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खरगोन में प्राइवेट स्कूल की सुस्ती, 12वीं के 13 छात्र अंग्रेजी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके

खरगोन  खरगोन जिले के गायत्री विद्यापीठ हायर सेकंडरी स्कूल की घोर लापरवाही के कारण 12वीं कक्षा के 13 छात्र अंग्रेजी की बोर्ड परीक्षा नहीं दे सके. स्कूल प्रबंधन ने छात्रों से परीक्षा फॉर्म तो भरवा लिए, लेकिन उनकी फीस माध्यमिक शिक्षा मंडल को समय पर नहीं भेजी. इस कारण इन छात्रों के प्रवेश पत्र जनरेट नहीं हुए. जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर भीकनगांव में गायत्री विद्यापीठ हायर सेकंडरी स्कूल प्रबंधन ने 10वीं और 12वीं के नियमित 23 बच्चों के फॉर्म तो भरवाए, लेकिन उनकी परीक्षा फीस माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board) भोपाल को नहीं भेजी गई.  लापरवाही की हद तो तब हो गई जब स्कूल प्रबंधन परीक्षा के 2 दिन पहले तक भी नहीं जागा. मंगलवार  यानी 10 फरवरी को आयोजित 12वीं की अंग्रेजी की परीक्षा के लिए जब बच्चों को सोमवार के दिन तक प्रवेश पत्र नहीं मिले तो उन्होंने स्कूल से संपर्क किया तब यह पता चला कि बच्चों की फीस ही जमा नहीं की गई है. धीरे-धीरे सभी पालकों को पता चला तो गुस्साए पालक स्कूल पहुंच गए, यहां जमकर हंगामा हुआ.  इसके बाद सैकड़ों लोगों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ खंडवा वडोदरा स्टेट हाईवे पर गांधी प्रतिमा के सामने चक्काजाम कर दिया. चक्का जाम आधी रात तक जारी रहा. थाना इंचार्ज और बीईओ दिनेश पटेल ने गुस्साए लोगों को समझने का प्रयास किया लेकिन कोई नहीं माना. स्कूल प्रबंधन ने ताबड़तोड़ माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल के अकाउंट में 3 लाख 73 हजार जमा किए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि मंगलवार को ही 12वीं के 13 बच्चों को अंग्रेजी के पेपर में शामिल होना था. कलेक्टर और शिक्षा विभाग ने भी प्रयास किए, लेकिन पोर्टल बंद होने और समय की कमी के चलते मंगलवार सुबह होने वाले पेपर के लिए प्रवेश पत्र नहीं मिल सके. मामले को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिनेश पटेल का कहना है, छात्रों के फॉर्म तो भरवा गए, लेकिन उनकी फीस जमा नहीं की गई. इससे बच्चे परीक्षा से वंचित हुए हैं. इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को अवगत कराया गया है. स्कूल प्रबंधन के खिलाफ वे ही कार्रवाई करेंगे. 

गोविंदपुरा थाने पहुंचे पुलिस आयुक्त संजय कुमार

गोविंदपुरा थाने पहुंचे पुलिस आयुक्त संजय कुमार   थाने में दर्ज आपराधिक मामलों का रिकॉर्ड, लंबित प्रकरणों की जानकारी और बीटचार्ज का लिया जायजा  भोपाल  राजधानी भोपाल के नवागत पुलिस आयुक्त संजय कुमार लगातार थानों का जायजा ले रहे हैं। इसी कड़ी में पुलिस आयुक्त सोमवार रात गोविंदपुरा थाने पहुंचे। उन्होंने थाने में दर्ज अपराधों की जानकारी और लंबित मामलों की समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा निर्देश दिए। पुलिस आयुक्त ने बीटचार्ट और ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही थाने की स्वच्छता और आगंतुकों के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। दरअसल नए पुलिस आयुक्त संजय कुमार की कार्य प्रणाली अन्य अधिकारियों से कुछ हटकर है। वह कार्यालय से दिशा निर्देश देने से ज्यादा जरूरी फील्ड में उतरकर काम करने में विश्वास रखते हैं। इसी के चलते पुलिस आयुक्त लगातार अलग-अलग थानों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। पुलिस आयुक्त अपराधियों से सख्ती से निपटने और आमजनों से सद्व्यवहार करने की नसीहत पहले ही दे चुके हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि थानों के निरीक्षण के बाद काम में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।

