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यूपी के लखीमपुर खीरी में भीषण सड़क दुर्घटना, टेंपो पलटने से चार की जान गई

लखीमपुर खीरी लखीमपुर खीरी के धौरहरा थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। बसंतापुर पुलिया के समीप सवारियों से भरा टेंपो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में तीन मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि टेंपो चालक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों का उपचार चल रहा है। ये सभी लोग रात करीब 12:45 बजे धौरहरा से धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर लोग टेंपो से अपने गांव ऊंचगांव (थाना खमरिया) वापस लौट रहे थे। इसी दौरान घने कोहरे के चलते बसंतापुर पुलिया के पास टेंपो पलट गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) धौरहरा भेजा। इन बच्चों की हुई मौत सीएचसी में चिकित्सकों ने खुशबू (12 वर्ष), अबू तालिब (5 वर्ष) और अजरा (2 वर्ष) को मृत घोषित कर दिया। घायलों में किस्मतुन (45 वर्ष), साकिया (20 वर्ष), सादिया (22 वर्ष), निदा (10 वर्ष), अकील (18 वर्ष) निवासी ऊंचगांव थाना खमरिया तथा टेंपो चालक इसराइल उर्फ जीशान (30 वर्ष) निवासी ग्राम रसूलपुर थाना खमरिया शामिल हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय लखीमपुर खीरी रेफर कर दिया गया। जहां जीशान की भी मौत हो गई है। हादसे के बाद मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। घटना की जांच शुरू कर दी है।  

तीन बच्चों के साथ महिला अचानक गायब, मायके जाने की कही थी बात

बिलासपुर छत्तीसगढ़ में एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ रहस्यमयी तरीके से लापता  हो गई है. महिला कबीरधाम जिले के पांडा तराई क्षेत्र से करीब सात दिन पहले अपने मायके बिलासपुर के अशोकनगर जाने के लिए निकली थी. परिजनों के अनुसार, वह घर से यह कहकर निकली थी कि बच्चों के साथ अस्पताल में इलाज कराने के लिए बिलासपुर जा रही है, लेकिन वहां पहुंचने ही नहीं। घटना के बाद से परिजन परेशान हैं, महिला और बच्चों की तलाश की जा रही है. पांडातराई थाना क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 15 निवासी बिसेन कार्निक पिता राजेन्द्र कार्निक (34 वर्ष) ने पत्नी पुष्पनंदनी कार्निक (26 वर्ष) के तीन बच्चों सहित लापता होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई है. बिसेन कार्तिक ने पुलिस को सिविल लाइन पुलिस को बताया कि, 2 फरवरी को दोपहर लगभग 12 बजे उसकी पत्नी तबीयत खराब होने की बात कहकर इलाज कराने मायके बिलासपुर जाने के लिए तीन बच्चों के साथ शारदा बस से रवाना हुई थी. शाम करीब 6 बजे संपर्क करने पर पत्नी के दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले. इसके बाद ससुराल पक्ष से संपर्क करने पर जानकारी मिली कि, पुष्पनन्दनी वहां भी नहीं पहुंची है. परिजनों द्वारा देर रात तक रिश्तेदारों, बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन में तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. अगले दिन बस चालक से पूछताछ करने पर उसने महाराणा प्रताप चौक में महिला और बच्चों को उतारने की जानकारी दी. लापता पति का पुलिस पर आरोप लापता महिला के पति की शिकायत पर पुलिस थाना में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. वहीं पति का आरोप है कि पुलिस  उसकी पत्नी और बच्चों को ढूंढने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही. उसने पुलिस और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शबरी जयंती पर दीं शुभकामनाएं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मां शबरी जयंती की बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रभु श्रीराम जी की परम भक्त, मां शबरी ने आस्था और श्रद्धा को भक्ति का श्रेष्ठ मार्ग बताया। उन्होंने मां से प्रार्थना की है कि सब पर कृपा बनी रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर किया स्मरण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर उनका स्मरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा, गरीब कल्याण और कमजोर वर्ग के उत्थान के प्रति डॉ. जाकिर हुसैन का समर्पण सदैव याद किया जाएगा।  

