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हरियाणा को मिल सकती है पहली इंटरनेशनल फ्लाइट, हिसार से दुबई तक सीधी कनेक्टिविटी की तैयारी

हिसार   हरियाणा के महाराजा अग्रसेन हवाई अड्डा हिसार से जल्द ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं शुरू हो सकती हैं। दुबई के लिए कार्गो सेवा शुरू करने को लेकर हरियाणा सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। नागरिक उड्डयन विभाग की आयुक्त एवं सचिव अमनीत पी. कुमार ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को इस संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि दुबई के लिए प्रस्तावित उड़ान, हिसार हवाई अड्डे से हरियाणा की पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान होगी। फिलहाल राज्य सरकार इस विषय पर केंद्र सरकार से दिल्ली में बातचीत कर रही है। गौरतलब है कि 12 सितंबर को हिसार से जयपुर के लिए घरेलू उड़ान सेवा की शुरुआत मुख्यमंत्री नायब सैनी द्वारा की गई थी।  इसी बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने भी नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में सक्रियता दिखाई है। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने दिल्ली में एलायंस एयर के चेयरमैन अमित कुमार और सीईओ राजर्षि सेन से मुलाकात की है। एलायंस एयर वही कंपनी है, जिसने हरियाणा सरकार के साथ समझौता किया हुआ है। 

17 सितंबर को राजभवन में लगेगा रक्तदान शिविर, नेत्र व स्त्री रोगों की होगी निशुल्क जांच

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने रक्तदान और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाने के निर्देश दिए है। रक्तदान और नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन राजभवन के सांदीपनि सभागार में किया जाएगा। शिविर का संचालन प्रातः 11 बजे से अपराह्न 1:30 बजे तक होगा। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि शिविर का आयोजन राजभवन और रेडक्रॉस के संयुक्त तत्वाधान में किया गया है। शिविर अवधि में आमजन स्वेच्छा से रक्तदान कर मानवता के महादान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। शिविर में आमजन की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच स्त्रीरोग और नेत्ररोग विशेषज्ञ करेंगे। श्री कोठारी ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि 17 सितंबर को राजभवन में आयोजित होने वाले शिविर में बड़ी संख्या में भाग लें। शिविर में रक्तदान कर मानवता के सेवा संकल्प में सहयोगी बने। निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का लाभ प्राप्त करें।  

इंदौर में 22 सितंबर को कार फ्री डे? महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने लोगों से की खास अपील

 इंदौर  स्वच्छता में देश भर में अपनी पहचान बना चुका इंदौर अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और बड़ी मिसाल कायम करने जा रहा है। शहर में 22 सितंबर को तीसरी बार 'नो कार डे' का आयोजन किया जाएगा। इस दिन, शहरवासियों से स्वेच्छा से अपनी कारों का उपयोग न कर सार्वजनिक परिवहन, साइकिल, दोपहिया वाहन या ई-रिक्शा का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। महापौर ने की जनता से अपील महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने एक सोशल मीडिया वीडियो जारी कर इंदौर की जागरूक जनता से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, "इंदौर की जनता ने हमेशा हर पहल को सफल बनाया है। पिछले दो वर्षों के 'नो कार डे' के अनुभव ने यह साबित कर दिया है कि एक दिन के सामूहिक प्रयास से हम ईंधन की खपत और प्रदूषण के स्तर में महत्वपूर्ण कमी ला सकते हैं।" पिछले दो आयोजनों की सफलता बनी प्रेरणा महापौर भार्गव ने बताया कि पिछले दो 'नो कार डे' के आयोजन बेहद सफल रहे और इनकी चर्चा पूरे देश में हुई। इन दिनों में शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम हुआ, पेट्रोल-डीजल की खपत में लगभग 15% की गिरावट आई और प्रदूषण के स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया। इसी सफलता से प्रेरणा लेकर इस परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं महापौर ने इस बात पर जोर दिया कि 'नो कार डे' सिर्फ एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भविष्य के इंदौर को पर्यावरण के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनाने की एक ठोस पहल है। इसका उद्देश्य लोगों की सोच में बदलाव लाना है, ताकि वे नियमित जीवन में भी निजी वाहनों की जगह साइकिल, ई-रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें। इंदौर इस तरह की पहल को एक परंपरा बनाने वाला देश का पहला शहर है। साइकिल, टू-व्हीलर और ई-रिक्शा का करें उपयोग महापौर ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि 22 सितंबर को अपनी कारों को घर पर छोड़कर शहर के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा, "आइए, हम सब मिलकर साइकिल, दोपहिया वाहन या ई-रिक्शा से यात्रा करें। यह प्रयास न केवल ट्रैफिक को सुगम बनाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाएगा।" उन्होंने विश्वास जताया कि इंदौर की जनता पिछले दो बार की तरह इस बार भी 'नो कार डे' को सफल बनाकर एक नई मिसाल कायम करेगी।  