मुख्यमंत्री का निर्देश, प्रदेश में इको-टूरिज्म विकास हेतु समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए

निजी क्षेत्र की भागीदारी से इको-टूरिज्म स्थलों पर विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित हों: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, प्रदेश में इको-टूरिज्म विकास हेतु समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए प्रकृति संरक्षण, रोजगार और निवेश का समन्वित मॉडल बने इको-टूरिज़्म, स्थानीय सहभागिता अनिवार्य: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज़्म विकास बोर्ड की बैठक सप्ताहांत में दिल्ली-पलिया और लखनऊ पलिया बस सेवाएं शुरू हों: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म को रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाते हुए इसके लिए एक समग्र एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की समृद्ध जैवविविधता, वन क्षेत्रों और प्राकृतिक विरासत में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं निहित हैं, जिन्हें योजनाबद्ध ढंग से धरातल पर उतारने की आवश्यकता है। इसके लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि इको-टूरिज्म को एक सशक्त और टिकाऊ उद्योग के रूप में विकसित किया जा सके। सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म विकास बोर्ड की बैठक मेंमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चयनित इको-टूरिज्म स्थलों पर पर्यटकों के लिए अच्छे होटल और स्तरीय रेस्टोरेंट, गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए, जिससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि गोरखपुर का कुसम्ही जंगल, अयोध्या का कुमारगंज क्षेत्र, गाजीपुर का कामाख्या वन पार्क तथा लखीमपुर खीरी की महेशपुर रेंज जैसे संभावनाशील क्षेत्रों को पीपीपी मॉडल के माध्यम से विकसित किया जाए और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जैवविविधता, प्राकृतिक संपदा, वेटलैंड, झीलें, वन्यजीव और नदी तंत्र केवल पर्यटन का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य का आधार हैं। उन्होंने कहा कि इको-टूरिज्म आने वाले वर्षों में रोजगार, अर्थव्यवस्था, संरक्षण और वैश्विक पहचान का बड़ा स्तंभ बनेगा, इसलिए प्रत्येक जिले में सुरक्षित, स्वच्छ और सस्टेनेबल इको-टूरिज़्म मॉडल विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इको-टूरिज्म को प्रकृति संरक्षण, स्थानीय रोजगार, निजी निवेश और ग्रामीण विकास का मजबूत मॉडल बनाया जाए तथा इसके संचालन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए।  बैठक में अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच दुधवा, पीलीभीत, रानीपुर और कतरनियाघाट टाइगर रिज़र्व सहित हैदरपुर, बखिरा, सूर सरोवर, समसपुर और नवाबगंज जैसे प्रमुख वेटलैंड्स में कुल 44 इको-टूरिज़्म इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। बोर्ड अब परिसंपत्तियों के मॉनेटाइजेशन और दीर्घकालिक सस्टेनेबिलिटी पर काम कर रहा है, जिसके तहत इको लॉज, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और पर्यटक सुविधाओं के लिए पीपीपी मॉडल लागू किया जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कनेक्टिविटी सुधार पर जोर देते हुए कहा कि लखनऊ-पलिया और नई दिल्ली-पलिया के बीच सप्ताहांत एसी बस सेवा का संचालन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पीलीभीत-मैलानी-बहराइच के लिए क्षेत्रीय बस सेवा प्रारंभ करने के निर्देश दिए और कहा कि परिवहन निगम के सफल मॉडल को देखते हुए इन सेवाओं का विस्तार अन्य इको-टूरिज़्म स्थलों तक किया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2025-26 में विभिन्न जिलों जैसे अयोध्या, आगरा, गोरखपुर, लखनऊ, चित्रकूट, महराजगंज, प्रयागराज, बांदा, बहराइच, सीतापुर, उन्नाव, बलिया, इटावा, मैनपुरी आदि में नए पार्क, इंटरप्रिटेशन सेंटर, वेटलैंड विकास, बर्ड वॉचिंग टॉवर, ट्रेल्स, कैंपिंग और पर्यटक सुविधाओं पर आधारित कुल 31 नई परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। बोर्ड द्वारा एक एआई चैटबॉट और मोबाइल एप भी विकसित किया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पर्यटन विकास की विभागीय गतिविधियों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण सक्सेना की गरिमामयी सहभागिता रही।

