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पंजाब कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल मिशन पर भूपेश बघेल, चन्नी-वड़िंग विवाद खत्म कराने की कोशिश

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले उभरी अंदरूनी खींचतान को शांत करने के लिए पार्टी हाईकमान ने सक्रियता बढ़ा दी है। पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल सोमवार दोपहर तकरीबन 3 बजे चंडीगढ़ पहुंचेंगे। सूत्रों के अनुसार वह अगले करीब पांच दिनों तक पंजाब में रहकर पार्टी नेताओं से अलग-अलग बैठकें करेंगे और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा करेंगे। छत्तीसगढ़ से रवाना होने से पहले भूपेश सिंह बघेल ने कहा— ""पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर मैं पंजाब दौरे पर जा रहा हूं। चुनाव को लेकर कांग्रेस की ओर से कमेटियां गठित की जा चुकी हैं। यूथ कांग्रेस के चुनाव भी हो चुके हैं। पंजाब के सभी साथियों से मिलकर चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी।"" सूत्रों के मुताबिक, चुनाव समिति के गठन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की नाराजगी के बीच हाईकमान डैमेज कंट्रोल में जुटा है। इसी क्रम में भूपेश बघेल सबसे पहले चन्नी और कुछ वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। इसके बाद उनकी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत अन्य नेताओं के साथ भी बैठकें प्रस्तावित हैं। संगठन मजबूत करने पर हाईकमान का फोकस बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल चुनाव समिति में किसी तरह के बदलाव के पक्ष में नहीं है। पार्टी का फोकस संगठन को एकजुट कर विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देना है। इस बीच एआईसीसी के पंजाब के तीन सह प्रभारी हीना कावरे, रविंदर डलवी और सूरज ठाकुर भी चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं। सभी नेता प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालात और संगठन की स्थिति का फीडबैक लेंगे। हाईकमान मतभेद दूर करने में जुटा सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने चुनावी रणनीति को लेकर नेताओं से वन-टू-वन मुलाकातों का दौर शुरू कर दिया है। दूसरी ओर चरणजीत सिंह चन्नी भी अपने समर्थक नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। ऐसे में हाईकमान की कोशिश दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर कर चुनाव से पहले एकजुटता का संदेश देने की है। कांग्रेस नेतृत्व राहुल गांधी के विदेश दौरे से 7 जुलाई तक लौटने से पहले पंजाब के हालात पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना चाहता है। भूपेश बघेल दौरे के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को पंजाब की राजनीतिक स्थिति और चुनावी तैयारियों पर रिपोर्ट सौंपेंगे। दिल्ली में रवाना होने से पहले भूपेश बघेल ने भी कहा कि कांग्रेस में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है और सभी नेता मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

CM डॉ. मोहन यादव ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को किया नमन, बोले- मध्य प्रदेश में इसी महीने लागू होगा UCC

