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मौसम ने बदली करवट: छत्तीसगढ़ में पारे के नीचे आने के आसार

रायपुर छत्तीसगढ़ में तापमान और गिरने के संकेत हैं। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार अगले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद प्रदेश में रात और सुबह की ठंड बढ़ सकती है। विभाग ने अनुमान जताया है कि आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। फिलहाल पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क है और कहीं भी वर्षा की संभावना नहीं है। मौसम सारांश बुधवार को प्रदेश का मौसम पूरी तरह शुष्क रहा। दिन का सबसे अधिक तापमान 29.9°C दुर्ग में दर्ज किया गया, जबकि रात का सबसे कम तापमान 7.8°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड हुआ। बारिश के सभी आंकड़े निरंक (शून्य) रहे। रायपुर के लिए स्थानीय पूर्वानुमान आज सुबह कोहरा छाए रहने की संभावना है। इसके बाद दिनभर आकाश सामान्यतः साफ़ रहेगा। अधिकतम तापमान करीब 29°C और न्यूनतम तापमान लगभग 14°C रहने का अनुमान है।

पहली बार SMS अस्पताल में CRS व HIPEC सर्जरी सफल, कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत

जयपुर राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर ने कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। कॉलेज के शल्य ऑन्कोलॉजी विभाग ने पहली बार साइटोरिडक्शन सर्जरी (CRS) और हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (HIPEC) प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गई। यह अत्याधुनिक तकनीक अब राज्य के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में भी उपलब्ध हो गई है, जिससे उन्नत पेरिटोनियल कैंसर से जूझ रहे मरीजों को जीवनदायी उपचार मिल सकेगा। इस अवसर पर विभाग की ओर से एक लाइव सर्जिकल वर्कशॉप भी आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर से आए चिकित्सकों, सर्जनों और ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों ने भाग लिया। वर्कशॉप का टाइम वर्कशॉप सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 3:30 बजे तक चली, जहां प्रतिभागियों को CRS और HIPEC की जटिल प्रक्रिया के हर चरण का लाइव अवलोकन कराया गया। कार्यक्रम का संचालन एसएमएस मेडिकल कॉलेज के शल्य ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष और आयोजन सचिव डॉ. सुरेश सिंह ने किया। ये मरीजों का जीवनकाल बढ़ाने कारगर कदम-डॉ. सुरेश सिंह डॉ. सुरेश सिंह ने बताया कि CRS+HIPEC उन्नत कैंसर उपचार की एक विशेष तकनीक है, जो उन मरीजों के लिए अत्यधिक प्रभावी मानी जाती है जिनमें कैंसर पेट की झिल्ली (पेरिटोनियम) तक फैल चुका हो। उन्होंने कहा, “यह उपचार पेरिटोनियल कार्सिनोमैटोसिस वाले चुनिंदा मरीजों में जीवनकाल बढ़ाने और बीमारी नियंत्रण में बेहद कारगर सिद्ध होता है। अब इस सुविधा का सरकारी स्तर पर उपलब्ध होना राजस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।” अत्यधिक महंगी सर्जरी है, लेकिन चिंता की बात नहीं सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि राज्य सरकार ने इस जटिल और अत्यधिक महंगी सर्जरी को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में शामिल कर दिया है। यानी AYUSHMAN कार्ड रखने वाले पात्र मरीजों को CRS और HIPEC का पूरा इलाज बिल्कुल निशुल्क मिलेगा। सामान्यतः इस प्रक्रिया का खर्च निजी अस्पतालों में कई लाख रुपये तक आता है, ऐसे में गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को इससे बड़ा लाभ मिलेगा। क्या है CRS + HIPEC तकनीक? साइटोरिडक्शन सर्जरी (CRS) एक अत्यधिक जटिल ऑपरेशन है, जिसमें पेट के अंदर फैले हर दृश्य ट्यूमर को सावधानीपूर्वक हटाया जाता है। कई मामलों में ओमेंटम, पेरिटोनियम और प्रभावित आंत के हिस्सों को भी निकाला जाता है ताकि कैंसर के बोझ को अधिकतम रूप से कम किया जा सके। सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती है इसके बाद उसी ऑपरेशन में HIPEC किया जाता है। इसमें गर्म कीमोथेरेपी दवा (लगभग 42°C) को एक विशेष HIPEC मशीन की सहायता से 60-90 मिनट तक पेट की गुहा में प्रवाहित किया जाता है। यह दवा सीधे कैंसरग्रस्त क्षेत्र पर प्रभाव डालती है और बचे हुए सूक्ष्म कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि दवा पूरे शरीर में नहीं जाती, जिससे दुष्प्रभाव कम होते हैं और उपचार अधिक असरदार बनता है। किन मरीजों को सबसे अधिक लाभ? CRS + HIPEC तकनीक मुख्य रूप से उन्नत ओवरी कैंसर अपेंडिक्स कैंसर कोलन कैंसर पेरिटोनियल मेसोथेलियोमा पेट की झिल्ली में फैले अन्य कैंसरों में उपयोगी मानी जाती है। इस प्रक्रिया ने कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में सिद्ध किया है कि यह चुनिंदा मरीजों के जीवनकाल को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है। राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि इस अत्याधुनिक सर्जरी के सरकारी अस्पताल में शुरू होने से राज्य के कैंसर उपचार ढांचे को बड़ा मजबूत आधार मिलेगा। अब मरीजों को महंगे निजी अस्पतालों के बजाय एसएमएस जैसे उच्चस्तरीय सरकारी संस्थान में उत्कृष्ट और सुलभ उपचार की सुविधा मिलेगी।

