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हरियाणा में उद्योगों को बड़ी राहत, डबल लाइसेंस व्यवस्था खत्म; अनुपालन का बोझ होगा कम

चंडीगढ़  हरियाणा में कारोबार और निवेश बढ़ाने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा अनुपालन का बोझ कम करने का सिलसिला जारी है। आठ प्राथमिक क्षेत्रों में सुधार लागू किए जा चुके हैं, जबकि 14 अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में इस प्रक्रिया को अगले माह तक लागू कर दिया जाएगा। इन सुधारों का उद्देश्य अनावश्यक प्रक्रियाओं, दोहराव वाले अनुमोदनों और अतिरिक्त अनुपालनों को समाप्त कर नागरिकों, उद्यमियों तथा निवेशकों के लिए सेवाओं को अधिक सरल और त्वरित बनाना है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने केंद्रीय कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में अनुपालन न्यूनीकरण एवं डीरेगुलेशन अभियान की प्रगति की समीक्षा के बाद हरियाणा की स्थिति की जानकारी दी। राज्य के सुधार एजेंडा में भूमि विनियमन, निर्माण, उपयोगिताओं, औद्योगिक विकास, बिजली, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा ईज आफ डूइंग बिजनेस से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए चिकित्सा व्यवसायियों के पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) संबंधी आवश्यकताओं को सरल करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित लाइसेंस के लिए एकल नोडल व्यवस्था विकसित की जा रही है। स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों से संबंधित सेवाओं को इनवेस्ट हरियाणा पोर्टल के साथ एकीकृत करने का भी प्रस्ताव है। इससे विभिन्न विभागों के स्तर पर होने वाली प्रक्रियाओं को एक सुव्यवस्थित तौर पर संचालित करने में सहायता मिलेगी। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग ने बताया कि व्यवसायों के लिए दोहरी लाइसेंस व्यवस्था समाप्त करने के हरियाणा के प्रस्ताव को डीरेगुलेशन सेल ने स्वीकृति दे दी है। ओवरलैपिंग लाइसेंस, अनुमोदन, एनओसी और परमिट को समाप्त करने से व्यवसायों पर अनावश्यक अनुपालन का बोझ कम होगा। एकमुश्त पंजीकरण शुरू किया जा चुका है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए स्व-घोषणा, स्थापना-पूर्व अनुमोदन तथा निरीक्षण से संरक्षण की व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य चल रहा है। औद्योगिक क्लस्टरों में अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए एचएसआइआइडीसी तथा हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र की भूमिका को और मजबूत किया जा रहा है। तीन हिस्सों में बांटे जा सकेंगे औद्योगिक प्लॉट एचएसआइआइडीसी के निदेशक मंडल ने औद्योगिक प्लाटों को अधिकतम तीन प्लाटों में विभाजित करने की अनुमति दी है। हालांकि प्रत्येक परिणामी प्लाट का क्षेत्रफल 450 वर्ग मीटर से कम नहीं होना चाहिए। आइएमटी मानेसर के सेक्टर-8 में 4.6 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक श्रमिक आवास का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार इंडस्ट्रियल एस्टेट कुंडली में छह एकड़ क्षेत्र में ऐसी ही सुविधा विकसित की जा रही है। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित ‘सक्षम’ फंड के माध्यम से बुनियादी ढांचे के उन्नयन की योजना है। एचएसआइआइडीसी ने साझा अग्निशमन बुनियादी ढांचे के लिए भी नई नीति जारी की है।  

