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MP सरकार का बड़ा प्लान, शराब से 21 हजार करोड़ का टारगेट, आबकारी नीति में बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने अपना खजाना भरने के लिए आबकारी नीति 2026-27 में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है. इस नई नीति का ड्राफ्ट अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा. विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद नीति को कैबिनेट में लाया जाएगा. जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली इस नीति के जरिए सरकार ने शराब बिक्री से करीब 21 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है. इसके साथ ही आबकारी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 111 साल पुराने आबकारी अधिनियम में संशोधन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. नई नीति में राजस्व बढ़ाने पर होगा फोकस नई आबकारी नीति में शराब दुकानों की बिक्री से पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 3 हजार करोड़ रुपये अधिक राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. पिछली नीति में 18 हजार करोड़ रुपये की प्राप्ति का अनुमान था. इस बार दुकानों के चालू वित्तीय वर्ष के मूल्य में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि कर आवंटन किए जाने का प्रस्ताव है. सबसे पहले दुकानों का नवीनीकरण किया जाएगा. इसके बाद लाटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और अंत में ई-टेंडर के माध्यम से ठेके दिए जाएंगे. शापिंग माल में महंगी शराब के काउंटर का प्रस्ताव नई नीति में शापिंग माल में प्रीमियम और महंगी शराब के काउंटर खोलने का प्रस्ताव भी शामिल है. इस पर भी अंतिम फैसला मुख्यमंत्री यादव लेंगे. सरकार का मानना है कि इससे उच्च वर्ग के उपभोक्ताओं को नियंत्रित और वैधानिक विकल्प मिलेगा, साथ ही राजस्व में भी इजाफा होगा. हालांकि नई आबकारी नीति में न तो कोई शराब दुकान बंद करने का प्रस्ताव है और न ही नई दुकान खोलने की योजना है. धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों से तय दूरी जरुरी पिछली आबकारी नीति 2025-26 में 17 धार्मिक नगरों में शराब दुकानों को बंद किया गया था, जिससे 47 दुकानें बंद हुई थीं. इस बार ऐसी कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है. यानि न तो नई शराब दुकानें खुलेंगी और प ही पुरानी दुकानों को बंद किया जाएगा. वर्तमान वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश में कुल 3,558 शराब दुकानें हैं, जो सभी कंपोजिट दुकानें हैं. नर्मदा नदी के दोनों किनारों से 5 किलोमीटर के दायरे में शराब दुकानें नहीं खोलने और धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों से 100 मीटर की दूरी का नियम पहले की तरह लागू रहेगा.     राज्य की आय में आबकारी का बड़ा योगदान प्रदेश के बजट में केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और राज्य के स्वयं के कर अहम भूमिका निभाते हैं. जीएसटी के जरिए पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 26 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जबकि इस वर्ष दिसंबर तक 25,250 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है. वैट, आबकारी, पंजीयन और मुद्रांक शुल्क से राज्य को 32,660 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक है. 111 साल पुराने आबकारी अधिनियम में संशोधन की तैयारी वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि, ''मध्य प्रदेश सरकार 1915 में लागू हुए आबकारी अधिनियम में संशोधन करने जा रही है. इसके लिए आबकारी विभाग ने अधिकारियों की विशेष टीम गठित की है, जो अधिनियम की अव्यावहारिक और अप्रासंगिक धाराओं की समीक्षा कर रही है. ऐसी धाराएं, जिनसे अब सरकार को कोई राजस्व नहीं मिलता, उन्हें हटाने का प्रस्ताव है.'' देवड़ा ने बताया कि, ''आबकारी अधिनियम से ऐसी कंडिकाएं हटाई जा रही हैं, जिनका अब औचित्य नहीं बचा है.

