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Diljit Dosanjh की फिल्म पर फिर विवाद! रिलीज के 2 दिन बाद OTT से हटाई गई, एक्टर ने कहा- मुझे इसका अंदाजा था

चंडीगढ़  दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'पंजाब 95' को 3 जुलाई को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर नाम बदलकर रिलीज किया गया था, पर दो दिन बाद ही इसे हटा दिया गया। अब अगले आदेश तक इसे भारत में OTT पर नहीं दिखाया जाएगा। तीन साल तक सेंसर बोर्ड के साथ विवाद में फंसे रहने के बाद 'सतलज' बड़ी मुश्किल से अब रिलीज की रोशनी देख पाई थी, पर अचानक हटाए जाने से न सिर्फ आम जनता में गुस्सा है, बल्कि सेलेब्स भी गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। 'सतलज' को हटाए जाने पर अब सियासी घमासान तेज हो गया है। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने इसे 'अभिव्यक्ति की आजादी' पर हमला बताया। एक्टर रणवीर शौरी से लेकर फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने भी नाराजगी जाहिर की है। 'सतलज' की कहानी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा पर आधारित है। उन्होंने 90 के दशक में 25 हजार लापता सिखों के लिए लड़ाई लड़ी थी। साथ ही 2000 लोगों की मौत का पता लगाया था, जिनकी लाशों को लावारिस बताकर जला दिया गया था। पर बाद में पुलिस ने खालरा का ही फेक एनकाउंटर कर लाश को नदी में फेंक दिया था। 'सतलज' को बंपर रिस्पॉन्स, फिल्म देख रो पड़े थे लोग 3 जुलाई को जब 'सतलज' OTT पर आई, तो जिन्होंने भी फिल्म देखी वो रो पड़े और सभी से इसे देखने की अपील की। यहां तक कि IMDb पर भी इसे 9.7/10 रेटिंग मिली है। लेकिन अब अचानक ही इस फिल्म को OTT से भारत में हटा दिया है। इससे जनता और सेलेब्स भड़के हुए हैं। सुखबीर सिंह बादल भड़के- अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने 'सतलज' हटाए जाने पर गुस्सा निकालते हुए X पर लिखा, 'भारत में ZEE5 से 'सतलज' को मनमाने ढंग से हटाए जाने से मैं स्तब्ध और दुखी हूं। यह सशक्त फिल्म, जो पंजाब के दर्दनाक इतिहास को साहसपूर्वक उजागर करती है और एस. जसवंत सिंह जी खालरा के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, उसे इस तरह चुप नहीं कराया जा सकता। यह केवल सेंसरशिप नहीं है, यह हमारी सामूहिक स्मृति, सत्य और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। मैं इस कदम की कड़ी निंदा करता हूं। पंजाब को अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का अधिकार है, दमन का नहीं।' यह सशक्त फिल्म, जो पंजाब के दर्दनाक इतिहास को साहसपूर्वक उजागर करती है और एस जसवंत सिंह जी खालरा के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, उसे इस तरह चुप नहीं कराया जा सकता। यह केवल सेंसरशिप नहीं है, यह हमारी सामूहिक स्मृति, सत्य और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। रणवीर शौरी ने यूं जाहिर किया गुस्सा रणवीर शौरी ने भी गुस्सा निकालते हुए X पर लिखा, 'यह सुनकर बहुत निराशा हुई कि 'सतलज' को हटा दिया गया है। मैं इसे देखने का इंतजार कर रहा था। जिस देश का इतिहास और विरासत कहानियों से सीखने का रहा है, वहां न जाने क्यों हम कहानियों को दबाने या खत्म करने वाले कल्चर को बढ़ावा देते रहते हैं।' मैं इसे देखने का इंतजार कर रहा था। जिस देश का इतिहास और विरासत कहानियों से सीखने का रहा है, वहां न जाने क्यों हम कहानियों को दबाने या खत्म करने वाले कल्चर को बढ़ावा देते रहते हैं। पहले फिल्म के बारे में जानिए…     मानवाधिकार कार्यकर्ता पर आधारित, 2022 में बननी शुरू हुई: मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के नाम पर 2022 में फिल्म बनाने की घोषणा की। फिल्म का शुरुआती नाम 'घल्लूघारा' रखा गया था, जिसका अर्थ 'नरसंहार' होता है। फिल्म की शूटिंग पंजाब के विभिन्न हिस्सों, खासकर अमृतसर में पूरी हुई। अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए अपने लुक और शारीरिक बनावट में बदलाव किया।     सेंसर बोर्ड ने नाम बदलवाया: साल 2023 में फिल्म बनकर तैयार हो गई। इसके बाद इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया, तो बोर्ड ने फिल्म के टाइटल पर आपत्ति जताई और कई बदलाव तथा कट्स सुझाए। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर 'पंजाब 95' रखा गया।     127 कट लगाने को भी कहा: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBFC ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए। इनमें कुछ ऐतिहासिक संदर्भों, स्थानों और पात्रों के नामों में बदलाव की मांग भी शामिल थी। हालांकि, CBFC ने सार्वजनिक रूप से इन सभी प्रस्तावित बदलावों का विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया। भारत में सेंसर बोर्ड की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी।     विदेशों में रिलीज नहीं हो सकी: इसके बाद 7 फरवरी 2025 को इसे चुनिंदा देशों में रिलीज किया गया। इसके बाद साल 2023 में फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।     सिर्फ OTT पर रिलीज करने की छूट मिली: इसके बाद इसे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने की छूट मिली। उसमें किसी तरह के कट नहीं लगाए गए थे। 2 दिन के भीतर पंजाब में इस फिल्म को खूब देखा गया। जिसके बाद अचानक OTT प्लेटफॉर्म से फिल्म हट गई। इसके बारे में सिर्फ इतना कहा गया कि अगले आदेश तक फिल्म हटा दी गई है। फिल्म हटाने पर दिलजीत दोसांझ ने क्या कहा…     इंसानियत होती है, जो मर गई: फिल्म को हटाए जाने पर दिलजीत ने कहा कि मैं लोगों के मुंह की तरफ देखता हूं। एक इंसानियत होती है, लेकिन वह इंसानियत मर गई। कमाल है। फिल्म इंटरनेट से हट गई, इसलिए मैं उदास नहीं हूं। फिल्म तो लोगों तक पहुंच ही गई। अब वह कहीं नहीं जाने वाली। एक प्यार, इत्तेफाक और इंसानियत होती है, लेकिन लोगों का रवैया कमाल का है। बस इसी बात का थोड़ा दुख है।     मुझे पहले पता था ऐसा होना है: दिलजीत ने कहा- मुझे पहले से ही पता था कि ऐसा होना है। मैंने सोचा था कि अगर फिल्म दो-तीन दिन भी चल जाए तो हमारा काम हो जाएगा। इंटरनेट पर एक बार कोई चीज आ जाए, तो उसे पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता। इनके सलाहकार … Read more