PM मित्रा पार्क से खुलेगा रोजगार का रास्ता, कंपनियां करेंगी 20,000 करोड़ का निवेश

धार  धार जिले के बदनावर क्षेत्र के भैंसोला गांव में स्थापति हो रहे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क में अपनी इकाइयां लगाने के लिए टेक्सटाइल क्षेत्र की कपंनियां उत्साहित हैं। अभी तक वर्धमान, ट्रांइडेट सहित 91 कंपनियों को 1,294 एकड़ भूमि आवंटित भी कर दी है। ये कंपनियां 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश करेंगी, जिससे 72 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। पार्क में निवेश करने के लिए 114 कंपनियों के प्रस्ताव अभी तक प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि देश की बड़ी टेक्सटाइल कंपनियां पीएम मित्रा पार्क में अपनी इकाइयां लगानी चाहती हैं। सरकार निवेशकों को हर तरह की सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्क के पूर्ण विकसित होने पर रोजगार का आंकड़ा तीन लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यह केवल संख्या नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में आने वाला ठोस बदलाव है। अभी तक 23 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव कपंनियां दे चुकी हैं। इन प्राप्त निवेशों से यार्न, फैब्रिक और गारमेंट उत्पादन की संपूर्ण वैल्यू चेन यहीं विकसित होगी, जिससे प्रदेश का टेक्सटाइल उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। यहां कुल 2158 एकड़ भूमि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 17 सितंबर को भूमिपूजन करने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। किसान मेले किए जाएंगे आयोजित उधर, मुख्यमंत्री ने कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में निर्देश दिए कि कृषि आधारित उद्योगों के प्रचार-प्रसार के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग बहुउद्देशीय कृषि मेले आयोजित करें। इनमें किसानों को उनकी फसल सहित अन्य सहायक उत्पादों के विक्रय एवं मार्केटिंग की जानकारियां भी जाएं। पीएम मित्रा पार्क से प्रदेश के कपास और रेशम उत्पादक किसानों की जीवन रेखा बदल जाएगी। छह लाख से अधिक कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। कपास की खपत स्थानीय स्तर पर ही हो जाएगी। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और रॉ-मैटेरियल सप्लाई की एक पूरी चैन तैयार होगी।