सीएम की बड़ी घोषणा: जैतपुर बना नगर परिषद, धनपुरी में शुरू हुआ वाटर पार्क

शहडोल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शहडोल में धनपुरी वाटर पार्क का फीता काटकर शुभारंभ किया। सीएम ने कहा कि इससे क्षेत्र के पर्यटन को रफ्तार मिलेगी। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। उन्होंने जैतपुर नगर को नगर परिषद का दर्जा देने की घोषणा की। सीएम ने कहा- बहनों को आगे बढाना है। विधायक जी ने कुछ मांगा है तो हम मना कैसे कर सकते हैं। 2300 करोड़ की सिंचाई योजना देने की घोषणा करता हूं। जैतपुर में महाविद्यालय का भवन बनेगा। शहडोल में नए महाविद्यालय की शुरूआत किया जाएगा। अब अगली बार भी आना है शेष बात हम बाद में करेंगे। सीएम ने लोगों की मांग पर जैतपुर को नगर पंचायत देने की घोषणा करता हूं।   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुझे धनपुरी के अंदर इतना बढिया स्विमिंग पुल देखकर इंदौर, उज्जैन जैसे बड़े नगर की याद आ गई। जब मैं जय जयकार कराता हूं तो कांग्रेस वालों की पार्टी पर सांप लोट जाते हैं। हम भगवान श्रीराम की जयकार करने वाले लोग हैं। माता शबरी ने वर्षों तक राम का इंतजार किया। भगवान राम प्रेम के वशीभूत होकर शबरी माता के पास पहुंचे। श्रीराम ने शबरी के झूठे बेर खाए। मनुष्य से मनुष्य का प्रेम यह है सनातन संस्कृति की विशेषता। हम जब पूरे शहडोल की तरफ देखते हैं तो देखते हैं यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कितना काम यहां हुआ है। किसानों के हित का पूरा ध्यान रखा। मोदी जी का पूरा जीवन देश के विकास के लिए ही है। भारत का मान सम्मान बढाने के लिए सशक्त बनाने के लिए हम देश के प्रधानमंत्री का जोरदार अभिनंदन करें। धनपुरी धन्य हो गई आज धनपुरी में जो सौगात मिली है वह जंगल में मंगल हो गया है। धनपुरी धन्य हो गई। नगरपालिका अध्यक्ष को बधाई इतनी अच्छी सौगात इस क्षेत्र को मिली है। सभी क्षेत्र में काम करते हुए आज मप्र सबसे आगे बढ रहा है। हम लगातार काम कर रहे हैं। महिला सशक्तिकरण का काम किया गया है। बहुत जल्दी युवाओं को सभी तरह के कल कारखाने की सौगात मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की ओर ध्यान नहीं दिया। हमारी सरकारों के काम करने का तरीका ही अलग है। सांसद बोलीं, मुख्यमंत्री जी छोटी बहन को निराश नहीं करेंगे शहडोल में हुए कार्यक्रम मंच से नगर पालिका धनपुरी की अध्यक्ष रविंद्र कौर छाबड़ा ने विकास कार्य का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। क्षेत्रीय विधायक जयसिंह मरावी ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर मांग पत्र पढ़कर सुनाया। सांसद हिमाद्रि सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मंच भरा पूरा है और समय की सीमा है। आप सबको राम राम करती हूं। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देश व प्रदेश विकास कर रहा है। सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री जी आपके समक्ष जो मांगें विधायक जयसिंह मरावी ने रखी हैं, उनको पूरा करेंगे और छोटी बहन को निराश नहीं करेंगे। माता शबरी की प्रतिमा का अनावरण इसके बाद मुख्यमंत्री गंधिया जनपद पंचायत जयसिंह नगर के लिए प्रस्थान कर स्थानीय कार्यक्रम में सहभागिता निभाएंगे। वह यहां पर सीतामढ़ी धाम में स्थापित की गई माता शबरी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। प्रवास के दौरान शहडोल जिले के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण, भूमि पूजन एवं योजनाओं के लाभांवित हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण करेंगे।  

दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों का नामकरण बदला, राज्य नामकरण प्राधिकरण की रिपोर्ट के बाद लिया गया निर्णय

