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धान की खेती का होगा सटीक तकनीकी सत्यापन, छत्तीसगढ़ में समझौता

छत्तीसगढ़ में धान की खेती के सटीक एवं तकनीकी सत्यापन के लिए हुआ एमओयू रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश में धान की खेती के क्षेत्रफल का सटीक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित आकलन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज यहाँ मंत्रालय महानदी भवन में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सेटेलाइट-आधारित मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भू-स्थानिक डेटा के बेहतर समन्वय से राज्य की धान उपार्जन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से किया गया है। गैर-जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों की मैपिंग  विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम के तहत आबंटित भू-भागों और डुबान क्षेत्रों में स्थित ऐसे कृषि क्षेत्रों की पहचान कर उनकी जीआईएस आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी, जो वर्तमान में डिजिटल रूप से मैप नहीं हैं।  खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए आकलन तैयार पॉलीगॉन लेयर और भू-स्थानिक डेटा के आधार पर आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान की फसल के वास्तविक रकबे का सटीक आकलन किया जाएगा। सेटेलाइट इमेजरी से सत्यापन अन्य जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों में भूमि खंडों (खसरों) के अक्षांश-देशांतर का सेटेलाइट इमेजरी से मिलान कर धान की फसल की डिजिटल उपस्थिति की पुष्टि की जाएगी। इस तकनीकी पहल से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों एफआरए एवं डुबान क्षेत्र की कृषि भूमि की डिजिटल पहचान मजबूत होगी तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए एक मजबूत आधार ढाँचा तैयार होगा।  इस दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम एवं संचालक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद कवीश्वर उपस्थित रहे।

पहला दिन: राष्ट्रीय संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं, अभिभावकों व प्राध्यापकों ने की सहभागिता

भोपाल   पहला दिन: राष्ट्रीय संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं, अभिभावकों व प्राध्यापकों ने की सहभागिता दिव्यांगजनों और विद्यार्थियों को समावेशी खेलों से जोड़ने की पहल स्पेशल ओलंपिक भारत मध्यप्रदेश द्वारा मंगलवार को जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी, भोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय “समावेशी खेल, यूनिफाइड स्पोर्ट्स, दिव्यांगजन अधिकार एवं अनुकूलित शारीरिक शिक्षा—खेलों में सुगमता एवं समान अवसर को सशक्त बनाना” रहा। संगोष्ठी के दौरान समावेशी खेल, यूनिफाइड स्पोर्ट्स, दिव्यांगजन अधिकार एवं अनुकूलित शारीरिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में लगभग 200 छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं शिक्षकों ने सहभागिता की। बच्चों को खेलों से जोड़ना उनके विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: दीपांकर संगोष्ठी के पहले सत्र में उपस्थित अतिथि दीपांकर बैनर्जी ने स्पेशल ओलंपिक भारत के कार्यों, उपलब्धियों एवं समावेशी खेलों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस संबंध में बताया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को खेल गतिविधियों से जोड़ना उनके विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खेलों के माध्यम से बच्चों में शारीरिक क्षमता के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता, आत्मविश्वास, अनुशासन एवं टीम भावना का विकास होता है। संगोष्ठी के प्रथम दिवस के समापन सत्र में मध्यप्रदेश दिव्यांगजन आयुक्त अजय … ने दिव्यांगजनों के अधिकारों एवं उनसे संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों तथा दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए समान अवसर, सुगम्यता एवं अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न सत्रों में दिव्यांगजनों एवं विद्यार्थियों को खेलों से जोड़ने तथा उनके विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई। अतिथियों ने किया संगोष्ठी का शुभारंभ संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित NIMHR सीहोर के निदेशक अखिलेश शुक्ला, विशिष्ट अतिथि जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति निलंजन चट्टोपाध्याय, स्पेशल ओलंपिक भारत मध्यप्रदेश के क्षेत्रीय निदेशक दीपांकर बैनर्जी, फिजिकल एजुकेशन विभाग के एचओडी हर्षवर्धन दुबे सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत किया। यह राष्ट्रीय संगोष्ठी समावेशी खेलों को बढ़ावा देने, दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा विद्यार्थियों एवं भावी खेल प्रशिक्षकों को संवेदनशील एवं सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

