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भोपाल मेट्रो का संचालन नजदीक, इंदौर मेट्रो के अनुभव से बेस फेयर को सस्ता रखने पर चर्चा

भोपाल कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद भोपाल मेट्रो को चलाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। 13 दिसंबर से पहले प्रायोरिटी कारिडोर 7.5 किलोमीटर के सारे काम निपटाए जा रहे हैं। बेस फेयर को लेकर भी गुणा-भाग लगाया जा रहा है। चूंकि इंदौर में मेट्रो के संचालन को शुरू हुए करीब छह महीने से अधिक समय हो गया है और वहां यात्री अभी कम मिल रहे हैं। ऐसे में भोपाल मेट्रो का हाल इंदौर जैसा न हो, इसके मद्देनजर बेस फेयर, शेड्यूल और स्कीम को लेकर मेट्रो प्रबंधन के अधिकारियों के बीच मंथन चल रहा है, ताकि राजधानी में मेट्रो का उपयोग अधिक से अधिक नागरिक कर सकें। जानकारी के अनुसार बेस फेयर 20 के बजाय 10 रुपये करने पर मंथन चल रहा है। इसके अलावा महिलाएं, स्टूडेंट्स और सीनियर सिटीजन के लिए अलग-अलग स्कीम पर विचार चल रहा है। इंदौर के फार्मूले पर शेड्यूल बनाया जा रहा है। हालांकि इस बारे में मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि सबकुछ पहले से तय है। लोकार्पण की तारीख कंफर्म होते ही शेड्यूल, फेयर और स्कीम पर मुहर लगा दी जाएगी। संचालन के समय में भी होगी कटौती भोपाल मेट्रो का संचालन सुबह आठ से रात आठ बजे तक करने का प्रस्ताव भी है। बताया जा रहा है कि इंदौर में रात नौ बजे तक मेट्रो चलाई जाती थी, लेकिन कम भीड़ के चलते इसका संचालन एक घंटा कम करना पड़ा। लिहाजा, इसके समय में भी कमी हो सकती है। पूरा रूट तैयार होने पर बढ़ाए जाएंगे फेरे प्रायोरिटी कारिडोर पर शुरुआती दिनों में हर 30 मिनट में मेट्रो चलाई जाएगी। जब पूरा 16.74 किलोमीटर का आरेंज लाइन रूट एम्स से करोंद तक तैयार हो जाएगा, तब इसकी फ्रीक्वेंसी घटाकर 10 मिनट पर कर दी जाएगी। सुभाष नगर से एम्स और एम्स से सुभाष नगर के बीच प्रतिदिन 25-25 फेरों का संचालन प्रस्तावित है। इंदौर की स्कीम भोपाल में हो सकती है लागू इंदौर मेट्रो में लागू स्कीम को भोपाल में भी लागू किया जा सकता है। हालांकि भोपाल में महिलाएं, स्टूडेंट्स और सीनियर सिटीजन के लिए किराये पर अलग-अलग छूट दी जा सकती है। इसको लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। ज्ञात हो कि इंदौर में पहले तीन महीने तक 25 प्रतिशत तक बेस फेयर में छूट दी गई थी। भोपाल में भी इसको लागू किया जा सकता है। हालांकि आखिरी निर्णय टिकट फेयर कमेटी लेगी। 10 दिसंबर का लक्ष्य भोपाल मेट्रो कंपनी अपने व्यावसायिक संचालन के बेहद करीब पहुंच चुकी है। 10 दिसंबर तक सभी तैयारियां पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि 13 दिसंबर की तारीख कंफर्म होती है तो उस दिन लोकार्पण में कोई दिक्कत न आए। हालांकि सीएम कार्यालय से अभी लोकार्पण के लिए तारीख कंफर्म नहीं की गई है।  

नागरिकता प्रमाण न देने वाले 2.28 लाख भोपाल मतदाता संकट में

 भोपाल  विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए गणना पत्रक जमा करने का काम भोपाल जिले में निर्धारित समय से चार दिन पहले समाप्त हो गया है। इसके लिए 2029 बीएलओ लगे हुए थे। हालांकि बड़ी संख्या में मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जिले के कुल 21,25,908 मतदाताओं में से 17,17,808 मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान हो चुका है। जबकि 2,28,387 मतदाताओं का नाम 2003 की सूची में नहीं मिला। अब उन्हें अपनी भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज निर्वाचन कार्यालय में प्रस्तुत करने होंगे। बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग ने चार दिसंबर से गणना पत्रकों को एप पर अपलोड करने की तारीख बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दी थी। जबकि भोपाल जिले ने काम सात दिसंबर को ही पूरा कर लिया है। चिंता की बात यह है कि 4,08,106 मतदाताओं के गणना पत्रक बीएलओ के पास वापस नहीं पहुंचे हैं। दावा-आपत्ति पेश कर नाम जुड़वा सकते हैं शहर की बैरसिया, हुजूर, मध्य, उत्तर, दक्षिण-पश्चिम, गोविंदपुरा, नरेला विधानसभा क्षेत्रों के जिन लोगों के गणना पत्रक नहीं जमा हुए है, उन लोगों की सूची भी कॉलोनियों में चस्पा की गई थीं। इसके बाद भी लोग नहीं पहुंचे। यदि ये मतदाता अगले एक माह के भीतर अपने क्षेत्र के बीएलओ या निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के पास गणना पत्रक के साथ नहीं पहुंचते हैं तो उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर कार्य पूर्ण होने के बाद एक माह तक मतदाता दावा-आपत्ति पेश कर अपने नाम जुड़वा सकते हैं। मतदाताओं को जारी किया जाएगा नोटिस विधानसभा क्षेत्रों में नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य और गोविंदपुरा में गणना पत्रक बड़ी संख्या में जमा नहीं हो पाए हैं, जबकि बैरसिया में सबसे कम मामले सामने आए हैं। जिले में डिजिटाइज्ड मतदाताओं का 10.74 प्रतिशत यानी 2.28 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिन्हें अब नोटिस जारी किया जाएगा। सभी को भारतीय नागरिकता से जुड़े प्रमाण दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि निर्धारित अवधि में दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर ऐसे मतदाताओं के नाम आगामी मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। जिले भर में इस कार्य को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। उत्कृष्ट कार्य के लिये उपेन्द्र कौशल हुए सम्मानित भोपाल कलेक्टर कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में नरेला विधानसभा अंतर्गत एसआईआर निर्वाचन कार्य में बीएलओ सुपरवाइजर के रूप उत्कृष्ट कार्य के लिये कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने शिक्षक नेता उपेन्द्र कौशल को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं एसडीएम भुवन गुप्ता, तहसीलदार, वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, बीएलओ सुपरवाइजर, बीएलओ एवं निर्वाचन कार्य में संलग्न कर्मचारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। 14 फरवरी को होगा नई मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 12 से 15 दिसंबर तक सूची में सुधार आदि कार्य कर ड्राफ्ट रोल तैयार किया जाएगा। इसके बाद 16 दिसंबर को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन किया जाएगा। 16 दिसंबर से 15 जनवरी 2026 तक दावा-आपत्तियां ली जाएंगी। 16 दिसंबर से सात फरवरी 2026 तक नोटिस चरण (जारी करना, सुनवाई और सत्यापन) पर निर्णय और दावों और आपत्तियों का निपटान रजिस्ट्रीकरण, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा एक साथ किया जाएगा। 10 फरवरी तक मतदाता सूची के मापदंडों की जांच कर आयोग से अंतिम प्रकाशन के लिए अनुमति लेने के बाद 14 फरवरी को अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। एक महीने का समय दिया गया है     बस्तियों की दीवारों पर लगाए गए थे पोस्टर एसआईआर के तहत गणना पत्रक चरण का काम तय समयसीमा से पहले पूरा कर लिया गया। जिन मतदाताओं ने गणना पत्रक वापस नहीं किए हैं, उनके नामों की सूची बीएलओ ने कॉलोनियों और बस्तियों की दीवारों पर लगवाई थी। इसके बाद भी लोगों ने गणना पत्रक जमा नहीं किए। अब ऐसे लोगों को एक महीने का समय दिया गया है। वहीं जिनका रिकॉर्ड साल 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहा है, वो जिला निर्वाचन कार्यालय में कागजात जमा करा सकते हैं। – भुवन गुप्ता, उप निर्वाचन अधिकारी  