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने दो मेट्रो स्टेशनों के नाम बदल दिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाली राज्य नामकरण प्राधिकरण (SNA) की सिफारिश के बाद पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार पॉकेट-I मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘श्री राम मंदिर मयूर विहार’ कर दिया गया है, जबकि पीतमपुरा मेट्रो स्टेशन अब ‘मधुबन चौक’ के नाम से जाना जाएगा। नाम बदलने की मंजूरी मिलने के बाद DMRC ने दोनों स्टेशनों पर साइनेज और सूचना बोर्ड अपडेट कर दिए हैं। यात्रियों को किसी असुविधा से बचाने के लिए आवश्यक घोषणाएं और डिजिटल डिस्प्ले भी बदले जा रहे हैं। सालों से मांग कर रहे थे लोग त्रिलोकपुरी के विधायक रविकांत उज्जैन ने स्टेशन का नाम बदले जाने पर कहा कि इससे लंबे समय से चली आ रही सार्वजनिक मांग पूरी हुई है। उन्होंने बताया कि लोग वर्षों से यह मांग कर रहे थे कि मेट्रो स्टेशन का नाम मंदिर के नाम पर रखा जाए, लेकिन पहले इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विधायक ने कहा, “पिछले छह महीनों से मैं इस मामले को गंभीरता से देख रहा था। मैंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सामने भी यह मुद्दा उठाया और इस संबंध में पत्र लिखे। आखिरकार यह नाम परिवर्तन हुआ, जो वास्तविक जन-भावना की पूर्ति है।” मयूर विहार स्टेशन प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट त्रिलोकपुरी के विधायक ने आगे कहा कि श्री राम मंदिर मयूर विहार मेट्रो स्टेशन, जो दिसंबर 2018 में दिल्ली मेट्रो के फेज-III विस्तार के तहत शुरू किया गया था, आज पूर्वी दिल्ली के यात्रियों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट बन चुका है। उन्होंने बताया कि यह स्टेशन दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के सबसे लंबे कॉरिडोर पर स्थित है और आवासीय इलाकों को प्रमुख कमर्शियल हब से जोड़ता है। साथ ही यह क्षेत्र की भीड़भाड़ वाली मुख्य सड़कों का प्रभावी विकल्प भी प्रदान करता है, जिससे रोज़ाना यात्रियों को काफी सुविधा मिलती है। क्या है राज्य नामकरण प्राधिकरण (SNA)? राज्य नामकरण प्राधिकरण (State Naming Authority – SNA) दिल्ली सरकार का एक गैर-संवैधानिक निकाय है, जो राजधानी दिल्ली के भीतर सड़कों, पार्कों, कॉलोनियों और अन्य संस्थाओं के नामकरण या नाम परिवर्तन से जुड़े मामलों का निर्णय करता है। हालांकि, इसके अधिकार क्षेत्र में दिल्ली नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) के अधीन आने वाले क्षेत्र शामिल नहीं होते। इस प्राधिकरण में मुख्यमंत्री अध्यक्ष, मुख्य सचिव सदस्य होते हैं, जबकि अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव (शहरी विकास) सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करते हैं।

क्यों दादरी बना सपा का चुनावी लॉन्चपैड? 2027 के चुनाव से पहले पार्टी की बड़ी सियासी चाल

लखनऊ समाजवादी पार्टी 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर पूरे प्रदेश में समाजवादी समानता भाईचारा रैली करेगी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 मार्च को नोएडा के दादरी से इसकी शुरुआत करेंगे। इसके बाद ये रैलियां प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित की जाएंगी। इस रैली की जिम्मेदारी समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी संभालेंगे।  नोएडा से इस अभियान की शुरूआत के पीछे माना जा रहा है कि पार्टी इस कमजोर गढ़ में अपने को मजबूत दिखाने का संदेश देना चाहती है। पार्टी का मानना है कि अगर इन इलाकों में संगठन मजबूत किया गया, तो चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है विधानसभा चुनावों के करीब 11 महीने पहले नोएडा से शुरू होने वाली इस रैली की तर्ज पर प्रदेश के सभी जिलों में रैली का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए समाजवादी पार्टी के नेता स्थानीय स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। इन रैलियों के आयोजन के जरिये सपा की कोशिश उन विधानसभा क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने पर है, जहां समाजवादी पार्टी को 2022 विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। रैलियों की शुरुआत के साथ ही समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनावों के उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। जातीय समीकरणों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि ऐसे नेताओं को प्रत्याशी बनाया जाए, जिनकी विधानसभा क्षेत्र में स्वीकार्यता हो। इसके अलावा टिकट के चयन में एसआईआर में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं का भी अहमियत दी जाएगी। सपा हर सीट पर प्रत्याशियों को टिकट देने के लिए सर्वे भी करा रही है। पार्टी शुभ संकेत के रूप में देख रही पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अखिलेश यादव ने 2012 में  गौतमबुद्धनगर से साइकिल यात्रा की शुरुआत की थी। उसी वर्ष समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी। एक बार फिर नोएडा से अभियान की शुरुआत को उसी ‘शुभ संकेत’ से जोड़कर देखा जा रहा है। नोएडा को लेकर लंबे समय से राजनीतिक मिथक भी रहा है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाता है। वह छह महीने के भीतर कुर्सी गवां देता है। इसी कारण मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान अखिलेश यादव नोएडा नहीं गए थे। 2017 और 2022 के चुनावों में भी उन्होंने अभियान की शुरुआत दूसरे जिलों से की, लेकिन सत्ता हासिल नहीं कर सके।  