मथुरा: एक ही परिवार के 5 सदस्य दूध में जहर मिलाकर खाने से मृत

मथुरा  उत्तर प्रदेश के मथुरा से बड़ी और दुखद खबर सामने आ रही है. महावन थाना क्षेत्र के खप्परपुर गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों ने जहर खा लिया. इस दर्दनाक घटना में पति-पत्नी सहित तीन बच्चो की मौत हो गई है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. फिलहाल ज़हर खाने के कारणों का पता नहीं चल सका है. पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है. इस घटना के बाद आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची और शव को अपने कब्जे में कर पोस्टमार्टम के लिए ले गई है. मृतक परिवार के घर के बाहर भारी तादात में लोग मौजूद है.

शादी में मामा का तोहफा: 81 लाख नकद, 25 तोला सोना और 1 करोड़ 61 लाख का मायरा

नागौर राजस्थान के नागौर जिले के जायल में एक बार फिर मायरा की चर्चा छा गई है, लेकिन इस बार जाट समाज के बाद ब्राह्मण भाइयों ने इतिहास रच दिया. यहां दो ब्राह्मण भाइयों ललित कुमार व्यास और ओमप्रकाश व्यास ने अपनी बहन गायत्री देवी के बेटे नीलेश की शादी में 1 करोड़ 61 लाख रुपये का भव्य मायरा भरा. यह ब्राह्मण समाज में अब तक का सबसे बड़ा मायरा माना जा रहा है, जिसने जायल की परंपरा को नई ऊंचाई दी है. यह रस्म जायल के माहेश्वरी भवन में पारंपरिक विधि-विधान से पूरी हुई. पिता श्यामसुंदर व्यास की मौजूदगी में भाइयों ने बहन गायत्री को चुनरी ओढ़ाकर मायरा भरा. यह न सिर्फ भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है, बल्कि ब्राह्मण समाज की एकता, संस्कार और परंपरा को भी दर्शाता है. ब्रॉम्हण भाइयों के मायरे की खास बातें – 81 लाख रुपये नकद – 25 तोला सोना – चांदी के जेवरात – अन्य कपड़े, उपहार और सामान जायल का मायरा है एक ऐतिहासिक परंपरा  राजस्थान के नागौर जिले में जायल-खिंयाला का मायरा सदियों पुरानी संस्कृति का हिस्सा है. यहां मामा (भाई) अपनी बहन के बच्चों की शादी में दिल खोलकर उपहार देते हैं, जिसे महिलाएं विशेष गीतों (जायल खिंयाला रो मायरो) में गाती हैं. पहले मुख्य रूप से जाट समुदाय में बड़े मायरे चर्चित थे, लेकिन अब अन्य समाज भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. आपको बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में नागौर में कई बड़े मायरे भरे गए हैं. जिसके तहत कुछ परिवारों ने करोड़ों की जमीन, नकद, सोना-चांदी दिए. जबकि हाल ही में 21 करोड़ से ज्यादा के मायरे भी सुर्खियां बने. लेकिन इस बार ब्राह्मण समाज का यह योगदान खास है. क्योंकि यह समाज में एक नई मिसाल कायम कर रहा है. आज भी जीवंत हैं राजस्थान की परंपरा जायल क्षेत्र में इस ऐतिहासिक मायरे की हर ओर चर्चा है. भाई-बहन का प्यार, परंपरा का सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा का जीता-जागता उदाहरण भी है. साथ ही यह मायरा बताती है कि राजस्थान की रस्में आज भी जीवंत हैं, जहां रिश्ते पैसे से नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कारों से मजबूत होते हैं.   