जुआ फड़ से भागे दुकानदार की संदिग्ध मौत, पुलिस पर पिटाई का आरोप

जुआ फड़ से भागे दुकानदार की संदिग्ध मौत, पुलिस पर पिटाई का आरोप मौत के बाद बाजार बंद, सैकड़ों व्यापारियों ने घेरा थाना; पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार मुरैना जौरा में पुलिस को देखकर जुआ फड़ से भागे 37 वर्षीय दुकानदार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान सूरज उर्फ कल्ला गुप्ता निवासी पुराना अस्पताल रोड, जौरा के रूप में हुई है। मौत के बाद परिजनों और व्यापारियों ने पुलिस पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि, पुलिस ने मारपीट के आरोपों से इनकार करते हुए बताया कि युवक जेल रोड पर बेहोशी की हालत में मिला था। जानकारी के मुताबिक, बुधवार दोपहर जौरा पुलिस नकबजनी के एक मामले में संदेही की तलाश में पगारा रोड क्षेत्र में गई थी। पुलिस को संदेही के जेल रोड पर होने की सूचना मिली। पुलिस टीम के पहुंचते ही वहां जुआ खेल रहे लोग भागने लगे। इसी दौरान सूरज उर्फ कल्ला भी भागा और पुलिस के मुताबिक दौड़ते समय जमीन पर गिर गया। पुलिस उसे तत्काल सिविल अस्पताल लेकर पहुंची। डॉक्टर अनिल राजपूत ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को डेड हाउस में रखवाकर परिजनों को सूचना दी गई। परिजनों ने पुलिस पर लगाए मारपीट के आरोप सूरज की मौत के बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पुलिस ने सूरज को पकड़कर उसके साथ मारपीट की और पैरों में डंडे मारे। परिजनों ने उसके शरीर पर चोट के निशान होने का भी दावा किया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वहीं पुलिस का कहना है कि युवक को जेल रोड पर बेहोशी की हालत में पाया गया था और अस्पताल पहुंचाने के बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित किया । मौत के बाद बाजार बंद, थाने का घेराव घटना की जानकारी मिलते ही जौरा के व्यापारियों में आक्रोश फैल गया। और देर रात ही व्यापारियों ने तहसील चौराहे पर प्रदर्शन किया और विरोध में दुकानें बंद कर दीं। इसके बाद रात बड़ी संख्या में व्यापारी जौरा थाने पहुंच गए। व्यापारियों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए थाने का घेराव किया और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। विधायक का कहना  –पंकज उपाध्याय कांग्रेस विधायक विधानसभा जौरा नेहरू मार्केट में पीको सिलाई की दुकान चलाता था सूरज सूरज उर्फ कल्ला गुप्ता नेहरू मार्केट में पीको सिलाई की दुकान चलाता था। इसी दुकान से वह अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। बुधवार को वह जेल रोड पर किस वजह से पहुंचा था और जुआ फड़ से उसका क्या संबंध था, इसे लेकर पुलिस जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। गुरुवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। मौत की वास्तविक वजह क्या थी और शरीर पर चोट के निशान कैसे आए, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पुलिस और परिजनों के दावों के बीच मौत का कारण जांच का विषय बना हुआ है। उधर व्यापारी वर्ग की मांग को ध्यान में रखते हुए पुलिस अधीक्षक ने भविष्य देने गए पांच पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है। और तीन डॉक्टरों की टीम से वीडियोग्राफी करके पीएम करने के निर्देश दिए हैं। पीएम रिपोर्ट आने के बाद और भी स्थिति साफ हो जाएगी कि आखिर मौत की वजह क्या रही….

फर्जी गृह विभाग अधिकारी बनकर पोस्टिंग का दावा, कार से मिले नकली ID-पास और सरकारी दस्तावेज