सीएम डॉ. यादव ने जनसंघ के संस्थापक मुखर्जी को किया नमन, कहा- एमपी में इसी महीने लागू होगा UCC – भारतीय जनसंघ के संस्थापक-विचारक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की 125 वीं जयंती – राजधानी भोपाल में आयोजित हुआ कार्यक्रम, सीएम डॉ. यादव ने किया माल्यार्पण – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व में बन रही भारत की अलग पहचान भोपाल  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 6 जुलाई को भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं विचारक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें नमन किया। सीएम डॉ. यादव ने भोपाल में लालघाटी पर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी हमारी यादों में बसे हुए हैं। हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि मध्यप्रदेश भी उन गौरवशाली राज्यों में शामिल हो रहा है, जहां एक संविधान लागू है। डॉ. मुखर्जी ने आजादी के समय बनने वाले संविधान के अंदर की कमी को परिलक्षित करते हुए कहा था कि देश एक निशान-एक प्रधान-एक विधान से चलना चाहिए। मध्यप्रदेश भी इसी महीने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की ओर बढ़ रहा है।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश वह सब करने जा रहा है, जो देश के लिए जरूरी है। उनके नेतृत्व में भारत दुनिया में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। डॉ. मुखर्जी के उदात्त विचार को लेकर हम औद्योगिकीकरण की ओर बढ़ रहे हैं। हम हर वर्ग के जीवन में कल्याण करने की तरफ बढ़ रहे हैं। डॉ. मुखर्जी जिस प्रकार के भारत की कल्पना करते थे, हम वह राष्ट्र बनाने की ओर अग्रसर हैं। मध्यप्रदेश ने पहली बार डिफेंस के सेक्टर में स्वर्णिम इतिहास लिखा है। अब हमारे प्रदेश के अंदर तमाम प्रकार के रक्षा उत्पाद बनेंगे। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश को सर्वांगीण रूप से सशक्त करते हुए, सक्षम करते हुए विकास के पथ पर आगे बढ़ेंगे।  एमपी में बेरोजगारी की दर सबसे कम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज मैं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती को सार्थक करते हुए सतगढ़ी में बहुत बड़े इंडस्ट्रियल पार्क का उद्घाटन करूंगा। इस पार्क में रहना, खाना, आराम करना, रोजगार पाना समग्र रूप से सुगम होगा। भोपाल बदलते समय में एक समृद्धशाली आर्थिक राजधानी बनने जा रहा है। विकास की आधारशिला रखने के लिए डॉ. मुखर्जी की जयंती से बड़ा दिन और कौन सा हो सकता है। मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा कंवेंशन सेंटर भोपाल में बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी दुनिया के अतिथि भारत आते हैं और सहजता से सारे कार्यक्रम संपन्न होते हैं। इसलिए अच्छे कामों के संकल्प के लिए हम कुशाभाऊ ठाकरे सभागार के पास भी कंवेंशन सेंटर बना रहे हैं। इसमें 5 हजार लोगों के बैठने की क्षमता होगी। जबकि, सतगढ़ी का कंवेंशन सेंटर 10 से 15 हजार लोगों की बैठक क्षमता वाला होगा। आज मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि पूरे देश में मध्यप्रदेश वो स्थान है, जहां बेरोजगारी की दर सबसे कम है। प्रदेश हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।

MSME विभाग के कर्मचारियों को बड़ी सौगात! 10 साल बाद 217 प्रमोशन, 116 नए पदों पर होगी भर्ती