बिहार को 10 नए IAS, राज कृष्ण समेत अन्य अधिकारियों की लिस्ट देखें

पटना  यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की तरफ से साल 2024 सिविल सर्विस परीक्षा को लेकर अहम नोटिफिकेशन जारी हुआ है. यूपीएससी में IAS सर्विस के लिए सेलेक्ट होने वाले कैंडिडेट्स के लिए कैडर अलॉटमेंट लिस्ट जारी हो गई है. कुल 179 कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी हुई है. इसमें बिहार राज्य को 10 नए IAS मिल (Bihar New IAS List) गए हैं. इसमें सीतामढ़ी के रहने वाले राज कृष्ण झा होम कैडर मिला है. यूपीएससी सिविल सर्विस 2024 का फाइनल रिजल्ट 22 अप्रैल 2025 को जारी हुआ था, जिसमें कुल 1009 कैंडिडेट्स सेलेक्ट हुए थे. इसके बाद सर्विस अलॉटमेंट लिस्ट जारी हुई थी. सर्विस अलॉटमेंट के बाद अब कैडर अलॉटमेंट लिस्ट जारी कर दी गई है. Bihar New IAS: बिहार के 10 नए IAS बिहार राज्य को 10 नए IAS अधिकारी मिल गए हैं. इसमें सबसे पहले नाम UPSC रैंक 8 लाने वाले राज कृष्ण झा का है. उन्हें होम कैडर मिला है. इसके बाद रैंक 49 लाने वाले सौरव सिन्हा का नाम है. झारखंड के रहने वाले सौरव को बिहार कैडर मिला है. इस लिस्ट में UPSC Rank 67 लाने वाले एमपी के फरखंदा कुरैशी को भी बिहार कैडर मिला है. इसके बाद रैंक 69 लाने वाले कुमुद मिश्रा को होम कैडर मिला है. रैंक 75 केतन शुक्ला उत्तराखंड के रहने वाले हैं जो अब बिहार कैडर में सेलेक्ट हुए हैं. रैंक 76 कल्पना रावत मूलरूप से दिल्ली की रहने वाली हैं जो अब बिहार में यंग IAS को तौर पर काम करेंगी. राजस्थान के रहने वाले नीलेश गोयल को बिहार कैडर मिल गया है. उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा रैंक 77 लाकर क्रैक की थी. वहीं, रैंक 141 लाने वाले प्रिंस राज का नाम भी भी बिहार कैडर लिस्ट में शामिल है. प्रिंस मूलरूप से दिल्ली के रहने वाले हैं. इसके अलावा रैंक 320 अमित मीणा और रैंक 989 दीपक कुमार को भी बिहार कैडर मिला है. सीतामढ़ी के IAS राज कृष्ण का नाम सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर के अथरी गांव के रहने वाले IAS राज कृष्ण झा को होम कैडर मिल गया है. राज कृष्ण ने यूपीएससी सिविल सर्विस 2024 की परीक्षा रैंक 8 से क्रैक की थी. उन्हें कुल 1031 मार्क्स प्राप्त हुए थे. इसमें लिखित परीक्षा में उन्हें 831 और इंटरव्यू राउंड में 200 मार्क्स मिले थे.