रांची  एक ठग को खुद को झारखंड सरकार के गृह विभाग का अंडर सेक्रेटरी बताकर पुलिस अधिकारियों पर धौंस जमाने के मामले में पिठौरिया थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान अरुण कुमार अग्रवाल (52), पिता वशीधर अग्रवाल, निवासी अमरावती अपार्टमेंट, बीआईटी एक्सटेंशन के सामने, लालपुर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपित पिछले कई वर्षों से अजय कुमार, अंडर सेक्रेटरी होम के नाम से अपनी पहचान देता था। उसके पास से दो मोबाइल फोन, एक ब्रेजा कार, गृह विभाग और झारखंड पुलिस के नाम से बने फर्जी पहचान पत्र, राजभवन व मंत्रालय के कार पास तथा कई सरकारी दस्तावेजों की छायाप्रतियां बरामद की गई हैं। पिठौरिया थाना प्रभारी सतीश कुमार के बयान पर इस संबंध में पिठौरिया थाना कांड संख्या 97/2026, मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 204, 205, 338, 336(3), 340(2), 319(2), 318(4) तथा ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 की धारा 3, 5 और 6 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एक साल से थाना प्रभारी को कर रहा था फोन थाना प्रभारी सतीश कुमार ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि करीब एक वर्ष से एक व्यक्ति एक नंबर से उन्हें फोन कर अपना परिचय अजय कुमार, अंडर सेक्रेटरी होम के रूप में देता था। वह कहता था कि उसने वरीय पुलिस अधिकारियों से बात कर उनकी पोस्टिंग कराई है। आरोपित कई छोटे-मोटे मामलों में गैरकानूनी काम करने के लिए दबाव बनाता था। वह पिठौरिया क्षेत्र में अपना घर होने की बात कहते हुए वहां उपहार भेजने के लिए भी कहता था। 21 सितंबर को आरोपित ने थाना प्रभारी को चंदवे स्थित अपने घर आने के लिए फोन किया। उसने बताया कि कुछ लोग घर के बाहर हंगामा कर रहे हैं। सूचना पर थाना प्रभारी पुलिस दल के साथ वहां पहुंचे। पुलिस के अनुसार, मौके पर आरोपित ने थाना प्रभारी से कहा कि क्या उन्हें नौकरी नहीं करनी है, उसकी बात विभाग के वरीय अधिकारियों से होती रहती है और उसकी बातों को हल्के में न लें। कार पर लगा था पुलिस का लोगो मौके पर पुलिस ने आरोपित की कार की जांच की। कार के डैशबोर्ड पर लाल-नीले रंग का पुलिस लोगो वाला बोर्ड लगा था। सह चालक सीट के सामने शीशे पर हरे रंग की पट्टी लगी थी, जिस पर झारखंड सरकार मंत्रालय कार पास, गृह विभाग, वर्ष 2024 से संबंधित विवरण अंकित था। इसके नीचे झारखंड सरकार की मुहर वाला स्टीकर और पंचम झारखंड विधानसभा कार पास भी लगा हुआ था। इन तथ्यों पर संदेह होने के बाद थाना प्रभारी ने वरीय अधिकारियों से विचार-विमर्श किया और आरोपित को पिठौरिया थाना आने का निर्देश दिया। मंगलवार को करीब 1:20 बजे वह थाना पहुंचा। पूछताछ के दौरान पुलिस ने गृह विभाग या किसी अन्य सरकारी विभाग का परिचय पत्र मांगा, लेकिन वह कोई सरकारी पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। गृह विभाग में नहीं मिला अजय कुमार नाम का अधिकारी पुलिस ने गृह विभाग में पदस्थापित कर्मियों से सत्यापन कराया। इसमें पता चला कि अजय कुमार नाम का कोई व्यक्ति गृह विभाग में अंडर सेक्रेटरी के पद पर पदस्थापित नहीं है। इसके बाद सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपित ने अपना वास्तविक नाम अरुण कुमार अग्रवाल बताया। पुलिस के अनुसार उसने कई वर्षों से अजय कुमार के नाम से पहचान देने की बात स्वीकार की है। जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि आरोपित ने वरीय पुलिस उपाधीक्षक अमर कुमार पांडेय के मोबाइल नंबर पर भी अंडर सेक्रेटरी बनकर व्हाट्सऐप और फोन के माध्यम से संपर्क किया था। पुलिस का आरोप है कि वह अपने कथित सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल कर अवांछित लाभ लेने का प्रयास करता था। पार्किंग शुल्क से बचने और मंत्रालय में प्रवेश के लिए लगाता था लोगो पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपित ने बताया कि कार पर पुलिस का लोगो लगाने से ट्रैफिक पुलिस उसे नहीं रोकती थी और पार्किंग शुल्क भी नहीं लिया जाता था। मंत्रालय का लोगो और कार पास रहने से मंत्रालय में प्रवेश के दौरान रोक-टोक नहीं होती थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपित ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से सूचनाएं जुटाने तथा विभागीय अधिकारियों को सूचना भेजकर पोस्टिंग कराने और लंबित कार्रवाई के नाम पर ठगी करने की बात भी बताई है। कार से बरामद हुए फर्जी डीएसपी और सचिव के पहचान पत्र पुलिस ने आरोपित के दो मोबाइल फोन और वाहन को विधिवत जब्त किया है। इनमें एप्पल आईफोन 16 प्रो और सैमसंग गैलेक्सी एस-25 शामिल हैं। कार की तलाशी के दौरान अजय कुमार, अवर सचिव गृह विभाग, झारखंड सरकार के नाम से फोटोयुक्त हस्ताक्षरित दो पहचान पत्र बरामद किए गए। इसके अलावा अजय कुमार, डीएसपी (एसबी), झारखंड पुलिस के नाम से झारखंड पुलिस और झारखंड सरकार के लोगो वाले दो फोटोयुक्त पहचान पत्र भी मिले हैं। राजभवन में प्रवेश के लिए इस्तेमाल होने वाले पांच हरे रंग के कार पास, गृह विभाग के मंत्रालय कार पास के पांच स्टीकर तथा कार पास तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले स्टीकरयुक्त ए-4 साइज के छह कागजात भी जब्त किए गए हैं। नक्सली पुरस्कार राशि और पुलिस पदोन्नति से जुड़े दस्तावेज मिले तलाशी में पुलिस को विभिन्न व्यक्तियों और संस्थानों के लेटर पैड भी मिले। इनमें मानव संसाधन विकास विभाग के सचिव, एक विधायक, पीजीआईएमईआर, एसजीपीजीआई और सेंट जेवियर कॉलेज रांची से संबंधित लेटर पैड शामिल हैं। इसके अलावा आरोपित के आधार कार्ड की छायाप्रति भी बरामद हुई है। पुलिस के अनुसार विशेष शाखा, झारखंड सरकार से संबंधित वर्ष 2022 के नक्सली संगठन के पुरस्कार राशि के नवीनीकरण और घोषणा से जुड़े गोपनीय पत्रों की छायाप्रतियां, पुलिस निरीक्षक से डीएसपी कोटि में पदोन्नति से संबंधित पुलिस महानिदेशक पर्षद की बैठक की कार्यवाही और आईपीएस में पदोन्नति से संबंधित गृह विभाग के दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज प्रथम दृष्टया जाली और कूटरचित पाए गए हैं। जब्त मोबाइल फोन, दस्तावेज और वाहन की विस्तृत जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपित ने किन-किन पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया था और उसके पास सरकारी विभागों से संबंधित गोपनीय दस्तावेज कैसे पहुंचे। मामले में … Read more

दिल्ली वोटर लिस्ट पर बड़ा अपडेट: 33 लाख SIR नोटिस का 20 दिन में समाधान, दस्तावेज से दूर होगी गड़बड़ी

