रवर्तन (Enforcement), पूर्ववर्ती रसायन एवं सिंथेटिक ड्रग्स पर रोक, मांग एवं हानि न्यूनीकरण तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय के तहत निर्धारित लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए  मुख्य सचिव ने विजन के तहत प्रवर्तन के क्षेत्र में आसूचना आधारित कार्रवाई को सुदृढ़ करने, तस्करी नेटवर्क का पूर्ण विघटन करने तथा अंतरराष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय मार्गों को सुरक्षित बनाने के संबंध चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। इसी प्रकार पूर्ववर्ती रसायनों (Precursor Chemicals) का कड़ा विनियमन सुनिश्चित करते हुए सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण पर प्रभावी रोक लगाने के संबंध में भी निर्देश दिए। उन्होंने मांग एवं हानि न्यूनीकरण के अंतर्गत नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता, उपचार, परामर्श एवं पुनर्वास सेवाओं के विस्तार तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय के तहत एनसीबी की जनशक्ति, अत्याधुनिक अवसंरचना और विभिन्न एजेंसियों के मध्य बेहतर तालमेल को मजबूत करने पर भी चर्चा की। मुख्य सचिव ने प्रदेश के संवेदनशील जिलों पर विशेष फोकस करते हुए नशा मुक्ति शिविर आयोजन की जानकारी ली, साथ ही हॉटस्पॉट जिलों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत के निर्देश दिए। सीमावर्ती एवं अफीम खेती वाले जिलों में मादक पदार्थ सेवन के विरुद्ध बहु-माध्यम जन-जागरूकता अभियान चलाकर समुचित प्रचार प्रसार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। मुख्य सचिव ने राज्य रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के मध्य निरंतर समन्वय बनाए रखने तथा निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समन्वित प्रयासों एवं प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के साथ ही युवाओं के लिए सुरक्षित, स्वस्थ एवं नशा मुक्त वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक  राजीव कुमार शर्मा, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  भास्कर ए. सावंत, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एटीएस, एजीटीएफ  दिनेश एम.एन., गृह विभाग से संयुक्त सचिव मती अंजलि राजोरिया, उप सचिव मती सोविला माथुर  सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अंत्योदय और एकात्म मानववाद का दर्शन समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अंत्योदय और एकात्म मानववाद का दर्शन समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर किया नमन लालघाटी स्थित श्रद्धेय दीनदयाल जी की प्रतिमा पर की पुष्पांजलि अर्पित भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय जन संघ के संस्थापक श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर लालघाटी स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री गडकरी के साथ "एक पेड़ मां के नाम'' के अंतर्गत आम का पौधा रोपा। इस अवसर पर प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास सांरग, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी तथा बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने अपने संदेश में कहा कि हमारे प्रेरणा स्रोत श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का अंत्योदय और एकात्म मानववाद का दर्शन आज भी समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। दीनदयाल जी के राष्ट्र सेवा और जनकल्याण के विचारों से प्रेरणा लेते हुए हम समावेशी विकास के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।  