शहडोल में तनाव: मुख्यमंत्री मोहन यादव के आगमन से पहले किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता पकड़े गए

शहडोल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शहडोल आगमन से पहले ही जिले में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। एक ओर रामपुर बटूरा मेगा प्रोजेक्ट से प्रभावित किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। प्रशासन ने दोनों ही समूहों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। रामपुर बटूरा प्रोजेक्ट से प्रभावित करीब 10 गांवों के किसान लंबे समय से एसईसीएल (SECL) प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कोयला उत्खनन के कारण उनके घरों में दरारें पड़ रही हैं, स्कूल जर्जर हालत में पहुंच गए हैं और तीन साल बीत जाने के बावजूद न तो उन्हें स्थायी रोजगार मिला और न ही उचित पुनर्वास।मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे किसानों को बुढार पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि समाजसेवी भूपेश शर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए थे।   जिला कांग्रेस कमेटी शहडोल ने भी मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी और ब्लॉक अध्यक्ष अंकित सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेसी धनपुरी में वाटर पार्क के उद्घाटन को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए काले झंडे दिखाने की तैयारी कर रहे थे। कांग्रेस नेताओं ने नगर पालिका में भ्रष्टाचार, अवैध कोयला उत्खनन, रोजगार में स्थानीय लोगों की अनदेखी, कानून-व्यवस्था की स्थिति, दूषित पेयजल और खाद संकट जैसे मुद्दे उठाए। नारेबाजी के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर शहडोल भेज दिया। मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही जिला प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान काले झंडे दिखाने और विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। फिलहाल मुख्यमंत्री के शहडोल पहुंचने से पहले ही जिले में विरोध के हालात बन गए हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के अलग-अलग समूह भी विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी में हैं, जिस पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।

नक्सलवाद के खात्मे की तैयारी तेज, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में अहम बैठक, मार्च 2026 पर नजर

रायपुर देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन को लेकर केंद्र और नक्सल प्रभावित राज्यों के बीच आज रायपुर में निर्णायक दौर की बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित इन बैठकों को मार्च 2026 की तय समय-सीमा से पहले की सबसे अहम रणनीतिक बैठक माना जा रहा है। पहली समीक्षा बैठक सुबह शुरू हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य के पुलिस महानिदेशक सहित देश के नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी, गृह सचिव और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। बैठक में नक्सल प्रभावित इलाकों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, इंटेलिजेंस नेटवर्क की मजबूती, सुरक्षाबलों के ऑपरेशन की गति और बचे हुए संवेदनशील क्षेत्रों में कार्रवाई को तेज करने पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। तय समय-सीमा के भीतर नक्सलवाद के अंतिम गढ़ों को समाप्त करने के लिए ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। दिनभर चलेगा मंथन पहली बैठक दोपहर 12:45 बजे तक चलेगी। इसके बाद दोपहर 2 बजे तक दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। दोपहर 2 से 3 बजे तक लंच ब्रेक रहेगा, जबकि शाम 3 बजे से 4:15 बजे तक एक बार फिर उच्चस्तरीय चर्चा होगी। इसके पश्चात शाम 5 बजे से 6:10 बजे तक “छत्तीसगढ़ @ 25 – शिफ्टिंग द लेंस” विषय पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें राज्य के भविष्य और विकास के नए दृष्टिकोण पर विचार किया जाएगा। दो प्रमुख एजेंडों पर होगा फैसला उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि यह 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले की अंतिम बड़ी समीक्षा बैठक है। बैठक में दो मुख्य मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा हो रही है। पहला, देश को तय समय सीमा तक पूरी तरह सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने की रणनीति। दूसरा, बस्तर सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से रुके विकास कार्यों को गति देने का रोडमैप।