नई दिल्ली दिल्ली में SIR प्रक्रिया के तहत 33 लाख वोटरों को थमाए गए नोटिस के मामले में अब मतदाताओं को टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है। अगर वह भारत का नागरिक है, 18 साल का है और जिंदा है, तो निश्चिंत रहिए। हर सूरत में उनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने 20 दिन का एक मास्टर प्लान बनाया है। जिसमें इस दौरान वोटरों को दिए गए सभी तरह के नोटिसों का समाधान कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि इस समस्या को जल्द से जल्द समाधान करने के लिए दो अलग-अलग सिस्टम बनाए गए हैं। पहला, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर जिस भी किसी वोटर के नाम में थोड़ी-बहुत असमानता (गड़बड़ी) रह गई है। उसे 10 दिनों के अंदर मामूली दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत दूर कर दिया जाएगा। इसके लिए बीएलओ को कहा गया है कि वह इसमें बहुत अधिक गहराई में ना जाते हुए बस उसके लेटेस्ट नाम के बारे में जानकारी कन्फर्म कर लें। उदाहरण के तौर पर अगर 2003 एसआईआर में उसका नाम केवल सुरेश था और अब इस नाम के पीछे सरनेम में अग्रवाल, शर्मा, कुमार, झा, चटर्जी या बनर्जी या अन्य कुछ जोड़ा गया है तो ऐसे मामलों को बहुत अधिक गंभीर ना माना जाए। अगर वोटर की उम्र, डेट ऑफ बर्थ, फादर नेम और उसके भारतीय होने में कोई संदेह नहीं है तो उसे किसी भी मान्य दस्तावेज के आधार पर ओके कर दिया जाए। ऐसा नहीं कि छोटी-छोटी क्लेरिकल मिस्टेक या फिर कमियों के रहते हुए वोटर को परेशान किया जाए। इससे 33 लाख में से करीब 15 लाख वोटरों की समस्या का समाधान हो जाएगा। जिसमें बीएलओ और चुनाव आयोग को बहुत कुछ अलग से करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने SIR से मैपिंग न होने पर भी दस्तावेज के आधार पर जुड़ सकेगा नाम बाकी बचे 18 लाख वोटरों में से जिस किसी के पुराने एसआईआर से मैपिंग नहीं हो रही है या फिर अन्य किसी तरह की बड़ी समस्या लग रही है। तो ऐसे मामलों में भी वोटर से डिक्लेरेशन कराते हुए कोई भी मान्य दस्तावेज के आधार पर इसे वोटर लिस्ट में ऐड कर लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि ऐसे किसी भी मामले में अगर किसी वोटर का नाम पुराने एसआईआर में नहीं भी था तो भी अब चल रही एसआईआर प्रक्रिया में ऐसे किसी वोटर का नाम डिलीट नहीं किया जा सकता। सेंटरों पर भी जो हियरिंग चल रही हैं। उनमें भी वोटरों को बहुत अधिक उलझाने की कोई जरूरत नहीं है। जुड़वा बच्चों और कम उम्र के माता-पिता वाले मामलों में बीएलओ खुद करें पुष्टि ऐसे भी किसी मामले में जिनके दो बच्चे हैं और उनके डेट ऑफ बर्थ में सेम डेट आ रही है। ऐसे में अगर वोटर कहता है कि यह उनके जुड़वा बच्चे हैं तो उससे बीएलओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों को ओके कर दें। इसी तरह से किसी वोटर और उसके माता-पिता की उम्र में 15-16 साल का ही अंतर है तो भी बीएलओ और एईआरओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों का जल्द से जल्द निपटारा कर दें। सूत्रों का कहना है कि अब पुरानी वोटर लिस्ट और एसआईआर में दी गई फोटो के भी मिलान करने शुरू कर दिए गए हैं। इस मसले को 23 सितंबर को एनबीटी ने प्रमुखता से उठाया था। समस्या दूर होते ही वोटरों को मैसेज, ऑनलाइन भी अपडेट होगी जानकारी इसके अलावा इस अभियान में एक और काम करने की कोशिश की जा रही है। वह यह कि जिस-जिस भी वोटर की प्रॉब्लम दूर होती जाएगी। उसके पास मैसेज भेजने की भी योजना बनाई जा रही है। ताकि उस वोटर को पता लग जाए कि अब उसे सेंटर में जाने की कोई जरूरत नहीं है और उसको मिले नोटिस की समस्या दूर हो चुकी है। ऐसे वोटरों की ऑनलाइन जारी की गई लिस्ट के आगे भी समस्या समाधान लिखा जाएगा। ताकि सभी को ऑनलाइन भी यह जानकारी अपडेट हो सके।

₹8 लाख रिश्वत मामले में पूर्व DIG भुल्लर की कोर्ट में पेशी, शिकायतकर्ता देंगे बयान

चंडीगढ़  पंजाब पुलिस के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े रिश्वत मामले में आज चंडीगढ़ स्थित CBI की विशेष अदालत में अहम सुनवाई होगी। इस दिन मामले के शिकायतकर्ता मंडी गोबिंदगढ़ के कारोबारी आकाश बत्ता पहली बार अदालत में गवाही देंगे। कोर्ट ने उन्हें समन जारी किया है। रिश्वत मामले में आरोप तय होने के बाद शिकायतकर्ता की गवाही मुकदमे की अहम कड़ी मानी जा रही है। CBI के अनुसार, बत्ता ने शिकायत दी थी कि आपराधिक मामले में कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे 8 लाख रुपए रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत के आधार पर CBI ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन DIG भुल्लर और बिचौलिए कृष्णु शारदा को गिरफ्तार किया था। अब अदालत में आकाश बत्ता के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद उनके बयान और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा आगे बढ़ेगा। सेक्टर-40 स्थित घर पर तलाशी ली थी भुल्लर की गिरफ्तारी के बाद CBI ने उनके सेक्टर-40 स्थित घर पर तलाशी ली थी। जांच एजेंसी की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नकदी, सोना और अन्य कीमती सामान बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। अलग मामले में CBI ने आय से अधिक संपत्ति की जांच भी शुरू की थी। आरोपमुक्त करने की अर्जी हो चुकी खारिज इस मामले में भुल्लर और कृष्णु शारदा की ओर से CBI अदालत में आरोपमुक्त किए जाने की अर्जी दाखिल की गई थी। दोनों की ओर से CBI की कार्रवाई और अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिस्चार्ज एप्लीकेशन खारिज कर दी थी। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है। रिश्वत की रकम बिचौलिए के जरिए मांगी गई थी CBI के मामले के अनुसार, कारोबारी आकाश बत्ता की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रिश्वत की रकम बिचौलिए के जरिए मांगी गई थी। मीडिया रिपोर्टों में भी बिचौलिए कृष्णु शारदा के खिलाफ भुल्लर की ओर से रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया था।  