सिद्ध बाबा सोढल मेले में लाखों श्रद्धालु पहुंचे, राज्यपाल ने टेका माथा

जालंधर. पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया सिद्ध बाबा सोढल मंदिर में नतमस्तक होने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गुरुद्वारा सोढल छावनी निहंग सिंघा में भी माथा टेका और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। दर्शन के बाद उन्होंने कहा कि श्री सिद्ध बाबा सोढल के साथ देश और दुनिया भर के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और भावनात्मक जुड़ाव है। यही वजह है कि हर साल लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचकर नतमस्तक होते हैं। इस अवसर पर उनके साथ सोढल सुधार सभा के अध्यक्ष पंकज चड्ढा, पूर्व विधायक केडी भंडारी, गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पायलट और शिरोमणि अकाली दल के महासचिव मनिंदर पाल सिंह गुंबर समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अनंत चौदस के अवसर पर शुरू हुए इस प्रसिद्ध मेले को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के दो किलोमीटर के दायरे में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पूरे क्षेत्र में चार सौ से अधिक स्थानों पर विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों के लंगर लगाए गए हैं। सड़क किनारे सजी दुकानों पर देर रात तक खरीदारी का दौर जारी है। मेला प्रबंधकों के अनुसार, मुख्य दिन लगभग डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के नतमस्तक होने का अनुमान है, जबकि दो दिन पहले से ही बड़ी संख्या में भक्त पहुंचना शुरू हो गए थे। अनंत चौदस के दिन श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक रस्में पूरी करेंगे, जिसमें खेतड़ी अर्पित करना और मंदिर में चौदह रोट का प्रसाद चढ़ाना शामिल है। मेले में सुरक्षा व सुविधाएं – मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रांगण में सोढल मंदिर ट्रस्ट की ओर से एक विशेष काउंटर बनाया गया है, जहां से तमाम गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा, मंदिर के मुख्य द्वार के सामने पुलिस कंट्रोल रूम, स्वास्थ्य विभाग का फ्री मेडिकल कैंप और नगर निगम का कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। सुरक्षा और सावधानी के मुख्य निर्देश: – बच्चों का हाथ मजबूती से पकड़कर रखें और उनकी जेब में घर का पता व फोन नंबर की पर्ची जरूर रखें। कीमती सामान और महंगे गहने पहनकर मेले में जाने से बचें तथा जेबकतरों से सावधान रहें। झूलों का आनंद लेने से पहले उनकी सुरक्षा और बिजली की तारों की व्यवस्था की जांच कर लें। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करें और किसी भी आपात स्थिति में पुलिस या मेडिकल कैंप से संपर्क करें।

10 ठिकानों पर छापेमारी, मानव तस्करी केस में 1.48 करोड़ कैश बरामद

महासमुंद. छत्तीसगढ़ की महासमुंद पुलिस ने मानव तस्करी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। यह सिंडिकेट छत्तीसगढ़ और पड़ोसी ओडिशा समेत अन्य राज्यों में सक्रिय था। पुलिस टीम ने नेटवर्क से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर करीब 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नगद बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत एक नाबालिग से जुड़े प्रकरण की जांच से हुई। 21 सितंबर को अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर जांच शुरू की गई, जिसमें नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। प्रारंभिक जांच में पुलिस को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े संगठित नेटवर्क के सुराग मिले। लुभावने वादे कर मजदूरों को ले जाने का आरोप पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और मजदूरों को एडवांस रकम देकर अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों और अन्य स्थानों पर मजदूरी के लिए भेजा जाता था। पुलिस ने दावा किया है कि कुछ मामलों में डर, दबाव और धमकी का इस्तेमाल भी किया गया। जांच में मिले दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह से जुड़े लोगों से बड़ी संख्या में मजदूरों को अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था। पुलिस के मुताबिक प्रत्येक आरोपी के नेटवर्क में हजारों मजदूरों के रिकॉर्ड मिले हैं और इनमें बंधुआ मजदूरी के भी दस्तावेजी साक्ष्य मिले हैं। मोबाइल, बैंक दस्तावेज और रजिस्टर जब्त छापेमारी के दौरान पुलिस ने मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन समेत कई महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है। पुलिस इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। पांच मुख्य आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने इस मामले में मुकेश चंद्राकर, लता सवर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक मुकेश चंद्राकर को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि मजदूरों को एडवांस रकम देकर दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। पुलिस ने आरोप लगाया है कि मजदूरों से कठिन परिस्थितियों में काम कराया जाता था और उनकी आवाजाही पर भी नियंत्रण रखा जाता था। नाबालिगों और महिलाओं की तस्करी की भी जांच पुलिस का कहना है कि गिरोह पर मानव तस्करी, नाबालिगों की तस्करी, बाल मजदूरी और महिलाओं एवं नाबालिग बालिकाओं के शोषण से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। बरामद मोबाइल और बैंक खातों की जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है। BNS की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज – इस मामले में थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने BNS की धारा 143(2), 143(3), 143(4), 3(5) तथा संगठित अपराध से संबंधित धारा 111 के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जब्त सामग्री – 1,48,54,750 नकद मजदूर पलायन से संबंधित रजिस्टर और डायरी कई मोबाइल फोन बैंक पासबुक और चेकबुक एटीएम कार्ड मॉर्गेज संबंधी दस्तावेज नोट गिनने की मशीन पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और अलग-अलग राज्यों में कितने मजदूरों को इसके जरिए भेजा गया।

शहपुरा रेलवे ब्रिज बनने तक टोल फ्री, वाहनों से नहीं होगी वसूली

जबलपुर जबलपुर-भोपाल रोड पर शहपुरा रेलवे ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के बाद डायवर्ट किए गए यातायात को देखते हुए शहपुरा टोल नाका अब एक-दो दिन में बंद किया जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जब तक शहपुरा का पुल दोबारा बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक टोल कलेक्शन बंद रहेगा। इससे डायवर्ट रूट से गुजरने वाले वाहन चालकों को टोल शुल्क नहीं देना होगा। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि शहपुरा रेलवे ब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात को वैकल्पिक मार्ग से निकाला जा रहा है। ऐसे में टोल वसूली को लेकर लोगों में नाराजगी थी। उन्होंने कहा कि अब टोल बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है और एक-दो दिन में वसूली बंद हो जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्री ने इसको लेकर फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।   पहले दिए थे निर्देश, फिर भी जारी थी वसूली इससे पहले भी लोक निर्माण मंत्री ने शहपुरा टोल को अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद टोल नाके पर वाहनों से शुल्क वसूली जारी रहने का मामला सामने आया था। स्थानीय लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था और पुलिस से भी शिकायत की थी। उस समय टोल नाके के मैनेजर ने कहा था कि उन्हें टोल बंद करने का लिखित आदेश नहीं मिला है। लिखित निर्देश मिलने के बाद वसूली बंद करने की बात कही गई थी। अब मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पुल बनने तक टोल बंद रहेगा।  लोकपथ एप पर बसों की टाइमिंग भी मिलेगी राकेश सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलने वाली बसों की समय सारणी भी आने वाले समय में लोकपथ एप पर उपलब्ध कराई जाएगी। यात्री एप पर देख सकेंगे कि कौन सी बस किस समय और किस स्थान से चलेगी और उसे कहां से लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अभी लोकपथ एप पर सड़क और मार्ग की जानकारी के साथ पर्यटन स्थल, टोल नाके, अस्पताल और पुलिस थानों की जानकारी उपलब्ध है। बसों की टाइमिंग जुड़ने के बाद यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेगी। 

धान खरीदी की तैयारियां तेज, खाद्य मंत्री बघेल ने दिए समय पर व्यवस्था पूरी करने के निर्देश

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी व्यवस्था समय पर हो पूरा: खाद्य मंत्री बघेल मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग की तैयारियों की हुई विस्तृत समीक्षा किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र, सभी केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर  3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था कर रहा विपणन संघ अब तक 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त, शेष बारदानों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने में तेजी लाने के निर्देश रायपुर,  आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल की अध्यक्षता में गुरूवार 24 सितंबर को आयोजित मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक में धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग से जुड़ी तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में किसानों की सुविधा, धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था, जूट बारदानों की उपलब्धता तथा कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की प्रगति पर की गई। बैठक में कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शामिल हुए। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूरी कर ली जाएं, ताकि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। 360 नए धान खरीदी केंद्रों से किसानों को मिलेगी सुविधा बैठक में बताया गया कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 360 नवीन धान खरीदी केंद्र खोले गए हैं। इन नए केंद्रों में धान खरीदी से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने नवीन खरीदी केंद्रों में धान उपार्जन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी जरूरी संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप समिति ने कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया किसान-केंद्रित हो तथा खरीदी केंद्रों पर किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था धान उपार्जन के लिए बारदानों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए मंत्रिमंडलीय उप समिति ने आवश्यक नए एवं पुराने जूट बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि विपणन संघ द्वारा जूट कमिश्नर, कोलकाता के माध्यम से 3.64 लाख गठान नए जूट बारदानों की व्यवस्था की जा रही है। अब तक विपणन संघ को 1.14 लाख गठान नए जूट बारदाने प्राप्त हो चुके हैं। उप समिति ने शेष आवश्यक बारदानों की उपलब्धता भी समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि धान खरीदी के दौरान बारदानों की कमी के कारण उपार्जन व्यवस्था प्रभावित न हो। कस्टम मिलिंग के चावल जमा करने की गति बढ़ाने के निर्देश बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत कस्टम मिलिंग की स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कस्टम मिलिंग के अंतर्गत कुल 89 लाख टन चावल जमा करने का लक्ष्य है। इसमें से अब तक 37.50 लाख टन चावल जमा किया जा चुका है, जबकि मिलरों द्वारा 51.50 लाख टन चावल जमा किया जाना शेष है। कस्टम मिलिंग का चावल जमा करने के लिए 31 मार्च 2027 तक की समय-सीमा निर्धारित है। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने शेष चावल की मात्रा को देखते हुए कस्टम मिलिंग एवं चावल जमा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों से इसकी नियमित समीक्षा करने तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर चावल जमा कराना सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के प्रबंध संचालक जितेन्द्र शुक्ला, नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक विलास भोसकर, वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार एवं सहकारी संस्थाओं के पंजीयक रमेश कुमार शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत पर सोलर प्लांट लगने से घर में आई खुशियों की रोशनी

छत पर सोलर प्लांट लगने से घर में आई खुशियों की रोशनी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की सोच से बदली त्रिलोक मिश्रा के घर की तस्वीर  पीएम सूर्यघर योजना का दिख रहा जमीनी असर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग रायपुर,  कभी हर महीने आने वाला 3 से 3.5 हजार रुपये का बिजली बिल घरेलू बजट पर बोझ बनता था। बिजली की खपत बढ़ने पर बिल बढ़ने की चिंता रहती थी। आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के गुरुकुल परिसर पेंड्रारोड निवासी त्रिलोक मिश्रा के घर की छत ही बिजली उत्पादन का माध्यम बन गई है। 3 किलोवाट का सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर में केवल बिजली की बचत नहीं हुई, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक नई शुरुआत हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ त्रिलोक मिश्रा को भी मिला है। योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली, जो सीधे उनके बैंक खाते में जमा हुई। मिश्रा इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और उपभोक्ता हितैषी बताते हैं। छत बनी बिजली का स्रोत, घटा घरेलू खर्च सोलर प्लांट लगने से पहले त्रिलोक मिश्रा के घर का मासिक बिजली बिल लगभग 3 हजार से 3 हजार 500 रुपये तक आता था। हर महीने बिजली बिल के लिए अलग से राशि की व्यवस्था करनी पड़ती थी। सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होने के बाद उनके घरेलू बिजली खर्च की तस्वीर बदल गई। मिश्रा बताते हैं कि अब उनके घर की जरूरत की बिजली का एक बड़ा हिस्सा उनकी अपनी छत से ही तैयार हो रहा है। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन शुरू होने के बाद उन्हें माइनस बिल भी प्राप्त हुए। अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दिए जाने पर उसकी राशि बिजली बिल में समायोजित होती रही। इससे उन्हें बिजली खर्च में राहत के साथ-साथ अपनी छत पर उत्पादित ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिला। मिश्रा कहते हैं कि अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। हमारी जरूरत की बिजली हमारी अपनी छत से बन रही है। यह अनुभव उनके लिए केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। उनके घर की छत अब स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन गई है। इससे उन्हें यह भरोसा भी मिला है कि घर-परिवार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सौर ऊर्जा एक उपयोगी और स्थायी विकल्प बन सकती है। 78 हजार रुपये की सब्सिडी ने आसान किया सौर ऊर्जा का सफर त्रिलोक मिश्रा के लिए सोलर प्लांट लगाने का निर्णय इसलिए भी आसान हुआ क्योंकि योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बना रहा। मिश्रा बताते हैं कि सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया उनके लिए सहज रही। उनके अनुसार, योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने सौर ऊर्जा को अपनाने के निर्णय को और आसान बनाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का विजन पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अब आम परिवार भी अपनी छत को ऊर्जा उत्पादन के माध्यम के रूप में देख रहे हैं। त्रिलोक मिश्रा का अनुभव इसी बदलाव की एक स्थानीय तस्वीर है। जहां पहले उनकी छत केवल घर का हिस्सा थी, वहीं अब वही छत बिजली पैदा कर रही है। इससे एक ओर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार के बिजली खर्च में भी राहत महसूस हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से जिले के परिवारों को अपने घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिल रहा है। त्रिलोक मिश्रा की कहानी बताती है कि जब किसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव सीधे परिवार के जीवन में दिखाई देता है। सौर ऊर्जा के माध्यम से उन्हें बिजली खर्च में राहत मिली है और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है। पर्यावरण के साथ घरेलू बजट के लिए भी राहत सौर ऊर्जा का लाभ केवल बिजली बिल में कमी तक सीमित नहीं है। यह स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा का माध्यम भी है। मिश्रा के घर में सौर ऊर्जा का उपयोग शुरू होने से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संतोष भी मिल रहा है। वे मानते हैं कि यदि अधिक से अधिक परिवार अपनी छतों पर सोलर प्लांट लगाएं, तो इससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने में मदद मिलेगी। त्रिलोक मिश्रा की छत बनी दूसरों के लिए प्रेरणा त्रिलोक मिश्रा की कहानी अब आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उनका अनुभव बताता है कि सौर ऊर्जा केवल बड़े संस्थानों या उद्योगों तक सीमित नहीं है। सामान्य परिवार भी अपनी जरूरत के अनुसार सोलर प्लांट लगाकर बिजली की जरूरत पूरी करने और घरेलू खर्च को कम करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। एक समय बिजली के बढ़ते बिल की चिंता करने वाले त्रिलोक मिश्रा आज अपनी छत पर बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता के विजन से जुड़ते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी योजनाओं के जमीनी प्रभाव की एक सकारात्मक मिसाल प्रस्तुत करती है। उनके घर की छत से निकल रही सौर ऊर्जा केवल बिजली नहीं बना रही, बल्कि आत्मनिर्भरता, बचत और स्वच्छ भविष्य की नई उम्मीद भी रोशन कर … Read more

बिहार के सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प, स्मार्ट क्लास से रोबोटिक्स लैब तक सुविधा

 पटना बिहार के सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे। सम्राट सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया है कि हर जिले में बच्चों को अब अत्याधुनिक और उन्नत शैक्षणिक परिवेश उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सभी 38 जिले में कम से कम एक स्कूल को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। ऐसे स्कूलों में छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। शिक्षा विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिसमें पुराने और प्रतिष्ठित विद्यालयों को आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाओं और खेल-कूद की बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा। विभाग की और से तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार राज्य के चुनिंदा उच्च और उच्च माध्यमिक स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इसमें पुराने, प्रतिष्ठित और बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन विद्यालयों में कॅरियर ओरिएंटेड सारे विकल्प मौजूद होंगे। यहां छात्रों को कॅरियर की सभी संभावनाओं के लिए तैयार किया जाएगा। विज्ञान व तकनीक आधारित शिक्षा पर फोकस होगा, जिसके तहत रोबोटिक्स, कोडिंग, एआई की जानकारी दी जाएगी। बच्चों के खेल कॅरियर पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा कला और संस्कृति को भी समान रूप से महत्व दिया जाएगा। इसी तरह बच्चों का व्यावसायिक कौशल विकसित करने की ‌विशेष योजना है। उन्हें डिजिटल स्किल, कम्युनिकेशन और लीडरशिप ट्रेनिंग मिलेगी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ये होगा खास ● बुनियादी ढांचा: स्कूल भवन, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शौचालय, पेयजल और खेल मैदान को बेहतर बनाया जाएगा ● डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: आईसीटी लैब, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, इंटरनेट और स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था की जाएगी ● शिक्षण सामग्री: डिजिटल शिक्षण सामग्री के जरिए पढ़ाई को अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाया जाएगा ● क्विज और प्रतियोगिताएं: इन स्कूलों में छात्रों के बीच क्विज, स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं नियमित आयोजित कराई जाएंगी पुराने स्कूल को एक्सीलेंस चुनने पर अनेक चुनौतियां यह योजना काफी महत्वाकांक्षी है। हालांकि पुराने स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलने में चुनौतियां कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या बुनियादी ढांचे की कमी है। कई पुराने विद्यालयों में पर्याप्त जगह नहीं है। इससे नई लैब या स्मार्ट क्लासरूम बनाना मुश्किल होगा। बिहार के स्कूलों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी कमजोर है। सिर्फ 24 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर और 85 फीसदी विद्यालयों में इंटरनेट है। इसी प्रकार तकनीकी और मानव संसाधन को लेकर भी बड़ी परेशानी है। प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी बाधा है। खासकर आईसीटी और रोबोटिक्स जैसे विषयों में विशेषज्ञ शिक्षकों को भारी कमी है। उधर, पुराने शिक्षकों को नई तकनीक से जोड़ने के लिए निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जो बेहद कठिन कार्य है। इसके अलावा पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था भी एक समस्या है। सेंटर ऑफ एक्सलेंस के लिए सामाजिक और भौगोलिक चुनौतियां तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाना भी बड़ी चुनौती होगी। छात्रावास की व्यवस्था भी एक प्रमुख समस्या हो सकती है। डिजिटल, तकनीकी सुविधाएं ● स्मार्ट क्लासरूम: इंटरएक्टिव पैनल और स्मार्ट बोर्ड से लैस कक्षाएं ● आईसीटी लैब: इस स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना का अलग से प्रावधान किया गया है ● कंप्यूटर लैब: आधुनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से सुसज्जित कंप्यूटर प्रयोगशाला ● इनोवेशन लैब: अटल टिंकरिंग लैब या इनोवेशन लैब की स्थापना की योजना ● रोबोटिक्स लैब: इन स्कूलों को रोबोटिक्स लैब और एस्ट्रोनॉमी किट से लैस करने की योजना है ● हाई-स्पीड इंटरनेट: वाई-फाई कनेक्टिविटी और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था होगी शैक्षणिक सुविधाएं उन्नत प्रयोगशालाएं: भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान की सुसज्जित लैब पुस्तकालय: विस्तृत संग्रह वाली लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधन और शांत अध्ययन कक्ष ऑडियो-विजुअल सुविधाएं: प्रोजेक्टर, स्कैनर और मल्टीमीडिया सिस्टम। अन्य सुविधाएं लड़कियों के लिए विशेष सुविधाएं: उचित शौचालय, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था। पोषण कार्यक्रम: कुछ स्कूलों में प्रयोग के तौर पर शेफ-क्यूरेटेड न्यूट्रिशन प्रोग्राम होंगे। हाइजेनिक कैंपस: स्वच्छ और आधुनिक परिसर खेल मैदान: फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और टेनिस की सुविधा। इंडोर स्पोर्ट्स हॉल: टेबल टेनिस और अन्य इनडोर गेम्स। स्विमिंग पूल: कुछ प्रमुख केंद्रों में तापमान नियंत्रित स्विमिंग पूल। योग और फिटनेस सेंटर: जिम और योग रूम

