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पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी DGP Award से सम्मानित

चंडीगढ़  पंजाब पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों को उनके क्षेत्र में ड्रग डिटेक्शन किट्स के प्रभावी उपयोग के लिए पंजाब के निदेशक जनरल पुलिस (डीजीपी) द्वारा कमेंडेशन डिस्क से सम्मानित किया गया है। एसएसपी बर्नाला मोहम्मद सरफराज आलम (IPS) और एसएसपी मलेरकोटला गगन अजीत सिंह (PPS, DR) को यह सम्मान 17 जुलाई 2009 की अधिसूचना के तहत पुलिस विभाग के आदेश संख्या 10698 के अंतर्गत दिया गया है।   डीजीपी गौरव यादव ने इन दोनों अधिकारियों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने मादक पदार्थों की रोकथाम में अहम भूमिका निभाने वाले ड्रग डिटेक्शन किट्स के बेहतर और प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित किया है। इस सम्मान के आदेश की प्रतियां संबंधित अधिकारियों और पंजाब पुलिस के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई हैं, ताकि आवश्यक कार्यवाही समयबद्ध तरीके से की जा सके।

विदेश से चल रहा था मदरसा नेटवर्क? लंदन में बसे आजमगढ़ के मौलाना पर ED का शिकंजा

आजमगढ़  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ब्रिटेन में रह रहे आजमगढ़ के इस्लामिक उपदेशक मौलाना शम्सुल हुदा खान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। ईडी ने मौलाना के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, शम्सुल हुदा खान पर कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और धार्मिक शिक्षा की आड़ में अवैध फंडिंग करने के गंभीर आरोप हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, शम्सुल हुदा खान की नियुक्ति वर्ष 1984 में आजमगढ़ के एक सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे में सहायक शिक्षक के रूप में हुई थी। हालांकि 2013 में उन्होंने ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली, इसके बावजूद आरोप है कि वे 2013 से 2017 तक भारत में वेतन लेते रहे थे। इस समय वे न तो भारतीय नागरिक थे और न ही शिक्षण कार्य कर रहे थे। इस दौरान वे ब्रिटेन में रहकर धार्मिक प्रवचन देते रहे और भारत की सरकारी व्यवस्था उनकी अनुपस्थिति पर दस वर्षों तक आंख मूंदे रही। जांच में सामने आया है कि बीते दो दशकों में शम्सुल हुदा खान ने कई देशों की यात्राएं कीं और भारत में संचालित 7 से 8 बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये प्राप्त किए। ईडी के अनुसार, उन्होंने 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की एक दर्जन से ज्यादा अचल संपत्तियां भी खरीदीं। बताया गया है कि उन्होंने राजा फाउंडेशन नामक एनजीओ और अपने निजी खातों के माध्यम से विभिन्न मदरसों को धन मुहैया कराया। कहां-कहां स्थापित किए मदरसे शम्सुल हुदा खान ने आजमगढ़ और संत कबीर नगर में दो मदरसे स्थापित किए थे, जिनकी मान्यता बाद में अधिकारियों द्वारा रद्द कर दी गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन संस्थानों के जरिए विदेशी धन के उपयोग और कट्टरपंथी गतिविधियों की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक, शम्सुल हुदा खान के ब्रिटेन स्थित कट्टरपंथी संगठनों से संबंधों की जांच की जा रही है। इसके अलावा, उनके पाकिस्तान दौरे और वहां के चरमपंथी संगठनों से कथित संपर्क भी जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि वह पाकिस्तानी कट्टरपंथी संगठन ‘दावत-ए-इस्लामी’ से जुड़ा हो सकता है। अवैध वेतन में कई अधिकारी 25 दिसंबर को इस मामले में बड़ा खुलासा भी हुआ। जांच में सामने आया कि शम्सुल हुदा खान को अवैध रूप से वेतन, मेडिकल लीव और अंततः स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के सभी लाभ दिलाने में कई अधिकारी शामिल थे। इसके बाद यूपी सरकार ने चार वरिष्ठ अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों संयुक्त निदेशक एसएन पांडेय, गाजियाबाद के डीएमओ साहित्य निकाश सिंह, बरेली के लालमन और अमेठी के प्रभात कुमार को निलंबित कर दिया। शम्सुल हुदा खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब ईडी उनके फंडिंग नेटवर्क, विदेशी संपर्कों और संपत्तियों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।  