शंघाई में आयोजित वर्ल्ड स्किल्स कॉन्फ्रेंस में आईसेक्ट प्रतिनिधियों की सहभागिता

भोपाल चीन के शंघाई में 23 से 25 सितंबर तक आयोजित वर्ल्ड स्किल्स कॉन्फ्रेंस में फिक्की के स्किल्स डेलिगेशन के साथ आईसेक्ट के प्रतिनिधि सहभागिता कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में आईसेक्ट इंडिया के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डॉ. अभिषेक पंडित, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. सीतेश कुमार सिन्हा तथा आईसेक्ट इंडिया के जनरल मैनेजर-प्रोजेक्ट्स अभिषेक गुप्ता शामिल हैं।   कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रतिनिधिमंडल वैश्विक स्तर पर कौशल विकास के बदलते स्वरूप, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा, प्रशिक्षण पद्धतियों तथा उद्योग और कौशल विकास के बीच बेहतर समन्वय से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझ रहा है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा शंघाई स्थित विभिन्न टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स एवं इंडस्ट्रीज की विजिट भी की जा रही है। कुछ संस्थानों एवं उद्योगों का दौरा पूरा हो चुका है, जबकि अन्य संस्थानों की विजिट और विशेषज्ञों के साथ संवाद का क्रम जारी है।   इन विजिट्स के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा में अपनाई जा रही आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं और युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करने के लिए विकसित किए जा रहे विभिन्न मॉडलों को प्रत्यक्ष रूप से समझ रहा है।   आईसेक्ट लंबे समय से कौशल विकास और युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में पिछले दो वर्षों से आईसेक्ट द्वारा MPSSDM के साथ मिलकर स्टेट लेवल स्किल्स कॉम्पीटिशन का आयोजन स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी कैंपस में किया जा रहा है जिसमें आठ ट्रेड्स में 150 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को अपने तकनीकी एवं व्यावहारिक कौशल का प्रदर्शन करने का अवसर मिला। इसमें पिछले वर्ष बेहतर प्रदर्शन करने वाले तीन प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता तक भी पहुंचे।   वर्ल्ड स्किल्स कॉन्फ्रेंस में आईसेक्ट प्रतिनिधियों की सहभागिता के दौरान प्राप्त अनुभव वैश्विक कौशल विकास के बदलते परिदृश्य को समझने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। विशेष रूप से तकनीकी संस्थानों और उद्योगों की विजिट के माध्यम से यह जानने का अवसर मिल रहा है कि किस प्रकार शिक्षा, तकनीक और उद्योग की आवश्यकताओं को एक साथ जोड़कर युवाओं को भविष्य के रोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है।

आयुर्वेद सेवाओं का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण, स्वस्थ मध्यप्रदेश के संकल्प सिद्धि की ओर महत्वपूर्ण कदम : आयुष मंत्री परमार

भोपाल  आयुर्वेद हमारी समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। आयुष सेवाओं के विस्तार और आधुनिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से प्रदेश में जनस्वास्थ्य को और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है। बुधवार को 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित शासकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय के नवीन भवन का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास किया गया। शासकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय भोपाल के नवीन भवन निर्माण एवं नवीनीकरण कार्यों के लिए आयुष विभाग द्वारा 4 करोड़ 95 लाख रुपए राशि की स्वीकृति दी गई है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का मार्ग है। मध्यप्रदेश में आयुष चिकित्सा सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के साथ चिकित्सालयों में आवश्यक अधोसंरचना और सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। मंत्री परमार ने कहा कि नवीन भवन के निर्माण से नागरिकों को बेहतर, सुगम और गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेद चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रदेश सरकार आयुष सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की समृद्ध परंपरा को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री परमार ने कहा कि स्वस्थ मध्यप्रदेश के संकल्प को साकार करने में आयुष चिकित्सा पद्धतियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक नागरिक को सहज रूप से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों और आयुर्वेद सहित सभी आयुष पद्धतियों का लाभ व्यापक स्तर पर जनसामान्य तक पहुंचे। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, चिकित्सक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

सेवा से संकल्प और संकल्प से विकसित भारत की यात्रा, जनभागीदारी से मजबूत होगा राष्ट्र निर्माण