वन, वन्यजीव और पर्यावरण कानूनों के प्रभावी पालन के लिए न्यायिक-प्रशासनिक समन्वय पर जोर

वन, वन्यजीव और पर्यावरण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए न्यायिक एवं प्रशासनिक समन्वय ज़रूरी मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी में दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न भोपाल मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी (एमपीएसजेए), जबलपुर में 4 एवं 5 जुलाई को ‘वन, वन्यजीव और पर्यावरण कानूनों से जुड़े प्रमुख मुद्दे’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वन विभाग के 15 वरिष्ठ अधिकारियों, 45 न्यायिक मजिस्ट्रेटों तथा 15 सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारियों (एडीपीओ) ने सहभागिता की। कार्यशाला का उद्देश्य वन, वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में न्यायिक एवं प्रशासनिक समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाना था। प्रशिक्षण से वन अधिकारियों के कौशल का उन्नयन होगा, क्षेत्रीय कार्यों के निष्पादन में दक्षता बढ़ेगी तथा वन्यजीव अपराधों की प्रभावी विवेचना और डिजिटल साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में सहायता मिलेगी। इससे न्यायालयों में शासन का पक्ष और अधिक सशक्त रूप से रखा जा सकेगा। कार्यशाला का शुभारंभ मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने किया। उद्घाटन सत्र में न्यायिक नवाचारों एवं संस्थागत समन्वय के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण तथा पर्यावरण न्याय को सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक श्रीमती समिता राजोरा, मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक उमेश पांडे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) मनोज अग्रवाल, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व निदेशक हेमंत शर्मा सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे। न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति न्यायपालिका की संवेदनशील भूमिका एवं न्यायिक नवाचारों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2017 से अब तक उनके न्यायिक आदेशों के माध्यम से लगभग 3,500 मामलों में वृक्षारोपण के निर्देश दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप करीब 30 हजार पौधों का रोपण हुआ। उन्होंने बताया कि 129 मामलों में जमानत की विशेष शर्त के रूप में वाटर हार्वेस्टिंग कराने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सकारात्मक विचार के अंकुरण और जन-जागरूकता का भी माध्यम है। दो दिवसीय तकनीकी सत्रों में वन भूमि विवाद, जैव विविधता अधिनियम-2002, मध्यप्रदेश वन उपज अधिनियम, वन्यजीव फोरेंसिक तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के महत्व जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही वन अपराधों की जांच, तलाशी, जब्ती तथा वन्यजीव अपराधों से संबंधित मामलों में शिकायत दर्ज करने की प्रक्रियाओं पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।  