यूपी में गुमशुदगी के आंकड़े डराने वाले, 2 साल में 1.08 लाख लापता, हाई कोर्ट ने उठाए सवाल

इलाहाबाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश में गुमशुदा लोगों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले करीब दो वर्षों में प्रदेश में 1 लाख 8 हजार 300 लोगों के लापता होने की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज की गई है, लेकिन इनमें से केवल 9,700 लोगों का ही अब तक पता लगाया जा सका है। अदालत ने इस स्थिति को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। खंडपीठ ने इस पूरे मामले को ‘प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों के संबंध में’ शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की पीठ ने विक्रमा प्रसाद द्वारा दायर याचिका पर पारित किया। क्या है मामला याची, जो लखनऊ के चिनहट क्षेत्र का निवासी है, ने अदालत को बताया कि उसका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया था। इस संबंध में उसने चिनहट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की ओर से कोई प्रभावी या संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई। इस पर न्यायालय ने न केवल याची की शिकायत पर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए, बल्कि प्रदेश भर में लापता व्यक्तियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश अपर मुख्य सचिव (गृह) को भी दिया। अधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा अदालत के आदेश के अनुपालन में दाखिल हलफनामे में अपर मुख्य सचिव की ओर से बताया गया कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच पुलिस के पास दर्ज मामलों के अनुसार कुल 1,08,300 लोग लापता हुए हैं, जिनमें से सिर्फ 9,700 लोगों का ही अब तक पता लगाया जा सका है। इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों में संबंधित अधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा रहा है।  

