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शिक्षकों को पोस्टिंग में बड़ी राहत, सम्राट चौधरी बोले- अब पढ़ाई पर कोई समझौता नहीं

 पटना बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक बेहद सख्त बयान सामने आया है। कैमूर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ लहजे में शिक्षकों को चेतावनी दी है कि सरकार उनकी सुविधाओं का पूरा ख्याल रख रही है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शिक्षकों के ट्रांसफर नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि "ट्रांसफर जहां कराना है, करा लीजिए, लेकिन पढ़ाना तो पड़ेगा। कोई बहाना नहीं चलेगा।" मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से साफ है कि सरकार अब राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पूरी तरह से एक्शन मोड में है और लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर गाज गिरना तय है। शिक्षकों को पोस्टिंग की बड़ी राहत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षकों की सहूलियत के लिए ट्रांसफर के नियमों को काफी आसान बनाया है। उन्होंने कहा, "शिक्षकों के लिए हम लोगों ने तय किया है कि आप अपने गांव के बिल्कुल बगल में चले जाइए, इसमें सरकार को कोई दिक्कत नहीं है।" उन्होंने महिला शिक्षिकाओं के लिए कहा कि जो हमारी बहनें शिक्षिका हैं, उन्हें उनके घर या गांव के ठीक बगल वाले पंचायत में ही पढ़ाने के लिए पोस्टिंग दी जाएगी। वहीं, जो हमारे भाई शिक्षक हैं, उन्हें भी ज्यादा दूर न भेजकर उनके बगल वाले प्रखंड में ही काम करने का अवसर दिया जाएगा। सम्राट चौधरी बोले- 'पढ़ाने के लिए अब कोई एक्सक्यूज नहीं मिलेगा' शिक्षकों को बड़ी राहत देने के साथ ही मुख्यमंत्री ने अपनी दूसरी शर्त भी बेहद कड़े शब्दों में सामने रख दी। उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, "बगल के पंचायत और प्रखंड में पोस्टिंग तो मैं दे दूंगा, लेकिन पढ़ाना तो आपको हर हाल में पड़ेगा। अब पढ़ाने के लिए किसी भी तरह का कोई एक्सक्यूज नहीं मिलेगा।" उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे पूरी निष्ठा से स्कूल जाएं, बच्चों को पढ़ाएं और बिहार के भविष्य को आगे बढ़ाने का काम करें। मुख्यमंत्री ने राज्य में हुए ढांचागत बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि आज बिहार की पूरी स्कूल व्यवस्था बदल चुकी है और लगभग 75 हजार सरकारी स्कूलों को खोला व सुधारा जा चुका है। अब सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और किसान के बच्चों को देश की सबसे बेहतरीन शिक्षा मिल सके।

संवेदनशील पहल से बदली दाखू देवी की जिंदगी, मिली सरकारी योजनाओं की सौगात

जैसलमेर जैसलमेर जिले की राजमथाई ग्राम पंचायत निवासी दाखू देवी जोगी पूर्व में हुई एक भीषण आगजनी की घटना में लगभग 75 प्रतिशत तक झुलस गई थी। इस दुर्घटना में उनका चेहरा एवं हाथों की उंगलियां भी गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थी। शारीरिक स्थिति के कारण उनका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा था, जिसके चलते वे विभिन्न सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के लाभ से वंचित थी।  पहले पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी की उपस्थिति में पंचायत समिति भणियाणा के विकास अधिकारी हनुमान राम ने दाखू देवी की समस्या का समाधान करने का संकल्प लिया था। इसके बाद उन्होंने अपने निजी वाहन से दाखू देवी को पांच बार जोधपुर ले जाकर आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण करवाईं। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप दाखू देवी का आधार कार्ड,जन आधार कार्ड एवं बैंक खाता बनवाया गया एवं उनकी वृद्धावस्था पेंशन भी स्वीकृत करवाई गई। ग्राम पंचायत राजमथाई में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी ने दाखू देवी को पेंशन पीपीओ सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रदान किए।  दस्तावेज प्राप्त कर भावुक हुई दाखू देवी ने कहा कि अब उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा और उनका जीवन पहले से अधिक सुरक्षित एवं सम्मानजनक बनेगा। उन्होंने पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी, विकास अधिकारी हनुमान राम, ग्राम विकास अधिकारी भीमदान चारण तथा वरिष्ठ सहायक राणा राम गौरा सहित सभी संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों का आभार व्यक्त किया।   दाखू देवी की यह सच्ची कहानी दर्शाती है कि यदि प्रशासन संवेदनशीलता, समर्पण और जनसेवा की भावना के साथ कार्य करे तो कठिन से कठिन समस्या का समाधान संभव है।