आयुर्वेद के संवर्धन में सरकार का कदम, भजनलाल शर्मा ने किया स्पष्ट बयान

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की मिट्टी में आयुर्वेद की जड़ें गहरी हैं, यहां औषधि उत्पादन की अद्भुत क्षमता है। प्रदेश की पहाड़ी, वन, औषधीय पौधे इसके साक्षी हैं कि यहां की भूमि सदियों से आयुर्वेद का केंद्र रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आयुर्वेद के संवर्धन तथा जनमानस में उसके व्यापक उपयोग के लिए प्राथमिकता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने  राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह में अपने उद्बोधन के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1976 में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान एक महाविद्यालय के रूप में आरंभ होकर आज देश के प्रमुख डीम्ड टू बी आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित हो गया है। राजस्थान की धरती पर स्थापित इस संस्थान ने पचास वर्षों में जिस ऊंचाई, प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय नेतृत्व को प्राप्त किया है, वह प्रेरणास्पद है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोगी सेवा – इन चारों स्तंभों पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने पिछले पांच दशकों में नेतृत्व स्थापित किया है। देश को विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद और योग की प्रमुख भूमिका मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश को विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद और योग की प्रमुख भूमिका रही है। आयुर्वेद के माध्यम से हम यह पहले से ही जान लेते हैं कि कौन से महीने में कौन सी बीमारी होगी और उसका उपचार कैसे किया जाए। उन्होंने कहा कि वेदों के साथ हमारे ऋषियों ने आयुर्वेद के माध्यम से मानव जीवन को समझा है। चरक, सुश्रुत, वाग्भट्ट जी जैसे महान वैद्यों ने इस विद्या को व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने कहा कि चरक संहिता में कहा गया है कि स्वस्थ शरीर धर्म का प्रथम साधन है। सुश्रुत को आज पूरा विश्व शल्य चिकित्सा का जनक मानता है। प्रधानमंत्री का सपना ‘भारत में उपचार और भारत द्वारा उपचार’ शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना ‘भारत में उपचार और भारत द्वारा उपचार’ है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एक अलग आयुष मंत्रालय की स्थापना की गई। जिससे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नई ऊर्जा मिली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में अपने प्रयासों से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कराया। इससे न केवल योग, बल्कि पूरी भारतीय चिकित्सा परंपरा को विश्व मंच पर पहचान मिली। आयुर्वेद अनुसंधान में निवेश बढ़ाया गया, आयुर्वेद संस्थानों का विस्तार किया गया। आयुर्वेद को जन-स्वास्थ्य की मुख्यधारा में आगे बढ़ाना हमारी प्राथमिकता शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्षों में आयुर्वेद के लिए नए आयुर्वेद चिकित्सालय, महाविद्यालय एवं डिस्पेंसरी की स्थापना से सुलभ चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की गई। स्नातक-स्नातकोत्तर सीटों में वृद्धि, आधुनिक लैब, ड्रग-स्टैंडर्डाइजेशन यूनिट और शिक्षण-फार्मेसी को सुदृढ़ किया गया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद अस्पतालों का विस्तार, पंचकर्म इकाइयों का सुदृढ़ीकरण, दवाखानों का आधुनिकीकरण, शिक्षा एवं अनुसंधान के नए अवसर सहित विभिन्न निर्णयों से आयुर्वेद को जन-स्वास्थ्य की मुख्यधारा में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने एनआईए के लिए जयपुर में जमीन आवंटित करने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। एनआईए की भूमिका से पीढ़ी दर पीढ़ी आयुर्वेद का दीपक प्रज्वलित केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय प्रताप राव जाधव ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की 50 वर्ष की यह यात्रा केवल समय की गणना नहीं है, बल्कि उन असंख्य चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, और कर्मयोगियों की अटूट निष्ठा, समर्पण और तपस्या का प्रतीक है, जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी आयुर्वेद के दीपक को प्रज्वलित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोगों की असंतुलित जीवनशैली के कारण मधुमेह, विटामिन बी 12 एवं डी की कमी जैसी अनेक बीमारियां पनप रही हैं। इन बीमारियों के निदान के लिए योग एवं आयुर्वेद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शक्तिशाली नेतृत्व में हमारी सरकार का विजन स्पष्ट है परंपरा की जड़ों में विज्ञान का संरक्षण और कल्याण की शाखाओं का विस्तार। भारत सरकार का उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना ही नहीं, बल्कि स्वस्थ, सशक्त और संतुलित व्यवस्था का निर्माण करना है। उन्होंने इस वर्ष के बजट में आयुर्वेद के तीन नए अखिल भारतीय संस्थान सहित सभी घोषणाओं के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान में आयुष के क्षेत्र में हो रहे उल्लेेखनीय कार्य की भी सराहना की। उप मुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना लाकर आयुर्वेद और योग के माध्यम से आरोग्य ग्राम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व को आयुर्वेद और योग भारत की देन है। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नेशनल आयुष मिशन में वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना के तहत राजस्थान को देश में सर्वाधिक 348 करोड़ रुपए आवंटित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एनआईए परिसर में नवनिर्मित ओपीडी सुश्रुत भवन का लोकार्पण किया। इससे पहले उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर विधायक बालमुकुन्द आचार्य, केन्द्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, एनसीआईएसएम अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोटेकर, प्रमुख शासन सचिव आयुष सुबीर कुमार, एनआईए कुलपति प्रो. संजीव शर्मा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े प्रत्येक प्रस्ताव में पर्यावरणीय जोखिम और जैव-विविधता का वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य: मुख्यमंत्री

वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में सभी विकास कार्य वैज्ञानिक मानकों और पर्यावरणीय संतुलन के साथ हों: मुख्यमंत्री वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े प्रत्येक प्रस्ताव में पर्यावरणीय जोखिम और जैव-विविधता का वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य: मुख्यमंत्री राज्य वन्यजीव परिषद की बैठक में विभिन्न जनपदों की अनेक विकास परियोजनाओं को मिली मंजूरी विकास की आड़ में अनावश्यक वृक्ष कटान नहीं, विकल्पों में इको-फ्रेंडली तकनीक अपनाई जाए: मुख्यमंत्री वेटलैंड्स प्राकृतिक धरोहर, सिल्ट हटाने का कार्य तत्काल कराया जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित सभी विकास एवं निर्माण कार्य वैज्ञानिक मानकों, न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव और विधिक प्रक्रियाओं के पूर्ण अनुपालन के साथ ही किए जाएंगे। उन्होंने कहा है कि विकास की प्रत्येक प्रक्रिया में वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवागमन तथा आवासीय निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सोमवार को राज्य वन्यजीव परिषद की 20वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े सभी विकास प्रस्ताव संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ तैयार किए जाएं। प्रस्ताव भेजते समय संबंधित विभाग पर्यावरणीय जोखिम, जैव-विविधता पर संभावित प्रभाव, वन्यजीव मूवमेंट, वैकल्पिक मार्गों और आधुनिक तकनीकी समाधानों का विस्तृत एवं वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित एवं टिकाऊ दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में विभिन्न वन्य जीव क्षेत्रों में विकास की विभिन्न परियोजनाओं पर निर्णय भी हुआ। परिषद के समक्ष कुल 12 नए प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें सड़क चौड़ीकरण, पेट्रोल पंप एवं फ्यूल स्टेशन स्थापना, ट्यूबवेल प्रेशर प्रणाली, भूमिगत पाइपलाइन, मोबाइल टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल तथा संपर्क मार्ग निर्माण जैसी विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। ये प्रस्ताव इटावा, गोंडा, पीलीभीत, बरेली, बांदा सहित विभिन्न जनपदों के वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों तथा इको-सेंसिटिव जोन से संबद्ध हैं। बैठक में परियोजनाओं पर सहमति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने वृक्ष कटाई से संबंधित प्रस्तावों पर विशेषज्ञों की राय लेते हुए निर्देश दिए कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक वृक्ष कटान की अनुमति न दी जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वृक्षों की कटाई केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही की जाए और विकास की आड़ में पर्यावरण को क्षति न पहुँचे। जहां विकल्प उपलब्ध हों, वहां ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी, एलिवेटेड स्ट्रक्चर तथा इको-फ्रेंडली तकनीकों को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं की गति और वन्यजीव संरक्षण, दोनों राज्य सरकार की प्राथमिकताएं हैं और उत्तर प्रदेश सरकार संतुलित, वैज्ञानिक तथा दूरदर्शी नीति के साथ इन दोनों उद्देश्यों को साथ लेकर आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ वेटलैंड्स में सिल्ट जमा होने की जानकारी उनके संज्ञान में आई है, जिसका तत्काल निराकरण कराया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यह कार्य ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अभियान के अंतर्गत कराया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वेटलैंड्स प्राकृतिक धरोहर हैं और प्रत्येक दशा में उनका संरक्षण किया जाना चाहिए।

