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बुंदेलखंड की तस्वीर बदलेगी, 76 किमी लंबा फोरलेन और 42 जंक्शन से होगा विकास का नया युग

 खजुराहो बुंदेलखंड विश्व प्रसिद्ध खजुराहो की वास्तुकला, मंदिरों और मूर्तियों की नक्काशी के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। दूसरी ओर सिंचाई सुविधाओं, उद्योगों की कमी से रोजगार के अवसरों का भी अभाव है। अब बुंदेलखंड का वैभव और बढ़ेगा। युवाओं को रोजगार देने वाला बनेगा। बुंदेलखंड के विकास से जुड़े कई प्रस्तावों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में खजुराहो में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई। सागर के मसवासी ग्रंट में औद्योगिक क्षेत्र को विशेष औद्योगिक पैकेज के तहत विकसित किया जाएगा। 24,240 करोड़ का संभावित निवेश आएगा। नौरादेही टाइगर रिजर्व में चीतों को बसाया जाएगा। बुंदेलखंड वीरों-हीरों की धरती: सीएम छतरपुर. सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की 1.26 करोड़ से ज्यादा लाड़ली बहनों को 1857 करोड़ की 31वीं किस्त जारी की। योजना के तहत अब तक 46500 करोड़ रुपए बहनों के खातों में भेजे जा चुके हैं। लाड़ली बहना सम्मेलन राजनगर में हुआ। संबोधन में सीएम ने कहा, बुंदेलखंड हीरों और महावीरों की पवित्र धरती है। क्षेत्र की गरिमा और गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर – मसवासी ग्रंट में उद्योगों की स्थापना से 29 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। एक रुपए प्रति वर्गमीटर की दर पर निवेशकों को जमीन दी जाएगी। विकास शुल्क चुकाने के लिए 20 समान वार्षिक किस्तों की सुविधा मिलेगी। – सागर से दमोह के बीच फोरलेन पर 13 अंडरपास, तीन बड़े पुल, 9 मध्यम पुल, एक आरओबी, 13 बड़े जंक्शन और 42 मध्यम जंक्शन बनाए जाएंगे। -भू-अर्जन एवं अन्य कार्यों के लिए 323.41 करोड़ का भुगतान राज्य बजट से होगा। – एमपी के दमोह, छतरपुर और बुधनी मेडिकल कॉलेज के लिए 990 नियमित और 615 आउटसोर्स कर्मी मिलेंगे। प्रत्येक चिकित्सा महाविद्यालय में 330 नियमित और 205 व्यक्तियों को आउटसोर्स पर रखा जाएगा। – दमोह जिले की तेंदूखेड़ा तहसील की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना 165 करोड़ 6 लाख की होगी। 17 गांवों का 3600 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।

इंदौर में रियल एस्टेट में आया बड़ा उछाल, नवंबर में 43% अधिक रजिस्ट्री, पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन

इंदौर  मध्य प्रदेश का आर्थिक शहर इंदौर अब रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड तोड़ रहा है। नवंबर 2025 में इंदौर जिले में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पिछले साल की तुलना में 43 प्रतिशत तक बढ़ गया। शहर के चारों उप पंजीयन कार्यालयों में यह तेजी साफ नजर आई, जिनमें सबसे ज्यादा उछाल इंदौर-4 में दर्ज किया गया। कुल मिलाकर अप्रेल से नवंबर 2025 तक जिले में पिछले साल की तुलना में 1091 रजिस्ट्रियां ज्यादा हुई हैं। नवंबर महीने में जिले में कुल 14,140 संपत्तियों का पंजीयन हुआ, जबकि नवंबर 2024 में यह संख्या 9905 थीं। इसमें इंदौर-1 में पिछले साल की तुलना में 1262 अधिक रजिस्ट्रियां हुईं। इंदौर-2 में 822, इंदौर-3 में 934 और इंदौर-4 में रिकॉर्ड 1225 रजिस्ट्रियों का उछाल देखने को मिला। यह रुझान बताता है कि खरीदारों का भरोसा अब भी मजबूत है और बाजार की गति तेज होती जा रही है। इंदौर 2, 3 और 4 में खरीद-बिक्री बढ़ी अप्रेल से नवंबर की अवधि में जिले में कुल 1,12,588 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 1,11,497 थी। इंदौर-2, इंदौर-3 और इंदौर-4 क्षेत्रों में खरीद-बिक्री बढ़ी है, वहीं इंदौर-1 में कुछ गिरावट दर्ज की गई। बावजूद पूरे जिले में प्रॉपर्टी बाजार ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेषज्ञों ने बताई प्रॉपर्टी खरीद में तेजी की वजह इंदौर में प्रॉपर्टी खरीद में आई इस तेजी के कई कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में लगातार होती इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, नए मार्गों और रिंग रोड के विस्तार, मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रगति और सुदृढ़ होती कनेक्टिविटी ने रियल एस्टेट को मजबूती दी है। प्रॉपर्टी बाजार बढ़ने के कई और भी कारण 1- रोजगार, स्टार्टअप और आइटी कंपनियों में तेजी शहर में आइटी पार्क, स्टार्टअप इकॉनमी और मल्टीनेशनल कंपनियों की मौजूदगी ने युवाओं और प्रोफेशनल्स का आवागमन बढ़ाया है। इससे मकान, फ्लैट और कमर्शियल स्पेस की मांग लगातार बढ़ रही है। 2- लगातार विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर सुपर कॉरिडोर, रिंग रोड, बीआरटीएस, मेट्रो प्रोजेक्ट, नए फ्लाइओवर और कनेक्टिविटी में सुधार ने शहर को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया है। 3- सेफ और ग्रोथ-ओरिएंटेड सिटी की छवि स्वच्छता में लगातार देश का नंबर-1 शहर रहने से लोगों का विश्वास बढ़ा है। बाहर से आने वाले परिवार इंदौर में बसना पसंद कर रहे हैं, जिससे मकान और प्लॉट की खरीद बढ़ी है। 4- निवेशकों का भरोसा, रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट ज्यादा शहर में प्रॉपर्टी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन फिर भी मेट्रो शहरों की तुलना में सस्ती दरें मिलती हैं। यही कारण है कि लोग इसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के रूप में सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। 5- नई टाउनशिप, हाई-राइज और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की भरमार सुपर कॉरिडोर, पीथमपुर रोड, स्कीम नंबर 94, 114 और बायपास क्षेत्रों में बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट तेजी से विकसित हो रहे हैं। नई टाउनशिप्स की बढ़ती संख्या से लोगों को सुविधाजनक और प्रीमियम आवास विकल्प मिल रहे हैं।

मध्यप्रदेश में नए साल में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं, पावर जनरेशन कंपनी ने प्रस्तावित की 10% वृद्धि

भोपाल  मध्यप्रदेश में नए साल की शुरुआत बिजली उपभोक्ताओं को बिजली का करंट लग सकता है। राज्य की पावर जनरेशन कंपनी ने मप्र विद्युत नियामक आयोग के समक्ष बिजली दरों में 10 प्रतिशत तक इजाफे का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। आयोग इस प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां लेने के लिए जन सुनवाई आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। नियामक आयोग जन सुनवाई के दौरान आम जनता और हितधारकों की आपत्तियाँ सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय देगा। फिलहाल प्रस्ताव ने उपभोक्ताओं में नए साल के बिलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कंपनी ने बढ़ोतरी को बताया अनिवार्य नियामक आयोग मुख्यालय में दायर याचिका में कंपनी ने दावा किया कि लगातार बढ़ रहे लाइन लॉस और वित्तीय दबाव के कारण दरों में संशोधन आवश्यक हो गया है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित बढ़ोतरी की सीमा 10% तक हो सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय जन सुनवाई के बाद ही होगा। 15 दिसंबर से हो सकती है सुनवाई  आयोग के सूत्रों का कहना है कि कंपनी के प्रस्ताव पर प्रारंभिक अध्ययन के बाद आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। पहली सुनवाई 15 दिसंबर को होने की संभावना है, हालांकि आयोग की ओर से इसका औपचारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। आठ महीने पहले ही बढ़े थे बिजली के दाम इस साल अप्रैल से ही उपभोक्ता पहले से बढ़े हुए टैरिफ का भुगतान कर रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष में कंपनियों ने 7.52% बढ़ोतरी की मांग की थी, लेकिन आयोग ने केवल 3.46% वृद्धि की मंजूरी दी थी। यही कारण है कि घरेलू, गैर-घरेलू और कृषि श्रेणियों में प्रति यूनिट दरें कुछ पैसों की वृद्धि के साथ लागू हुईं और फिक्स चार्ज भी बढ़ाए गए। चुनावी वर्षों में मिली थी राहत पिछले दो वर्ष 2024 में लोकसभा और 2023 में विधानसभा चुनाव हुए, जिसके चलते आयोग ने दर बढ़ोतरी पर सख्ती दिखाई थी। 2024 में 3.86% बढ़ोतरी की मांग के मुकाबले मात्र 0.7% और 2023 में 3.20% की तुलना में केवल 1.65% बढ़ोतरी को मंजूरी मिली थी।  प्रदेश में सहकारिता चुनाव भी प्रस्तावित हैं, ऐसे में राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आयोग बड़ी राहत देने की संभावना कम लग रही है। सूत्रों का अनुमान है कि नई दरें 4 से 6% की सीमा में तय की जा सकती हैं। इसके बाद भी उपभोक्ताओं के लिए नए साल में बिजली बिल बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। 

रणजीत लोक का निर्माण इंदौर में, महाकाल लोक जैसी भव्यता, 6 करोड़ से ज्यादा खर्च, सिंहस्थ से पहले होगा पूरा

इंदौर इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर का कायापलट होने जा रहा है। यहां रणजीत लोक बनाकर मंदिर का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस पर कुल 6  करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्लान तैयार हो चुका है, टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने कहा- रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया कि रणजीत लोक तैयार होने के बाद श्रद्धालु मंदिर के पास बने बड़े मैदान से प्रवेश करेंगे। वहां से एक पाथ-वे के माध्यम से छोटी पार्किंग तक पहुंचेंगे। पाथ-वे में जिग-जैग पैटर्न पर रेलिंग लगाई जाएंगी। इनकी संख्या भीड़ के अनुसार घटाई या बढ़ाई जा सकेगी।इसके बाद श्रद्धालु दत्त मंदिर से होते हुए दर्शन की मुख्य लाइन में पहुंचेंगे। भगवान के दर्शन कर वहीं से वापस बाहर निकलेंगे। पाथ-वे की दीवारों पर रामायण और सुंदरकांड की झलक मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- यहां सभी तरह के मौसम के मुताबिक व्यवस्थाएं जुटाई जाएंगी ताकि सर्दी, गर्मी और बारिश में भक्तों को परेशानी न हो। बैठने के लिए नई बेंच लगेंगी। बाउंड्रीवाल भी बनाई जाएगी।25 फीट का पाथ-वे बनेगा, इसकी दीवारों पर पत्थरों से भगवान हनुमान से जुड़े दृश्य उकेरे जाएंगे। रामायण और सुंदरकांड को तस्वीरों में दर्शाया जाएगा। छत पर कशीदाकारी, बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी रोशनी रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी। भक्त पाथ-वे के जरिए दर्शन करने जाएंगे। यहां एलईडी पर भगवान के लाइव दर्शन होंगे।स्मार्ट सिटी संभाल रहा निर्माण की जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते इसका काम शुरू किया जा चुका है। पांचवीं पीढ़ी संभाल रही पूजा-अर्चना का काम वर्तमान पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा स्व. पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई। इंदौर स्मार्ट सिटी के पास जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। परिसर में पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम बनेगा रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी। 1960 में गर्डर-फर्शी से पक्का बनाया, 1992 में छत डाली मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। पं. व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई। व्यास के अनुसार, होलकर राजा जब भी युद्ध के लिए जाते थे तो यहां पूजा-हवन करते थे। विजय की कामना के साथ यहां आते और फिर युद्ध के लिए जाते थे इसलिए मंदिर का नाम रणजीत हनुमान पड़ा। उन्होंने कहा- पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर यहां रणजीत अष्टमी मनाई जाती है। सुबह 5 बजे प्रभात फेरी निकाली जाती है। दिनभर पूजा-अर्चना और विशेष आरती की जाती है। 21 लाख रुपए के रथ पर सवार होकर रणजीत हनुमान नगर भ्रमण करते हैं। महाकाल लोक के बाद अब मध्यप्रदेश में हनुमान लोक नजर आएगा। इसका निर्माण सौंसर के जाम सांवली में होगा। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड 314 करोड़ की लागत से करीब 30 एकड़ में इसका निर्माण करवा रहा है। उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर 6 फेज में हनुमान लोक कॉरिडोर का काम होगा। फर्स्ट फेज में 35 करोड़ की लागत से एंट्रेंस प्लाजा से हनुमान लोक तक का काम किया जाएगा। हर साल इसलिए निकलती है प्रभात फेरी पुजारी पं. दीपेश व्यास का कहना है कि सीताजी के हरण के बाद वानर राज सुग्रीव के आदेश पर वानर सेना उनका पता लगाने गई थी। हनुमान जी उनका पता लगाकर लौटे थे। यह खबर जब भगवान राम ने सुनी तो उन्होंने कहा कि हनुमान तुम रण को जीतकर आए हो। लंका को जलाकर आए हो इसलिए आज से मैं तुम्हें रणजीत नाम प्रदान करता हूं। इसके बाद वहां लाखों वानरों ने हनुमान जी को कंधे पर बैठाकर पूरे जंगल में परिभ्रमण कराया था। इसी के प्रतीकात्मक स्वरूप पौष अष्टमी पर यह यात्रा निकलती है।  

