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एमपी में कर्मचारियों का पेंशन विकल्प पर उदासीन रवैया, संगठन स्तर पर कोई पहल नहीं

भोपाल  भारत सरकार द्वारा लागू एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लेकर मध्य प्रदेश के कर्मचारियों में कोई रुचि नहीं है। किसी भी संगठन ने इसे लेकर पहल नहीं की है। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों में भी कुछ ने ही इस विकल्प को चुना है। उधर, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। अब कर्मचारी सरकारी प्रतिभूति में सौ प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं। इस योजना में चार लाख 60 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं। पुरानी पेंशन बहाली की मांग के बीच सरकार ने कर्मचारियों को साधने के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना के साथ-साथ एकीकृत पेंशन योजना का विकल्प कर्मचारियों को दिया है। भारत सरकार की इस योजना को लेकर अधिकारी-कर्मचारी उत्साहित नहीं हैं। प्रदेश में इसे लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति तो गठित की गई पर इसकी बैठक ही नहीं हुई। दरअसल, अभी योजना को लेकर स्पष्टता नहीं है, जिसके कारण सरकार भी जल्दबाजी में नहीं है। लगातार किए जा रहे हैं संशोधन उधर, राष्ट्रीय पेंशन योजना में लगातार संशोधन किए जा रहे हैं। अब यह प्रविधान किया गया है कि जो कर्मचारी जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं वे सरकारी प्रतिभूति में सौ प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं। वहीं, म्यूचुअल फंड सहित अन्य व्यवस्थाओं में निवेश के लिए अधिकतम सीमा को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। योजना में कर्मचारी को यह अधिकार दिया गया है वो निवेश के लिए फंड मैनेजर का चयन कर सकते हैं। एक वर्ष में फंड चयन की सुविधा एक बार और निवेश पद्धति में परिवर्तन के लिए दो बार ही रहेगी। क्यों नहीं जुड़ रहे हैं लोग? हालांकि, यूपीएस में लंबी सर्विस ड्यूरेशन, मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन, टाइम से पहले रिटायरमेंट की सिचुएशन में लिमिटेड बेनिफिट्स, और फैमिली पेंशन के लिए लिमिटेड डेफिनिशन को लेकर डिससैटिस्फैक्शन की वजह से, 27 लाख सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज में से सिर्फ करीब 1% ने ही यूपीएस को चुना. सर्विस के दौरान डेथ होने पर मिलने वाले बेनिफिट्स की क्लैरिटी न होने, टैक्सेशन और यूपीएस अपनाने से पहले कॉस्ट वर्सेज बेनिफिट की चिंता से लोग इसे चुनने से बच रहे हैं. क्योंकि एक बार सलेक्ट करने पर इससे बाहर नहीं जाया सकता है. हालांकि, इसके लिए अभी हाल में ही सरकार ने वनटाइम वन वे स्विच का ऑप्शन दिया है, लेकिन उसकी अपनी सीमाएं हैं. UPS के लिए गवर्नमेंट के उठाए कदम जुलाई में, सेंटर ने मार्केट-लिंक्ड एनपीएस के तहत मिलने वाले इनकम टैक्स बेनिफिट्स को यूपीएस तक एक्सटेंड किया, जिसमें रिटायरमेंट पर 60% फंड की टैक्स-फ्री विड्रॉल शामिल है. इसने गवर्नमेंट एम्प्लॉई की डेथ, डिसएबिलिटी या डिसमिसल की सिचुएशन में ओपीएस के बेनिफिट्स को भी इंप्रूव किया. सेंटर ने यूपीएस के तहत एम्प्लॉइज को रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी का बेनिफिट भी दिया. इसने एनपीएस से यूपीएस में स्विच करने की डेडलाइन को 30 जून से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया. पिछले हफ्ते, इसने यूपीएस से एनपीएस में वन-टाइम वन-वे स्विच फैसिलिटी स्टार्ट की. यूपीएस चुनने वाले कर्मचारी इसे रिटायरमेंट से एक साल पहले तक या वॉलंटरी रिटायरमेंट के केस में रिटायरमेंट डेट से तीन महीने पहले तक यूज कर सकते हैं. यूपीएस में फिस्कल इंप्लीकेशन यूपीएस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह गवर्नमेंट फाइनेंस पर गैरजरूरी कॉस्ट का असर न डाले. गारंटी एलिमेंट की वजह से एक्स्ट्रा एक्सपेंडिचर का अनुमान फाइनेंशियल ईयर 26 में सिर्फ 8,500 करोड़ रुपये था, जो टाइम के साथ ग्रैजुअली बढ़ेगा, क्योंकि सैलरी स्केल रिवाइज होते हैं और न्यू पीपल सर्विस में जॉइन करते हैं. हालांकि, कर्मचारियों के नंबर में न्यू एडिशन्स पर जनरल कंट्रोल से एक्सपेंसेस पर कंट्रोल रहने की उम्मीद है. चूंकि, 2036 के बाद लोग यूपीएस के तहत रिटायर होंगे और उनमें से कुछ के साथ-साथ फैमिली पेंशनर्स की भी डेथ हो सकती है. ऐसी स्थिति में उनकी पेंशन कैपिटल अमाउंट कर्मचारी के सक्सेसर्स को रिटर्न नहीं की जाएगी. इससे फ्यूचर में बजट पर ज्यादा डिपेंड हुए बिना पेंशन के लिए गवर्नमेंट के रिसोर्सेज को इंप्रूव करने में हेल्प मिलेगी. हर पे कमीशन के डिसीजन के बाद बेसिक पेंशन को रीसेट नहीं किया जाएगा, जैसा कि ओपीएस में होता था.