MP में बिना पर्ची बिक रहीं एंटीबायोटिक्स, हर महीने करोड़ों का अवैध कारोबार

रीवा   जिले में एंटीबायोटिक्स दवाओं का हर माह 7 से 8 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। इतना ही नहीं प्रतिबंध के बावजूद तमाम दवा विक्रेता एंटीबायोटिक दवाओं की ऑन द काउंटर (ओटीसी) बिक्री भी कर रहे हैं। एंटीबायोटिक्स का बेवजह इस्तेमाल से जहां लोगों का स्वास्थ बिगड़ रहा है वहीं उनकी जेब पर भी असर पहुंच रहा है। दवा कारोबारियों व डॉक्टरों के गठजोड़ के कारण एंटीबायोटिक्स की खपत पर रोक नहीं लग पा रही है। यह गठजोड़ अवैध कमाई का जरिया बन गया है। एंटीबायोटिक दवाओं का जिला भी एक बड़ा बाजार बन चुका है। रीवा एवं मऊगंज जिले को मिलाकर अरमान व रूरल एरिया में कल 1380 मेडिकल स्टोर रजिस्टर्ड है। इनमें ग्रामीण अंचलों में मकड़जाल की तरह पहले झोलाछाप डॉक्टर शामिल नहीं है, जिसमें अंधाधुंध एंटीबायोटिक्स दवाओं की खुलेआम बिक्री हो रही है। बड़े स्तर पर चिकित्सकों ने भी अपने मरीजों को दवा लिखकर मेडिकल स्टोर से खरीदने की बजाय खुद ही बेच रहे हैं। इसके अलावा सर्दी, जुकाम, खांसी, फोड़े-फुन्सी, चोट इत्यादि के उपचार के लिए मरीज सीधे मेडिकल स्टोर पर जाकर काउंटर से एंटीबायोटिक्स खरीदकर कार्य चला रहे हैं और दवा विक्रेता भी धड़ल्ले से वायरल इंफेक्शन, मौसमी विकार व चोट घाव की दवा बिना डाक्टरों की पर्ची मांगे बेच भी रहे हैं।  एंटीबायोटिक्स के इस भयावह स्थिति को लेकर पड़ताल करने का प्रयास किया है। एक हजार से अधिक काउंटर जिले में संचालित: जिले में एंटीबायोटिक्स दवाओं का कारोबार एक बहुत बड़ा और सक्रिय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां थोक विक्रेताओं का एक बड़ा नेटवर्क है जो निमोनिया, संक्रमण और अन्य बीमारियों के लिए एमोक्सिसिलिन, सेफलेक्सिन और डॉक्सीसाइक्लिन जैसे प्रमुख एंटीबायोटिक्स को अस्पतालों, क्लीनिकों और फार्मेसियों में वितरित करते हैं। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की भारी मांग के कारण थोक और खुदरा कारोबार काफी बड़ा है। यही कारण है कि जहां शहरी क्षेत्र में 681 से अधिक तो ग्रामीण में लगभग 699 दवा काउंटर हैं जो फुटकर में दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। इन्हीं काउंटर से माह भर में 7 से 8 करोड़ रुपये से अधिक की सिर्फ एंटीबायोटिक्स दवाओं की बिक्री हो जाती है। मेडिकल स्टोरों पर बिना पर्चे के एंटीबायोटिक्स की बिक्री : ख़ुटेही निवासी अशोक पटेल तीन दिन से सर्दी-जुकाम से पीड़ित हैं। बुधवार को बुखार एवं जुकाम के बाद पास के अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर पहुंचे और अपनी समस्या बताकर दवा ले ली। न दुकान संचालक ने डाक्टर की पर्ची मांगी और न ही पीड़ित ने दी। चिकित्सक कमीशन के खेल में अपनी जेबें भर रहे हैं। एंटीबायोटिक्स के माध्यम से धन कमा बना रहे हैं। जिस दवा कंपनी से इनका कमीशन अधिक मिलता है वे मरीज को वही दवा लिखते हैं। दवा विक्रेता क्या करे, जो मांग आएगी वह उसे ही तो बेचेगा। अब तो डॉक्टर दवाई भी बेचने लगे हैं। निश्चित रूप से सरकार को नियम सख्त करने की जरूरत है। तरुणेद्र सिंह, अध्यक्ष, दवा विक्रेता संघ रीवा। हमने पहले ही सरकारी चिकित्सकों को गाइड लाइन के पालन की सख्त हिदायत देकर रखी हुई है। वायरल इंफेक्शन में तो मरीज को एंटीबायोटिक्स दवा बिल्कुल नहीं देनी चाहिए। इसी तरह सर्दी, जुकाम में भी विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। एक दो दिन में यह अपने आप ठीक हो जाती है। ऐसे में एंटीबायोटिक्स नुकसानदेह है। खासकर हाईडोज से बचना चाहिए। शिशु रोग के मामले में खासकर ध्यान देने की आवश्यकता है। डॉ प्रतिभा पांडे, सिविल सर्जन, कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल बिछिया रीवा।

Indore Metro: छोटा गणपति स्टेशन होगा अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों में सबसे छोटा

इंदौर  मेट्रो परियोजना के अंडर ग्राउंड प्रोजेक्ट में छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन पर बनी उलझन अब खत्म होने को है। मेट्रो के अंडर ग्राउंड अन्य स्टेशन के मुकाबले छोटा गणपति का स्टेशन सबसे छोटा होगा। मेट्रो प्रबंधन द्वारा छोटा गणपति स्टेशन निर्माण के लिए जो मृदा परीक्षण रिपोर्ट तैयार की है। उसमें बताया है कि यहां पर न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड (नेटम) के माध्यम से खोदाई की जाएगी। इस प्रक्रिया में जमीन की सतह से 37 से 38 मीटर नीचे मेट्रो स्टेशन का निर्माण होगा। जबकि शहर में मेट्रो के अंडर ग्राउंड स्टेशन जमीन से 18 से 22 मीटर गहराई में बनाए जा रहे है। ऐसे में यह मेट्रो स्टेशन सबसे छोटा और सबसे ज्यादा गहराई में होगा। गार्डन के हिस्से में होगी खोदाई तो नहीं टूटेंगे मकान पूर्व में कट एंड कवर तकनीक के माध्यम से छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जाना था। यह अंडर ग्राउंड स्टेशन एमजी रोड के समानांतर मल्हारगंज थाने के पास 190 मीटर की लंबाई में बनाना तय किया था। ऐसे में 142 मकान टूट रहे थे। सर्वे रिपोर्ट के बाद न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड से इसका निर्माण किया जाना तय किया है। ऐसे में एमजी रोड के समानांतर 146 मीटर लंबाई में स्टेशन बनाया जा सकेगा। इससे मकानों को तोड़ने की जरूरत नही होगी। सिर्फ इस क्षेत्र में बने गार्डन वाले हिस्से पर ही खोदाई की जाएगी। जमीन के नीचे स्टेशन का विस्तार किया जाएगा। इस प्रक्रिया से निर्माण एजेंसी को 25 से 30 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना होंगे।  

ऊर्जा मंत्री तोमर का दावा, प्रदेश विद्युत क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर होगा

प्रदेश विद्युत के क्षेत्र में पूर्णत: आत्म निर्भर : ऊर्जा मंत्री  तोमर भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किये जा रहे कार्यों से प्रदेश विद्युत के क्षेत्र में पूर्णतः आत्म निर्भर हो गया है। प्रदेश भविष्य में भी विद्युत के क्षेत्र में आत्म निर्भर बना रहे इसके लिये विद्युत उपलब्ध क्षमता में 1806 मेगावाट की वृद्धि का कार्यक्रम है। इसमें से 851 मेगावाट क्षमता वृद्धि हासिल की जा चुकी है। प्रदेश में गैर कृषि उपभोक्ताओं को लगभग 24 घंटे एवं कृषि उपभोक्ताओं को लगभग 10 घंटे प्रतिदिन विद्युत प्रदाय की जा रही है। रबी मौसम में मकर संक्रांति पर्व पर 19895 मेगावाट की अधिकतम विद्युत मांग की सफलतापूर्वक पूर्ति की गई, जो प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक है। प्रदेश में पारेषण हानियां अब मात्र 2.60 प्रतिशत रह गई हैं, जो पूरे देश में न्यूनतम हानियों में से एक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-2030 तक की अवधि में प्रदेश की पारेषण प्रणाली के सुदृढीकरण के लिये म.प्र. पॉवर ट्राँसमिशन कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 5163 करोड़ रुपये के पूंजीगत कार्यों का अनुमोदन प्रदान किया गया है। अटल गृह ज्योति योजना में जिनकी मासिक खपत 150 यूनिट तक है एवं पात्र उपभोक्ताओं को प्रथम 100 यूनिट की खपत के लिए अधिकतम 100 रुपये का बिल दिया जा रहा है एवं अंतर की राशि राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में वितरण कंपनियों को दी जा रही है। इस योजना में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के लिये वर्ष 2024-25 में सब्सिडी की मद में 6495.27 करोड़ रूपये जारी किए गए थे। अटल कृषि ज्योति योजना के अंतर्गत 10 हॉर्सपॉवर तक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 750 रुपये प्रति हॉर्सपॉवर प्रतिवर्ष एवं 10 हार्स पॉवर से अधिक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 1500 रूपये प्रति हॉर्स पॉवर प्रतिवर्ष की फ्लेट दर से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। शासन द्वारा 1 हैक्टेयर तक भूमि एवं 5 हार्स पॉवर तक के कृषि पंप वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को निःशुल्क विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। योजना लगभग 9.3 लाख कृषि उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। समाधान योजना 2025-26" में अद्यतन लगभग 17 लाख 15 हजार रूपये उपभोक्ताओं का 350 करोड़ 67 लाख रूपये सरचार्ज माफ हुआ हैं तथा 852 करोड़ 76 लाख रूपये के बिल जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा-अभियान (पीएम-जनमन) में प्रदेश में लगभग 28 हजार घरों के विद्युतीकरण की कार्य योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। वितरण कंपनियों द्वारा नवम्बर 2025 तक लगभग 26,000 घरों को विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। शासन द्वारा अति उच्चदाब ट्राँसमिशन लाईनों के निर्माण से टॉवर लगने वाले और ट्राँसमिशन लाईन के प्रभावित किसानों को पहले की कलेक्टर गाईडलाईन से दोगुना मुआवजा एकमुश्त एवं डिजिटल माध्यम से दिया जाएगा।  

किसानों को सशक्त बनाने के लिए किया जा रहा है तकनीक का प्रभावी उपयोग: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” समाचार किसानों को सशक्त बनाने किया जा रहा है तकनीक का प्रभावी उपयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री से पारदर्शी व प्रमाणिक कृषि डेटा व्यवस्था हुई स्थापित म.प्र. बना फार्मर रजिस्ट्री के शत-प्रतिशत अनुपालन वाला पहला राज्य भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाने और कृषि व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से राज्य में ग्रामीण डेटा प्रणाली को एक नई दिशा प्रदान की गई है। उन्नत तकनीक, पारदर्शी डेटा प्रबंधन और केंद्र-राज्य समन्वय से यह पहल किसानों के हित में मजबूत डिजिटल आधार तैयार कर रही है। इससे किसानों को योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खेत पर उपस्थित होकर फसल की फोटो लेकर जानकारी सुरक्षित की जा रही है, जिससे फसल संबंधी डेटा पूरी तरह प्रमाणिक हो रहा है। जियो-फेंसिंग तकनीक से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सर्वे केवल वास्तविक खेत स्थल पर ही किया जाए। सर्वे डेटा का त्रिस्तरीय सत्यापन एआई/एमएल सिस्टम और पटवारी स्तर पर किया जा रहा है। अन्य विभागों द्वारा भी इस डेटा का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। डीसीएस डेटा के आधार पर उपार्जन पंजीयन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इंटरनेट उपलब्ध न होने की स्थिति में भी सर्वे की विश्वसनीयता बनी रहे। सर्वे के दौरान ली गई फोटो की प्रामाणिकता और सही लोकेशन की पुष्टि प्रणाली द्वारा की जाती है। सर्वे केवल निर्धारित समयावधि में ही संभव है और समय सीमा के बाहर या मोबाइल समय में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर सर्वे स्वतः रुक जाता है। एआई या एमएल एल्गोरिदम के माध्यम से डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर मानवीय त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम किया गया है। फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा-ड्रिवन निर्णय लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री को एकीकृत डिजिटल प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। इसमें किसानों की पहचान, भूमि विवरण और योजना संबंधी जानकारी का केंद्रीकृत पंजीकरण एवं सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में भूमि अभिलेखों का पूर्ण डिजिटल एकीकरण, स्थान आधारित रिकॉर्ड और बहु-स्तरीय डेटा जांच शामिल हैं। प्रत्येक किसान को 11 अंकीय विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या प्रदान की जा रही है, जिससे एक प्रमाणिक और सटीक किसान डेटाबेस (यूनिफाइड डिजिटल प्रोफाइल) तैयार हो रही है। फार्मर रजिस्ट्री के निर्धारित मानकों का 100 प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। एससीए योजना में भारत सरकार से वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए 713 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह डिजिटल व्यवस्था डुप्लीकेशन और फर्जी लाभार्थियों पर प्रभावी रोक लगाएगी और भविष्य की सभी डिजिटल कृषि योजनाओं की मजबूत नींव बनेगी। साथ ही, जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से किसानों को आसान कृषि ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।  

रायपुर पहुंचेगा प्रवासी छत्तीसगढ़ी, 27-28 मार्च को आयोजित होगा छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव

रायपुर प्रदेश के विकास में प्रवासी छत्तीसगढ़ियों की सहभागिता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 27 एवं 28 मार्च को राजधानी रायपुर में “प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव” का आयोजन किया जाएगा। यह कॉन्क्लेव उत्तर अमेरिका छत्तीसगढ़ प्रवासी संघ (North America Chhattisgarh Association – NACHA) तथा छत्तीसगढ़ एनआरआई संघ (NRI Association of Chhattisgarh) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस दो दिवसीय आयोजन में  भारत से बाहर विभिन्न देशों में निवासरत छत्तीसगढ़ के रहवासी सहभागिता करेंगे। इस कॉनक्लेव के लिए पंजीयन जल्द शुरू होगा।  कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन एवं उद्योग विकास स्टार्टअप विकास जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही, प्रवासी छत्तीसगढ़ियों के अनुभव एवं संसाधनों के माध्यम से राज्य के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर चर्चा होगी। छत्तीसगढ़ी एनआरआई बाटेंगे अनुभव आयोजन के दौरान प्रवासी छत्तीसगढ़ियों के अनुभव, विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग राज्य के विकास में कैसे किया जाए, इस पर मंथन होगा। साथ ही प्रदेश और विदेश में बसे छत्तीसगढ़ी समाज के बीच संवाद को मजबूत करने और सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जाएगा। कॉन्क्लेव में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता और विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी राज्य की अमूल्य पूंजी हैं। विदेशों में कार्यरत छत्तीसगढ़ी नागरिक अपने ज्ञान, अनुभव और निवेश से प्रदेश के विकास को नई दिशा दे सकते हैं। सरकार चाहती है कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी औद्योगिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी राज्य की सबसे बड़ी ताकत हैं. उन्होंने कहा, “विदेशों में कार्यरत छत्तीसगढ़ी नागरिक अपने ज्ञान, अनुभव और निवेश से प्रदेश को नई दिशा दे सकते हैं. सरकार चाहती है कि वे औद्योगिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सक्रिय भागीदार बनें.” कई देशों से पहुंचेगा छत्तीसगढ़ी समाज दो दिवसीय इस कॉन्क्लेव में भारत के बाहर विभिन्न देशों में निवासरत छत्तीसगढ़ मूल के लोग भाग लेंगे. आयोजन को लेकर उत्साह देखा जा रहा है और इसके लिए पंजीयन प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी. निवेश और रोजगार पर केंद्रित सत्र कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास से जोड़ना है. कार्यक्रम के दौरान निवेश के अवसर, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यटन, उद्योग और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. अनुभव से मिलेगा विकास को नया आयाम विदेशों में रहकर कार्य कर रहे छत्तीसगढ़ियों के अनुभव, विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग राज्य के विकास में कैसे किया जाए, इस पर विशेष मंथन होगा. इसके माध्यम से प्रदेश और प्रवासी समाज के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी.  विशेषज्ञों और उद्यमियों की रहेगी भागीदारी कॉन्क्लेव में देश-विदेश से जुड़े विशेषज्ञ, उद्योगपति, सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे. यह आयोजन छत्तीसगढ़ की वैश्विक पहचान को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश और प्रवासी छत्तीसगढ़ी समाज के बीच संवाद को सुदृढ़ करना तथा सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशना है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। कॉन्क्लेव में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि “विदेश में रहकर काम कर रहे छत्तीसगढ़ी नागरिक अपने ज्ञान, अनुभव और निवेश के माध्यम से राज्य के विकास को नई गति दे सकते हैं। सरकार चाहती है कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी प्रदेश के औद्योगिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।”

इंदौर में 350 करोड़ का ‘एलिवेटेड कॉरिडोर’ बनेगा, काम इस माह से शुरू, सॉयल टेस्टिंग के साथ मेट्रो भी जुड़ेगी

इंदौर आखिरकार फरवरी से इंदौर के एबी रोड पर नौलखा से एमआइजी चौराहे के बीच 350 करोड़ रुपए की लागत से एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण शुरू करने की कवायद हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इसकी तैयारी की गई। तीन चौराहों पर भुजाएं प्रस्तावित की गई है ताकि वाहन चालकों को सुविधा हो। ब्रिज पर रोटरी भी प्रस्तावित की जा रही है। वैसे एलिवेटेड कॉरिडोर (Elevated Corridor) के लिए सालों पहले प्लानिंग हुई थी। दो साल पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इंदौर आने पर निर्माण के लिए भूमिपूजन भी हो गया था। इसके बाद कॉरिडोर को लेकर सवाल उठे तो सर्वे कराया गया। नौलखा से एमआइजी चौराहा (प्रेस कॉम्प्लेक्स तक) एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव था। लोगों ने आपत्ति लेते हुए सवाल उठाए कि ऐसे वाहन चालक बहुत कम होते है जो एबी रोड पर सीधे नौलखा से एमआइजी तक जाए। अधिकांश लोगों को बीच के इलाके में जाना होता है। यह रहवासी के साथ ही व्यवसायिक इलाका है। दिसंबर में की गयी थी घोषणा दिसंबर में मुख्यमंत्री ने एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए निर्देशित किया, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने फिर प्लानिंग की। वैसे गुजरात की कंपनी को पहले यह ठेका मिल चुका था, निरस्त नहीं होने से कुछ भुगतान भी बिना काम करने की बात सामने आ रही है। अब बीआरटीएस कॉरिडोर भी खत्म किया जा रहा है, ऐसे में कॉरिडोर ब्रिज का महत्व बढ़ गया है। पीडब्ल्यूडी ने कॉरिडोर पर शिवाजी प्रतिमा चौराहा, गीता भवन चौराहा एवं पलासिया चौराहे पर भुजाएं प्रस्तावित की है। भुजाएं देने से बीच के इलाके में जाने वाले वाहन चालकों को फायदा होगा और ऐसे में कॉरिडोर का ज्यादा इस्तेमाल संभव हो पाएगा।   नौलखा से एलआईजी के बीच बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर फिर नया प्रस्ताव आया है, अब इसे चार लेन से बढ़ाकर 6 लेन करने की बात कही गई है.  6 लेन करने का प्रस्ताव  इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर को 6 लेन करने का प्रस्ताव दिया गया है, जनप्रतिनिधियों का कहना है कि एलिवेटेड ब्रिज जरूरी है. क्योंकि इससे ही जाम कम होगा, लेकिन इसकी चौड़ाई 4 की जगह 6 लेन की होनी चाहिए, जबकि इसे नौलखा से आगे राजीव गांधी चौराहा और राऊ के साथ-साथ एलआईजी के आगे तक बनाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे ट्रैफिक की समस्या और दूर होगी. वहीं इस ब्रिज को मेट्रो से जोड़ने का प्रावधान करने की बात भी कही है, जिसमें मुख्य चौराहों पर एलिवेटेड रोटरी जैसे प्रावधान करने का प्रस्ताव रखा गया है.  ट्रैफिक अलर्ट: आंशिक रुकावट, जल्द जारी होगा डायवर्जन प्लान वर्तमान में सॉयल टेस्टिंग के कारण सड़क पर अस्थायी टीन लगाए गए हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, 15 फरवरी से जब भारी मशीनें मौके पर पहुंचेंगी और खुदाई शुरू होगी, तब ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर एक विस्तृत ट्रैफिक डायवर्जन प्लान जारी किया जाएगा, ताकि वाहन चालकों को परेशानी न हो। 15 फरवरी से काम  बताया जा रहा है कि इंदौर में इस ब्रिज का काम 15 फरवरी से शुरू हो जाएगा, क्योंकि यह ब्रिज इंदौर में अगले 50 साल तक ट्रैफिक की समस्या को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है, इसलिए इस पर जल्दबाजी नहीं करने की बात कही गई है. इंदौर की ट्रैफिक समस्या को दूर करने के साथ-साथ ब्रिज के विस्तार पर भी काम करने की बात कही गई है. जिसमें इंदौर के सभी जनप्रतिनिधियों ने अपनी राय दी है. बताया जा रहा है कि फिलहाल ब्रिज को 4 लेन में बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन अब इसे 6 लेन का करने की बात कही है.  

संपत्ति कर वसूली को लेकर सख्ती, नगर निगम ने कई व्यावसायिक भवन सील किए

रायपुर राजधानी के जोन क्रमांक 10 में बकाया संपत्ति कर की वसूली को लेकर नगर निगम ने सख्त कदम उठाया है। कई वर्षों से संपत्ति कर जमा नहीं करने वाले बड़े बकायादारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके संस्थानों को सील की गई है। इस कार्रवाई के बाद बकायादारों में हड़कंप मच गया है। नगर निगम ने पूर्व में संबंधित बकायादारों को डिमांड बिल, डिमांड नोटिस एवं अंतिम नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद निर्धारित समय सीमा तक संपत्ति कर जोन कार्यालय में जमा नहीं किया गया। इसके बाद निगम प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए बकायादारों के व्यावसायिक परिसरों को ताला लगाकर सीलबंद करने की कार्रवाई की। नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बकाया कर जमा नहीं करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने सभी करदाताओं से अपील की है कि वे समय पर संपत्ति कर जमा कर अनावश्यक कार्रवाई से बचें।

साय सरकार का अहम फैसला, छत्तीसगढ़ में खुलेंगे 4 नए उप पंजीयक कार्यालय

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने आम नागरिकों को रजिस्ट्री और पंजीयन से जुड़ी सेवाएं अधिक सहज और सुलभ बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रदेश के तीन जिलों में चार नए उप पंजीयक कार्यालय  खोलने के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी है. इस निर्णय से अब लोगों को रजिस्ट्री के लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. इन चार स्थानों पर खुलेंगे नए कार्यालय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1908 के तहत स्वीकृत किए गए नए कार्यालय निम्नलिखित क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे:     भखारा: जिला धमतरी     लवन: तहसील मुख्यालय, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा     सकरी: जिला बिलासपुर     राजकिशोर नगर: जिला बिलासपुर समय और धन की होगी बचत इन नए कार्यालयों के खुलने से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी. अब तक लोगों को छोटे से पंजीयन कार्य के लिए दूरस्थ जिला मुख्यालयों तक जाना पड़ता था, जिससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता था. नए केंद्रों से पंजीयन प्रक्रिया में न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि जिला मुख्यालयों में होने वाली भीड़ से भी मुक्ति मिलेगी. सुशासन की दिशा में सशक्त कदम: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय को सुशासन का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा, “हमारी सरकार का उद्देश्य शासन की सेवाओं को नागरिकों के दरवाजे तक पहुँचाना है. नए कार्यालयों की स्वीकृति से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति आएगी और आमजन को कार्यालयों की दौड़-भाग से राहत मिलेगी.” पंजीयन विभाग के ’10 क्रांतिकारी सुधार’ भी होंगे लागू वित्त एवं वाणिज्य कर (पंजीयन) मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि इन नए कार्यालयों में भी विभाग द्वारा शुरू किए गए 10 हाई-टेक सुधारों का लाभ मिलेगा. पंजीयन विभाग की आधुनिक सेवाएं:     घर बैठे रजिस्ट्री: अब ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग और प्रक्रियाओं की सुविधा.     ऑटो डीड जनरेशन: दस्तावेजों को तैयार करने की स्वचालित व्यवस्था.     स्वतः नामांतरण: रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होना.     WhatsApp और डिजीलॉकर: व्हाट्सएप आधारित सेवाएं और डिजिटल दस्तावेजों का एकीकरण.     कैशलेस पेमेंट: पारदर्शी और सुरक्षित भुगतान के लिए एकीकृत व्यवस्था. मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि सरकार नागरिक सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन और ऑनलाइन सर्च जैसी सुविधाओं से अब धोखाधड़ी की संभावना भी खत्म होगी.