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महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियां पूरी, आम श्रद्धालु डेढ़ किमी और पासधारी एक किमी पैदल चलेंगे

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के मंदिर में आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का महापर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति ने पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं। रविवार को कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए मंदिर क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। महाशिवरात्रि महापर्व 2026 (15 फरवरी) पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस अवसर पर सामान्य श्रद्धालुओं को लगभग डेढ़ किलोमीटर और 250 रुपए की शीघ्र दर्शन रसीद या पासधारी श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद भगवान महाकाल के दर्शन होंगे। भक्तों को सुलभ और सुरक्षित दर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भस्म आरती दर्शन, लड्डू प्रसाद, पूछताछ केंद्र, पार्किंग, जूता स्टैंड, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर मंदिर परिसर में अहम बैठक आयोजित की गईं। जिसमें कई निर्णय लिए गए। बैठक में कलेक्टर एवं मंदिर प्रशासक रौशन सिंह, प्रथम कौशिक, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र, सहायक प्रशासक आशीष फलवाडीया सहित मंदिर समिति के अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने तैयार किया सुरक्षा और दर्शन का रोडमैप कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ दर्शन मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों को कम से कम समय में सुगमता से दर्शन हों, इसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आवाजाही के रास्तों और मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सामान्य श्रद्धालुओं की प्रवेश-निर्गम व्यवस्था सामान्य श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला के समीप बने द्वार से प्रवेश करेंगे। वे भील समाज धर्मशाला, चारधाम मंदिर पार्किंग, शक्ति पथ, त्रिवेणी संग्रहालय के समीप, नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-01, टनल, नवीन टनल-01 होते हुए गणेश मंडपम से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर चौराहा होते हुए अपने गंतव्य की ओर जाएंगे। शीघ्र दर्शन व पासधारी श्रद्धालुओं की व्यवस्था शीघ्र दर्शन 250 रुपए टिकटधारी श्रद्धालुओं के लिए अलग से बैरिकेटिंग की गई है। ये श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला, चारधाम मंदिर पार्किंग, अशोक सेतु, मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-01, टनल, नवीन टनल-01 होते हुए गणेश मंडपम से दर्शन करेंगे। इसके अलावा शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालु हरसिद्धि पाल पार्किंग, बड़ा गणेश गली, प्रीपेड बूथ तिराहा, शहनाई जिगजेग, द्वार क्रमांक-01 से मंदिर में प्रवेश कर दर्शन कर सकेंगे। भस्म आरती दर्शन व्यवस्था महाशिवरात्रि पर्व पर भस्म आरती के लिए पंजीयनधारी श्रद्धालुओं का प्रवेश मानसरोवर भवन और द्वार क्रमांक-01 से निर्धारित किया गया है। पार्किंग सुविधा के लिए     पार्किंग : सामान्य श्रद्धालु के लिए कर्कराज पार्किंग, मेघदूत पार्किंग में व्यवस्था की गई है।     शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालुओं के लिए कार्तिक मेला ग्राउंड, राणौजी की छत्रि, शगुन गार्डन, महाकाल मंडपम् पर व्यवस्था की गई है।     जूता स्टैंड : सुविधा के लिए भील समाज धर्मशाला, झालरिया मठ एवं हरसिद्धि पाल पर व्यवस्था की गई।     शीघ्र दर्शन काउंटर : कर्कराज पार्किंग, हरसिद्धि पाल पार्किंग पर की जाएगी।     लड्डू प्रसाद : काउंटरों की व्यवस्था नृसिंहघाट रोड पर एवं हरसिद्धि रोड पर की जाएगी। प्रशासन की अपील मंदिर समिति और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों का पालन करें, सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें और धैर्य बनाए रखें, जिससे सभी भक्त सुचारू रूप से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकें। कलेक्टर ने तैयार किया सुरक्षा और दर्शन का रोडमैप कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ दर्शन मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों को कम से कम समय में सुगमता से दर्शन हों, इसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आवाजाही के रास्तों और मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  

दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर होगा साबित : कृषि मंत्री कंषाना

दलहन क्षेत्र का राष्ट्रीय सम्मेलन 7 फरवरी को सीहोर के अमलाहा में दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर होगा साबित : कृषि मंत्री  कंषाना कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल भोपाल प्रदेश के अमलाहा, जिला सीहोर में 7 फरवरी को दलहन उत्पादन एवं उत्पादकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के लिये एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में दलहन क्षेत्र की मूल संवेदनाओं, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारीगण, दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, सरकारी बीज उत्पादक संस्थाएँ, दाल उद्योग से संबंधित प्रतिनिधि एवं अन्य सहयोगी एजेंसियाँ भाग लेंगी। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने, किसानों की आय बढ़ाने तथा उन्नत तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता सुधार पर अपने विचार साझा करेंगे। यह सम्मेलन दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन का उद्देश्य किसानों तक नवीन शोध, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक खेती पद्धतियों तथा बाज़ार से जुड़ी जानकारी पहुँचाना है, जिससे दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। साथ ही विभिन्न राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय स्तर पर दलहन विकास की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।  

पन्ना में सदियों पुराने पेड़ मिले, बरगद, पीपल और नीम सहित 100+ साल के वृक्षों का रिकॉर्ड तैयार

पन्ना   दक्षिण पन्ना वनमण्डल में 100 वर्ष से अधिक आयु के प्राचीन वृक्षों की पहचान एवं संरक्षण के उद्देश्य से "हेरिटेज ट्री आइडेंटिफिकेशन" अभियान संचालित किया जा रहा है. इस पहल के अंतर्गत वनकर्मी अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर पुराने वृक्षों की जानकारी एकत्रित कर रहे हैं. उनके फोटो और विवरण संकलित किए जा रहे हैं तथा ग्रामीणों से संवाद कर वृक्षों से जुड़ी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जानकारियां भी संजोई जा रही है. अभियान का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को पहचान देना है. बरगद, पीपल, नीम सहित कई 100 वर्ष पेड़ों का दस्तावेजीकरण अभियान के तहत विभिन्न रेंजों में वन अमले द्वारा निरंतर सर्वे कार्य किया जा रहा है. रैपुरा रेंज में डिप्टी रेंजर रंजना नागर, मोहन्द्रा रेंज में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार, पवई रेंज में वनरक्षक सत्येंद्र सिंह भदौरिया, शाहनगर रेंज में वनरक्षक प्रेमनारायण वर्मा तथा सलेहा रेंज में वनरक्षक उमाशंकर पाल द्वारा अब तक सराहनीय प्रयास किए गए हैं. अनेक ग्रामों में बरगद, पीपल, नीम, आम, इमली और अन्य प्रजातियों के 100 से 200 वर्ष तक एवं अधिक पुराने वृक्षों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण किया जा रहा है. वृक्षों के ऐतिहासिक महत्व, स्थानीय मान्यताओं की जानकारी रैपुरा क्षेत्र में डिप्टी रेंजर रंजना नागर द्वारा ग्रामीण बुजुर्गों से विस्तृत चर्चा कर लगभग 20 ऐसे वृक्षों की जानकारी संकलित की गई, जिनकी आयु 100 से 200 वर्ष तक आंकी जा रही है. वरिष्ठ ग्रामीणों ने बताया कि कई वृक्ष धार्मिक आस्था से जुड़े होने के कारण आज भी सुरक्षित हैं, जिनके नीचे विभिन्न देवस्थलों की स्थापना की गई है. इस संवाद से वृक्षों के ऐतिहासिक महत्व, स्थानीय मान्यताओं तथा संरक्षण की परंपराओं को समझने में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई. शाहनगर रेंज में वनरक्षक प्रेमनारायण वर्मा द्वारा गुरझाई क्षेत्र एवं पतने-बघने नदी के पास लगभग 100 से 105 वर्ष पुराने सेमर और आम के वृक्ष चिन्हित किए गए. मोहन्द्रा रेंज में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार ने हथकुरी, कुंवरपुर और मोहन्द्रा ग्रामों में कई हेरिटेज ट्री की पहचान कर उनके फोटोग्राफ्स संकलित किए. जिनमें अनेक वृक्ष 150 वर्ष से अधिक पुराने पाए गए. पवई रेंज में वनरक्षक सत्येंद्र सिंह भदौरिया द्वारा बरगद, इमली और नीम सहित विभिन्न ग्रामों में 100 से 200 वर्ष तक आयु वाले वृक्षों का दस्तावेजीकरण किया गया. वहीं, सलेहा रेंज में वनरक्षक उमाशंकर पाल ने बुजुर्ग ग्रामीणों से चर्चा कर धार्मिक आस्था से जुड़े लगभग 110 से 120 वर्ष पुराने वृक्षों की जानकारी एकत्रित की. वन मण्डल द्वारा इस अभियान को जनसहभागिता से जोड़ते हुए सभी वन क्षेत्रों में ऐसे प्राचीन वृक्षों की पहचान और संरक्षण के प्रयास तेज किए जा रहे हैं. विभाग का मानना है कि स्थानीय समुदायों की सहभागिता और जागरूकता से न केवल जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रह सकेगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति और परंपरा दोनों का संरक्षण सुनिश्चित होगा.

