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देश सेवा से उद्यम तक का सफर, PMFME योजना ने बदली सफलता की कहानी

देश सेवा से उद्यम सेवा तक – प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना ने बनाया सफल उद्यमी भोपाल  भिण्ड शहर के चतुर्वेदी नगर निवासी संतोष सिंह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना पीएमएफएमई अंतर्गत प्राप्त सहायता के माध्यम से सफल उद्यमी बने हैं। भारतीय सेना में हवलदार के पद पर 17 वर्षों तक सेवा देने वाले सिंह ने देश-सेवा के बाद जिले में उद्यम-सेवा के जज्बे के साथ खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कदम रखा। वैष्णवी ऑयल मिल के माध्यम से ओडीओपी उत्पाद – सरसो का प्रसंस्करण कर वे न केवल 10 लाख की वार्षिक आय प्राप्त कर रहे हैं बल्कि 5 अन्य स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार भी दे रहे है। शुरुआती दिनों में वैष्णवी ऑयल मिल की सीमित संसाधनों के कारण उत्पादन क्षमता कम थी और उत्पाद को बड़ा बाजार नहीं मिल पा रहा था। पीएमएफएमई योजना अंतर्गत आवेदन करने पर योजना के तहत उन्हें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 13.50 लाख रुपए का ऋण और 5.25 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। उन्होंने इस सहायता से मिल के उन्नयन हेतु आधुनिक एक्सपेलर, फिल्टर और मोटर मशीनें लगाई जिससे उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई। आज वे ग्रामीण क्षेत्रों से किसानों से सीधे सरसों खरीद कर शुद्ध सरसों का तेल निकालते हैं और उसे खुला एवं टीन के डिब्बों में पैक कर स्थानीय बाजार में बेचते हैं। सिंह का कहना है कि पीएमएफएमई योजना अत्यंत लाभकारी है जिसके अंतर्गत सहायता प्राप्त कर युवा अपना उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। सिंह अपने खाद्य प्रसंस्करण उद्यम के सफल संचालन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत संचालित इस योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना पर अधिकतम 10 लाख रुपए की सीमा तक 35 प्रतिशत अनुदान और 3 प्रतिशत ब्याज माफी का प्रावधान है। जिले के युवा, कृषक, और छोटे व्यवसायी व्यक्तिगत स्तर पर, तथा किसान उत्पाद संगठन, स्वसहायता समूह और उत्पादक सहकारी समिति उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से संपर्क कर नए औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अथवा मौजूदा इकाइयों के उन्नयन के लिए योजना अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।  

Budhni Railway Station: बुदनी को मिलेगी नई रेल कनेक्टिविटी, ट्रेनों के स्टॉपेज से यात्रियों को राहत

 इंदौर  इंदौर से रेल रूट से बुदनी और नर्मदापुरम की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा में समय भी बचेगा। बुदनी रेलवे स्टेशन आने वो समय में जंक्शन के रूप में लेने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक इटारसी और भोपाल के बीच यह बड़ा जंक्शन होगा। बुदनी स्टेशन पर ट्रेनों के स्टॉपेज से यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही इससे यात्रा में लगने वाला लंबा समय भी कम होगा। इस स्टेशन पर पहले कुछ ट्रेनों का स्टॉपेज था, अब जंक्शन बनने के बाद इसमें कई ट्रेनों का स्टॉपेज रहेगा। इससे इस क्षेत्र के यात्रियों को सुविधा मिलेगी। बुदनी रेलवे स्टेशन पर नई बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही यह बनकर तैयार हो जाएगी। जिस रेलवे स्टेशन पर तीन दिशाओं की ओर से ट्रेन आती है उसे जंक्शन कहा जाता है। ऐसे में आने वाले समय में बुदनी रेलवे स्टेशन भोपाल और इटारसी के बीच महत्वपूर्ण रहेगा। सलकनपुर मार्ग से जुड़ेगा जुड़ेगा क्षेत्र बुदनी रेलवे स्टेशन के जंक्शन बनने से तीसरी लाइन मिलेगी। इसके साथ ही सलकनपुर मार्ग भी इससे जुड़ जाएगा। इस नए रूट के बनने से अब ट्रेनों को भोपाल घूमकर नहीं जाना होगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा। पहले इस रेलवे स्टेशन कुछ गाड़ियों का हाल्ट था। लेकिन जंक्शन बनने से नई ट्रेमें रुकने के रास्ते खुल गए हैं। नई बिल्डिंग नए स्ट्रक्चर का कंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। लेकिन यहां पर पहले से बनी रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग अभी भी है। जंक्शन बनने के साथ ही यहां अत्याधुनिक सुविधाओं वाली नई बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेजी से जारी है। बढ़ते भारत के लिए एक नया रेल गलियारा  भोपाल-इटारसी कॉरिडोर पहले से ही अत्यधिक व्यस्त है, और मध्य प्रदेश का पश्चिमी भाग राज्य के केंद्रीय और पूर्वी भागों से संपर्क के लिए लगभग पूरी तरह से इसी पर निर्भर है। इंदौर-बुदनी लाइन एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी, जिससे नेटवर्क की क्षमता में काफी वृद्धि होगी और मौजूदा रेल बुनियादी ढांचे पर भीड़भाड़ कम होगी। एक बार चालू हो जाने पर, यह कॉरिडोर इंदौर और जबलपुर के बीच की दूरी को लगभग 68 किलोमीटर और यात्रा के समय को लगभग दो घंटे कम कर देगा, जिससे यात्रियों और माल ढुलाई के लिए एक तेज और अधिक कुशल संपर्क उपलब्ध होगा। इससे इंदौर, देवास और सीहोर जिलों के कई कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में भी सुधार होगा, जिनमें से कई पारंपरिक रूप से रेल नेटवर्क से बाहर रहे हैं। बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग यह मध्य भारत में चल रही सबसे महत्वाकांक्षी रेलवे निर्माण परियोजनाओं में से एक है। इस कॉरिडोर को लेवल-क्रॉसिंग-मुक्त रेलवे लाइन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे परिचालन सुरक्षा और दक्षता में काफी सुधार होगा। इसका पैमाना निर्माणाधीन बुनियादी ढांचे में परिलक्षित होता है: • 80 महत्वपूर्ण पुल • 96 छोटे पुल • 139 सड़क अंडरब्रिज (आरयूबी)। • 5 सड़क ओवरब्रिज (आरओबी) • 18 स्टेशन: 3 ठहराव स्टेशन, 15 क्रॉसिंग स्टेशन • 10.6 किमी से अधिक की कुल लंबाई वाले 3 पुल • लगभग 10 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 2 रेलवे सुरंगें दूरी कम होगी नया जंक्शन बनने से तीसरी लाइन मिल जाएगी। इससे अनकनेक्टेट सलकनपुर मार्ग के क्षेत्र जुड़ जाएंगे। साथ ही भोपाल की अपेक्षा नये रूट से जाने पर दूरी कम होगी और समय भी बचेगा। -नवल अग्रवाल, पीआरओ रेलवे