भोपाल मेट्रो नवंबर के अंत तक दौड़ेगी, अंतिम जांच में यात्री सुरक्षा और एंट्री-एग्जिट सुधार की समीक्षा

भोपाल  भोपाल की बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो नवंबर के आखिरी सप्ताह तक भोपाल मेट्रो पटरियों पर दौड़ती नजर आ सकती है। दरअसल, दिल्ली से आने वाली कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम अगले सप्ताह भोपाल मेट्रो का तीसरा और अंतिम निरीक्षण करने आने वाली है। यह परीक्षा मेट्रो प्रबंधन के लिए निर्णायक साबित होगी, क्योंकि इस रिपोर्ट के आधार पर ही ‘ओके टू रन’ की मंजूरी दी जाएगी। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भोपाल मेट्रो इस बार सुरक्षा मानकों पर खरी उतरकर राजधानीवासियों को नवंबर के अंत तक मेट्रो की सवारी का तोहफा दे पाएगी या फिर इंतजार और लंबा खिंचेगा। एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्य में जुटा गौरतलब है कि अक्टूबर में मेट्रो संचालन शुरू किया जाना था, लेकिन सीएमआरएस टीम के पिछले निरीक्षण के दौरान मेट्रो प्रबंधन परीक्षा में पास नहीं हो सका। उस समय सुरक्षा संबंधी कई खामियां सामने आई थीं। सूत्रों के अनुसार टीम ने यात्री सुरक्षा, स्टेशन एरिया, एंट्री और एग्जिट से जुड़ी कमियों की ओर ध्यान दिलाया था। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्यों में जुटा हुआ है। अब टीम द्वारा देखा जाएगा कि सुरक्षा मानकों पर मेट्रो प्रबंधन ने कितना सुधार किया है और क्या ट्रेन के संचालन के लिए सभी जरूरी मानक पूरे हो गए हैं या नहीं। बता दें कि एमपी मेट्रो के प्रबंध निदेशक एस. कृष्ण चैतन्य पूरी सक्रियता के साथ प्रायोरिटी कॉरिडोर के सभी मेट्रो स्टेशनों के कार्यों की समीक्षा और निरीक्षण कर रहे हैं।मंगलवार और बुधवार उन्होंने मैदान में उतरकर चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और सीएमआरएस से जुड़े बिंदुओं पर विशेष रूप से रिव्यू किया। मैदानी कार्य पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया प्रायोरिटी कॉरिडोर पर नहीं शुरू हुआ मैदानी कार्य सूत्रों की मानें तो प्रायोरिटी कॉरिडोर पर अभी भी मैदानी कार्य पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। सामान्यत: यह काम तब शुरू किए जाते हैं, जब परियोजना के सभी तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े कार्य पूरे हो जाएं। ऐसे में इस बार भी मेट्रो के संचालन की मंजूरी मिल पाएगी या नहीं, यह फिलहाल संशय में है। अक्टूबर में संचालन शुरू नहीं होने पर हुई थी किरकिरी अक्टूबर में समय पर मेट्रो शुरू न होने से एमपी मेट्रो प्रबंधन की काफी किरकिरी हो चुकी है। यही कारण है कि एमडी एस. कृष्ण चैतन्य अब भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं और पूरी तैयारी के साथ सीएमआरएस परीक्षा पास करने पर फोकस कर रहे हैं। इस मामले में भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है।