कृषि रथ से किसानों को मिट्टी में मौजूद तत्वों के अनुसार फसल कॉम्बीनेशन की मिल रही जानकारी

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही है वैज्ञानिक कृषि तकनीक की जानकारी कृषि रथ से किसानों को मिट्टी में मौजूद तत्वों के अनुसार फसल कॉम्बीनेशन की मिल रही जानकारी कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग और जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि को आधुनिक तकनीक, परम्परागत ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के साथ नई ऊँचाइयों तक ले जाने तथा अन्नदाता के सम्मान और समग्र उत्थान की दिशा में इस महा अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया गया है। बुरहानपुर जिले में जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद-सत्र के आयोजन के साथ ‘‘कृषि रथ’’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर बुरहानपुर विधायक मती अर्चना चिटनिस, जनप्रतिनिधि, प्रगतिशील कृषकगण उपस्थित रहे। कृषि रथ द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में पहुंचकर किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधिकरण, कृषि को लाभकारी बनाने के उपाय, विभागीय योजना, ई-टोकन उवर्रक वितरण व्यवस्था तथा पराली प्रबंधन संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। प्रगतिशील किसानों को उत्पादन लागत को कम करने के लिये सही मिट्टी, सही खेती एवं सही फसल का कॉम्बीनेशन की जानकारी भी दी जा रही है। ग्राम पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल आयोजित बुरहानपुर जिले में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम द्वारा ग्राम पंचायत पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल का आयोजन किया गया। कृषक चौपाल में उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली, प्राकृतिक खेती के आधार जैसेः-जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, दसपर्णी अर्क को बनाने की विधि की विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मृदा के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों, मिट्टी नमूना लेने की विधि एवं संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग की अनुशंसा करने की सलाह दी गयी। दलहन एवं तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए जायद फसल उड़द और मूंगफली के बारे में बताया गया एवं बुवाई के लिए प्रेरित भी किया गया। बुरहानपुर जिले के विभिन्न ग्रामों में आयोजित हो रही कृषक चौपालों में पराली प्रबंधन सहित योजनाओं एवं अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी जानकारी दी जा रही है। ग्राम बाकड़ी में लगी कृषि चौपाल, योजनाओं की दी जानकारी कृषक कल्याण वर्ष-2026 अंतर्गत बुरहानपुर जिले के ग्राम बाकड़ी में कृषि रथ पहुंचा। इस दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा चौपाल लगाकर ग्रामीणों को उन्नत कृषि एवं तकनीकियों की बारीकी से जानकारी दी गयी। ग्रामीणों को जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कीट व रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के उपाय बताये गये। कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषि रथ गांव-गांव पहुंचकर किसानों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दे रहा है। प्रदेश सरकार के नेतृत्व में जिले में समृद्ध किसान से समृद्ध प्रदेश बनाने के लिये निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रत्येक गुरूवार को ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ आयोजित बुरहानपुर जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने एवं उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रति गुरुवार को महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी, शनवारा में ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ का आयोजन किया जा रहा है। हाट बाजार के अवलोकन के दौरान कलेक्टर  हर्ष सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है, इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ सुरक्षित एवं पौष्टिक उत्पाद प्राप्त होते है, अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती करने के लिये प्रोत्साहित करें।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले: अधोसंरचना विस्तार से मप्र में स्वास्थ्य संकेतकों में तेज सुधार