प्रदेश में भूख नहीं, अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख परिवारों को मिला सरकारी सहारा

आर्थिक समीक्षा प्रदेश में अब नहीं सोता कोई भूखा, अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख परिवार लाभान्वित 78,510 उचित दर दुकानें संचालित, 22.9% दुकानें महिलाओं को आवंटित 'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' की बहुद्देशीय पहल के अंतर्गत 7481 अन्नपूर्णा भवन निर्मित लखनऊ  वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा विधानमंडल में प्रस्तुत पहली आर्थिक समीक्षा के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत प्रदेश सरकार, गरीब एवं पात्र परिवारों को निःशुल्क और रियायती दरों पर खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिये प्रतिबद्ध है। इस हेतु पात्र परिवारों का चयन कर राशन कार्ड जारी किये गये हैं, जिनको डिजिटल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। प्रदेश में दिसंबर, 2025 तक कुल 78,510 उचित दर दुकानें संचालित है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र की 67,114 तथा नगरीय क्षेत्र की 11,396 दुकाने हैं। इसमें 22.9% दुकानें महिलाओं को आवंटित हैं। राज्य में दिसंबर, 2025 तक जारी कुल 362.35 लाख राशनकार्ड्स में अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख (11.27%) परिवार एवं पात्र गृहस्थी श्रेणी के 321.50 लाख (88 73%) परिवार हैं, जो उक्त अधिनियम के अन्तर्गत आच्छादित हैं। वन नेशन वन राशनकार्ड बना संबल वर्ष 2020-21 से प्रारम्भ वन नेशन बन राशनकार्ड' योजनान्तर्गत अन्तर्राज्यीय पोर्टेबिलिटी (उत्तर प्रदेश के लाभार्थियों द्वारा अन्य राज्यों में प्राप्त किया) की सुविधा से वर्ष 2024-25 में 38.12 लाख राशनकार्ड धारक लाभान्वित हुए, जो योजना प्रारंभ के अग्रिम वर्ष 2021-22 में लाभान्वित 8.88 लाख के सापेक्ष (03 वर्षों में) कई गुना वृद्धि है। वर्ष 2025-26 के अंतर्गत दिसंबर, 2025 तक 28.03 लाख लाभान्वित हुए हैं। 'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' के तहत 7481 अन्नपूर्णा भवन 'मॉडल फेयर प्राईस शॉप' की बहुद्देशीय पहल के अंतर्गत 31 जनवरी, 2026 तक कुल 7481 अन्नपूर्णा भवन निर्मित कराये गये हैं, जिनमें राशन वितरण के साथ सी एस सी सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं। सी. पी. आई आधारित मुद्रास्फीति की दर कोविड के बाद लगातार गिरावट के साथ वर्ष 2025-26 में माह अक्टूबर, 2025 तक (-)1.71 हो गयी, जिसके फलस्वरूप महगाई नियंत्रित हुयी, क्रय शक्ति बढ़ी तथा मांग आधारित अर्थव्यवस्था में सुधार परिलक्षित हुआ। अद्यतन प्रकाशित बहुआयामी गरीबी (हेडकाउंट रेशियो आकलन) वर्ष 2013-14 में 42.59% थी. जो वर्ष 2022-23 में तेजी से घटते हुए 17.40% रह गयी, इस अवधि में प्रदेश के सर्वाधिक 5.94 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आये।