ट्रक से भिड़ी कार, उड़े परखच्चे; मंत्री की बेटी समेत 4 ने गंवाई जान,CM ने जताया शोक

जमशेदपुर झारखंड के जमशेदपुर में भीषण सड़क हादसा देखने को मिला है। जिले के सोनारी थाना क्षेत्र स्थित मरीन ड्राइव पर गुरुवार तड़के हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में कार सवार चार लोगों की मौत हो गई। तेज रफ्तार कार सड़क पर खड़े एक ब्रेकडाउन ट्रक के पीछे जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार ट्रक के पिछले हिस्से में बुरी तरह फंस गई और उसके परखच्चे उड़ गए। इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों में झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडे सिंह की बेटी तृषा सिंह भी शामिल हैं। काफी मशक्कत से बाहर निकले शव जमशेदपुर में मरीन ड्राइव पर हुई इस दर्दनाक घटना के बारे में सूचना मिलते ही डीएसपी सीसीआर मनोज ठाकुर, सोनारी थाना प्रभारी संजय सुमन तथा अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। दुर्घटना के बाद कार में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बचाव दल ने गैस कटर की मदद से कार को काटकर शवों को बाहर निकाला। हादसा इतना भयावह था कि मृतकों के शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके साथ ही गाड़ी के भी परखच्चे उड़ गए हैं। ट्रक से टक्कर के बाद कार के उड़ गए परखच्चे बताया जाता है कि जमशेदपुर के सोनारी थानाक्षेत्र अंतर्गत दोमुहानी मरीन ड्राइव पर कार और ट्रक की टक्कर में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी समेत कुल 4 लोगों की मौत हुई। मृतकों में 2 युवक और 2 युवतियां शामिल हैं। मरने वालों के नाम हैं- सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता, वंशिका खंडेलवाल और तृषा सिंह। बताया जाता है कि सफेद रंग की स्विफ्ट कार, दोमुहानी मरीन ड्राइव सड़क पर पहले से खड़े ट्रक से जा टकराई। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए। कार को कटर से काटकर निकाले शव जानकारी के मुताबिक, ट्रक बुधवार रात करीब 10 बजे ब्रेकडाउन होने के बाद मरीन ड्राइव की सड़क पर खड़ा था. गुरुवार तड़के तेज गति से आ रही कार अनियंत्रित होकर सीधे ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार के परखच्चे उड़ गए. कार में सवार लोगों को बाहर निकालना भी बेहद मुश्किल हो गया.  सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव टीम मौके पर पहुंची और गैस कटर की मदद से कार को काटकर शवों को बाहर निकाला गया।  XLRI की छात्रा थी तृषा कार इतनी बुरी हालत में थी कि इसको गैस कटर से काटकर मृतकों का शव निकालना पड़ा। शवों को MGM अस्पताल भेज दिया गया है। मंत्री की बेटी XLRI की छात्रा थी। घटना की सूचना मिलते ही मंत्री दीपिका पांडेय सिंह रांची से जमशेदपुर के लिए निकल गईं। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी के निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दुख जताया है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है।  गैस कटर से काटकर निकाले गए शव  ट्रक से टक्कर के बाद कार की हालत खराब हो गई। उसके अंदर मंत्री की बेटी समेत चारों फंस गए। कार की हालत इतनी खराब थी कि गैस कटर के काट कर शवों को बाहर निकाला गया। इसके बाद पोस्टमार्टम के लिए MGM अस्पताल भेजा गया। मृतकों की हुई पहचान पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता, वंशिका खंडेलवाल और तृषा सिंह के रूप में हुई है। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अर्णव मिश्रा ने बताया कि संबंधित ट्रक बुधवार रात करीब 10 बजे से खराब होकर सड़क पर खड़ा था। गुरुवार सुबह लगभग 3 बजे तेज रफ्तार कार पीछे से ट्रेलर में जा घुसी, जिससे कार सवार चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे से झारखंड में शोक की लहर हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान तृषा सिंह, सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता और वंशिका खंडेलवाल के रूप में हुई है.  सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम अस्पताल भेजे जाने की जानकारी है.  इस दर्दनाक हादसे की खबर सामने आने के बाद पूरे झारखंड में शोक की लहर है.  मुख्यमंत्री सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफानन अंसारी ने शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना की है।   हादसे का कारण क्या था? जमशेदपुर में हुई इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और अंधेरे के कारण ट्रक का समय पर दिखाई नहीं देना हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है। वहीं, प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि सड़क पर खड़े ट्रक के पीछे आवश्यक सुरक्षा संकेतक और चेतावनी व्यवस्था मौजूद थी या नहीं। आपको बता दें कि इससे पहले झारखंड की राजधानी रांची में भी दर्दनाक हादसा हुआ था। यहां पानी की टंकी गिरने से मलबे में दबकर 2 मजदूरों की मौत हो गई थी। CM हेमंत सोरेन ने जताया दुख झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जमशेदपुर में हुए इस हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने लिखा- "जमशेदपुर में एनएच हाईवे पर हुए सड़क हादसे में राज्य सरकार में साथी मंत्री एवं बहन श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह जी की बेटी एवं अन्य लोगों के निधन की बेहद दुखद और हृदयविदारक खबर से मन अत्यंत व्यथित है। अपनी संतान को खोने का दुःख किसी भी माता-पिता और परिवार के लिए शब्दों से परे और असहनीय होता है। इस अत्यंत कठिन घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं बहन दीपिका जी एवं शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। इस अपूरणीय क्षति के लिए शब्द नहीं हैं। मरांग बुरु दिवंगत लोगों की आत्मा को शांति प्रदान कर शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।"