भोपाल मध्य प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग में लंबे समय से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया आखिरकार आगे बढ़ गई है। करीब दस साल बाद विभाग में बड़े स्तर पर कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। विभाग की ओर से कुल 217 कर्मचारियों के प्रमोशन के आदेश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही विभाग में सीधी भर्ती के लिए 116 नए पद भी उपलब्ध हो गए हैं, जिन पर आने वाले समय में नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह प्रशासनिक निर्णय अहम माना जा रहा है। विभागीय स्तर पर इसे लंबित मामलों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से विभिन्न विभागों में लंबित पदोन्नति मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए गए थे। सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देश मिलने के बाद उद्योग संचालनालय ने अलग-अलग संवर्गों की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित की। बैठक में सेवा अभिलेख, वरिष्ठता सूची और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं की समीक्षा के बाद पात्र कर्मचारियों के नामों पर सहमति बनी। इसके आधार पर विभाग ने रविवार को पदोन्नति संबंधी आदेश जारी कर दिए। 116 नए पदों पर जल्द शुरू होगी भर्ती विभाग का कहना है कि पदोन्नति के बाद सीधी भर्ती के 116 नए पद उपलब्ध हो गए हैं। इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इससे विभाग में लंबे समय से रिक्त पदों को भरने का रास्ता साफ होगा और नए अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलेगा। कर्मचारियों को 10 साल बाद मिली पदोन्नति एमएसएमई विभाग में करीब एक दशक बाद बड़े पैमाने पर पदोन्नतियां होने से कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। विभागीय कर्मचारी और कर्मचारी संगठनों ने पदोन्नति आदेश जारी होने पर राज्य सरकार के प्रति आभार जताया है। लंबे समय से लंबित पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को इससे बड़ी राहत मिली है। अधिकारियों की डीपीसी भी जल्द विभाग ने अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की तैयारी भी पूरी कर ली है। अधिकारियों की पदोन्नति के लिए जल्द ही मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से डीपीसी बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव है। इसके बाद अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। जारी आदेश के मुताबिक सबसे वरिष्ठ श्रेणी में अधीक्षक के एक पद पर पदोन्नति की गई है। इसके अलावा सहायक अधीक्षक के तीन पदों पर कर्मचारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। सहायक वर्ग-1 में 43 कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया है, जबकि सबसे अधिक 131 कर्मचारियों को सहायक वर्ग-2 के पद पर प्रोन्नति मिली है। इसी तरह सहायक वर्ग-3 के 14 कर्मचारियों को भी उच्च पद पर पदोन्नत किया गया है। निज सहायक संवर्ग में 25 कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ मिला है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक सभी आदेश नियमानुसार जारी किए गए हैं और संबंधित कार्यालयों को इसकी सूचना भेज दी गई है। सूत्रों के अनुसार लंबे समय से पदोन्नति नहीं होने के कारण विभाग में कई पदों पर कार्यभार का असंतुलन बना हुआ था। वरिष्ठता के आधार पर आगे बढ़ने की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों में लगातार असंतोष भी देखा जा रहा था। कई कर्मचारी वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत थे, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही थी। अब बड़ी संख्या में पदोन्नतियां होने से विभागीय ढांचे में नई व्यवस्था लागू होगी और जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण भी किया जाएगा। इन पदोन्नतियों का एक बड़ा असर भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ा है। विभाग के अनुसार जब कर्मचारियों को उच्च पदों पर पदोन्नत किया गया तो निचले स्तर के कई पद रिक्त हो गए। ऐसे कुल 116 पद अब सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध हो गए हैं। विभाग ने संकेत दिए हैं कि इन पदों को जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। भर्ती की औपचारिकताओं को लेकर संबंधित एजेंसियों और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां प्रारंभ की जा रही हैं। इससे नए अभ्यर्थियों के लिए सरकारी सेवा में आने का अवसर भी बढ़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों पर नियुक्तियां होने से विभाग के विभिन्न कार्यालयों में लंबे समय से बनी स्टाफ की कमी भी काफी हद तक दूर हो सकेगी। वर्तमान में कई इकाइयों में सीमित कर्मचारियों के सहारे कामकाज संचालित किया जा रहा है। नई नियुक्तियों के बाद प्रशासनिक कार्यों की गति बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही विभिन्न योजनाओं के संचालन और उद्योगों से जुड़े मामलों के निस्तारण में भी सुविधा मिलने की संभावना है। विभागीय कर्मचारियों के बीच पदोन्नति आदेश जारी होने के बाद उत्साह का माहौल देखा गया। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्षों से लंबित प्रक्रिया पूरी होने से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को राहत मिली है। कई कर्मचारियों को लंबे इंतजार के बाद पहली बार पदोन्नति का लाभ मिला है। विभागीय स्तर पर इसे कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने वाला फैसला माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार पदोन्नति मिलने से कर्मचारियों की जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी और विभागीय कामकाज में अनुभव का बेहतर उपयोग हो सकेगा। एमएसएमई विभाग ने केवल कर्मचारियों की पदोन्नति तक ही प्रक्रिया सीमित नहीं रखी है। विभाग अब अधिकारियों के लंबित प्रमोशन पर भी काम कर रहा है। जानकारी के मुताबिक अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। इसके लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आयोग से बैठक की तारीख तय होने के बाद अधिकारियों के मामलों पर भी विचार किया जाएगा। विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होते ही अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़े आदेश भी जारी किए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार का उद्देश्य विभिन्न विभागों में लंबे समय से लंबित पदोन्नति मामलों का चरणबद्ध तरीके से समाधान करना है। इसी कड़ी में एमएसएमई विभाग की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभागीय स्तर पर वरिष्ठता सूची, रिक्त पदों की स्थिति और सेवा नियमों के अनुरूप आगे की प्रक्रियाएं भी जारी हैं। आने वाले समय में भर्ती और पदोन्नति दोनों मोर्चों पर विभाग में गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

मंत्री गजेंद्र यादव की घोषणा: गनियारी के सरकारी स्कूल का नाम होगा पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर

रायपुर. छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई को राज्य सरकार ने विशेष सम्मान देने की घोषणा की है. उनके सम्मान में गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम बदलकर “डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी” रखा जाएगा. स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने रविवार को गनियारी पहुंचकर श्रद्धांजलि सभा के दौरान यह घोषणा की. रायपुर एम्स में कई दिनों से जारी इलाज के बाद रविवार 6 जुलाई को  पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया. इस खबर से पूरे कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने एम्स पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की. परिजनों ने अंतिम संस्कार के लिए डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर को उनके गृहग्राम गनियारी लेकर पहुंचे. जहां मुक्तिधाम में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने भी कार्यक्रम में शामिल हुए.  सांस्कृतिक चेतना के स्वर्णिम अध्याय का अवसान शिक्षा मंत्री यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी वाणी और आजीवन समर्पण के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई. उनका निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है. उन्होंने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों एवं असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में संबल देने की प्रार्थना की. मंत्री यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा. उनकी कला साधना, संघर्ष और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी. छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा. शिक्षा मंत्री ने की घोषणा श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने डॉ. तीजन बाई के सम्मान में उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण “डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी” के नाम से किया जाएगा. राज्य सरकार का यह निर्णय महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगा. इससे भावी पीढ़ियों को उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व, जीवन-संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान से निरंतर प्रेरणा प्राप्त होती रहेगी.

Punjab-Haryana High Court में नई ग्रीन पार्किंग का शुभारंभ, 6.23 एकड़ में हाईटेक सुविधा, विजिटर्स को मिलेगी राहत

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट आने वाले वकीलों, वादकारियों (लिटिगेंट्स) और आम लोगों के लिए राहत की खबर है। चंडीगढ़ प्रशासन ने लंबे समय से लंबित पार्किंग परियोजना को पूरा कर हाईकोर्ट परिसर के पास नई ग्रीन सरफेस पार्किंग शुरू कर दी है। करीब 3.41 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस पार्किंग में एक समय में 750 से अधिक चारपहिया और दोपहिया वाहन खड़े किए जा सकेंगे। इसके शुरू होने से हाईकोर्ट के आसपास वर्षों से चली आ रही पार्किंग समस्या और ट्रैफिक जाम से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। 6.23 एकड़ क्षेत्र में विकसित की गई पार्किंग नई पार्किंग हाईकोर्ट से सटी 6.23 एकड़ जमीन पर विकसित की गई है। यह क्षेत्र पहले कच्चा और पथरीला था, जहां अनियमित तरीके से वाहन खड़े किए जाते थे। यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने इसे आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया है। पार्किंग में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन पेवर ब्लॉक्स लगाए गए हैं। इससे हरियाली बनी रहेगी और बारिश के पानी की निकासी भी बेहतर होगी। प्रशासन का कहना है कि इस तकनीक से जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। यूनेस्को हेरिटेज क्षेत्र होने के कारण बरती गई विशेष सावधानी यह पार्किंग कैपिटल कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में स्थित है, जिसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा प्राप्त है। इसी कारण निर्माण कार्य के दौरान हेरिटेज मानकों का विशेष ध्यान रखा गया। परियोजना का टेंडर सितंबर 2025 में जारी हुआ था और अक्टूबर 2025 से निर्माण कार्य शुरू किया गया। इस स्थान पर पहले से लोग वाहन खड़े करते थे, इसलिए काम चरणबद्ध तरीके से किया गया। अधिकांश निर्माण कार्य हाईकोर्ट की छुट्टियों के दौरान पूरा किया गया ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो। प्रशासन ने पार्किंग का डिजाइन तैयार करने के लिए लैंडस्केप कंसल्टेंट की भी मदद ली, जिससे कैपिटल कॉम्प्लेक्स की मूल संरचना और हेरिटेज वैल्यू प्रभावित न हो। रॉक गार्डन के पास भी बनेगी नई पार्किंग हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद यूटी प्रशासन अब रॉक गार्डन के समीप खाली पड़ी जमीन पर एक और पार्किंग विकसित करने की तैयारी कर रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 27 मई को प्रशासन को 90 दिनों के भीतर इस परियोजना पर काम शुरू करने के निर्देश दिए थे। प्रारंभिक सर्वे के अनुसार यहां 70 से 80 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना में एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। मौजूदा हरित क्षेत्र को सुरक्षित रखते हुए पार्किंग का डिजाइन तैयार किया जा रहा है। नई पार्किंग बनने के बाद हाईकोर्ट, रॉक गार्डन और आसपास के क्षेत्रों में पार्किंग व्यवस्था और अधिक सुचारु होने की उम्मीद है।  

करौली में किसानों का ऐलान, 30 दिन में मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा बड़ा आंदोलन