कानपुर में नवजात की मृत्यु पर गुस्से का मंजर, राजा नर्सिंग होम के खिलाफ FIR दर्ज

 कानपुर बिठूर के ब्रह्मनगर स्थित राजा नर्सिंग होम में एनआईसीयू के भीतर वार्मर मशीन में आग लगने से नवजात बच्ची की जलकर मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर कराई गई जांच में सामने आया कि अस्पताल में बिना अनुमति के एनआईसीयू यूनिट संचालित की जा रही थी. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, नर्सिंग होम का पंजीकरण तो था, लेकिन एनआईसीयू संचालन की अनुमति कभी नहीं ली गई. इसके बावजूद परिसर में अवैध रूप से एनआईसीयू चलाया जा रहा था.  निरीक्षण के दौरान अग्निशमन यंत्रों की वैधता अवधि समाप्त पाई गई, जो गंभीर सुरक्षा लापरवाही को दर्शाता है. इसके चलते मौके पर ही अवैध एनआईसीयू यूनिट को सील कर दिया गया. गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए राजा नर्सिंग होम (पंजीकरण संख्या RMEE2122829) का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द कर अस्पताल को पूरी तरह बंद करने के आदेश दिए गए हैं. प्रबंधन को तीन कार्य दिवसों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का नोटिस भी जारी किया गया है. आदेशों की अवहेलना करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. वहीं, पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर बिठूर थाने में अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले को लेकर परिजनों में भारी आक्रोश है. उन्होंने सख्त एक्शन की मांग की है.  गौरतलब है कि यह घटना निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता और लचर व्यवस्था को उजागर करती है. पहली संतान खोने वाले परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. स्थानीय प्रशासन अब अस्पताल की अन्य कमियों की भी फाइल खंगाल रहा है. पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. फिलहाल अस्पताल परिसर में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है और स्वास्थ्य विभाग की टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है.

इंदौर में नर्मदा लाइन का अड़चन: सड़क के बीच बिछी लाइन से एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने में होगी परेशानी

इंदौर  इंदौर में छह किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की कवायद की जा रही है, लेकिन उसे बनाना इतना आसान भी नहीं होगा, क्योंकि जब बीआरटीएस कॉरिडोर पंद्रह साल पहले बनाया गया था, तब नर्मदा लाइन सड़क के बीच वाले हिस्से में डाली गई थी। इसके अलावा हर चौराहे पर सीवरेज के बड़े पाइप भी क्रॉस हुए हैं। यदि एबी रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनता है तो जगह-जगह लाइनों को शिफ्ट करना होगा। इसमें काफी समय लगेगा।  बीआरटीएस निर्माण की समयसीमा दो साल तय की गई थी, लेकिन उसके बनने में पांच साल से अधिक का समय लगा, क्योंकि एबी रोड पर ट्रैफिक का दबाव काफी रहता है। ट्रैफिक को दूसरे रूटों पर भी ज्यादा डायवर्ट नहीं किया जा सकता है। यह परेशानी एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने में भी आएगी। व्हाइट चर्च चौराहे पर पथरीली जमीन एलिवेटेड कॉरिडोर के कॉलम बनाने के लिए जमीन में गहरी खुदाई करना होगी। इसमें सबसे ज्यादा समय गीता भवन से जीपीओ के बीच लगेगा। यहां पथरीला हिस्सा है। सीवरेज लाइन बिछाने के लिए इस हिस्से में चट्टानें तोड़ने के लिए विस्फोट का इस्तेमाल किया गया था। यहां लाइन शिफ्ट करना पड़ी तो उसके लिए भी अलग से खुदाई करना होगी। लंबी दूरी का ट्रैफिक और होगा कम एलआईजी से भंवरकुआं या राजीव गांधी चौराहे तक शहरवासियों को जाना हो तो वे अब रिंग रोड का उपयोग करने लगे हैं, क्योंकि खजराना चौराहा, बंगाली चौराहा, वर्ल्ड कप चौराहा, पालदा चौराहा पर ब्रिज बनने से अब रिंग रोड पर समय कम लगता है। इस मार्ग पर मुसाखेड़ी और आईटी चौराहे पर भी ब्रिज बन रहे हैं। इसके बाद ट्रैफिक और आसान हो जाएगा। एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर याचिका लगाने वाले अतुल शेठ का कहना है कि रिंग रोड के कारण वैसे ही एबी रोड के ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। इस कारण एलिवेटेड कॉरिडोर ज्यादा उपयोगी साबित नहीं होगा। पहले जब इसे लेकर सर्वे हुआ था, तब ट्रैफिक चार प्रतिशत आया था।