बड़ी संख्या में महिलाओं को लाड़ली बहना योजना से वंचित, दस्तावेजी और बैंक त्रुटियां बनी बाधा

भोपाल   मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत दतिया जिले की 1,44,204 महिलाओं के बैंक खातों में मध्यप्रदेश सरकार ने अक्टूबर माह में 21 करोड़ 25 लाख 29 हजार 200 रुपए की राशि ट्रांसफर की। यह राशि प्रति महिला 1,500 रुपए के मान से दी गई। लेकिन इसी माह जिले की 2,949 लाड़लियों के नाम योजना की सूची से बाहर कर दिए गए। इनमें 452 महिलाओं ने स्वयं आवेदन देकर योजना का लाभ छोडने की इच्छा जताई, 2,196 महिलाए 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर अपात्र हो गई, जबकि 301 महिलाएं मृत पाई गई, जिनके नाम स्वाभाविक रूप से हटाए गए। अगर मृतक महिलाओं को छोडकर शेष 2,648 महिलाएं योजना में बनी रहतीं, तो सरकार को ?39 लाख 72 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता। योजना से वंचित महिलाओं की परेशानी जिले में 50 हजार महिलाएं ऐसी हैं जो लाड़ली बहना योजना में अपना नाम जुड़वाने के लिए प्रयासरत हैं। ये महिलाएं बैंक खाते में त्रुटि, आधार या समग्र आईडी लिंक न होने तथा दस्तावेज सत्यापन में देरी और पात्रता जांच की जटिल प्रक्रिया जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। नहीं जुड़ा पा रही नाम शहर के वार्ड क्रमांक 17 निवासी 48 वर्षीय शारदा देवी ने बताया कि वे पिछले एक साल से योजना में नाम जुड़वाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन दसतावेजों में कोई न कोई त्रुटि होने से नाम नहीं जुड़ पा रहा। ठंडी सडक़ निवासी 42 वर्षीय वैजयंती कुशवाह ने बताया कि घर से बार-बार निकल नहीं पाते। एक साल में करीब चार बार नाम जुड़वाने का प्रयास किया लेकिन जुड़ नहीं पाया। योजना से और भी महिलाओं के नाम हो सकते हैं बाहर लाड़ली बहना योजना की पात्रता जांच अब और सख्त हो रही है। विभागीय समीक्षा के अनुसार, जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो चुकी है या जिनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, उन्हें योजना से बाहर किया जा रहा है। यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से वित्तीय पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे ग्रामीण क्षेत्रों की कई महिलाओं पर सीधा असर पड़ेगा जो अभी भी योजना के सहारे घरेलू खर्च चला रही थीं। अगले कुछ महीनों में यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि दिसंबर-जनवरी में पात्रता की नई समीक्षा प्रस्तावित है। जारी है समीक्षा योजना से जुड़ी पात्रता की समीक्षा निरंतर जारी है। 60 वर्ष की आयु या मृत्यु की स्थिति में लाभ स्वतः समाप्त कर दिया जाता है।- अरविंद उपाध्याय, जिला कार्यकम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग दतिया

दिल्ली नगर निगम में घोटाला उजागर: CBI ने JE को 10 लाख की रिश्वत संग पकड़ा

नई दिल्ली  सीबीआई ने गुरुवार को दिल्ली नगर निगम के नजफगढ़ क्षेत्र के एक कनिष्ठ अभियंता को बिल पास करने के एवज में दस लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। सीबीआई ने इस बाबत 11 नवंबर को नजफगढ़ जोन के कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता एक ठेकेदार है, जिसके लगभग तीन करोड़ रुपए के बिल लंबित थे। आरोपियों ने इन बिलों को पास करने के लिए कुल 25.42 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलते ही सीबीआई ने जाल बिछाया और कनिष्ठ अभियंता को शिकायतकर्ता से दस लाख रुपए की किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद सीबीआई ने आरोपियों के घरों और कार्यालयों पर छापे मारे। तलाशी में भारी मात्रा में कैश, सोने-चांदी के आभूषण और संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि आरोपी लंबे समय से गलत तरीके से धन कमा रहे थे। जांच अभी जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है। यह मामला दिल्ली नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है। ठेकेदारों से बिल पास करने के नाम पर रिश्वत लेना आम बात हो गई थी। शिकायतकर्ता ने हिम्मत दिखाकर सीबीआई से संपर्क किया, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई। सीबीआई का कहना है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। सीबीआई ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत मांगे या भ्रष्टाचार करे तो बिना डरे शिकायत करें। सीबीआई की इस सख्त कार्रवाई से सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और ईमानदार काम करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा। जांच पूरी होने पर दोषियों को कड़ी सजा मिलने की संभावना है।

अनिल विज का तंज: चुनावी हार से घबराई कांग्रेस, अभी से शुरू किया रोना

चण्डीगढ हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने दिल्ली लाल किला क्षेत्र में हुए आतंकी बम ब्लास्ट पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक गंभीर आतंकी घटना है जिसमें निर्दाेष लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तत्परता के कारण एक बड़ी तबाही टल गई। उन्होंने कहा कि “हमारी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते एक भयंकर साजिश को विफल किया। मैं सभी सुरक्षा बलों को सैल्यूट करता हूँ जिन्होंने एक बहुत बड़ी दुर्घटना होने से देश को बचाया।” विज आज मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब दे रहे थे। विज ने इस हमले में आतंकी उमर की संलिप्तता की पुष्टि होने पर कहा कि करीब 3000 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया है, जो किसी भी बड़े शहर को नष्ट कर सकता था।  अनिल विज ने बताया कि सभी सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कौन लोग इस साजिश के पीछे थे, किसने विस्फोटक सामग्री मुहैया करवाई, और यह पूरी प्लानिंग कहां से की गई। विज ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का स्पष्ट संदेश है कि जो भी आतंकवादी घटनाओं में शामिल होगा या उन्हें अंजाम देने में मदद करेगा, उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।” “कांग्रेस को हार की आदत है, अब रोने की नई स्कीम लेकर आई है”  बिहार चुनाव को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विज ने व्यंग्य किया कि कांग्रेस ने “हारने के बाद रोने की परंपरा” को अपनी आदत बना लिया है। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस अपने स्कूल में कई तरह के रोने के तरीके सीख चुकी है एक, चुनाव हारने के बाद सियापा करना और दूसरा, वोट चोरी के आरोप लगाना। अगर वोट दो बन भी गईं, तो यह क्यों नहीं बताते कि कितनी डाली गईं और किसे पड़ीं? असली फायदा-नुकसान तो वोट डालने के बाद ही तय होता है।”   अंबाला में कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विज ने कांग्रेस के नेताओं (भूपेन्द्र सिंह हुडडा) पर तंज कसते हुए कहा कि “ ये तो (हुड्डा) तो चाबी वाले खिलौने हैं। जैसे ही राहुल गांधी चाबी भरते हैं, ये चलने लगते हैं, और जब वह रोक देते हैं, तो ये भी थम जाते हैं।

हरियाणा में वायु प्रदूषण का कहर: कक्षा 1 से 5 तक स्कूल रहेंगे बंद

हरियाणा  दिल्ली-NCR क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनज़र हरियाणा सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं। ग्रैप-3 (GRAP-3) के तहत लागू पाबंदियों के बाद शिक्षा निदेशालय ने 5वीं तक के बच्चों की ऑफलाइन कक्षाएं बंद करने के निर्देश जारी किया है। शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों के उपायुक्तों (DCs) को अधिकार दिए हैं कि वे अपने जिले में वायु गुणवत्ता की स्थिति के अनुसार निर्णय लें। निदेशालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि दिल्ली-NCR में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार ख़राब हो रहा है और यह गंभीर स्तर पर पहुँच गया है। गाइडलाइन के अनुसार, अब 5वीं तक के छात्रों की कक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएंगी। यह व्यवस्था सरकारी और निजी दोनों स्कूलों पर लागू होगी।   शिक्षा निदेशालय के अनुसार, हरियाणा के दिल्ली-NCR क्षेत्रों में प्रदूषण चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। सभी जिलों के डीसी को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिले के AQI का आकलन करें और उसके आधार पर 5वीं तक के स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी करें। डीसी का आदेश सरकारी और निजी दोनों स्कूलों पर लागू होगा। साथ ही, बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड अपनाने की सलाह दी गई है। निदेशालय ने कहा है कि प्रत्येक शहर में AQI का स्तर अलग-अलग होता है, इसलिए निर्णय लेते समय शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाए। इसके अलावा, सभी जिलों के डीसी को अपने निर्णय की जानकारी "एकेडमिक हरियाणा" को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। बता देंहरियाणा सरकार का यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। वायु गुणवत्ता में सुधार होने पर स्कूलों को पुनः खोलने पर निर्णय लिया जाएगा।  

स्वास्थ्य में क्रांति: पंजाब सरकार देगी 10 लाख रुपये तक का फ्री ट्रीटमेंट

जालंधर पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ के तहत हर परिवार को 10 लाख रुपये तक के इलाज की मुफ़्त सुविधा दी जा रही है। मान सरकार का उद्देश्य है कि राज्यवासियों को अधिक से अधिक स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और कागज़ रहित इलाज सुनिश्चित किया जा सके। राज्यवासियों का कहना है कि मान सरकार द्वारा चलाई गई यह योजना लोगों के लिए एक बेहतरीन पहल है। इस योजना के तहत हर व्यक्ति, चाहे वह गरीब हो या अमीर, अपना इलाज करवा सकता है। इस योजना से गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली है। अब गरीब परिवार भी बड़े-बड़े अस्पतालों में अपना इलाज करवा सकते हैं, जबकि पहले वहां इलाज के लिए पहले पैसे देखे जाते थे और फिर इलाज होता था।  

अलर्ट! तेजी से फैल रही गंभीर बीमारियाँ, मरीजों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