परिवहन मंत्री का बड़ा ऐलान: इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार, देश के सभी जिलों में पहुंचेंगी बसें

लखनऊ ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में एनवायरनमेंट एंड सोसाइटी (ICES-2025) की 7वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण बड़े शहरों में पर्यावरणीय चुनौतियां तेजी से बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्रांति ने पिछले 200 वर्षों में पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचाई है, इसलिए अब छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव लाने की जरूरत है। मंत्री ने बताया कि डीजल बसें प्रदूषण का मुख्य कारण हैं, इसलिए विभाग ने इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले 15 शहरों में ई-बसेें चलती थीं, अब यह संख्या बढ़कर 43 हो गई है। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश के सभी जिलों में जल्द ही इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लखनऊ की वायु गुणवत्ता में सुधार का बड़ा कारण इलेक्ट्रिक बसों की बढ़ती संख्या है। कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण पर वैश्विक सहमति बनना समय की जरूरत है। उन्होंने देश-दुनिया से आए विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि टिकाऊ भविष्य के लिए स्थानीय और वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। लोकसेवा आयोग के सदस्य ए.के. वर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्लोबल सोच, राष्ट्रीय नीतियां, स्थानीय कार्य और व्यक्तिगत जागरुकता—चारों स्तरों पर कार्रवाई जरूरी है। ग्लोकल एनवायरनमेंट एंड एसोसिएशन के अध्यक्ष एम.डी. गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण मानवता के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है। कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक रामकुमार वर्मा की स्मृति में लाइफ टाइम एचीवमेंट अवॉर्ड की शुरुआत की गई, जो इस वर्ष डॉ. क्षेत्रपाल गंगवार को दिया गया। समारोह में परिवहन मंत्री को अमेरिकन यूनिवर्सिटी की ओर से मानद उपाधि भी प्रदान की गई। सम्मेलन का आयोजन भाषा विश्वविद्यालय, जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपदा संरक्षण प्रयोगशाला, उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, अमेरिकन यूनिवर्सिटी, ईसीआरडी परिषद और जेसा के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। संयोजन डॉ. नलिनी मिश्रा और डॉ. राजकुमार सिंह ने किया। पौधे को मिलता है उर्वरक का सिर्फ 30% हिस्सा अमेरिका की नॉर्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रो. विनय पी. अनेजा ने कहा कि कृषि में उपयोग होने वाले उर्वरक का केवल 30% हिस्सा ही पौधे को मिलता है, जबकि 70% बर्बाद होकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन का अत्यधिक दोहन गंभीर खतरा बन चुका है। अमोनिया-आधारित उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी, जल और ओजोन परत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और बढ़ती आबादी के बीच नाइट्रोजन संतुलन बनाए रखने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे।  

सीवान में हड़कंप: जनप्रतिनिधियों से 10 लाख की रंगदारी, धमकी भरे कॉल से खलबली

सीवान सीवान जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां जेडीयू की सांसद विजय लक्ष्मी देवी और बड़हरिया के विधायक इंद्रदेव सिंह पटेल को अज्ञात बदमाशों ने 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगते हुए जान से मारने की धमकी दी है। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। सांसद विजय लक्ष्मी देवी को फोन कर मांगी रंगदारी सूत्रों के अनुसार, जेडीयू सांसद के प्रतिनिधि मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव ने मैरवा थाना में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 3 दिसंबर की रात 10:38 बजे और 10:40 बजे सांसद के निजी मोबाइल नंबर पर अज्ञात युवक की कॉल आई, जिसमें उनसे 10 लाख रुपये की मांग की गई। रंगदारी नहीं देने पर बदमाश ने उन्हें हत्या की धमकी भी दी। सांसद प्रतिनिधि ने पुलिस से सांसद की सुरक्षा बढ़ाने और अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। विधायक इंद्रदेव सिंह पटेल को भी धमकी इसी दौरान, बड़हरिया के जेडीयू विधायक इंद्रदेव सिंह पटेल को भी बदमाशों ने कॉल कर 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। विधायक ने तुरंत मामले की जानकारी जिला एसपी को दी और कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शुरू की जांच, मोबाइल नंबर भेजा गया ट्रेसिंग के लिए थानाध्यक्ष संजीत कुमार ने बताया कि बदमाशों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर को जांच के लिए संबंधित विभाग को भेज दिया गया है। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए छानबीन में जुट गई है और दर्ज की गई प्राथमिकी को न्यायालय में भेज दिया गया है।

एमपी शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह का मुख्य महोत्सव बुधवार को

सीएम योगी आदित्यनाथ करेंगे अध्यक्षता, मुख्य अतिथि होंगे उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम परिसर में होगा समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह एमपी शिक्षा परिषद के स्मृतिशेष अध्यक्ष पर केंद्रित पुस्तक का भी होगा विमोचन गोरखपुर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह समारोह का मुख्य महोत्सव (समापन कार्यक्रम) बुधवार (10 दिसंबर) को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) आरोग्यधाम, बालापार रोड के परिसर में भव्यतापूर्वक होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता गोरक्षपीठाधीश्वर एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह शामिल होंगे। समारोह में उत्कृष्टता के आधार पर एमपी शिक्षा परिषद की संस्थाओं, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और संस्थापक सप्ताह समारोह के तहत आयोजित विविध प्रतियोगिताओं के विजेताओं को ट्रॉफी, पदक व नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर एमपी शिक्षा परिषद के स्मृतिशेष अध्यक्ष प्रो. यूपी सिंह के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी होगा। मुख्य महोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह बुधवार प्रातः 9.30 बजे से प्रारम्भ होगा।  1932 में पूर्व पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षिक पुनर्जागरण के ध्येय से ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ द्वारा स्थापित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 93वें संस्थापक सप्ताह का शुभारंभ 4 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम के साथ हुआ था। शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी उपस्थित थे। 10 दिसंबर को इसका समापन सप्ताह भर चली विभिन्न प्रतियोगिताओं के मेधावियों को पुरस्कृत करने के साथ होगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के हाथों पुरस्कृत होंगी। इस दौरान परिषद की सर्वश्रेष्ठ संस्था, सर्वश्रेष्ठ शिक्षक, सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी, इंटरमीडिएट, स्नातक व परास्नातक के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी को स्वर्ण पदक भी प्रदान किया जाएगा। पूर्व कुलपति प्रो. यूपी सिंह पर केंद्रित पुस्तक का होगा विमोचन संस्थापक समारोह के मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के हाथों महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष, पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति स्वर्गीय प्रो. यूपी सिंह पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन किया जाएगा। इस पुस्तक ‘जीवन के साधना पथ का गृहस्थ सन्यासी प्रो. उदय प्रताप सिंह एवं जीवन मूल्य’ का प्रकाशन प्लाक्षा प्रकाशन ने किया है।

महिला शक्ति का उत्सव: 317 कांस्टेबलों ने राजस्थान पुलिस में ली शपथ

जयपुर  राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA) में सोमवार को महिला आरक्षी बैच 98 और 99 का भव्य दीक्षांत परेड समारोह शुरू हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस मौके पर कुल 317 महिला कांस्टेबलों ने राष्ट्र सेवा की शपथ ली। इसमें 76 दूरसंचार और 241 जनरल ड्यूटी महिला कांस्टेबल शामिल हैं, जो आज से राजस्थान पुलिस सेवा में शामिल हो गई हैं।परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी गई और समारोह में जोश और उत्साह का माहौल देखने को मिला। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को सम्मानित भी किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत डीजीपी के परेड निरीक्षण से हुई। इस अवसर पर डीजी ट्रैफिक अनिल पालीवाल, RPA निदेशक संजीब कुमार नार्जरी, अतिरिक्त निदेशक शंकर दत्त शर्मा सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। परेश निरीक्षण के बाद पुरस्कार वितरण राष्ट्रीय ध्वज को सलामी, परेड निरीक्षण के बाद आरपीए में पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में  मुख्य अतिथि डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने दूरसंचार बैच और जनरल ड्यूटी  की कॉन्स्टेबल को पुरस्कार वितरित किए। इसमें विभिन्न श्रेणियों में अव्वल कॉन्स्टेबल को दिए जा रहे पुरस्कार दिए गए।