 करौली पांचना बांध को लेकर करौली जिले के गुनेसरी स्थित तुलसीपुरा मोड़ पर रविवार को किसानों की पंचायत हुई. जिसमें बांध से लिफ्ट परियोजना के माध्यम से 24 गांवों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई. पंचायत में गोपालपुर, धांधुपुरा, गुनेसरी, आनंदगढ़, देहमौली, कीरतपुरा, सायपुर, सेसरीपुरा, हजारीपुरा, रतनपुर, रघुवंशी, मोहनपुर, विंदापुरा, पितरामपुरा, भोलूपुरा, जगतपुरा, खांडेपुरा, नयाबास, खूबपुरा, रतिपुरा, मकनपुर, मल्हापुरा, हाथीपुरा समेत अन्य गांवों के पंच-पटेल और किसान शामिल हुए. इस दौरान किसानों ने कहा कि क्षेत्र में सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं होने से खेती प्रभावित हो रही है, इसलिए पांचना बांध से लिफ्ट परियोजना के जरिए पानी उपलब्ध कराया जाए. कल मंत्री को ज्ञापन सौपेगी समिति किसानों की पंचायत में 11 सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया. समिति सोमवार दोपहर 12 बजे करौली सर्किट हाउस में गृहमंत्री जवाहर सिंह बेढम और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत को ज्ञापन सौंपेगी. ज्ञापन में सरकार को मांगों के समाधान के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा. अगर इन 30 दिनों में किसानों की मांगे पूरी नहीं हुईं तो 30 दिन बाद तुलसीपुरा मोड़ पर पुन बड़ी बैठक आयोजित कर आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी. किसानों की बैठक में क्या निर्णय हुआ? हमारी संघर्ष समिति का नाम " जल संघर्ष समिति वजीरपुर रोड " रहेगा. आगे की कमान संभालने के लिए एक कार्य समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें 18-20 लोगों का प्रतिनिधित्व रहेगा. वर्तमान में क्षेत्र के लोगों को पानी के लिए दर दर की ठोकर खाना पड़ रहा है, निरंतर गिरते भूजल से भविष्य में पेयजल का संकट और भयावह हो जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ी को जल के लिए संघर्ष करना पड़ेगा. हमारी प्रमुख मांग- पशु व कृषि प्रधान क्षेत्र होने से आजीविका का एकमात्र साधन है, इसलिए पेयजल और सिचाई हेतु जल का प्रबंध किया जाए. इसके लिए पांचना लिफ्ट परियोजना का विस्तार कर उसी में जोड़ा जाना सबसे अच्छा विकल्प है. हमारी मांगों के लिए सरकार और प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने के लिए सोमवार 6 जुलाई को संबंधित मंत्री और सम्बन्धित प्रतिनिधियों को समिति के सदस्यों द्वारा ज्ञापन दिया जाएगा. किसान ने कहा कि अगर अगले 15 दिन में या 21 जुलाई तक ठोस कार्य योजना और कार्रवाई नहीं होती है तो 24 गांवों के नेतृत्व में   'जल संघर्ष समिति वजीरपुर रोड' के द्वारा आगामी कार्य योजना का निर्धारण किया जाएगा. इस सबंध में अलग से समय और स्थान का निर्धारण कर सूचित किया जाएगा. 28 गावों के पंच-पटेले हुए इकट्ठा किसान नेता सियाराम गुर्जर ने बताया कि यह कोई सभी नहीं थी. हमारे 28 गांवों के एक-एक दो-दो आदमी जो चुनिंदा लोग थे, वह यहां बुलाए थे. यह आम सभा नहीं थी. हम लोगों ने यहां डिसीजन लिया है. हमने एक 11 सदस्य एक संघर्ष समिति का गठन किया है. उसके बाद में हमारे सब पंच पटेलों ने ये निर्णय लिया है कि आगामी कोई तारीख अभी हमने फिक्स नहीं की. शायद हो सके तो महीना भर के बाद में. एक महीने के बाद में फिर दोबारा यही इसी जगह पर एक मीटिंग और लेंगे. सियाराम गुर्जर ने कहा कि हमारी डिमांड पानी की है. हमें पानी चाहिए. हमारा जल स्तर नीचे जा चुका है और जब तीन जगह पानी पांचने में जा सकता है तो हमारा भी हक बनता है कि हमें भी नहरों के द्वारा पानी चाहिए. किसान नेताओं ने आगामी तैयारी के बारे में बताया कि हम कल सिंचाई मंत्री और प्रभारी मंत्री जवाहर मैडम को कलेक्टेट में ज्ञापन सौंपेंगे और उसके बाद में वह हमें क्या आश्वस्त करते हैं, उनकी तरफ हम देखेंगे क्या होता है. किसान नेता राजेश चतुर्वेदी ने कहा कि आज हमारी मीटिंग हुई है. इसमें सिर्फ 28 गांव के पंच पटेलों को हमने एकत्रित किया है. ना कि हमारी कोई महापंचायत है, ना कोई बड़ी किसान पंचायत है. इसलिए आपको संख्या बल भी कम दिख रहा है और हमारी मेन डिमांड है पानी की. लिफ्ट योजना जब तीन जगह जा रही है तो चौथी जगह हमको भी क्यों नहीं मिला, पानी हमारा अधिकार है.