अमृतसर में 11 किलो हेरोइन जब्त, पंजाब पुलिस का ड्रग्स माफिया पर बड़ा वार; तस्करी नेटवर्क खंगालने में जुटी जांच एजेंसियां

 अमृतसर पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना घरिंडा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 11 किलो 960 ग्राम हेरोइन बरामद की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पंजाब को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए यह बड़ी खेप बरामद की गई। बरामद हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है। तस्करी नेटवर्क की जांच शुरू पुलिस ने इस मामले में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान तक पहुंचाया जाना था। जांच एजेंसियां इस तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुट गई हैं। पुलिस का सख्त संदेश और जनता से अपील पंजाब पुलिस का कहना है कि राज्य में नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और किसी भी सूरत में नशे के कारोबार को पनपने नहीं दिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी और इस अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास किसी प्रकार की नशा तस्करी की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि समाज को नशे के जाल से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।  

CM डॉ. मोहन यादव बोले- ग्वालियर-चंबल क्षेत्र अब विकास की नई रफ्तार पकड़ेगा

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र अब और तेज गति से बढ़ेगा आगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सरकार पर्यटन विकास को दे रही नई दिशा  ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के लिए बेहद गौरव का विषय है कि आज शिवपुरी में डिफेंस सेक्टर के 2500 करोड़ रुपए के एक बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत होने जा रही है। यहां आज ही 211 करोड़ रुपये की लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि पूजन भी हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार के समावेशी विकास लक्ष्यों और निजी क्षेत्र की भागीदारी से ग्वालियर-चंबल का यह पूरा क्षेत्र अब और तेज गति से आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार पर्यटन को प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार का सशक्त आधार बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विशेष रूप से वन एवं प्राकृतिक पर्यटन की अपार संभावनाओं वाले क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलें और क्षेत्रीय विकास को गति मिले। उन्होंने कहा कि हम केवल पर्यटन सर्किट विकसित करने तक ही सीमित नहीं हैं, हरेक पर्यटन स्थल की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं के अनुरूप वहां समग्र विकास का प्रबंधन भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे टाइगर रिजर्व और प्राकृतिक धरोहर प्रदेश की बड़ी ताकत हैं, जिन्हें विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में चल रही केन–बेतवा नदी लिंक तथा पार्वती–कालीसिंध–चंबल नदी लिंक परियोजनाएं विकास की नई इबारत लिखेंगी। इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से शिवपुरी सहित पूरे क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल, उद्योग, पशुपालन और कृषि क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पर्यटन, जल प्रबंधन और अधोसंरचना विकास को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा रही है, जिससे किसानों की समृद्धि, स्थानीय रोजगार और क्षेत्र के संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।  

PM जनमन आवास योजना से बदली सरिता बैगा की जिंदगी, कच्चे घर की जगह मिला पक्का आशियाना