गंगा एक्सप्रेसवे के खुलने से मेरठ-प्रयागराज का सफर केवल 8 घंटे में पूरा

हापुड़  जनवरी में मेरठ से प्रयागराज तक का सफर सुहाना हो जाएगा। गंगा एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हो गया है। इनका ट्रायल दिसंबर में करने की तैयारियां की जा रही हैं। ट्रायल से पहले एक्सपर्ट की टीम निरीक्षण करने के बाद कुछ जरूरी प्रमाण पत्र जारी करेगी। उसके बाद ट्रायल रन की तिथि का एलान कर दिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि जनवरी के दूसरे सप्ताह में इसको जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। एक्सप्रेस-वे के तीसरे खंड में उन्नाव-हल्द्वानी सेक्शन में मात्र दो प्रतिशत कार्य ही अब बाकी है। इसके अलावा मेरठ-बदायूं सहित पूरा एक्सप्रेस-वे फर्राटा भरने के लिए तैयार है। मेरठ से प्रयागराज तक के 594 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे पर कुल 1498 बड़े स्ट्रक्चर हैं। इनमें से 1497 स्ट्रक्चर का कार्य पूरा हो गया है। मेरठ से बदायू तक के प्रथम सेक्टर में 129 किमी की लंबाई में कुल बड़े 322 स्ट्रक्चर हैं। इनमें सिंभावली सहित सभी पर कार्य पूरा हो चुका है। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार दिसंबर में इसका ट्रायल रन पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद अंतिम परीक्षण करके 15 जनवरी तक प्रधानमंत्री इसका उदघाटन करेंगे। एक्सप्रेस-वे पर पांच स्थानों पर लडाकू विमान उतारने योग्य स्ट्रक्चर तैयार किया गया है। जिसका प्रयोग आपात स्थिति में किया जा सकेगा। प्रदेश को आने वाले साल में गंगा एक्सप्रेस-वे के रूप में प्रयागराज तक का नया हाईवे मिल जाएगा। इस 594 किलोमीटर के एक्सप्रेस वे का निर्माण पूरा हो गया है। इसके बाद मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ व प्रयागराज के औद्योगिक विकास को भी रफ्तार मिलेगी। एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर औद्योगिक गलियारा बनाया जा रहा है। इससे प्रदेश के दोनों सिरों के लोगों के आवागमन का एक और सुगम पथ संचालित हो जाएगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा एक्सप्रेसवे के कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस 36,230 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए 7453.13 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। अभी इसका विस्तार हरिद्वार किया जा रहा है। छह लेन में बनाए गए इस एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की सामान्य रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहेगी। एक्सप्रेसवे पर शाहजहांपुर के जलालाबाद में लड़ाकू विमानों के लिए 3.5 किलोमीटर हवाई पट्टी का भी निर्माण पूरा कर लिया गया है। वहीं ऐसे तीन और स्थान विकसित करने की तैयारी है।     गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। अब इसके ट्रायल की तैयारी है। हमारा प्रयास है कि दिसंबर में ट्रायल रन कराकर जनवरी में इसका उदघाटन करा लिया जाएगा। हमारी ओर से उदघाटन के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। इस संबंध में यूपीडा व एनएचएआइ के अधिकारियों के साथ जल्द ही बैठक का आयोजन किया जाएगा। – संदीप कुमार, एडीएम गंगा एक्सप्रेस-वे (मेरठ-प्रयागराज) नवीनतम निर्माण स्थिति विवरण                                                                     स्थिति एक्सप्रेस-वे निर्माण की कुल स्थिति                       लगभग 98 प्रतिशत पूरा मुख्य कैरिजवे का काम                                     99 प्रतिशत पूरा हो गया मेरठ और बदायूं के बीच खंड                           130 किलोमीटर का निर्माण ट्रायल के लिए तैयार प्रस्तावित ट्रायल रन का समय                            दिसंबर 2025 का पहला सप्ताह एक्सप्रेसवे का उद्घाटन                                   जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में मेरठ से प्रयागराज यात्रा का समय (एक्सप्रेसवे के बाद)     केवल 6 घंटे

