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विवाह प्रोत्साहन योजना: 9 वर्षों में 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को मिला लाभ, 2026-27 में अब तक 18 जोड़ों को सहायता

लखनऊ। योगी सरकार दिव्यांगजनों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक योजना के अंतर्गत 18 दिव्यांग दंपत्तियों को लाभान्वित किया गया है। योजना के लिए 2.64 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके सापेक्ष 4.55 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।  सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके वैवाहिक जीवन को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। ऑनलाइन संचालित योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित की जा रही है। योजना के तहत न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले दिव्यांग दंपत्तियों को उनकी दिव्यांगता की स्थिति के आधार पर 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत यदि दंपत्ति में युवक दिव्यांग है तो 15 हजार रुपये, युवती दिव्यांग है तो 20 हजार रुपये तथा युवक और युवती दोनों दिव्यांग हैं तो 35 हजार रुपये की धनराशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाती है। योजना का संचालन ऑनलाइन किया जा रहा है और लाभार्थियों को पीएफएमएस के माध्यम से ई-पेमेंट द्वारा सीधे लाभान्वित किया जाता है। अबतक 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को मिला लाभ योगी सरकार की इस संवेदनशील पहल का लाभ बड़ी संख्या में दिव्यांग दंपत्तियों तक पहुंच रहा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक कुल 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 805 दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया गया। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक है योजना दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने कहा कि शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना दिव्यांगजनों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन के साथ उनके वैवाहिक जीवन में भी आर्थिक संबल उपलब्ध कराना है। डॉ. राय ने कहा कि योजना से बड़ी संख्या में दिव्यांग दंपत्तियों को लाभ मिल रहा है।