गोरखपुर की सड़कों पर दिखा अनुशासन, संस्कृति व विरासत के सम्मान का अद्भुत समन्वय

संस्थापक सप्ताह समारोह 'गोरक्षनगरी' में उतरा 'हिंदुस्तान' महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने निकाली शोभायात्रा   गोरखपुर की सड़कों पर दिखा अनुशासन, संस्कृति व विरासत के सम्मान का अद्भुत समन्वय  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के छात्रों की शोभायात्रा, संस्कृति और जोश का अद्भुत संगम गोरखपुर  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 में गुरुवार को गोरक्षनगरी में ‘समूचा हिंदुस्तान’ उमड़ पड़ा। एक तरफ उत्साह, उमंग से लबरेज युवाओं ने भारतीय संस्कृति, अनुशासन व विरासत के सम्मान का संदेश दिया तो दूसरी तरफ भारत के शौर्य, पराक्रम के साथ ही सम्मान के प्रतीक महापुरुषों के प्रति श्रद्धा निवेदित की। गोरखपुर की सड़कों पर युवाओं ने अनुशासन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। भारत की सांस्कृतिक धरोहरों, तकनीकी विकास, सुरक्षा व महापुरुषों की विचारधारा संग भारतीय वेशभूषा संग निकली शोभायात्रा ने सभी को अपनी ओर आकर्षित किया।  अतिथियों ने किया पुस्तक का विमोचन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की शोध पत्रिका ‘दिग्विजयम्’ और महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज, जंगल धूषड़ द्वारा ‘मिशन मंझरिया’ की संक्षिप्त रिपोर्ट का विमोचन किया। समारोह स्थल पर पहुंचने के उपरांत एनसीसी के कैडेट्स ने मुख्य अतिथि को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मुख्य अतिथि ने पुस्तिका पर अपने विचार भी लिखे। मुख्यमंत्री व मुख्य अतिथि ने ‘विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। समारोह स्थल पर 9000 से अधिक विद्यार्थी मौजूद रहे। समारोह के शुभारंभ समारोह में महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना व कुलगीत प्रस्तुत किया। युवाओं के अनुशासन की भूरि-भूरि प्रशंसा मुख्य अतिथि ने शोभायात्रा के शुभारंभ की घोषणा की। मुख्य अतिथि ने शोभायात्रा में शामिल युवाओं से मार्च पास्ट की सलामी ली। शोभायात्रा में सबसे आगे महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज की एनसीसी कैडेट्स रहीं। उनके पीछे महाराणा प्रताप महिला पीजी कॉलेज रामदत्तपुर की एनसीसी कैडेट्स, दिग्विजयनाथ इंटर कॉलेज चौक बाजार के एनसीसी कैडेट्स, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज एनसीसी सीनियर डिवीजन, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज एनसीसी जूनियर डिवीजन, एनसीसी दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज व ताइक्वांडो टीम शामिल रही। ज्ञान ज्योति, सच्चिदानंद बैंड, हंस वाहिनी भी आकर्षण का केंद्र रही। शोभायात्रा में शिक्षा परिषद के संस्थाओं के विद्यार्थी शामिल रहे।  महापुरुषों के प्रति सम्मान का भाव  शोभायात्रा में मां सरस्वती, भारत माता, महायोगी गुरु गोरखनाथ, महाराणा प्रताप, महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के चित्र भी रहे। शोत्रायात्रा में एक तरफ 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से भारत के शौर्य की कहानी प्रस्तुत की जा रही थी तो वहीं राम मंदिर के जरिए विरासत का सम्मान भी युवाओं ने प्रस्तुत किया। युवाओं ने शोभायात्रा के माध्यम से विरासत, संस्कृति के प्रति सम्मान के भाव को प्रदर्शित किया। शोभायात्रा कॉलेज परिसर से निकलकर इंदिरा बाल बिहार से सीधे पोस्ट ऑफिस तिराहे से गणेश चौराहा से गोलघर होते हुए कचहरी चौराहा, फिर महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के स्वर्ण जयंती द्वार से शोभायात्रा स्थल पर पहुंची। भारतीय परिधान व विद्यालय के गणवेश में युवा सभी के आकर्षक का केंद्र बने रहे। संस्थापक-सप्ताह समारोह में शुक्रवार को होने वाली प्रतियोगिताएं महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संस्थापक सप्ताह समारोह में शुक्रवार को गोरखवाणी प्रतियोगिता-कनिष्ठ वर्ग दिग्विजयनाथ एल.टी. प्रशिक्षण महाविद्यालय, वरिष्ठ वर्ग महाराणा प्रताप इण्टर कॉलेज (सभागार), योगासन प्रतियोगिता-प्रताप आश्रम गोलघर, चित्रकला प्रतियोगिता-दिग्विजयनाथ पी.जी.कॉलेज (कला संकाय), कबड्डी प्रतियोगिता बालक वर्ग (कनिष्ठ एवं वरिष्ठ) महाराणा प्रताप पालिटेक्निक गोरखनाथ एवं बालिका वर्ग (कनिष्ठ एवं वरिष्ठ) महाराणा प्रताप बालिका इण्टर कॉलेज सिविल लाइन्स में सम्पन्न होगी। यह जानकारी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संचालन समिति के सदस्य डॉ. नितीश शुक्ला ने दी।