CM मान से मुलाकात के बाद पटवारियों ने वापस ली हड़ताल, भर्ती पर बड़ा फैसला

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ बैठक के बाद राजस्व पटवार यूनियन ने अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। सरकार ने पटवारियों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताते हुए 1000 से अधिक राजस्व पटवारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई भर्ती से आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और राजस्व संबंधी रोजमर्रा के प्रशासनिक काम अधिक सुचारू होंगे। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि यूनियन ने अपनी जायज मांगें माने जाने पर अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने पटवारियों के पटवारी कैडर को राज्य स्तरीय से वापस जिला स्तरीय कैडर करने की मांग को सैद्धांतिक रूप से मंजूर कर लिया है।” उन्होंने कहा, “इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया सुचारू होगी और वरिष्ठता तथा पदोन्नतियों संबंधी आ रही प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी। यह फैसला प्रशासनिक सुधारों और विभाग के कामकाज में सुधार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।” उन्होंने कहा, “जिला स्तर पर पटवारी कैडर को बहाल करने के लिए मंत्रिमंडल द्वारा जल्द ही औपचारिक मंजूरी दी जाएगी।” कर्मचारियों के कल्याण के प्रति पंजाब सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मैं पटवारियों से अपील करता हूं कि वे पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम करें और राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि सभी पटवारी सरकार द्वारा उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरी लगन और ईमानदारी से निर्धारित समय में निभाते रहेंगे।” मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार करेगी। उन्होंने कहा कि मैं यूनियन से साथ ही यह अपील करता हूं कि भविष्य में भी सेवा से जुड़े सभी जायज मुद्दों के समाधान के लिए किसी भी तरह की हड़ताल के बजाय बातचीत और आपसी विचार-विमर्श के माध्यम से समाधान निकालना सुनिश्चित करें।”  कर्मचारियों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता कर्मचारियों और जनता के बीच संतुलन बनाते हुए मुख्यमंत्री ने पटवारियों से अपील की कि वे पूरी ईमानदारी और लगन के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की हर जायज़ मांग पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार करने को तैयार है, लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सरकारी योजनाएं बिना किसी रुकावट के सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचें। मुख्यमंत्री ने यूनियन को यह भी नसीहत दी कि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद या मांग को लेकर हड़ताल का रास्ता अपनाने के बजाय आपसी बातचीत और संवाद के जरिए ही समाधान निकाला जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े। AI मास्टरक्लास बैठक में पटवारी कैडर को राज्य स्तरीय से वापस जिला स्तरीय करने की मांग को भी सरकार ने सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पटवारियों की वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़ी प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी। जिला स्तरीय कैडर बहाल करने के प्रस्ताव को जल्द ही मंत्रिमंडल की औपचारिक मंजूरी दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने यूनियन के हड़ताल वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पटवारियों से सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचने की अपील भी की। मान ने भविष्य में सेवा संबंधी मांगों के समाधान के लिए हड़ताल के बजाय बातचीत और आपसी विचार-विमर्श का रास्ता अपनाने को कहा है।  