अधोसंरचना विस्तार के साथ बेहतर स्वास्थ्य संकेतकों की ओर तेज गति से अग्रसर हो रहा है म.प्र. : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुदृढ़ हो रही हैं मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आम नागरिकों के बेहतर स्वास्थ्य के लिये मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त किया जा रहा है। समन्वित प्रयासों से स्वास्थ्य अधोसंरचना का व्यापक विस्तार हुआ है और आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में उल्लेखनीय प्रगति के साथ मध्यप्रदेश स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मातृ-शिशु स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 173 से घटकर 142 तथा शिशु मृत्यु दर (IMR) 41 से घटकर 37 हुई है। जननी सुरक्षा योजना एवं मुख्यमंत्री प्रसूति सहायता योजना के अंतर्गत लाखों लाभार्थियों को हजारों करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। नवजात एवं कुपोषण प्रबंधन में एसएनसीयू एवं एनआरसी की सफल डिस्चार्ज दरों में भी वृद्धि हुई है। जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष 5 प्रदर्शनकारी राज्यों में शामिल हुआ है। सिकल सेल मिशन के अंतर्गत व्यापक स्क्रीनिंग एवं उपचार सुविधाएँ विकसित की गई हैं। आयुष्मान भारत योजना में 4.43 करोड़ कार्ड तैयार कर प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की गई है। योजनांतर्गत पात्र परिवारों को 5 लाख रूपये तक नि:शुल्क उपचार दिया जा रहा है। साथ ही गंभीर रोगियों को आपात स्थिति में त्वरित रूप से उच्च स्तरीय उपचार पीएम  एयर एम्बुलेंस सेवा से मुहैया कराया जा रहा है। अब तक 120 से अधिक नागरिकों को आपात स्थिति में सेवा का लाभ मिला है। मानवीय संवेदनाओं के दृष्टिगत निःशुल्क एवं सम्मानजनक शव-परिवहन सेवा भी प्रारंभ की गई है। राह-वीर योजना में आपात काल में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाकर जान बचाने वाले नागरिक को 25 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। साथ ही, मोबाइल मेडिकल यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं। मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2003 तक प्रदेश में सिर्फ 6 मेडिकल कॉलेज थे। वर्तमान में प्रदेश में 33 मेडिकल कॉलेज है। विगत 2 वर्षों में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 तथा निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 14 हो गई है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, इंदौर में 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालन प्रारंभ किया गया है। आगामी 2 वर्षों में 6 शासकीय एवं पीपीपी मोड पर 13 मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किया जाना योजना में शामिल है। विगत 2 वर्षों में सरकारी एमबीबीएस सीटें 2275 से बढ़कर 2850 हुई हैं, जबकि सरकारी एवं निजी मिलाकर कुल एमबीबीएस सीटें 5550 हो गई हैं। पीजी (एमडी/एमएस) सीटों में भी वृद्धि करते हुए सरकारी पीजी सीटें 1262 से बढ़कर 1468 तथा कुल पीजी सीटें 2862 हो गई हैं। इसके अतिरिक्त 93 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। सशक्त स्वास्थ्य सेवाओं से मध्यप्रदेश मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है। पीपीपी मॉडल पर कटनी, धार, पन्ना और बैतूल में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना प्रगति पर है। एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज, इंदौर में अस्पताल भवन, मिनी ऑडिटोरियम एवं नर्सिंग हॉस्टल जैसे अधोसंरचनात्मक कार्यों हेतु 773.07 करोड़ रूपये के कार्य प्रारंभ किए गए हैं। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज, रीवा के लिए 321.94 करोड़ रूपये तथा सतना मेडिकल कॉलेज से जुड़े नए अस्पताल हेतु 383.22 करोड़ रूपये के कार्य प्रारंभ किए गए हैं। इसके साथ ही 13 नए नर्सिंग कॉलेजों के लिए 192.40 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए हैं। आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के अंतर्गत इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में लिनियर एक्स-रेटर मशीनों की स्वीकृति दी गई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर में सीटी स्कैन एवं एमआरआई मशीनें स्थापित की गई हैं। भोपाल एवं रीवा में कार्डियक कैथ लैब की स्थापना की गई है। इंदौर और जबलपुर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाएँ प्रारंभ हुई हैं, वहीं इंदौर में कार-टी सेल थेरेपी एवं ब्लड कैंसर उपचार हेतु अत्याधुनिक मशीन स्थापित की गई है। मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के तहत मेडिकल कॉलेजों में 354 नए सीनियर रेजिडेंट पद सृजित किए गए हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यापक भर्ती की गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।  

प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस चलाने की हरी झंडी, शहरों में बढ़ेगा हरित परिवहन

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब पीएम ई-बस सेवा का संचालन नगरीय विकास विभाग की बजाय सुगम परिवहन सेवा के लिए गठित कंपनियां करेंगी। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए प्रदेश में एक राज्य स्तरीय कंपनी के साथ 7 सहायक कंपनियां गठित की गई हैं। केन्द्र से प्रदेश के आठ शहरों के मिली 972 ई-बसों का संचालन भी यही कंपनियां करेंगी। पहले यह काम नगरीय विकास विभाग द्वारा किया जा रहा था। लेकिन सरकार ने तय किया है कि प्रदेश में अंतरशहरी बस सेवा के साथ नगर वाहन सेवा का संचालन भी इन्हीं कंपनियों द्वारा किया जाएगा। 7 सहायक कंपनी बनाई गई प्रदेश में अगस्त 2025 में राज्य स्तरीय मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड कंपनी का पंजीयन हो गया है। मुख्यमंत्री इस राज्य स्तरीय कंपनी के अध्यक्ष हैं। परिवहन मंत्री एवं मुख्य सचिव उपाध्यक्ष हैं। राज्य स्तरीय कंपनी के अधीन 7 सहायक कंपनी बनाई गई हैं। वर्तमान में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर में कार्य कर रही सिटी बस कंपनी के शेयर होल्डिंग में परिवर्तन करते हुए इन सातों शहरों की नवगठित कंपनियां बनाई गई हैं। कंपनियों ने ट्रैफिक सर्वे करते हुए नए सिरे से नए बस रूट निर्धारण और इन रूट्स पर बस फ्रिक्वेंसी के निर्धारण का काम शुरू कर दिया है। भोपाल में 195, इंदौर में चलेंगी 270 बसें केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस चलाने की मंजूरी दी है। इसमें सबसे ज्यादा 270 ई-बसें इंदौर को मिली हैं, जबकि राजधानी भोपाल को केवल 195 बसें मिली हैं। जबलपुर में 200, ग्वालियर में 100, उज्जैन में 100, सागर में 32, देवास में 55 और सतना में 20 ई-बसें संचालित की जाएंगी।  इन शहरों में बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से जुड़े अधोसंरचना के सभी काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में चार्जिंग पाइंट अधोसंरचना निर्माण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत राशि दी जा रही है। गौरतलब है कि इस परियोजना के अंतर्गत ग्वालियर, इंदौर में कुछ बसें भेजी भी जा चुकी हैं। ई-बसों के संचालन यात्री सुविधाओं के साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।