उज्जैन महाकाल महोत्सव 2026: श्री महाकालेश्वर मंदिर में देशभर के कलाकारों की 5 दिन लंबी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति

उज्जैन  दुनिया के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष एक अनोखी सांस्कृतिक शुरुआत होने जा रही है। मंदिर परिसर के शक्ति पथ पर 14 से 18 जनवरी 2026 तक भव्य महाकाल महोत्सव आयोजित किया जाएगा। पाँच दिनों का यह आयोजन पूरी तरह भगवान शिव और शैव परंपरा को समर्पित होगा, जिसमें देशभर से चुनिंदा कलाकार अपनी कला के माध्यम से शिव दर्शन का अलौकिक अनुभव कराएंगे। महोत्सव को लेकर मंगलवार को हुई तैयारी बैठक में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, महाकाल महोत्सव समिति सदस्य पद्मश्री भगवतीलाल राजपुरोहित तथा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक मौजूद रहे। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा और सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। महोत्सव के दौरान नृत्य, संगीत, नाट्य और विभिन्न कला विधाओं की प्रस्तुतियाँ होंगी, जो भगवान शिव की महिमा, शैव इतिहास और आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाएंगी। साथ ही एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी जिसमें शिव के विविध स्वरूप, प्रमुख शैव तीर्थों और शैव संतों के जीवन से जुड़ी झलकियाँ प्रस्तुत की जाएंगी। आयोजन समिति के अनुसार, देश के बड़े कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया जाएगा, ताकि उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया जा सके। महाकाल महोत्सव 2026 को शहर की सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा देने वाला आयोजन माना जा रहा है।

दिल्ली-NCR में तैयार हुआ देसी ‘आयरन डोम’, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम से दुश्मन को मिलेगी कड़ी चुनौती

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली को दुश्मन के हवाई खतरों से बचाने के लिए एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है. दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को मिसाइलों, ड्रोनों और तेज गति वाले विमानों से सुरक्षित करने के लिए स्वदेशी इंटीग्रेटिड एयर डिफेंस वेपन सिस्‍टम (IADWS) की तैनाती की जा रही है. IADWS एक मल्‍टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्‍टम है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने इसके तहत कुल तीन प्रमुख सिस्‍टम विकसित किए हैं। पहला- क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM), दूसरा- एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) और तीसरा- डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW)। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) के दौरान देश को कथित तौर पर निशाना बनाने की कोशिश की थी. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार पहले भारत अमेरिकी NASAMS-II खरीदने की योजना बना रहा था, लेकिन कीमत काफी ज्‍यादा होने के कारण स्वदेशी प्रणाली को प्राथमिकता दी गई. 1. क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM) • खासियत: यह एक कैनिस्टर-आधारित मिसाइल प्रणाली है. यह एक मोबाइल सिस्‍टम है, जिसका मतलब है कि इसे तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है. यह प्रणाली पहला निशाना दागने में बहुत कम समय लेती है. • रेंज: QRSAM की मारक क्षमता लगभग 25 से 30 किलोमीटर तक है. यह कम दूरी पर मौजूद विमानों और ड्रोनों के लिए एक घातक हथियार है. • फायदे: यह दुश्मन के कम-ऊंचाई वाले विमानों और क्रूज मिसाइलों को तुरंत नष्ट कर सकती है. इसकी त्वरित प्रतिक्रिया इसे अचानक हमले से बचाव के लिए आदर्श बनाती है. 2. एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) • खासियत: VSHORADS एक पोर्टेबल (Portable) मिसाइल प्रणाली है. इसे एक व्यक्ति या छोटे समूह द्वारा कंधे पर रखकर भी संचालित किया जा सकता है. यह पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सैन्य टुकड़ियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है. • रेंज: इसकी मारक क्षमता बहुत कम दूरी की होती है, आमतौर पर 6 से 8 किलोमीटर तक. यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों के लिए सटीक है. इसे रिसर्च सेंटर इमारात (RCI) द्वारा विकसित किया गया है. • फायदे: यह दुश्मन के हेलिकॉप्टरों और छोटे यूएवी (ड्रोन) को नजदीक आने से पहले ही मार गिराती है. इसकी स्वदेशी इन्फ्रारेड होमिंग तकनीक इसे अत्यधिक प्रभावी बनाती है. 3. डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) – लेजर तकनीक • खासियत: यह हाई-पावर वाली लेजर-आधारित प्रणाली है. इसे सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज (CHESS) द्वारा विकसित किया गया है. यह प्रणाली परंपरागत मिसाइलों के विपरीत, किरणों का उपयोग करके लक्ष्य को नष्ट करती है. • रेंज: DEW की रेंज लक्ष्य और लेजर की शक्ति पर निर्भर करती है, लेकिन यह ड्रोन जैसे खतरों को करीबी से मध्यम दूरी पर निष्क्रिय कर सकती है. • फायदे और कीमत: यह प्रणाली गोला-बारूद पर निर्भर नहीं करती. इसका मुख्य लाभ यह है कि प्रति-शॉट लागत बहुत कम होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह बिजली का उपयोग करती है. यह सैकड़ों ड्रोनों को तेजी से बेअसर कर सकती है, जिससे पारंपरिक मिसाइलों की हाई-कॉस्‍ट बचती है. IADWS की शक्ति और सफल परीक्षण IADWS का नियंत्रण एक केंद्रीय कमांड और नियंत्रण केंद्र द्वारा किया जाता है. 23 अगस्त 2025 को ओडिशा के तट पर इसका सफल परीक्षण किया गया था. परीक्षण के दौरान, QRSAM, VSHORADS और हाई एनर्जी लेजर ने एक साथ तीन अलग-अलग लक्ष्यों (दो तेज गति वाले यूएवी और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन) को अलग-अलग रेंज और ऊंचाई पर नष्ट कर दिया था. भारतीय वायु सेना (IAF) को इस महत्वपूर्ण परियोजना की जिम्‍मेदारी दी गई है. यह प्रणाली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रक्षा करेगी. DRDO उत्पादन एजेंसियों के साथ मिलकर नेटवर्किंग और कमांड एवं नियंत्रण प्रणालियों पर काम कर रहा है.

रिश्वत लेते ही भागी कार, देवास में अधिकारी रंगेहाथ गिरफ्तार; लोकायुक्त का दबंग ऑपरेशन

देवास अंचल के बागली तहसील के महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं बढ़ाने के नाम पर वहां के परियोजना अधिकारी ने 2 महीने की सैलरी मांगी। दो किस्तों में 9-9 हजार रुपये देने की बात तय हुई। इसी बीच कंप्यूटर ऑपरेटर प्रितेश तंवर ने लोकायुक्त उज्जैन में शिकायत कर दी। लोकायुक्त टीम ने धर दबोचा कुछ दिन पहले उसने 4000 रुपये दे दिए थे और बाकी के 5000 देने की बात तय हुई थी। बुधवार को देवास में कलेक्टर कार्यालय में मीटिंग में आए परियोजना अधिकारी रामप्रवेश तिवारी ने उज्जैन रोड पर जैसे ही 5000 की राशि ली, वैसे ही पहले से तैयार लोकायुक्त टीम सक्रिय हो गई। पकड़े जाने की शंका देखकर परियोजना अधिकारी ने अपनी कार भगाई, लेकिन कुछ दूर पीछा करने के बाद टीम ने दबोच लिया।   परियोजना अधिकारी पर केस दर्ज इसके बाद कार्रवाई के लिए परियोजना अधिकारी को पकड़कर टीम मीठा तालाब के समीप स्थित रेस्ट हाउस पहुंची। यहां कागजी कार्रवाई पूरी की गई। लोकायुक्त डीएसपी दिनेश पटेल ने बताया मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जा रहा है।