कच्चे घर से पक्के आशियाने तक : पीएम जनमन आवास योजना ने सरिता बैगा के जीवन में भरी खुशियों की नई रोशनी साय सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं का धरातल पर असर; पीएम जनमन आवास और महतारी वंदन योजना से आदिवासी परिवार को मिला सुरक्षित घर, आर्थिक संबल और सम्मानपूर्ण जीवन रायपुर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जब अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है, तब वह केवल एक योजना नहीं बल्कि किसी परिवार के जीवन में परिवर्तन की नई कहानी बन जाती है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी की श्रीमती सरिता बैगा का जीवन इसका प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना और महतारी वंदन योजना के समन्वित लाभ से उनका परिवार आज सुरक्षित आवास, आर्थिक संबल और सम्मानजनक जीवन की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।       पहले सरिता बैगा का परिवार एक कच्चे मकान में रहता था। बरसात शुरू होते ही पूरे परिवार की चिंता बढ़ जाती थी। खपरैल की छत से पानी टपकता था, दीवारों में नमी भर जाती थी और हर वर्ष छत की मरम्मत तथा खपरैल बदलने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। छोटे बच्चों के साथ बारिश के दिनों में सुरक्षित रहना भी एक बड़ी चुनौती थी।      मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप सरिता बैगा के परिवार को पीएम जनमन आवास योजना के तहत पक्का आवास स्वीकृत हुआ। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत तथा ग्रामीण विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से योजना का लाभ समय पर मिला और आज उनका परिवार एक मजबूत, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त पक्के घर में रह रहा है।     नए आवास ने केवल उनके रहने की व्यवस्था नहीं बदली, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना भी बढ़ाई है। अब बारिश का मौसम उनके लिए चिंता नहीं, बल्कि राहत और सुकून लेकर आता है। बच्चे सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर रहे हैं और परिवार सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहा है।      सरिता बैगा को राज्य शासन की महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता भी नियमित रूप से प्राप्त हो रही है। इस राशि से परिवार के दैनिक खर्चों, बच्चों की आवश्यकताओं और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव आया है।     सरिता बैगा बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका परिवार भी पक्के घर में रहेगा। आज शासन की योजनाओं ने उनके सपनों को साकार कर दिया है। वे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार की जनहितैषी योजनाओं ने उनके परिवार को सुरक्षित आवास, आर्थिक सहयोग और बेहतर भविष्य का विश्वास दिया है।     ग्राम पंडरीपानी में पीएम जनमन आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास विभाग, जनपद पंचायत गौरेला, ग्राम पंचायत तथा संबंधित मैदानी अमले की सक्रिय भूमिका रही। योजनाओं के पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन से पात्र हितग्राहियों को लाभ मिल रहा है, जिससे विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। सरिता बैगा की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन केवल आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि गरीब और वंचित परिवारों के जीवन में स्थायी परिवर्तन लाकर उन्हें सम्मान, सुरक्षा और विकास की नई दिशा भी प्रदान करता है।

NQAS मूल्यांकन में चमका PHC चेरपाल, मरीजों को अब मिलेंगी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं

गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बना PHC चेरपाल NQAS मूल्यांकन में उत्कृष्ट प्रदर्शन, मरीजों को मिलेंगी और बेहतर सुविधाएं रायपुर बीजापुर जिले का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) चेरपाल अब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बन गया है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत हुए बाह्य मूल्यांकन में स्वास्थ्य केंद्र ने सफलतापूर्वक सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता स्वास्थ्य विभाग की बेहतर कार्यप्रणाली, टीमवर्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने की प्रतिबद्धता का परिणाम है। दो दिनों तक हुआ विस्तृत मूल्यांकन 03 और 04 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC), नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने PHC चेरपाल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान सामान्य प्रशासन, ओपीडी, आईपीडी, प्रयोगशाला, लेबर रूम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन, संक्रमण नियंत्रण, दवा प्रबंधन, स्वच्छता, मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं तथा अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने निभाई जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन तथा खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) के नेतृत्व में पूरी स्वास्थ्य टीम ने मूल्यांकन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO), ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारियों, मितानिनों तथा अन्य कर्मचारियों ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए मूल्यांकन दल को सभी आवश्यक जानकारी और अभिलेख उपलब्ध कराए। गुणवत्ता सुधार की दिशा में मजबूत पहल स्वास्थ्य विभाग ने मूल्यांकन दल द्वारा दिए गए सुझावों को भी गंभीरता से लिया है। इन सुझावों के अनुरूप आवश्यक सुधार किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को और अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। ग्रामीणों को मिलेगा बेहतर इलाज PHC चेरपाल की यह उपलब्धि केवल एक मूल्यांकन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ क्षेत्र के हजारों लोगों को मिलेगा। बेहतर व्यवस्थाओं, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कारण मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी और सुविधाजनक होगा। इससे लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी और मजबूत होगा। गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की ओर बढ़ता बीजापुर PHC चेरपाल की सफलता यह साबित करती है कि समर्पित टीमवर्क, बेहतर प्रबंधन और निरंतर प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यह उपलब्धि बीजापुर जिले में गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

मध्य प्रदेश को मिलेगी नई औद्योगिक पहचान, CM डॉ. मोहन यादव करेंगे स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का शिलान्यास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क का भूमि-पूजन और शिलान्यास – भोपाल को मिलेगा 25 एकड़ क्षेत्रफल का विश्वस्तरीय कन्वेंशन और एग्जिबिशन सेंटर – ग्रीन और स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क से औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक एवं निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिये औद्योगिक अधोसंरचना के विस्तार, निवेश-अनुकूल वातावरण के निर्माण और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से निरंतर प्रभावी पहल की जा रही हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 6 जुलाई को सतगढ़ी में विकसित किए जा रहे 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क' का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास करेंगे। राष्ट्रवादी चिंतक एवं भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। कार्यक्रम में देश और प्रदेश के लगभग 200 से अधिक प्रमुख उद्योगपति, निवेशक और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। लगभग 173 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का नया आधार बनेगा। परियोजना में आधुनिक औद्योगिक अधोसंरचना, उत्कृष्ट सड़क एवं परिवहन संपर्क, आईटी एवं एआई आधारित सुविधाएं, लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग कॉम्प्लेक्स तथा भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, जिससे निवेशकों को विश्वस्तरीय औद्योगिक वातावरण उपलब्ध हो सके। यह परियोजना 'वर्क-लिव-ग्रो' मॉडल पर आधारित होगी, जहां उद्योगों के साथ कौशल विकास, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिए आवश्यक सुविधाओं का समन्वित विकास किया जाएगा। पार्क में उच्च मूल्य विनिर्माण, गारमेंट, टॉयज, आईटी, एआई, लॉजिस्टिक्स तथा उभरती तकनीकों से जुड़े उद्योगों को स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। इससे राजधानी में विविध औद्योगिक क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित होगा और नए निवेश के अवसर सृजित होंगे। 25 एकड़ में बन रहा परिसर सतगढ़ी में विकसित हो रहा यह स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क कोलार क्षेत्र के विकास की दिशा भी बदलेगा। अब तक मुख्य रूप से आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित कोलार आने वाले समय में निवेश, उद्योग और रोजगार का नया केंद्र बनेगा। परियोजना से 15 हजार से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है, जिनका लाभ विशेष रूप से भोपाल और आसपास के युवाओं को मिलेगा। इसके साथ ही बढ़ती औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्राप्त होगी। परियोजना की एक विशेष उपलब्धि यहां विकसित किया जाने वाला विश्वस्तरीय कन्वेंशन एवं एग्जिबिशन सेंटर होगा। लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह परिसर 10 हजार से अधिक लोगों की क्षमता वाला होगा, जहां राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के निवेशक सम्मेलन, औद्योगिक प्रदर्शनियां, व्यापारिक आयोजन और वैश्विक व्यवसायिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। इससे भोपाल को मध्य भारत के प्रमुख एमआईसीई (मीटिंग्स, इंसेन्टिव्स, कॉन्फ्रेंसेस एण्ड एग्जिबिशन) गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार मिलेगा। कुशल प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा  रणनीतिक दृष्टि से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सतगढ़ी क्षेत्र राजा भोज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, कोलार रोड तथा प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास से बेहतर संपर्क के कारण निवेशकों के लिए सुविधाजनक औद्योगिक गंतव्य के रूप में विकसित होगा। यह कनेक्टिविटी उद्योगों की स्थापना, लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पार्क को पर्यावरण अनुकूल एवं स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत एससीएडीए आधारित जल प्रबंधन प्रणाली, जल एवं सीवेज शोधन संयंत्र, ऑटोमेटेड एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था तथा अत्याधुनिक यूटिलिटी कॉरिडोर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण-संरक्षण और संसाधनों के कुशल प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क राजधानी भोपाल में औद्योगिक निवेश, आधुनिक विनिर्माण और रोजगार सृजन के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह परियोजना औद्योगिक अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के साथ प्रदेश की निवेश क्षमता को और मजबूत करेगी तथा भोपाल को मध्य भारत के प्रमुख औद्योगिक एवं व्यावसायिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पौधरोपण महाभियान-2026: 12 जुलाई को योगी सरकार का मेगा अभियान, हरियाली के नाम बनेगा नया इतिहास

पौधरोपण में 12 जुलाई को फिर नया इतिहास रचेगी योगी सरकार  पौधरोपण महाभियान-2026  जनसहभागिता से रविवार को पूरे प्रदेश में एक दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे अभियान की सफलता के लिए बैठक कर जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे मुख्यमंत्री, अधिकारियों को भी देंगे दिशा निर्देश  वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग लगाएगा सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधे, ग्राम्य विकास 10 करोड़ पौधरोपण करेगा लखनऊ  योगी सरकार 12 जुलाई (रविवार) को फिर नया इतिहास रचेगी। पौधरोपण महाभियान-2026 के तहत जनसहभागिता से पूरे प्रदेश में एक दिन में 35 करोड़ पौधे रोपे जाएंगे। इसके लिए नोडल (वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग) ने तैयारी शुरू कर दी है। अभियान की सफलता के लिए मुख्यमंत्री सोमवार से जनप्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और अधिकारियों की भी निरंतर बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। वहीं वन मंत्री भी अन्य विभागों के मंत्रियों के साथ बैठक कर इसकी सफलता को लेकर विचार-विमर्श करेंगे।  जनसहभागिता से फिर होगा अभूतपूर्व आयोजन मुख्यमंत्री के निर्देश पर केंद्र-प्रदेश सरकार के विभागों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्कूलों-कॉलेजों समेत व्यापक जनसहभागिता से उत्सव के रूप में महाभियान चलेगा। व्यापक जनसहभागिता के साथ ही केंद्र व प्रदेश सरकार के विभाग मिलकर इस वर्ष 35 करोड़ पौधरोपण करेंगे। वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग लगाएगा सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधे वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग सर्वाधिक 15.50 करोड़ पौधरोपण करेगा। ग्राम्य विकास विभाग 10 करोड़,  कृषि विभाग 3.25 करोड़, उद्यान 1.50 करोड़, पंचायती राज विभाग 1.22 करोड़ पौधे लगाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे भी 5.50 लाख पौधे लगेंगे। नोडल विभाग (वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन) होगा। इसे लेकर जिला वृक्षारोपण समिति की नियमित बैठकें भी चल रही हैं।  कई विशिष्ट वनों की होगी शुरुआत, सार्वजनिक स्थलों पर भी लगेंगे छायादार पौधे योगी सरकार प्रत्येक वर्ष नवीन विशिष्ट वन स्थापित करती है। इस थीम के अंतर्गत पौधरोपण महाभियान-2026 में इस वर्ष समरस वन, समृद्धि वन, कृषि वन, ऊर्जा वन, कपि वन समेत अनेक नवीन वन तैयार किए जाएंगे। महर्षि चरक औषधि वन की शुरुआत 5 जून (विश्व पर्यावरण दिवस) पर की गई है। अभियान का प्रमुख हिस्सा मिशन छाया, अविरल धारा पौधरोपण, सहजन भंडारा, आम भंडारा भी होगा। मिशन छाया के तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे व सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा 15 अगस्त को वंदे मातरम वाटिका, 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधरोपण व 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ भी लगाया जाएगा।  52.44 करोड़ पौधे कराए जा रहे तैयार  वृहद पौधरोपण के लिए वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग निरंतर बैठक व संवाद स्थापित कर रहा है। इसके साथ ही पौधों को लेकर भी विभाग की तैयारी चल रही है। वन विभाग की लगभग दो हजार नर्सरी में इस वर्ष 52.44 करोड़ पौधे तैयार किए गए हैं। इन पौधों को भी अब वितरित किया जाएगा।  गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे लगेंगे 5.50 लाख पौधे  प्रदेश के एक्सप्रेसवे के किनारे भी पौधरोपण किया जाएगा। इस बार विशेष रूप से गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे पौधे लगाए जाएंगे। 594 किमी. लंबे गंगा एक्सप्रेसवे की दोनों पटरियों पर वन विभाग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.50 लाख पौधरोपण करेगा। दोनों पटरी पर हर एक किमी. पर हरिशंकरी रोपा जाएगा, जबकि बीच-बीच में पीपल, पाकड़, बरगद, नीम, गूलर, महुआ, आम, अर्जुन, चिलबिल, अमलतास, कचनार, जकरकंडा, गुलमोहर आदि प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनकी सुरक्षा के लिए तार से फेंसिंग व सिंचाई के लिए ड्रिप इरीगेशन सुनिश्चित की जाएगी।  मुख्यमंत्री का निर्देश- जनसहभागिता से मनाया जाए उत्सव  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पौधरोपण महाभियान-2026 की तैयारी को लेकर निरंतर बैठक करेंगे। वहीं वन मंत्री अन्य विभागों के मंत्रियों, अधिकारियों के साथ ही इसकी सफलता को लेकर विचार-विमर्श करेंगे। मुख्यमंत्री ने जनसहभागिता पर विशेष जोर देते हुए इसे उत्सव के रूप में मनाने का निर्देश दिया है। सीएम योगी ने महाभियान में सभी जनप्रतिनिधियों, संस्थाओं, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, युवक-महिला मंगल दल, रोटरी-लायंस, इको क्लब, एफपीओ, व्यापार मंडल आदि की भी सहभागिता अनिवार्य रूप से करने के लिए वन विभाग को निर्देश दिया है। कृषि विभाग की देखरेख में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पंजीकृत किसान भी महाभियान का हिस्सा बनेंगे।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 12 जुलाई को पौधरोपण महाभियान-2026 का आयोजन होगा। वन विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। इस बार भी एक दिन में 35 करोड़ पौधरोपण होगा। सभी विभागों, संस्थाओं, स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संगठनों आदि के सहयोग से व्यापक जनसहभागिता के साथ इस महाभियान को उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। विभागों, मंडलों व जनपदों के लक्ष्य प्रस्तावित किए जा चुके हैं। इस बार भी कई विशिष्ट वनों की शुरुआत होगी।  सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष  वन विभाग, उत्तर प्रदेश