चंबल जल बंटवारे पर अक्टूबर में बड़ा फैसला, चारों बांधों के पानी का होगा आकलन

कोटा मानसून की विदाई का वक्त आ गया है। इस बार राजस्थान और मध्यप्रदेश में मानसून की बेरुखी के कारण बांध पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। ऐसे में रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की कमी रहने की आशंका है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के खेतों को सरसब्ज करने वाली चंबल सिंचाई परियोजना पर भी इसका असर पड़ने वाला है। चंबल के बांधों में भी अपेक्षाकृत कम पानी है। चंबल जल बंटवारे को लेकर मध्यप्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियंत्रण मंडल की तकनीकी समिति की बैठक अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित है। बैठक के मद्देनजर दोनों राज्यों की संयुक्त समिति चंबल के चारों बांधों में उपलब्ध पानी का आकलन करेगी। इसी के आधार पर दोनों राज्यों के बीच पानी का बंटवारा तय होगा। जल बंटवारे में पेयजल और उद्योगों के लिए पानी आरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद वाष्पीकरण ह्रास का आकलन कर सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी की मात्रा तय की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि तकनीकी समिति की बैठक का शेड्यूल 25 सितम्बर तक तय किया गया था, लेकिन हाल में दोनों राज्यों में हुई बारिश से बांधों में पानी की आवक हुई है। इसलिए अब पानी का आकलन पांच अक्टूबर तक किया जाएगा। इसके बाद दोनों राज्यों की संयुक्त बैठक होगी। इस बार बैठक की अध्यक्षता राजस्थान के मुख्य अभियंता करेंगे। चंबल के बांध कितने भरे हैं बांध    जलभराव (%) गांधी सागर बांध    75.65 राणाप्रताप सागर बांध    73.29 जवाहर सागर बांध    75.64 कोटा बैराज    98.08 गांधी सागर बांध का जलस्तर 1302.14 फीट पहुंचा चंबल नदी के सबसे बड़े बांध गांधी सागर का जलस्तर हाल में हुई बारिश से करीब एक फीट बढ़ गया है। गांधी सागर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में पिछले सप्ताह अच्छी बारिश हुई। इससे बांध का जलस्तर भराव क्षमता 1312 फीट के मुकाबले 1302.14 फीट तक पहुंच गया है। यह कुल जलभराव क्षमता का 75.65 प्रतिशत है। फैक्ट फाइल     1960 में चम्बल का नहरी तंत्र विकसित     63 दाईं और बाईं मुख्य नहर की शाखाओं, उपशाखाओं व वितरिकाओं की संख्या     16 किमी आबादी क्षेत्र में दाईं मुख्य नहर व इसकी छोटी नहर     5 किमी आबादी क्षेत्र में बाईं मुख्य नहर, माइनरें तथा वितरिकाएं     1.27 लाख हैक्टेयर दाईं मुख्य नहर का सिंचित क्षेत्र     1.2 लाख हैक्टेयर बाईं मुख्य नहर का सिंचित क्षेत्र     6656 क्यूसेक दाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता     1500 क्यूसेक पानी बाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता     3 लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित     124 किमी दाईं मुख्य नहर राजस्थान में     248 किमी मध्यप्रदेश की सीमाओं में जल प्रवाहित करती है     24.6 प्रतिशत हिस्सेदारी एमपी की होती है दाईं मुख्य नहर के समस्त कार्यों में     24.6 प्रतिशत राशि राजस्थान वहन करता है दाईं मुख्य नहर के कार्यों में इनका कहना है अक्टूबर के पहले सप्ताह में जल बंटवारे को लेकर बैठक प्रस्तावित है। इसमें पानी के साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी। फिलहाल बैठक का एजेंड़ा नहीं आया है। बैठक में मुख्यतया जल प्रवाह के संबंध में ही चर्चा होगी। -संजय सिंह, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा

ई-चालान का नया नियम लागू, जुर्माने के खिलाफ अपील का मौका; 30 दिन में निस्तारण अनिवार्य

लखनऊ केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने वाहनों के चालान को और सख्त बनाया है। वाहन के जुर्माने पर हर जिले में सुनवाई कराने के लिए न्याय निर्णायक प्राधिकारी नियुक्त होगा व अपील करने की भी सुविधा मिलेगी। सुनवाई, अपील की 30-30 दिन में सुनवाई करके निर्णय देना होगा। ऐसा न होने पर प्राधिकारी व अपील अधिकारी पर भी पांच से 10 हजार रुपये जुर्माना लगेगा। इसका नेक्स्ट जेन ई-चालान मोबाइल एप व पोर्टल बुधवार मध्यरात्रि से प्रभावी हो गया है। दैनिक जागरण ने 28 जुलाई को अब वाहन चालान के जुर्माने पर हर जिले में होगी सुनवाई शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था। केंद्रीय मंत्रालय मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 167-ख में वाहनों के चालान के जुर्माने का निर्णय करने का नियम बनाया। इसमें प्रदेश सरकार हर जिले में जुर्माने का फैसला करने के लिए न्याय निर्णायक प्राधिकारी नियुक्त करेगी। यह प्राधिकारी ऑनलाइन व इलेक्ट्रानिक माध्यम से 30 दिनों में सुनवाई करके निर्णय देगा। यदि निर्णय से कोई व्यक्ति संतुष्ट नहीं है तो आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) या समकक्ष अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील कर सकता है। अपीलीय प्राधिकारी को 30 दिनों के भीतर निस्तारण करना होगा। यदि किसी आदेश के 30 दिन निकल जाएं और उचित कारण हो तो 30 दिन अपील स्वीकार की जा सकती है। सुनवाई व अपील अधिकारी यदि 30 दिन में निर्णय नहीं देता तो उस अधिकारी पर 5000 से 10,000 तक का जुर्माना भी लगेगा।यदि किसी वाहन ई-चालान हो गया व वाहन स्वामी चालान का भुगतान नहीं करता है या कोर्ट व अधिकारी की ओर से तय जुर्माना भरने का आदेश होने के बाद भी भुगतान नहीं करता है तो जब तक चालान का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक वाहन से संबंधित अधिकांश सेवाएं जैसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का ट्रांसफर, एनओसी, डुप्लीकेट आरसी आदि जारी नहीं होंगी। वाहन पोर्टल पर संबंधित वाहन के कालम में लेनदेन न करने योग्य लिख दिया जाएगा। ऐसे वाहन स्वामी को चालान जमा करने की सूचना आनलाइन भेजी जाएगी। वहीं, यदि चालान का मामला अभी कोर्ट या सक्षम प्राधिकारी के पास विचाराधीन है तो उस दौरान यह प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। उल्लेखनीय है कि अभी तक वाहन का चालान होने पर 90 दिन बाद प्रकरण को संबंधित कोर्ट में भेजने का नियम रहा है। यूपी में इस तरह हुए चालानप्रदेशभर में 2024-25 में 27 लाख एक हजार 786 ई-चालान जारी हुए थे। इनमें चार पहिया वाहन आधे से अधिक हैं। इनमें 2,79,296 वाहन ऐसे हैं जिन पर कई तरह के चालान लंबित है। 2025-26 में प्रदेशभर में 30 लाख से अधिक वाहनों का चालान हुआ था।