रियल एस्टेट को राहत! हरियाणा में हाईराइज बिल्डिंग के नियम बदले, डेवलपर्स को बड़ी सहूलियत

चंडीगढ़ हरियाणा में मकान बनाने से लेकर ऊंची कमर्शियल बिल्डिंग खड़ी करने तक की प्रक्रिया अब पहले जैसी थकाऊ नहीं रहेगी। हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में किए गए बड़े बदलावों के बाद अब घर, दुकान, होटल, मॉल और फैक्टरी बनाने वालों को न तो महीनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे और न ही निरीक्षण की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सरकार ने अब पूरे सिस्टम को आसान करते हुए दो श्रेणियों में बांटा है – कम जोखिम और उच्च जोखिम वाली बिल्डिंग। कम जोखिम वाले घरों और दुकानों का आक्युपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) अब आर्किटेक्ट खुद जारी कर सकेगा, जबकि बड़े प्रोजेक्ट का प्रमाणन थर्ड पार्टी तकनीकी विशेषज्ञ देंगे। इसके साथ ही, एफएआर बढ़ाया गया है। सुरक्षा नियम अपडेट हुए हैं और पहली बार गरीब वर्ग के मकानों में बाथरूम और टॉयलेट का न्यूनतम आकार तय कर दिया गया है।   यहां बता देंकि लंबे समय से आम नागरिक, डेवलपर्स और उद्योगपति शिकायत कर रहे थे कि कि बिल्डिंग परमिशन और ओसी लेने में महीनों लग जाते हैं। निरीक्षण प्रक्रिया धीमी और अपारदर्शी है। नियम अस्पष्ट हैं और हर अधिकारी अलग व्याख्या करता है। छोटे उद्योग और मकान निर्माण के मामले में सिस्टम जरूरत से ज्यादा जटिल है। सरकार ने माना कि इस प्रक्रिया में सुधार जरूरी है और अब संशोधन लागू कर दिए गए हैं। अब कौन सी बिल्डिंग कैसे मंजूर होगी नई प्रणाली में अब बिल्डिंग्स को दो श्रेणियों में रखा गया है ताकि अनुमोदन प्रक्रिया सरल और तेज हो। पहली श्रेणी मंे कम जोखिम वाली बिल्डिंग्स में छोटे और बड़े प्लॉटों पर बने आम मकान (16.5 मीटर तक ऊंचाई), दुकानें – एचसीएफ, एससीओ व डीएसएस शामिल होंगे। वहीं वे उद्योग भी इसी कैटेगरी में रहेंगे, जिनकी बिल्डिंग की ऊंचाई 30 मीटर तक होगी। इन पर सरकार ने भरोसा दिखाया है। अब इनका प्रमाणन आर्किटेक्ट द्वारा सेल्फ सर्टिफिकेटेशन मोड में किया जाएगा। वहीं दूसरी दूसरी श्रेणी में उच्च जोखिम वाली बिल्डिंग शामिल रहेंगी। इनमें मल्टीप्लेक्स, ऊंची आवासीय इमारतें, डेटा सेंटर, बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स तथा होटल और रिसॉर्ट शामिल हैं। इनका प्रमाणन अब सरकारी अधिकारी नहीं बल्कि थर्ड पार्टी एम्पेनल्ड इंजीनियर/आर्किटेक्ट करेंगे। सरकार केवल मॉनिटर करेगी।   बाथरूम और टॉयलेट की जगह तय नायब सरकार ने पहली बार राज्य ने ईडब्ल्यूएस यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के घरों के लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं। अब इन घरों में अलग टॉयलेट 0.90 वर्गमीटर से छोटा नहीं होगा। बाथरूम कम से कम 1.20 वर्गमीटर का होगा। यदि दोनों एक साथ हैं तो वह 1.80 वर्गमीटर से छोटा नहीं बनाया जा सकेगा अब और ऊंची और चौड़ी बिल्डिंगें संभव एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेसो में भी सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। इसी से तय होता है कि किसी जमीन के प्लॉट पर कितनी मंजिलें या कितना निर्माण किया जा सकता है। पहले एफएआर सीमित था और बढ़ाने की गुंजाइश कम रहती थी। अब संशोधनों के बाद उद्योगों को 150 प्रतिशत से अधिक एफएआर खरीदने की सुविधा मिलेगी। डेटा सेंटरों के लिए एफएआर 500 प्रतिशत तक उपलब्ध होगा। वहीं कमर्शियल और हॉस्पिटेलिटी सेक्टर के लिए एफएआर की सीमा बढ़ाई गई है। इससे उद्योगों, मॉल, होटल और डेटासेंटर जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण और निवेश की संभावना बढ़ेगी। होटल, रिसॉर्ट और बैंक्वेट हॉल्स को राहत हॉस्पिटेलिटी सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। पहले निर्माण सीमित था और एफएआर कम मिलता था। अब नये नियम लागू होने से रिसॉर्ट, होटल और मोटल अधिक एफएआर खरीद सकेंगे। ऊंचाई और कवरेज सीमा में ढील दी गई है। यह बदलाव केवल प्रक्रिया आसान करने का नहीं बल्कि सुरक्षा को मजबूत करने का भी है। अब बड़ी इमारतों में फायर एनओसी अनिवार्य होगी। सोलर पैनल इंस्टॉल करने का प्रमाण-पत्र लेना जरूरी होगा। एनर्जी इफिशिएंसी स्टैंडर्ड अपनाने होंगे। गलत जानकारी छिपाने पर एक्शन सरकार ने साफ किया है अगर कोई गलत रिपोर्ट जमा करता है, नियम तोड़कर निर्माण करता है या जानबूझकर जानकारी छुपाता है तो ओसी को रद्द किया जाएगा। संबंधित इंजीनियर या आर्किटेक्ट पर कार्यवाही होगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरा सिस्टम अब ऑनलाइन होगा। कुछ भी-दबाकर नहीं रखा जा सकेगा। पहले कई लोगों की फाइलें महीनों दबाई जाती थीं। अब ऐसा संभव नहीं होगा क्योंकि अब हर बिल्डिंग आवेदन, स्वीकृति, ओसी और निरीक्षण रिपोर्ट ऑनलाइन ई-रजिस्टर में सार्वजनिक रूप से दिखेगी।  