योगी सरकार की सौगात, 1.60 लाख होमगार्डों को कैशलेस इलाज और शिक्षकों को 1 करोड़ का बीमा

लखनऊ यूपी में अब होमगार्ड और उनके परिवार वालों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकेगी। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट सरकार इस पर फैसला लेने जा रही है। सोमवार को योगी कैबिनेट की बैठक में नई स्टार्टअप नीति, होमगार्ड को कैशलेज इलाज समेत 21 से ज्यादा प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। फैसले से यूपी के 1.60 लाख से ज्यादा होमगार्डों और उनके आश्रितों को फायदा होगा। कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रिसमूह की भी बैठक होगी। अगले छह महीने में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए मंत्री समूह की बैठक में उन्हें सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। जानकारी के मुताबिक तकरीबन 21 से ज्यादा प्रस्ताव कैबिनेट के सामने चर्चा के लिए रखे जाएंगे। यूपी लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की पेंशन बढ़ाए जाने का भी प्रस्ताव रखा जाएगा। कैबिनेट प्रदेश में स्टार्टअप को प्रोत्साहन के लिए नई स्टार्टअप नीति को भी मंजूरी देगी। नए स्टार्टअप के लिए सब्सिडी और कई तरह की रियायतें दी जाएंगी। विधानसभा चुनाव से पहले शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे का नाम बदलकर परशुरामपुरी रखे जाने का भी प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा। तीन जिलों में विश्वविद्यालय की स्थापना का भी प्रस्ताव है। कैबिनेट मदरसा शिक्षा परिषद के अनुदानित अरबी फारसी मदरसों में शिक्षकों को सेवानिवृत्ति की आयु से पहले असामयिक मृत्यु की दशा में देय ग्रेच्युटी के भुगतान का प्रस्ताव मंजूर हो सकता है। पांच लाख तक इलाज कैशलेस होमगार्ड को कैशलेस की सुविधा मिलने पर पांच लाख तक का इलाज मुफ्त हो सकेगा। यूपी में अभी करीब 1.18 लाख होमगार्ड हैं। 41 हजार से अधिक होमगार्ड की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस तरह इस सुविधा का लाभ करीब 1.60 लाख से अधिक होमगार्ड और उनके परिजनों को इसका लाभ मिलेगा। शिक्षकों और कर्मचारियों को एक करोड़ का दुर्घटना बीमा यूपी के शिक्षकों और परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक के कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये तक दुर्घटना बीमा का लाभ मिलेगा। सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के साथ एमओयू करेगा। इससे 10 लाख स्थाई व संविदा शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयां और अन्य कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। आठ जुलाई को वाराणसी में होने वाले कैशलेस चिकित्सा सुविधा कार्ड व डीबीटी वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में एसबीआई से एमओयू किया जाएगा। इससे 4.50 लाख स्थाई व 5.50 लाख अस्थाई शिक्षक-कर्मियों को इसका लाभ दिलाया जाएगा। जिन स्थाई कर्मियों का वेतन 10 हजार से अधिक है, उन्हें 10 लाख का ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस कवर दिया जाएगा। वहीं इसके साथ ही एक करोड़ का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर, एक करोड़ का स्थायी दिव्यांगता बीमा कवर और 1.60 करोड़ रुपये तक का एयर एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर दिया जाएगा। अनहोनी पर बच्चों की शिक्षा बेटियों की शादी का इंतजाम इसके साथ ही किसी भी तरह की अनहोनी की स्थिति में कर्मियों के बच्चों की शिक्षा व बेटियों की शादी के लिए एडऑन कवर भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे शिक्षक-कर्मियों के परिवार को भी आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। दूसरी ओर जिन कर्मियों का वेतन खाता पहले ही एसबीआई में खुला है उनका खाता सैलेरी पैकेज में बदला जाएगा। जिनका खाता एसबीआई में नहीं है, उन्हें इसमें खोलने को प्रेरित किया जाएगा, जिससे वह इसका लाभ ले सकें। संविदा कर्मियों का 30 लाख का दुर्घटना बीमा एमओयू के तहत 10 हजार से अधिक मासिक वेतन पाने वाले संविदा कर्मियों को 30 लाख व आंशिक विकलांगता होने पर 15 लाख का बीमा कवर दिया जाएगा। स्थायी विकलांगता की स्थिति में 30 लाख व आंशिक विकलांगता की स्थिति में 15 लाख का इंश्योरेंस कवर दिया जाएगा। वहीं इसके लिए एयर एक्सीडेंट की स्थिति में 30 लाख का इंश्योरेंस कवर दिया जाएगा। किसी भी तरह की अनहोनी होने पर बच्चों की पढ़ाई के लिए व बेटियों की शादी के लिए भी एडऑन कवर दिया जाएगा। 10 हजार से कम मासिक वेतन पाने वाले कर्मियों को जीरो बैलेंस खाते व रुपये डेबिट कार्ड के आधार पर एक लाख का इंश्योरेंस कवर दिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार, CM साय आज करेंगे नए निर्माण कार्यों का भूमिपूजन