करोड़ों की ठगी का बड़ा खुलासा: वर्धमान ग्रुप चेयरमैन मामला, ED ने 5 राज्यों में मारा छापा

लुधियाना  वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन एस.पी. ओसवाल से 7 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई की है। देश के चर्चित साइबर ठगी मामलों में शामिल वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन एस.पी. ओसवाल से 7 करोड़ रुपए की ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने अंतर्राज्यीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और असम में एकसाथ छापेमारी की। दिसंबर 2025 में हुई इस कार्रवाई के तहत ED ने कुल 11 ठिकानों पर तलाशी ली, जहां से कई डिजिटल उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज और संदिग्ध लेनदेन से जुड़े अहम रिकॉर्ड बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को तुरंत अलग-अलग म्यूल अकाउंट्स में भेजकर उसे कई स्तरों में घुमाया जाता था, ताकि उसका स्रोत छिपाया जा सके। ED ने इस नेटवर्क से जुड़ी अहम आरोपी रूमी कलिता को असम से हिरासत में लिया है। जांच एजेंसी के मुताबिक वह कमीशन के बदले म्यूल अकाउंट्स के संचालन और अवैध धन को इधर-उधर ट्रांसफर कराने में सक्रिय भूमिका निभा रही थी। फिलहाल आरोपी को पूछताछ के लिए ED रिमांड पर लिया गया है। जानें पूरा मामला:  इस मामले की जड़ें अगस्त 2024 से जुड़ी हैं, जब 82 वर्षीय उद्योगपति एस.पी. ओसवाल को खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताने वाले साइबर ठगों ने निशाना बनाया। आरोपियों ने आधार कार्ड के दुरुपयोग और अंतरराष्ट्रीय अपराध में नाम जुड़ने का डर दिखाकर उन्हें तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखने का दावा किया। वीडियो कॉल के जरिए फर्जी अदालत, नकली सरकारी प्रतीक चिन्ह और वरिष्ठ अधिकारियों की डिजिटल नकल दिखाकर ठगों ने मानसिक दबाव बनाया। करीब 48 घंटे तक वर्चुअल निगरानी में रखकर मनी लॉन्ड्रिंग जांच और जमानत के नाम पर उनसे 7 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए। यह राशि असम और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग खातों में भेजी गई थी ताकि बैंकिंग सिस्टम की निगरानी से बचा जा सके। घटना के सामने आते ही लुधियाना पुलिस ने साइबर क्राइम यूनिट और I4C के सहयोग से त्वरित कार्रवाई करते हुए कई खातों को फ्रीज कराया, जिससे 5.25 करोड़ रुपए की रकम वापस हासिल की जा सकी। इसे अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी रिकवरी में गिना जा रहा है। ED की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि ठगी की रकम को रियल एस्टेट, शेल कंपनियों और डिजिटल करेंसी के माध्यम से खपाने की कोशिश की गई। एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ है और इसी तरह के अन्य साइबर फ्रॉड मामलों में भी इसकी संलिप्तता हो सकती है।

बिहार बॉक्सिंग एसोसिएशन को नया उपाध्यक्ष मिला, भारतेन्दु शांडिल्य की नियुक्ति से मुजफ्फरपुर गौरवान्वित