बिहार पंचायत चुनाव 2026: EBC आरक्षण के लिए होगा सामाजिक-आर्थिक सर्वे, 50% की सीमा तय

पटना बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लिए आरक्षण का मानक तय हो गया है। पंचायती राज विभाग द्वारा तय गाइडलाइन के आधार पर राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग अध्ययन करेगा। अत्यंत पिछड़ा वर्ग में शामिल लगभग 122 जातियों की सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का आकलन होगा। इसके लिए जल्द ही अत्यंत पिछड़ा वर्ग से जुड़े गांवों और शहरों में सर्वे शुरू होगा। ईबीसी आयोग निर्धारित मानक पर सर्वें करा कर पंचायत चुनाव में ईबीसी प्रतिनिधियों लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करने की अनुशंसा करेगी। पंचायत चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (एनेक्सर-1) के लिए अधिकतम 50 फीसदी ही आरक्षण देना है। पिछले दिनों पंचायती राज विभाग और ईबीसी आयोग के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। आयोग ने विभाग से अध्ययन के लिए सहायता मांगी थी। पंचायती राज विभाग ने आयोग को भरोसा दिया है कि डीएम सहित जिलों के संबंधित विभागीय अधिकारियों को पत्र भेज कर आयोग को मदद दिलायेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिहार के पंचायत चुनावों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लोगों को आरक्षण देने के पहले त्रिस्तरीय जांच (ट्रिपल टेस्ट) अनिवार्य है। इसमें पहली शर्त है कि किसी भी स्थिति में आरक्षण का दायरा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। दूसरा, अत्यंत पिछड़ा वर्ग की किन-किन जातियों को आरक्षण की वास्तव में जरूरत है। तीसरा, इसके लिए समर्पित आयोग हो, जो समयसीमा में अध्ययन कर रिपोर्ट दे। सरकार ने पहले ही ईबीसी आयोग को अध्ययन के लिए समर्पित आयोग घोषित कर दिया है। एससी-एसटी से बचे हिस्से में ही ओबीसी को आरक्षण वर्तमान में उपलब्ध जनगणना पर राज्य की कुल आबादी में जितनी आबादी एससी- एसटी की होगी, इन वर्ग को उतना प्रतिशत आरक्षण देना है। एससी-एसटी से बचे हिस्से में ही अत्यंत पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया जा सकता है। बीते पंचायत चुनाव में यहां पिछड़ा वर्ग को 20% आरक्षण दिया गया था। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में भी ईबीसी को आरक्षण लगभग पिछले चुनाव की तरह ही मिलेगा। अत्यंत पिछड़ा वर्ग में 122 जातियां अत्यंत पिछड़ा वर्ग में लगभग 122 जातियां हैं। गाइडलाइन के आधार पर अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग पंचायतों में ओबीसी की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को देगा। सामान्य प्रशासन विभाग से रिपोर्ट पंचायती राज विभाग को मिलेगी। इसके बाद यह रिपोर्ट निर्वाचन विभाग को भेजी जायेगी। राज्य स्तर पर आरक्षण का दायरा तय नहीं होगा, बल्कि पंचायत ही मानक रखा गया है। परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या बढ़ने की स्थिति में ईबीसी के लिए आरक्षित पंचायतों की संख्या में भी वृद्धि तय है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग में प्रमुख जातियां कहार, कुम्हार, धानुक, लोहार, तेली, मल्लाह, कानू, नाई आदि पंचायतों के नये परिसीमन के बाद होगा चुनाव राज्य में वर्तमान में 8049 ग्राम पंचायत हैं। नये परिसीमन के बाद ग्राम पंचायतों की संख्या 12500 हजार से अधिक होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन विभाग को परिसीमन करना है। ● आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। ● पंचायतवार अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी का आकलन। ● ईबीसी के परिवारों की आर्थिक स्थिति। ● संसद, विधानसभा, नगर निकाय व पंचायतों में ओबीसी का वर्तमान प्रतिनिधित्व। ● अत्यंत पिछड़ा वर्ग का सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति।