samacharsecretary.com

निवेश आकर्षित करने की कवायद तेज, हैदराबाद में इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में CM साय की अहम मौजूदगी

रायपुर. हैदराबाद में छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट का आयोजन आज किया जाएगा. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन शामिल होंगे. इस दौरान देशभर के कई उद्योगपति और निवेशक भी मौजूद रहेंगे. बैठक में छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति की जानकारी उद्योग जगत को दी जाएगी. साथ ही राज्य में निवेश और उद्योग स्थापना के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा. सरकार के अनुसार अब तक राज्य को करीब 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं. केंद्रीय मंत्री दो दिवसीय दौरे पर केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह आज से छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे. आज वह रायपुर में विकसित भारत संकल्प सम्मेलन में शामिल होंगे. हैंडलूम, हस्तशिल्प, सिल्क और टेक्सटाइल अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. वहीं सड्डू, बैरन बाजार और शांति नगर में जनसंपर्क कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. दौरे के दूसरे दिन वह सफाई अभियान और पौधरोपण कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके अलावा वह सदर बाजार-बुढ़ातालाब क्षेत्र में भी जनसंपर्क करेंगे.

यूपी में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा, पहली बार हाइड्रोजन बसों का संचालन शुरू

नोएडा सीएम योगी ने शुक्रवार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथारिटी को नई इलेक्ट्रिक बसों की सौगात दी। इसके साथ ही पहली बार यूपी में हाइड्रोजन बसों के संचालन का भी शुभारंभ हुआ है। यमुना अथारिटी में तीन हाईड्रोजन बसें चलेंगी। सीएम योगी ने लखनऊ स्थित अपने आवास से बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें 45 बसें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथारिटी में चलेंगी। इन बसों के चलने से जेवर एयरपोर्ट जाना-आना आसान हो जाएगा। सीएम योगी ने हाईड्रोजन बसों के बारे बताते हुए कहा कि तीन हाईड्रोजन बसें यमुना अथारिटी को एनटीपीसी ने उपलब्ध कराया है। कहा कि अब ग्रीन हाईड्रोजन मोबिलिटी नई धारणा बन चुकी है। एक प्रक्रिया के बाद पानी से हाईड्रोजन निकालकर इन बसों का संचालन होगा। पानी में दो हाईड्रोजन और एक ऑक्सीजन होता है। पानी से इन दोनों को अलग किया जाएगा। पानी भी ग्राउंड वाटर या सरफेस वाटर नहीं बल्कि सीवर का लिया जाएगा। सीवर के पानी को ट्रीटमेंट करके इस्तेमाल किया जाएगा। इसी पानी में से ऑक्सीजन को निकालकर वायुमंडल में भेजा जाएगा और हाईड्रोजन को कंप्रेस करके सिलेंडर में भरकर बसों को चलाया जाएगा। इन बसों का संचालन जेवर एयरपोर्ट के पास होने जा रहा है। इससे वहां पर वायु प्रदूषण भी कम होगा। जहरीले वातारण से समाज को बचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि 15 जून से नोएडा में सबसे बड़ा एयरपोर्ट शुरू हो रहा है। तब तक बसों की संख्या 110 कर दी जाएगी। आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाकर 500 की जाएगी। जिले के तीनों प्राधिकरण एरिया में पर्यावरण को बेहतर बनाए रखने के लिए इन इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत की गई है। एयरपोर्ट तक मेट्रो शुरू होने तक बसें लोगों की राह आसान करेंगी। आने वाले समय में मेट्रो भी एयरपोर्ट तक जाएगी। पिछली सरकारों पर हमला शुभारंभ के मौके पर सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में टूटी सड़कों और अराजकता का माहौल था। लोगों के सामने पहचान तक का संकट था। यहां पर लोग निवेश से घबराते थे। आज वर्ल्ड क्लास कनेक्टिविटी के कारण विकास को रफ्तार मिली हुई है। डबल इंजन की सरकार में 4 लाख किलोमीटर का रोड नेटवर्क बनकर है। यूपी के पास आज सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे और इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। भगवान श्रीराम पुष्पक विमान से लंका से अयोध्या आए थे लेकिन एयरपोर्ट के लिए वहां के लोग तरस रहे थे।आजादी के इतने साल बाद तक अयोध्या अपमानित हो रही थी। आज वहां पर महर्षि वाल्मिकी के नाम पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है।

फुटपाथ, डिवाइडर और स्ट्रीट लाइट से सुसज्जित होंगी प्रदेश की प्रमुख सड़कें

 पानीपत लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने चार प्रमुख नेशनल और स्टेट हाईवे को माडल रोड के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में पानीपत से सफीदों, जींद व भिवानी रोड, गोहाना से खानपुर कलां रोड (सोनीपत), घरौंडा से फुरलक रोड (करनाल) व ओल्ड बाईपास रोड (कैथल) को शामिल किया है। यह पहल प्रदेश की सड़कों की गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ-साथ यातायात सुरक्षा को भी बढ़ावा देगी। पीडब्ल्यूडी ने संबंधित मार्गों परहाई टेंशन (एचटी) और लो टेंशन (एलटी) बिजली लाइनों को शिफ्ट करने के संबंध में बिजली निगम को पत्र भेजे हैं। मॉडल रोड परियोजना के तहत सभी चयनित सड़कों के दोनों ओर व्यवस्थित फुटपाथ बनाए जाएंगे। इसके अलावा सड़क के बीचों-बीच आकर्षक डिवाइडर तैयार किए जाएंगे, जिन पर फूलों और सजावटी पौधों का रोपण किया जाएगा। सुरक्षा पर विशेष ध्यान रात्रि में बेहतर रोशनी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। वहीं, यातायात नियमों के पालन और दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट और मानक के अनुरूप जेबरा क्रासिंग बनाई जाएंगी। पानीपत पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन सवित पानु ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से लैस इन मार्गों पर यात्रा अधिक आरामदायक होगी। साथ ही शहरों व कस्बों की कनेक्टिविटी मजबूत होने से स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।     बिजली लाइनों की शिफ्टिंग के लिए कई तरह की औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। ये औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिफ्टिंग के कार्य तेजी से पूरे किए जाएंगे। -आदित्य कुंडू, एक्सईएन, बिजली निगम, पानीपत।  

सरकारी कॉलोनियों को जोड़ने के लिए दिल्ली में बनेगा 6-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर

नई दिल्ली  जनरल पूल रेजिडेंशल अकोमोडेशन (जीपीआरए) के तहत केंद्र सरकार ने जो 7 रेजिडेंशल कॉलोनियां डिवेलप की हैं, उनसे रिंग रोड पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए 13.65 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। रेजिडेंशल कॉलोनियों से एलिवेटेड कॉरिडोर पर चढ़ने और उतरने के लिए चार जगहों पर रैप बनाए जाएंगे। इनमें एक सरोजानी नगर और नेताजी नगर के पास, दूसरा लक्ष्मीबाई नगर, तीसरा मुनिरका और चौथा रैप जेएनयू कैंपस के पास होगा। जेएनयू कैंपस से आगे एयरपोर्ट तक एलिवेटेड कॉरिडोर पर चढ़ने और उतरने की सुविधा नहीं होगी। कॉरिडोर 6 लेन चौड़ा होगा। जीपीआरए कॉलोनियों से रिंग रोड पर वर्तमान में जितना ट्रैफिक है, उसमें कुल 17.6 पसेंट हिस्सेदारी इन 7 कॉलोनियों की है। पीडब्ल्यूडी ने 7 जीपीआरए कॉलोनियों से रिंग रोड पर आकलन कराया है एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, पीडब्ल्यूडी ने 7 जीपीआरए कॉलोनियों से रिंग रोड पर आने-जाने वाले ट्रैफिक वॉल्यूम का आकलन कराया है। इसमें पाया गया कि अफ्रीका एवेन्यू के पास नेताजी नगर और नौरोजी नगर से रोजाना रिंग रोड पर सबसे अधिक 3,215 गाड़ियों का भार पड़ता है। रिंग रोड और लीला पैलेस होटल के बीच रोजाना 2,608 गाड़ियां इन कॉलोनियों से आती-जाती है। किदवई नगर के सामने रिंग रोड पर रोजाना 1,628 गाड़ियां कॉलोनियों से आती-जाती है। सरकार ने श्रीनिवासपुरी में डिवेलप की गई रेजिडेंशल कॉलोनी को कनेक्ट करने के लिए अलग योजना तैयार की है। इन इलाकों में फ्लाईओवर बनाने का प्लान साउथ एक्सटेंशन फ्लाईओवर और एम्स क्लोवरलीफ फ्लाईओवर को जोड़ने के लिए एक अलग फ्लाईओवर बनाने का प्लान है। इसके अलावा, किदवई नगर की बेसमेट पार्किंग में आने-जाने के लिए एक एल-शेप अंडरपास बनाने की भी योजना है।

ऑनलाइन प्यार पड़ा भारी! Tinder के जरिए जज को लगाया लाखों का चूना, मामले में FIR दर्ज

चंडीगढ़  ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। हरियाणा की एक महिला जज कथित तौर पर हनी ट्रैप (Honey Trap) का शिकार हो गईं। उनसे 52 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई। दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले के मुख्य आरोपी की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पहली नजर में ऑनलाइन रोमांस घोटाले के पैटर्न को दर्शाती है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस केस में हुए वित्तीय लेनदेन हनी ट्रैप की परिकल्पना के अनुकूल हैं। कोर्ट ने जांच के शुरुआती चरण और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के गायब होने का हवाला देते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया। सीक्रेट ऑफिसर बनकर जाल में फंसाया यह मामला नवंबर 2025 का है, जब पीड़िता मोबाइल डेटिंग ऐप टिंडर (Tinder) के माध्यम से आरोपी के संपर्क में आई थीं। आरोपी ने कथित तौर पर खुद को एक गुप्त सरकारी विभाग का अधिकारी बताते हुए अपना नाम अभिमन्यु वशिष्ठ बताया था। इसके बाद दोनों के बीच संबंध विकसित हुए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस दौरान आरोपी ने जज साहिबा को ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद उन्होंने आरोपी से जुड़े बैंक खातों में 52 लाख रुपये से अधिक ट्रांसफर कर दिए। कोई रिटर्न नहीं मिला और अंततः यह मामला धोखाधड़ी में बदल गया। नौकरानी के नाम पर दर्ज कराई गई FIR इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि ठगी की शिकार होने के बाद भी जज साहिबा ने खुद एफआईआर दर्ज नहीं कराई। शिकायत उनकी घरेलू सहायिका यानी कि नौकरानी के नाम पर दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसके साथ एक ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए धोखाधड़ी हुई है। सत्र अदालत ने जब आरोपी की जमानत याचिका और बैंक खातों की जांच की तो पाया कि लगभग सभी संदिग्ध लेनदेन न्यायिक अधिकारी के खातों से हुए थे न कि घरेलू सहायिका के खाते से। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, "दर्ज की गई शिकायत असली शिकायतकर्ता को प्रतिबिंबित नहीं करती है। एक न्यायिक अधिकारी, जिसे खुद न्याय देने और कानून के सामने सच्चाई को बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसने खुद आगे आने के बजाय अपनी नौकरानी के नाम का सहारा लेकर अदालत का रुख किया है।" अदालत ने माना कि रोमांस स्कैम का शिकार होने पर व्यक्तिगत शर्मिंदगी हो सकती है, लेकिन यह जांचकर्ताओं से महत्वपूर्ण तथ्यों या सबूतों को छिपाने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा, "किसी अधिकारी की व्यक्तिगत असुविधा को आपराधिक जांच की अखंडता से समझौता करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।" जांच और दोनों पक्षों के रवैये पर कोर्ट नाराज अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि केस से जुड़े कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत जांच से गायब हैं। डेटिंग ऐप से शुरू हुई इस बातचीत के न तो टिंडर चैट्स और न ही जज साहिबा के पूरे व्हाट्सऐप संदेश रिकॉर्ड पर रखे गए हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी एकत्र नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता एक न्यायिक अधिकारी होने के नाते कानून को बेहतर समझती हैं, इसलिए उन्हें जल्द से जल्द जांच अधिकारी या मजिस्ट्रेट के सामने आकर अपनी पूरी व्हाट्सऐप चैट हिस्ट्री, टिंडर चैट और लेनदेन की पूरी सच्चाई पेश करनी चाहिए। वहीं, अदालत ने आरोपी की भी खिंचाई की और कहा कि वह आंख-मिचौली खेल रहा है। आरोपी ने केवल जज द्वारा भेजे गए संदेशों को पेश किया और अपने जवाब छिपा लिए, साथ ही उसने अपने मोबाइल फोन का एक्सेस देने से भी इनकार कर दिया।

नई पहचान पाएंगी हरियाणा की सड़कें, 4 हाईवे को मॉडल रोड के रूप में किया जाएगा विकसित

पानीपत. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने चार प्रमुख नेशनल और स्टेट हाईवे को माडल रोड के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में पानीपत से सफीदों, जींद व भिवानी रोड, गोहाना से खानपुर कलां रोड (सोनीपत), घरौंडा से फुरलक रोड (करनाल) व ओल्ड बाईपास रोड (कैथल) को शामिल किया है। यह पहल प्रदेश की सड़कों की गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ-साथ यातायात सुरक्षा को भी बढ़ावा देगी। पीडब्ल्यूडी ने संबंधित मार्गों परहाई टेंशन (एचटी) और लो टेंशन (एलटी) बिजली लाइनों को शिफ्ट करने के संबंध में बिजली निगम को पत्र भेजे हैं। मॉडल रोड परियोजना के तहत सभी चयनित सड़कों के दोनों ओर व्यवस्थित फुटपाथ बनाए जाएंगे। इसके अलावा सड़क के बीचों-बीच आकर्षक डिवाइडर तैयार किए जाएंगे, जिन पर फूलों और सजावटी पौधों का रोपण किया जाएगा। सुरक्षा पर विशेष ध्यान रात्रि में बेहतर रोशनी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। वहीं, यातायात नियमों के पालन और दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट और मानक के अनुरूप जेबरा क्रासिंग बनाई जाएंगी। पानीपत पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन सवित पानु ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से लैस इन मार्गों पर यात्रा अधिक आरामदायक होगी। साथ ही शहरों व कस्बों की कनेक्टिविटी मजबूत होने से स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। बिजली लाइनों की शिफ्टिंग बिजली लाइनों की शिफ्टिंग के लिए कई तरह की औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। ये औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिफ्टिंग के कार्य तेजी से पूरे किए जाएंगे। -आदित्य कुंडू, एक्सईएन, बिजली निगम, पानीपत।

फैमिली पेंशन पर बड़ा फैसला: दूसरी पत्नी का दावा खारिज, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी

चंडीगढ़. पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने वाली महिला को मृत सरकारी कर्मचारी की फैमिली पेंशन का अधिकार नहीं मिल सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि दूसरा विवाह नियमों और कानून के विपरीत किया गया है तो ऐसी महिला को मृत कर्मचारी की ‘विधवा’ नहीं माना जा सकता और वह राज्य से पारिवारिक पेंशन की मांग भी नहीं कर सकती। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने मोहाली निवासी प्रिया की ओर से दायर अपील एलपीए को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के तहत दूसरी शादी तभी मान्य हो सकती है जब वह कानूनन वैध हो। पहली पत्नी के जीवित रहते किया गया दूसरा विवाह शून्य माना जाएगा और उससे किसी प्रकार का पेंशन संबंधी अधिकार पैदा नहीं होता। अधिकारों को लेकर शुरू हुआ विवाद मामले के अनुसार, मेजर हरि सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पहली पत्नी मोहिंदर कौर और प्रिया के बीच सेवानिवृत्ति लाभों तथा अन्य अधिकारों को लेकर विवाद शुरू हुआ था। मोहिंदर कौर ने दीवानी अदालत में मुकदमा दायर कर खुद को मेजर हरि सिंह की वैध पत्नी बताते हुए सेवानिवृत्ति लाभों पर अधिकार मांगा था। ट्रायल कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें कानूनी पत्नी माना। हालांकि, बाद में अपीलीय अदालत ने विवाह संबंधी साक्ष्यों और एक वसीयत के आधार पर प्रिया को कानूनी पत्नी मान लिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने अपीलीय अदालत का फैसला पलटते हुए फिर से मोहिंदर कौर को ही मेजर हरि सिंह की वैध पत्नी घोषित कर दिया था। इसके बाद प्रिया ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली और वर्ष 2006 में उनकी अपील खारिज कर दी गई। फैमिली पेंशन में मांगी हिस्सेदारी इसके बावजूद प्रिया ने एक नया तर्क देते हुए फैमिली पेंशन में हिस्सेदारी की मांग की। उनका कहना था कि भले ही उन्हें कानूनी पत्नी का दर्जा न मिला हो, लेकिन केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों के नियम 54(7) के तहत उन्हें सह-विधवा मानकर पारिवारिक पेंशन का हिस्सा दिया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने इस दलील को विस्तार से परखा और कहा कि नियम 54(7) में एक से अधिक विधवाओं के बीच पेंशन बांटने का प्रविधान है, लेकिन इसका लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिल सकता है जिनका विवाह कानूनन वैध हो। अदालत ने कहा कि ‘विधवा’ शब्द का सामान्य और कानूनी अर्थ मृत व्यक्ति की वैध पत्नी से है। यदि विवाह ही कानून की नजर में मान्य नहीं है तो संबंधित महिला को विधवा का दर्जा नहीं दिया जा सकता। दूसरी शादी नहीं कर सकते सरकारी सेवक? खंडपीठ ने कहा कि सरकारी सेवकों के लिए लागू नियम पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर रोक लगाते हैं। ऐसे में दूसरी शादी से उत्पन्न संबंध राज्य के विरुद्ध किसी वैधानिक अधिकार का आधार नहीं बन सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ता या घरेलू संबंधों से जुड़े कुछ मामलों में न्यायालय अलग दृष्टिकोण अपना सकते हैं, लेकिन फैमिली पेंशन एक वैधानिक अधिकार है, जिसे केवल नियमों के अनुरूप ही प्रदान किया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि जब पहले ही विभिन्न न्यायिक मंचों पर यह तय हो चुका है कि मोहिंदर कौर ही मेजर हरि सिंह की वैध पत्नी थीं और प्रिया का वैवाहिक दावा स्वीकार नहीं किया गया, तब उन्हें फैमिली पेंशन का लाभ देने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता।

अटारी बॉर्डर से बैरंग लौटे श्रद्धालु, एचएसजीएमसी ने बैठाई जांच

कुरुक्षेत्र  हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) की ओर से श्रीगुरु अर्जुन देव महाराज के शहीदी गुरु पर्व पर पाकिस्तान की धार्मिक यात्रा के लिए भेजे गए सिखों के जत्थे को अटारी-वाघा बॉर्डर से वापस भेजे जाने के बाद मामला पूरी तरह गरमा गया है। प्रशासनिक और दस्तावेजी प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक के कारण 94 श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में प्रवेश नहीं मिल सका और उन्हें बार्डर से बैरंग लौटना पड़ा। इस बड़ी लापरवाही के बाद जहां श्रद्धालुओं में भारी रोष है, वहीं एचएसजीएमसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। बुधवार देर रात जत्थे के वापस कुरुक्षेत्र लौटने के बाद वीरवार सुबह एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा तुरंत मुख्य कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की। कमेटी ने साफ किया है कि इस ऐतिहासिक चूक के लिए जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी। गृह मंत्रालय तक दौड़े अधिकारी, पर नहीं मिली क्लीयरेंस सूत्रों के मुताबिक, यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेज समय रहते बार्डर पर तैनात सुरक्षा और आव्रजन (इमिग्रेशन) अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाए थे। बुधवार को जब जत्थे को बार्डर पर रोके जाने की खबर आई, तो एचएसजीएमसी के आला अधिकारी तुरंत चंडीगढ़ भागे और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क साधा। मंत्रालय से संपर्क करने पर जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला था। पता चला कि जिला स्तर से जो अधिकृत सूची गृह विभाग को भेजी जानी चाहिए थी, वह समय पर पहुंची ही नहीं। वीजा जारी होने के बाद भी सूची को वापस जिलों में नहीं भेजा गया। तालमेल की कमी के कारण श्रद्धालुओं को जरूरी क्लीयरेंस नहीं मिल सकी। अब संबंधित विभाग के कर्मचारी खुद को पाक-साफ बताते हुए एक-दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ने में लगे हैं।  

श्री हरमंदिर साहिब परिसर में हंगामा, युवक की हरकत से मचा बवाल; SGPC अध्यक्ष ने दिए जांच के आदेश

अमृतसर  अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल परिसर के गुरुद्वारा शहीद बाबा गुरबख्श सिंह में एक युवक ने बेअदबी का प्रयास किया। युवक ने बुधवार देर शाम पावन स्वरूप के सामने की तलवार निकाल ली। हालांकि सेवादारों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इस घटना का कड़ा संज्ञान लेते हुए साजिशकर्ताओं को बेनकाब करने की मांग की है। धामी ने बताया कि सेवादारों की मुस्तैदी के कारण बेअदबी होने से बच गई। दोषी को अब तक सजा नहीं मिल पाई उन्होंने इस घटना को बेहद गंभीर बताया और कहा कि यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है। धामी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बेअदबी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन सरकारों की नाकामी के कारण किसी भी दोषी को अब तक सजा नहीं मिल पाई है। धामी बोले- धार्मिक भावनाओं को भड़काने की साजिश धामी ने याद दिलाया कि कुछ वर्ष पहले सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब में भी एक व्यक्ति ने जंगला फांदकर बेअदबी की कोशिश की थी, जिसकी साजिश का पर्दाफाश करने में सरकार विफल रही हैं। धामी के अनुसार, यह ताजा घटना शिरोमणि कमेटी के प्रबंधन को बदनाम करने और संगत की धार्मिक भावनाओं को भड़काने की साजिश है। सरकार सिख भावनाओं से जुड़े मामलों के प्रति गंभीर नहीं एडवोकेट धामी ने कहा कि आरोपी पुलिस हिरासत में है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस घटना के साजिशकर्ताओं को सामने नहीं लाया जाता, तो यह स्पष्ट होगा कि सरकार सिख भावनाओं से जुड़े मामलों के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधकों और संगत से भी अपील की कि ऐसे तत्वों को सफल होने से रोकने के लिए सभी को सतर्क रहकर अपनी सेवा निभानी चाहिए।  

पूर्वांचल बना पंचायत राजनीति का नया केंद्र, बलिया में जुड़े सबसे ज्यादा वोटर

लखनऊ यूपी के पंचायत मतदाताओं का नया भूगोल सामने आया है। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचक नामावली-2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण वोट बैंक का संतुलन तेजी से बदल रहा है। एक तरफ पूर्वांचल के कई जिलों में पंचायत मतदाताओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी है तो दूसरी तरफ शहरीकरण और पलायन की वजह से 11 जिलों में पंचायत वोट बैंक सिमट गया है। इनमें पश्चिम के पांच जिले शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर गाजीपुर की है, जहां पंचायत मतदाताओं की संख्या में 94,757 की कमी दर्ज हुई है। मैनपुरी में 93,207 और आजमगढ़ में 60,347 मतदाता घटे हैं। वाराणसी में 41,397, एटा में 23,429, आगरा में 23,294, गाजियाबाद में 15,637 और गौतमबुद्धनगर में 12,431 मतदाता कम हुए हैं। पंचायत क्षेत्रों से मतदाताओं के घटने का यह रुझान उन जिलों में अधिक दिखाई दे रहा है, जहां तेजी से शहरी विस्तार हो रहा है या फिर लंबे समय से पलायन चुनौती बना हुआ है। गौतमबुद्धनगर में मतदाताओं की संख्या सबसे कम एनसीआर के जिले पंचायत व्यवस्था से सबसे तेजी से दूर होते नजर आ रहे हैं। गौतमबुद्धनगर में पंचायत मतदाताओं की कुल संख्या केवल 2.09 लाख रह गई है, जो पूरे प्रदेश में सबसे कम है। गाजियाबाद में यह संख्या 4.56 लाख है। दूसरी ओर जौनपुर में 36.97 लाख, आजमगढ़ में 35.76 लाख, प्रयागराज में 34.95 लाख और गोरखपुर में 29.63 लाख पंचायत मतदाता हैं। यह अंतर बताता है कि जहां पश्चिमी यूपी के कुछ जिले तेजी से शहरी पहचान हासिल कर रहे हैं। वहीं, पूर्वांचल अब भी ग्रामीण राजनीति की सबसे बड़ी धुरी बना हुआ है। बलिया में सबसे अधिक नए मतदाता पूर्वांचल और तराई के कई जिले पंचायत वोटरों की नई ताकत बनकर उभरे हैं। बलिया में सबसे अधिक 1,60,376 नए पंचायत मतदाता जुड़े हैं। लखीमपुर खीरी में 1,38,223, देवरिया में 1,26,771, सिद्धार्थनगर में 1,23,162 और कुशीनगर में 1,20,011 मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रयागराज में भी 92,460 नए मतदाता जुड़े हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश की ग्रामीण राजनीति का केंद्र अब और अधिक पूर्वांचल की ओर खिसकता दिखाई दे रहा है।