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अब हर लाभार्थी तक पहुंचेगी पेंशन, योजना की सघन निगरानी के आदेश जारी

अब हर लाभार्थी तक पहुंचेगी पेंशन, योजना की सघन निगरानी के आदेश जारी पेंशन वितरण में लापरवाही नहीं चलेगी, ‘पेंशन आपके द्वार’ योजना की होगी कड़ी मॉनिटरिंग भोपाल  "पेंशन आपके द्वारा योजना" का शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हो सके, इसके लिए कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी योजना की नियमित समीक्षा करें। यह निर्देश प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय दिव्यांगजन सशक्तिकरण मती सोनाली वांयणकर ने सभी जिला कलेक्टर को दिये हैं। प्रमुख सचिव मती वायंगणकर ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत सिंगल क्लिक के माध्यम से पेंशन राशि हितग्राहियों के खाते में प्रति माह अंतरित की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कल्याणी, दिव्यांगजन, वृद्धजन को प्रति माह पेंशन राशि निकालने के लिए बैंकों के चक्कर न लगाना पड़े। इस उद्देश्य से 'पेंशन आपके द्वार योजना' संचालित की जा रही है। योजना के तहत बैंकिंग कॅरेसपंडेंस के माध्यम से ऐसी ग्राम पंचायत में जिनसे बैंक या पोस्ट ऑफिस की दूरी 3 किलोमीटर से अधिक है, उन स्थानों पर बैंक करस्पॉन्डेंट्स, बैंकिंग सखीज, कॉमन सर्विस सेंटर, एसएचजी मेंबर्स के माध्यम से पेंशन राशि हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर इस योजना की सघन मॉनिटरिंग की जाए और जहां पर कोई कमी या शिकायत प्राप्त होती है वहां यथोचित कार्रवाई की जाये, जिससे राज्य शासन की मंशा अनुसार हितग्राहियों को पेंशन का सही समय पर लाभ प्राप्त हो सके।  

साधारण दिन, असाधारण सौभाग्य: महिला मजदूर को खदान से 8 हीरे मिले

पन्ना  पन्ना जिले में एक महिला मजदूर रचना गोलदार की किस्मत हीरे की चमक से बदल गई। उसने हजारा मुद्दा क्षेत्र में खदान लगाई और उसे 8 छोटे-बड़े हीरे मिले जिनमें से 6 जेम्स क्वालिटी के हैं जिनका कुल वजन 3.10 कैरेट है। सबसे बड़े हीरे का वजन 0.79 कैरेट है। इन हीरों को हीरा कार्यालय में जमा कर दिया गया है जिनकी बाजारू कीमत लाखों में है। कितना है हीरों का वजन? वहीं हीरा पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि इन 8 हीरों में से 6 नग जेम्स क्वालिटी के हैं, जिनका कुल वजन 3.10 कैरेट है। इनमें सबसे बड़े हीरे का वजन 0.79 कैरेट है। अब होगी हीरों की नीलामी इसके अलावा, दो हीरे ऑफ-कलर के हैं। ​इन सभी हीरों को महिला ने हीरा कार्यालय में जमा कर दिया है और इन हीरो की बाजारू कीमत लाखों में बताई जा रही है। इन्हें आगामी नीलामी में रखा जाएगा। रचना की लगन और कड़ी मेहनत का फल मिलने से उनके परिवार में खुशी का माहौल है।  

NHM कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ा, 14 हजार स्टाफ को सीधा लाभ

चंडीगढ़  हरियाणा के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने एनएचएम कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) में बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। मिशन निदेशक, एनएचएम हरियाणा द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह लाभ तीन चरणों में दिया जाएगा। तीन चरणों में मिलेगा डीए का लाभ: 1 जनवरी 2024 से: डीए 230% से बढ़ाकर 239% किया जाएगा। 1 जुलाई 2024 से: डीए 239% से बढ़कर 246% हो जाएगा। 1 जनवरी 2025 से: डीए 246% से बढ़ाकर 252% कर दिया जाएगा। इस निर्णय से एनएचएम के लगभग 14,000 से अधिक कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। याचिकाकर्ताओं को मिलेगा लाभ सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह बढ़ा हुआ डीए फिलहाल उन्हीं कर्मचारियों को दिया जाएगा जिन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की थी, या फिर ऐसे मामलों में याचिकाकर्ता हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में अदालत का कोई विपरीत आदेश आता है, तो कर्मचारियों को दी गई राशि वापस करनी पड़ सकती है। लंबे इंतजार के बाद मिली राहत एनएचएम कर्मचारियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से इस फैसले की प्रतीक्षा कर रहे थे और अब उनकी मांग आंशिक रूप से पूरी हुई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह राहत लंबे संघर्ष और न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद संभव हो सकी है।  

आयुर्वेदिक शिक्षा को बढ़ावा: MP के शिक्षण संस्थानों में विकसित होंगे हर्बल गार्डन

भोपाल  मध्य प्रदेश के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय अब स्कूलों और कालेजों में हर्बल गार्डन विकसित करने की तकनीक साझा करेंगे। इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में औषधीय पौधे लगाना और नई पीढ़ी को इन पौधों के महत्व की जानकारी देना है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय की इस पहल के दौरान विशेषज्ञ स्कूलों में जाकर बताएंगे कि किन-किन औषधीय पौधों को घर में लगाया जा सकता है और उनकी देखभाल किस तरह करनी चाहिए। भोपाल में इसकी जिम्मेदारी शासकीय पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय ने उठाई है। महाविद्यालय के विशेषज्ञों का दल स्कूलों और कालेजों में जाकर विद्यार्थियों को बता रहा है कि हर्बल गार्डन में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा और शतावरी जैसे पौधे कैसे लगाए और संभाले जा सकते हैं। साथ ही पौधों की उपयोगिता और औषधीय गुण भी समझाए जा रहे हैं। शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संस्थान की ओर से आयुर्वेदिक किचन वर्कशाप भी आयोजित हो रही है। इसमें विद्यार्थियों को पौष्टिक और स्वास्थ्यकर व्यंजन तैयार करना सिखाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन से ही प्राकृतिक खानपान और औषधीय पौधों का महत्व समझ में आएगा, तो बच्चे आगे चलकर इन्हें अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना सकेंगे। औषधीय पौधे जीवन का आधार अस्पताल के दृव्यगुण विभाग की प्रमुख डॉ. अंजली जैन ने बताया कि हर्बल गार्डन छात्रों को किताबों से परे जाकर प्रत्यक्ष अनुभव देता है। जब बच्चे इन पौधों को लगाते और उनकी देखभाल करते हैं तो वे प्रकृति और स्वास्थ्य के बीच के गहरे संबंध को समझ पाते हैं। बच्चों में बढ़ेगा आयुर्वेद के प्रति लगाव     हमारी कोशिश है कि हर शैक्षणिक संस्थान और घर में हर्बल गार्डन हो, इससे बच्चों में आयुर्वेद के प्रति लगाव बढ़ेगा। आयुष मंत्रालय की पहल को हम बड़े स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। – डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद अस्पताल  

घुवारा-बड़ागांव को मिलेगा शुद्ध पेयजल, 40 करोड़ की जल प्रदाय योजना पर तेजी से काम

छतरपुर छतरपुर जिले के घुवारा तथा टीकमगढ़ जिले के बड़ागांव में जल प्रदाय परियोजना पर कार्य तेज गति से जारी है। यह परियोजना एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से पूरी की जा रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधीन काम कर रही मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी परियोजना का संचालन कर रही है। परियोजना का उद्देश्य इन दोनों क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके तहत घुवारा में लगभग 54 किलोमीटर लम्बी जल वितरण लाइन प्रस्तावित है, जिसमें से अब तक 50 किलोमीटर लाइन बिछाई जा चुकी है। बड़ागांव में 30 किलोमीटर वितरण लाइन में से 27 किलोमीटर का कार्य पूर्ण हो चुका है। घुवारा में कुल 3509 घरों को जल कनेक्शन प्रदान किए जाने का लक्ष्य है, जिनमें से 2801 घरों तक नल कनेक्शन उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसी प्रकार बड़ागांव में 2451 घरों में से 1470 घरों को जल प्रदाय नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। इन दोनों स्थानों पर जल की आपूर्ति धसान नदी से की जा रही है जिसके लिए 3.01 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है ताकि उपभोक्ताओं को स्वच्छ और सुरक्षित जल उपलब्ध हो सके। इसके अलावा जल संग्रहण के लिए घुवारा और बड़ागांव में दो-दो नए ओवरहेड टैंक का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इन दोनों जगहों पर पहले से बने ओवरहेड टैंक का जीर्णोद्धार भी किया जा रहा है। दस वर्षों के संचालन और संधारण के साथ घुवारा जल प्रदाय परियोजना की लागत लगभग 18 करोड रूपये है और बडागॉव जल प्रदाय परियोजना की लागत लगभग 22 करोड रूपये है। यह परियोजना "हर घर नल से जल" के क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना के पूरा होने पर हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा और उनकी जीवनशैली में सुधार होगा।  

इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन: सर्वे की तैयारी पूरी, महू तहसील के 18 गांवों से होकर गुजरेगा मार्ग

 इंदौर  इंदौर से मनमाड़ के बीच महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। 309 किमी लंबी इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन का 170.56 किमी हिस्सा मध्य प्रदेश में स्थित है और यह तीन जिलों से होकर गुजरेगी। अक्टूबर माह से मध्य प्रदेश में इस रेल लाइन का जमीनी सर्वे शुरू किया जाएगा, जिसमें रेल लाइन के मार्ग में आने वाले किसानों के खसरे चिह्नित किए जाएंगे। यह रेल लाइन इंदौर जिले के 18 गांवों से होकर गुजरेगी। इन गांवों में रेल लाइन के अंतर्गत आने वाली भूमि के स्वामियों के नामों की जांच की जा चुकी है, ताकि खसरे के प्रकाशन के दौरान किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो। इंदौर जिले की महू तहसील से होकर गुजरने वाली इस रेल लाइन के लिए अक्टूबर से रेलवे द्वारा सर्वेक्षण कार्य आरंभ किया जाएगा। यह सर्वेक्षण जमीनी स्तर पर होगा, जिसमें नपती कर निशान लगाए जाएंगे। साथ ही रेल लाइन के अंतर्गत आने वाली भूमि के खसरे नंबर और भूमि का रकबा भी दर्ज किया जाएगा। रेलवे के कोआर्डिनेटर सुशील वाडेकर ने बताया कि मध्य प्रदेश में सर्वे का कार्य दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वे के बाद ही यह तय होगा कि किस गांव की कितनी भूमि रेल लाइन में आएगी। प्रारंभिक सर्वेक्षण में यह निर्धारित किया जा चुका है कि रेल लाइन किन गांवों से गुजरेगी। महू तहसील के 18 गांव शामिल खेड़ीमुरार, कादमपुर, खुदालपुरा, कुराड़ा खेड़ी, नांदेड, जामली, बेरछा, खेड़ी, गवली पलासिया, अहिल्यापुर, चेनपुरा, आशापुर, मालेंडी, कोदरिया, बोरखेड़ी, चौरड़िया, न्यू गुराड़िया, कैलोद और महू का शहरी क्षेत्र। आदिवासी अंचल को मिलेगी कनेक्टिविटी इस रेल लाइन के निर्माण से धार, खरगोन और बड़वानी जिलों के आदिवासी अंचलों को बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी। लगभग 35 लाख जनसंख्या को रेल सेवा के आरंभ होने से आवागमन में सुविधा मिलेगी। साथ ही इंदौर से मुंबई की दूरी भी कम होगी, जिससे लोगों का सफर आसान हो जाएगा। वर्तमान में मुंबई जाने के लिए उज्जैन, रतलाम और बड़ौदा होकर यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन इस नई रेल लाइन से यात्रा की दूरी लगभग 300 किमी कम हो जाएगी।

निर्धारित समयावधि में 4 लाख से अधिक उपभोक्‍ताओं को मिले नये बिजली कनेक्शन

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी श्रेणी के उपभोक्‍ताओं के लिये सरल और सुविधाजनक तरीके से त्‍वरित नवीन बिजली कनेक्‍शन प्रदान किए जा रहे हैं। इसके लिए उपभोक्‍ताओं को सरल संयोजन पोर्टल के माध्‍यम से आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में घर बैठे ही नवीन कनेक्‍शन उपलब्‍ध कराये जा रहे हैं।   गौरतलब है कि कंपनी द्वारा विगत जुलाई 2023 से शुरू किये गये ऑनलाइन सरल संयोजन पोर्टल के माध्‍यम से अब तक भोपाल शहर में 60 हजार से अधिक नए कनेक्‍शन प्रदान किए जा चुके हैं। पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में 4 लाख से अधिक नए कनेक्‍शन सरल संयोजन पोर्टल के माध्‍यम से सफलतापूर्वक प्रदान किये गए हैं। इनमें 10 किलोवॉट तक के अस्थायी कनेक्शन भी शामिल हैं।   मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक  क्षितिज सिंघल ने बताया है कि कंपनी के सरल संयोजन पोर्टल पर आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में तत्काल नया बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। नये कनेक्‍शन लेने के लिये उपभोक्‍ताओं को बिजली कंपनी के पोर्टल https://saralsanyojan.mpcz.in:8888/home अथवा UPAY एप पर जाकर जरूरी दस्‍तावेज अपलोड कर समस्‍त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए निर्धारित शुल्‍क का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। आवेदक द्वारा विधिवत ऑनलाइन आवेदन और भुगतान प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत बिजली कंपनी द्वारा सर्वे एवं अन्‍य औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर उपभोक्ता के परिसर में नया कनेक्शन उपलब्‍ध करा दिया जाएगा।  

सिंगरौली में छिपा खजाना अब आएगा बाहर! एग्रीमेंट फाइनल, जल्द शुरू होगा गोल्ड एक्सट्रैक्शन

 सिंगरौली  मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में कोयले और बिजली उत्पादन के बाद अब सोने का भी उत्खनन होगा. चितरंगी इलाके में 23 हेक्टेयर भूमि से 18 हजार 356 टन सोना निकाला जाएगा. गोल्ड ब्लॉक का एग्रीमेंट हो चुका है और जल्द ही यहां सोना निकालने का काम शुरू हो जाएगा. जिला खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल ने बताया कि चकरिया गोल्ड ब्लॉक के लिए एग्रीमेंट हो चुका है. कंपनी 5 साल तक यहां गोल्ड माइंस चलाएगी. इसके बाद यहां से कुल 18 हजार 356 टन सोना निकलेगा. पिछले एक साल से कंपनी ने यहां ड्रिलिंग करके सोने का रेशियो पता कर लिया है.  1.33 लाख टन स्वर्ण भंडार का अनुमान सोने के भंडार के खनन के लिए नीलामी प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है. चकरिया गोल्ड ब्लाॅक का ई-नीलामी के जरिए प्रक्रिया को पूरा किया जा चुका है. चकरिया गोल्ड ब्लाॅक 23.57 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है. इस ब्लॅक में थोड़ा बहुत नहीं, बल्कि 1 लाख 33 हजार 785 टन सोने के भंडार का अनुमान लगाया गया है. अनुमान है कि इसके खनन से 1 लाख 76 हजार 600 ग्राम सोने की रिकवरी हो सकती है. सोने के खनन के लिए खनिज विभाग ने सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां भी प्राप्त कर ली हैं. 4 दूसरे गोल्ड ब्लाॅक की हो चुकी नीलामी मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने कहा कि, ''प्रदेश में सोने और दूसरे खनिज के मामले में जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं. इसको लेकर लगातार खोज की जा रही है. इसी का ही नतीजा है कि कटनी और सिंगरौली में खनिजों को लेकर सकरात्मक संकेत मिले हैं. प्रदेश में अभी तक 4 दूसरे गोल्ड ब्लाॅक की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं. इनमें गुहर पहाड़, इमलिया, ईस्टर्न एक्सटेंशन आफ सोनकुरवा और अम्लीय वाह हैं. प्रदेश के प्रयासों और केन्द्र के सहयोग से मध्य प्रदेश खनिज के क्षेत्र में तेजी से उभरा है और देश-विदेश के निवेशकों का ध्यान मध्य प्रदेश ने खींचा है.'' मुख्यमंत्री बोले- प्रदेश में स्वर्ण खनिज में जबरदस्त संभावना मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने स्वर्ण खनन की दिशा में एक कदम आगे बढ़ने को लेकर कहा कि, ''प्रदेश में सोने और दूसरे खनिज के मामले में जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं. इससे मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास में नए पंख लगेंगे. खनिज साधन के अलावा मध्य प्रदेश कई दूसरे औद्योगिक क्षेत्र में भी लगातार आगे बढ़ रहा है. खास तौर से रिफाइनिंग, लाॅजिस्टिक सहित दूसरे उद्योगों में निवेश आए और प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को और मजबूरी मिलेगी.'' 2 वर्षों में कंपनी माइंस के डेवलपमेंट का करेगी काम जिला खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल बताती हैं कि, ''इस गोल्ड ब्लॉक की नीलामी के बाद एग्रीमेंट की जो प्रक्रिया है वह पूरी कर ली गई है और गरिमा नेचुरल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को लीज दे दी गई है. जल्द ही कंपनी काम शुरू करेगी और 18356 टन सोने के उत्पादन का जो लक्ष्य रखा गया है उस पर काम करना शुरू करेगी. पहले 2 वर्षों में कंपनी माइंस के डेवलपमेंट का काम करेगी, उसके बाद कंपनी आगामी तीन वर्षों में सोना उत्पादन का कार्य करेगी.'' उन्होंने यह भी कहा कि, ''इस गोल्ड माइंस के आने से सरकार को जाने वाले राजस्व में बढ़ोतरी होगी और राजस्व का जो लक्ष्य है वह बड़ा बनेगा. यह देश के विकास में अहम योगदान के साथ-साथ जिले का भी विकास होगा.'' अधिकारी ने बताया कि इस गोल्ड माइंस का रकबा बहुत बड़ा हिस्सा शासकीय जमीन का है और कुछ हिस्सा निजी भूमि का है. सिंगरौली जिले में पहले से ही कोयले की 11 खदानें चल रही हैं. इसके अलावा, अब सोने का उत्खनन भी होगा. यह सिंगरौली के लिए गौरव की बात है.  उन्होंने यह भी बताया कि अभी इस गोल्ड माइंस के अलावा दो और गोल्ड ब्लॉक बनाए गए हैं. उनकी नीलामी हो चुकी है. अभी उनमें ड्रिलिंग का काम चल रहा है. उसके बाद पता चलेगा कि बाकी की दो अन्य खदानों में कितना सोना निकलेगा? फिलहाल कोयला और बिजली उत्पादन के बाद अब सिंगरौली की धरती सोना उगलेगी.

राजधानी भोपाल की सड़कों पर दौड़ेंगी 100 इलेक्ट्रिक बसें, नए साल से होगी शुरुआत

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सार्वजनिक परिवहन के हाल इन दिनों कुछ ठीक नहीं है। पिछले एक साल में ढाई सौ के करीब सिटी बसों का संचालन ठप्प पड़ गया है। नए साल में नगर निगम की ओर से दावा किया जा रहा है कि 100 ई-बसें चलेंगी। जिससे आम आदमी को बड़ी मिलेगी। पहले चरण में मिलेंगी 100 ई-बसें पहले चरण में पीएम ई-बस सेवा के तहत 100 बसें मिलेंगी। इसके लिए दो डिपो भी तैयार किए जा रहे हैं। जो कि बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर में होंगे। जबकि, दूसरे चरण में 95 बसें आएंगी। जिनका डिपो आरिफ नगर और कोलार में बनाया जाएगा।  पीएम ई-बस सेवा के फेस-1 में 100 बसें मिलेंगी। इसके लिए दो नए डिपो संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) और कस्तूरबा नगर में बनाए जा रहे हैं। नए बस ऑपरेटर का चयन भी हो चुका है। वहीं, दूसरे फेस में 95 बसें आएंगी। आरिफ नगर और कोलार रोड पर नए डिपो बनेंगे। इसके ऑपरेटर के चयन समेत अन्य प्रक्रिया बाकी है। बता दें कि हुई जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सिटी बसों का मुद्दा भी उठा था। 368 में से सिर्फ 95 सिटी बसें चलने पर सांसद आलोक शर्मा ने भी हैरानी जताई। सांसद शर्मा ने निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण से पूछा था कि किस ऑपरेटर की कितनी बसें चल रही हैं, ये बताएं? इतनी संख्या में बसें क्यों बंद हुईं? जबकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को तो बढ़ाना चाहिए। सांसद की बात से विधायक भगवानदास सबनानी ने भी सहमति जताई थी। सांसद बोले-पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम मजबूत हो इस मामले में सांसद शर्मा ने कहा, भोपाल का पब्लिक ट्रांसपोर्ट मजबूत होना चाहिए। जब मैं भोपाल का महापौर था, तब छात्र-छात्राएं, दिव्यांगजन, महिला, सीनियर सिटीजन, कर्मचारियों को महापौर स्मार्ट पास का फायदा किया था। यदि महापौर स्मार्ट पास बनने फिर से शुरू होंगे तो सबको फायदा मिलेगा। अब जानिए, आखिर बसों का संचालन क्यों बंद हुआ? भोपाल की सड़कों से एक साल में ढाई सौ सिटी बसें गायब होने का मुद्दा विधानसभा में भी उठा है। 25 रूट पर चलने वाली 368 बसों में से अभी सिर्फ 95 बसें ही दौड़ रही हैं। ऐसे में महिला, स्टूडेंट्स और नौकरीपेशा लोगों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। हर रोज करीब 1 लाख लोग परेशान हो रहे हैं। दरअसल, टिकट कलेक्शन पर विवाद, पेनल्टी और हाईकोर्ट में याचिका दायर होने से ऑपरेटर्स ने इन बसों का संचालन बंद कर दिया। इस पर हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने विधानसभा में तारांकित प्रश्न लगाया था। पहले बीसीएलएल के जरिए 4 एजेंसी कर रही थीं संचालन भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में सिटी बसों का संचालन BCLL (भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड) के जरिए 4 एजेंसी कर रही थीं। इनमें मां एसोसिएट्स, एपी मोटर्स, श्री दुर्गांबा और आई-मोबिलिटी एजेंसी शामिल हैं। ये एजेंसियां 25 रूट पर बसें चला रही थीं। इनमें से सबसे पहले पिछले साल 4 जुलाई को मां एसोसिएट्स ने 149 बसों का संचालन बंद किया था। इसकी वजह इन बसों में टिकिट कलेक्शन करने वाली एजेंसी 'चलो एप' की ओर से प्रति​ किमी दी जाने वाली राशि घटाने की मांग थी। इस मामले में कोई निराकरण नहीं हुआ। ऐसे में इन बसों में रोजाना सफर करने वाले यात्री परेशान हैं। अन्य एजेंसियां भी अपने हाथ पीछे खींचने लगी। दोगुनी होनी चाहिए बसों की संख्या एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मुख्य माध्यम सिटी बसों की संख्या दोगुनी, यानी 800 होनी चाहिए। भविष्य में ई-बसों का संचालन भी होना है, लेकिन उसके उलट भोपाल से बसों की संख्या लगातार कम हो रही है। शहर में ऑपरेटर की कितनी बसें चल रही है?- सांसद  जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की बैठक में सिटी बसों को लेकर सांसद आलोक शर्मा ने निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण से पूछा था कि किस ऑपरेटर की कितनी बसें चल रही हैं? इतनी संख्या में बसें क्यों बंद हुईं। जबकि सार्वजनिक परिवहन को और बढ़ाना चाहिए। सांसद ने स्पष्ट किया कि भोपाल का सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट मजबूत होना चाहिए। क्यों बंद हुई थी बसें टिकट कलेक्शन, पेनल्टी और हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद बसों का संचालन बंद कर दिया गया था। इसको लेकर रामेश्वर शर्मा ने एक साल के भीतर 250 बसें गायब होने का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया था। भोपाल के अलग-अलग इलाकों में चलने वाली 368 बसों में से केवल 95 बसें ही दौड़ रही हैं। जिससे शहर के हजारों लोग परेशान हो रहे हैं। 

मध्य प्रदेश में नई संक्रामक बीमारी का खतरा, AIIMS भोपाल की रिपोर्ट में सामने आए टीबी जैसे लक्षण

भोपाल  एम्स के डॉक्टर्स ने एक ऐसी बीमारी को लेकर बड़ा खुलासा किया है, जिसकी वजह से कई डॉक्टर्स खुद भ्रमित हो जाते हैं। साथ ही गलत बीमारी समझकर उसका इलाज करते हैं, लिहाजा 40 प्रतिशत मरीजों की जान चली जाती है। यह खुलासा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में हुआ है। एम्स भोपाल ने मेलियोइडोसिस नामक संक्रामक रोग को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। एमपी में मिले हैं अब तक 130 केस ववहीं, रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब तक 130 से ज्यादा मेलियोइडोसिस संक्रमण से ग्रसित मरीज पाए गए हैं। बैक्टीरिया जनित रोग बेहद खतरनाक है, समय पर सही इलाज न मिलने पर मरीज की मौत हो जाती है। इस रोग के हर 10 मरीजों में 4 काल के गाल में समा जाते हैं। टीबी जैसे होते हैं लक्षण रिपोर्ट में सबसे बड़ी चुनौती यह बताई गई है कि इस बीमारी के लक्षण टीबी जैसे होते हैं। इसक कारण अधिकतर मामलों में मरीज का गलत इलाज कर दिया जाता है। इसके बाद जब समस्या ज्यादा बढ़ जाती है तो सही इलाज शुरू होता है तब तक संक्रमण पूरे शरीर में फैल चुका होता है । मरीज मौत तक पहुंच जाता है। रिपोर्ट के अनुसार बीते 6 वर्षों में मध्यप्रदेश के 20 से अधिक जिलों से मेलियोइडोसिस के 130 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। बीमारी के लक्षण डॉक्टर्स के अनुसार किसी को 2–3 हफ्तों से अधिक बुखार रहता है, एंटी-टीबी दवा से कोई फायदा नहीं हो रहा या बार-बार फोड़े बन रहे हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ से मेलियोइडोसिस की जांच करवाएं। सावधान, सतर्क रहने की जरूरत डॉक्टर्स ने कहा कि यह बीमारी अब प्रदेश में स्थानिक (एंडेमिक) रूप ले चुकी है। संस्थान ने डॉक्टरों और आम जनता दोनों से अपील की है कि लंबे समय तक ठीक न होने वाले बुखार और टीबी जैसे लक्षणों को हल्के में न लें। एम्स की पहल से सटीक अनुमान एम्स भोपाल इस बीमारी से संबंधित प्रशिक्षण आयोजित कर रहा है, जिनमें पूरे राज्य के 25 स्वास्थ्य संस्थाओं के 50 से अधिक माइक्रोबायोलॉजिस्ट और चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया है। इस कारण 14 नए केस जीएमसी भोपाल, बीएमएचआरसी, जेके हॉस्पिटल, सागर और इंदौर में जांच में सामने आए।