सामूहिक विवाह से सामाजिक बदलाव की मिसाल बना जगदलपुर, 17 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे

जगदलपुर. जगदलपुर के टाउन हॉल में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह सिर्फ शादी का कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 17 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे. वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच समारोह संपन्न हुआ. कार्यक्रम की सबसे खास तस्वीर दो पूर्व नक्सली जोड़ों की रही. आत्मसमर्पण के बाद दोनों जोड़ों ने गृहस्थ जीवन की नई शुरुआत की. यह कदम पुनर्वास नीति की सफलता के रूप में देखा जा रहा है. योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ा सहारा बन रही है. बेटियों के विवाह का आर्थिक बोझ कम करने में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है. समारोह में नवदंपत्तियों को सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया गया. जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की. बस्तर में शांति और सामाजिक समरसता का संदेश इस आयोजन से स्पष्ट दिखाई दिया. मुख्यधारा से जुड़ने की यह कहानी क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा पर त्वरित कार्रवाई, ग्रामीणों की मांगों को मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा पर त्वरित अमल, ग्रामीणों की मांगों को मिली स्वीकृति सुशासन तिहार में किए गए वादे हो रहे पूरे, पंचायत भवन, पीडीएस भवन और मुक्तिधाम निर्माण को मिली मंजूरी रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार केवल जनसंवाद का मंच नहीं, बल्कि जनआकांक्षाओं को शीघ्रता से पूरा करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों की समस्याओं और मांगों के त्वरित निराकरण के लिए राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा सरगुजा प्रवास के दौरान ग्रामीणों की मांगों पर की गई घोषणाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर अमल में लाया गया है। उल्लेखनीय है कि 03 मई 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन तिहार के अंतर्गत सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत सिलमा के शांतिपारा पहुंचे थे। जन चौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उन्होंने क्षेत्र की आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली तथा विभिन्न विकास कार्यों की घोषणाएं की थीं। मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुरूप जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न निर्माण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की है। ग्राम सिलमा में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन, डीएमएफ मद से 2.50 लाख रुपये की लागत से मुक्तिधाम तथा मनरेगा मद से 11.63 लाख रुपये की लागत से नवीन पीडीएस भवन निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसी प्रकार ग्राम कुनकुरीकला में डीएमएफ एवं मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणाओं पर त्वरित अमल के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया है। उनका कहना है कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन और प्रशासन सीधे जनता तक पहुंचकर न केवल समस्याएं सुन रहा है, बल्कि उनके समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित कर रहा है। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त मांगों और जनसमस्याओं के निराकरण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे विकास कार्यों का लाभ समय पर आमजन तक पहुंच रहा है और सुशासन की अवधारणा जमीनी स्तर पर साकार हो रही है।

रामायण वाटिका उद्घाटन समेत 1088 विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास करेंगे योगी

बरेली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित बरेली दौरे को लेकर लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यक्रमों की सूची लगभग फाइनल हो चुकी है। सीएम के हाथों करीब चार हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कराया जाएगा। इसमें 3530.75 करोड़ के 1,013 कामों का शिलान्यास और 534.49 करोड़ के 75 कामों का लोकार्पण शामिल है। दौर की तिथि अभी निश्चित नहीं हुई है, लेकिन 20 जून के आसपास उनके आने की संभावना है। जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री मुरादाबाद में जनसभा को संबोधित करने के बाद बरेली आ सकते हैं। सर्किट हाउस में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ मंडलीय समीक्षा बैठक के बाद वह बरेली कॉलेज में जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद शाम को रामायण वाटिका का उद्घाटन करेंगे। वहां लेजर शो के बीच वाटिका का भ्रमण करेंगे। जिले में रात्रि विश्राम के बाद सुबह वह शाहजहांपुर जा सकते हैं। वहां भी जनसभा प्रस्तावित है। रामगंगा नगर में रामायण वाटिका का विकास बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की ओर से कराया गया है। 33 हजार वर्गमीटर में बनी इस वाटिका पर बीडीए ने 46 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। दौरे को देखते हुए बीडीए ने रामगंगानगर के ट्री-गार्डों को भगवा रंग में रंग दिया है। सोमवार को भी रामायण वाटिका में बीडीए की टीम लगी रही। नगर निगम की ओर से सड़कों की मरम्मत भी शुरू करा दी गई है। पीलीभीत बाइपास के गड्ढों को भरा जा रहा है। प्रमुख सचिव ने परखीं तैयारियां मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले सोमवार को प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास एवं ग्रामीण अभियंत्रण विभाग व नोडल अधिकारी सौरभ बाबू ने अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों को परखा। कलक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा बैठक में विभिन्न योजनाओं और राजस्व से जुड़े कार्यों की जानकारी ली।  कहा कि जिन परियोजनाओं पर काम चल रहा है और 90 फीसदी से ज्यादा निर्माण हो चुका है उसे जल्दी पूरा कराएं। जो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, उन्हें हस्तांतरित किया जाए।   छात्रवृत्ति, निराश्रित महिला पेंशन, दिव्यांग पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन योजना की समीक्षा कर पात्रों को इसके दायरे में लाने के निर्देश दिए। बिजली निगम की समीक्षा में बताया गया कि ट्रांसफार्मरों के खराब होने की शिकायत मिलने पर शहर में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 72 घंटे में उन्हें बदला जा रहा है। निर्देश दिए कि पात्रों को ही आवास योजनाओं का लाभ दिया जाए। जल जीवन मिशन, फैमिली आईडी की भी समीक्षा की। बैठक में डीएम अविनाश सिंह, सीडीओ देवयानी, नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य व अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के बाद उन्होंने सीबीगंज में निर्माणाधीन आईटी पार्क का निरीक्षण किया। कार्यदायी संस्था को शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कार्य कराने की हिदायत दी। मीरगंज के सिधौली में निर्माणाधीन आईटीआई परिसर का जायजा लिया। झुमका चौराहा के पास स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला और लोक निर्माण विभाग की ओर से निर्मित 19.5 किलोमीटर लंबे मीरगंज-सहोड़ा वाया सिहोर मार्ग का भी जायजा लिया।  

परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए पटना-गया समेत कई रूटों पर परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू

गयाजी  पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले हजारों अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए पूर्व मध्य रेल ने 16 और 17 जून को कई परीक्षा स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की घोषणा की है। इन विशेष ट्रेनों का उद्देश्य अभ्यर्थियों को समय पर और सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाना है। गया जंक्शन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा, जिससे मगध क्षेत्र के परीक्षार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। सुबह 7:15 बजे पटना से चलकर गया पहुंचेगी रेलवे द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 17 जून को पटना-गया परीक्षा स्पेशल सुबह 7:15 बजे पटना से चलकर गया पहुंचेगी। वहीं परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों की वापसी के लिए गया-किऊल स्पेशल शाम 5:30 बजे गया से खुलेगी, जो नवादा और शेखपुरा होते हुए किऊल तक जाएगी। इसके अलावा किऊल से गया के लिए भी दोपहर 12:30 बजे विशेष ट्रेन का संचालन होगा। यह ट्रेन शेखपुरा और नवादा के रास्ते गया पहुंचेगी। इससे नवादा, शेखपुरा और किऊल क्षेत्र के अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक आने-जाने में सहूलियत होगी। बख्तियारपुर-राजगीर स्पेशल सुबह 8 बजे राजगीर और बिहारशरीफ क्षेत्र के अभ्यर्थियों के लिए भी रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। बख्तियारपुर-राजगीर स्पेशल सुबह 8 बजे तथा दोपहर 3:30 बजे चलाई जाएगी, जबकि राजगीर-बख्तियारपुर स्पेशल दोपहर 1 बजे और शाम 6:15 बजे रवाना होगी। ये ट्रेनें बिहारशरीफ और नालंदा होकर गुजरेंगी, जिससे नालंदा जिले के अभ्यर्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार परीक्षा के दौरान सामान्य ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए इन विशेष ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। इससे अभ्यर्थियों को यात्रा के दौरान अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकेंगे। अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पूर्व मध्य रेल ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का अधिक से अधिक उपयोग करें तथा यात्रा के दौरान रेलवे के नियमों का पालन करें। रेलवे प्रशासन ने स्टेशनों पर अतिरिक्त निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सहायता केंद्रों की भी व्यवस्था की है। पुलिस भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में युवाओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए रेलवे की यह पहल न केवल भीड़ प्रबंधन में मददगार होगी, बल्कि अभ्यर्थियों की यात्रा को भी आसान बनाएगी। गया जंक्शन सहित मगध क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों पर इन विशेष ट्रेनों को लेकर परीक्षार्थियों में उत्साह देखा जा रहा है। गया से जुड़ी प्रमुख परीक्षा स्पेशल ट्रेनें     पटना – गया स्पेशल : 17 जून, सुबह 7:15 बजे     किऊल – गया स्पेशल : 17 जून, दोपहर 12:30 बजे     गया – किऊल स्पेशल : 17 जून, शाम 5:30 बजे     पटना – भभुआ स्पेशल : गया होकर संचालित, 16 जून रात 11:30 बजे  

डॉ. वर्णिका शर्मा की पहल रंग लाई, गंभीर रूप से बीमार बालिका को एम्स रायपुर में मिला उपचार

 डॉ .वर्णिका शर्मा की पहल से गंभीर रूप से बीमार बालिका को मिला एम्स रायपुर में उपचार     डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर में भर्ती बालिका से की मुलाकात, चिकित्सकों से ली उपचार की विस्तृत जानकारी*  रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा गंभीर रूप से बीमार नाबालिग बालिका जोगेश्वरी कड़की के प्रकरण का संज्ञान लेते हुए उसके बेहतर उपचार हेतु लगातार पहल की गई, जिसके परिणामस्वरूप बालिका को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में उपचार हेतु भर्ती कराया गया है। उल्लेखनीय है कि बालिका की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी प्राप्त होने पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने दिनांक 05 जून 2026 को कलेक्टर, दंतेवाड़ा को पत्र प्रेषित कर बालिका को बेहतर उपचार हेतु तत्काल एम्स रायपुर भेजने तथा आवश्यक चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उक्त पत्र की प्रतिलिपि जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ), दंतेवाड़ा को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई थी। इसके अतिरिक्त डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा एम्स रायपुर के डायरेक्टर को भी पत्र लिखकर बालिका को समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने तथा आवश्यक चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया था। आयोग के सतत प्रयासों, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के समन्वय से बालिका को उपचार हेतु एम्स रायपुर लाया गया। दिनांक 15 जून 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा स्वयं एम्स रायपुर पहुंचीं और उपचाररत बालिका से मुलाकात कर उसका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने बालिका एवं उसके परिजनों से चर्चा कर स्वास्थ्य स्थिति, उपचार संबंधी व्यवस्थाओं तथा उनकी आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। दौरे के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं संबंधित चिकित्सक दल से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बालिका की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उपचार की प्रगति, किए जा रहे चिकित्सकीय परीक्षणों तथा आगामी उपचार योजना के संबंध में जानकारी प्राप्त की। चिकित्सकों ने अवगत कराया कि बालिका को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। इस अवसर पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने चिकित्सकीय दल से बालिका के उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहने देने तथा उसे सर्वोत्तम संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बालिका के स्वास्थ्य एवं उपचार से जुड़ा यह मामला आयोग की प्राथमिकता में है तथा आयोग द्वारा उपचार प्रक्रिया की सतत निगरानी की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग एवं समन्वय उपलब्ध कराया जाएगा। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होना उसका अधिकार है तथा छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों के अधिकारों की रक्षा एवं उनके समग्र कल्याण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

जेएसबीसीएल पर भुगतान संकट, उद्योग संगठनों ने जताई चिंता

रांची  झारखंड में शराब आपूर्ति कंपनियों का झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) पर 200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। अल्कोहलिक वेबरेजेज उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों ने इसपर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि राज्य में शराब आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यह बकाया भुगतान 31 अगस्त 2025 तक की गई शराब की आपूर्ति से संबंधित है। करीब नौ महीने के बाद भी बकाया भुगतान नहीं होने से शराब आपूर्ति कंपनियां ऋण लेकर शराब की आपूर्ति कर रही है। लंबित भुगतानों को तत्काल जारी करें अल्कोहलिक पेय उद्योग के प्रमुख संगठन कनफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (सीआईएबीसी), ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) तथा इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसडब्ल्यूएआई) ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि अल्कोहलिक बेवरेजेज आपूर्ति संकट को टालने के लिए लंबित भुगतानों को तत्काल जारी करें। देश में बिकने वाली शराब, बीयर व वाइन की कुल बिक्री का 80 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधित्व इन्हीं तीनों कंपनियों के माध्यम से होता है। बकाया का 35 प्रतिशत भुगताव राज्य सरकार की कंपनी जेएसबीसीएल ने फरवरी 2026 में कुल बकाया राशि का लगभग 35 प्रतिशत आंशिक भुगतान जारी किया था, लेकिन नौ महीने से अधिक समय से लंबित 200 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी राशि का भुगतान अब तक लंबित है। भुगतान में देरी के चलते शराब आपूर्ति कंपनियों की बैलेंस शीट में प्राप्तियों का बड़ा बोझ जमा हो गया है।  

कांग्रेस संगठन में अनुशासन पर जोर, अनुमति के बिना कार्यक्रमों पर लगी रोक

चंडीगढ़. हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर चल रहा विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एचपीसीसी) अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने पार्टी नेताओं व पदाधिकारियों को चेतावनी पत्र जारी कर प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद के पूर्व के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करने को कहा है। इस नए पत्र के बाद कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और संगठन बनाम जनप्रतिनिधि की खींचतान तेज होने की संभावना बढ़ गई है। कांग्रेस कार्यालय से लेनी होगी अनुमति राव नरेंद्र सिंह ने सोमवार को पत्र जारी कर याद दिलाया कि प्रदेश में किसी भी धरना, प्रदर्शन, रैली, अनशन या अन्य राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन से पहले प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके साथ ही कार्यक्रमों में लगाए जाने वाले बैनर, पोस्टर और प्रचार सामग्री में नेताओं के चित्र भी संगठनात्मक वरिष्ठता और प्रोटोकॉल के अनुसार ही लगाने होंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले उसकी सूचना जिलाध्यक्षों के माध्यम से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में भेजनी होगी। जानकारों का मानना है कि राव नरेंद्र सिंह के इस नए पत्र के बाद अंदरूनी खींचतान को नया मुद्दा मिल सकता है।

सुरक्षा याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, परिवार से भागना बदनामी का कारण

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले एक जोड़े की सुरक्षा याचिका खारिज करते हुए कहा है कि इस तरह के संबंध ‘आधुनिक जीवनशैली’ का हिस्सा हैं, जो पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव में समाज के कुछ वर्गों में अपनाए जा रहे हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि माता-पिता के घर से बच्चों का भागना परिवार की ‘बदनामी’ का कारण बनता है। न्यायमूर्ति संदीप मोदगिल की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि विवाह एक पवित्र संबंध है, जिसे भारत में सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर अत्यधिक सम्मान प्राप्त है। जोड़े का दावा: परिवार कर रहा परेशान अदालत ने कहा कि देश की सांस्कृतिक परंपराओं में नैतिकता और आचार-विचार का विशेष महत्व है, जबकि समय के साथ कुछ लोगों ने लिव-इन रिलेशनशिप को अपनाना शुरू किया है। याचिका में जोड़े ने दावा किया था कि वे दोनों बालिग हैं, एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और भविष्य में विवाह करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे वर्तमान में साथ रह रहे हैं और उनके परिजनों द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है, लेकिन साथ ही यह भी टिप्पणी की कि माता-पिता के घर से भागना उनके सम्मान और गरिमा को प्रभावित करता है। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लिव-इन संबंधों को वैधता तभी मिलती है जब दोनों पक्ष विवाह योग्य हों, अविवाहित हों और समाज के सामने स्वयं को पति-पत्नी के रूप में प्रस्तुत करते हों। न्यायालय ने यह भी कहा कि केवल कुछ दिनों तक साथ रहने के आधार पर किसी संबंध को लिव-इन मान लेना पर्याप्त नहीं है। अदालत के अनुसार, ऐसे मामलों में पुलिस सुरक्षा देना सामाजिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है और इसे अनुचित माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी रिश्ते को लिव-इन रिलेशनशिप के रूप में स्वीकार करने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें होती हैं. दोनों पक्ष विवाह योग्य आयु के होने चाहिए, अविवाहित होने चाहिए और समाज के सामने खुद को पति-पत्नी जैसे रिश्ते में प्रस्तुत करना चाहिए. अदालत ने पाया कि याचिका में स्वयं कहा गया है कि एक पक्ष अभी विवाह योग्य आयु तक नहीं पहुंचा है और भविष्य में विवाह करने की बात कही गई है।  हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कुछ दिनों तक साथ रहने भर से किसी रिश्ते को वैध लिव-इन रिलेशनशिप नहीं माना जा सकता. सिर्फ एक सामान्य दावा कर देने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दोनों वास्तव में ऐसे रिश्ते में हैं, जिसे कानूनी मान्यता दी जा सके. अदालत ने कहा कि किसी रिश्ते को वैधानिक स्वीकार्यता देने के लिए निर्धारित शर्तों का पूरा होना जरूरी है।  जस्टिस मौदगिल ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में पुलिस सुरक्षा का आदेश देना अप्रत्यक्ष रूप से एक अवैध या गैर-मान्यता प्राप्त रिश्ते को स्वीकृति देने जैसा हो सकता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान द्वारा दी गई स्वतंत्रता पूर्णतः निरंकुश नहीं है और उसे कानून की सीमाओं के भीतर ही लागू किया जा सकता है. इन्हीं आधारों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन कपल की सुरक्षा याचिका खारिज कर दी और पुलिस संरक्षण देने से इनकार कर दिया।