उत्पादन से मूल्य संवर्धन तक फोकस, उद्यानिकी विकास पर नीति संवाद

उत्पादन से मूल्य संवर्धन तक : उद्यानिकी को नई ऊंचाई देने की तैयारी, किसानों की आय बढ़ाने पर नीति संवाद में मंथन भोपाल  मध्यप्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय संग्रहण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बाजार संपर्क और निर्यात से जोड़कर मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित करने की दिशा में राज्य नीति आयोग ने व्यापक नीति संवाद आयोजित किया। भोपाल के एमपीटी होटल पलाश रेजीडेंसी स्थित विमर्श सभागार में आयोजित एक दिवसीय “Strengthening Horticulture Value Chains in Madhya Pradesh” संवाद में शासन, कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति विशेषज्ञों, कृषक उत्पादक संगठनों (FPO), वित्तीय संस्थानों, उद्योग प्रतिनिधियों और तकनीकी संस्थाओं ने किसानों को उत्पादन का बेहतर मूल्य दिलाने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ाने के उपायों पर मंथन किया। कार्यक्रम का आरंभ “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” पर आधारित लघु फिल्म के प्रदर्शन से हुआ। उद्घाटन सत्र में मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वरौचिष सोमवंशी, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्रीमन शुक्ला, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित तथा कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता ने उद्यानिकी क्षेत्र की संभावनाओं और आगामी नीति की प्राथमिकताओं पर विचार रखे। अब लक्ष्य अधिक उत्पादन नहीं, अधिक मूल्य किसानों तक पहुंचाना राज्य नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वरौचिष सोमवंशी ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्यानिकी का विस्तार उल्लेखनीय स्तर तक पहुंच चुका है। अब अगले चरण में उत्पादन बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उत्पाद से बनने वाले अधिकतम मूल्य का लाभ किसान तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग 13.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 259.86 लाख मीट्रिक टन सब्जियों तथा लगभग 4.80 लाख हेक्टेयर में 102.07 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन हुआ। पिछले पांच वर्षों के औसत वार्षिक उत्पादन में केला 23.24 लाख मीट्रिक टन, आम 8.92 लाख मीट्रिक टन और संतरा 22.07 लाख मीट्रिक टन रहा है। उन्होंने कहा कि कृषकों के संगठन, मजबूत शीत श्रृंखला, आधुनिक प्रसंस्करण, ब्रांडिंग तथा विभिन्न योजनाओं और वित्तीय साधनों के बेहतर समन्वय से उद्यानिकी उत्पादों की वास्तविक आर्थिक क्षमता का उपयोग किया जा सकता है। मालवा सहित विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट फसलों को मिले बाजार योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्रीमन शुक्ला ने कहा कि उद्यानिकी मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, विशेषकर मालवा क्षेत्र में कई विशिष्ट उद्यानिकी फसलों के लिए प्राकृतिक अनुकूलता उपलब्ध है। आवश्यकता इस बात की है कि इन फसलों को केवल खेत से मंडी तक पहुंचाने के बजाय प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़कर मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि उत्पादन आधारित व्यवस्था से मूल्य श्रृंखला आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ने से कटाई के बाद तत्काल बिक्री का दबाव कम होगा और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने जिला-स्तरीय आंकड़ों, FPO की क्षमता और फसल समूहों के आधार पर सार्वजनिक एवं निजी निवेश को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। शोध, तकनीक और उद्योग के समन्वय पर जोर प्रो. राजीव दीक्षित ने कहा कि खेत से बाजार तक मौजूद कमियों को दूर करने के लिए सुदृढ़ नीति अनुसंधान, तकनीकी परीक्षण और संस्थागत क्षमता निर्माण जरूरी है। उन्होंने उद्यानिकी क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों को साझा मंच पर लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान ने उद्यानिकी क्षेत्र से जुड़े नौ विशेषज्ञ संस्थानों के साथ सहभागिता स्थापित की है। आगे फसल एवं विषय-विशेष आधारित सत्रों के माध्यम से क्षेत्रीय चुनौतियों और नए अवसरों पर कार्य किया जाएगा। कुल कृषि क्षेत्र का 9 प्रतिशत, राष्ट्रीय उद्यानिकी क्षेत्र में 16 प्रतिशत हिस्सेदारी कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता ने कहा कि उद्यानिकी को पारंपरिक कृषि से आगे बढ़ाकर उच्च मूल्य आधारित कृषि और प्रसंस्करण से जोड़ना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र का लगभग 9 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय उद्यानिकी क्षेत्र में मध्यप्रदेश का योगदान लगभग 16 प्रतिशत है। उन्होंने शोध संस्थानों, नीति विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जिला-वार चुनौतियों की पहचान कर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज एवं रोपण सामग्री, उच्च तकनीक नर्सरी, बीज प्रक्षेत्रों के उन्नयन और समूह आधारित प्रसंस्करण संरचना के विस्तार को महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया। 28.60 लाख हेक्टेयर से 438.05 लाख मीट्रिक टन उद्यानिकी उत्पादन नीति संवाद में बताया गया कि मध्यप्रदेश वर्तमान में कुल उद्यानिकी उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में है। प्रदेश में लगभग 28.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 438.05 लाख मीट्रिक टन वार्षिक उद्यानिकी उत्पादन हो रहा है। ऐसे में उत्पादन के बाद की व्यवस्थाओं को मजबूत करना किसानों की आय और बाजार प्रतिस्पर्धा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। चर्चा में शीत भंडारण, पैक हाउस, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण, FPO की क्षमता, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, ट्रेसबिलिटी और निर्यात मानकों से संबंधित मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद की गुणवत्ता और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। मंडी स्तर पर ग्रेडिंग से लेकर सौर प्रसंस्करण तक आए सुझाव दिनभर चली चर्चा में छंटाई, ग्रेडिंग और गुणवत्ता आधारित मूल्य निर्धारण को मंडी स्तर पर बढ़ावा देने, कृषि अवसंरचना कोष से संबंधित प्रकरणों के समाधान के लिए विभागीय समन्वय मजबूत करने तथा उद्यानिकी कार्यालयों और FPO तक डिजिटल सहायता पहुंचाने के सुझाव सामने आए। इसके साथ ही उच्च मूल्य वाली मसाला फसलों के लिए सहायता प्रावधानों की समीक्षा तथा कम लागत वाली शीत परिवहन और सौर आधारित प्रसंस्करण तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। नीति संवाद का उद्देश्य प्राथमिक फसल मूल्य श्रृंखलाओं की पहचान, शासन-FPO-तकनीकी संस्थानों-निजी क्षेत्र की भूमिकाओं को स्पष्ट करना तथा योजनाओं के बेहतर समन्वय के माध्यम से राज्य की उद्यानिकी नीति और आगामी बजट प्रक्रिया के लिए क्रियान्वयन योग्य सुझाव तैयार करना रहा। समापन अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग की सलाहकार डॉ. आकांक्षा चंद ने दिनभर हुई चर्चा और प्रमुख सुझावों का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संवाद से प्राप्त नीतिगत अनुशंसाओं को राज्य शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि नीति निर्माण और बजट संबंधी प्रक्रिया में उनका समुचित उपयोग किया जा … Read more

नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

सेवा का संकल्प, विकास की धार नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली ​रायपुर        जब सुबह की शुरुआत पानी जुटाने की चिंता से न होकर एक नए आत्मविश्वास और सुविधा के साथ हो, तो समझ लेना चाहिए कि विकास ज़मीन पर उतर चुका है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित पंडरवाही गांव में आज यह सुखद बदलाव हर घर की देहरी पर साफ़ महसूस किया जा सकता है। अंगीरा ऋषि पर्वत की मनमोहक वादियों और बालका नदी के प्राकृतिक आंचल में बसे इस गांव में कभी पानी के लिए मीलों पैदल चलने और घंटों इंतज़ार करने की मजबूरी थी। लेकिन आज 'सेवा संकल्प अभियान' और जल जीवन मिशन के सशक्त संयोजन ने यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। गांव के 94 परिवारों के घरों तक नल कनेक्शन पहुँचने से अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल ग्रामीणों की दिनचर्या का एक सहज और सम्मानजनक हिस्सा बन गया है।         ​पंडरवाही में पहले प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध होने के बावजूद, विशेषकर गर्मी के दिनों में, पानी का प्रबंध करना एक गंभीर चुनौती हुआ करता था। इसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ता था, जिनकी सुबह और शाम का बहुमूल्य समय भारी बर्तन ढोने और पानी की कतारों में ही बीत जाता था। गांव की निवासी सुपेन बाई और सुशीला बाई बताती हैं कि अब घर-आंगन में ही नल लग जाने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहद आसान हो गई है। पानी लाने में जो श्रम और समय नष्ट होता था, अब उसका उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में कर रही हैं। इसके साथ ही, पानी भरने की जिम्मेदारी से मुक्त होकर बच्चे भी अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं, जिससे उनके सुनहरे भविष्य की नींव मजबूत हो रही है।         ​यहाँ यह योजना केवल नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जलापूर्ति को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था भी तैयार की गई है। स्थानीय पंप ऑपरेटर चुमन पटेल निर्धारित समय पर मोटर चलाकर ओवरहेड टैंक भरते हैं और जलापूर्ति की हर जानकारी 'मेरी पंचायत' ऐप पर दर्ज करते हैं। इसके अलावा, पाइपलाइन या मोटर में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसके तुरंत निवारण के लिए ग्रामीणों को सीधे संपर्क की सुविधा दी गई है, जो प्रशासनिक सजगता और जन-भागीदारी की एक मिसाल पेश करता है।       ​घर-घर नल से जल पहुँचने का सीधा प्रभाव गांव की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ़ दिखाई दे रहा है। नियमित जल उपलब्धता से व्यक्तिगत स्वच्छता, घरेलू साफ़-सफाई और बीमारियों से बचाव में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। पंडरवाही की यह सफलता दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की असली उपलब्धि केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए गुणात्मक सुधार में निहित है। आज पंडरवाही के घरों में नल से बहती पानी की धार केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि बदली हुई दिनचर्या, बचे हुए समय और छत्तीसगढ़ में सुशासन के एक नए और बेहतर कल का प्रतीक बन चुकी है।

उन्नत नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन से बदली परदेशी की किस्मत

सफलता की कहानी उन्नत नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन से बदली परदेशी की किस्मत अब सालाना कमाई 10 लाख रुपए पार रायपुर      सेवा, संकल्प और समर्पण जब शासकीय योजनाओं से जुड़ते हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी जाती है। कुछ वर्ष पहले तक केवल 8 से 10 देशी गायों के सहारे प्रतिदिन महज 15 से 20 लीटर दूध का उत्पादन करने वाले सारंगढ़ तहसील के ग्राम खुड़डेना निवासी किसान परदेशी लाल चंद्रा आज एक सफल और समृद्ध डेयरी उद्यमी बनकर उभरे हैं। शुरुआती दिनों में कम दूध उत्पादन और पशुओं की अचानक होने वाली बीमारियों या मृत्यु से परिवार को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, जिसके कारण उनकी आमदनी भी बेहद सीमित थी। ऐसे मुश्किल समय में राज्य सरकार का राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम उनके लिए वरदान साबित हुआ। पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने अपनी गायों में कृत्रिम गर्भाधान के जरिए नस्ल सुधार की शुरुआत की, जिसके सुखद परिणामस्वरूप आज उनके पास उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली एचएफ (Holstein Friesian) क्रॉसब्रीड गायें तैयार हो चुकी हैं।        ​वर्तमान में परदेशी लाल चंद्रा के पास 6 उन्नत एचएफ क्रॉसब्रीड गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 65 से 70 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध को वे स्थानीय निजी होटलों और उपभोक्ताओं को 40 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचते हैं, जिससे उन्हें रोजाना लगभग 2,600 से 2,800 रुपए की आमदनी होती है। इस तरह दूध बिक्री से उनकी मासिक आय 78,000 से 84,000 रुपए और वार्षिक आय बढ़कर 9.36 लाख से 10.08 लाख रुपए तक पहुँच चुकी है। जो पशुपालन कभी परिवार के लिए केवल एक पूरक आय का जरिया था, आज वही उनकी मुख्य आजीविका और आर्थिक मजबूती का ठोस आधार बन गया है।       ​भविष्य की आय को सुरक्षित करने के लिए उनके पास वर्तमान में 2 एचएफ क्रॉस, 2 जर्सी क्रॉस और 2 साहीवाल क्रॉस की कुल 6 उन्नत बछिया तैयार हो रही हैं, जो आने वाले दिनों में दूध उत्पादन और आय को और बढ़ाने का आधार बनेंगी। इसके साथ ही, पशुपालन के जोखिमों से सुरक्षा के लिए उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत अपने पशुओं का 60,000 रुपए प्रति पशु की दर से तीन वर्षों का बीमा कराया है, जिसके लिए मात्र 585 रुपए प्रति पशु का प्रीमियम निर्धारित है। उन्नत मादा वत्स पालन योजना के अंतर्गत भी उनका चयन किया गया है, जिसके तहत बछियों के बेहतर पोषण के लिए उन्हें 19,500 रुपए मूल्य का संतुलित पशु आहार मिल रहा है, जिसमें हितग्राही अंशदान केवल 4,500 रुपए है।         ​परदेशी लाल ने अपनी आय को केवल दूध बिक्री तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि पशुओं से प्राप्त गोबर से जैविक खाद बनाकर स्थानीय किसानों को बेच रहे हैं। इससे उन्हें न केवल अतिरिक्त कमाई हो रही है, बल्कि कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों पर खर्च कम करने में भी मदद मिल रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई परदेशी लाल चंद्रा की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ सही हितग्राही तक पहुँचता है, तो पारंपरिक व्यवसाय भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बन सकता है।

नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम का आरोप, सोनिया गांधी मामले में 29 सितंबर को फिर सुनवाई

नई दिल्ली  दिल्ली की एक अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सोनिया गांधी का नाम नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप की जांच से इनकार किया गया था। दिल्ली की अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में ठोस कारण नहीं बताया गया, इससे पता चलता है कि मामले पर ठीक से विचार नहीं किया गया। अदालत ने मामला फिर मजिस्ट्रेट को भेजा, कारणों के साथ आदेश पारित करने और नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया है। सोनिया गांधी मामले में सेशंस कोर्ट ने क्या कहा सोनिया गांधी से जुड़े वोटर लिस्ट मामले में स्पेशल जज (MP-MLA केस) ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का नाम भारत का नागरिक बनने से पहले वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने से जुड़ी शिकायत पर मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के खिलाफ रिवीजन की मंजूरी दे दी है। सेशन कोर्ट ने एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के 2025 में दिए गए आदेश को रद्द कर दिया है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सोनिया के खिलाफ FIR की मांग वाली शिकायत किया था खारिज दिल्ली की अदालत ने मामले को फिर से सुनवाई करने और एक विस्तृत आदेश पारित करने के लिए वापस भेज दिया गया है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली शिकायत को खारिज कर दिया था। सेशन कोर्ट ने कहा कि बिना सर्टिफाई किए गए रिकॉर्ड की फोटोकॉपी के आधार पर शिकायत को Bold Assertion के तौर पर खारिज करना गलत था। इसे रद्द किया जाना चाहिए। सेशन कोर्ट ने नागरिकता मुद्दे पर दिए ये निर्देश सेशन कोर्ट ने नागरिकता के मुद्दों पर अधिकार-क्षेत्र से जुड़ी टिप्पणी को गलत माना। सेशन कोर्ट ने कहा कि जिस आदेश को चुनौती दी गई है, उसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मामला संज्ञेय अपराध का है या नहीं। सेशन कोर्ट ने कहा कि नागरिकता के मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के बारे में की गई टिप्पणियां अनुचित हैं। मामले को वापस भेज दिया गया है और इसकी अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

600 से ज्यादा जवानों की शहादत के बाद बदली तस्वीर, झारखंड में माओवाद पर लगा ब्रेक

 रांची  शासन से असंतुष्ट होकर सत्ता के विरुद्ध उठाए गए हथियार को झुकाने में सुरक्षा बलों को दो दशक का लंबा अंतराल लगा। छह सौ से अधिक जवानों-अधिकारियों का बलिदान देना पड़ा। केंद्र व राज्य की सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ निरंतर अभियान चलाया। प्रलोभन दिया, राज्य सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति जैसा प्लेटफार्म दिया। जंगल-जंगल खाक छानी, मारक कार्रवाई की, गोला-बारूद के आपूर्ति रूट को ध्वस्त किया, राशन की सप्लाई चेन तोड़ी, सुदूर गांवों तक ग्रामीणों का विश्वास जीता, उन तक विकास की उम्मीद पहुंचाने की पहल की, तब जाकर यह सफलता मिली। इन दो दशकों में झारखंड से एक-एक कर दर्जनभर माओवादी संगठनों के वजूद मिटते चले गए। अब स्थिति यह है कि सभी बड़े माओवादी, उग्रवादी या तो मारे गए या मुख्य धारा में लौटकर खेती-बारी करने लगे या फिर गिरफ्तार-आत्मसमर्पण के बाद जेल में सुख-चैन की जिंदगी जी रहे हैं। न भागदौड़ की जिंदगी, न मारे जाने का भय है। पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) से शुरू हुआ माओवादियों का सफर अब थम गया है। इस संगठन से टूट-टूटकर करीब दर्जनभर कुख्यात संगठन तक बने, लेकिन सुरक्षा बलों की दृढ़ इच्छा शक्ति व साहस ने एक-एक कर सभी संगठनों को धूल चटा दी है। जिस रास्ते से लोग दिन में गुजरने से भय खाते थे, सुरक्षा में तैनात पदाधिकारी व जवान मुंह पर गमछा बांधकर उस इलाके में चलते थे, वहां अब रात में भी लोग बेखौफ होकर चल रहे हैं। जंगल में भी गोले-बारूद की गूंज थम चुकी है। मोबाइल के टावर उड़ाने वाले, पुल-पुलिया ध्वस्त करने वाले, सुरक्षा बलों पर हमला करने वाले माओवादी, उग्रवादी अब नहीं के बराबर हैं, यूं कहें तो मृत प्राय हो चुके हैं। करोड़ो की लेवी से कारोबारी थे परेशान, मिली मुक्ति झारखंड में दो दशक से विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने नहीं दे रहे थे माओवादी। बड़े-बड़े कारोबारी झारखंड में कारोबार से हिचकते थे, इसकी मूल वजह थी माओवादियों तक करोड़ों की लेवी पहुंचाना। पूरा झारखंड दहशत में था। कोयला का कारोबार हो, सड़क, पुल-पुलिया का निर्माण हो, सड़क बनना हो या फिर स्कूल, अस्पताल बनना हो, ईंट, गिट्टी, बालू का परिवहन हो, माओवादियों को लेवी दिए बगैर कोई काम नहीं होता था। केंद्र व राज्य ने मिलकर पहले आपरेशन ग्रीन हंट शुरू किया। आपरेशन ग्रीन हंट से आपरेशन क्लीन व आपरेशन नव जीवन तक ने माओवादियों, उग्रवादियों की कमर तोड़ डाली। इसका नतीजा यह हुआ कि झारखंड के जंगलों में शांति लौट आई। लंबे समय तक मुख्य रूप से सक्रिय रहे हैं चार प्रमुख संगठन माओवादियों के चार प्रमुख संगठन ही मुख्य रूप से सक्रिय रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा माओवादी संगठन भाकपा माओवादी हैं। इसके अलावा दूसरे स्थान पर पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट आफ इंडिया (पीएलएफआई), तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) व झारखंड जन मुक्ति परिषद है। इन चारों ही माओवादी संगठनों के सभी बड़े नेता, बड़े उग्रवादी मारे, पकड़े जा चुके हैं। कइयों ने आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा से जुड़ना स्वीकार किया है। ये हैं दो दशक में झारखंड में सक्रिय रहे प्रमुख माओवादी संगठन     पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) : यह देश में माओवादियों का सबसे पुराना संगठन है। इसी संगठन के बाद बंगाल के नक्सलबाड़ी में शासन के विरुद्ध युद्ध छिड़ा और इससे प्रेरित होकर नक्सलबाड़ी से हथियार के साथ युवाओं ने हथियार उठाया, जिन्हें नक्सली कहा गया।     भाकपा माओवादी (सीपीआइ, माओवादी) : पीएलजीए के बाद देश में भाकपा माओवादियों की नींव पड़ी। इनके नेता झारखंड, बिहार, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बंगाल आदि राज्यों में सक्रिय हुए। युवाओं को माओवाद से जोड़ा और देखते ही देखते यह देश का सबसे बड़ा माओवादी संगठन बन गया, जो सत्ता के विरुद्ध हथियार के बल पर शासन का विरोध करता था।     तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) : भाकपा माओवादियों के ही कुछ सदस्य टूटकर अपना नया संगठन बनाए। ये खुद को माओवादियों के समानांतर अपना संगठन संचालित करने लगे। ये सर्वाधिक कोयला क्षेत्र में ही सक्रिय रहे। चतरा, लातेहार, पलामू, हजारीबाग, रांची आदि जिलों में इस संगठन ने लंबे समय तक अपना वर्चस्व कायम की थी।     झारखंड जन मुक्ति परिषद (जेजेएमपी) : यह माओवादियों के विरुद्ध खड़ा किया गया संगठन था। बाद में यह संगठन भी माओवादी विचाराधारा के अनुरूप चलने लगा और देखते ही देखते नासूर बन गया। इसको लेकर कई बार सुरक्षा बलों की गतिविधियां भी कटघरे में खड़ी हुई थी, क्योंकि इस संगठन के नेता पहले सुरक्षा बलों के साथ माओवादियों के विरुद्ध अभियान में शामिल होते थे। इस संगठन का भी झारखंड से सुपड़ा साफ हो गया।     सम्राट गिरोह : रांची-खूंटी सीमा पर लकड़ी की तस्करी सहित अन्य गतिविधियों में यह संगठन सक्रिय था। इस संगठन ने अपने साथ कई युवाओं को जोड़ा। बाद में यह संगठन भी माओवाद की तर्ज पर खुद को स्थापित करने का प्रयास किया। दहशत भी कायम किया, लेकिन यह दहशत लंबे समय तक रह नहीं सका।     झारखंड लिबरेशन टाइगर्स (जेएलटी) : रांची, खूंटी क्षेत्र में कुख्यात जयनाथ साहू के सम्राट गिरोह से खुद को अलग कर दिनेश गोप ने झारखंड लिबरेशन टाइगर्स नामक संगठन बनाया। बाद में इस संगठन को जब प्रतिबंधित किया गया तो दिनेश गोप ने पीएलएफआइ नाम से संगठन बनाया।     पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट आफ इंडिया (पीएलएफआई) : जेएलटी प्रतिबंधित होने के बाद पीएलएफआई नाम से संगठन बनाकर दिनेश गोप लंबे समय तक माओवादी गतिविधियां संचालित करता रहा। टेरर फंडिंग मुख्य काम रहा। अब यह संगठन भी समाप्त हो चुका है। ये संगठन भी कुछ समय के लिए रहे सक्रिय झारखंड में कुछ समय के लिए झारखंड प्रस्तुति कमेटी (जेपीसी), सशस्त्र पीपुल्स मोर्चा (एसपीएम), संघर्ष जन मुक्ति मोर्चा (एसजेएमएम), झांगुर ग्रुप, पहाड़ी चिता, शांति सेना नाम से संगठन सक्रिय रहे। इनके माओवादी, स्पिलिंटर ग्रुप कारोबारियों के लिए परेशानी का सबब बने रहे। बाद में इन संगठनों का भी खात्मा हो गया। कई संगठनों के सदस्यों ने आपराधिक गिरोह से खुद को जोड़ लिया।

प्रिंसिपल अनिल कुमार को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न’ पुरस्कार, चंडीगढ़ का बढ़ाया गौरव

चंडीगढ़. सेक्टर-31 स्थित राजकीय बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास संस्थान (जीआरआईआईडी) के प्रिंसिपल अनिल कुमार को विशेष शिक्षा और बौद्धिक दिव्यांगजनों के पुनर्वास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली स्थित इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ, सुप्रीम कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। अंतरराष्ट्रीय समरसता मंच की ओर से आयोजित इस समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, गणमान्य व्यक्तियों और सहभागी देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। समारोह में शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस दौरान विभिन्न राज्यों के कुल 51 शिक्षकों को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’ और ‘शिक्षक गौरव पुरस्कार’ प्रदान किए गए। जीआरआईआईडी में बौद्धिक दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जाता है। ऐसे में संस्थान के प्रधानाचार्य को मिला यह सम्मान चंडीगढ़ के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

जालंधर में 4 साल के बच्चे के अपहरण का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार

जालंधर. कमिश्नरेट पुलिस जालंधर ने चार वर्षीय बच्चे के अपहरण के मामले को सुलझाते हुए बच्चा चोरी और चाइल्ड ट्रैफिकिंग से जुड़े गिरोह के मुख्य आरोपित रजत रत्तू उर्फ रोकी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपित ने अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर चार वर्षीय बच्चे को चाइल्ड ट्रैफिकिंग के उद्देश्य से अगवा किया था। उसने यह बच्चा एक लाख रुपए में बेचना था। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई बिना नंबर की सफेद एक्टिवा भी बरामद कर ली है। दूसरे आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह के निर्देश पर डीसीपी सिटी आदित्य एस. वारियर, एडीसीपी जोन-2 माधवी शर्मा और एसीपी वेस्ट आतिश भाटिया की निगरानी में थाना बस्ती बावा खेल पुलिस ने कार्रवाई की। एसआइ गुरदीप चंद, थाना प्रभारी बस्ती बावा खेल, और एएसआइ सुखदेव चंद, चौकी इंचार्ज लेदर कांप्लेक्स, की टीम ने मामले की जांच शुरू की।

ग्रेटर नोएडा के ‘उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो’ में लगेंगे टेराकोटा के चार स्टॉल

वैश्विक पटल पर चमक बिखेरेगा गोरखपुर की माटी का शिल्प ‘टेराकोटा’ ग्रेटर नोएडा के ‘उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो’ में लगेंगे टेराकोटा के चार स्टॉल ओडीओपी में शामिल किए जाने के बाद टेराकोटा शिल्पियों और कारोबारियों के जीवन में आई समृद्धि गोरखपुर गोरखपुर की तमाम विशिष्टताओं में से एक माटी का हस्तशिल्प ‘टेराकोटा’ वैश्विक पटल पर एक बार फिर अपनी चमक बिखेरने के लिए तैयार है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने जा रहे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण में गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों के चार विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। इस अंतरराष्ट्रीय मंच के माध्यम से स्थानीय टेराकोटा शिल्पियों और कारोबारियों को सीधे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, निर्यातकों और बड़े व्यापारिक घरानों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल होने के बाद से इस पारंपारिक शिल्प को नया जीवन मिला है, जिससे शिल्पियों और कारोबारियों के जीवन में आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सम्मान का नया दौर शुरू हुआ है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में इस बार गोरखपुर के टेराकोटा के चार स्टॉल आकर्षण का प्रमुख केंद्र होंगे। ट्रेड शो में आने वाले विदेशी प्रतिनिधियों और बड़े कॉरपोरेट खरीदारों के सामने इन उत्पादों की सीधी ब्रांडिंग से निर्यात की संभावनाओं के नए द्वार खुलने की भी पूरी उम्मीद है। उद्योग विभाग ने जिन शिल्पियों और कारोबारियों को यूपीआईटीएस में स्टाल लगाने के लिए चयनित किया है, उनमें मेसर्स अतरंगी कलाकारी के बैनर तले टेराकोटा ज्वेलरी व होम डेकोरेशन प्रोडक्ट बनाने वाली दीपिका सिंह, रीतिका कृतिका क्रिएशन से सुनीता मौर्या, गिफ्ट सिटी से कमलेश तिवारी और मेसर्स रोशनी एक उम्मीद ट्रस्ट की कोमल मद्देशिया शामिल हैं। उद्योग उपायुक्त उज्ज्वल सिंह का कहना है कि इंटरनेशनल ट्रेड शो में लगने वाले टेराकोटा के स्टाल न केवल गोरखपुर के शिल्पियों की मेहनत और हुनर का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि यह साबित करेंगे कि यदि पारंपरिक हुनर को सही नीति, तकनीक और बाजार का सहारा मिले तो मिट्टी भी सोना उगल सकती है। यूपीआईटीएस में मिलने वाला अवसर गोरखपुर के टेराकोटा के निर्यात की दिशा में भी काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। योगी सरकार ने की ब्रांडिंग तो खूब बढ़ा कारोबार भटहट ब्लॉक के औरंगाबाद गांव को टेराकोटा शिल्प का मूल गांव माना जाता है। औरंगाबाद और इसके आसपास के गांवों में पीढ़ियों से टेराकोटा का काम किया जाता रहा है। वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री ने एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना शुरू की और टेराकोटा को गोरखपुर का ओडीओपी उत्पाद घोषित किया गया। इसके तहत शिल्पकारों को विद्युत चालित चाक, पगमिल, अनुदान पर ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ी तो दूसरी तरफ योगी सरकार ने बड़े-बड़े मंचों से टेराकोटा की ब्रांडिंग की। परिणामस्वरूप इसकी मांग में लगातार वृद्धि होती गई। कारोबार में वृद्धि होने से टेराकोटा शिल्पकारों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार हुआ है। कच्ची झोपड़ियों में काम करने वाले कई शिल्पियों ने पक्के वर्कशॉप और पक्के मकान बना लिए हैं। नई पीढ़ी, जो कभी मिट्टी के इस काम से दूरी बना रही थी, अब आधुनिक डिजाइनिंग सीखकर अपने पुश्तैनी कारोबार में सक्रिय रूप से हाथ बंटा रही है।

दीपक बैज के आरोपों पर स्वास्थ्य मंत्री का जवाब, अस्पताल चलने की दी चुनौती

रायपुर. छत्तीसगढ़ की सियासत में नेताओं के बीच जुबानी जंग का सिलसिला जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंचायत मंत्री विजय शर्मा के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर हुई बहस के बाद अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को चुनौती दी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पर निशाना साधते हुए उन्हें चुनौती दी है। बैज ने कहा है कि वे प्रदेश के किसी भी अस्पताल में जाकर जमीनी स्थिति देखने के लिए तैयार हैं। बैज की ओर से स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद मामला राजनीतिक बहस में बदल गया। श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार की चुनौती दीपक बैज की चुनौती पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी पलटवार करते हुए इसे स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि दीपक बैज उनके पुराने मित्र हैं और वे उनका सम्मान करते हैं। अस्पताल का चयन भी बैज अपनी पसंद से कर सकते हैं।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र या रायपुर का कोई भी अस्पताल चुन लिया जाए, वे वहां साथ चलने के लिए तैयार हैं। वे स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक मित्र के रूप में भी उनके साथ जाएंगे। जाना होगा तो खबर भेज दें, जरूर जाएंगे : स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि अगर दीपक बैज किसी अस्पताल का जायजा लेने जाना चाहते हैं तो उन्हें इसकी जानकारी भेज दें। जाना होगा तो खबर भेज दें, जरूर जाएंगे। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस को लेकर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस में चर्चा करने का कोई इंफेक्शन आ गया है।” अब दोनों नेताओं की चुनौती के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि अस्पताल का चयन कब और कहां होता है और क्या दोनों नेता साथ में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचते हैं।