जाति प्रमाणपत्र मामले में बड़ी कार्रवाई, निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित संबंधित लोगों पर प्रकरण दर्ज

जाति प्रमाणपत्र से संबंधित शिकायत पर सतर्कता शाखा की कार्रवाई निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध, विवेचना प्रारंभ भोपाल  मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत होकर आरक्षित वर्ग का लाभ प्राप्त करने तथा जाति प्रमाणपत्र से संबंधित शिकायत पर पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा द्वारा कार्रवाई की गई है। शिकायत की जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में संबंधित निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई है। यह प्रकरण आवेदक श्री हरवीर सिंह रघुवंशी, निवासी राघौगढ़, जिला गुना द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर पंजीबद्ध किया गया है। उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा जाति प्रमाणपत्र की जांच प्रकरण से संबंधित जाति प्रमाणपत्र की जांच मध्यप्रदेश शासन की “अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति”, भोपाल द्वारा की गई थी। समिति द्वारा उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों की जांच के उपरांत क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण, विदिशा द्वारा वर्ष 1984 में जारी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। समिति की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित अधिकारी के पक्ष में वर्ष 1984 में विदिशा जिले से अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था। उपलब्ध अभिलेखों में संबंधित अधिकारी के मूल निवासी होने से जुड़े तथ्यों को लेकर भी जांच में प्रश्न सामने आए हैं। विवेचना के दौरान उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह भी सामने आया है कि पुलिस सेवा में नियुक्ति से पूर्व संबंधित अधिकारी द्वारा मध्यप्रदेश में शासकीय शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान स्वयं को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत किया गया था।इसके बाद मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्ति तथा शासकीय सेवा में पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभ प्राप्त किया। उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया से संबंधित तत्कालीन अभिलेखों एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका के संबंध में भी तथ्य सामने आए हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में नियमों एवं उपलब्ध अभिलेखों के अनुरूप कार्यवाही हुई थी अथवा नहीं, इस संबंध में भी पुलिस द्वारा विवेचना की जा रही है। उपलब्ध तथ्यों एवं जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में 18 सितंबर 2026 को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी, 167 एवं 420 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के अंतर्गत संबंधित व्यक्तियों एवं अन्य के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण में दस्तावेजों, संबंधित व्यक्तियों के बयानों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विवेचना की जा रही है। विवेचना में प्राप्त तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।  

जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे से बदलेगी कनेक्टिविटी, MP-UP के कई शहरों को मिलेगा हाई-स्पीड रूट