रायपुर. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे. वह रायपुर के मेडिकल कॉलेज पहुंचेंगे. जहां वह  नए निर्माण कार्यों का भूमिपूजन करेंगे. कार्यक्रम के तहत 200 सीटर छात्रावास और कैंसर भवन की आधारशिला रखी जाएगी, जिससे मेडिकल छात्रों और चिकित्सकों को बेहतर आवासीय एवं स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी. कार्यक्रम में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, वन एवं रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल समेत विधायक राजेश मूणत, सुनील सोनी, अनुज शर्मा, पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, इंद्रकुमार साहू, सीजीएमएससीएल के अध्यक्ष दीपक म्हस्के और रायपुर महापौर मीनल चौबे सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। नए छात्रावास और आवासीय परिसरों के बनने से मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं और डॉक्टरों को बेहतर रहने की सुविधा मिलेगी। वहीं कैंसर भवन के विस्तार से अस्पताल में कैंसर मरीजों के इलाज की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इसके बाद दोपहर 3.15 बजे पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय में आयोजित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 125वीं पुण्यथिति कार्यक्रम में शामिल होंगे.

भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण पर प्रतिबंध

पटना बिहार में बनने वाले अलग-अलग टाउनशिप को लकर सम्राट चौधरी सरकार बेहद गंभीर नजर आ रही है। अब बिहार सरकार ने राज्य की चार ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। इसके तहत भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में बनने वाले सेटेलाइनट टाउनशिप में यह रोक 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। बिहार सरकार के नगर विकास विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। यह भी कहा गया है कि इस प्रतिबंध के दौरान अगर जमीन की किसी तरह की कोई खरीद-फरोख्त की जाती है तो इसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर विकास विभाग ने इस दौरान टाउनशिप में किसी प्रकार के नए निर्माण कार्यों पर भी रोक लगा दी है। जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही अब चारों टाउनशिप के मास्टर प्लान बनाने का काम शुरू होगा। विभाग ने शनिवार (4 जुलाई) को इस संबंध मं अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि प्रतिबंध के दौरान अधिसूचित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, जमीन हस्तांतरण, भूमि के विकास और भवन निर्माण से संबंधित किसी भी प्रकार के कार्य नहीं किए जा सकेंगे। नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई यह भी कहा गया है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में नियम का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह कार्यवाही शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम, 2012 की धारा 9(7) तथा बिहार शहरी आयोजना तथा विकास नियमावली, 2014 के तहत की है। इस निर्णय का उद्देश्य चारों शहरों के प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना और भविष्य की शहरी जरूरतों के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित करना है। बता दें कि डेहरी सहित कुल 12 टाउनशिप विकसित किया जा रहा है। सात शहरों में पहले लग चुकी है रोक बता दें कि इससे पहल राज्य सरकार ने इससे पहले 23 अप्रैल को 11 टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगाई थी। उसके बाद 24 अप्रैल को सात शहरों पटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में 31 मार्च 2027 तक रोक का आदेश जारी किया गया था। तब जमीन मालिकों ने आर्थिक जरूरत में जमीन बेचने की अनुमति मांगी। सरकार ने जून 2026 में राहत देते हुए आवास बोर्ड को जमीन खरीदने के लिए अधिकृत किया था। यानी इच्छुक किसान आवास बोर्ड मुख्यालय पटना में एमडी के नाम से जमीन बेचने का आवेदन दे सकते हैं। दस्तावेज की जांच के बाद संबधित जिलाधिकारी जमीन का मूल्य तय करेंगे। अब विभाग ने 4 जुलाई को चार टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक की अधिसूचना जारी की है।

वक्फ बोर्ड में पहली बार 2 हिंदू सदस्यों की एंट्री, MP सरकार ने मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव की नियुक्ति की

