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राम मंदिर परिसर में मिली वृद्धा की वन स्टॉप सेंटर ने कराई घर वापसी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में महिला सुरक्षा, राम मंदिर परिसर में मिली वृद्धा को वन स्टॉप सेंटर ने परिवार से मिलाया घरेलू हिंसा और पारिवारिक उपेक्षा से जूझ रही 65 वर्षीय महिला को मिला सहारा, काउंसलिंग के बाद सम्मान के साथ घर लौटी पति ने घर से निकाला तो राम मंदिर पहुंची वृद्धा, 181 हेल्पलाइन से मिली मदद वन स्टॉप सेंटर की पहल से परिवार में लौटा संवाद, महिला को मिला सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल अयोध्या  घर की चारदीवारी में अपनों के बीच रहने के बावजूद जब किसी बुजुर्ग महिला को अकेलेपन, घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़े, तो उसका दर्द सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार के बिखरने की कहानी बन जाता है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में महिला सुरक्षा और संकट में फंसी महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए संचालित व्यवस्था का अयोध्या में सकारात्मक उदाहरण सामने आया है,जब 65 वर्षीय महिला पारिवारिक उपेक्षा और घरेलू हिंसा के बाद राम मंदिर परिसर में असहाय अवस्था में मिलीं। मुश्किल की इस घड़ी में 181 महिला हेल्पलाइन उनके लिए मदद की पहली कड़ी बनी। सूचना मिलते ही सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित संरक्षण में लिया। इसके बाद काउंसलिंग और परिवार के सदस्यों से लगातार संवाद के जरिए परिवार में संवाद बहाल करने का प्रयास किया गया। आखिरकार महिला को उनकी इच्छा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सम्मानपूर्वक परिजनों के साथ भेज दिया गया। घर से निकाले जाने के बाद मंदिर परिसर में मिलीं महिला वन स्टॉप सेंटर के अनुसार कमलावती (काल्पनिक नाम) लंबे समय से पारिवारिक उपेक्षा, मानसिक उत्पीड़न और घरेलू हिंसा का सामना कर रही थीं। पारिवारिक परिस्थितियां बिगड़ने पर उनके पति ने उन्हें घर से बाहर कर दिया था। इसके बाद वह असहाय अवस्था में राम मंदिर परिसर में बैठी मिलीं। 181 हेल्पलाइन के माध्यम से 13 मार्च को सूचना प्राप्त हुई, जिसके बाद ओएससी टीम मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित स्थान पर ले गई। सुरक्षित माहौल के साथ भावनात्मक संबल देने पर जोर सखी वन स्टॉप सेंटर में महिला की काउंसलिंग की गई। टीम ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और उनकी भावनात्मक स्थिति को समझने का प्रयास किया। महिला के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को मजबूत करने के साथ उन्हें उनके अधिकारों और उपलब्ध कानूनी विकल्पों की जानकारी भी दी गई। आवश्यकता के अनुसार उनके लिए अस्थायी आश्रय और सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, ताकि वह खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें और आगे की स्थिति पर सोच सकें। पति, पुत्र और बहू की काउंसलिंग से परिवार में लौटा संवाद महिला को परिवार से दोबारा जोड़ने के लिए स्थानीय थाना, ग्राम प्रधान और परिवार के सदस्यों से संपर्क किया गया। इसके बाद पति, पुत्र और बहू की फैमिली काउंसलिंग कराई गई। लगातार संवाद और समझाइश के बाद परिजनों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आया और उन्होंने महिला को अपने साथ रखने पर सहमति जताई। महिला की इच्छा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें सम्मानपूर्वक परिवार के साथ भेज दिया गया। समन्वित प्रयासों से असहाय अवस्था से सुरक्षित घर तक पहुंची महिला जिला प्रोबेशन अधिकारी जय पाल वर्मा ने बताया कि महिला अब संतोषजनक और सुरक्षित वातावरण में जीवन व्यतीत कर रही हैं। उन्होंने सम्मान के साथ घर वापसी की है। इस पूरे प्रकरण में 181 महिला हेल्पलाइन, सखी वन स्टॉप सेंटर, पुलिस, ग्राम प्रधान और परिवार के सदस्यों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समय पर मिली सूचना और त्वरित कार्रवाई से महिला को असहाय अवस्था से बाहर निकालकर सुरक्षित पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सका।महिला सुरक्षा से जुड़ी इस पहल में सहायता का उद्देश्य केवल तत्काल संरक्षण उपलब्ध कराना नहीं रहा, बल्कि परिवार के भीतर संवाद बहाल कर महिला को सम्मान और सुरक्षा के साथ उसके घर तक पहुंचाना भी रहा। वन स्टॉप सेंटर की काउंसलिंग और विभिन्न स्तरों पर किए गए समन्वित प्रयासों से यह संभव हो सका।

उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 2,493 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित

पीएम सूर्य घर योजना में यूपी का परचम, सितंबर में 74,796 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 2,493 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित मासिक स्थापना में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम, आंध्र प्रदेश दूसरे और महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर लखनऊ  प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर स्थापना में उत्तर प्रदेश ने सितंबर 2026 में देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। सितंबर माह में प्रदेश में 74,796 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए गए। इस दौरान आंध्र प्रदेश 69,813 और महाराष्ट्र 60,907 इंस्टॉलेशन के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। सितंबर के आंकड़ों में गुजरात में 45,616 और केरल में 30,315 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए। इस तरह सितंबर की मासिक स्थापना में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर रहा। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 2,493 इंस्टॉलेशन सितंबर माह में उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 2,493 रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए गए। 30 सितंबर को प्रदेश में एक दिन में 3,389 इंस्टॉलेशन दर्ज हुए। पूरे महीने में यूपी ने गुजरात से 29,180 और महाराष्ट्र से 13,889 अधिक इंस्टॉलेशन किए। सितंबर में देशभर में कुल 4,38,815 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हुए, जिसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत रही। योगी सरकार के प्रयासों से सौर ऊर्जा को मिल रही गति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएम सूर्य घर योजना के राज्यस्तरीय क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और योजना की प्रगति की निगरानी यूपी नेडा के निदेशक रविंदर सिंह के नेतृत्व में की जा रही है। 8.67 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित 30 सितंबर 2026 तक उत्तर प्रदेश में पीएम सूर्य घर योजना के तहत कुल 8,67,755 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। इनकी कुल स्थापित क्षमता 2,911.39 मेगावाट पहुंच गई है। संचयी स्थापना में गुजरात 8,70,152 इंस्टॉलेशन के साथ उत्तर प्रदेश से केवल 2,397 इंस्टॉलेशन आगे रहा, जबकि महाराष्ट्र की संचयी स्थापना 8,27,182 रही। 31 मार्च 2027 तक योजना, उपभोक्ता जल्द लें सब्सिडी का लाभ पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत पात्र घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने पर सब्सिडी उपलब्ध है। योजना की निर्धारित अवधि 31 मार्च 2027 तक है। अधिकारियों की प्रदेश के शेष विद्युत उपभोक्ताओं से अपील है कि वे समय रहते पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने के लिए आवेदन करें और पात्रता के अनुसार सब्सिडी का लाभ उठाएं। उपभोक्ता पीएम सूर्य घर राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। विद्युत उपभोक्ता सौर ऊर्जा अपनाकर, बिजली बिल में बचत के साथ साथ स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में भी सहभागी बन सकते है । सितंबर 2026 मासिक राष्ट्रीय रैंकिंग उत्तर प्रदेश- 74,796 आंध्र प्रदेश- 69,813 महाराष्ट्र- 60,907 गुजरात- 45,616  केरल- 30,315

खेल अकादमियों में प्रवेश के लिए 169 खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, दो दिवसीय ट्रायल संपन्न

खेल अकादमियों में प्रवेश के लिए 169 खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम  तीरंदाजी, एथलेटिक्स, हॉकी और फुटबॉल अकादमी में प्रवेश के लिए दो दिवसीय ट्रायल संपन्न रायपुर  खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु रायपुर स्थित विभिन्न गैर-आवासीय खेल अकादमियों में खिलाड़ियों के प्रवेश (नवीनीकरण एवं नवीन प्रवेश) के लिए दो दिवसीय चयन ट्रायल आज संपन्न हुआ। तीरंदाजी (बालक/बालिका) के लिए तीरंदाजी एरिना के सामने, फुटबॉल (बालिका) एवं एथलेटिक्स (बालक/बालिका) के लिए स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा तथा हॉकी (बालक/बालिका) के लिए हॉकी स्टेडियम पिच-2 में आयोजित चयन ट्रायल में खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। चयन ट्रायल के अंतिम दिन आज चारों खेलों में पंजीकृत कुल 169 खिलाड़ियों की कौशल दक्षता का कड़ाई से परीक्षण किया गया। वरिष्ठ प्रशिक्षकों एवं विशेषज्ञों ने हॉकी और फुटबॉल के 57-57, तीरंदाजी के 23 और एथलेटिक्स के 32 खिलाड़ियों के खेल कौशल का परीक्षण किया। खिलाड़ियों के सटीक मूल्यांकन के लिए खेल के मानकों के आधार पर दक्षता परीक्षण किया गया।  प्रशिक्षकों और विशेषज्ञों ने फुटबॉल में पासिंग, ड्रिबलिंग, व्यक्तिगत पोजीशन, मैच सेंस और पोजिशनिंग गेम का परीक्षण किया। वहीं आर्चरी में ड्रॉ लेंथ, आई डोमिनेंस, पोस्चर, मेंटल एबिलिटी तथा 20 मीटर शूटिंग का परीक्षण किया गया। एथलेटिक्स के अंतर्गत 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर, 800 मीटर, 1500 मीटर, 3000 मीटर दौड़, पैदल चाल, हाई जंप, लॉन्ग जंप, गोला फेंक, तवा फेंक, भाला फेंक इत्यादि का परीक्षण किया गया।  हॉकी में परफेक्शन और एक्युरेसी स्किल टेस्ट के तहत हिट, पुश, स्कूप, स्टॉपिंग, रिसीविंग, टैकलिंग, क्लीयरेंस, पेनल्टी कॉर्नर इंजेक्टर, ड्रैगर, हिटर और गोलकीपर के लिए टी-टेस्ट जैसी तकनीकी योग्यताओं का बारिकी से आकलन किया गया।

यूपी में आर्द्रभूमियों के संरक्षण का व्यापक अभियान, 22 उच्च प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियां अधिसूचित

स्वच्छ गंगा: योगी सरकार के प्रयासों से आर्द्रभूमि संरक्षण को नई दिशा, गंगा पुनर्जीवन के लिए तेज हुआ वैज्ञानिक प्रबंधन यूपी में आर्द्रभूमियों के संरक्षण का व्यापक अभियान, 22 उच्च प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियां अधिसूचित आर्द्रभूमि संरक्षण से मजबूत होगी गंगा की सेहत, तीन जिलों में 5.36 करोड़ की परियोजनाओं पर काम 275 आर्द्रभूमियों का सर्वे और हेल्थ कार्ड पूरा, अब एकीकृत प्रबंधन योजनाओं पर जोर 8 आर्द्रभूमियों की प्रबंधन योजनाएं तैयार, अनुमोदन के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजने की तैयारी भूजल रिचार्ज और प्रदूषण नियंत्रण में अहम भूमिका, आर्द्रभूमियों के संरक्षण से बढ़ेगा नदी तंत्र का स्वास्थ्य लखनऊ  योगी सरकार में उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमि संरक्षण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय इसे गंगा पुनर्जीवन, जल सुरक्षा और स्थानीय पारिस्थितिकी से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में गंगा नदी के किनारे स्थित 22 उच्च प्राथमिकता वाली आर्द्रभूमियों को विधिवत अधिसूचित किया जा चुका है। अब इनके वैज्ञानिक और समन्वित प्रबंधन के लिए एकीकृत प्रबंधन योजनाओं (आईएमपी) को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में 8 आर्द्रभूमियों के प्रबंधन प्रस्ताव तैयार हो चुके हैं, जिनकी समीक्षा चल रही है और इन्हें जल्द अनुमोदन के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजा जाएगा। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने कहा कि आर्द्रभूमियों को कानूनी संरक्षण मिलने से इनके संरक्षण, पुनर्स्थापन और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए संस्थागत आधार मजबूत हुआ है। एकीकृत प्रबंधन योजनाओं में आर्द्रभूमि के प्राकृतिक आवास का पुनर्स्थापन, प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका सीधा संबंध गंगा और उसकी सहायक नदियों के नदी तंत्र को मजबूत करने से है। तीन जिलों में 5.36 करोड़ की परियोजनाएं वर्तमान में मुजफ्फरनगर, प्रयागराज और बलिया में आर्द्रभूमि विकास की परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से वित्तीय सहायता मिल रही है और तीनों परियोजनाओं की कुल लागत 5.36 करोड़ रुपये है। प्रयागराज में नुमईया दह झील एवं खेड़ुवा ताल, बलिया में दहताल रेवती और मुजफ्फरनगर में कालेवाला झील को लेकर अलग-अलग संरक्षण एवं विकास कार्य किए जा रहे हैं। प्रयागराज की 591.78 हेक्टेयर क्षेत्र वाली आर्द्रभूमि में आर्द्रभूमि स्वास्थ्य सुधार, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी से आवास पुनर्स्थापन व जल गुणवत्ता सुधार पर काम हो रहा है। बलिया की 34.70 हेक्टेयर दहताल रेवती में जल संचयन संरचनाओं को मजबूत करने, तटवर्ती पौधरोपण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। वहीं मुजफ्फरनगर की 88.36 हेक्टेयर कालेवाला झील में प्रदूषण नियंत्रण, तटवर्ती क्षेत्र संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन उपाय लागू किए जा रहे हैं। 275 आर्द्रभूमियों का सर्वे पूरा प्रदेश में गंगा तटवर्ती 27 जिलों में 10 किलोमीटर की सीमा के भीतर स्थित कुल 275 आर्द्रभूमियों का सूचीकरण, दस्तावेजीकरण और हेल्थ कार्ड तैयार करने का कार्य पूरा हो चुका है। इनके लिए इंटीग्रेटेड वेटलैंड मैनेजमेंट प्लान का निरूपण भी किया गया है। जानकारी के अनुसार 231 आर्द्रभूमियां गंगा के अलग-अलग नदी-खंडों में शामिल हैं, जिसमें बिजनौर से रामगंगा संगम तक 93, रामगंगा संगम से गोमती संगम तक 106 और गोमती संगम से घाघरा संगम तक 32 आर्द्रभूमियां हैं। भूजल और नदी तंत्र को मिलेगा लाभ आर्द्रभूमियां प्राकृतिक रूप से पानी को रोकने, प्रदूषकों को छानने और भूजल पुनर्भरण में मदद करती हैं। इनके संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन से जल सुरक्षा मजबूत होने के साथ जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी लाभ मिलता है। यही वजह है कि इन क्षेत्रों को गंगा पुनर्जीवन की व्यापक कार्ययोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। आठ नई योजनाओं पर आगे बढ़ेगा काम राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (उत्तर प्रदेश) के यूनिट हेड नॉलेज एंड प्लानिंग मिथिलेश कुमार (पद) ने बताया कि बदायूं, बुलंदशहर, कानपुर नगर, उन्नाव और मुजफ्फरनगर की आठ आर्द्रभूमियों के आईएमपी प्रस्ताव तैयार हो चुके हैं। इनमें बदायूं की पिपरौल पुख्ता और खैरपुर खैराती, बुलंदशहर की मोहम्मदपुर मुबारकपुर, कानपुर नगर की जैसरमऊ, उन्नाव की कुशराजपुर और मेला रामकुंवर तथा मुजफ्फरनगर की चौरावाला और मिलाखेड़ी शामिल हैं। इन प्रस्तावों की समीक्षा के बाद इन्हें अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस तरह आर्द्रभूमियों को कानूनी संरक्षण देने, उनका वैज्ञानिक आकलन करने और मौके पर संरक्षण परियोजनाएं चलाने की प्रक्रिया उत्तर प्रदेश में गंगा पुनर्जीवन के साथ जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय आजीविका को जोड़ रही है। 22 अधिसूचित आर्द्रभूमियां, 10 जिलों में करीब 409.63 हेक्टेयर उच्च प्राथमिकता वाली कुल 22 अधिसूचित आर्द्रभूमियां 10 जिलों में दर्ज हैं। इनमें अलीगढ़ की मुरारखास प्रेतनगर, सिसई और सीकरी आर्द्रभूमियां, कासगंज की बस्तौली-ब्रह्मपुर, सिकंदरपुर खुर्द और रामनछौनी, बदायूं की पिपरौल पुख्ता और खैरपुर खैराती, उन्नाव की मेला रामकुंवर और कुशराजपुर तालाब, प्रयागराज की बड़ा तालाब, उपरिहा तालाब और नुमाईया दाही झील, फर्रुखाबाद की कुठिला झील, खरगपुर खंडौली और रामपुर टफरपुर आर्द्रभूमि, कानपुर नगर की जैसरमऊ, चंदौली की बबरना, बुलंदशहर की मोहम्मदपुर मुबारकपुर, मुजफ्फरनगर की मिलाखेड़ी व चौरावाला तालाब और भदोही की समदा ताल आर्द्रभूमि शामिल हैं। इन 22 अधिसूचित आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 409.63 हेक्टेयर है।

परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए मकरोनिया-मुरैना के बीच चलेगी परीक्षा स्पेशल ट्रेन

परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए मकरोनिया-मुरैना के बीच चलेगी परीक्षा स्पेशल ट्रेन मुरैना  आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेल प्रशासन ने मकरोनिया-मुरैना के बीच परीक्षा अनारक्षित स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। गाड़ी संख्या 01711/01712 दोनों दिशाओं में तीन-तीन फेरे लगाएगी। गाड़ी संख्या 01711 मकरोनिया-मुरैना स्पेशल 1 से 3 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 6 बजे मकरोनिया से रवाना होगी और सागर, खुरई, बीना मलखेड़ी तथा वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी होते हुए अगले दिन सुबह 4 बजे मुरैना पहुंचेगी। वहीं, वापसी में गाड़ी संख्या 01712 मुरैना-मकरोनिया स्पेशल 2 से 4 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 5 बजे मुरैना से चलेगी। ट्रेन वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, अगासोद, बीना मलखेड़ी, खुरई और सागर होते हुए दोपहर 2 बजे मकरोनिया पहुंचेगी। रेल प्रशासन के अनुसार ट्रेन में कुल 12 आईसीएफ कोच लगाए जाएंगे। इनमें 10 द्वितीय श्रेणी स्लीपर/अनारक्षित कोच और 2 एसएलआर कोच शामिल हैं। यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले 139 या NTES के माध्यम से ट्रेन की वास्तविक स्थिति जांचने की अपील की गई है।

जनरेशन कंपनी एमडी एस.के. कटियार के कार्यकाल में पुन: वृद्धि

जनरेशन कंपनी एमडी एस.के. कटियार के कार्यकाल में पुन: वृद्धि राज्य शासन ने 31 मार्च 2027 तक कार्यकाल बढ़ाया रायपुर  छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार कटियार के कार्यकाल में राज्य शासन ने पुन: वृद्धि की है। वे  ऊर्जा विभाग द्वारा इस संबंध में जारी आदेश में उनके कार्यकाल में 31 मार्च 2027 तक वृद्धि की गई है।   कटियार के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में वित्त वर्ष 2023-24 में एबीवीटीपीएस मारवा के प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 84.4 प्रतिशत करना उल्लेखनीय है। इसके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी 33 राज्य जनित निगमों में प्रथम स्थान पर रही। इसी तरह कोरबा पश्चिम ताप विद्युत संयंत्र में जटिल स्टेशन नियंत्रण एवं इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम के नवीनीकरण का कार्य महज 46 दिनों में पूरा किया गया। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक श्री कटियार प्रमाणित ऊर्जा लेखा परीक्षक हैं तथा उन्होंने प्रबंधन में डिप्लोमा भी प्राप्त किया है। उनकी कार्यशैली में स्पष्ट दिशा-निर्देश, टीम को प्रेरित करना और अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के लिए सशक्त बनाना प्रमुख है।  

हादसों के ब्लैक स्पॉट पर परिवहन  विभाग की सख्ती

हादसों के ब्लैक स्पॉट पर परिवहन  विभाग की सख्ती वाहनों से वसूला 31,200 रुपए जुर्माना रायपुर जिले के चिन्हित ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में सड़क हादसों पर  अंकुश लगाने परिवहन विभाग ने भौतिक निरीक्षण और  प्रवर्तन कार्रवाई तेज कर दी है। हाईकोर्ट बिलासपुर के निर्देशों के पालन में परिवहन आयुक्त कार्यालय के मार्गदर्शन में  परिवहन उड़नदस्ता रायपुर की टीम ने टाटीबंध, भाटागांव,  बेमता-भूमिया, सिलतरा ओवरब्रिज-निको कंपनी गेट और  पारागांव-निस्दा मोड़ सहित  संवेदनशील क्षेत्रों में जांच  अभियान चलाया। टाटीबंध में घुमावदार चौक होने के कारण रॉन्ग साइड वाहन चलाने की शिकायतों के  मद्देनजर टीम ने वाहन चालकों की जांच की और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की। भाटागांव और सिलतरा  ओवरब्रिज से निको कंपनी गेट मार्ग पर भी रॉन्ग साइड वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई की गई। बेमता से भूमिया मार्ग पर  रायपुर-बिलासपुर मुख्य मार्ग के डिवाइडर को स्थानीय लोगों ने आवाजाही की सुविधा के लिए कई जगह से काटकर  रास्ता बना लिया है। इससे खासकर दोपहिया  वाहन चालकों के दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। टीम ने ऐसे रास्तों का  इस्तेमाल करने वाले वाहन  चालकों पर कार्रवाई कर उन्हें समझाइश दी। इन अवैध कटों को बंद करने के लिए लोहे की जाली लगाने की कार्रवाई भी शुरू की गई है। इसी तरह पारागांव से निस्दा मोड़ के बीच घुमावदार मार्ग  पर डिवाइडर काटकर बनाए  गए रास्ते को भी दुर्घटना की  दृष्टि से संवेदनशील माना गया। यहां स्कूली बच्चों, वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को  सड़क सुरक्षा के प्रति  जागरूक किया गया। परिवहन विभाग के लगातार जांच अभियान में रॉन्ग साइड ड्राइविंग और अनधिकृत  पार्किंग के मामलों में 15  वाहनों पर कार्रवाई कर  31,200 रुपए का चालान  किया गया। विभाग का कहना है कि  हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और सख्त प्रवर्तन कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

छत्तीसगढ़ के 10 हजार युवाओं के लिए रोजगार का मौका, रायपुर में 7-8 अक्टूबर को रोजगार मेला

छत्तीसगढ़ के लगभग 10 हजार युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर रायपुर में 7-8 अक्टूबर को सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा राज्यस्तरीय रोजगार मेला रायपुर रोजगार की तलाश कर रहे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए बड़ा अवसर सामने आया है। छत्तीसगढ़ सरकार आगामी 7-8 अक्टूबर को रायपुर में दो दिवसीय राज्यस्तरीय रोजगार मेला आयोजित कर रही है। इस रोजगार मेले में करीब 10 हजार युवाओं को नौकरियां मिलने की उम्मीद है। अलग-अलग शैक्षणिक योग्यताओं और हुनर वाले युवा इस मेले में हिस्सा लेकर नौकरियां पा सकते हैं।                  कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा यह मेला बूढ़ापारा स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रदेश के शिक्षित और प्रशिक्षित युवाओं को निजी क्षेत्र में उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए अब तक 62 कंपनियों और प्लेसमेंट एजेंसियों से 9,449 रिक्त पदों की जानकारी सरकार को मिली है।अन्य कंपनियों से भी संपर्क जारी है, जिससे उपलब्ध अवसरों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। इस मेले के माध्यम से स्थानीय कंपनियों के साथ राष्ट्रीय स्तर की निजी कंपनियों को भी एक मंच पर लाया जा रहा है।                 रोजगार मेले के दूसरे दिन (8 अक्टूबर) मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब चयनित युवाओं को ऑफर लेटर वितरित करेंगे। यह आयोजन युवाओं को रोजगार से जोड़ने और स्वावलंबी बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार के प्रयासों को आगे बढ़ाएगा।कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा, ‘राज्य सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। रोजगार मेले के माध्यम से अधिक से अधिक युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप अवसर दिलाने का प्रयास है।’ विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर             इस मेले में दसवीं और बारहवीं पास युवाओं से लेकर आईटीआई, डिप्लोमा और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके अभ्यर्थियों के लिए रिक्तियां उपलब्ध हैं। कृषि स्नातक, सामान्य स्नातक तथा एमबीए और एमसीए सहित स्नातकोत्तर योग्यताधारी युवा भी अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए मशीन ऑपरेटर, असेंबली ऑपरेटर, फिटर, वेल्डर, इलेक्ट्रिशियन, इलेक्ट्रिक मीटर टेक्नीशियन और मेंटेनेंस इलेक्ट्रिशियन जैसे पद भी रिक्तियों में शामिल हैं। मैकेनिकल इंजीनियर और गुणवत्ता निरीक्षक के पदों के लिए भी रिक्तियां प्राप्त हुई हैं।             इनके अलावा कंप्यूटर ऑपरेटर, कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव, टेलीकॉलर,  रिलेशनशिप मैनेजर, सेल्स एग्जीक्यूटिव और सेल्स ऑफिसर जैसे पदों पर काम करने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए भी रोजगार मेले में रिक्तियां उपलब्ध हैं। साथ ही बैंकिंग, फाइनेंस और मानव संसाधन (एचआर) से संबंधित अवसर भी मेले में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्वास्थ्य एवं देखभाल के क्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ और केयर टेकर सहित  सुरक्षा सेवाओं में गार्ड और सुपरवाइजर, जबकि परिवहन तथा सामान की आवाजाही से जुड़े कामों में ड्राइवर, डिलीवरी कर्मी, बाइक राइडर और पिकर-पैकर जैसे पद भी इसमें शामिल हैं। अभ्यर्थी अपनी योग्यता, रुचि और संबंधित पद की पात्रता देखकर आवेदन कर सकेंगे। ये कंपनियां एवं संस्थाएं लेंगी हिस्सा             रोजगार मेले के लिए क्वेस कॉर्प, रैंडस्टैड इंडिया, राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स-सतलज टेक्सटाइल्स, वर्द्धमान टेक्सटाइल्स, जेनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और एयरटेल पेमेंट बैंक जैसी कंपनियों ने रिक्तियां उपलब्ध कराई हैं। इनके अलावा इंस्टाकार्ट, स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल, स्वतंत्र माइक्रोफिन, एनआईआईटी, आइसेक्ट, शांता टेक्नो, राजत इक्विपमेंट्स और फर्स्ट फ्लाई कॉर्पाेरेट भी इनमें शामिल हैं। ई-रोजगार पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन            रोजगार मेले में आवेदन और चयन प्रक्रिया को सुगम तथा व्यवस्थित बनाने के लिए ई-रोजगार पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। विभिन्न कंपनियों और प्लेसमेंट एजेंसियों से प्राप्त रिक्तियोंको पोर्टल पर प्रदर्शित किया जा रहा है। इच्छुक युवा आधिकारिक पोर्टल www.erojgar.cg.gov.in पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, घर बैठे पदों की जानकारी देख सकते हैं और अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। इससे उन्हें मेले से पहले ही उपलब्ध रोजगार अवसरों को समझने का समय मिलेगा।             नियोजक भी पोर्टल पर अभ्यर्थियों की प्रोफाइल और आवेदन देख सकेंगे। इनके आधार पर जरूरत के अनुसार उम्मीदवारों की सूची तैयार करने तथा प्रारंभिक चयन प्रक्रिया संचालित करने की सुविधा होगी।                इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में छत्तीसगढ़ रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग के राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों और प्लेसमेंट कैंप में 9,463 अभ्यर्थी चयनित हुए थे।रोजगार विभाग के   आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में 311 प्लेसमेंट कैंप और रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर में रोजगार मेले आयोजित हुए जिनमें 5,314 अभ्यर्थी चयनित हुए।जबकि 2025-26 में 245 प्लेसमेंट कैंप और रायपुर, बलौदाबाजार एवं दुर्ग में आयोजित रोजगार मेले में 4,149 अभ्यर्थी चयनित हुए। वित्त वर्ष 2026 में सितंबर तक राज्य में 224 प्लेसमेंट कैंप और रोजगार मेलों का आयोजन हो चुका है, जिनमें 8,878 अभ्यर्थी चयनित हुए हैं।

कुपोषण पर योगी सरकार का बड़ा अभियान, 26 जिलों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच

कुपोषण पर योगी सरकार का ‘संभव’ प्रहार, 26 जिलों में 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग व यूनिसेफ की निगरानी से पोषण सेवाओं को मिल रही गति संभव 6.0 अभियान के जरिए कमियों को दूर करने पर फोकस, दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षण को मिल रहा जोर 26 जिलों में विभागीय समन्वय की मजबूत तस्वीर, आगरा, एटा व फिरोजाबाद में भी टीम ने किया दौरा लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कुपोषण की रोकथाम और बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार के लिए योगी सरकार के संभव 6.0 अभियान को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने की कवायद तेज है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के साथ यूनिसेफ की राज्य एवं मंडलीय टीमें लगातार क्षेत्रीय अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) कर अभियान की प्रगति, सेवाओं की गुणवत्ता और विभागीय समन्वय का जायजा ले रही हैं। अब तक 26 जनपदों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों का अनुश्रवण किया जा चुका है। 395 केंद्रों पर परखी गई पोषण सेवाओं की गुणवत्ता अनुश्रवण के दौरान बच्चों के वजन और लंबाई-ऊंचाई की माप, वृद्धि निगरानी, संभव 6.0 की गतिविधियों और माइक्रोप्लान के क्रियान्वयन को देखा गया। अधिकांश केंद्रों पर वृद्धि निगरानी के आवश्यक उपकरण उपलब्ध मिले और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मापन संबंधी व्यावहारिक दक्षता सामान्यतः अच्छी पाई गई। 26 जिलों में विभागीय समन्वय की मजबूत तस्वीर 26 जिलों में आकलन के दौरान अधिकांश जनपदों में आईसीडीएस, स्वास्थ्य और पंचायती राज विभाग के बीच समन्वय तथा अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी सकारात्मक मिली। जनपद स्तर पर माइक्रोप्लान तैयार कर नियमित समीक्षा बैठकों, प्रशिक्षण और अभिमुखीकरण के माध्यम से अभियान को गति दी जा रही है। आगरा, एटा और फिरोजाबाद में भी टीम ने किया दौरा यूनिसेफ की राज्य स्तरीय टीम के डॉ. सन्दीप सेठ ने हाल में आगरा, एटा और फिरोजाबाद में क्षेत्रीय अनुश्रवण किया। आंगनबाड़ी केंद्रों पर संभव 6.0 की गतिविधियों और वृद्धि निगरानी का जायजा लेने के साथ अधिकारियों व फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं से संवाद कर आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए गए। दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षण को और मिलेगा जोर बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि अनुश्रवण में कुछ स्थानों पर गतिविधियों के बेहतर संचालन के बावजूद दस्तावेजीकरण मजबूत करने की जरूरत सामने आई। माइक्रोप्लान, बैठक कार्यवाही, फील्ड विजिट और एक्शन टेकन रिपोर्ट को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की वृद्धि निगरानी उपकरण (जीएमडीएस), संभव 6.0 और गंभीर कुपोषण (एसएएम) की पहचान एवं प्रबंधन संबंधी तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

चंडीगढ़ में देशभर के मेयरों का जमावड़ा, 4 से 6 अक्टूबर तक चलेगा सम्मेलन

चंडीगढ़ देशभर के मेयरों का चंडीगढ़ में जमावड़ा होने जा रहा है। 4 से 6 अक्टूबर तक सेक्टर-10 स्थित होटल माउंटव्यू में ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ मेयर का 118वां महापौर सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें देशभर से महापौर और प्रतिनिधि शामिल होंगे। ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ मेयर की कार्यकारिणी के करीब 40-45 सदस्यों के सम्मेलन में पहुंचने की उम्मीद है। इनमें से 28 सदस्यों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 17 सदस्यों ने शामिल होने से मना कर दिया है। बाकी सदस्यों से बातचीत चल रही है। चंडीगढ़ इस बार सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। मेयरों के लिए क्या किए गए इंतजाम, जानिए…     गृह सचिव ने अधिकारियों के साथ की बैठक: सम्मेलन की तैयारियों को लेकर गृह सचिव एवं स्थानीय निकाय विभाग के सचिव मनदीप सिंह बराड़ ने अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें महापौर सौरभ जोशी, उपायुक्त निशांत कुमार यादव, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, पुलिस महानिरीक्षक पुष्पेंद्र कुमार, एसएसपी कंवरदीप कौर समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।     परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा: बैठक में बाहर से आने वाले महापौरों और प्रतिनिधियों के ठहरने, सुरक्षा, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। गृह सचिव ने संबंधित विभागों को अपनी जिम्मेदारियां समय पर पूरी करने और आपसी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।     5 को उद्घाटन और शहर भ्रमण: सम्मेलन की शुरुआत 4 अक्टूबर को अतिथियों के आगमन से होगी। 5 अक्टूबर को उद्घाटन सत्र आयोजित होगा। इसी दिन परिषद की बैठक के साथ चंडीगढ़ नगर निगम की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों से महापौरों और प्रतिनिधियों को परिचित कराने के लिए शहर का भ्रमण कराया जाएगा। 6 अक्टूबर को समापन सत्र होगा।     होटल माउंटव्यू में कमरों की बुकिंग: सम्मेलन में शामिल होने वाले सदस्यों के लिए होटल माउंटव्यू में कमरों की बुकिंग की जा रही है। शहर भ्रमण के लिए सीटीयू की दो बसों का इंतजाम किया गया है। दोनों बसें दो दिन तक सदस्यों के साथ रहेंगी। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस को और ठहरने व अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सिटको को दी गई है।     25 लाख का बजट मंजूर: मेयर सम्मेलन के लिए नगर निगम आयुक्त की ओर से 25 लाख रुपए का बजट मंजूर किया जा चुका है। हालांकि नगर निगम के कई पार्षदों का कहना है कि उन्हें सम्मेलन के आयोजन की जानकारी तक नहीं है। पार्षदों का कहना है कि निगम का पैसा खर्च होना है, लेकिन इसके लिए निगम हाउस या किसी कमेटी से बजट मंजूर नहीं कराया गया।     सदस्यों की पूरी सूची भी अभी निगम के पास नहीं: वहीं, सम्मेलन में शामिल होने वाले कार्यकारिणी सदस्यों की पूरी सूची भी अभी निगम के पास नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस अधिकारियों ने सूची मांगी थी। बताया गया है कि शनिवार को सूची कंफर्म होने के बाद इसे एसएसपी और एमडी सिटको को सौंपा जाएगा। इनका आना कंफर्म कार्यकारिणी की चेयरमैन रेनू बोला गुप्ता (मेयर, करनाल), नेशनल जनरल सेक्रेटरी आशुतोष वरशने (पूर्व मेयर, अलीगढ़), सीनियर वाइस चेयरमैन डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव (मेयर, गोरखपुर), वाइस चेयरमैन मरिगेन सारानिया (मेयर, गुवाहाटी), वाइस चेयरमैन पुष्यामित्रा भार्गव (मेयर, इंदौर), वाइस चेयरमैन मायाबेन धर्मेंद्राबाई मवानी (मेयर, सूरत) और सेक्रेटरी इंदरजीत कौर (मेयर, लुधियाना) का आना कंफर्म बताया गया है। इसके अलावा पूजा विडानी (बिलासपुर), शेरिंग पैडेन भूटिया (गंगटोक), मीनल चौबे (रायपुर), नीता राजेंद्रा ठाकरे (नागपुर), लिखा नारी तदार (इटानगर), जी उदयाकुमार (अवाडी), नेहल शुक्ला (राजकोट), राजीव जैन (सोनीपत), रूपरानी संग्राम सिंह निकल (कोल्हापुर), नंदलाल देवगन (बीरगांव), लक्ष्मी नारायण गुप्ता (छपरा), प्रवीण बतरा जोशी (फरीदाबाद), विनोद अग्रवाल (मुरादाबाद), कुरागायला उमा रानी (निजामाबाद), शंभु पासवान (ऋषिकेश), अनीता अग्रवाल (रूड़की), योगेश कुमार (सतना), विवेक नारायण (पूर्व मेयर, ग्वालियर), नवीन जैन (पूर्व मेयर, आगरा) और जगदीश राय पटेल (पूर्व मेयर, सूरत) के नाम भी शामिल हैं।