विकास का नया सेतुः जब पिनगुंडा नाला पर बनी पुलिया ने बदली ओरछा की तकदीर

​रायपुर अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में जब मानसून दस्तक देता था, तो वह अपने साथ प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि ओरछा क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए दुश्वारियों का दौर भी लेकर आता था। हर साल बारिश के चार महीने यहाँ के लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होते थे। लेकिन इस साल तस्वीर जुदा है। नारायणपुर के ओरछा क्षेत्र में पिनगुंडा नाला पर बनी नई बॉक्स पुलिया ने विकास की एक नई इबारत लिख दी है। यह पुलिया सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए खुशहाली और कनेक्टिविटी का एक नया 'लाइफलाइन' बन चुकी है। ​संकट का सबब था पिनगुंडा नाला ​पल्ली-छोटेडोंगर-ओरछा मार्ग पर स्थित पिनगुंडा नाला सालों से नारायणपुर और ओरछा के बीच एक अभेद्य दीवार बना हुआ था। मानसून के आते ही नाला उफान पर आ जाता, जिससे तहसील मुख्यालय ओरछा सहित दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट जाता था। उफनते नाले के कारण एम्बुलेंस नहीं आ पाती थी और गंभीर मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाते थे। नदी-नाले पार करने के जोखिम के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई हफ्तों बाधित रहती थी। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो जाती थी और स्थानीय ग्रामीणों की कृषि उपज मंडियों तक नहीं पहुँच पाती थी। ​ 258 लाख रुपए की लागत से मिला स्थायी समाधान ​ग्रामीणों की इस दशकों पुरानी और बुनियादी समस्या को संवेदनशीलता से लेते हुए शासन द्वारा यहाँ एक सुदृढ़ पुलिया निर्माण की कार्ययोजना तैयार की गई। इस आधुनिक बॉक्स ब्रिज के बन जाने से बारिश के दिनों में भी नारायणपुर से ओरछा तक का मार्ग पूरी तरह निर्बाध और सुरक्षित हो गया है। घंटों का इंतजार और मीलों लंबा वैकल्पिक सफर अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। ​बदलाव की बयार: बहुआयामी लाभ  ​ इस एकल परियोजना ने ओरछा क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। सुरक्षित और सुगम मार्ग मिलने से ग्रामीणों के ईंधन और कीमती समय, दोनों की बचत हो रही है। आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ अब बिना किसी रुकावट के सीधे गांवों तक पहुँच रही हैं। साथ ही शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन भी आसान हुआ है। इसके साथ ही कृषि उपजों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं का परिवहन आसान होने से स्थानीय व्यापार को एक नई गति मिली है। स्थानीय ​ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल नहीं, हमारा बेहतर भविष्य है। यह निर्माण उनके जीवन की सबसे बड़ी सौगातों में से एक है। सालों से हम इस नाले के सामने बेबस थे। बीमारों को खाट पर लादकर ले जाना पड़ता था। अब इस पुलिया के बनने से हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा डर दूर हो गया है। यह पुल सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के बेहतर भविष्य का रास्ता है।

भागलपुर में 50 से अधिक शिक्षकों पर खतरा: शिक्षा विभाग ने सूची तैयार करने के दिए आदेश

भागलपुर  बिहार में तीसरे चरण की शिक्षक नियुक्ति (TRE-3) में 18 माह के डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक के सख्त निर्देश के बाद भागलपुर जिला शिक्षा विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। विभाग ने साफ किया है कि विज्ञापन की शर्तों के अनुसार यह डिग्री अब मान्य नहीं होगी। एनआईओएस की डिग्री वाले शिक्षक निशाने पर शिक्षा विभाग के 7 दिसंबर 2023 के आदेश और शिक्षक नियुक्ति विज्ञापन संख्या 22/2024 की शर्तों के अनुसार, एनआईओएस (NIOS) से प्राप्त 18 माह की डीएलएड उपाधि विद्यालय अध्यापक पद के लिए वैध नहीं है। इसी आधार पर सभी जिलों को ऐसे शिक्षकों की सेवा तत्काल समाप्त करने का निर्देश दिया गया है। जिला शिक्षा विभाग ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEOs) को सूची सौंपने को कहा है। विज्ञापन की शर्तों के तहत बड़ा फैसला     तीसरे चरण (TRE-3) में बहाल हुए शिक्षकों में से जिन्होंने एनआईओएस (NIOS) से 18 महीने का डीएलएड किया है, उनकी सेवा समाप्त होगी।     शिक्षा विभाग के पुराने आदेश और विज्ञापन संख्या 22/2024 की शर्तों के तहत यह प्रशिक्षण अब विद्यालय अध्यापक पद के लिए मान्य नहीं है। प्रखंड स्तर पर सूची बनाने के निर्देश     प्राथमिक शिक्षा निदेशक के निर्देश पर भागलपुर जिला शिक्षा विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है।     सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत ऐसे शिक्षकों की भौतिक जांच कर जल्द से जल्द सूची सौंपने का आदेश दिया गया है। भागलपुर में 50 से अधिक शिक्षकों पर गाज प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत उन शिक्षकों का भौतिक सत्यापन कर जल्द ही अंतिम रिपोर्ट जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराएंगे, जिन्होंने इस प्रशिक्षण के आधार पर नौकरी पाई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अकेले भागलपुर जिले में ही 50 से अधिक शिक्षक इस बड़ी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं, जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है। राज्यभर में तीन हजार शिक्षकों की जाएगी नौकरी इस प्रशासनिक आदेश के बाद राज्य स्तर पर करीब तीन हजार शिक्षकों की नौकरी पर इसका सीधा और बड़ा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। कोर्ट और विभाग के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए अब इन शिक्षकों की छंटनी की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, जिससे टीआरई-3 के तहत बहाल हुए अभ्यर्थियों की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं।