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‘राष्ट्र सेवा ही शालिगराम जी के जीवन का ध्येय था’, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि

राष्ट्र सेवा ही शालिगराम जी के जीवन का था ध्येय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वरिष्ठ समाज सेवी सदाशिव देवधर और अरविंद मोघे सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व. शालिगराम तोमर राष्ट्र सेवी थे। उन्होंने राष्ट्र की सेवा करने वाले अनेक कार्यकर्ता भी तैयार किए। राष्ट्र सेवा और राष्ट्रसेवियों का निर्माण उनके जीवन का प्रमुख ध्येय था। वे सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ अनूठा परिवार भाव रखते थे। उनकी कार्य शैली से युवा सहज ही उनके सेवा प्रकल्पों के साथ जुड़ जाते थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मानस भवन में स्व. शालिगराम तोमर स्मृति राष्ट्र सेवी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। नवलय संस्था द्वारा इस वर्ष वरिष्ठ समाज सेवी सदाशिव देवधर पुणे और अरविंद मोघे को सम्मानित किया गया। दोनों समाज सेवियों ने विद्यार्थी परिषद, श्रमिक कल्याण, वनवासी कल्याण के साथ ही अनेक सामाजिक क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. शालिगराम तोमर ने एक कक्ष के कार्यालय से संगठन से कार्य करते हुए उसे विराट रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। उनके आदर्श जीवन से हजारों लाखों युवाओं ने प्रेरणा ली और सामाजिक क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए स्वयं को तैयार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मानित समाज सेवियों को बधाई दी और संस्था के उद्देश्यों एवं सम्मान कार्यक्रम की सराहना की। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं के जीवन को संवारने में स्व. शालिगराम का समर्पण और सहयोग यादगार रहेगा। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्व. शालिगराम के जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाये। सेवानिवृत्त न्यायाधीश और संगठन पदाधिकारी अशोक पांडे ने कहा कि स्व. शालिगराम राष्ट्र सेवा का भाव रखते थे। राज्यसभा सदस्य रजनीश अग्रवाल ने नवलय संस्था को एक प्रेरणापुंज की स्मृति में सम्मान स्थापित करने के लिए बधाई दी। महासमुंद छत्तीसगढ़ से आए डॉ. विमल चोपड़ा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने सम्मान के लिए चयनित समाज सेवियों देवधर और मोघे को एक लाख रूपए की सम्मान निधि, शॉल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। दोनों समाजसेवियों के प्रशस्ति पत्र का वाचन भी किया गया। कार्यक्रम में पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा, वरिष्ठ समाज सेवी शशि भाई सेठ, विभीषण सिंह, अनेक लोकतंत्र सेनानी, नागरिक और समाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।  

भारत के अलग-अलग राज्यों के लोग हैं एकता की मिसाल, राज्यपाल पटेल का बड़ा संदेश

विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग : राज्यपाल पटेल हमारी आत्मीयता, साम्यता का मंच स्थापना दिवस लोक भवन में मनाया गया पश्चिम बंगाल का स्थापना दिवस भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भारत की विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूध में शक्कर घुल जाती है, उसी तरह से मध्यप्रदेश में बंगाल के मूल निवासी घुल मिल गये हैं। हमारी अनेकता में एकता की आत्मीयता और साम्यता को राज्य स्थापना दिवस के आयोजन साकार करते है। आयोजन के मंच पर हमारी वेशभूषा, गीत, नृत्य में समाई हमारी सांस्कृतिक विविधता में एकता की झलक मिलती है। पश्चिम बंगाल की प्रस्तुतियों में उन्हें गुजरात के गरबा नृत्य और वेशभूषा में असम राज्य की झलक दिखाई दी। राज्यपाल पटेल आज लोकभवन में आयोजित पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस के प्रसंग में आयोजित समारोह में सम्मिलित भोपालवासी बंगाली मूल के लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डा. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न कालीबाड़ियों के सदस्य उपस्थित थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्र प्रथम की भावना को सुदृढ़, राष्ट्रीय एकात्मकता को नई शक्ति प्रदाय करने और राज्यों के मध्य परस्पर सांस्कृतिक संवाद, आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा देने के प्रयास अद्भुत है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने गत वर्ष लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्थल पर एक नवम्बर से 15 नवम्बर तक भारत पर्व का ऐतिहासिक आयोजन कराया था। पर्व में सभी राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांस्कृतिक दलों और बच्चों की सहभागिता से एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को मंच प्रदान किया गया था। कार्यक्रम में 300 बच्चों ने कार्यक्रम में सहभागिता की थी। उन्होंने कहा कि भारत की गौरवशाली विरासत को समृद्ध बनाने में बंगाल राज्य का योगदान अतुलनीय है। प्रधानमंत्री मोदी स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर विगत वर्षों से देश की युवाओं की आकांक्षाओं के अनुसार विकसित भारत निर्माण के लिए युवाओं के साथ संवाद करते हैं। लोक भवन के  आयोजन में 7 से 60 साल के कलाकारों की सहभागिता और महिलाओं की बहुलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए बदलते भारत की झलक और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में श्रीमती सपना गुहा ने स्वागत उद्बोधन में बंगाल की समृद्ध परम्पराओं, सांस्कृतिक विरासत के साथ ग्रामीण जन जीवन की सरलता और सांस्कृतिक छटा की रुपरेखा प्रस्तुत की सांस्कृतिक आयोजन की सूत्रधार श्रीमती महुआ चटर्जी ने “हमारा बंगाल रे” की थीम पर बंगाल के लोकगीत, नृत्य और जन जीवन को बाउल, झूमर, धमाइल, भटयाली लोक संगीत की प्रस्तुति के द्वारा सभागार में पश्चिम बंगाल के जन जीवन को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि का स्थापना दिवस का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक वैभव और आधुनिक विकास पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अंत में मध्यप्रदेश के विकास और वैभव से परिचित कराने वाली लघु फिल्म का प्रसारण किया गया। राज्यपाल का कार्यक्रम में बंगाली समाज के सचिव सर्वसलिल चटर्जी, निलॉय घोष ने अभिनन्दन किया। आभार प्रदर्शन डा. एन. बनर्जी ने किया। संचालन सहायक सत्कार अधिकारी सुसृष्टि श्रीवास्तव ने किया।  

Amarnath Yatra: बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए बनारसी स्वाद, चंदनवाड़ी में 70 सेवादार करेंगे सेवा

वाराणसी  बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को इस बार अमरनाथ यात्रा में काशी का विशेष स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। श्री बाबा काशी विश्वनाथ सेवा समिति वाराणसी के 70 सेवादार चंदनवाड़ी में विशाल सेवा शिविर और भंडारे का संचालन करेंगे। यह समिति पिछले 25 वर्षों से यात्रा में सेवा प्रदान कर रही है। इसका भंडारा 3 जुलाई से रक्षाबंधन तक चलेगा। समिति के अध्यक्ष दिलीप सिंह बंटी ने बताया कि श्रद्धालुओं को बनारस की प्रसिद्ध पूड़ी-कचौड़ी, गरम जलेबी, ठंडाई और बनारसी पान निःशुल्क परोसा जाएगा। असली स्वाद के लिए बनारस से अनुभवी हलवाई भी ले जाए जा रहे हैं। बनारसी व्यंजनों के साथ-साथ दक्षिण भारतीय, गुजराती और पंजाबी भोजन भी श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराया जाएगा। रोजाना 1000-1500 श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही 300 यात्रियों के ठहरने, गर्म कपड़े, शॉल और मोजे की सुविधा भी शिविर में उपलब्ध रहेगी। सेवा कार्य के लिए सेवादारों का पहला जत्था 20 जून को रवाना हो चुका है। शेष 70 सेवादार 28 जून को वाराणसी से ट्रेन द्वारा चंदनवाड़ी पहुंचेंगे। इनमें रसोइये, पदाधिकारी और स्वयंसेवक शामिल हैं। काशी की आतिथ्य परंपरा और बनारसी व्यंजनों की खुशबू इस बार बाबा बर्फानी के दरबार तक पहुंचेगी। श्रद्धालुओं के लिए यह पहल स्वाद के साथ-साथ काशी की सेवा संस्कृति की मिसाल बनेगी। अमरनाथ यात्रा में इस बार श्रद्धालुओं को काशी के विशेष व्यंजनों का अनुभव करने का मौका मिलेगा। वाराणसी की श्री बाबा काशी विश्वनाथ सेवा समिति ने इस बार चंदनवाड़ी में भंडारे का आयोजन किया है, जिसमें 70 सेवादार श्रद्धालुओं की सेवा में जुटेंगे। समिति के अध्यक्ष दिलीप सिंह बंटी ने बताया कि यह भंडारा 3 जुलाई से रक्षाबंधन तक चलेगा। पिछले 25 वर्षों से यह समिति अमरनाथ यात्रा में सेवा कर रही है। इस बार श्रद्धालुओं को बनारस की प्रसिद्ध पूड़ी-कचौड़ी, गरम जलेबी, ठंडाई और बनारसी पान का स्वाद निःशुल्क मिलेगा। इस भंडारे में बनारसी व्यंजनों के साथ-साथ अन्य राज्यों के व्यंजन भी उपलब्ध होंगे। श्रद्धालुओं के लिए रोजाना 1000-1500 लोगों के भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, 300 यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था, गर्म कपड़े, शॉल और मोजे की सुविधा भी शिविर में उपलब्ध रहेगी। सेवा कार्य के लिए सेवादारों का पहला जत्था 20 जून को रवाना हो चुका है। शेष 70 सेवादार 28 जून को वाराणसी से ट्रेन द्वारा चंदनवाड़ी पहुंचेंगे। इनमें रसोइये, पदाधिकारी और स्वयंसेवक शामिल हैं। इस बार काशी की आतिथ्य परंपरा और बनारसी व्यंजनों की खुशबू बाबा बर्फानी के दरबार तक पहुंचेगी। यह पहल श्रद्धालुओं के लिए न केवल स्वाद का अनुभव कराएगी, बल्कि काशी की सेवा संस्कृति की एक नई मिसाल भी पेश करेगी।  

Gwalior Zoo News: CDV संक्रमण के खतरे के बीच मीरा के तीनों शावकों को नहीं मिलेगा खुला बाड़ा, पर्यटकों का इंतजार बढ़ा

ग्वालियर  कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से सात बाघों की मृत्यु होने के बाद अब गांधी प्राणी उद्यान (ZOO) प्रबंधन अलर्ट पर आ गया है। यही कारण है कि दो माह पहले जन्मे सफेद बाघिन मीरा के शावकों को फिलहाल आइसोलेशन में ही रखा जाएगा। सैलानियों को इन नन्हें शावकों की पहली झलक पाने और अठखेलियों को देखकर आनंद लेने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि तीनों शावक पूरी तरह से स्वस्थ हैं, लेकिन कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से हुई बाघों की मौत के बाद जू प्रबंधन कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। चिड़ियाघर में सफेद बाघिन मीरा ने गत पांच अप्रैल को तीन शावकों को जन्म दिया था। इनमें दो शावक पीले और एक सफेद शावक है। बीते दो माह दिनों से शावक आइसोलेशन में ही अपनी मां की देखरेख में सुरक्षित हैं और उनकी गतिविधियां भी सामान्य हैं। इन शावकों को एक माह पूरा होने पर ही केज से बाहर निकालने की तैयारी की गई थी, लेकिन इस दौरान भीषण गर्मी को देखते हुए शावकों को केज से बाहर नहीं निकाला गया। अब जब शावकों को बाहर निकालने की बारी आई, तो कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की संभावना को देखते हुए इस निर्णय को टाल दिया गया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने भी एडवायजरी जारी कर वन्य जीवों को इस वायरस से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। यह वायरस जानवरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है और खासतौर पर शावकों के लिए अधिक खतरनाक साबित होता है।  

मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में नई नियुक्तियां, विकासखंड अकादमिक समन्वयक और जन शिक्षक के लिए आवेदन शुरू

भोपाल  समग्र शिक्षा अभियान मिशन के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विकासखंड अकादमिक समन्वयक और जन शिक्षक के पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को 20 सितंबर 2026 तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक विकासखंड स्रोत केंद्र कार्यालय में विकासखंड अकादमिक समन्वयक के पांच पद भरे जाएंगे। वहीं, प्रत्येक 21 विद्यालयों पर एक जनशिक्षा केंद्र के मान से प्रति जनशिक्षा केंद्र में 2 जन शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। 52 वर्ष से अधिक न हो आयु राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने बताया कि विकासखंड अकादमिक समन्वयक एवं जन शिक्षक के लिए वही उच्च श्रेणी या माध्यमिक शिक्षक पात्र होंगे, जिनकी आयु 1 जनवरी 2026 की स्थिति में 52 वर्ष से अधिक न हो। साथ ही उनके विरुद्ध कोई विभागीय जांच, आपराधिक प्रकरण या लंबे समय तक अनुपस्थित रहने की शिकायत लंबित नहीं होनी चाहिए। चयन के लिए बनेगी समिति चयन प्रक्रिया के लिए जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी, जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त (जनजातीय कार्य), प्राचार्य डाइट, जिला परियोजना समन्वयक, सहायक परियोजना समन्वयक तथा कलेक्टर का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। यह रहेगा चयन कार्यक्रम – 25 जुलाई तक विषय एवं समूहवार वरिष्ठता सूची तैयार होगी। – 5 अगस्त को जिला स्तर पर काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। – 13 अगस्त को अंतिम चयन सूची प्रकाशित की जाएगी। – 20 सितंबर तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।  

मध्यप्रदेश में घर-दुकान बनाने वालों के लिए अलर्ट! निर्माण से पहले देनी होगी सूचना, वरना होगी कानूनी कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब घर, दुकान, बहुमंजिला इमारत या किसी भी तरह का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले मकान मालिकों, ठेकेदारों और बिल्डर्स को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। श्रम विभाग ने नए और सख्त निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी कंस्ट्रक्शन साइट पर काम शुरू करने से कम से कम 30 दिन पहले इसकी लिखित या ऑनलाइन सूचना विभाग को देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। श्रम विभाग के अनुसार, नियमों की अनदेखी करने वाले नियोक्ताओं और बिल्डर्स के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल की हवा खाने से लेकर भारी जुर्माने तक का प्रावधान शामिल है। क्यों सख्त हुआ श्रम विभाग? श्रम विभाग ने यह कदम निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए उठाया है। 'भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल' के तहत अब हर कंस्ट्रक्शन साइट पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम और सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती अनिवार्य होगी। 'श्रम सेवा पोर्टल' पर देनी होगी तमाम जानकारी नियोजकों को 'श्रम सेवा पोर्टल' मोबाइल ऐप के जरिए निर्माण स्थल की सटीक लोकेशन, वहां काम कर रहे श्रमिकों की कुल संख्या और उन्हें दी जा रही मूलभूत सुविधाओं (जैसे साफ पानी, शौचालय आदि) का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन दर्ज करना होगा। 30 दिन पहले सूचना नहीं दी, तो 3 महीने की जेल भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण अधिनियम 1996 के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई भी नियोक्ता धारा 46 के तहत काम शुरू होने की पूर्व सूचना देने में विफल रहता है, तो उसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। कानूनी कार्रवाई का प्रावधान दोषी पाए जाने पर संबंधित बिल्डर, ठेकेदार या मकान मालिक को 3 महीने तक का कारावास , 2 हजार रुपए तक का जुर्माना, या फिर दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के सभी सरकारी निर्माण विभागों जिनमें PWD, नगर निगम आदि को भी सख्त हिदायत दी गई है कि वे भी कोई भी काम शुरू करने से पहले श्रम विभाग को अनिवार्य रूप से लूप में लें। 'श्रम प्रहरी' बनकर आम जनता भी दे सकेगी सूचना निर्माण कार्यों में पारदर्शिता लाने और मजदूरों के हक की रक्षा के लिए विभाग ने आम नागरिकों को भी एक बड़ी ताकत दी है। शहर का कोई भी जागरूक नागरिक ‘श्रम प्रहरी’ की भूमिका निभा सकता है। शिकायत के किलए टोल फ्री नंबर जारी अगर आपके आसपास कोई ऐसा निर्माण कार्य चल रहा है, जिसकी सूचना श्रम विभाग को नहीं दी गई है या जहां मजदूरों की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है, तो आप इसकी गुप्त शिकायत विभाग के विशेष कंट्रोल रूम नंबर पर कर सकते हैं। इसके लिए श्रम प्रहरी हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर: 1800-233-8888 दिया गया है।

Indore News: मध्यप्रदेश में पहली बार वर्ल्ड स्नूकर चैंपियनशिप, नवंबर में यशवंत क्लब बनेगा मेजबान

इंदौर  दुनिया को स्नूकर का खेल सिखाने वाले मध्य प्रदेश में 100 साल में पहली बार विश्व स्नूकर चैंपियनशिप होने जा रही है। यह प्रतिष्ठित आयोजन 12 से 23 नवंबर तक इंदौर के यशवंत क्लब में होगा। इस दौरान दुनिया के करीब 50 देशों के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने आएंगे। चैंपियनशिप का कुल व्यय पांच करोड़ रुपये होगा। कुल पुरस्कार राशि 40 हजार डालर यानी 37 लाख, 75 हजार रुपये के करीब होगी। भारतीय बिलियर्ड्स और स्नूकर महासंघ के सचिव सुनील बजाज ने बताया कि देश में 2014 में बेंगलुरू में विश्व चैंपियनशिप हुई थी, जिसके बाद अब यह टूर्नामेंट भारत में होने जा रहा है। भारतीय बिलियर्ड्स और स्नूकर महासंघ की स्थापना के 100 वर्ष के यादगार अवसर पर इंदौर को मेजबानी के लिए चुना गया है। विश्व चैंपियनशिप के दौरान पुरुष और महिला दोनों वर्गों के मैच होंगे। पुरुषों के वर्ग में 100 से 125 के करीब खिलाड़ी हिस्सा लेंगे जबकि महिला वर्गों में 40 से 60 खिलाड़ी शामिल होंगी। इनमें 15 के करीब विश्व चैंपियन खिलाड़ी भी होंगे। स्पर्धा के मुकाबले 12 टेबलों पर खेले जाएंगे जबकि पांच टेबलें अभ्यास के लिए होंगी। विश्व चैंपियनशिप के लिए 17 टेबलें बाहर से आयात की जा रही हैं। मध्य प्रदेश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाए हाल ही में चीन में वर्ल्ड टीम स्नूकर चैंपियनशिप में रजत विजेता भारतीय टीम में इंदौर के केतन चावला भी शामिल थे। नेहरू स्टेडियम स्थित अकादमी में केतन चावला को मप्र बिलियर्ड्स व स्नूकर संघ द्वारा सम्मानित किया गया। उनसे पहले मप्र की खिलाड़ी अमी कमानी, सान्वी शाह, इशिका शाह, कनिष्का जुरानी, ऋतिक जैन, ओवेश खान सहित कई अन्य युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।  

आधार कार्ड यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! 1 जुलाई से बिना शुल्क अपडेट होगी ईमेल आईडी

 ग्वालियर  यदि आपके आधार कार्ड में अभी तक ईमेल आईडी अपडेट नहीं है या आप उसे बदलना चाहते हैं, तो आपके लिए एक बेहद अच्छी और राहत भरी खबर है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानि यूआईडीएआई ने एक नया नोटिफिकेशन जारी करते हुए आधार कार्ड के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस नए नियम के तहत अब आधार कार्ड पर ईमेल आईडी अपडेट कराने के लिए नागरिकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा, यह सेवा पूरी तरह से मुफ्त कर दी गई है। यह नया नियम आगामी एक जुलाई से पूरे देश के साथ-साथ ग्वालियर-चंबल अंचल में भी लागू होने जा रहा है। सरकार के इस कदम से उन करोड़ों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा जो अपने आधार को डिजिटल रूप से अधिक सुरक्षित और अपडेटेड रखना चाहते हैं। मुफ्त में ईमेल अपडेट छह महीने तक कर सकते हैं। छह महीने के लिए खुली है मुफ्त सुविधा की खिड़की यूआईडीएआई द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, आम जनता को सहूलियत देने के लिए प्रशासन ने छह महीने की एक विशेष समय-सीमा तय की है। इसके अंतर्गत, नागरिक जुलाई से लेकर दिसंबर तक कभी भी अपनी ईमेल आईडी को आधार कार्ड में बिल्कुल मुफ्त में अपडेट करवा सकते हैं। आपको बता दें कि इस नए नियम के लागू होने से पहले तक, आधार कार्ड में ईमेल आईडी जुड़वाने या उसमें किसी भी तरह का संशोधन कराने के लिए उपभोक्ताओं को 75 रुपये का निर्धारित शुल्क देना पड़ता था, जिसे अब पूरी तरह से हटा लिया गया है। ईमेल आईडी अपडेट होना क्यों है जरूरी     सुरक्षित ओटीपी: कई बार मोबाइल नेटवर्क न होने या सिम बंद होने की स्थिति में आधार से जुड़े जरूरी काम रुक जाते हैं। ईमेल आईडी अपडेट होने पर आधार वेरिफिकेशन का ओटीपी आपकी मेल पर भी आ जाता है।     फर्जीवाड़े पर रोक: यदि कोई आपके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करता है, तो तुरंत आपके रजिस्टर्ड ईमेल पर अलर्ट आ जाता है, जिससे आप होने वाले फ्राड से बच सकते हैं।     ऑनलाइन सेवाएं: कई सरकारी और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन में ईमेल आईडी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।  

बीजेपी का बड़ा संगठनात्मक अभियान: 7 लाख वर्कर्स देंगे ऑनलाइन टेस्ट, सफल होने पर मिलेगा Digital Learning Certificate

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आज देशभर में बूथ और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए बड़े स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी। इस दौरान करीब 7 लाख कार्यकर्ताओं की ऑनलाइन परीक्षा संगठन ऐप के माध्यम से कराई जाएगी। पार्टी के अनुसार, 65 हजार से अधिक बूथ समितियों के कार्यकर्ता और मंडल स्तर के मोर्चा पदाधिकारी इस डिजिटल लर्निंग कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य संगठन को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना और कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा एवं योजनाओं की बेहतर जानकारी देना है। संगठन ऐप के जरिए होगा प्रशिक्षण डिजिटल लर्निंग प्रोग्राम के तहत कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा, संगठन का सफर, नेतृत्व और केंद्र की मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संगठन ऐप पर ऑनलाइन परीक्षा आयोजित होगी। संगठन एप के जरिए मिलेगी ट्रेनिंग बीजेपी की 65 हजार से ज्यादा बूथ समितियों में शामिल कार्यकर्ताओं और मंडल स्तर के 6 मोर्चों की कार्यकारिणी में शामिल पदाधिकारियों को संगठन एप के जरिए डिजिटल लर्निंग यानी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में चार पाठ्यक्रम संगठन एप पर दिए जाएंगे। इनमें बीजेपी की विचारधारा, पार्टी का सफर, नेतृत्व, मोदी सरकार की विकास योजनाएं जैसे चार पाठ्यक्रम शामिल होंगे। कार्यकर्ता अपने मोबाइल पर हर पाठ्यक्रम के वीडियो देखकर उस पाठ्यक्रम से संबंधित शब्दावली के उत्तर ऑनलाइन दर्ज करेंगे। चारों पाठ्यक्रमों के सवाल-जवाब पूरे होने के बाद उनके मोबाइल पर प्रशिक्षित होने का सर्टिफिकेट जनरेट होगा। इस प्रशिक्षण को लेकर सभी जिला अध्यक्षों को कार्ययोजना भेज दी गई है। यह महाअभियान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि 23 जून से शुरू होकर उनकी जयंती 6 जुलाई 2026 तक पूरे 14 दिनों तक चलेगा। बीजेपी क्यों और कैसे कराने जा रही है यह कोर्स? बीजेपी इस बड़े अभियान को पूरी तरह अचूक बनाने के लिए इसे अपने नियमित कार्यक्रमों से जोड़ रही है। रणनीति के अनुसार, बूथ अध्यक्ष और 'मन की बात' प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि 'मन की बात' कार्यक्रम के तुरंत बाद बूथ समिति के सभी सदस्यों को मौके पर ही संगठन ऐप खुलवाकर डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का प्रशिक्षण पूरा कराया जाए और सर्टिफिकेट डाउनलोड करवाया जाए । तीन सदस्यों की टीम भी बनाई इसके साथ ही, शक्ति केंद्र प्रभारियों और मंडल कार्यकारिणी को सभी बूथों पर प्रवास (दौरा) करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे हर कार्यकर्ता के स्मार्टफोन में इस प्लेटफॉर्म की जानकारी और ट्रेनिंग सुनिश्चित कर सकें । बीजेपी यह कदम इसलिए उठा रही है ताकि उसका पूरा कैडर 'कागज-रहित' और 'हाई-टेक' हो सके। इस पूरी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए जिलों में (1+2 सदस्यों की) विशेष डिजिटल प्रशिक्षण टीमें बनाई गई हैं, जिनकी कमान प्रदेश स्तर पर संयोजक शैलेन्द्र बरूआ (प्रदेश उपाध्यक्ष) और सदस्यों के रूप में राजेन्द्र सिंह, सुयश त्यागी संभाल रहे हैं। 6 जुलाई तक पूरा होगा अभियान बीजेपी ने इस डिजिटल प्रशिक्षण अभियान को 6 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। पार्टी पहले ही जिला और मंडल स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित कर चुकी है। अब अंतिम चरण में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कार्यकर्ताओं का मूल्यांकन किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि डिजिटल प्रशिक्षण से संगठन की कार्यशैली अधिक प्रभावी होगी और कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाओं व संगठनात्मक गतिविधियों की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।  

भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी: राजस्थान और कैलिफोर्निया मिलकर बनाएंगे स्मार्ट ग्रिड और क्लीन एनर्जी मॉडल

जयपुर राजस्थान की ऊर्जा यात्रा अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश की तस्वीर बदल सकता है। यह सिर्फ एक सरकारी समझौता नहीं, बल्कि उस भविष्य की शुरुआत है, जहां बिजली सिर्फ पैदा नहीं होगी, बल्कि नई तकनीक के सहारे ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद भी बनेगी। इस बदलाव की कहानी हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका के कैलिफोर्निया से जुड़ गई है। राजस्थान और अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए बड़ा कदम उठाया है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC), कैलिफोर्निया ऊर्जा आयोग (CEC) और कैलिफोर्निया पब्लिक यूटिलिटीज कमीशन (CPUC) के बीच वर्चुअल माध्यम से सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर भी ऑनलाइन जुड़े और इसे दोनों राज्यों के लिए भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण समझौता बताया। सिर्फ कागजों पर हस्ताक्षर नहीं, तकनीक का होगा सीधा आदान-प्रदान इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब राजस्थान को दुनिया के उन क्षेत्रों से सीखने का मौका मिलेगा, जिन्होंने ऊर्जा प्रबंधन में मिसाल कायम की है। कैलिफोर्निया लंबे समय से ग्रिड मॉडर्नाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट बिजली व्यवस्था के लिए जाना जाता है। अब वही अनुभव राजस्थान के साथ साझा किया जाएगा। इस साझेदारी के तहत सौर और पवन ऊर्जा के बेहतर प्रबंधन, ऊर्जा भंडारण तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, स्मार्ट ग्रिड सिस्टम विकसित करने और आधुनिक बिजली प्रबंधन से जुड़े शोध व अनुभव साझा किए जाएंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे राजस्थान की ऊर्जा व्यवस्था और अधिक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार हो सकेगी। हजारों किलोमीटर की दूरी, लेकिन सोच और लक्ष्य एक ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि भले ही राजस्थान और कैलिफोर्निया भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से काफी दूर हों, लेकिन दोनों का लक्ष्य समान है। दोनों स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं टिकाऊ भविष्य तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों राज्यों के नियामक ढांचे, नीतिगत अनुभव और जमीनी स्तर पर किए गए सफल प्रयोगों को भी साझा करने का अवसर देगा। इससे राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में नई दिशा और नई गति मिलने की उम्मीद है। राजस्थान पहले से बना रहा है हरित ऊर्जा में पहचान ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राजस्थान आज देश के अग्रणी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है। प्रदेश में विशाल सौर ऊर्जा पार्क और अनुकूल पवन गति का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर हरित बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। सरकार केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों तक सुरक्षित, किफायती और निर्बाध बिजली पहुंचाने पर भी लगातार काम कर रही है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आधुनिक पावर ग्रिड, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और स्मार्ट मीटरिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू किया जा रहा है। रिकॉर्ड बिजली उत्पादन पर मिला वैश्विक सम्मान इसी बीच राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम के कोयला आधारित बिजली घरों ने रिकॉर्ड स्तर पर बिजली उत्पादन कर नया इतिहास रचा है। इस उपलब्धि के लिए ‘मल्टीनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ ने ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर को वैश्विक अवार्ड से सम्मानित किया। विद्युत भवन में आयोजित समारोह में संस्था के मैनेजर अरिहंत उपाध्याय और कोऑर्डिनेटर गरिमा जैन ने ऊर्जा मंत्री को सम्मान पत्र सौंपा। साथ ही उत्पादन निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देवेन्द्र श्रृंगी को भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। 2 जून बना बिजली उत्पादन का ऐतिहासिक दिन ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 2 जून 2026 को प्रदेश की 7580 मेगावाट क्षमता वाली सभी 23 थर्मल इकाइयों ने 94.60 प्रतिशत उपयोग क्षमता के साथ रिकॉर्ड 7171 मेगावाट बिजली उत्पादन किया। यह राजस्थान के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा उत्पादन माना जा रहा है। इतना ही नहीं, सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की सभी आठ इकाइयों ने भी अपनी कुल 2820 मेगावाट क्षमता में से 2790 मेगावाट बिजली उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि बताती है कि प्रदेश न केवल हरित ऊर्जा में आगे बढ़ रहा है, बल्कि पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन में भी नई मिसाल कायम कर रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ हुई यह तकनीकी साझेदारी और रिकॉर्ड बिजली उत्पादन, दोनों मिलकर राजस्थान को आने वाले वर्षों में देश के सबसे मजबूत और आधुनिक ऊर्जा राज्यों की कतार में खड़ा कर सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग जमीन पर कितनी तेजी से बदलाव लाता है और प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को इसका कितना फायदा मिलता है।