जबलपुर  मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे महाकौशल से विंध्य और उत्तर प्रदेश तक तेज कनेक्टिविटी देने वाला अहम प्रोजेक्ट होगा। इसके बनने के बाद जबलपुर से वाराणसी का सफर करीब 5 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। यह कॉरिडोर कटनी, मैहर, सतना, रीवा और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों को भी बेहतर तरीके से जोड़ेगा। 5 घंटे में पूरा होगा जबलपुर-वाराणसी का सफर फिलहाल जबलपुर से वाराणसी की दूरी करीब 460 से 480 किलोमीटर है। मौजूदा 2 लेन मार्ग से सफर करने में लगभग 10 से 12 घंटे लग जाते हैं। नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद 4 लेन हाई-स्पीड रास्ता उपलब्ध होगा। वाहनों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने की उम्मीद है। इससे यात्रा के समय में करीब 5 से 6 घंटे की कमी आ सकती है। यानी जबलपुर से वाराणसी का सफर करीब 5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इससे धार्मिक यात्रा करने वाले यात्रियों को भी काफी सुविधा मिलेगी। ये शहर होंगे सीधे कनेक्ट जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे के जरिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। इनमें जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा, प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं। यह रूट मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र से शुरू होकर विंध्य क्षेत्र के रास्ते उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल तक पहुंचेगा। कॉरिडोर रीवा-सतना बेल्ट के साथ उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और प्रयागराज के बाहरी हिस्सों को टच करते हुए वाराणसी रिंग रोड से जुड़ेगा। MP-UP की नई लाइफलाइन बनेगा कॉरिडोर जबलपुर-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर को रणनीतिक रूप से तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए महाकौशल, विंध्य और पूर्वांचल के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। व्यापार के साथ धार्मिक पर्यटन को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। जबलपुर सीधे प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ जाएगा। करीब 30 हजार करोड़ की लागत जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का हिस्सा है। यह आधुनिक, ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल हाईवे नेटवर्क का हिस्सा होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 30,000 करोड़ रुपये बताई गई है। DPR और सर्वे का काम अंतिम दौर में इस अहम प्रोजेक्ट को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक मंजूरियों और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और तकनीकी दल ने एलाइनमेंट को लेकर शुरुआती सर्वेक्षण भी शुरू कर दिया है। प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अहम चुनौती है, क्योंकि एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के कई जिलों से होकर गुजरेगा। माना जा रहा है कि अगले साल तक इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकती है।

ग्लोबल मेहमानों के सामने सजेगा यूपी की संस्कृति का ‘महाकुंभ’, ट्रेड शो में दिखेगी विविधता

ट्रेडीशन संग ट्रेडः ग्लोबल मेहमानों के सामने सजेगा यूपी की संस्कृति का 'महाकुंभ' उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखेगी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता 25 से 29 सितंबर तक काशी के शास्त्रीय सुर से बुंदेलखंड के राई और अवध की सूफियाना शाम आदि की सजेगी महफिल   योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का मिल रहा अवसर लखनऊ/ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 25 से 29 सितंबर तक विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश को निवेश, व्यापार और पर्यटन के साथ-साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है। ट्रेड शो में देश-विदेश से आने वाले उद्यमियों, निवेशकों और आगंतुकों को प्रदेश की लोक कलाओं, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। पांच दिनों में सजेगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की महफिल ट्रेड शो के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत 25 सितंबर को शंख वादन एवं वैदिक मंगलाचरण से होगी। वाराणसी के विशाल कुमार की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इसके बाद नोएडा के पं. चेतन जोशी का वाद्य संगीत, लखनऊ की अलोकनिशा श्रीवास्तव का कथक नृत्य, प्रयागराज की पूर्णिमा का ढेढ़िया लोक नृत्य और वृंदावन की आरती खेतपाल की भजन प्रस्तुति दर्शकों को आकर्षित करेगी। 26 सितंबर को पखावज युगल, भोजपुरी लोक गायन, कथक, मथुरा का लोक नृत्य और स्टार नाइट का आयोजन होगा। पखावज युगल में दिल्ली के पं. रविशंकर उपाध्याय एवं पं. ऋषि शंकर उपाध्याय प्रस्तुति देंगे। भोजपुरी लोक गायन में मिर्जापुर की कुसुम पांडेय, जौनपुर के अवनीश तिवारी और कथक में नोएडा की मर्यादा कुलश्रेष्ठ शामिल होंगी। मथुरा की सीमा मावल लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगी और सुल्तानपुर की निष्ठा शर्मा स्टार नाइट में प्रस्तुति देंगी। 27 सितंबर को सैक्सोफोन वाद्य संगीत, भजन/लोक गायन, झांसी का राई लोक नृत्य, भरतनाट्यम और स्टार नाइट का आयोजन किया जाएगा। 28 सितंबर को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ का परकशन एन्सेंबल, महोबा के जितेंद्र चौरसिया का आल्हा गायन, कथक, पीलीभीत का थारू जनजातीय नृत्य और सुल्तानपुर की रूपाली जोग्गू की सूफी नाइट आयोजित होगी। 29 सितंबर को वाराणसी के पद्मपं. शिवनाथ मिश्रा का सितार वादन, लखनऊ के कमाल खान का गजल गायन, गाजियाबाद की मिताली सैनी का कथक, ‘कथक ऑफ इंडिया/यूपी’ की कोरियोग्राफ्ड प्रस्तुति और स्टार नाइट के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का समापन होगा। संस्कृति के माध्यम से वैश्विक पहचान योगी सरकार की पहल पर आयोजित ट्रेड शो में प्रदेश के विभिन्न अंचलों की लोक कलाओं और शास्त्रीय परंपराओं को मंच मिलना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करता है। काशी, मथुरा, वृंदावन, बुंदेलखंड, अवध, पूर्वांचल और तराई अंचल के कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रदेश की बहुरंगी संस्कृति से आगंतुकों को परिचित कराएंगी। औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो को कला, संस्कृति और उद्यमिता के संगम के रूप में प्रस्तुत करेंगी।