विवादों में मंत्री की माफी: कर्नल सोफिया कुरैशी पर बयान के बाद स्क्रिप्ट लेकर आए, हँसी बनी सवाल

भोपाल अपने ही गैर-जिम्मेदाराना और विवादित बयानों के लिए मध्यप्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय शाह अब तक चार बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। 13 मई 2025, 14 मई 2025, फिर 23 मई 2025 और अब 07 फरवरी 2026, एक ही बयान और एक ही विषय पर इतनी बार माफी मांगने का रिकॉर्ड शायद ही किसी मंत्री के नाम दर्ज हो। यह रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज हो या नहीं, लेकिन सियासी शर्मनाक घटनाओं की सूची में जरूर दर्ज किया जाना चाहिए। हैरानी की बात यह है कि शनिवार को इंदौर के रेसिडेंसी क्षेत्र में जब मंत्री विजय शाह कर्नल सोफिया को लेकर माफीनामा पढ़ रहे थे, तो वह भी बिना तैयारी के नहीं, बल्कि पूरी लिखित स्क्रिप्ट के साथ।   मीडिया के सवालों के दौरान शाह का रवैया भी अपने आप में कई सवाल खड़े करता नजर आया। माफी मांगने आए मंत्री जी के हाव भाव ऐसे थे मानों वह किसी गंभीर गलती पर पछतावा जताने नहीं, बल्कि सिर्फ औपचारिकता निभाने आए हों। “बोल दिया था, इसलिए माफी मांगनी पड़ रही है।” अगर वास्तव में उन्हें अपने बयान पर जरा भी मलाल या आत्मग्लानि होती, तो वह मीडिया से चर्चा से पहले कैमरों के सामने इस तरह बेशर्मी भरी मुस्कान के साथ खड़े नजर नहीं आते। उनके चेहरे पर न पश्चाताप था, न संकोच और न ही शब्दों की जिम्मेदारी का कोई भार। औपचारिकता निभाने आए थे? पूरा घटनाक्रम यही संकेत देता है कि शाह इंदौर केवल औपचारिकता निभाने आए थे, न कि अपने बयान की गंभीरता को समझने। कैमरों के सामने मुस्कुराते रहना और माफी को एक मजबूरी की तरह पेश करना, यह साफ दर्शाता है कि सत्ता के अहंकार में संवेदनशील मुद्दों को भी हल्के में लिया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह वही गंभीरता है, जिसकी उम्मीद जनता एक संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री से करती है, या फिर अब माफी भी एक राजनीतिक ड्रामा बनकर रह गई है? सवाल यह है कि क्या अब मंत्री को माफी मांगने के लिए भी स्क्रिप्ट की जरूरत पड़ने लगी है? क्या शब्द इतने अविश्वसनीय हो चुके हैं कि बिना कागज के बोलना भी जोखिम भरा हो गया है? 11 मई को दिया था विवादित बयान बीते वर्ष 11 मई को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह द्वारा दिया गया विवादित और आपत्तिजनक बयान अब कानूनी शिकंजे में बदल चुका है। कार्यक्रम में मंत्री शाह ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि जिन आतंकियों ने लोगों को मारा, उन्होंने कपड़े उतरवाए और हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री का नाम लेते हुए कहा था कि “प्रधानमंत्री ने उन्हीं की बहन को भेजकर उनकी ऐसी-तैसी करवाई।” मंत्री द्वारा सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई इस आपत्तिजनक टिप्पणी ने सियासी और सामाजिक हलकों में तीखा आक्रोश पैदा कर दिया। 15 दिनों के भीतर फैसला लेने के निर्देश मंत्री विजय शाह को यह बयान देना अब भारी पड़ रहा है। हाईकोर्ट जबलपुर के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए डीजीपी को मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश मिलते ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हुई और इंदौर जिले के मानपुर थाने में शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। चूंकि आपत्तिजनक बयान मानपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया गया था, इसलिए मूल प्रकरण यहीं दर्ज किया गया था । मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में मध्य प्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर फैसला लेने के निर्देश दिए थे।