MP Budget 2026 से जुड़े ईंधन दरों के फैसले, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर होगी बड़ी बात

भोपाल  सोने-चांदी की कीमतों में उतार चढ़ाव से जूझ रही मध्य प्रदेश की जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें टेंशन दे सकती हैं। जी हां सीएम मोहन ने इशारों इशारों में पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ने के संकेत दिए हैं। सीएम मोहन यादव ने कहा है कि सरकार इन कीमतों को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है और धीरे-धीरे राहत देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। भोपाल में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान सीएम मोहन यादव ने स्वीकार किया कि पेट्रोल-डीजल वाकई एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने इशारों में कहा कि सरकार इस समस्या का समाधान निकालने की तैयारी कर रही है। सीएम ने यह भी जानकारी दी कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा और 18 फरवरी को MP Budget 2026 पेश किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बजट में जनता को कई क्षेत्रों में रियायत दी जाएगी। इसका सीधा मतलब ये निकाला जा सकता है फरवरी के बाद ही पेट्रोल डीजल की कीमतें में बदलाव आएगा। मध्यप्रदेश में पेट्रोल पर करीब 29 फीसदी और डीजल पर लगभग 19 फीसदी वैट पर राहत मिलने के सवाल पर सीएम ने जवाब कहा—इस पर उन्होंने कहा कि सरकार पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी पर भी काम कर रही है। ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ईंधन पर निर्भरता कम हो सके। सीएम मोहन यादव ने पेट्रोल-डीजल का सीधे नाम लिए बिना कहा कि बजट के माध्यम से इस चुनौती के निराकरण का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में मध्यप्रदेश शामिल है, लेकिन साथ ही यह राज्य कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में भी अपनी जगह बना चुका है।

याचिकाओं के आधार लिंकिंग सुझाव पर हाईकोर्ट ने लिया कदम, प्रशासनिक कमेटी करेगी विचार

जबलपुर  हाईकोर्ट में दायर होने वाली याचिकाओं को आधार कार्ड से लिंक करने की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि इससे वर्षों से लंबित अनुपयोगी याचिकाओं का जल्द निराकरण होगा और लंबित प्रकरणों की संख्या में कमी आएगी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका पर आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के सुझाव को अभ्यावेदन मानकर रजिस्ट्रार जनरल प्रशासनिक कमेटी के समक्ष रखा जाए। याचिका जबलपुर निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा की तरफ से दायर की गई थी। इसमें कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सभी हाईकोर्ट को डिजिटलीकरण के संबंध में आदेश जारी किए थे। याचिका में यह भी सुझाव दिया गया कि डिजिटलीकरण के दौरान नेशनल प्रिजन पोर्टल से हाईकोर्ट को भी जोड़ा जाए, ताकि जेल में सजा काट रहे कैदियों के रिकॉर्ड देखे जा सकें। याचिका में यह भी बताया गया कि कई मामलों में कैदियों की सजा पूरी होने के बावजूद उनके द्वारा दायर अपील हाईकोर्ट में लंबित रहती है। इसी तरह जिला न्यायालय में आपसी समझौता होने के बावजूद उच्च न्यायालय में दायर याचिका लंबित रहती है। सुझाव में यह भी कहा गया कि डिजिटलीकरण के दौरान याचिकाओं को आधार कार्ड से जोड़ा जाए। कई मामलों में याचिकाकर्ता की मृत्यु होने के बावजूद याचिका लंबित रहती है, जिससे न्यायालय का कीमती समय बर्बाद होता है। इसके अलावा फाइलिंग और आवेदन पेश करने के संबंध में भी कई सुझाव दिए गए थे। युगलपीठ ने याचिका में दिए गए सभी सुझावों को उचित मानते हुए आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष स्वयं रखा।