रायपुर किसी गरीब मां के लिए वह क्षण कितना बड़ा होता होगा, जब उसके घर के चूल्हे पर धुएं के बजाय गैस की नीली लौ जलती है। किसी पिता के लिए वह कितनी बड़ी राहत होगी, जब उसे यह चिंता न हो कि आज बच्चों के लिए भोजन कहां से आएगा। बस्तर के किसी दूरस्थ गांव में रहने वाले जनजातीय परिवार के लिए वह कितनी बड़ी खुशी होगी, जब कठिन रास्तों को पार कर राशन उसके गांव तक पहुंचता है। वास्तव में सेवा का अर्थ इन्हीं छोटे-छोटे लेकिन अनमोल क्षणों में दिखाई देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने का अवसर हमें इसी व्यापक अर्थ में सेवा को देखने का अवसर देता है। यह यात्रा केवल पद और दायित्व की यात्रा नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के संकल्प की यात्रा भी रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से हम प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ-साथ यह संकल्प भी लें कि विकसित भारत के निर्माण में हमारा अपना योगदान क्या होगा। सेवा का भाव किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं होता। जब कोई व्यक्ति रक्तदान करता है, किसी जरूरतमंद की मदद करता है, स्वच्छता के लिए श्रमदान करता है, नदी या घाट की सफाई में अपना समय देता है अथवा अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करता है, तब राष्ट्र निर्माण की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण ईंट रखी जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता को इसी जनभागीदारी से जोड़ा। स्वच्छ भारत अभियान ने यह संदेश घर-घर तक पहुंचाया कि स्वच्छता केवल सफाई कर्मी या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इसी तरह गंगा और देश की अन्य नदियों की स्वच्छता के लिए नमामि गंगे जैसे प्रयासों ने नदी, घाट और पर्यावरण को लेकर समाज की भागीदारी को व्यापक बनाया। सेवा का यह स्वरूप हमें बताता है कि राष्ट्र के प्रति प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे कर्मों में दिखाई देना चाहिए। गरीब कल्याण के क्षेत्र में भी सेवा का सबसे संवेदनशील रूप दिखाई देता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने करोड़ों गरीब परिवारों की महिलाओं को धुएं से राहत देते हुए स्वच्छ ईंधन की सुविधा से जोड़ा। एक रसोई में जलती गैस की लौ को केवल एक सरकारी योजना का परिणाम मानना पर्याप्त नहीं होगा। उसके पीछे एक महिला का बदला हुआ जीवन, उसके समय की बचत और सम्मान के साथ भोजन बनाने का अवसर भी जुड़ा है। खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली ने यह सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों की थाली तक खाद्यान्न पहुंचे। इस भावना को बहुत करीब से महसूस करने की बात है कि शासन की किसी भी योजना की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना यह है कि उसका लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक कितनी सहजता से पहुंचा। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली केवल राशन वितरण की व्यवस्था नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में खाद्य सुरक्षा का आधार है। उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से चावल और आवश्यक खाद्यान्न जब किसी जरूरतमंद परिवार के घर तक पहुंचता है, तब शासन की संवेदनशीलता धरातल पर दिखाई देती है। सरकार की कोशिश भी यही है कि पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रहे और व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बनी रहे। बस्तर का संदर्भ इस सेवा भावना को और गहरा करता है। दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों में भौगोलिक परिस्थितियां अनेक बार सुविधाओं की राह कठिन बनाती हैं। ऐसे क्षेत्रों में नियद नेल्लानार जैसी पहल के माध्यम से शासन की सुविधाओं को उन गांवों और परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लंबे समय तक मुख्यधारा की सुविधाओं से दूर रहे। जब ऐसे किसी गांव के परिवार को उसके नजदीक राशन की सुविधा मिलती है, तो वह केवल खाद्यान्न का वितरण नहीं होता – वह शासन और नागरिक के बीच विश्वास का सेतु बनता है। प्रदेश में पीडीएस प्रणाली की सबसे मानवीय पक्ष यही है कि प्रदेश में कोई पात्र परिवार भूखा न रहे। राशन की दुकान पर पहुंचने वाला प्रत्येक परिवार केवल एक राशनकार्ड संख्या नहीं है। वह एक परिवार है, जिसकी अपनी आवश्यकताएं, उम्मीदें और भविष्य हैं। किसी मां के चेहरे की चिंता कम होना और बच्चों की थाली में भोजन पहुंचना ही सरकार की काम की वास्तविक सार्थकता है। ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकार नहीं कर सकती। सरकार योजनाएं बना सकती है, संसाधन उपलब्ध करा सकती है और व्यवस्थाएं खड़ी कर सकती है; लेकिन उन्हें जनआंदोलन बनाने की शक्ति समाज की सहभागिता से आती है। रक्तदान करने वाला व्यक्ति, स्वच्छता के लिए आगे आने वाला युवा, नदी-घाट की सफाई करने वाला नागरिक, किसी जरूरतमंद को सरकारी योजना की जानकारी देने वाला व्यक्ति-हर कोई विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर हमें केवल पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है। यह आगे बढ़ने और अपने हिस्से की जिम्मेदारी स्वीकार करने का भी अवसर है। आइए, हम संकल्प लें कि अपने गांव, अपने शहर, अपने समाज और अपने प्रदेश के लिए हम कुछ न कुछ अवश्य करें। क्योंकि राष्ट्र निर्माण हमेशा बड़े कामों से नहीं होता। कई बार वह उस छोटी-सी रसोई से शुरू होता है, जहां गरीब मां निश्चिंत होकर चूल्हा जलाती है। उस राशन की दुकान से शुरू होता है, जहां जरूरतमंद परिवार को खाद्यान्न मिलता है। उस स्वच्छ घाट से शुरू होता है, जहां नागरिक अपने हाथों से सफाई करते हैं। और उस रक्तदान शिविर से शुरू होता है, जहां कोई अनजान व्यक्ति किसी अनजान जीवन को बचाने का माध्यम बनता है। सेवा से संकल्प और संकल्प से विकसित भारत-यही वह यात्रा है, जिसमें सरकार के साथ प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।

स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक और एआई का बढ़ेगा उपयोग : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल भोपाल में निजी मीडिया समूह द्वारा आयोजित "मोदी 25 : विकसित भारत, बढ़ता मध्यप्रदेश" कॉन्क्लेव में शामिल हुए। कॉन्क्लेव में उन्होंने मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे बदलावों, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, आयुष्मान भारत योजना, चिकित्सा अधोसंरचना, तकनीक के उपयोग, औद्योगिक विकास और पर्यटन सहित विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए सतत प्रयास उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश का प्रयास है कि मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को शून्य स्तर तक लाया जाए। इसके लिए आवश्यक स्वास्थ्य अधोसंरचना, मानव संसाधन, जांच एवं उपचार सुविधाओं के साथ-साथ जन-जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की आवश्यक जांच समय पर हो, इसके लिए केवल चिकित्सकीय अमले और आशा कार्यकर्ताओं की ही नहीं, बल्कि परिवार और पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों की भी सक्रिय भूमिका आवश्यक है। उन्होंने कुपोषण को भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बताते हुए कहा कि कुपोषित बच्चों और गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले ही आवश्यक देखभाल और जांच उपलब्ध कराना जरूरी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रमों में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच के संबंध में शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर के माध्यम से गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। यहां टेलीमेडिसिन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी टेलीमेडिसिन के साथ सैंपलिंग और जांच की सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ चिकित्सकों से वीडियो कंसल्टेशन प्राप्त कर सकते हैं। आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक मरीज को उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर कर सकते हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को अनावश्यक रूप से शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी। आयुष्मान भारत में पारदर्शिता और निगरानी की व्यवस्था उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति धन के अभाव में बेहतर उपचार से वंचित न रहे। योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवर उपलब्ध कराया गया है। मध्यप्रदेश में लगभग 4.5 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का हितग्राही बनाया गया है तथा योजना लागू होने के बाद अब तक लगभग 14 हजार करोड़ रुपये के भुगतान किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि योजना में ऑडिट, संदिग्ध बिलों की पहचान, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और क्रॉस-चेकिंग की व्यवस्था है। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संस्थान के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई और एफआईआर जैसी कार्रवाई भी की जाती है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को किया जा रहा है सशक्त उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि शासकीय अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। जिला अस्पतालों में निःशुल्क जांच और उपचार के साथ आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है। आईपीएचएल लैब में 134 प्रकार की जांचें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे मरीजों को जांच के लिए बड़े शहरों में सैंपल भेजने की आवश्यकता कम हुई है। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी आवश्यक सुविधाओं से मजबूत किया जा रहा है, ताकि मरीजों को प्राथमिक और सेकेंडरी स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं उनके नजदीक ही मिल सकें और केवल आवश्यक रेफरल केस ही जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज पहुंचें। दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि शासकीय सप्लाई में आने वाली दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उनके बैच को जांच के लिए एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है। निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने के बाद ही दवाओं को वितरण के लिए भेजा जाता है। मेडिकल स्टोर्स पर ड्रग इंस्पेक्टरों द्वारा रैंडम निरीक्षण भी किया जाता है तथा एक्सपायरी या अन्य अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। रीवा में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार रीवा में चल रहे स्वास्थ्य अधोसंरचना कार्यों की जानकारी देते हुए शुक्ल ने बताया कि 750 बिस्तरीय मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का निर्माण तेजी से चल रहा है। इसके पूर्ण होने से विंध्य क्षेत्र के मरीजों को बेहतर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी और संजय गांधी अस्पताल पर बढ़ते दबाव को कम करने में सहायता मिलेगी।उन्होंने बताया कि रीवा में निर्माणाधीन कैंसर ब्लॉक को जनवरी तक पूर्ण करने का प्रयास है। कैंसर उपचार के लिए आवश्यक आधुनिक मशीनों में लीनियर एक्सीलरेटर, ब्रेकीथेरेपी और पेट स्कैन मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में एआई और आधुनिक तकनीक का उपयोग उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर भी मध्यप्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है। टीबी स्क्रीनिंग के लिए एआई आधारित एक्स-रे तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। स्क्रीनिंग, डायग्नोसिस और उपचार की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई तकनीकों और रोबोटिक्स आधारित व्यवस्थाओं पर भी कार्य किया जा रहा है। मैन्युफैक्चरिंग और निवेश को मिल रहा प्रोत्साहन उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के साथ-साथ संभागीय स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए गए हैं। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर हाईवे, रेलवे और एयर कनेक्टिविटी सहित मजबूत अधोसंरचना निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। रीवा में एयर कनेक्टिविटी के विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से विंध्य क्षेत्र में विकास और निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं। पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में धार्मिक, वन्यजीव और प्राकृतिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। उज्जैन में महाकाल लोक के विकास के बाद धार्मिक पर्यटन में वृद्धि हुई है। ओंकारेश्वर, चित्रकूट और मैहर सहित धार्मिक स्थलों के … Read more

2017 के पहले प्रदेश का माहौल खराब कर रखा था सपा के गुंडों ने, बेटियों को करते थे परेशान : मुख्यमंत्री

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला सुरक्षा को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर एक बार फिर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में ऐसी स्थिति थी कि कहावत चल पड़ी थी, ‘देख सपाई, बिटिया घबराई।’ अभिभावक बेटियों की पढ़ाई और सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे। तत्कालीन सरकार के गुंडों ने माहौल खराब कर रखा था। कई जिलों में बेटियों की पढ़ाई संकट में थी। सपा के शोहदे उन्हें परेशान करते थे, जबरन उठा ले जाते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में गुंडागर्दी, जमीन पर कब्जे और अराजकता का माहौल था। जबकि आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगा, भय, गुंडागर्दी और अवैध कब्जे से मुक्त है। 2017 के बाद समाज और सरकार ने एक दिशा में काम किया तो इसके परिणाम सामने आए हैं। सीएम योगी बुधवार को चरगांवा में कृषि विभाग के बीज गोदाम के समीप राजकीय महिला शरणालय के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। 100 महिलाओं की क्षमता वाले सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त इस भवन के निर्माण पर 8 करोड़ 5 लाख 42 हजार रुपये की लागत आई है। लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि घर छोड़ने को मजबूर किसी बेटी या घरेलू हिंसा की शिकार महिला को अब दर-दर की ठोकर नहीं खानी पड़ेगी। गोरखपुर में 100 बेड का राजकीय महिला शरणालय ऐसी महिलाओं का संबल बनेगा। आधी आबादी को सम्मान और सुरक्षा देने के साथ स्वावलंबन के पथ पर आगे बढ़ाकर विकसित भारत की संकल्पना को पूरा करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटी के जन्म से लेकर उसकी पढ़ाई, विवाह, सुरक्षा और स्वावलंबन तक सरकार उसके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत जन्म से स्नातक तक बेटी के लिए 25 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में एक लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में 1.60 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, किताब, जूते-मोजे और स्वेटर की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि 1.10 करोड़ परिवारों को सालाना 12 हजार रुपये पेंशन और प्रदेश में 65 लाख गरीबों को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों को चुनने से अच्छी सुविधाएं मिलती हैं। कोरोना काल में निराश्रित हुए बच्चों को सरकार चार हजार रुपये प्रतिमाह सहायता दे रही है। ऐसे बच्चों को पढ़ाई में मदद के लिए लैपटॉप भी उपलब्ध कराए गए हैं। सीएम योगी ने रोजगार को लेकर विपक्ष, खासकर सपा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘आप गिनते जाइए, हम नौकरी बांटते जाएंगे। आप गिनते-गिनते थक जाएंगे, हम यूपी के नौजवानों को नौकरी देते-देते नहीं थकेंगे।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन रोजगार के तहत अब तक साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार की नई संभावनाएं बन रही हैं। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयों के माध्यम से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इनमें बड़ी संख्या में इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं। 24 हजार से अधिक स्टार्टअप के साथ उत्तर प्रदेश का युवा अब नौकरी लेने वाला ही नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला भी बन रहा है।  स्वावलंबन की नई कहानी लिख रही हैं महिलाएं सीएम योगी ने कहा कि लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी के रूप में महिलाएं स्वावलंबन की नई कहानी लिख रही हैं। नारी वंदन अधिनियम के जरिए लोकसभा और विधानसभा में भी महिलाओं के प्रतिनिधित्व का रास्ता सुनिश्चित किया गया है।   इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों का आंकड़ा शून्य पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस बच्चों को निगल जाती थी। अकेले बीआरडी मेडिकल कॉलेज में करीब 500 बच्चों की मौत होती थी। सरकार के प्रयासों से आज मौत का आंकड़ा शून्य पर पहुंच गया है। उन्होंने गोरखपुर में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी में आए अभूतपूर्व बदलाव का भी उल्लेख किया। कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से वाराणसी की यात्रा अब करीब ढाई घंटे में पूरी हो रही है।   निराश्रित महिलाओं का संबल बनेगा शरणालय सीएम योगी ने कहा कि घरेलू हिंसा की शिकार महिला हो या किसी कारण परिवार से बिछड़ी बेटी, बहन अथवा बुजुर्ग महिला, यह शरणालय उनका सहारा बनेगा। उन्होंने शरणालय में रह रही एक बुजुर्ग महिला का उल्लेख करते हुए कहा कि वह बोल नहीं पा रही हैं और उनके घर-पते की जानकारी नहीं है। ऐसे लोगों का संबल सरकार बनती है और उन्हें उनके वैधानिक अभिभावकों से मिलाने का प्रयास करती है। मुख्यमंत्री ने महिला कल्याण विभाग से शरणालय का बेहतर संचालन करने की अपेक्षा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वामन जयंती की शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्रीविष्णु के वामन अवतार का उल्लेख किया और उपस्थित लोगों को बधाई दी।   रवि किशन बोले- बहन-बेटियों के साथ खड़ी है सरकार सांसद रवि किशन शुक्ला ने कहा कि ठंड में कोई निराश्रित बेटी या बहन कहां जाएगी और उसे आश्रय कैसे मिलेगा, इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री योगी ने आठ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यह शरणालय बनवाया है। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश ने नई करवट ली है। कानून के राज ने माफिया और गुंडागर्दी पर अंकुश लगाया है। पहले गरीबों की जमीन पर कब्जे और रंगदारी की घटनाएं होती थीं, जबकि आज सरकार गरीबों और महिलाओं के साथ खड़ी है। उन्होंने रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी सरकार के कार्यों का उल्लेख किया।   यूपी उत्तम प्रदेश बनने की ओर अग्रसर: महेंद्रपाल कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी का स्वागत करते हुए पिपराइच के विधायक महेंद्रपाल सिंह ने कहा कि सरकार ने जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्र लोगों तक पहुंचाया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कभी इंसेफेलाइटिस से बड़ी संख्या में बच्चों की जान जाती थी, लेकिन सरकार के प्रयासों से इस पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। युवाओं को रोजगार और बेटियों को सुरक्षा देने के संकल्प के साथ सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बीमारू प्रदेश की छवि से निकलकर उत्तम प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है।   बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को सीएम ने दिए लैपटॉप कार्यक्रम … Read more

प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प, होमस्टे और इको-टूरिज्म से स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिल रहा विस्तार

रायपुर छत्तीसगढ़ का बस्तर अब अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। कभी नक्सलवाद और हिंसा के संदर्भ में चर्चा में रहने वाला यह क्षेत्र आज अपनी प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और आतिथ्य के कारण पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। बदलते वातावरण के साथ बस्तर में पर्यटन, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के नए अवसर आकार ले रहे हैं।      बस्तर की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर एवं कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और बस्तर पैलेस जैसे स्थल पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच, अध्यात्म और इतिहास का अनूठा अनुभव देते हैं। यहां आने वाला पर्यटक केवल दर्शनीय स्थल नहीं देखता, बल्कि स्थानीय जीवन, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और संगीत से भी जुड़ता है। यही कारण है कि बस्तर को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव आधारित पर्यटन के एक विशिष्ट क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।  कनेक्टिविटी से खुल रहे विकास के नए रास्ते पर्यटन के विस्तार के लिए बेहतर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण आधार है। बस्तर में सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने के प्रयास पर्यटन की संभावनाओं को नई गति दे रहे हैं। ‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट में 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव दूरस्थ क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट बस्तर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में रायपुर और हैदराबाद के लिए हवाई संपर्क उपलब्ध है। वहीं रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना जैसी योजनाएं भविष्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की संभावनाएं रखती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ केवल पर्यटकों को ही नहीं मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार, ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर संपर्क और युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। होमस्टे से गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ बस्तर में ग्रामीण और जनजातीय होमस्टे पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बन है। छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के साथ रहकर ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक खान-पान का अनुभव देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। होमस्टे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पर्यटन का आर्थिक लाभ सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंच रहा है। पर्यटकों के ठहरने के साथ भोजन, स्थानीय गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आसपास के अन्य परिवारों के लिए भी आय के अवसर बन रहे हैं। बस्तर में नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा 1 लाख रुपये और पूर्व से निर्मित कमरे के नवीनीकरण पर प्रति कमरा 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है। न्यूनतम एक से अधिकतम नौ कमरों तक सहायता की व्यवस्था से ग्रामीण परिवार अपनी क्षमता के अनुसार पर्यटन गतिविधियों से जुड़ सकते हैं। वर्तमान में 85 हितग्राहियों को अनुदान हेतु बैंको को प्रस्ताव भेजी जा चुका है तथा 27 होमस्टे पूर्व से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं।  संस्कृति बनी पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत बस्तर की जनजातीय संस्कृति उसकी सबसे बड़ी विशिष्टताओं में शामिल है। बेलमेटल और धातु शिल्प, लकड़ी एवं बांस की कला, पारंपरिक आभूषण, नृत्य, संगीत और खान-पान देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इस सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच दे रहे हैं। वर्ष 2026 के बस्तर पंडुम में जनजातीय संस्कृति की 12 विधाओं को मंच मिला और लगभग 55 हजार आदिवासी लोगों की सहभागिता हुई। राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया।  आस्था से लेकर एडवेंचर तक पर्यटन की विविध संभावनाएं बस्तर में धार्मिक, सांस्कृतिक, इको और एडवेंचर पर्यटन की संभावनाएं एक साथ मौजूद हैं। मां दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को आधार देते हैं, वहीं कांगेर घाटी और धुड़मारास जैसे क्षेत्र प्रकृति एवं रोमांच आधारित पर्यटन के लिए नए अवसर प्रस्तुत करते हैं। धुड़मारास में एडवेंचर पर्यटन, ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक जैसी सुविधाओं की योजना तथा गांव का यूएन टूरिज्म बेस्ट टूरिज्म विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए चयन ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दे रहा है।  पर्यटन से रोजगार और स्थानीय समृद्धि बस्तर के पर्यटन विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। होमस्टे संचालक, पर्यटन गाइड, स्थानीय ड्राइवर, भोजन सेवा, हस्तशिल्प विक्रेता, सांस्कृतिक कलाकार और साहसिक पर्यटन से जुड़े युवा इस नई पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं। बस्तर के पर्यटन रोडमैप के अंतर्गत 45 युवाओं को पर्यटन प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। यह संकेत है कि पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रखकर स्थानीय कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है।  बस्तर की नई तस्वीर बस्तर का पर्यटन ऐसे मॉडल में से एक है, जिसमें प्रकृति सुरक्षित रहे, जनजातीय संस्कृति की मौलिकता बनी रहे और पर्यटन से पैदा होने वाली आय का लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। सड़कें बस्तर को जोड़ रही हैं, हवाई संपर्क दूरी कम कर रहा है, रेल कनेक्टिविटी की संभावनाएं विस्तार पा रही हैं, होमस्टे गांवों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इसकी सांस्कृतिक पहचान को देश के सामने ला रहे हैं।  बस्तर अब केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह संभावनाओं का नया अध्याय है, जहां जंगलों की हरियाली, जलप्रपातों की सुंदरता, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी मिलकर छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई दिशा दे रही है। बस्तर की नई पहचान अब उसके अतीत से नहीं, बल्कि शांति, प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय विकास की नई संभावनाओं से लिखी जा रही है।

विकास दर में तेजी, निवेश का बढ़ता दायरा; नई रफ्तार से प्रगति कर रहा मध्यप्रदेश : डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को भोपाल के एक निजी होटल में प्रतिष्ठित मीडिया समूह द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत – बढ़ता मध्यप्रदेश' कॉन्क्लेव को संबोधित किया। कान्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश अब विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विकास दर दो अंकों में पहुंच गई है और रोजगार के क्षेत्र में भी सकारात्मक स्थिति बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब वास्तविक प्रगति कर रहा है। प्रदेश की विकास दर टू-डिजिट में है और इस समय बेरोजगारी की दर न्यूनतम स्तर पर है। बड़ी संख्या में निवेशक मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं और प्रदेश में भारी मात्रा में निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश बढ़ने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नये अवसर भी तैयार हो रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को अनुकूल वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराया जाए। कॉन्क्लेव में प्रदेश की आर्थिक प्रगति, निवेश संभावनाओं और रोजगार सृजन से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन और उपलब्ध संभावनाएं इसे निवेश का महत्वपूर्ण केंद्र बना रही हैं। प्रदेश में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां हमारे आर्थिक बदलाव का बड़ा कारण बनकर उभरीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश की सेवा करने का अवसर दिया है, यह मेरा सौभाग्य है। उन्होंने जनकल्याण और सुशासन के बलबूते देश को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश भी 2002-03 के बाद सुशासन के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी ने अमृतकाल में देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2002-03 तक प्रति व्यक्ति आय मात्र 11 हजार रुपए थी। इसके अगले 20 साल में हमारी सरकार आने पर प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1 लाख 40 हजार रुपए हो गई। उसके बाद हमारी सरकार बनी तो ढाई साल में 1 लाख 57 हजार रुपए हो गई। हमने अमृतकाल में वर्ष 2047 तक प्रति व्यक्ति आय 22 लाख 50 हजार रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हम दीर्घकालिक विजन के साथ नीतियों का निर्माण कर रहे हैं। सकारात्मक भाव के साथ कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने कई चुनौतियों को समाप्त किया है। बुंदेलखंड में देश की पहली राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना (केन-बेतवा लिंक) और राजस्थान के साथ सालों पुराने जल बंटवारे के विवाद को पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना की सौगात मिली। केन-बेतवा लिंक से बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश के जिलों को पानी मिलेगा, वहीं पीकेसी से राजस्थान और मालवा क्षेत्र के जिले लाभान्वित होंगे। मध्यप्रदेश में पानी की कोई कमी नहीं है। दूसरी चुनौती थी- नक्सलवाद, जिसे हमने प्रधानमंत्री  मोदी और गृहमंत्री  अमित शाह के नेतृत्व में समाप्त किया है। मध्यप्रदेश तय समय-सीमा में लाल सलाम को आखिरी सलाम करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्याप्त बिजली, उद्योग स्थापित करने के लिए लैंड बैंक, बेहतर कानून व्यवस्था, अपराध मुक्त जीवन पद्धति, श्रमिकों के आंदोलन नहीं होना जैसी विशेषताएं हैं। हमारा प्रदेश कृषि, अनाज उत्पादन और खनन क्षेत्र में अग्रणी है। मध्यप्रदेश हीरा उत्पादक प्रदेश है। यहां टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन और वन्यजीव पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य की समृद्धि के लिए गुजरात मॉडल को हमने मध्यप्रदेश में लागू करने का प्रयास किया है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदीजी ने नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध का काम तेजी से पूर्ण कराया। जिससे गुजरात के साथ ही मध्यप्रदेश को भी सिंचाई सुविधा और बिजली आपूर्ति का लाभ मिला है। देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य है, जहां बेरोजगारी दर सबसे कम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आमतौर पर औद्योगिक निवेश का 10 प्रतिशत धरातल पर उतरता है। लेकिन मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जहां पिछले ढाई साल में 30 प्रतिशत निवेश जमीन पर आ चुका है। राज्य में उद्योग अनुकूल 25 नीतियां और पारदर्शी व्यवस्था लागू हैं। मध्यप्रदेश कपास उत्पादन में अग्रणी है। हमने रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने स्टॉफ की सैलरी में 5000 रुपए प्रति महीना वीजीएफ देना शुरू कर दिया है। राज्यों के बीच व्यापार-व्यवसाय और उद्योग स्थापना के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि जीआईएस-2025 में आए 30 लाख करोड़ के निवेश में से अब तक 11 लाख करोड़ से अधिक धरातल पर आ चुका है और आगे भी काम तेजी से जारी है। उन्होंने कहा कि तकनीक के दौर में हमें आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करना चाहिए, लेकिन अगर चैट-जीपीटी, ग्रोक या अन्य प्लेटफॉर्म गलत उत्तर दें, तो उसे सही भी कराना चाहिए। जैसे मैंने चैट-जीपीटी से क्षिप्रा का नाम कालिदास के ग्रंथों के आधार पर 'शिप्रा' कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की आबादी 9 करोड़ के आसपास है। सभी नौकरियों की संख्या 10 लाख है। हमारी सरकार बनने के बाद 85 हजार से अधिक शासकीय पदों पर भर्ती की गई। लगभग ढाई लाख लोगों को पदोन्नति दी गई। हर साल लगभग 1 लाख पदों पर भर्ती करने की प्रक्रिया जारी है। हमारे एमएसएमई सेक्टर से 1 करोड़ 20 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। प्रदेश में लगभग 2 करोड़ किसान खेती से जुड़े हैं। मध्यप्रदेश स्वावलंबन की ओर बढ़ रहा है, हमारे युवा अब रोजगार देने वाले बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। देश में तीर्थाटन की पुरानी परंपरा रही है। प्रधानमंत्री  मोदी के कार्यकाल में देवस्थानों को भव्य स्वरूप दिया है। पहले बाबा विश्वनाथ का कारिडोर बना, फिर महाकाल कॉरिडोर का विकास किया गया। महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन में तीर्थाटन में बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2022 तक उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 60 लाख होती थी, जो पिछले साल बढ़कर 8 करोड़ लोग आए और इस बार 12 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उज्जैन में जब 2028 के सिंहस्थ में 30 से 40 करोड़ श्रद्धालु … Read more

अखिलेश का PDA रथ पूरी तरह पंक्चर हो चुका है’- अखिलेश की PDA रथ यात्रा पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का तंज

लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 24 सितंबर से रायबरेली में PDA रथ यात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं। यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख पर निशाना साधा है। उन्होंने अखिलेश यादव की प्रस्तावित यात्रा को लेकर कहा कि उनका PDA रथ पूरी तरह पंक्चर हो चुका है और उसकी हवा निकल चुकी है। केशव मौर्य ने विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि इस बार सपा-कांग्रेस आपस में ही लड़कर समाप्त हो जाएंगे। एक बार फिर साइकिल पंक्चर होने वाली है। कांग्रेस का यूपी में कोई भविष्य नहीं है। अयोध्या के अतिक्रमण हटाओ अभियान पर अखिलेश को जवाब अयोध्या में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर अखिलेश यादव की ओर से उठाए गए सवालों पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद जनता की नजर में सवाल थे, इसीलिए उन्हें जनता ने 2017 में हटा दिया। वहीं अखिलेश यादव की ओर से चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए जाने को लेकर केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आज अखिलेश यादव सवाल उठा रहे हैं लेकिन उसी चुनाव आयोग की बदौलत वो सांसद हैं, यूपी के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। बता दें कि समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 23 सितंबर को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने 2027 के चुनाव को आखिरी चुनाव बताया। जिसपर भाजपा ने उनपर पलटवार किया है। केशव प्रसाद मौर्य के अलावा योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि लोकतंत्र में कोई आखिरी या नया चुनाव नहीं होता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना चाहिए और जो लोग जनादेश हासिल नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें जनादेश का अपमान करने का अधिकार नहीं है।