357 इंजीनियर पदों पर सीधी भर्ती, MP में परीक्षा का जिम्मा केंद्र की एजेंसी को

भोपाल मध्य प्रदेश के नगर निगमों और नगर पालिकाओं में इंजीनियरों के 357 खाली पद जल्द भरे जाएंगे। अगले महीने से इनकी सीधी भर्ती शुरू होगी। इस बार परीक्षा मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल नहीं कराएगा। यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार की कंपनी Ed-CIL को दी गई है। Ed-CIL क्यों चुनी गई नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने कानूनी अड़चनों से बचने के लिए यह फैसला लिया है। विभाग चाहता है कि भर्ती जल्दी और बिना विवाद के पूरी हो। इसके लिए 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी हुआ। भर्ती की निगरानी के लिए दो अलग कमेटियां भी बनाई गई हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने भर्ती प्रक्रिया में कानूनी अड़चन से बचने और इसे तेजी से पूरा करने के लिए Ed-CIL को परीक्षा एजेंसी चुना है। विभाग ने 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर भर्ती संचालन और तकनीकी निगरानी के लिए दो कमेटियां भी गठित की हैं। नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे ने इस फैसले की वजह बताई। उनका कहना है कि विभाग के पास दो साल तक इंतजार करने का समय नहीं है। इसी वजह से केंद्रीय एजेंसी को चुना गया है। पुराना भर्ती विवाद क्या था चार साल पहले सहायक नगर निवेशक और सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी पदों की परीक्षा ESB ने कराई थी। अलग-अलग पदों के लिए संयुक्त परीक्षा हुई लेकिन मेरिट लिस्ट अलग बनी। सहायक नगर निवेशक पद की मेरिट लिस्ट बिना डिग्री-डिप्लोमा सत्यापन के जारी हो गई। इससे कई अपात्र उम्मीदवारों के नाम भी सूची में आ गए।  मामला हाईकोर्ट पहुंचा और भर्ती प्रक्रिया रुक गई। मेरिट लिस्ट की वैधता सिर्फ एक साल थी। इससे समस्या और बड़ी हो गई। अब कोर्ट ने सभी 7 हजार 205 उम्मीदवारों के दस्तावेज दोबारा जांचने के निर्देश दिए हैं। इसी विवाद के बाद विभाग ने इस बार Ed-CIL को चुना। Ed-CIL का अनुभव कैसा है बता दें कि Ed-CIL शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली मिनी रत्न कैटेगरी-1 कंपनी (CPSE – Central Public Sector Enterprise) है। यह कंपनी पहले भी मध्य प्रदेश में परीक्षा करा चुकी है। फरवरी 2023 में इसने राज्य की छह बिजली कंपनियों के 453 पदों के लिए परीक्षा कराई थी। इसके अलावा ओडिशा में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी इसका अनुभव है। ESB को क्यों किया बाहर? 4 साल पुराने विवाद के बाद बदली परीक्षा एजेंसी मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, चार साल पहले सहायक नगर निवेशक और सहायक अतिक्रमण निरोधक अधिकारी पदों की भर्ती परीक्षा ESB ने कराई थी। अलग-अलग पदों के लिए संयुक्त परीक्षा और रिजल्ट जारी किया गया, लेकिन मेरिट लिस्ट अलग-अलग बनाई गई। सहायक नगर निवेशक पद के लिए डिग्री-डिप्लोमा का सत्यापन किए बिना मेरिट लिस्ट जारी होने से उसमें अपात्र उम्मीदवारों के नाम भी शामिल हो गए। मामला हाईकोर्ट पहुंचा और भर्ती प्रक्रिया अटक गई। मेरिट लिस्ट की वैधता एक साल होने से समस्या और बढ़ी। अब कोर्ट ने परीक्षा में शामिल सभी 7,205 उम्मीदवारों के डिग्री-डिप्लोमा के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। विभाग ने इसी विवाद के बाद इस बार परीक्षा के लिए Ed-CIL को चुना है। हालांकि, अफसरों का इस फैसले के पीछे अलग ही तर्क है। कौन है Ed-CIL और क्या है उसका अनुभव? Ed-CIL (एजुकेशनल कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड) केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन 'मिनी रत्न कैटेगरी-1' की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (CPSE) है। मध्य प्रदेश में यह कंपनी पहले भी भर्ती परीक्षा करा चुकी है। फरवरी 2023 में उसने राज्य की छह बिजली कंपनियों में 453 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। इसके अलावा ओडिशा में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती और तेलंगाना समेत कई राज्यों में सरकारी परीक्षाएं कराने का अनुभव भी उसके पास है। खाली पदों का गणित: 295 उपयंत्री और 62 सहायक यंत्री पदों पर भर्ती भर्ती 'मध्य प्रदेश राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा नियम, 2015' और 'मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम नियम, 2000' के तहत होगी। निकायों में उपयंत्री के 295 पद रिक्त हैं, जिनमें 228 पद सिविल के हैं। चयन प्रक्रिया क्या होगी? Ed-CIL ऑनलाइन आवेदन से लेकर रिजल्ट तैयार करने तक की प्रक्रिया संभालेगी। चयन प्रक्रिया इस प्रकार होगी..     ऑनलाइन परीक्षा (CBT): परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी।     उपयंत्री पद: लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट जारी होगी और उसी के आधार पर नियुक्ति होगी।     सहायक यंत्री पद: लिखित परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट बनेगी। इसके आधार पर प्रत्येक पद के लिए तीन उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। नगरीय प्रशासन विभाग विशेष इंटरव्यू बोर्ड बनाएगा, जो उम्मीदवारों की डिग्री और डिप्लोमा का सत्यापन करेगा। भर्ती की निगरानी के लिए दो कमेटियां भर्ती प्रक्रिया की निगरानी के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने 18 अगस्त को दो कमेटियां गठित की हैं.. 1. परीक्षा संचालन एवं समन्वय समिति: अपर आयुक्त मिशा सिंह की अध्यक्षता वाली समिति में उप संचालक भविष्य खोब्रागड़े, उप संचालक आनंद कुमार, सहायक यंत्री सुधीर गर्ग, सहायक यंत्री संजय तिवारी, लेखा अधिकारी सिद्धांत अवस्थी और उपयंत्री अनीता मोर शामिल हैं। समिति विज्ञापन को मंजूरी देने, परीक्षा केंद्र तय करने और एजेंसी के साथ समन्वय का काम करेगी। 2. तकनीकी समिति (IT विंग): सहायक संचालक अजय कुमार गोयल, आईटी एक्सपर्ट गजेंद्र रघुवंशी, आईटी एक्सपर्ट पलक श्रीवास्तव और लेखा अधिकारी सुनीता तिवारी इस समिति में हैं। यह टीम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे, SMS अलर्ट और तकनीकी सुरक्षा की निगरानी करेगी। कितने पद खाली हैं कुल 692 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 397 भरे जा चुके हैं। फिलहाल 295 पद खाली हैं। यह भर्ती उपयंत्री और सहायक यंत्री, दोनों पदों के लिए होगी। उपयंत्री के कुल 295 पद खाली हैं। इनमें 228 पद सिविल, 50 पद विद्युत और 17 पद मैकेनिकल विभाग के हैं। इसके अलावा सहायक यंत्री के 62 पद भी सीधी भर्ती से भरे जाएंगे। इनमें 51 पद सिविल, 7 पद इलेक्ट्रिकल और 4 पद मैकेनिकल के हैं। यह भर्ती मध्य प्रदेश राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा नियम, 2015 और मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम नियम, 2000 के तहत होगी। चयन प्रक्रिया कैसी होगी Ed-CIL ऑनलाइन आवेदन से लेकर रिजल्ट तक की पूरी प्रक्रिया संभालेगी। परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी। उपयंत्री पद के लिए लिखित परीक्षा के बाद सीधे मेरिट लिस्ट जारी होगी। इसी सूची के आधार पर … Read more

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हर परिवार को पक्का घर’ के विजन से साकार हुआ अमृतलाल का सपना

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रत्येक परिवार को सुरक्षित, मजबूत और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के संकल्प को प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से देशभर में नई गति मिल रही है। इस योजना ने जरूरतमंद परिवारों के अपने पक्के घर के सपने को साकार करने का रास्ता आसान किया है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत पंडरीपानी निवासी अमृतलाल का परिवार भी इस बदलाव का उदाहरण है। लंबे समय तक कच्चे मिट्टी के मकान में रहने के बाद अब उनका परिवार अपने पक्के और सुरक्षित आवास में सुखमय जीवन व्यतीत कर रहा है। कच्चे मकान में बारिश के दिनों में होती थी परेशानी अमृतलाल बताते हैं कि पक्का मकान बनने से पहले उनका परिवार कच्चे मिट्टी के मकान में रहता था। बरसात के दिनों में घर की छत से पानी टपकने लगता था और दीवारों में सीलन आ जाती थी। बारिश के साथ मौसम की अन्य परिस्थितियों में भी परिवार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कच्चे मकान में रहना न केवल असुविधाजनक था, बल्कि परिवार की सुरक्षा और बच्चों की पढ़ाई के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध नहीं हो पाता था। प्रधानमंत्री आवास योजना ने पूरा किया पक्के घर का सपना ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अमृतलाल को पक्का आवास स्वीकृत हुआ। योजना से मिली सहायता ने उनके वर्षों पुराने पक्के घर के सपने को साकार कर दिया। निर्माण पूरा होने के बाद अब उनका परिवार मजबूत और सुरक्षित आवास में रह रहा है। नया घर उनके लिए केवल ईंट और दीवारों से बना भवन नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य और सम्मानजनक जीवन का आधार बन गया है। नए घर ने बदली परिवार की दिनचर्या पक्का आवास मिलने के बाद अमृतलाल के परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और दीवारों में सीलन जैसी परेशानियों से राहत मिल गई है। परिवार के सभी सदस्य स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर वातावरण में रह रहे हैं। आवास की सुविधा ने परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी को अधिक सहज और व्यवस्थित बनाया है। बच्चों को मिला पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल नए पक्के मकान का सकारात्मक प्रभाव परिवार के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। अब उन्हें पढ़ने के लिए सुरक्षित और शांत वातावरण मिल रहा है। अमृतलाल बताते हैं कि पक्के घर ने परिवार की सुविधाओं को बढ़ाने के साथ बच्चों के भविष्य के लिए भी बेहतर माहौल उपलब्ध कराया है। घर में खुशहाली का वातावरण है और परिवार अपने भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त महसूस करता है। पक्का घर बना सम्मान और सुरक्षा का आधार प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से मिला पक्का मकान अमृतलाल के परिवार के लिए सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का प्रतीक बन गया है। कच्चे मकान की कठिन परिस्थितियों से निकलकर पक्के आवास में पहुंचना उनके जीवन में आए महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। अब परिवार को मौसम की चुनौतियों के बीच अपने घर की सुरक्षा को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती। अमृतलाल बोले- प्रधानमंत्री आवास योजना ने दी नई पहचान अपने अनुभव साझा करते हुए अमृतलाल ने कहा कि पक्का मकान उनके परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी और राहत लेकर आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना से उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना के माध्यम से उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है। हर परिवार के पक्के घर के संकल्प को मिल रही मजबूती अमृतलाल का परिवार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन का उदाहरण है, जिसमें हर जरूरतमंद परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे परिवारों को पक्की छत मिल रही है, जिनके लिए कभी मजबूत और सुरक्षित घर का सपना दूर की बात थी। आज अमृतलाल का परिवार अपने पक्के घर में निश्चिंत होकर जीवन व्यतीत कर रहा है। उनके लिए यह आवास सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, बच्चों के बेहतर भविष्य और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर और हरित भारत के विजन को साकार कर रहा सौर ऊर्जा का संकल्प

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने की दिशा में ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ देशभर में आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ रही है। योजना के माध्यम से घरों की छतों को बिजली उत्पादन का माध्यम बनाकर परिवार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ बिजली खर्च में भी राहत पा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में भी इस योजना का लाभ नागरिकों तक पहुंच रहा है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत भदौरा निवासी शुभम राठौर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने के विजन से प्रेरित होकर अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कराया है। सौर ऊर्जा को अपनाने से उनके परिवार की घरेलू बिजली जरूरतें अब सौर ऊर्जा से पूरी हो रही हैं और बिजली खर्च में भी राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और देश के परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ की शुरुआत की है। योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सोलर प्लांट स्थापित कर परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना और बिजली के खर्च को कम करने में सहायता प्रदान करना है। शुभम राठौर ने योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर सोलर प्लांट स्थापित कर इस संकल्प को अपने जीवन में अपनाया है। उनके परिवार के लिए अब घर की छत ही बिजली उत्पादन का माध्यम बन गई है। केंद्र और राज्य की सब्सिडी से आसान हुआ सौर ऊर्जा का सफर राठौर को पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये की सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई। वहीं राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी का लाभ मिला। केंद्र और राज्य सरकार से प्राप्त सहायता ने सोलर प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया को उनके लिए आसान बनाया। बिजली बिल में राहत, परिवार को मिली आर्थिक सुविधा सोलर प्लांट लगाने से पहले राठौर को हर महीने लगभग 400 से 500 रुपये तक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद बिजली खर्च में उन्हें उल्लेखनीय राहत मिली है। राठौर बताते हैं कि अब बिजली बिल को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती। घर की जरूरत की बिजली उनकी अपनी छत पर लगे सोलर प्लांट से तैयार हो रही है। अतिरिक्त बिजली का भी हो रहा उपयोग सोलर प्लांट से आवश्यकता से अधिक बिजली बनने पर अतिरिक्त विद्युत ग्रिड में पहुंचती है और उसका समायोजन बिजली बिल में किया जाता है। इससे सौर ऊर्जा से होने वाले लाभ का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है। राठौर का परिवार अपनी जरूरत की बिजली सौर ऊर्जा से पूरी करने के साथ ऊर्जा संरक्षण की दिशा में भी योगदान दे रहा है। स्वच्छ ऊर्जा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश शुभम राठौर का परिवार सौर ऊर्जा को अपनाकर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। सौर ऊर्जा के उपयोग से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। इस तरह योजना का लाभ परिवार की आर्थिक बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ रहा है। शुभम राठौर बोले- अपनी छत से बन रही हमारी बिजली शुभम राठौर बताते हैं कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनके परिवार को बिजली खर्च में राहत मिली है। अब घर की जरूरत की बिजली उनकी अपनी छत पर तैयार हो रही है। उन्होंने कहा कि योजना से मिली सब्सिडी के कारण सोलर प्लांट लगाना आसान हुआ और अब स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करते हुए परिवार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। भदौरा से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मिल रही मजबूती ग्राम भदौरा के शुभम राठौर की कहानी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वच्छ ऊर्जा के विजन को स्थानीय स्तर पर साकार होते दिखाती है। एक परिवार द्वारा अपनी छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना न केवल बिजली की जरूरत पूरी करने का माध्यम बना है, बल्कि ऊर्जा बचत, आर्थिक राहत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सार्थक कदम है। ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ के माध्यम से घर-घर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर ऐसे परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। राठौर का परिवार इसी बदलाव का उदाहरण है, जहां सूरज की रोशनी से बिजली भी बन रही है और आत्मनिर्भर भविष्य की राह भी रोशन हो रही है।

जल जीवन मिशन से बदली ग्राम बारीउमराव की तस्वीर, हर घर पहुंचा नल से शुद्ध पेयजल

रायपुर। जल जीवन मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बारीउमराव में भी इस योजना का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। योजना के तहत गांव के शत-प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन पहुंचने से अब ग्रामीणों को घर बैठे शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है। नल खोलते ही घर के आंगन तक पानी पहुंचने से ग्रामीण परिवारों के दैनिक जीवन में सुविधा, समय की बचत और राहत का नया अध्याय जुड़ा है। पहले पानी के लिए करना पड़ता था लंबा इंतजार जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन से पहले ग्राम बारीउमराव के ग्रामीणों को पेयजल और घरेलू जरूरतों के लिए दूर स्थित हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ता था। विशेषकर गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने के साथ हैंडपंपों पर लंबी कतारें लगती थीं। कई बार हैंडपंप खराब होने की स्थिति में ग्रामीणों को दूसरे स्थानों से पानी लाना पड़ता था। पानी भरने और उसे घर तक पहुंचाने में ग्रामीणों का काफी समय और श्रम खर्च होता था। महिलाओं और बच्चों को भी पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त समय देना पड़ता था। घर तक नल पहुंचा तो आसान हुई जिंदगी जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन मिलने से अब ग्रामीणों को पानी के लिए दूर जाने और कतार में खड़े होने की परेशानी से राहत मिली है। घर में ही नल से पानी उपलब्ध होने के कारण रोजमर्रा के काम पहले की अपेक्षा आसानी से पूरे हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की सुविधा घर तक पहुंचने से उनके समय और श्रम की बचत हो रही है तथा वे बचा हुआ समय खेती-किसानी, रोजगार और अन्य घरेलू कार्यों में लगा पा रहे हैं। श्री करम दास बोले- अब पानी के लिए न दूर जाना पड़ता है, न लाइन में लगना ग्राम बारीउमराव के निवासी श्री करम दास बताते हैं कि पहले पीने और रोजमर्रा के कामों के लिए पानी लेने घर से दूर स्थित हैंडपंप पर जाना पड़ता था। गर्मी के दिनों में हैंडपंप पर लंबी कतार लगने के कारण काफी समय इंतजार करना पड़ता था। कई बार हैंडपंप खराब होने पर दूर-दराज से पानी लाना पड़ता था, जिससे काफी परेशानी होती थी। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत घर में नल कनेक्शन लगने के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। अब घर पर ही नल से नियमित पानी मिल रहा है। पानी के लिए न तो दूर जाना पड़ता है और न ही लंबी कतार में लगना पड़ता है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है और परिवार के सदस्य अन्य जरूरी कार्यों पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं। स्वच्छ पेयजल से बेहतर हो रहा ग्रामीण जीवन घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से ग्रामीणों को पेयजल के लिए स्थानीय जलस्रोतों और दूर स्थित हैंडपंपों पर निर्भरता कम हुई है। नियमित रूप से घर तक पानी उपलब्ध होने से परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त सुविधा मिल रही है। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा मिल रहा है। जल जीवन मिशन ने गांव में पहुंचाई सुविधा की नई रोशनी ग्राम बारीउमराव में जल जीवन मिशन के तहत शत-प्रतिशत घरों तक नल कनेक्शन पहुंचना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। घर की चौखट तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों के जीवन में सुविधा और सुकून बढ़ा है। कभी पानी के लिए लंबी दूरी तय करने वाले परिवार अब अपने घर में ही नल खोलकर पानी प्राप्त कर रहे हैं। यह बदलाव ग्रामीणों के लिए केवल पेयजल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके समय, श्रम और जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रहा है।

यूपीआईटीएस में लिट्टी-चोखा, लहसुन वाले छोले-समोसे, खुरमा और रामकटोरी के स्वाद का होगा जलवा

गोरखपुर। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मंडल की माटी की सोंधी सुगंध और यहां के देसी पारंपरिक लजीज पकवान अब सिर्फ गलियों और चौराहों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ग्लोबल पहचान हासिल करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना ओडीओसी (एक जनपद एक व्यंजन) के प्रोत्साहन से ये पकवान अंतरराष्ट्रीय पटल पर दुनिया भर के खरीदारों और पर्यटकों की जुबान पर छाने के लिए तैयार हैं। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले ‘यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो’ (यूपीआईटीएस) में इस बार गोरखपुर मंडल के पारंपरिक व्यंजनों का भी जलवा देखने को मिलेगा। यूपीआईटीएस में, ओडीओसी के अंतर्गत चयनित गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के विशिष्ट व्यंजनों के विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में देश-विदेश से आने वाले लाखों आगंतुक और कारोबारी अब पूर्वांचल के पारंपरिक भोजन और मिठाइयों का स्वाद चख सकेंगे। उद्योग विभाग के संयुक्त आयुक्त गौरव मिश्रा के अनुसार ट्रेड शो के फूड कोर्ट में गोरखपुर मंडल के चुनिंदा व्यंजनों के लिए अलग से विशेष क्लस्टर और स्टाल तैयार किए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय खानपान संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाना, पारंपरिक कारीगरों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराना और प्रदेश में 'फूड टूरिज्म' को गति देना है। यूपीआईटीएस के लिए गोरखपुर से लिट्टी चोखा व लहसुन वाले छोले समोसे, महराजगंज से रामकटोरी, कुशीनगर से लाल पेड़ा,छेना का खुरमा व केले के चिप्स और देवरिया से लिट्टी चोखा व मालपुआ का चयन किया गया है। इन व्यंजनों के स्टाल लगाने को कुल छह कारोबारियों का चयन किया गया है।  चयनित व्यंजनों की विशेषता की बात करें तो लिट्टी चोखा यहां के लोगों की खास पसंद है। सत्तू, अजवाइन, मंगरैल और शुद्ध सरसों के तेल में सने मसालों के साथ कंडे की आंच पर पकी और देसी घी में चुपड़ी लिट्टी और बैंगन-टमाटर व आलू का भुना चोखा पूर्वांचल की विशिष्ट पहचान है। इसे अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो में पारंपरिक अंदाज में परोसा जाएगा। गोरखपुर का एक अन्य व्यंजन लहसुन वाला छोला समोसा, छोले में साबुत लहसुन के प्रचुर मात्रा से लगातार प्रसिद्धि बटोर रहा है। इसका विशिष्ट जायका देश-विदेश के मेहमानों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। इसी तरह कुशीनगर जिले के व्यंजन पेड़ा और छेना से बनने वाला खुरमा तथा महराजगंज जिले के मिठौरा बाजार की रामकटोरी की मिठास भी ट्रेड शो में छाप छोड़ने को तैयार है।  यूपी आईटीएस में लिट्टी चोखा का स्टाल लगाने के लिए चयनित गोरखपुर के गंगाधर दूबे का कहना है कि सरकार की इस पहल से केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की खानपान संस्कृति को भी नई प्रतिष्ठा मिलेगी। ​यूपीआईटीएस का मंच साबित करेगा कि पूर्वांचल का स्वाद केवल घरेलू रसोई या ढाबों तक सीमित नहीं, बल्कि यह दुनिया भर के फूड लवर्स के दिलों को जीतने का दम रखता है। जबकि लहसुन वाले छोला समोसा का स्टाल लगाने के लिए चयनित चौरीचौरा के चंद्रकेश प्रजापति का मानना है कि यूपीआईटीएस में स्थान मिलने के बाद खानपान के कारोबार में लगे ग्रामीण और कस्बाई हुनरमंदों की आर्थिकी भी सुधरेगी।  गोरखपुर मंडल से यूपीआईटीएस के लिए चयनित कारोबारी व उनके व्यंजन 1.चंद्रकेश प्रजापति- मेसर्स चंद्रकेश हलवाई चौरीचौरा गोरखपुर, लहसुन वाले छोले समोसे। 2.गंगाधर दूबे- मेसर्स बाटी चोखा गोरखपुर, लिट्टी चोखा। 3.सुदीस कुमार- मेसर्स महेंद्र जी रामकटोरी वाले मिठौरा बाजार महराजगंज, रामकटोरी (खोवा आधारित मिठाई)। 4.वेद प्रकाश राय- मेसर्स बाटी चोखा रेस्टोरेंट कसया रोड देवरिया, बाटी चोखा, मालपुआ। 5.सन्नी मद्देशिया- मेसर्स कृष्णा स्वीट हाउस हाटा कुशीनगर, लाल पेड़ा, छेना खुरमा। 6.अनुराग तिवारी- मेसर्स शांडिल्य एग्रो प्रोसेसिंग खड्डा कुशीनगर, केले के चिप्स।