चंडीगढ़  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू,एच.ओ.) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों ने भारत में नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं और भारत मधुमेह की राजधानी बनता जा रहा है। 2025 तक 7 करोड़ से ज्यादा लोग इससे पीड़ित होने की आशंका है। ज्यादातर मौतें हृदय रोग के कारण होती हैं। पिछले 30 सालों में हृदय रोगियों की संख्या दोगुनी हो गई है। हृदय रोग पहले पांचवें नंबर पर था, लेकिन अब यह देश की सबसे बड़ी बीमारी बन गया है। एक अध्ययन के अनुसार, पिछले तीन दशकों में भारत में लोगों के स्वास्थ्य को हुए नुकसान में हृदय, सी.ओ.पी.डी., मधुमेह और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। डब्ल्यू.एच.ओ. की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 70 प्रतिशत ओ.पी.डी. सेवाएं, 58 प्रतिशत भर्ती मरीज और 90 प्रतिशत दवाइयां और जांचें निजी हाथों में हैं। अच्छा इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर है। भारत में सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है। गैर-संचारी रोगों से होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। दक्षिण एशियाई क्षेत्र में लोगों के जीवन का एक बड़ा हिस्सा खराब स्वास्थ्य के कारण होता है और गैर-संचारी (एन.सी.डी.) रोग इसका एक प्रमुख कारण बनकर उभरे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली पर रोगों का 58 प्रतिशत बोझ गैर-संचारी रोगों के कारण है, जो 1990 में 29 प्रतिशत था। वायु प्रदूषण, उच्च रक्तचाप और खराब आहार इसके मुख्य कारण हैं। 1970 में औसत जीवन प्रत्याशा 47.7 वर्ष थी, जो 2020 में बढ़कर 69.6 वर्ष हो गई है। डॉक्टरों और नर्सों के अनुपात में अपेक्षाकृत सुधार हुआ है, लेकिन समग्र स्थिति अभी भी कमजोर है। 10,000 लोगों पर केवल 9 डॉक्टर और 24 नर्स हैं। इतने ही लोगों पर केवल नौ फार्मासिस्ट हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में हृदय रोग विशेषज्ञों की कमी यहां यह उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में हृदय रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है, जिसके कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को अपना इलाज कराने में कठिनाई होती है, क्योंकि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होते और वे निजी अस्पतालों में महंगा इलाज नहीं करा पाते। सरकारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। मधुमेह रोगियों की संख्या बढ़ रही है भारत में कुल 11.4 प्रतिशत लोग मधुमेह और 36 प्रतिशत उच्च रक्तचाप के रोगी हैं। 15.3 प्रतिशत लोग प्री-डायबिटीज के रोगी हैं। पंजाब में उच्च रक्तचाप के रोगियों की संख्या सबसे अधिक है, जो 51.8 प्रतिशत है। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से यह अध्ययन किया। इसमें यह भी पाया गया कि भारत में 28.6 प्रतिशत लोग मोटे हैं। राज्यों में, गोवा में मधुमेह के सबसे अधिक मामले (26.4 प्रतिशत) हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे कम (4.8 प्रतिशत) हैं। अध्ययन में कहा गया है कि 2017 में भारत में लगभग 7.5 प्रतिशत लोग मधुमेह से पीड़ित थे। इसका मतलब है कि तब से यह संख्या 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गई है। गैर-संचारी रोगों में तेजी से वृद्धि का मुख्य कारण खराब खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव को माना जा सकता है। दिल का दौरा जानलेवा: डॉ. अमनप्रीत सिंह डॉ. अमनप्रीत सिंह ने कहा कि दिल का दौरा एक जानलेवा स्थिति है। जो पिछले कुछ वर्षों में काफी आम हो गई है। सीने में दर्द दिल के दौरे का सबसे आम चेतावनी संकेत है। दिल के दौरे के लक्षण सीने में दर्द या बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ, बांहों, कंधों या गर्दन में दर्द, पसीना आना, चक्कर आना। कई लोगों को दिल के दौरे के चेतावनी संकेतों का बिल्कुल भी एहसास नहीं होता। दिल का दौरा तब पड़ता है जब हृदय तक रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है। अगर ऑक्सीजन युक्त रक्त हृदय तक नहीं पहुंच पाता, तो यह हृदय को नुकसान पहुंचाता है। परिणामस्वरूप हृदय की मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं। जब आपके हृदय को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो वह ठीक से काम नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि हर साल लाखों लोग दिल के दौरे से मरते हैं। ऐसा माना जाता है कि सर्दियों के मौसम में दिल के दौरे का खतरा ज़्यादा होता है। सर्दी शुरू होते ही दिल के दौरे के मामले बढ़ने लगते हैं। दिल का दौरा किसी भी मौसम में पड़ सकता है, लेकिन सर्दियों में इसका खतरा ज़्यादा होता है। सर्दियों में दिल के दौरे के मामले बढ़ जाते हैं। सर्दियों में कम तापमान के कारण, हमारे हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां सिकुड़ जाती हैं। इस वजह से हृदय तक रक्त धीरे-धीरे पहुंचता है। दिल के दौरे से बचने के लिए, उचित गर्म कपड़े पहनने चाहिए। सुबह और रात में जब तापमान सबसे कम होता है, घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। अगर आप बाहर जाते भी हैं, तो उचित कपड़े पहनें।