प्राइमरी टीचर भर्ती में नया नियम: B.Ed. उम्मीदवारों को करना होगा 6 महीने का ट्रेनिंग कोर्स

लुधियाना स्टेट कॉसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एस.सी.ई.आर.टी.), पंजाब ने बी. एड. डिग्री के आधार पर नियुक्त प्राइमरी शिक्षकों की पेशेवर योग्यता पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। एस.सी.ई. आर. टी., पंजाब ने समूह जिला शिक्षा अफसरों (ए.शि.) को नैशनल इंस्टीच्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एन. आई. ओ.एस.) द्वारा करवाए जा रहे 6 महीने के' ब्रिज कोर्स' के लिए संबंधित शिक्षकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा है। यह कोर्स' प्राइमरी टीचर एजुकेशन' में 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स है, जिसे ओपन और डिस्टेंस लर्निंग (ओ.डी.एल.) मोड के माध्यम से पूरा करवाया जाएगा। एस. सी.ई.आर.टी. द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इन निर्देशों की हू-ब-हू पालना सुनिश्चित की जाए। उन्होने शिक्षकोंको हिदायत दी है कि वे अपने अन.आई.एस. के पोर्टल पर अपना पंजीकण समय रहते जरूर करवाए। एन.आई.ओ.एस. ने भी उम्मीदवारों को सलाहदी है कि वे आवेदन करने से पहले योग्यता मानदंडों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उनकी पालना करें। विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि य समय सीमा के भीतर सभी योग्य शिक्षकों का पंजीकरण सुनिश्चित करवाया जाए। रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 25 दिसंबर है।  कौन है इस कोर्स का पात्र? यह ब्रिज कोर्स विशेष रूप से उन प्राइमरी शिक्षकों के लिए अनिवार्य है जो बी.एड. डिग्री के साथ नियुक्त हुए थे। जिनकी नियुक्ति एनसीटीई की दिनांक 28 जून 2018 की नोटिफिकेशन के अनुसार हुई थी।  जो माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 11 अगस्त 2023 को दिए गए फैसले से पहले सेवा में आ चुके थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण

प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल मिलने से रोकने की बनायें कार्य-योजना एकल नल-जल योजना में 93 प्रतिशत कार्य पूर्ण योजनाओं के संचालन एवं संधारण की करें समुचित व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग की समीक्षा में दिये निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल किसी भी स्थिति में नहीं मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन मध्यप्रदेश इस कार्य को मार्च 2027 तक पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल पेश करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन के संचालन-संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में जल आपूर्ति प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाए। विगत 10 वर्षों में जिन ग्रामों को जल संकट का सामना करना पड़ा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के अनुसार जल वितरण का समय तय किया जाए, जिससे नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गाँव के ऐसे ट्यूबवेल की सूची बनवाएं, जिनमें हमेशा पानी रहता हो और ट्यूबवेल मालिक सेवाभावी हों। जरूरत पड़ने पर इनके ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति कराने का प्रयास करें। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन के कार्यों के समुचित संचालन-संधारण के लिये प्रभावी योजना बनाने की बात कही। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री नीरज मण्डलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी और प्रबंध संचालक जल निगम श्री के.वी.एस. चौधरी भी उपस्थित थे। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि अब तक प्रदेश में 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया गया है और वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। बोरवेल दुर्घटना रोकने कानून बनाने वाला पहला राज्य बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने के लिए कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। साथ ही “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान मिला है। वर्ष 2024-25 में 12,990 करोड़ रु. का व्यय कर 92.89 प्रतिशत वित्तीय लक्ष्य हासिल किया गया है। वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ रु. का व्यय किया गया है, जो 30 सितंबर 2025 तक 35.11 प्रतिशत की प्रगति दर्शाता है। प्रदेश में 21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित किए जा चुके हैं तथा 15,026 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है। समूह नल जल योजनाओं के माध्यम से 3,890 ग्रामों में नियमित जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और एकल नल जल योजनाएँ 93 प्रतिशत प्रगति के साथ तेजी से पूर्णता की ओर अग्रसर हैं। विभाग द्वारा तकनीकी और डिजिटल मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। जल रेखा मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है। राज्य की सभी 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हो चुकी है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल जल कर संग्रह व्यवस्था लागू की गई है। इंदौर में IoT (इंटरनेट ऑफ थिंक्स) आधारित जल आपूर्ति मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया गया है और इसे अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जा रहा है। ऊर्जा प्रबंधन को देखते हुए 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना PPP मॉडल पर स्वीकृत की गई है, जिससे आने वाले 25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना पर भी कार्ययोजना तैयार की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए जलदर्पण पोर्टल संचालित है तथा शिकायत निवारण हेतु कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। अभी 64 ग्रामों में 24×7 जल आपूर्ति पायलट रूप में सफल रही है, जिसे आगे और विस्तृत किया जाएगा। बैठक में भविष्य के विजन पर जानकारी देते हुए बताया गया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल-जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल स्रोतों के संरक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, डिजिटल प्रबंधन, तकनीकी क्षमता संवर्धन और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य संस्थान और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों में पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बन सके। महत्वपूर्ण बिन्दु     जल स्रोतों में सीवरेज का प्रदूषित जल मिलने से रोकने के लिये समुचित कार्य योजना बनाये।     जल जीवन मिशन के कार्य पूरा करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर 2028 तक का लक्ष्य दिया गया है।     प्रदेश में तय समय सीमा से पहले मार्च 2027 में ही जल जीवन मिशन के कार्यों को पूर्ण कर लिया जाएगा।     जल जीवन मिशन में किए गए कार्यों की अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा इंपैक्ट एनालिसिस कराएं।     प्रत्येक नागरिक को गुणवत्ता युक्त जल उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है ।     जल जीवन मिशन के तहत सरपंच, महिला समूह द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यो के लिए उन्हें राज्य स्तर, संभाग, जिला एवं ग्राम स्तर पर पुरस्कृत किया जाए।     जल जीवन मिशन के कार्यों के संचालन एवं संधारण की समुचित योजनाएं बनाएं ताकि किसी भी स्थिति में जल की नियमित आपूर्ति हो सके।     विगत 10 सालों में जिन गांवों में जल संकट रहा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उनमें … Read more