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर जिले के जूरन छपरा निवासी भारतेन्दु शांडिल्य को बिहार राज्य बॉक्सिंग एसोसिएशन का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके इस उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद पूरे जिले और परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस उपलब्धि से बिहार को भी बॉक्सिंग के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।भारतेन्दु शांडिल्य 48 वर्ष के हैं और उन्होंने हैदराबाद की इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के अलावा लंदन की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और एमआईटी से इंटरप्रेन्योर बिजनेस की सर्टिफिकेट भी प्राप्त की है। इसके अलावा, उनके कार्यों को विश्वभर की चर्चित पत्रिकाओं जैसे आउटलुक और फोर्ब्स ने भी सराहा है। इंडियन एमेच्योर बॉक्सिंग एसोसिएशन के महासचिव राकेश ठाकुर ने भारतेन्दु शांडिल्य को बिहार बॉक्सिंग एसोसिएशन का उपाध्यक्ष नियुक्त किया और उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का पदभार सौंपा। इस अवसर पर उनके परिवार, मित्र और शुभचिंतक उन्हें बधाई देने पहुंचे। परिवार ने भी गर्व जताया। उनके पिता, मुजफ्फरपुर के जिला कोर्ट के अधिवक्ता अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि उनका बेटा एक बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर बिहार के लिए गौरव का क्षण ला रहा है। भारतेन्दु बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रहे हैं और अब वह बिहार और मुजफ्फरपुर जिले में बॉक्सिंग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उनके उपाध्यक्ष बनने पर पंकज कुमार, आचार्य डॉ. रंजीत नारायण तिवारी, पंडित विनय पाठक, डॉ. शिप्रा आनंद, अनिमेष कुमार, साकेत कुमार, उत्कर्ष नितेश और डॉ. रवि कुमार सहित कई लोगों ने उन्हें बधाई दी। भारतेन्दु शांडिल्य का यह पद बिहार में खेल और विशेषकर बॉक्सिंग के विकास की संभावनाओं के द्वार खोलने वाला है और उम्मीद जताई जा रही है कि वे इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाएंगे।  

मुख्यमंत्री बोले—त्याग और बलिदान की भावना रखने वालों का ही इतिहास बनता है

इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव होः मुख्यमंत्री  वीर बाल दिवस के कार्यक्रम में सम्मिलित हुए योगी आदित्यनाथ, सिख गुरुओं के अमर बलिदान को किया नमन सीएम ने साहिबज़ादों के शहीदी दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने के लिए प्रधानमंत्री का किया धन्यवाद लखनऊ धर्म रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सुपुत्रों की स्मृति में वीर बाल दिवस एवं श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष पर शुक्रवार को आयोजित कीर्तन समागम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव हो। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने स्वदेश और स्वधर्म के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की जो परंपरा स्थापित की, वही हमारी प्रगति का मार्ग है। वीर बाल दिवस के अवसर पर शबद पाठ और कीर्तन समागम का आयोजन मुख्यमंत्री आवास, 5 कालिदास मार्ग पर हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम की शुरुआत में गुरु ग्रंथ साहिब को माथे लगाकर प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने शबद कीर्तन और साहिबज़ादों के अमर बलिदान की गाथा को सुना। कीर्तन पाठ करने वाले बच्चों को पटका पहनाकर और पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। उन्होंने ‘छोटे साहिबज़ादे’ नाम की पुस्तिका का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद  सिंह जी के साहिबज़ादों बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के शहीदी दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाना, उनके स्वधर्म और स्वदेश के प्रति अमर बलिदान को नमन करने का अवसर है। उन्होंने प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद दिया कि उन्होंने देशभर के सिख समाज की भावना को स्वीकार करते हुए इस दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं का इतिहास भारत में भक्ति और शक्ति का इतिहास है। गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म की जो अलख जगाई, उसके प्रचार-प्रसार के लिए देश के कोने-कोने में गए। गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोबिंद  सिंह जी ने अपने त्याग और बलिदान से इसे अनुकरणीय बनाया। शबद कीर्तन समागम में मुख्यमंत्री ने सिख गुरुओं की परंपरा, उनके त्याग और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस का 350वां वर्ष मनाया जा रहा है और मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे कई बार उनके शहीदी दिवस के कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला। यह विशेष संयोग था कि जिस समय हम गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में कार्यक्रम का आयोजन कर रहे थे, उसी दिन 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश के हर स्कूल, कॉलेज और कार्यालय में वीर बाल दिवस के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं तथा साहिबज़ादों की गाथाएं पाठ्यक्रम में शामिल की गई हैं, ताकि नई पीढ़ी को बलिदान की प्रेरणा मिल सके। उन्होंने कहा कि इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव होता है। सिख धर्म की लंगर परंपरा सामाजिक समरसता का उदाहरण है, जहाँ किसी की जाति या धर्म नहीं पूछा जाता। गुरु गोबिंद  सिंह जी ने समाज को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य किया। मुख्यमंत्री ने गुरु गोबिंद  सिंह जी महाराज, माता गुजरी देवी, बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस प्रत्येक भारतीय युवा के लिए प्रेरणा का दिन है। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के आयोजनों में डबल इंजन सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के अंत में आनंद साहिब का पाठ और अरदास हुई। इसके बाद वह मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ एवं असीम अरुण के साथ लंगर में भी सम्मिलित हुए।

सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए यातायात रिफ्रेशर कोर्स, निरीक्षक से आरक्षक तक अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

सड़क दुर्घटना रोकने के लिये यातायात रिफ्रेशर कोर्स यातायात पुलिस निरीक्षक से आरक्षक स्तर के अधिकारी-कर्मचारियों ने लिया प्रशिक्षण भोपाल  सड़क सुरक्षा की दृष्टि से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिये दुर्घटना विहीन सफर की ओर एक सार्थक प्रयास पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) द्वारा मध्यप्रदेश के यातायात पुलिस निरीक्षक से आरक्षक स्तर के अधिकारी/ कर्मचारियों को यातायात रिफ्रेशर कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक शाहिद अबसार की पहल पर जिसमें सड़क उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराना जिसमें पदयात्रियों तथा सायकिल चालकों को प्राथमिकता दी गयी हो तथा भविष्य में शून्य सड़क दुर्घटना मृत्यु का लक्ष्य प्राप्त करना। सड़क सुरक्षा को मूलभूत यातायात सेवा में अविभाज्य अंग के रूप में मान्यता देना। प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ पर उप पुलिस महानिरीक्षकपीटीआरआई टी.के. विद्यार्थी द्वारा 4ई के प्रमुख सूत्रों जैसे एजुकेशन, इंजीनियरिंग, इन्फोर्समेंट एवं इमरजेंसी केयरकी जानकारी दी गई। इस दौरान पीटीआरआई के सहायक पुलिस महानिरीक्षक अभिजीत कुमार रंजन, विक्रम रघुवंशी, उपुअ हिमांशु कार्तिकेय तथा अन्य प्रशिक्षण टीम के अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस सत्र में सडक सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए प्रथमतः गोल्डन आवर के दौरान घायल व्यक्ति को बचाये जाने के लिए राहवीर, केशलेस जैसी बहुपयोगी योजनाओं कि विस्तृत जानकारी उनि. श्रीमती संध्या सिंह द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को दी गई। साथ ही उमनि पीटीआरआई द्वारा वैश्विक स्तर पर जारी सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों को प्रशिक्षणार्थियों सामने रखा गया तथा प्राथमिक उपचार से संबंधी सीपीआर/बीएलएस का प्रशिक्षण भी डेमोन्सट्रेशन के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ डॉ. आशीष शर्मा के द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण के अंतिम सत्र में डॉ. मयंक दुबे तथा एस.एस. लल्ली (सेवा निवृत अपुअ) द्वारा यातायात प्रबंधन से संबंधी सड़क अभियांत्रिकी व प्रवर्तन की कार्यवाही तथा उनि. श्रीमती पूजा त्रिपाठी द्वारा संशोधित मोटर यान अधिनियम से संबंधी प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें पुलिस अधिकारी की भूमिका को समझाया गया।  

महाकाल मंदिर में भक्तों की आस्था और दान बढ़ा, 13 करोड़ रुपये के आभूषण और 1 अरब रुपये से अधिक दान प्राप्त

उज्जैन  उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर लंबे समय से भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र रहा है। हमेशा से ही यहां भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन जब से महाकाल लोक का निर्माण हुआ है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिला है। देश-विदेश जाने वाले श्रद्धालु दर्शन तो कर ही रहे हैं दिल खोलकर दान भी दे रहे हैं। पहले मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन 40 से 50 हजार हुआ करती थी। अब ये आंकड़ा डेढ़ से 2 लाख श्रद्धालुओं तक पहुंच गया है। भक्तों की संख्या बढ़ने के साथ मंदिर में आने वाले दान में भी वृद्धि हुई है। सोना चांदी से लेकर नगदी मंदिर में दान किया जा रहा है। बढ़ते श्रद्धालु और बढ़ता दान अभी तक 11 महीने में 5.50 करोड़ श्रद्धालु महाकाल मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। इस दौरान मंदिर समिति को 43 करोड़ 43 लाख रुपए नगद मिला है। वहीं 13 करोड़ रुपए से ज्यादा के सोने चांदी के आभूषण प्राप्त हुए हैं। मंदिर में अलग-अलग जगह पर दान पेटियां लगी हैं, जिनमें से 43 करोड़ 43 लाख की आय हुई है। शीघ्र दर्शन व्यवस्था से हुई आय 64 करोड़ 50 लाख रुपए है। इस तरह से कुल आय का आंकड़ा 107.93 करोड़ है। यह आंकड़ा 1 जनवरी 2025 से 15 दिसंबर तक का है। महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर में प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख श्रद्धालुओं तक पहुंच गई है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु सोना-चांदी के साथ-साथ नगदी भी दान कर रहे हैं। महाकाल मंदिर में बीते 11 महीनों में 5.50 करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। इस दौरान भक्तों ने करीब 13 करोड़ रुपए मूल्य का सोना-चांदी दान किया है, जबकि नकद दान के रूप में 43 करोड़ 43 लाख रुपए मंदिर समिति को प्राप्त हुए हैं। इस वर्ष 1 जनवरी से 15 दिसंबर तक कुल 5.5 करोड़ श्रद्धालु महाकाल मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर लगी दान पेटियों से महाकाल मंदिर समिति को 43 करोड़ 43 लाख रुपए का दान प्राप्त हुआ है। वहीं शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मंदिर समिति को करीब 64 करोड़ 50 लाख रुपए की आय हुई है। पिछले वर्ष 2024 में भेंट पेटी और शीघ्र दर्शन से महाकाल मंदिर को कुल 92 करोड़ रुपए की आय हुई थी। इस वर्ष, पिछले साल की तुलना में करीब 15 करोड़ रुपए अधिक दान भगवान महाकाल को प्राप्त हुआ है। दान में क्या मिला महाकाल मंदिर में अब तक मिले दान में 1483.621 ग्राम सोना, 592.366 किलोग्राम चांदी, दान पेटियां से 43 करोड़ 43 लाख रुपए, शीघ्र दर्शन व्यवस्था से 64 करोड़ 50 लाख रुपए। श्रद्धालुओं ने जो सोने के आभूषण दान किए हैं उनकी कीमत 1 करोड़ 82 लाख और चांदी की कीमत 11 करोड़ 85 लाख के आसपास बताई जा रही है। श्रद्धालुओं ने कुल मिलाकर 13 करोड़ से ज्यादा के आभूषण दान किए हैं। पिछले वर्ष कितना था दान इस वर्ष आए दान की तुलना साल 2024 से करें तो पिछली बार सोना अधिक दान किया गया था। 1 जनवरी 2024 से 13 दिसंबर 2024 तक 399 किलो चांदी और 1533 ग्राम सोना दान में आया था। इस वर्ष सोना चांदी की कीमत में भारी अंतर आया है, जिसका असर दान पर भी हुआ है। एक अरब 7 करोड़ दान पेटी और शीघ्र दर्शन से आय इस बार भेंट पेटी और शीघ्र दर्शन से महाकाल मंदिर को 11 माह 15 दिन में 107 करोड़ 93 लाख रुपए की आय हुई है। अभी 15 दिन शेष हैं जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के महाकाल मंदिर पहुंचने की उम्मीद है। महाकाल मंदिर में अन्य स्त्रोताें से होने वाली आय जैसे भस्म आरती बुकिंग,अभिषेक पूजन की आय, अन्न क्षेत्र से आय, धर्मशाला बुकिंग आय,फोटोग्राफी मासिक शुल्क आय, भांग एवं ध्वजा बुकिंग से आय,उज्जैन दर्शन बस सेवा से होने वाली आय शामिल नहीं। इस वर्ष अब तक यह दान मिला     सोना 1483.621 ग्राम।     चांदी 592.366 किग्रा।     दान पेटियों से 43 करोड़ 43 लाख रुपए।     शीघ्र दर्शन व्यवस्था से 64 करोड़ 50 लाख। 13 करोड़ से अधिक के आभूषण दान आए महाकाल मंदिर में एक जनवरी 2025 से लेकर पंद्रह दिसंबर 2025 तक के बीच में श्रद्धालुओं ने 592.366 किग्रा चांदी और 1483.621 ग्राम सोना बाबा महाकाल को दान किया है। दान आए आभूषणों में सोने की कीमत करीब 1 करोड़ 82 लाख रुपए तो चांदी की कीमत 11 करोड़ 85 लाख रुपए के आसपास है। महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने एक वर्ष से भी कम समय में 13 करोड़ रुपए से अधिक के तो सिर्फ आभूषण ही दान कर दिए। पिछले वर्ष की तुलना में 193 किलो चांदी अधिक भक्तों ने वर्ष 2024 में इस वर्ष की तुलना में सोना अधिक दान किया था। इस वर्ष चांदी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक दान में मिली है। साल 2024 में 1 जनवरी से 13 दिसंबर 2024 तक भक्तों ने 399 किलो चांदी और 1533 ग्राम सोना बाबा महाकाल को दान किया था। हालांकि पिछले वर्ष और इस वर्ष सोने और चांदी की कीमत में काफी अंतर आने से बाबा महाकाल को मिलने वाले दान की कीमत में करीब 10 करोड़ रुपए का अंतर आ गया। साल 2024 में 64 किलो आभूषण ऐसे थे जो दानपेटी से निकले थे, जिसमें हीरे की अंगूठी, कीमती घड़ी, डॉलर सहित अन्य देशों की मुद्रा भी शामिल थे। 15 दिसंबर तक 5.50 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे वर्ष 2025 खत्म होने को है इससे पहले महाकाल मंदिर से मिले आंकड़ों को देखें तो सामान्य दिनों में मंदिर दर्शन के रोजाना 1.20 लाख श्रद्धालु आ रहे हैं। वीक एंड में डेढ़ से पौने दो लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि एक जनवरी से दिसंबर माह के शुरुआत तक मंदिर में अब तक पांच करोड़ पचास लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच चुके है। 25 दिसंबर से 31 जनवरी तक करीब 6 लाख श्रद्धालुओं के मंदिर में पहुंचने की संभावना है। दो … Read more

जीते जी हक़ के लिए जंग, मौत के बाद मिली प्रोन्नति की जीत

हिसार  हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) की सहायक प्रोफेसर डॉ. दिव्या फोगाट की मौत के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। तत्कालीन आयुक्त अशोक कुमार गर्ग की जांच रिपोर्ट में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को संदिग्ध पाया गया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि डॉ. फोगाट की पदोन्नति दो साल तक जानबूझकर रोकी गई और उनकी मृत्यु के बाद उसे मंजूरी दी गई। प्रशासन का तर्क था कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही थी। लेकिन 27 अक्तूबर, 2024 को उनकी मृत्यु होते ही प्रशासन ने वह कार्रवाई बंद कर दी और उन्हें पदोन्नति दे दी। जांच अधिकारी ने इस देरी को 'अन्यायपूर्ण' करार दिया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव ने 18 अगस्त, 2025 को हिसार के तत्कालीन आयुक्त अशांक कुमार गर्ग को जांच के आदेश दिए थे जिसकी रिपोर्ट उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति से पहले नवंबर माह में ही दे दी थी। इस रिपोर्ट की प्रति दैनिक ट्रिब्यून के पास है और इसी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। डॉ. फोगाट ने अपने अंतिम नोट में कुछ अधिकारियों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। तत्कालीन आयुक्त ने विवि की आंतरिक जांच को 'असंगत' माना है और अब इस पूरे मामले की जांच किसी बाहरी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए वैज्ञानिकों के चयन में पारदर्शिता की कमी पाई गई।   मैक्सिको ट्रेनिंग के लिए दिव्या की जगह भेज दिया 56 वर्ष का वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि हकृवि में इंटरनेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए वैज्ञानिकों की अनुशंसा के लिए पारदर्शी नीति नहीं है। यह मामला दिव्या फोगाट के मामले में स्पष्ट हुआ। हकृवि ने एक सवाल के जवाब बताया कि मैक्सिको में जुलाई, दिसंबर, 2022 और बांग्लादेश में मार्च, 2023 के प्रशिक्षण के लिए दिव्या फोगाट का नाम डिपार्टमेंटल एडवाइजरी कमेटी ने अनुशंसित किया था। मैक्सिको के प्रशिक्षण के लिए दिव्या फोगाट ने अपना नाम अपने स्तर पर सीधे आईसीएआर से नामित करवा लिया था और नियोक्ता की सहमति नहीं ली थी। इसलिए उन्हें मैक्सिको जाने की अनुमति नहीं दी गई। मैक्सिको के लिए 56 वर्षीय वैज्ञानिक ओपी बिश्नोई को नामित किया गया। आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आईसीएआर राष्ट्रीय बाॅडी है और उसकी अनुशंसा की विश्वसनीयता है। प्रशिक्षण के लिए 40 से कम उम्र के युवा वैज्ञानिक को भेजना था जबकि विवि ने 56 वर्षीय वैज्ञानिक को भेजा जिसकी आईसीएआर ने अनुशंसा नहीं की थी। मनमाने ढंग से उसे प्रशिक्षण के लिए रोका गया। प्रशासन का पक्ष और विरोधाभास विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि डॉ. फोगाट की मौत स्वास्थ्य कारणों से हुई और कार्यस्थल पर प्रताड़ना का कोई सबूत नहीं मिला। प्रशासन ने दिव्या फोगाट की मौत के लिए उसके पारिवारिक विवाद को भी कारण बताया। हालांकि, जांच अधिकारी ने प्रशासन के जवाबों को संतोषजनक नहीं माना और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

दबिश के दौरान बवाल: सादे कपड़ों में गए सिपाही और दारोगा की पिटाई, SSP की सख्त कार्रवाई

मेरठ  यूपी के मेरठ जिले के सठला गांव में दबिश के दौरान पुलिस पर हमले के मामले में एसएसपी ने दारोगा और सिपाही को सस्पेंड कर दिया है। दोनों बिना वर्दी दबिश देने पहुंचे थे। विभागीय जांच का आदेश दिया है। गुरुवार को एसएसपी और एसपी देहात सठला पहुंचे। गांव में एक प्लाटून पीएसी तैनात कर दी गई है। ड्रोन से निगरानी की और फ्लैग मार्च निकाला। गांव के अंदर पुलिस चौकी बनाने का आदेश दिया है। गांव के 40 अपराधी चिह्नित किए हैं, जिनमें से 11 की हिस्ट्रीशीट खोलने का आदेश दिया है। पुलिस पर हमले की घटना में तीन आरोपियों को जेल भेजा गया था, बाकी की तलाश में दबिश दी जा रही है। गांव में एक प्लाटून पीएसी तैनात कर दी है। गुरुवार को ड्रोन से गांव के निगरानी की गई। पीएसी के साथ पुलिस फोर्स ने फ्लैग मार्च किया। अगले आदेश तक पीएसी गांव में तैनात रहेगी। एसएसपी ने लापरवाही बरतने वाले दरोगा सौरभ और सिपाही सुनील को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है दोनों सादे कपड़ों में दबिश देने पहुंचे थे। सठला बवाल में दारोगा-सिपाही सस्पेंड, छावनी में बदला गांव इस मामले में डॉ विपिन ताडा ने कहा है कि दारोगा सौरभ कुमार और सिपाही सुनील को सस्पेंड किया है। सठला में पुलिस चौकी बनाने के लिए जगह तलाशी जा रही है। गांव के 11 अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोलने का आदेश दिया है, अगले आदेश तक पीएसी गांव में तैनात रहेगी। सठला में बनेगी पुलिस चौकी एसएसपी ने बताया फिलहाल पुलिस चौकी सठला के बराबर वाले गांव में बनी थी। पुलिस चौकी को गांव में शिफ्ट कराया जाएगा, प्रशासनिक अधिकारियों ने सर्वे कर लिया है। चौकी पर दरोगा सुमित तोमर की तैनाती की है। मवाना थाने में अतिरिक्त अपराध निरीक्षक जितेंद्र सिंह की भी तैनाती की है। लोगों ने पुलिसकर्मियों के कपड़े फाड़ डाला मवाना के सठला में दबिश डालने गई पुलिस टीम पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों को खूब पीटा गया और कपड़े तक फाड़ दिए। इस दौरान सिपाही को अर्द्धनग्न करके मारा गया और वीडियो बनाई गई। वायरल वीडियो में एक अवैध पिस्टल भी दिखाई जा रही है। इस घटना के संबंधित चार वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दो पक्ष में लेनदेन के विवाद की सूचना पर पुलिस पहुंची थी और इसी दौरान पुलिस पर हमला किया गया। इस मामले में मुकदमा दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान पुलिस से हाथापाई करते हुए कपड़े तक फाड़ दिए। कुछ पुलिसकर्मियों ने मौके से भागकर जान बचाई, जबकि एक सिपाही सुनील को आरोपियों ने दबोच लिया। सुनील को अर्द्धनग्न करके पीटा गया और वीडियो बनाई गई। इस दौरान वीडियो में एक अवैध पिस्टल भी दिखाई जा रही है। वीडियो में बिना नंबर की सफेद रंग की किया-सोनेट कार भी दिखाई दे रही है।

CM मान का बड़ा फैसला: जनवरी से शुरू होगी मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना, 3 करोड़ लोगों को मिलेगा लाभ

चंडीगढ़  पंजाब के निवासियों के लिए नए साल के तोहफे के रूप में सीएम भगवंत मान ने स्वास्थ्य विभाग को जनवरी माह से मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू करने की मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत राज्य के प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये तक का नकद-रहित इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। आज यहां स्वास्थ्य विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मान ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत राज्य के लोगों को बिना एक भी पैसा खर्च किए व्यापक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा यह योजना विश्व-स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने और लोगों को 10 लाख रुपये तक का नकद-रहित इलाज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा शुरू की गई एक ऐतिहासिक पहल है। पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य होगा, जहां हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का नकद-रहित इलाज मिलेगा। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना पंजाब सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य राज्य के सभी पात्र निवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वित्तीय सुरक्षा और आसान पहुंच प्रदान करना है। यह योजना सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक अहम कदम है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक नामांकित परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का नकद-रहित चिकित्सकीय उपचार प्राप्त कर सकेगा। योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं तक सभी निवासियों की आसान पहुंच सुनिश्चित की गई है। इसके अंतर्गत पंजाब और चंडीगढ़ के सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों के व्यापक नेटवर्क में गंभीर बीमारियों, बड़ी सर्जरी, आईसीयू, क्रिटिकल केयर और जीवन-रक्षक उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। योजना का मुख्य उद्देश्य सूचीबद्ध अस्पतालों में नकद-रहित और कागज-रहित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के साथ-साथ द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले भारी खर्च को कम करना है। योजना शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करेगी तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से समयबद्ध शिकायत निवारण और लाभार्थियों को त्वरित सहायता भी सुनिश्चित की जाएगी। योजना के अंतर्गत अस्पताल में भर्ती होने पर होने वाले खर्च, सर्जरी एवं चिकित्सकीय प्रक्रियाएं, आईसीयू और गहन देखभाल सेवाएं, बीमारियों की जांच, दवाइयां, स्वीकृत पैकेजों के अनुसार उपयोग में आने वाली सामग्री, अस्पताल में भर्ती होने से पहले व बाद के खर्चों सहित सभी संबंधित व्यय कवर किए जाएंगे। पहले एक परिवार केवल 5 लाख रुपये तक का इलाज करा सकता था, लेकिन अब यह सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब का हर नागरिक- चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या पेंशनभोगी- इस मुफ्त स्वास्थ्य योजना का लाभ लेने का हकदार होगा। इस योजना के लिए किसी प्रकार की आय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी अस्पताल या सूचीबद्ध निजी अस्पताल में अपना मुफ्त इलाज करवा सकेगा। अब पंजाब में किसी भी नागरिक को आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जनहित में इस महत्वाकांक्षी योजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जाएं।