पार्कों की बदहाली पर मेयर सुमन सख्त, मौके पर ही सुपरवाइज़र को दी कड़ी चेतावनी

यमुनानगर  यमुनानगर नगर निगम द्वारा सभी 22 वार्डों में करोड़ों की लागत से विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। इन विकास कार्यों की गुणवत्ता को देखने के लिए यमुनानगर की मेयर समय-समय पर निरीक्षण कर रही है। यमुनानगर की मेयर ने नगर निगम हॉर्टिकल्चर के अधिकारियों के साथ सेक्टर 18 में बने तीन पार्कों का निरीक्षण किया और वहां के रखरखाव और RWA संस्थाओं द्वारा मेनटेन किए जा रहे पार्कों की व्यवस्थाओं को देखा।  वहीं तिकोनी पार्क में चल रहे ट्रैक के कार्य में खामियां देखते ही मेयर ने मौके पर मौजूद एजेंसी के सुपरवाइजर की लगा दी क्लास। मेयर ने  कहा कि जनता के पैसों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो नियम अनुसार जुर्माना भी किया जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह दोबारा भी उसका निरीक्षण करेंगी।  इस दौरान मेयर सुमन बहमनी ने नगर निगम के अधिकारियों को भी गुणवत्ता बनाए रखने और समय पर काम पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सेक्टर-18 एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना और तत्काल समाधान के निर्देश दिए।  

राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत करने की पहल: सीएम ने फायर सेफ्टी के लिए 30 नए अधिकारी पद स्वीकृत किए

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के बड़े अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित 30 नए अग्नि सुरक्षा अधिकारी पदों को वित्त विभाग से स्वीकृति मिल गई है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश के प्रमुख अस्पतालों में स्थायी फायर सेफ्टी अधिकारी तैनात रहेंगे, जिससे मरीजों और आमजन को अधिक सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। राज्य के चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने इस निर्णय को सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर उन्नयन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सवाई मानसिंह अस्पताल में हाल ही में हुई आग की घटना के बाद सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसी के तहत अस्पतालों में स्थायी अग्नि सुरक्षा ढाँचा स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के शासन सचिव अम्बरीष कुमार ने बताया कि प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में हर वर्ष लगभग 4 करोड़ मरीज ओपीडी सेवाएँ प्राप्त करते हैं। इन अस्पतालों में करीब 42,000 इनडोर बेड, प्रतिदिन 12,500 मेडिकल गैस सिलेंडर का उपयोग और 60,000 से अधिक चिकित्सा कर्मियों की उपस्थिति होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में फायर सेफ्टी विशेषज्ञों की नियुक्ति अत्यावश्यक है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सरकार के इस फैसले के तहत 6 पद पे लेवल-11 और 24 पद पे लेवल-8 पर स्वीकृत किए गए हैं। ये अधिकारी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा की देखरेख, नियमित फायर ऑडिट, मासिक मॉक ड्रिल, आईसीयू और ऑक्सीजन सिस्टम की निगरानी, फायर अलार्म व स्प्रिंकलर सिस्टम के रखरखाव और आपात स्थिति में राहत कार्यों के संचालन की जिम्मेदारी निभाएंगे। शासन सचिव ने यह भी बताया कि भर्ती प्रक्रिया 15 दिसंबर 2025 तक प्रारंभ की जाएगी। चयनित अधिकारियों को एनआईएफएसए (NIFSA) और एडीआरएफ (ADRF) जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं से विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके अलावा अस्पताल कर्मियों और मेडिकल छात्रों के लिए अग्नि सुरक्षा जागरूकता मॉड्यूल भी तैयार किया जाएगा, ताकि फायर सेफ्टी संस्कृति को संस्थागत रूप दिया जा सके। अतिरिक्त निदेशक नरेश गोयल ने इस कदम को राज्य में आपदा प्रबंधन की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि इससे अस्पतालों में एक एकीकृत फायर सेफ्टी मॉडल विकसित होगा, जो न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि राजस्थान को ‘सुरक्षित अस्पताल एवं सुरक्षित जीवन’ की दिशा में देश का अग्रणी राज्य बनाएगा।