भोपाल  मध्य प्रदेश वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत अपने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। वक्फ बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्य शामिल किए गए हैं। यह कदम संशोधित कानून के तहत किए गए बदलावों के बाद उठाया गया है, जो गैर-मुस्लिम सदस्यों को राज्य वक्फ बोर्ड का हिस्सा बनने की अनुमति देता है। वक्फ बोर्ड का किया गया है पुनर्गठन मध्य प्रदेश सरकार ने 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सांवर पटेल को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया है। बोर्ड में मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव हिंदू सदस्य के रूप में शामिल हैं, जिससे यह संशोधित अधिनियम के तहत गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने वाला देश का पहला राज्य स्तरीय वक्फ बोर्ड बन गया है। नए वक्फ बोर्ड की अधिसूचना रविवार को गजट में जारी की गई। एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, “मध्य प्रदेश नए अधिनियम के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।” इनको दी गई है जगह बोर्ड में अध्यक्ष डॉ सनव्वर पटेल के अतिरिक्त पहले से सदस्य नजमा हेपतुल्ला, भोपाल उत्तर से विधायक आतिफ अकील, उज्जैन के रहने वाले फैजान खान, इंदौर की फातिमा चौधरी, बैरसिया भोपाल की पार्षद शाइस्ता सुल्तान, रतलाम की पार्षद शबाना खान और हिंदू सदस्यों में इंदौर के मनोज मालपानी और राघवगढ़ (गुना) के अनिमेष भार्गव को बोर्ड में सदस्य बनाया है। इसके पहले विधायक के नाते आरिफ अकील सदस्य थे। उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे आतिफ अकील को जगह दी गई है। स्टेट बार काउंसिल का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्हें भी इसमें शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही अध्यक्ष और सभी 10 सदस्य हो जाएंगे। वक्फ बोर्डों को और पारदर्शी बनाने के लिए लाया गया था ये संसोधन उल्लेखनीय है कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 वक्फ बोर्डों में पारदर्शिता, महिलाओं व गैर-मुसलमानों की भागीदारी और संपत्तियों के डिजिटल पंजीकरण के लिए लाया गया एक प्रमुख कानून है। कौन हैं मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव मनोज मालपानी इंदौर के रहने वाले हैं और लंबे समय से सामाजिक के साथ-साथ सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं. वे अलग-अलग सामाजिक संगठनों में एक्टिव रोल निभाते रहे हैं. इसके अलावा वे कई धार्मिक और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रमों में भी भाग लेते रहे हैं. उनके अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें वक्फ बोर्ड का मेंबर बनाया है. वहीं, अनिमेश भार्गव गुना के राघौगढ़ निवासी हैं. वे भी सामाजिक और सार्वजनिक कार्यों में एक्टिव रहे हैं. स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच उनकी पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है. वे लंबे समय से जनहित के मुद्दों पर काम करते रहे हैं. उनकी सक्रियता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें भी वक्फ बोर्ड में सदस्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  वक्फ बोर्ड क्या है? वक्फ अधिनियम, 1995 (2025 में संशोधित) की धारा 13(1) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार ने अधिनियम की धारा 14 के प्रावधानों के अनुसार बोर्ड का गठन किया। वक्फ बोर्ड एक वैधानिक निकाय है जो राज्य में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और संरक्षण के लिए जिम्मेदार है। वक्फ की ज़िम्मेदारियों में वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड रखना, उनके इस्तेमाल और उनसे होने वाली आय की देखरेख करना, उन्हें कब्ज़े से बचाना और यह पक्का करना शामिल है कि उनका इस्तेमाल धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक कल्याण के कामों के लिए हो। चेयरमैन संवार पटेल के अलावा नए बने बोर्ड में नई दिल्ली से नज़मा हेपतुल्ला, भोपाल से आतिफ अकील, उज्जैन से फ़ैज़ान खान, इंदौर से फ़ातिमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान, शबाना खान, इंदौर से मनोज मालपानी और गुना के राघोगढ़ से अनिमेष भार्गव शामिल हैं। पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कमिश्नर इसके पदेन सदस्य होंगे। राज्य सरकार के अनुसार नज़मा हेपतुल्ला को वक्फ़ एक्ट, 1995 (2013 में संशोधित) की धारा 14 के तहत 19 अप्रैल, 2023 को जारी नोटिफिकेशन के जरिए चुने गए सदस्यों की श्रेणी में नियुक्त किया गया था। वह18 अप्रैल, 2028 तक सदस्य बनी रहेंगी। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इसलिए उनके कार्यकाल के बचे हुए समय के लिए उन्हें नए बोर्ड में भी शामिल रखा गया है।