इंडस्ट्री को मिलेगी रफ्तार: जापानी कंपनी के साथ समझौते से पंजाब में खुला 400 करोड़ निवेश का रास्ता

चंडीगढ़  पंजाब में औद्योगिक विकास को बड़ा प्रोत्साहन मिला है. जापान की अग्रणी कंपनी टॉपन स्पेशलिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड (टी.एस.एफ.) ने बुधवार को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के साथ अपनी विस्तार योजना का समझौता किया है. इसके तहत 400 करोड़ रुपए का निवेश करने के लिए औपचारिक समझौता किया गया है. भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह सहयोग वर्तमान और उभरते उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करने पर आधारित होगा. जापान दौरे पर गए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि टी.एस.एफ. और इन्वेस्ट पंजाब ने राज्य में एक स्किल एक्सीलेंस सेंटर स्थापित करने के लिए साझेदारी और सहयोग पर सहमति जताई है. इससे हुनरमंद/अर्ध-हुनरमंद व्यक्तियों, कामगारों और युवाओं को उच् स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके. उन्होंने कहा कि यह पहल उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ पंजाब में नए रोजगार अवसर भी उत्पन्न करेगी. पंजाब और पूरे देश में टी.एस.एफ. सीएम मान ने कहा कि यह समझौता (एमओयू )पंजाब और पूरे भारत में टी.एस.एफ. तथा अन्य बड़े उद्योगों में अप्रेंटिसशिप और रोजगार अवसरों के नए रास्ते खोलेगा. मान ने बताया कि यह परियोजना किसी पॉलिटेक्निक/तकनीकी संस्थान के साथ संयुक्त रूप से प्रशिक्षण और शैक्षणिक सहयोग को भी मजबूत करेगी. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उद्योग की जरूरतों के आधार पर टी.एस.एफ. वित्तीय सहायता, तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण सहयोग और पाठ्यक्रम निर्माण में भी मदद करेगा. इस दौरान अप्रेंटिसशिप की सुविधा भी उपलब्ध होगी और योग्य प्रशिक्षुओं को उपयुक्त रोजगार अवसर मिलेंगे. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों के कारण टी.एस.एफ. ने लगभग 400 करोड़ रुपए के निवेश से पंजाब में अपनी मौजूदा विनिर्माण सुविधा का विस्तार करने की औपचारिक इच्छा व्यक्त की है. नये रोजगार सृजन का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निवेश का उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना, नये रोजगार सृजन, उन्नत तकनीक को शामिल करना और भारत में कंपनी की दीर्घकालिक उपस्थिति को मजबूत करना है. उन्होंने बताया कि टी.एस.एफ. ने पंजाब के प्रति अपनी लंबी अवधि की प्रतिबद्धता दोहराई है. मान ने कंपनी को राज्य में विस्तार और संचालन से जुड़े सभी कार्यों में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया. इस दौरान टी.एस.एफ. समूह ने पंजाब में काम करने के अपने अनुभव साझा करते हुए इसे मजबूत उद्योग-सरकार साझेदारी, आसान प्रक्रियाएँ, उच्च गुणवत्ता वाले कार्यबल की उपलब्धता, निर्बाध बिजली आपूर्ति और अनुकूल निवेश माहौल का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विस्तार परियोजना के माध्यम से यह साझेदारी और मजबूत होगी. उन्होंने इस परियोजना के लिए आवश्यक स्वीकृतियों और संचालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने में पंजाब सरकार और इन्वेस्ट पंजाब से निरंतर सहयोग की उम्मीद जताई.  

लालू परिवार को बड़ी राहत! लैंड फॉर जॉब केस पर आज निर्णय नहीं, कोर्ट ने CBI को दिया खास टास्क

पटना  चर्चित लैंड फॉर जॉब केस में राउज एवेन्यू कोर्ट दिल्ली का फैसला टल गया है। इससे लालू परिवार को फौरी राहत मिल गई है। अगली सुनवाई 8 दिसम्बर को होगी। कोर्ट ने जांच एजेंसी सीबीआई को एक अहम टास्क दिया है कोर्ट आज गुरुवार को लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर सुनवाई हुई। इस मामले में कोर्ट ने फिलहाल अपना आदेश स्थगित कर दिया है।   इस मामले में अदालत ने सीबीआई से आरोपियों की स्थिति की जानकारी स्पष्ट करने का टास्क दिया है। कार्यवाही के दौरान इस कांड के कुछ आरोपियों की मृत्यु हो गई। अदालत ने सीबीआई से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है और मामले की सुनवाई 8 दिसंबर के लिए निर्धारित की है। सीबीआई ने 103 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। हालाँकि, कार्यवाही के दौरान 4 की मृत्यु हो गई। कोर्ट ने मामले की तफ्तीश कर रही सीबीआई को आदेश दिया है कि सभी आरोपियों का स्टेटस वेरिफिकेशन कर रिपोर्ट दाखिल करे। लालू परिवार के लिए नासूर बन चुके इस केस की सुनवाई काफी दिनों से चल रही है। अदालत की कार्यवाही के दौरान कांड के चार आरोपितों की मौत हो गई। इसे लेकर अदालत ने कहा कि जब तक प्रत्येक अभियुक्त की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाए तबतक आरोप तय करने जैसी संवेदनशील प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। इसी वजह से कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से अभियुक्तों का स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने का निर्देश दिया है। इस मामले में आरोप है कि रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप-डी श्रेणी में लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान की गई गलत तरीके से नियुक्तियां की गईं। इसके एवज में लालू परिवार के सदस्यों या अन्य सहयोगियों के नाम पर जमीनों की रजिस्ट्री कराई गई। मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे।  

CM भगवंत मान का नया अभियान: नशे के खिलाफ संग्राम को मजबूत करेगी मेंटल हेल्थ फैलोशिप