बच्चों के मसीहा बने सीएम योगी: शिक्षा, उपचार और सहायता—सब कुछ तुरंत

लखनऊ नर्सरी में एडमिशन कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची मासूम बच्ची की जिद हो या चॉकलेट की मांग करने वाले बच्चों की हठ। जिन मुख्यमंत्री का नाम सुनकर अपराधी कांप उठते हैं, बच्चे उन्हीं से मिलकर सहजता से अपनी जिद मनवा लेते हैं। कहते हैं, 'बच्चे मन के सच्चे', वे अपने दिल की भावना को अत्यंत निश्छलता से प्रकट कर देते हैं, यही भाव उस समय सामने आया, जब सीएम योगी आदित्यनाथ को देखते ही एक छोटी बच्ची ने उन्हें सैल्यूट किया। सीएम ने भी मुस्कुराते हुए बच्ची को खूब मन लगाकर पढ़ने के लिए कहा। उनका यह बाल प्रेम उनके कोमल हृदय व सर्वसुलभ होने के साथ-साथ जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री के बच्चों से जुड़ाव और उनके साथ भावनात्मक संवाद के कई दृश्य समय-समय पर सामने आते रहते हैं। विगत सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में मां के साथ आई बच्ची अनाबी अली से सीएम का संवाद इन दिनों चर्चा में है। अपने एडमिशन के लिए जिद, फिर एबीसीडी व कविता सुनाकर अनाबी ने सीएम का दिल जीत लिया। मकर संक्रांति पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछना और उसका मासूम जवाब सुनकर खिलखिलाकर हंसना भी उनके बालप्रेम को प्रकट करता है। बच्चों से अत्यंत आत्मीयता से संवाद और उनके भविष्य को लेकर त्वरित निर्णय मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता को प्रदर्शित करते हैं। बीते दिनों ‘जनता दर्शन’ में दो साल की अनन्या से संवाद भी लोगों के मन को छू गया। इसी तरह 31 दिसंबर को मेजर की बेटी अंजना भट्ट ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने मकान पर कब्जे की शिकायत की, जिस पर मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के भीतर न सिर्फ मकान को कब्जा मुक्त कराया, बल्कि आरोपियों पर एफआईआर व तत्काल गिरफ्तारी भी कराई। यह मामला सीएम की जन समस्याओं के प्रति गंभीरता को प्रकट करते हुए स्पष्ट संदेश देता है कि वे कानून व्यवस्था, बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों का समाधान कराने में तनिक भी विलंब नहीं करते। कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की कहानी भी इन दिनों हर किसी की जुबां पर है। मुख्यमंत्री से मिलने की उसकी जिद और अकेले पैदल चलकर लखनऊ पहुंचने की जानकारी जब सीएम योगी आदित्यनाथ को मिली तो उन्होंने उसे बुलाकर उसके बनाए चित्रों को स्वीकार किया और उसके शिक्षित-सुरक्षित भविष्य का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के अपनत्व से भाव-विभोर खुशी की ‘अनकही भावनाओं’ ने 25 करोड़ प्रदेशवासियों के बीच मुख्यमंत्री की ‘प्रदेश ही परिवार’ धारणा की विश्वसनीय तस्वीर पेश की। ‘जनता दर्शन’ के जरिए लखनऊ की अनाबी अली, कानपुर की मायरा, गोरखपुर की पंखुड़ी और मुरादाबाद की वाची का स्कूल में एडमिशन कराना भी सीएम योगी की संवेदनशीलता का हिस्सा है। कानपुर की नन्ही मायरा ने कहा था कि मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूं। इस पर सीएम ने तत्काल उसका प्रवेश कराने का निर्देश दिया। वाची ने कहा कि मैं पढ़ना चाहती हूं, सीएम ने उसका भी प्रवेश कराया। गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफ कराने के साथ ही उसे पुनः विद्यालय भेजना भी सुनिश्चित कराया। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में आए बच्चे सीधे सीएम योगी के पास पहुंच गए। सभी ने सीएम के साथ फोटो खिंचवाई, उनसे बातचीत की। सीएम ने उन्हें दुलारा और एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर अपना वात्सल्य भाव प्रकट किया। बीते सितंबर में ‘जनता दर्शन’ में कानपुर की रायपुरवा निवासी एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे का दर्द लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची थीं। उनकी तकलीफ देखकर सीएम द्रवित हो गए और कैंसर पीड़ित बेटे को एंबुलेंस से सीधे कल्याण सिंह सुपर स्पेशियिलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाकर उसका इलाज प्रारंभ कराया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाल प्रेम, जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

भरे सदन BJP MLA को फिर ‘अमर्यादित’ बोल गए शांति धारीवाल

जयपुर. राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र मंगलवार को उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गया, जब कोटा उत्तर से विधायक शांति धारीवाल ने राज्यपाल के अभिभाषण पर वाद-विवाद के दौरान शिष्टाचार की सीमा लांघ दी। सदन की कार्यवाही के दौरान धारीवाल ने मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को लेकर एक आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग किया, जिसे लेकर सत्तापक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। "आधी बात समझ आती है, आधी नहीं…" विधानसभा में जब राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस चल रही थी, तब आसन पर सभापति संदीप शर्मा मौजूद थे। इसी दौरान शांति धारीवाल और मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग के बीच तीखी नोकझोंक हुई। अपनी बात रखते हुए धारीवाल अचानक संयम खो बैठे और जोगेश्वर गर्ग को संबोधित करते हुए बोले— "आपकी बात आधी तो समझ में आती है यार और आधी नहीं… (अमर्यादित शब्द)!" जोगेश्वर गर्ग ने जताई आपत्ति धारीवाल की जुबान से अपशब्द निकलते ही सत्तापक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई। मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने तुरंत खड़े होकर इस पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने तंज कसते हुए सभापति से कहा, "इनकी जुबान से तो 'फूल' झड़ रहे थे, उस अमर्यादित शब्द को सदन की कार्यवाही से तुरंत हटाया जाए।" इस घटना के बाद सदन में काफी देर तक शोर-शराबा होता रहा और विपक्षी खेमे को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा। 'मर्दों का प्रदेश' से 'अमर्यादित शब्द' तक: विवादों का पुराना नाता सदन में इस ताज़ा वाक्ये के बाद शांति धारीवाल के पुराने विवादित बयानों की चर्चा फिर से छिड़ गई है। पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान उन्होंने बलात्कार जैसे संवेदनशील विषय पर जवाब देते हुए कहा था कि "राजस्थान मर्दों का प्रदेश है", जिस पर भारी बवाल हुआ था। एक बार फिर उनकी भाषा शैली ने सदन की गरिमा पर सवालिया निशान लगा दिया है। मदन दिलावर और स्किल सेंटर पर 'चौतरफा' हमला विवादित टिप्पणी के बावजूद धारीवाल ने भाजपा सरकार और विशेषकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर तीखे हमले जारी रखे। उन्होंने शिक्षा मंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। धारीवाल ने दिलावर के 'डीलक्स स्कूल भवनों' के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। वहीं महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का नाम बदलने पर कहा कि "उस महात्मा का नाम दुनिया के दिल से नहीं निकाल सकते।" धारीवाल ने CAG की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं को रेवड़ियों की तरह स्किल सेंटर बांट दिए और भारी घोटाला किया। कांग्रेस के 'कफन' वाली सहायता पर गरमाई बहस शांति धारीवाल ने कांग्रेस सरकार की योजनाओं का गुणगान करते हुए भाजपा सरकार की घेराबंदी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में संवेदनशीलता इस कदर थी कि अस्पताल में मरीज की मौत होने पर सरकार ढाई हजार रुपये की सहायता और कफन तक की व्यवस्था करती थी। उनके इस बयान पर सत्तापक्ष ने पलटवार करते हुए इसे केवल लोकलुभावन और धरातल से दूर बताया।