राज्य सरकार किसानों सहित सभी से संवाद करते हुए लैंड पूलिंग और विकास कार्यों के मार्ग पर है अग्रसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सिंहस्थ : 2028 के विकास कार्यों के लिए सभी का मिल रहा है समर्थन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सरकार किसानों सहित सभी से संवाद करते हुए लैंड पूलिंग और विकास कार्यों के मार्ग पर है अग्रसर हम किसी को नाराज नहीं करना चाहते, राज्य सरकार सभी को साथ लेकर चलने के लिये प्रतिबद्ध किसान हित को सर्वोपरि रखते हुये सबकी सहमति के आधार पर होगा अधोसंरचना विकास सिंहस्थ : 2028 के लिए उज्जैन को ग्लोबल स्पिरिचुअल सिटी के रूप में विकसित करने की संकल्पना वर्षा-आंधी हो या सुरक्षा का प्रबंध, हर स्थिति में व्यवस्था बनाए रखना राज्य शासन का दायित्व भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 के विकास कार्यों के लिए हमें सभी का समर्थन मिल रहा है। विकास के क्रम को बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सबके हितों का ध्यान रखते हुए और सभी से संवाद करते हुए राज्य सरकार लैंड पूलिंग सहित सभी प्रकार के विकास कार्यों के मार्ग पर अग्रसर हो रही है। प्रयागराज महाकुंभ के ऐतिहासिक आयोजन में करोड़ों लोगों के आगमन, व्यवस्था और उनके सुरक्षा प्रबंधन के दृष्टिगत केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने स्थायी संरचनाओं के विकास पर बल दिया, इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिला। उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के लिए स्थायी निर्माण के संबंध में किसानों से संवाद जारी है, हम किसी को नाराज नहीं करना चाहते, राज्य सरकार सभी को साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। विकास का क्रम निरंतर जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मीडिया से चर्चा में व्यक्त किए। सिंहस्थ का आयोजन प्रदेश के लिए गौरव का विषय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इतिहास में अब तक के सबसे बड़े सिंहस्थ मेले का आयोजन उज्जैन में वर्ष-2028 में होने जा रहा है। वर्तमान में उज्जैन की अर्थव्यवस्था में महाकाल लोक बनने से भारी वृद्धि हुई है। सिंहस्थ के आयोजन से उज्जैन का आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकास होने से पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा। उज्जैन सिंहस्थ में 30 करोड़ श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की आशा है। सिंहस्थ आयोजन का गौरवशाली इतिहास रहा है, राज्य शासन वर्ष 2028 के सिंहस्थ का आयोजन आस्था, गरिमा और भव्यता के साथ करने के लिये कृत संकल्पित है। यह आयोजन उज्जैन सहित समूचे प्रदेश के लिये अत्यंत गौरव का विषय है। सिंहस्थ आयोजन में, स्थानीय किसान बंधुओं का सदैव मिला सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सुनिश्चित करना राज्य शासन का कर्तव्य है कि हज़ारों साधु-संतों और करोड़ों श्रद्धालुओं को सिंहस्थ के दौरान उच्च स्तरीय सुविधाएं मिलें और उन्हें कोई परेशानी न हो। पिछले अनुभवों के आधार पर इस प्रकार की अधोसंरचना बनानी आवश्यक है, जिससे वर्षा-आंधी की स्थिति में भी मेले में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो। भव्य और विशाल आयोजन में सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करते हुए संपूर्ण व्यवस्था बनाए रखना शासन का दायित्व है। इस वृहद आयोजन के लिये हज़ारों एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। सिंहस्थ के आयोजन में, स्थानीय किसान बंधु शासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करते आये हैं। सिंहस्थ : 2016 के दौरान लगभग 650 करोड़ रूपए की लागत से 3000 हेक्टेयर भूमि पर अस्थाई अधोसंरचना निर्माण कार्य किए गए थे, जिन्हें आयोजन उपरांत हटा दिया गया था। सिंहस्थ : 2028 के लिए उज्जैन को ग्लोबल स्पिरिचुअल सिटी के रूप में विकसित करने की संकल्पना की गई है। जिसके तहत किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुये सबकी सहमति के आधार पर अस्थायी के स्थान पर स्थायी अधोसंरचना का विकास किया जायेगा।  

मध्यप्रदेश विधानसभा में बदलाव की आहट, प्रमुख सचिव पद के लिए अरविंद शर्मा का नाम सबसे आगे

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रशासनिक बदलाव की आहट तेज हो गई है। मौजूदा प्रमुख सचिव एपी सिंह 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उनके कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाने के संकेत पहले ही मिल चुके हैं। ऐसे में विधानसभा सचिव के रूप में कार्यरत अरविंद शर्मा को अगला प्रमुख सचिव बनाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। वर्तमान प्रमुख सचिव एपी सिंह के कार्यकाल में विस्तार की संभावना नहीं है। ऐसे में 1 अक्टूबर से नए प्रमुख सचिव की नियुक्ति तय मानी जा रही है। अरविंद शर्मा सबसे मजबूत दावेदार  नरेंद्र सिंह तोमर ने अध्यक्ष बनने के बाद अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश पर लाया और  विधानसभा सचिव बनाया था। बाद में उनका संविलियन भी विधानसभा में हो गया। वर्तमान में वे 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं और नियमों के मुताबिक 62 साल तक सेवा में रह सकते हैं। यदि उन्हें प्रमुख सचिव नियुक्त किया जाता है, तो वे आगामी दो साल तक इस जिम्मेदारी को निभा पाएंगे। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर की पसंद होने के कारण उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। एपी सिंह का लंबा कार्यकाल अब होगा समाप्त एपी सिंह पहले ही 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो चुके थे। उसके बाद उन्हें दो साल का सेवा विस्तार और फिर 6 महीने का संविदा कार्यकाल दिया गया। अब वे 64 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। ऐसे में उनका कार्यकाल बढ़ाने की कोई संभावना नहीं रह गई है। हालांकि विधानसभा अधिनियम के मुताबिक अध्यक्ष चाहें तो जिला न्यायाधीश स्तर के अधिकारी को भी प्रमुख सचिव नियुक्त कर सकते हैं। फिलहाल इस पर विचार की संभावना कम है क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में अरविंद शर्मा ही सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। सचिव पद की मौजूदा स्थिति विधानसभा में सचिव के दो पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में एक पद पर अरविंद शर्मा कार्यरत हैं, जबकि दूसरा पद रिक्त है। प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए यदि शर्मा प्रमुख सचिव बनते हैं, तो सचिव के दोनों पद अस्थायी तौर पर खाली रह सकते हैं और जिम्मेदारियां प्रभार के आधार पर सौंपी जा सकती हैं।  

दुर्गा पूजा से पहले बड़ी राहत, मइया सम्मान योजना के तहत खाते में आ सकते हैं 2500 रुपये

रांची   झारखंड सरकार की महत्वकांक्षी मंईयां सम्मान योजना की लाभुकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. सभी लाभुक महिलाओं को सितंबर माह की राशि 2500 रुपये दुर्गा पूजा से पहले मिल जायेगी. जानकारी के अनुसार आज 15 सितंबर के बाद जिला स्तर से राशि ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू होगी. वहीं अक्तूबर माह की राशि भी दीपावली से पहले मिल जायेगी. नवंबर माह तक के लिए राशि आवंटित सामाजिक सुरक्षा निदेशालय द्वारा सभी जिलों को नवंबर माह तक के लिए राशि आवंटित कर दी गयी है. विभिन्न जिलों को 9600 करोड़ रुपये मिले हैं. 15 सितंबर के बाद यानी कल 16 सितंबर से महिलाओं के खाते में 2500 रुपये ट्रांसफर करने की संभावना है. अगर कल 16 सितंबर से राशि ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू होती है, तो लगभग 1 सप्ताह के भीतर सभी लाभुकों को योजना की राशि मिल जायेगी. एक माह में मिलेगी दोहरी खुशियां मालूम हो इसी माह के शुरुआत में 3 सितंबर को लाभुक महिलाओं के खाते में अगस्त माह की राशि 2500 रुपये भेजे गये थे. और अब दुर्गा पूजा से पहले महिलाओं को सितंबर माह की राशि मिलने वाली है. ऐसे में इस माह महिलाओं को दोहरी खुशियां मिलने वाली है. राज्य की करीब 50 लाख महिलाओं को हर माह योजना का लाभ दिया जाता है. अगर आप झारखंड की मंईयां सम्मान योजना की लाभार्थी हैं और यह जानना चाहती हैं कि आपके खाते में 2500 रुपये आए हैं या नहीं. तो इसके कई आसान तरीके हैं. सबसे पहले अपने बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर पर SMS अलर्ट चेक करें. इसके अलावा पासबुक अपडेट कराने से भी पता चल जाएगा. अगर आपके पास इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग ऐप है. तो ट्रांजैक्शन हिस्ट्री से तुरंत जानकारी मिल सकती है. वहीं जिन महिलाओं के पास यह सुविधाएं नहीं हैं. वह नजदीकी बैंक शाखा जाकर मिनी स्टेटमेंट निकलवा सकती हैं. योजना का पैसा सीधे लाभार्थी के नाम से जुड़े बैंक खाते में DBT के जरिए आता है. अगर आपके पास इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग ऐप है. तो ट्रांजैक्शन हिस्ट्री से तुरंत जानकारी मिल सकती है. वहीं जिन महिलाओं के पास यह सुविधाएं नहीं हैं. वह नजदीकी बैंक शाखा जाकर मिनी स्टेटमेंट निकलवा सकती हैं. योजना का पैसा सीधे लाभार्थी के नाम से जुड़े बैंक खाते में DBT के जरिए आता है. अगर कहीं को जानकारी नहीं है तो फिर आपको अपने नजदीकी सीएससी सेंटर जाना होगा. वहां जाकर आप योजना में अपनी किस्त का स्टेटस चेक करवा सकती है. ऑपरेटर को आपको अपना आधार कार्ड या रजिस्ट्रेशन नंबर बताना होगा. अगर कहीं को जानकारी नहीं है तो फिर आपको अपने नजदीकी सीएससी सेंटर जाना होगा. वहां जाकर आप योजना में अपनी किस्त का स्टेटस चेक करवा सकती है. ऑपरेटर को आपको अपना आधार कार्ड या रजिस्ट्रेशन नंबर बताना होगा. इसके बाद वह योजना में आपकी किस्त का स्टेटस आपको बता देगा किस्त अटक गई है या जारी हो गई है. अगर पूरी जानकारी सही होने के बाद भी आपकी किस्त के पैसे आपके खाते में नहीं आते हैं. तो फिर आप इस बारे में नजदीकी कार्यालय जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती हैं. इसके बाद वह योजना में आपकी किस्त का स्टेटस आपको बता देगा किस्त अटक गई है या जारी हो गई है. अगर पूरी जानकारी सही होने के बाद भी आपकी किस्त के पैसे आपके खाते में नहीं आते हैं. तो फिर आप इस बारे में नजदीकी कार्यालय जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती हैं.

कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर! हाई कोर्ट ने प्रमोशन और पेंशन लाभ का रास्ता किया साफ

कैथल  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कैथल जिले के पुलिस कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा आदेश सुनाते हुए रोहतक रेंज द्वारा जारी सीनियरिटी और प्रमोशन से जुड़े विवादित आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि कैथल पुलिसकर्मियों की वरिष्ठता और प्रमोशन का निर्णय केवल करनाल रेंज कर सकता है। इस फैसले से कैथल के करीब 70 पुलिस कर्मचारियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जिनमें एएसआई और एसआई रैंक के अधिकारी शामिल हैं। इनमें से कुछ कर्मचारी अब सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। मामला सब-इंस्पेक्टर मोहिंदर सिंह और अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कर्मवीर सिंह बनयाना ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल वर्ष 2004 से 2008 के बीच कैथल जिले में हेड कांस्टेबल के रूप में कन्फर्म हुए थे। जबकि उनके जूनियर साथियों को वर्ष 2009 से 2011 के बीच करनाल और पानीपत में कन्फर्म किया गया था। इसके बावजूद 2019 में रोहतक रेंज ने सीनियरिटी सूची बदलते हुए जूनियर्स को सीनियर बना दिया और उन्हें एंटीडेटेड प्रमोशन भी दे दिए। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि नियमों के मुताबिक हेड कांस्टेबल तक की सीनियरिटी जिला स्तर पर तय होती है, जबकि एएसआई और एसआई की सीनियरिटी रेंज स्तर पर होती है। ऐसे में कैथल, करनाल और पानीपत के कर्मचारियों की वरिष्ठता और प्रमोशन का फैसला केवल करनाल रेंज कर सकता था। रोहतक रेंज को इसमें हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं था क्योंकि 29-9-2011 में करनाल रेंज के गठन के बाद जिला करनाल, पानीपत और कैथल के पुलिस कर्मियों के बारे में कोई भी निर्णय लेने का अधिकार केवल करनाल रेंज के पास ही है रोहतक रेंज के पास नहीं है। न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि रोहतक रेंज का आदेश पूरी तरह गलत था। अदालत ने इस आदेश को रद्द करते हुए कहा कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरियाणा स्वयं या किसी अन्य अधिकारी को नियुक्त कर तीन माह में उचित आदेश जारी करें। इस फैसले से कैथल जिले के एएसआई और एसआई रैंक के लगभग 70 पुलिस कर्मचारियों को प्रमोशन, वेतनमान और पेंशन लाभ मिलेगा। चूंकि इनमें से कुछ कर्मचारी अब रिटायर हो चुके हैं, इसलिए उन्हें भी एरियर और पेंशन लाभ का फायदा मिल सकेगा। कैथल पुलिस लाइन और थानों में तैनात कर्मचारियों ने हाईकोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह फैसला न केवल वर्षों से लंबित उनके हक की बहाली है बल्कि इससे उनका मनोबल भी ऊँचा होगा। कर्मचारी संगठनों ने भी अदालत के इस निर्णय को ऐतिहासिक करार देते हुए सरकार से अपील की है कि आदेश का पालन समय पर और बिना देरी के किया जाए। हाईकोर्ट का यह आदेश केवल कैथल पुलिसकर्मियों पर लागू होगा। इससे यह भी साफ हो गया है कि सीनियरिटी और प्रमोशन को लेकर भविष्य में किसी अन्य रेंज को कैथल के कर्मचारियों के मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होगा।

गलत क्लेम करने से भुगतान में होती है देरी, इससे ईमानदारी से काम करने वाले संस्थान भी होते हैं प्रभावितः कटारिया

आयुष्मान भारत पीएम जन आरोग्य योजना के स्टेकहोल्डर वर्कशाप का आयोजन रायपुर, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत आज सोमवार को  न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाईन रायपुर में स्टेकहोल्डर वर्कशॉप का आयोजन किया गया। स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया की परिकल्पना एवं आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं सह मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. प्रियंका शुक्ला  के मागदर्शन में यह वर्कशॉप आयोजित की गई। योजनांतर्गत जनवरी 2025 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली में आयोजित बैठक में जानकारी दी गई थी कि छत्तीसगढ़ में देश में सबसे अधिक फ्रॉड क्लेम पाए गए हैं, और ऐसे अस्पतालों की संख्या के मामले में छत्तीसगढ़ चौथे स्थान पर है। वर्कशॉप में अस्पतालों को जानकारी दी गई कि ट्रिगर क्लेम को कैसे कम किया जा सकता है। साथ ही उन्हे जानकारी दी गई कि भविष्य में भी क्लेम, ट्रिगर नहीं हों। अमित कटारिया द्वारा यह बताया गया कि आयुष्मान योजना गरीब एवं मध्यम वर्ग के नागरिकों के लिए बहुत सहायक है। इस योजना से उन्हें अपने उपचार के लिए अस्पताल का चुनाव करने का विकल्प मिला है। उन्होने बताया कि गलत क्लेम करने से एक दुविधा की शुरुआत हो जाती है। इससे योजना की छवि धूमिल होती है और जनता व अस्पताल का विश्वास डगमगाता है। इससे वास्तविक मरीज जिसे उपचार मिलना चाहिए, अक्सर वंचित रह जाता है। साथ ही अस्पतालों के सही भुगतान में देरी होती है और ईमानदारी से काम करने वाले संस्थान भी प्रभावित होते हैं। और अंततः इसका सबसे बड़ा नुकसान गरीब और वंचित परिवार को उठाना पड़ता है, जिनके लिए यह योजना जीवनरेखा है। साथ ही उनके द्वारा बताया गया कि योजना में अस्पतालों का सही पंजीयन किया जाये और समय-समय पर उनका निरीक्षण किया जाये। शासकीय अस्पतालों द्वारा भी योजना में क्लेम करने के दौरान पूर्ण दस्तावेज़ अपलोड करें जिससे अनावश्यक क्लेम निरस्त न हों। उन्होने आशा जाहिर की कि हमारा राज्य योजना के सकारात्मक मानकों में पूरे देश में प्रथम स्थान पर आए। इस वर्कशॉप में पूरे दिन में विभिन्न बिन्दुओ जैसे, योजना की सामान्य जानकारी, आयुष्मान कार्ड कैसे बनाया जाता है, वय वंदना योजना में आयुष्मान कार्ड कैसे बनाए जाएं,  सही तरीके से क्लेम कैसे किए जाएं, दस्तावेज़ कैसे सही तरीके से बनाए जाएं, लिपिकीय त्रुटि कम से कम हों, योजना में क्या करना चाहिए व क्या नहीं करना चाहिए, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन अंतर्गत आभा आई.डी. का उपयोग एवं कम्प्लांएट सॉफ्टवेयर का उपयोग आदि पर जानकारी दी गई। वर्कशॉप में उपस्थित प्रतिभागियों द्वारा अपनी शंकाओं को रखा गया जिसका समाधान, वक्ताओं द्वारा किया गया है। इस वर्कशॉप में डॉ. सुरेन्द्र पामभोई, संचालक, राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, छत्तीसगढ़, श्री टी.एन. सिंह, राज्य सूचना एवं विज्ञान अधिकारी, एन.आई.सी, छत्तीसगढ़, श्री मनीष कोचर, तकनीकी निदेशक, एन.आई.सी, छत्तीसगढ़, डॉ. सुरेन्द्र शुक्ला, चेयरबोर्ड, हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया, छ.ग., सुश्री पूजा शुक्ला मिश्रा, संयुक्त संचालक (वित्त), एवं डॉ धर्मेंद्र गहवई, प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर, राज्य नोडल एजेंसी, छ.ग., राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, भारत सरकार से प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ के समस्त जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, जिला आयुष्मान नोडल अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक एवं अस्पताल सलाहकार एवं जिला रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर के निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

फूहड़ता फैलाने वाले गरबा कार्यक्रमों पर लगाएं प्रतिबंध, हिंदू संगठनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

रायपुर राजधानी रायपुर में नवरात्रि के अवसर पर मंदिरों, दुर्गा पंडालों एवं गरबा नृत्य के आयोजन में मर्यादा बनाए रखने को लेकर हिंदू संगठन बजरंग दल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और नवरात्रि में गरबा के नाम पर फूहड़ता फैलाने वाले आयोजन पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही आयोजन समितियों के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो समितियों एवं गैर-धार्मिक तत्वों पर दंडात्मक कार्रवाई करने बजरंग दल प्रतिबद्ध रहेगा. बजरंग दल के पदाधिकारियों ने कहा कि 22 सितंबर से क्वांर नवरात्रि प्रारंभ होने वाली है. नवरात्रि के दौरान शक्ति केंद्रों, मंदिरों एवं दुर्गा पंडालों में भक्त देवी मां को प्रसन्न करने भक्ति और शक्ति के प्रतीक “गरबा नृत्य” का आयोजन करते हैं, यह नृत्य भक्तों की आस्था और भक्ति को व्यक्त करने का एक माध्यम है। मर्यादा में रहकर यह आयोजन होना चाहिए। गरबा के नाम पर फूहड़जा फैलाने वाले आयोजन पर रोक लगनी चाहिए। बजरंग के प्रदेश प्रवक्ता ऋषि मिश्रा ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर नगर में विभिन्न मंदिरों एव दुर्गा पंडालों में गरबा नृत्य का आयोजन किया जाता है. चूंकि ये हिंदुओं का धार्मिक आयोजन है। एक आदर्श गरबा नृत्य के आयोजन के लिए अपनी संस्कृति का ध्यान रखना होगा। गरबा को लेकर जारी किए ये दिशा-निर्देश     गरबा नृत्य का आयोजन किसी भी मंदिर परिसर या दुर्गा पंडालों में ही आयोजित हो, गरबा नृत्य में देवी गीत, धार्मिक गीत, जसगीत ही बजाए जाने की अनुमति हो, किसी भी प्रकार की फिल्मी या अश्लील गाना न बजाया जाए।     आयोजित किए गए गरबा नृत्य में परंपरागत परिधान और वेशभूषा को ही मान्यता प्रदान की जाए।     गरबा में हिन्दू समाज की माताएं-बहनें बढ़-चढ़ कर भागीदारी निभाती है, अतः उसके सुरक्षा का ध्यान रखते हुए आयोजन समिति को रात्रि 12 बजे तक ही गरबा नृत्य आयोजन की अनुमति प्रदान की जाए।     गरबा नृत्य में आयोजन समिति द्वारा प्रवेश द्वार एवं अन्य व्यवस्था के लिए हिन्दू बाउंसर (बॉडीगार्ड) की ही नियुक्ति हो। पार्किंग की सुविधाजनक व्यवस्था हो, पार्किंग स्थल पर नियुक्त किए गए कर्मचारी भी हिंदू समाज से ही संबंधित हो।     आयोजित गरबा नृत्य में सम्मिलित महिला/पुरुष, लड़ने/लड़कियां गैर हिन्दू समाज से नहीं होना चाहिए।     आयोजित गरवा मैदान स्थल के आसपास किसी भी प्रकार की नशाखोरी एवं मांसाहार भोजन सामग्री का विक्रय केंद्र न हो। दिशा-निर्देशों की अवहेलना करने पर होगी कार्रवाई बजरंग दल के पदाधिकारियों ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद बजरंगदल रायपुर महानगर की ओर से जारी दिशा-निर्देशों की अवहेलना किसी भी आयोजन समिति करती है तो विहिप, बजरंग दल रायपुर महानगर अपने स्तर पर समितियों एवं गैर-धार्मिक तत्वों पर दंडात्मक कार्रवाई करने प्रतिबद्ध रहेगा, जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस दौरान प्रांत से ऋषि मिश्रा, विभाग से रमन नायडू, रवि वाधवानी, जिला मंत्री बंटी कटरे, जिला संयोजक विजेंद्र वर्मा, रायपुर महानगर के 14 प्रखंडों के कार्यक्रता उपस्थित थे।