चंडीगढ़  पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ऐतिहासिक शुरुआत हुई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने देश की पहली सरकारी लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम लॉन्च किया है. उन्होंने कहा कि युद्ध नशे विरुद्ध सिर्फ नारा नहीं, बल्कि एक जमीनी लड़ाई है, जिसमें हर परिवार की सुरक्षा और भविष्य दांव पर है. यह फेलोशिप 2 साल की होगी. जिसमें न सिर्फ पंजाब, बल्कि पूरे भारत के लिए एक मॉडल बनने जा रही है. एम्स मोहाली और टीआईएसएस मुंबई की साझेदारी में शुरू हुई यह पहल 23 जिलों में मानसिक स्वास्थ्य और नशा-निवारण को बिल्कुल नए स्तर पर ले जाएगी. सरकार 35 ऐसे युवा विशेषज्ञ चुन रही है जो साइकोलॉजी या सोशल वर्क की पढ़ाई कर चुके हैं और जिनके पास मानसिक स्वास्थ्य में काम करने का अनुभव है. ये फेलो पंजाब के गांव, शहर, स्कूल, कॉलेज, कम्युनिटी सेंटर और रिहैब सुविधाओं तक पहुँचकर एक ऐसे मॉडल को लागू करेंगे जिसकी कल्पना भारत ने पहले नहीं की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास तीनों को एक साथ जोड़कर. समाज को मजबूत करने की जरूरत भगवंत मान यह मानते हैं कि नशे से लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के मन को मजबूत करने की जरूरत है. इसी सोच के चलते इस कार्यक्रम में फेलोज़ को टीआईएसएस मुंबई से विशेष ट्रेनिंग, मेंटरशिप और जमीनी नेतृत्व सीखने का मौका मिलेगा. उन्हें 60,000 रुपये महीना का सम्मानजनक रिम्यूनरेशन भी मिलेगा, ताकि वे बिना किसी दबाव के पूरी ऊर्जा से पंजाब के युवाओं और परिवारों के साथ काम कर सकें. नशा महामारी की तरह फैल चुका है यह कार्यक्रम असल मायने में पंजाब के दिल की धड़कन है. नशा एक महामारी की तरह फैल चुका था, लेकिन अब पंजाब ने यह लड़ाई विशेषज्ञों के साथ मिलकर, वैज्ञानिक तरीकों से और लोगों के बीच उतरकर लड़ने का फैसला लिया है. भगवंत मान ने दिखा दिया है कि जब नीयत साफ हो और लक्ष्य जनता की भलाई हो, तो सरकारें बदलाव लेकर आती हैं, बयान नहीं. पंजाब के भविष्य में निवेश 7 दिसंबर तक आवेदन खुले हैं, और अधिक जानकारी के लिए https://tiss.ac.in/lmhp पर जाकर देख सकते है. यह सिर्फ एक फेलोशिप नहीं, बल्कि पंजाब के भविष्य में निवेश है, एक ऐसा भविष्य जहां हर घर सुरक्षित हो, हर युवा स्वस्थ हो, और हर माता-पिता नशे के डर के बिना अपने बच्चों को बड़ा कर सकें. यह वही पंजाब है जिसकी कल्पना भगवंत मान ने की थी और अब वह धीरे-धीरे हकीकत बन रहा है.  