कारोबारियों को थाने में लूटने वाला थानेदार फरार, भाइयों ने किया सरेंडर

जौनपुर यूपी के जौनपुर में दो कारोबारियों को अगवा कर लूटने वाले सुरेरी थाने पर तैनात रहे थानेदार दिव्य प्रकाश सिंह पर 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया है। सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले दो सिपाहियों समेत तीन लोगों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। वारदात में सहयोग करने वाले थानेदार के दो सगे भाइयों विकास सिंह और संकीत सिंह ने अदालत में सरेंडर कर दिया है। थानेदार और सिपाहियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब थानेदार व्हाट्स स्टेटस के जरिए धमकी दे रहा है। उसने यहां तक लिखा कि जल्द वापसी करूंगा। सभी की पोल खुलेगी। अपने पर्सनल फोन का स्टेटस लगातार बदल रहा है और ऐसी बातें लिख रहा है जिसे अधिकारियों को धमकी माना जा रहा है। क्या है पूरा मामला जौनपुर के जलालपुर थाना इलाके में 15 सितंबर को कारोबारी विजय राजभर को अगवाकर लूटपाट की गई थी। दो लोग उसे पुलिस की धमकी देकर अपने साथ ले गए। एक गाड़ी में पहले से मौजूद चार लोगों ने उसे अगवा कर लिया। उसे सुरेरी थाना ले जाकर मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी देकर रुपए मांगे गए। उसका मोबाइल छीनकर यूपीआई के जरिए कई खातों से दो लाख से ज्यादा ट्रांसफर कर लिए गए। उसने 17 सितंबर को इसकी शिकायत अधिकारियों से की। मामला दर्ज कर जांच शुरू हुई। जांच शुरू होते ही एक अन्य कारोबारी सुशील कुमार पांडेय भी सामने आया। उसके साथ भी इसी तरह की घटना हुई थी। उसे भी इसी तरह से सुरेरी थाने में ले जाकर लूटा गया था। एक ही तरह की दो घटनाओं और थाने लाकर लूट की खबर से खलबली मच गई। मामला डीआईजी तक पहुंच गया। 22 सितंबर को एसआईटी गठित हुई थी वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईडी वैभव कृष्ण ने 22 सितंबर को पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया। अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आतिश कुमार सिंह की टीम मामले के खुलासे में लगी। सुरेरी थाने में पुलिस वालों की परेड हुई तो लूट को अंजाम देने वाले सिपाहियों की पहचान हो गई। पता चला कि थानेदार ही लूट सिपाहियों और अपने सगे भाइयों के जरिए वारदातों को अंजाम दिला रहा हैं। कारोबारी को बुलाकर ले जाने वाले कोई और नहीं थानेदार के भाई संकीत सिंह और विकास सिंह थे। एसआईटी ने रिपोर्ट दर्ज कर धरपकड़ शुरू की तो थानेदार फरार हो गया। थाने में असलहे के साथ फोटो भी खिंचवाया कारोबारियों ने अधिकारियों को बताया कि चार पहिया वाहन से अपहरण करने और सुरेरी थाने में ले जाकर धमकाने के साथ ही असलहा के साथ फोटो और वीडियो बनाया गया। सादे कागज पर हस्ताक्षर कराया गया था। सुशील पांडेय ने बताया कि पहले पांच लाख की मांग की गई। फिर एक लाख पांच हजार रुपये नगद और साठ हजार दो सौ 99 रुपये ऑनलाइन वंशनारायण गिरी के खाते में ट्रांसफर करा लिए। थानेदार का व्हाट्स स्टेटस लगातार हो रहा अपडेट पुलिस फरार थानेदार को खोज रही है और उसके फोन में व्हाट्स स्टेटस लगातार अपडेट हो रहा है। इसमें एक तरह से धमकी दी जा रही है। उसने एक स्टेटस में लिखा है कि आज आपने इज्ज़त ली हो मैं जल्द ही वापसी करूंगा, अपने तरीक़े से सभी की पोल खुलेंगी, आप को जो कराना था करा दिए। सम्मान के साथ जिया हूं, सम्मान के साथ जिएंगे। जिसने भी ऐसा किया है, वो बस अपना सोचे, सभी कहानी और खुलासे के साथ जल्द ही सामने आएंगे। एक अन्य स्टेटस में मरने की धमकी भी दी। लिखा कि इसकी कीमत मेरी जान है जो मुझे अब दिल से अनुभव हो गया है, जल्द वीडियो बनाने के साथ मर जाऊंगा, लेकिन आज मुझे जो बताया जा रहा है वो आप भी हैं। यह भी लिखा कि जिस स्थान पर मैं जाऊंगा, वहां पर आप भी रहेंगे। CBI जांच के साथ सभी EVIDENCES मेरे पास हैं। इन स्टेटस से माना जा रहा है कि वह अपने ही अधिकारियों को धमका रहा है।

सेवा की कहानी : उन्नत नस्ल की गाय ने खोली अतिरिक्त आय की राह, आत्मनिर्भर बने सन्ना के ओम प्रकाश

सेवा संकल्प अभियान 2026 सेवा की कहानी : उन्नत नस्ल की गाय ने खोली अतिरिक्त आय की राह, आत्मनिर्भर बने सन्ना के ओम प्रकाश प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 से मिली 56 हजार रुपये की सहायता, दूध बेचकर अब तक कमाए 40 हजार रुपये से अधिक प्रतिदिन हो रहा 6 से 8 लीटर दूध उत्पादन, गोबर से जैविक खाद मिलने से खेती की लागत भी हुई कम रायपुर, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत आजीविका गतिविधियों से जुड़ी सहायता ग्रामीण किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन रही है। जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम सन्ना निवासी श्री ओम प्रकाश यादव ने योजना से मिली सहायता से उन्नत नस्ल की गाय खरीदकर अपने पारंपरिक पशुपालन को आय के साधन में बदल दिया है। दूध के विक्रय से उन्हें अब तक 40 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय हो चुकी है। ओम प्रकाश यादव पहले से गाय पालन करते थे, लेकिन उन्नत नस्ल की गाय नहीं होने के कारण दूध का उत्पादन सीमित था। दूध का अधिकांश उपयोग परिवार की जरूरतों के लिए ही हो जाता था। ऐसे में पशुपालन से नियमित अतिरिक्त आय नहीं हो पाती थी। 56 हजार रुपये की सहायता से खरीदी उन्नत नस्ल की गाय कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत उत्पादन प्रणाली मद में ओम प्रकाश यादव को गाय पालन के लिए 56 हजार रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई। इस राशि से उन्होंने उन्नत नस्ल की गाय खरीदी और पशुपालन को व्यवस्थित आजीविका गतिविधि के रूप में आगे बढ़ाया। उन्नत नस्ल की गाय आने के बाद अब उन्हें प्रतिदिन 6 से 8 लीटर दूध मिल रहा है। परिवार की आवश्यकता पूरी होने के बाद अतिरिक्त दूध का विक्रय किया जा रहा है। इससे उन्हें अब तक 40 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो चुकी है। दूध से आमदनी, जैविक खाद से खेती में बचत पशुपालन से ओम प्रकाश को दोहरा लाभ मिल रहा है। दूध की बिक्री से नियमित अतिरिक्त आय हो रही है, वहीं गाय के गोबर से मिलने वाली जैविक खाद का उपयोग खेती में किया जा रहा है। इससे खेती में बाहरी खाद पर होने वाले खर्च में भी कमी आई है। अतिरिक्त आमदनी और खेती की लागत में बचत से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। “अब हर महीने हो रही अतिरिक्त कमाई” ओम प्रकाश यादव बताते हैं, “पहले देशी गाय से मिलने वाला दूध केवल घर के उपयोग में ही आ जाता था। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 से 56 हजार रुपये की सहायता मिलने पर मैंने उन्नत नस्ल की गाय खरीदी। अब प्रतिदिन 6 से 8 लीटर दूध मिल रहा है और हर महीने अतिरिक्त कमाई हो रही है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।” पारंपरिक पशुपालन बना स्थायी आय का माध्यम प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के माध्यम से कृषि के साथ पशुपालन जैसी आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार हो रहे हैं। ओम प्रकाश यादव की सफलता बताती है कि योजनाबद्ध सहायता और सही संसाधनों के उपयोग से पारंपरिक पशुपालन को नियमित आय के साधन में बदला जा सकता है।