काशी तमिल संगमम-4 में दक्षिण भारत से आए प्रतिनिधियों ने की उत्तर प्रदेश के गुड गवर्नेंस की प्रशंसा

  योगी आदित्यनाथ जैसा मुख्यमंत्री हमारे राज्य में होता, तो हमारा शहर भी और अधिक विकसित हो सकता था -मोनालीसा, प्रतिनिधि  दक्षिण भारतीय प्रतिनिधि ने योगी सरकार के कार्यों की प्रशंसा करते हुए 10 में 10 नंबर दिए प्रतिनिधियों ने यात्रा के दौरान महिला सुरक्षा के इंतज़ाम को देखकर उत्तर प्रदेश के कानून व्यवस्था को सराहा  काशी के हेरिटेज को रिवाइव करके संजो कर रखा है, इंफ्रास्ट्रक्चर और सौंदर्यीकरण का कार्य काफी बेहतरीन है -पृथवी राज  काशी की सड़के पहले सकरी थी, यातायात बहुत ख़राब था,गंदगी थी अब इसमें सभी कार्यो में काफी सुधार हुआ है–तिलकवदी वाराणसी वाराणसी में आयोजित काशी तमिल संगमम-4.0 में दक्षिण भारत  से आए प्रतिनिधियों के समूह ने उत्तर प्रदेश के विकास समेत अन्य कामों को देखा, सराहा और गुड गवर्नेंस के लिए खुल कर सराहना की। दक्षिण भारत के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों, प्रशासनिक प्रबंधन और कानून व्यवस्था की प्रशंसा की। वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या के भ्रमण के बाद प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यो को लेकर अपनी राय रखी।  प्रतिनिधियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर सकारात्मक बदलाव हुए हैं, जो जमीन पर स्पष्ट दिखाई देते हैं। प्रतिनिधियों ने योगी सरकार के कार्यों की प्रशंसा करते हुए 10 में 10 नंबर दिए।  चेन्नई से पहली बार वाराणसी आई मोनालीसा ने कहा की उत्तर प्रदेश में गुड गवर्नेंस है। योगी आदित्यनाथ जी ने उत्तर प्रदेश के विकास के लिए बहुत कार्य किया है, “योगी जैसा मुख्यमंत्री हमारे राज्य में होता, तो हमारा शहर भी और अधिक विकसित हो सकता था। उन्होंने यात्रा के दौरान महिला सुरक्षा के इंतज़ाम को देखकर उत्तर प्रदेश के कानून व्यवस्था की तारीफ़ की। संतोष कुमार ने योगी सरकार के कार्यो को देखते हुए कहा कि उन्हें 10 में से 10 नंबर दिया जा सकता है। पुडुचेरी से आए आर्किटेक्ट  पृथ्वीराज  ने कहा कि सरकार ने काशी के हेरिटेज को रिवाइव करके बहुत अच्छे से संजो के रखा है। शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर और सौंदर्यीकरण काफी बेहतरीन है। तिलकवदी ने कहा कि काशी की सड़के पहले सकरी थी, यातायात बहुत ख़राब था,गंदगी थी अब सभी कार्यो में काफी सुधार आया है।  तमिलनाडु के विरुधुनगर के दीपक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सुरक्षा, परिवहन, आवास और आयोजन स्थल पर किए गए इंतजाम अत्यंत प्रभावी और व्यवस्थित थे। उनका कहना था कि पूरे आयोजन में अनुशासन और सौहार्द का जो वातावरण देखने को मिला, वह उत्तर प्रदेश प्रशासन की गुड गवर्नेंस को दर्शाता है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर आयोजित यह संगम उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक विरासत के संगम का श्रेष्ठ उदाहरण बन चुका है। प्रतिभागियों का कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना इस आयोजन में जीवंत होती दिख रही है। 2 दिसंबर से शुरू हुआ दो-सप्ताह का ये कार्यक्रम तमिलनाडु और काशी के बीच सेतू बनकर सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को मजबूत कर रहा है । इस आयोजन में तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि,सात विभिन्न श्रेणियों में जिसमे छात्र, शिक्षक, लेखक , मीडिया प्रतिनिधि, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पेशेवर एवं शिल्पकार, महिलाएँ तथा आध्यात्मिक विद्वान शामिल हो रहे है।

रायपुर में ऑडिट पखवाड़ा: राज्यपाल रमेन डेका ने कैग की सर्वोच्च भूमिका पर की चर्चा

रायपुर : लोकतांत्रिक ढांचे में कैग की सर्वाेच्च भूमिका – रमेन डेका राज्यपाल  रमेन डेका ऑडिट पखवाड़ा के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल रायपुर महालेखाकार कार्यालय के आवासीय परिसर स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  डेका ने अपने उद्बोधन में कहा कि लेखा परीक्षा केवल सरकारी व्यय और राजस्व की जांच तक सीमित नहीं है, यह प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन, और जनसेवा में उत्तरदायित्व का एक सशक्त माध्यम है। हमारे लोकतांत्रिक ढांचे मेें भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की सर्वाेच्च भूमिका है।  ऑडिट पखवाड़ा के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल लेखा परीक्षा को संवैधानिक प्राधिकरण का दर्जा राज्यपाल  रमेन डेका आज प्रधान महालेखाकार कार्यालय में ऑडिट पखवाड़ा 2025 के समापन समारोह में शामिल हुए। लेखा परीक्षा दिवस के अवसर पर 20 नवम्बर से 8 दिसंबर 2025 तक यह सप्ताह आयोजित किया गया।  राज्यपाल  डेका ने कहा कि भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग का इतिहास गौरवशाली रहा है। इसकी नीव ब्रिटिश शासन के दौरान 1858 में प्रारंभ हुई लेखा परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी हुई है। स्वतंत्रता के बाद हमारे संविधान निर्माताओं ने इस संस्था की महत्ता को समझते हुए इसे संवैधानिक प्राधिकरण का दर्जा प्रदान किया।  कैग की भूमिका प्रशासनिक सुधार, नवाचार एवं पारदर्शिता को प्रोत्साहित करना है  ऑडिट पखवाड़ा के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल  डेका ने कहा कि तेजी से बढ़ते डिजिटल प्रशासन के दौर में कैग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। यह संस्था केवल कमियों को उजागर नहीं करती, बल्कि प्रशासनिक सुधार, नवाचार एवं पारदर्शिता को प्रोत्साहित करती है।  यह न केवल सरकारी कार्यों में वित्तीय अनुशासन लाने का कार्य करता है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने का महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाता है। इस विभाग के अधिकारियों की निष्पक्षता और कर्मठता ने इसे एक सशक्त संस्थान के रूप में स्थापित किया है। अधिकारियों की मेहनत और ईमानदारी से जनता का भरोसा मजबूत होगा राज्यपाल ने  विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे इस प्रतिष्ठित संस्था की परंपराओं को बनाए रखते हुए निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। उनकी मेहनत और ईमानदारी से ही जनता का भरोसा और मजबूत होगा। जीवन में एक कार्य ऐसा करें जिसमें लेने का नहीं बल्कि देने का हो, जिससे हमारा देश 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करेगा।           कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रधान महालेखाकार  यशवंत कुमार ने दिया। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन महालेखाकार (लेखा परीक्षा)  मोहम्मद फैजान ने किया। इस अवसर पर राज्यपाल  डेका ने सामुदायिक भवन परिसर में वृक्षारोपण किया। कार्यक्रम में महालेखाकार कार्यालय के सभी अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।