इंडिगो फ्लाइट खराबी से पटना हवाई अड्डे पर तबाही, कल कई उड़ानें रद्द

पटना मौसम ठंढा होने की वजह से कई फ्लाइट तो प्रभावित हुए ही लेकिनएयरलाइन इंडिगो के क्रू रोस्टर और शेड्यूलिंग सॉफ्टवेयर में अचानक आई भीषण तकनीकी खराबी के कारण भी बुधवार को पूरे देश में लगभग 130 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गई थीं। पटना एयरपोर्ट पर भी यात्री काफी परेशान रहे। तकनीकी खराबी का असर पटना के जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी साफ तौर पर दिखा, जहां दिल्ली-पटना-दिल्ली सेक्टर की तीन महत्वपूर्ण जोड़ी फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा। बताया जाता है कि करीब एक दर्जन से अधिक उड़ानें अपने निर्धारित समय से एक से तीन घंटे की भारी देरी से संचालित हुईं। शुक्रवार सुबह की कोलकाता और दिल्ली की एक-एक फ्लाइट भी रद्द रहने की आशंका है। सॉफ्टवेयर की खामी से फंसे रहे लगभग 1000 यात्री तीन जोड़ी फ्लाइट्स रद्द होने के चलते अकेले दिल्ली और पटना में लगभग 1000 यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्री शादी-विवाह जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल होने के लिए सफर कर रहे थे। यात्रियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने 15,000 से 18,000 रुपये तक में टिकट खरीदे थे। इंडिगो ने अपने यात्रियों को राहत देने की घोषणा की हालांकि इसको लेकर इंडिगो का भी बयान सामने आया है। इस संबंध में उनका कहना है कि इस तकनीकी खराबी को एक-दो दिनों में ठीक कर लिया जाएगा। साथ ही, यात्रियों को टिकट का पूरा रिफंड दिया जाएगा या वे चाहें तो अपनी यात्रा तिथि आगे भी बढ़ा सकते हैं। फ्लाइटों में देरी और रद्दीकरण की वजह से पटना एयरपोर्ट के टर्मिनल पर दिन भर भारी भीड़ और अफरातफरी का माहौल बना रहा। हालांकि, एयरलाइन ने कुछ रद्द हुई फ्लाइटों के यात्रियों को अन्य उपलब्ध विमानों से भेजने की व्यवस्था की।

जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो वह अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  एसडीआरएफ के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ  महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने 1932 में गोरखपुर में की थी महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापनाः गोरक्षपीठाधीश्वर  गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 के शुभारंभ अवसर पर स्वदेश, स्वधर्म व राष्ट्रीय स्वाभिमान का जिक्र किया और कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं या कोई राष्ट्रीय चुनौती होती है तो महापुरुषों के चित्र, उनके शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते हैं। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई समेत सीमाओं की रक्षा करते हुए बलिदान देने वाले भारत मां के बहादुर जवान देश के लिए प्रेरणा हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्र की पहचान वहां की संस्कृति, परंपराएं और महापुरुष होते हैं, यह एक-दूसरे से जुड़े हैं। राष्ट्र की संस्कृति समाप्त हो जाए तो राष्ट्र अपनी एकात्मता व पहचान को खो देता है। संस्कृति उन राष्ट्रीय मूल्यों से बनती है, जिन्हें समय-समय पर अलग-अलग युगांतकारी घटनाओं ने संबल और शक्ति दी। जिन्हें विभिन्न पर्वों के माध्यम से पूरा भारत बिना भेदभाव के आत्मसात करता है। पर्व में मतभेदों को समाप्त करके हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भी हम संकट में होते हैं तो महापुरुषों के शौर्य व पराक्रम नई ऊर्जा देते है।  महंत दिग्विजयनाथ महाराज द्वारा 1932 में गोरखपुर में स्थपित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का शुभारंभ उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले स्मृतिशेष प्रो. यूपी सिंह व अन्य दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दी।   यह आत्ममंथन का अवसर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद अगले छह वर्ष के अंदर होने वाले शताब्दी महोत्सव के कार्यक्रम के साथ बढ़ रहा है। ऐसे में शिक्षा परिषद व संस्थाओं के सामने 100 वर्षों की इस यात्रा के आत्ममंथन का अवसर है। यह समारोह इस पर आत्मावलोकन का अवसर प्रस्तुत कर रहा है कि छात्र के सर्वांगीण विकास, समाज व राष्ट्र के प्रति हमने अपनी भूमिका का निर्वहन किस रूप में किया है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापकों ने जो विराट लक्ष्य रखा है, वह समाज व राष्ट्र के प्रति हमारी सेवाएं-कर्तव्य के समय-समय पर मूल्यांकन का भी है। हमारे संस्थापकों ने छात्र-छात्राओं के सामने महाराणा प्रताप के रूप में आदर्श रखा।  शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि आदि पर जोर दे रहा परिषद  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण, अपनी संकल्पना और भावना को बढ़ाने के लिए संस्थापकों ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। परिषद शिक्षा के विजन के साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, महाराणा प्रताप पॉलीटेक्निक आदि के जरिए तकनीक पर जोर दे रहा है तो वहीं महिलाओं की शिक्षा, अन्नदाता किसानों के प्रशिक्षण के लिए महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र या अन्न संस्थाएं दूरदराज के क्षेत्रों में नए प्रयास को बढ़ाने के साथ ही कार्य कर रही हैं।  संस्थापक समारोह का उद्देश्य- हम कर्तव्य व तैयारियों का कर सकें आत्मावलोकन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संस्थापक समारोह का उद्देश्य है कि हम संस्थापकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कर्तव्यों व तैयारियों का आत्मावलोकन कर सकें कि आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें खुद को कैसे तैयार करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भावी भारत के निर्माण में अपने उत्तरदायित्वों को भी बखूबी समझना होगा। संस्थाएं जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रतिवर्ष नयापन करने का प्रयास कर रही हैं।  शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं को बनना ही होगा मॉडल स्टडी का माध्यम  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज द्वारा शोध पत्रिका ‘दिग्विजयम्’ और महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज द्वारा ‘मिशन मंझरिया’ के विमोचन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक ओर शिक्षित बेरोजगारों की फौज खड़ी होती है तो दूसरी तरफ निरक्षरता की लंबी खाई दिखाई पड़ती है। महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज को इसमें योजक की भूमिका में दिखाई दिया है। यहां के शिक्षा संकाय के छात्रों द्वारा गांव को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लक्ष्य को बढ़ाने की दिशा में गोद लिया गया, उन्होंने इसे मॉडल स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया। सीएम योगी ने कहा कि शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं को मॉडल स्टडी का माध्यम बनना ही होगा।  समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं संस्थान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में किसी भी मनुष्य के लिए अयोग्य शब्द नहीं कहा गया है। अयोग्य मतलब उसकी मनुष्यता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति अयोग्य है तो इसका मतलब कोई योजक नहीं है। उन्होंने कहा कि अयोग्यता-निरक्षरता शैक्षिक समाज पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सीएम योगी ने परिषद के सभी शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं द्वारा सेवा भाव के कार्यों का जिक्र किया। बताया कि कोई कुष्ठ सेवाश्रम तो कोई संस्थान थारू, वनटांगिया के छात्रों को गोद लेकर पढ़ा रहा है तो कोई संस्थान अन्य जिम्मेदारियों के साथ समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है और यही राष्ट्र के प्रति हमारी सेवा भी है।  समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश वास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष साधना सिंह, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रो. जेपी सैनी, प्रो. रविशंकर सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्र पाल सिंह, इंजी. सरवन निषाद, प्रदीप शुक्ला, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, रतनपाल सिंह, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि मौजूद रहे।

इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)

अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय मूल्यों और संस्कारों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, सच्ची राष्ट्रसेवा है- लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)     महाराणा प्रताप शिक्षण परिषद के संस्थापक-सप्ताह उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूपी एडीआरएफ के उपाध्यक्ष, ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   गोरखपुर गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी जी (से.नि.) शामिल हुए। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने छात्र-छात्राओं को महाराणा प्रताप के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, साहस, समर्पण, समानता और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं बल्कि इमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा, लोक कल्याण और समाज का एक अच्छा नागरिक बनना भी  वास्तविक देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से आप सफलता के इन मूल्यों का संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने अंग्रजों के शासन और  स्वतंत्रा संघर्ष के दौरान भारतीय संस्कारों और शिक्षा मूल्यों पर आधारित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और उसके निरंतर राष्ट्रसेवा में योगदान देने की सरहाहना की एवं शिक्षा परिषद के संस्थापकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब देश में अग्रेंजी शासन और अंग्रेजियत का बोलबाला था ऐसे में 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और 1932 में महाराणा प्रतापा शिक्षा परिषद की गोरखपुर में नींव रखना भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों राष्ट्रसेवा के इस संकल्प को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।   उद्घाटन अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा ही महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है किस प्रकार उन्होंने अकेले, अन्य राजपूत राजाओं के सहयोग के बिना भी शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की अवज्ञा की और आत्मबलिदान, त्याग और समर्पण के मूल्यों की अमर गाथा हम सबके लिए ये प्रस्तुत की। यही कारण था कि 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज हो या 19वीं, 20वीं शताब्दी के राष्ट्र के क्रांतिकारियों ने उनसे प्रेरणा प्राप्त की। महाराणा प्रताप के जीवन से हमें अनुशासन, ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के जिन मूल्यों की शिक्षा मिलती है वो ही आपको जीवन में सफल बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षण संस्थान में आप इन मूल्यों और संस्कारों को प्राप्त कर रहे हैं।  अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि देशभक्ति केवल देश की सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं, इमानदारी से अपने कर्यव्यों का निर्वहन करने, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनान सच्ची देशभक्ति हैं। अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सेना भी ऐसे नौजवानों को चुनती है जो जीवन में अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यपालन को सर्वोपरी मानते हैं। अनुशासन ही सफलात की सीढ़ी है। उन्होंने शिक्षा परिषद की प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं को भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया और कहा की हार और जीत निर्णायक नहीं है प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करना सबसे जरूरी है। असफलता से निराश होने की जरूरत नहीं है, असफलता ही हमें सफलता का मार्ग दिखाती है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर के जीवन का प्रसंग और परिणाम की चिंता किए बगैर कर्व्यपालन करने के भागवत् गीता के श्लोक – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् को अनुकरणीय बताया। साथ ही उन्होंने तेजी से बदल रही तकनीकि, एआई, रोबोटिक्स के प्रति भी छात्रों को सजग रहने को कहा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में केवल एक मजबूत चरित्र और सही तकनीक की समझ ही सफलता दिलाएगी। लेकिन हमें ये याद रखना है कि विजय मैदान में नहीं मन पर होती है, शक्ति हथियार में नहीं संस्कार में होती है।

UPPSC भर्ती 2025: 513 लेक्चरर पदों पर आवेदन शुरू, तकनीकी स्नातकों के लिए बड़ा मौका

लखनऊ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी भर्ती की घोषणा की है। आयोग ने उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा (अध्यापन) सेवा परीक्षा-2025 के तहत पॉलीटेक्निक संस्थानों में लेक्चरर और अन्य समकक्ष पदों के लिए 513 रिक्तियों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक सुनहरा मौका है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 2 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार जल्द से जल्द आवेदन करके इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। यह भर्ती कुल 513 पदों के लिए हो रही है। इन पदों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, कंप्यूटर, आर्किटेक्चर, फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित जैसे विभिन्न विषय शामिल हैं। आवेदन शुरू होने की तिथि: 2 दिसंबर 2025 आवेदन और फीस जमा करने की अंतिम तिथि: 2 जनवरी 2026 आवेदन में सुधार की अंतिम तिथि: 9 जनवरी 2026 इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि से पहले UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर अपना आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इन पदों पर आवेदन करने के लिए अलग-अलग विषयों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता भी अलग-अलग निर्धारित की गई है। इंजीनियरिंग/टेक्निकल ब्रांच के लेक्चरर: उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में फर्स्ट क्लास के साथ बी.ई./बी.टेक. या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए। कुछ पदों के लिए मास्टर डिग्री भी आवश्यक है। नॉन-इंजीनियरिंग (साइंस एवं ह्यूमैनिटीज) लेक्चरर: संबंधित विषय में फर्स्ट क्लास के साथ मास्टर डिग्री (जैसे फिजिक्स, केमिस्ट्री, अंग्रेजी, गणित)। आयु सीमा: उम्मीदवारों की आयु 1 जुलाई 2025 तक 21 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया और वेतन लेक्चरर के पदों पर चयन मुख्य रूप से तीन चरणों में होगा। लिखित परीक्षा : यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इंटरव्यू: लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को 100 अंकों के इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: अंतिम चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के आधार पर होगा। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के तहत आकर्षक वेतनमान दिया जाएगा। शुरुआती वेतन लगभग 56,100 रुपये से 57,700 रुपये प्रति माह (पे लेवल 9A/10) तक होगा, जिसके साथ अन्य सरकारी भत्ते भी मिलेंगे। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें ताकि वे सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों।