samacharsecretary.com

प्लास्टिक से डीजल! मध्य प्रदेश में शुरू होगी खास तकनीक, कचरा नहीं जलेगा बल्कि पिघलकर बनेगा ईंधन

शिवपुरी  कचरे में मौजूद प्लास्टिक से पायरोलिसिस प्रक्रिया को अपनाकर डीजल बनाने का प्लांट शहर में लगाया जाएगा। यह मध्यप्रदेश का पहला ऐसा प्लांट होगा, जहां प्लास्टिक से डीजल बनेगा। यह प्लांट शिवपुरी में लगाया जाएगा जिसके लिए टेंडर रविवार को खुलेंगे। सबकुछ सही रहा तो 3-4 माह में प्लांट शुरू हो जाएगा। अभी तक देश में इस तरह के 3-4 प्लांट हैं। ऐसा ही प्लांट उत्तरप्रदेश के मथुरा में है। शिवपुरी का प्लांट पीपीई मोड पर होगा। नगर पालिका के बड़ौदी स्थित ट्रेंचिंग गाउंड में फर्म को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी को कम से कम 15 साल के लिए प्लांट चलाने की शर्त होगी। प्लांट लगाने में 3-4 करोड़ खर्च होंगे। कंपनी अपना लाभ निकालने के साथ ही नगर पालिका को भी तय रकम हर माह या सालाना देगी। इस डीजल का प्रयोग वाहनों में कम, बल्कि जनरेटर और हैवी मशीनरी को चलाने में ज्यादा किया जाता है। इस तरह तैयार होगा डीजल प्लास्टिक कचरे को रियक्टर में 350 से 450 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाता है। इसमें हाइड्रो कार्बन बनते हैं। इससे पेट्रोल, डीजल व कार्बन गैस का उत्पादन होता है। एक टन प्लास्टिक कचरे से 150 से 200 लीटर डीजल बन सकता है। यह हैं तकनीक के अविष्कारक मेट्रो अटलांटा के 21 वर्षीय अश्वेत आविष्कारक जूलियन ब्राउन ने प्लास्टोलाइन नामक तकनीक विकसित की है, जो माइक्रोवेव पायरोलिसिस का उपयोग कर सौर ऊर्जा से चलने वाला रिएक्टर है। यह प्लास्टिक कचरे को गैसोलीन, डीजल व जेट ईंधन जैसे ईंधन में परिवर्तित करता है। नगर पालिका स्वास्थ्य अधिकारी योगेश शर्मा ने कहा कि प्लास्टिक से पायरोलिसिस प्रक्रिया के तहत डीजल बनाने का प्लांट जल्द लगेगा। इसमें दो-तीन फर्म ने रुचि दिखाई है। केले के छिलके और प्लास्टिक के कचरे से बनेंगे डीजल वैज्ञानिकों ने कमाल का काम किया है। जिस केले के छिलके और प्लास्टिक के कचरे को कम फेक देते थे, उनसे यहां के वैज्ञानिकों ने डीजल बनाने का तरीका खोज निकाला है। यह डीजल सस्ता होगा। साथ ही पर्यावरण के लिए भी अच्छा होगा। इसके लिए वैज्ञानिकों ने को-पैरोलीसिस तकनीक का इस्तेमाल किया है। इससे बायोडीजल तैयार होगा। डीजल वाहनों में अच्छे से काम करेगा वैज्ञानिकों का दावा है कि यह बायो-डीजल, डीजल वाहनों में भी अच्छे से काम करेगा। यह खोज कचरे को उपयोगी बनाने के लिए की गई है। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन को इससे आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ने की खोज यह रिसर्च आइसर भोपाल के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शंकर चाकमा के नेतृत्व में हुई। उनके साथ बबलू अलावा और अमन कुमार ने भी इस रिसर्च में भाग लिया। वैज्ञानिकों ने केले के छिलके और प्लास्टिक कचरे को 25:75 के अनुपात में मिलाया। फिर उन्होंने इसे एक खास तापमान पर गर्म करके पायरो-ऑयल (तरल ईंधन) प्राप्त किया। ऐसे होगा इस्तेमाल रिसर्च में पता चला कि इस ईंधन को डीजल के साथ 20 प्रतिशत तक मिलाकर गाड़ी में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस रिसर्च को जर्नल ऑफ द एनर्जी इंस्टीट्यूट और एनर्जी नेक्सस में भी छापा गया है। रिसर्च करने वालों के अनुसार, एक किलोग्राम केले के छिलके और प्लास्टिक कचरे से लगभग 850 ग्राम तरल पदार्थ, 140 ग्राम गैस और 10 ग्राम चारकोल मिलता है। गैस का इस्तेमाल खाना बनाने में किया जा सकता है, जबकि चारकोल का इस्तेमाल पानी को साफ करने के लिए किया जा सकता है। तरल ईंधन को डीजल के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है। क्या होता है पायरो आयल वहीं, यह जो पायरो-आयल है, उसमें कई तरह के हाइड्रोकार्बन होते हैं। जैसे कि ओलेफिन, पैराफिन, एरोमैटिक्स, एस्टर और अल्कोहल। इसमें लगभग 12 प्रतिशत ऑक्सीजन वाले यौगिक और लंबी श्रृंखला वाले एस्टर भी पाए जाते हैं। इससे इसकी ऊष्मा (हीट) देने की क्षमता लगभग 55 मेगाजूल प्रति किलोग्राम तक बढ़ जाती है। यह सामान्य डीजल से कहीं ज्यादा गर्मी देता है।इसके अलावा, यह ईंधन ठंडे मौसम में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि इसका पोर पाइंट -25 डिग्री सेल्सियस तक है. साथ ही, इसका फ्लैश पाइंट भी 4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा पाया गया है, जिससे यह ज्यादा सुरक्षित भी है। ईंधन की खपत कम हुई इस वैकल्पिक ईंधन को डीजल इंजनों में भी टेस्ट किया गया। टेस्ट में पाया गया कि इससे ईंधन की खपत कम हुई और बीटीई (ब्रेक थर्मल एफिशिएंसी) में भी काफी सुधार हुआ। इससे यह साबित होता है कि यह ईंधन डीजल से न केवल सस्ता है, बल्कि प्रदर्शन के मामले में भी बेहतर है।

सीता के रूप में मंच पर आएंगी मनिका विश्वकर्मा, अयोध्या की रामलीला में चमकेगी खूबसूरती और प्रतिभा

अयोध्या  मिस यूनिवर्स इंडिया 2025 का खिताब अपने नाम करा चुकी मनिका विश्वकर्मा के हाथ एक और बड़ी उपलब्धि लगी है। मनिका अयोध्या में होने वाली सितारों की रामलीला में सीता की भूमिका निभाएंगी। मनोज तिवारी, रवि किशन, पुनीत इस्सर और रजा मुराद जैसे कई जाने-माने अभिनेता इस रामलीला का हिस्सा बनेंगे। 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक राम कथा पार्क में आयोजित होने वाली इस रामलीला में देश-विदेश के दर्शकों को एक अनोखा अनुभव मिलने वाला है। रामलीला के संस्थापक अध्यक्ष सुभाष मलिक (बॉबी) और संस्थापक महासचिव शुभम मलिक ने जानकारी दी कि इस बार विश्व की सबसे बड़ी रामलीला में दर्शकों को और भी शानदार प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। पिछले वर्ष इस रामलीला को रिकॉर्ड तोड़ 45 करोड़ लोगों ने देखा था, जो अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। दुनिया के कोने-कोने से इसे देखने वाले दर्शक इसे खास और अद्वितीय बनाते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान की रहने वाली मनिका विश्वकर्मा मिस यूनिवर्स 2025 प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं। मनिका ने कहा कि वह लंबे समय से अयोध्या आने की सोच रही थीं, लेकिन अवसर नहीं मिल पाया। अब उन्हें भगवान श्रीराम की कृपा से सीता का किरदार निभाने का अवसर मिल रहा है, जो उनके लिए जीवन का अनमोल अनुभव है। मनिका ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह वर्ष उनके लिए बेहद खास है क्योंकि उन्हें एक ही समय में देश का प्रतिनिधित्व करने और अयोध्या की रामलीला में मां सीता का पावन किरदार निभाने का अवसर मिला है। बॉबी मलिक ने बताया कि इस बार रामलीला में कई चर्चित और नामी कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। परशुराम की भूमिका में पुनीत इस्सर, बाली के रूप में मनोज तिवारी, केवट के किरदार में रवि किशन, हनुमान जी के रूप में राजेश पुरी, रावण के रूप में मनीष शर्मा, भगवान राम के रूप में राहुल गुच्चर, मेघनाद की भूमिका में रजा मुराद, राजा जनक के रूप में अवतार गिल, विभीषण के रूप में राकेश बेदी और भगवान लक्ष्मण के रूप में राजन मोदी नजर आएंगे। शुभम मलिक ने कहा कि सुविख्यात कलाकारों का संगम इस रामलीला को और भी आकर्षक बना देगा। अयोध्या की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक है।

सीट बंटवारे को लेकर जीतन राम मांझी ने रखी साफ़ स्थिति, केंद्रीय नेतृत्व का फैसला तय

पटना  केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने शनिवार को आगामी चुनावों में एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है और जो भी फैसला केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से आएगा, उसको सभी मानेंगे। उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद ही बातें होंगी। मांझी ने कार्यकर्ताओं को चुनाव अकेले लड़ने के लिए तैयार रहने की बात कही थी। उन्होंने इस पर सफाई देते हुए कहा कि यह सिर्फ कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए कहा गया था। कभी-कभी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसा बोलना पड़ता है। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान पर कुछ भी बोलने से बचते हुए इशारों में निशाना साधा। कहा कि वह चिराग के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते, क्योंकि 2020 से लोग उनका 'चाल और चरित्र' देख रहे हैं। चिराग को नसीहत देते हुए कहा कि अभी देश और बिहार को एनडीए की जरूरत है, इसलिए ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिए जिससे गठबंधन कमजोर पड़े। वहीं कांग्रेस द्वारा बीड़ी की तुलना बिहार से करने के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह बयान कांग्रेस का लोकतंत्र पर अविश्वास दिखाता है और वे सिर्फ 'भद्दी भद्दी बातें' करके खुद को स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने केरल कांग्रेस द्वारा दिए गए इस बयान की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही जीएसटी स्लैब में बदलाव के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि अपने 46 साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने गरीबों के लिए इतना बड़ा तोहफा पहले कभी नहीं देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम गरीबों के लिए जीते हैं और आगे भी उनके लिए ही काम करेंगे। उन्होंने इस फैसले को दीपावली और दशहरा से ठीक पहले आने वाली 'बड़ी सौगात' बताया।

बिहार की शिक्षा, रोजगार और सिंचाई पर सवाल, तेजस्वी यादव ने खोला मुद्दा

पटना बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को एनडीए सरकार पर जुबानी हमला किया। उन्होंने कहा कि 20 वर्षों से भाजपा और जदयू सत्ता में हैं, फिर भी बिहार में शिक्षा, रोजगार और सिंचाई की हालत बदतर है।   पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने इंडिया गठबंधन की बैठक के संबंध में कहा कि हम लोग नेताओं से मिलते रहते हैं, बातचीत चलती रहती है। यह प्रक्रिया है, चलती रहती है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि बिहार में 20 साल से एनडीए सत्ता में है, लेकिन बिहार में क्या है? बिहार में अपराध बढ़ गया है, भ्रष्टाचार चरम पर है। बिहार में न दवाई है, न पढ़ाई है, न सिंचाई है। उन्होंने कहा कि देश में बिहार प्रति व्यक्ति आय में सबसे फिसड्डी है। किसानों की आय के मामले में बिहार पीछे है। कोई उद्योग धंधा नहीं है। अब जब चुनाव का समय आया है, तो ये हमारी नकल कर रहे हैं। एक उद्योग कारखाना क्यों नहीं है? पहले ये लोग बात क्यों नहीं करते थे? माई बहिन योजना के फॉर्म को लेकर फर्जीवाड़ा कहने पर तेजस्वी यादव ने कहा कि लोग स्वेच्छा से फॉर्म भर रहे हैं। इसमें क्या गलत है? भाजपा-जदयू की हालत खराब है, ये लोग हिले हुए हैं। इससे पहले, राजद नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एनडीए की सरकार पर पिछले 20 वर्षों में राज्य की दो पीढ़ियों को बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए दस सवाल पूछे। तेजस्वी यादव ने एनडीए पर हमला करते हुए कहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री के 20 वर्षों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी 11 वर्षों की डबल इंजन सरकार ने बिहार की दो पीढ़ियों का जीवन बर्बाद किया है। उन्होंने दस सवालों की एक सूची जारी की है, जिसमें मतदाताओं से आग्रह किया गया है कि जब सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के नेता वोट मांगने आएं, तो उनसे गरीबी, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और राज्य की जर्जर स्थिति जैसे बुनियादी मुद्दों पर सवाल पूछें।

आरा से बड़ा तोहफा: बिहार सरकार करेगी 1 करोड़ युवाओं को रोजगार मुहैया

आरा बिहार के विकास में केंद्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है। जुलाई 2024 के बजट में विशेष आर्थिक सहायता के रूप में सड़क, उद्योग, स्वास्थ्य, पर्यटन, बाढ़ नियंत्रण, के साथ-साथ मखाना कारखाने की स्थापना, खेलो इंडिया समेत अन्य कार्यों के लिए पूरी राशि मिल रही है। इस तरह से एक तरफ जहां विकास का कार्य तेज गति से हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार देने की योजना है। उक्त बातें भोजपुर जिले के उच्च विद्यालय जगदीशपुर मैदान में शनिवार को आम लोगों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कही। वे परिभ्रमण यात्रा में बक्सर के बाद भोजपुर के बिहिया और जगदीशपुर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। उनके साथ उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी भी थे। 'अब नहीं जाएंगे' मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 से भाजपा और जेडीयू मिलकर तेजी से बिहार का विकास कर रही है, पहले की सरकार विकास करने के बदले केवल गड़बड़ करती थी, हम भी गलती से दो बार उधर चले गए, अब नहीं जाएंगे। 2020 में हमने 10 लाख नौकरी और 10 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, उसे पूरा करते हुए उससे भी ज्यादा 29 लाख लोगों को सरकारी नौकरी और रोजगार अब तक दिया जा चुका है। विपक्ष के लोगों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि 2005 के पहले शाम ढलते ही कोई डर से निकलता नहीं था और ना पहले रोड, रास्ता, स्वास्थ्य, बिजली व शिक्षा की स्थिति ठीक थी। योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री ने 754 करोड़ की लागत से 432 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास बिहिया तथा जगदीशपुर में किया। सीएम सबसे पहले बिहिया चौरास्ता कार्यक्रम स्थल पहुंचे। वहां पर लगभग तीन सौ करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करने के बाद जगदीशपुर के नयका टोला बस पड़ाव मैदान पर मुख्यमंत्री ने 454 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास रिमोट दबाकर किया। जगदीशपुर में योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास के पहले प्रांगण में लगाए गए 10 स्टालों का निरीक्षण किया। इस दौरान वे जीविका, समाज कल्याण, ऊर्जा, उपभोक्ता संरक्षण, कृषि, डीआरडीओ, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, गृह, आपदा और पंचायती राज विभाग के स्टाल का निरीक्षण करते हुए लाभुकों से मिलते हुए उनका अभिवादन स्वीकार किया और कई स्टाल पर योजनाओं का फीडबैक लिया।

राजनीति में लौटे अशोक सिद्धार्थ, आकाश आनंद के बाद बसपा में स्वागत, मायावती ने किया माफ़

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को पार्टी और डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान के मूवमेन्ट को आगे बढ़ाने के हित में पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ को पार्टी में फिर शामिल कर लिया है। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ से पहले उनके दामाद आकाश आनंद का भी बसपा से निष्कासन समाप्त कर उनको पार्टी में नंबर दो का दर्जा भी दिया है। अशोक सिद्धार्थ ने सार्वजनिक रूप से बसपा मुखिया से माफी मांगने के साथ अपनी गलती को स्वीकार किया था। उसी के बाद से उनका निष्कासन रद होना तय माना जा रहा था। बसपा मुखिया ने सोशल मीडिया पर अपने एक्स हैंडल पर पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ का पार्टी से निष्कासन रद करने का जानकारी दी। मायावती ने लिखा कि बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) में कई जिम्मेदार पदों पर लम्बे वर्षों तक कार्यरत रहे एवं पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिये कुछ माह पहले पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आज अपने लम्बे पोस्ट के जरिये सार्वजनिक तौर पर अपनी गलती की माफी मांगी है। उन्होंने आगे पार्टी और बीएसपी मूवमेन्ट के प्रति पूरी तरह से वफादर रहकर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान के मूवमेन्ट को आगे बढ़ाने में पूरे जी-जान से लग जाने का आश्वासन बहुजन समाज व बीएसपी नेतृत्व को दिया है। मायावती ने आगे लिखा, हालांकि उन्हें अपनी गलती का एहसास बहुत पहले हो चुका था और वे इसका लगातार पश्चाताप विभिन्न स्तर पर कर रहे थे, किन्तु आज उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपना पछतावा जाहिर किया है। जिसको ध्यान में रखते हुये पार्टी व मूवमेन्ट के हित में उन्हें पार्टी ने एक मौका दिया जाना उचित समझा है। इसी कारण बीएसपी से उनके निष्कासन का फैसला आज तत्काल प्रभाव से रद किया जाता है अर्थात इनको पार्टी में वापस ले लिया गया है। उम्मीद है कि पार्टी के अन्य सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं की तरह वे भी पूरे तन, मन, धन से पार्टी व मूवमेन्ट को आगे बढ़ाने में अपना भरपूर योगदान जरूर देंगे, ताकि बीएसपी के नेतृत्व में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का कारवां आगे बढ़ता हुआ बहुजन समाज को शोषित वर्ग से ऊपर उठाकर यहाँ प्रदेश एवं देश का शासक वर्ग बना सके। आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने बसपा प्रमुख से माफी मांग ली है। अशोक सिद्धार्थ ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए मायावती से माफी मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने मायावती से खुद को पार्टी में वापस लेने का आग्रह भी किया है। मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने अब सभी विवाद खत्म करते हुए बसपा प्रमुख से माफी मांग ली है। बता दें कि मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पिछले दिनों पार्टी से निकाल दिया था। अपनी पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि मैं हाथ जोड़कर उनसे अनुरोध कर रहा हूं कि वह मुझे माफ कर दें। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे से कभी भी ऐसी गलती नहीं करने की भी बात कही। अशोक सिद्धार्थ ने किसी के लिए सिफारिश नहीं करने का भी वादा किया। आखिर में उन्होंने मायावती से खुद को माफ करते हुए पार्टी में वापस लेने का आग्रह किया। अशोक सिद्धार्थ ने की पोस्ट अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि आगे अब गलती नहीं होगी। उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, "मैं अशोक सिद्धार्थ बीएसपी पूर्व सांसद निवासी जिला फर्रुखाबाद बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी की चार बार रहीं मुख्यमंत्री एवं कई बार लोकसभा व राज्यसभा की रहीं सांसद बहन मायावती जी का हृदय से सम्मान एवं चरण स्पर्श करता हूं और मुझसे पार्टी का कार्य करने के दौरान ‘जाने व अनजाने’ में तथा गलत लोगों के बहकावे में आकर जो भी गलतियां हुई हैं। तो उसके लिए मैं बहन जी से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं। जिन्होंने अनेकों कष्ट झेलकर, अपनी पूरी जिन्दगी, इस देश के करोड़ों दलितों एवं अन्य उपेक्षित वर्गों के हित व कल्याण के लिए समर्पित की है।  

बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर: CM यादव ने तुरंत भेजे 20 करोड़ रुपए

भोपाल मध्यप्रदेश की सरकार हर संकट में किसानों के साथ खड़ी है। इस स्पष्ट संदेश के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 6 सितंबर को अतिवृष्टि-बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों के लिए राहत राशि का वितरण किया। उन्होंने एक क्लिक के माध्यम से किसानों को 20 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। मध्यप्रदेश सरकार साल 2025-26 तक 188 करोड़ 52 लाख रुपये आपदा प्रभावित लोगों को ट्रांसफर कर चुकी है। प्रदेश सरकार का कहना है कि इन दिनों मौसम असंतुलित हो गया है। इसलिए सरकार किसानों की हर संभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार का मानना है कि किसानों की मुस्कान ही राज्य की ताकत है। गौरतलब है कि सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से कई जिलों के किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात की। उन्होंने किसानों से उनका हालचाल जाना और सरकार का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि किसानों के जीवन में मौसम की मार से परेशानी आई है। इस परेशानी का सरकार ने समाधान कर दिया है। खेतों में किसान और सीमा पर जवान दोनों आंधी-तूफान और कष्टों के बीच अपनी मौजूदगी से, मेहनत से, जान की बाजी लगाकर देश के लोगों की सेवा करते हैं। प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत ज्यादा बारिश हुई और कहीं-कहीं कम बारिश भी हुई। इस असंतुलन की कीमत हमें थोड़ी-थोड़ी चुकानी पड़ रही है। सरकार हर परेशानी में किसान के साथ है। हमारी सरकार बाढ़ के दौरान भी जनता के बीच गई। सरकार किसानों के हर संकट में साथ खड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को सरकार पर पूरा भरोसा सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज 11 जिलों के 12 हजार हेक्टेयर से ज्यादा बड़े क्षेत्र में 17500 भाई-बहनों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 20 करोड़ रुपये की राशि दे रहे हैं। किसान हमारी सरकार पर पूरा भरोसा करता है। किसानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है। उनके नेतृत्व में हमारी सरकार लगातार जनकल्याण के काम कर रही है। इससे पहले हमने 30 करोड़ की राहत राशि ट्रांसफर की थी। 2025-26 में अभी तक 188 करोड़ 52 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। मिलकर आपदा से मुकाबला करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं हर किसान को आश्वासन देना चाहता हूं कि संकट की घड़ी में हमारी सरकार सदैव आपके साथ खड़ी है। किसानों की मुस्कान ही मध्यप्रदेश की ताकत है। किसान अपनी मेहनत से एक फिर जीवन के मैदान में उतरेंगे। हमें आशा है कि अगली फसल इस नुकसान की भरपाई कर देगी। हम सब मिलकर इस आपदा से मुकाबला करेंगे। किसान कभी हार नहीं मानता, वह जीवटता के साथ आने वाले कल की तैयारी करता है। आइए हम सब मिलकर एक बार फिर कामना करें कि एक बार फिर धरती माता हमारे अन्न के भंडार भरेगी।

वन विहार में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध दिवस, हुए जागरूकता कार्यक्रम

गिद्ध संरक्षण पर हुई एक दिवसीय कार्यशाला भोपाल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इण्डिया, बीएनएचएस के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के अवसर पर विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन शनिवार को वन विहार स्थित विहार वीथिका में किया गया। इसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों की महत्त्वपूर्ण भूमिका और उनके संरक्षण की तात्कालिक आवश्यकता के बारे में आमजन को जागरूक करना था। अंर्तराष्ट्रीय गिद्ध दिवस प्रतिवर्ष माह सितम्बर के प्रथम शनिवार को मनाया जाता है। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में स्थित विहार वीथिका में अंर्तराष्ट्रीय 'गिद्ध दिवस' के अवसर पर 'गिद्ध संरक्षण एवं संर्वधन' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई, जिसमें 30 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। इसमें गिद्ध संरक्षण एवं संर्वधन विषय पर जानकारी के साथ गायों के उपचार में डायक्लोफेनिक दवा का उपयोग न करने एवं अन्य विषयों पर विषय-विशेषज्ञों द्वारा जानकारी उपलब्ध कराई गई। सहायक संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल डॉ. रूही हक द्वारा कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया। भोपाल बर्ड्स के मो. खालिक, डॉ. संगीता राजगीर तथा सहायक वन्‍यप्राणी चिकित्‍सक वन विहार डॉ. हमजा नदीम फारूकी ने प्रस्तुतिकरण के माध्‍यम से गिद्ध प्रजाति एवं उनके महत्व और पारिस्थितिकीय तंत्र में गिद्धों की महत्‍वपूर्ण भूमिका तथा गायों के उपचार में डायक्लोफेनिक दवा का उपयोग से होने वाली हानियों की जानकारी दी गई। सहायक संचालक द्वारा गिद्धों के संरक्षण के लिये प्रतिभागियों से चर्चा की। 'पन्नी से पक्षी' विषय पर होगी राज्य स्तरीय कला प्रतियोगिता कार्यक्रम में संरक्षण को सतत विकास से जोड़ने और गिद्धों के स्वास्थ्य के लिए प्लास्टिक प्रदूषण से खतरे पर प्रकाश डाला गया। वन विभाग द्वारा राज्य-स्तरीय कला प्रतियोगिता “पन्नी से पक्षी” की भी घोषणा की। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों और कलाकारों को प्लास्टिक कचरे से गिद्धों के मॉडल बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिन्हें वन्यप्राणी सप्ताह-2025 के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता कार्यशाला में विभिन्न महाविद्यालयों के स्नातक विद्यार्थियों के लिए पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसका विषय “गिद्धों की पारिस्थितिक सेवाएँ” था। “वल्चर्स ऑफ मध्यप्रदेश” शीर्षक से एक उपयोगी फील्ड गाइड का लोकार्पण भी किया गया, जो राज्यभर में कार्यरत वन अमले को गिद्ध प्रजातियों की पहचान और निगरानी में सहायता करेगी। वल्चर थीम पर ड्राइंग प्रतियोगिता इसी कड़ी में बीएनएचएस संस्‍था द्वारा वल्चर थीम पर स्कूली बच्चों के लिए ड्राइंग कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के विजेताओं (प्रथम, द्वितीय व तृतीय) को पुरूस्कृत किया गया। श्री सेमसंग, प्रबंधक, गिद्ध संवर्धन केन्द्र केरवा, भोपाल एवं श्री संकल्‍प किसनानी, भोपाल द्वारा वन विहार में भ्रमण करने आए पर्यटकों के साथ वल्‍चर थीम पर एक "ऑन द स्पॉट क्विज" का भी आयोजन किया गया जिसमें पर्यटकों से गिद्धों के सम्‍बन्‍ध प्रश्‍न पूछे गए जिन पर्यटकों ने सही उत्‍तर दिया उन्‍हें पुरूस्‍कृत भी किया गया। कार्यशाला में गिद्धों के संरक्षण एवं बचाव के बारे जानकारी देकर जागरूक किया। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री शुभरंजन सेन, मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक श्री आर. श्रीनिवास मूर्ति, पूर्व संचालक श्रीमती संगीता सक्‍सेना, डॉ. स्‍वाति मोघे, संचालक, डब्‍ल्‍यू.डब्‍ल्‍यू.एफ., भोपाल और सहायक संचालक वन विहार डॉ. रूही हक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मऊगंज को देंगे 241.33 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

मऊगंज में संयुक्त जिला कार्यालय भवन का करेंगे भूमिपूजन देवतालाब में होगा मुख्य कार्यक्रम, हितग्राही होंगे लाभान्वित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 सितम्बर को मऊगंज को 241.33 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे। इसमें प्रमुख रूप से मऊगंज के संयुक्त जिला कार्यालय भवन का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 37 करोड़ 50 लाख रूपये के 16 विकास कार्यों का लोकार्पण और 203 करोड़ 83 लाख रूपये के 6 विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मऊगंज प्रवास के दौरान बहुती प्रपात का अवलोकन करेंगे और देवतालाब में स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे। देवतालाब स्टेडियम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं में हितलाभ वितरण भी करेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, सांसद श्री जनार्दन मिश्र और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक श्री गिरीश गौतम भी संबोधित करेंगे।

चुनाव आयोग का ऐतिहासिक फैसला: पूरे देश में एक साथ लागू होगा ‘SIR’

पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले SIR को लेकर विवाद के बीच Election Commission ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके अनुसार यह प्रोसेस देशभर में एक साथ लागू किया जाएगा। आयोग ने इसे अंतिम रुप देने के लिए 10 सितंबर को दिल्ली में सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।   क्या है SIR? SIR यानी 'मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण'। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें चुनाव आयोग मतदाता सूचियों को अपडेट और सही करता है। इसका मकसद है कि देश में मतदाता सूची पूरी तरह से ठीक और विश्वसनीय हो। चुनाव आयोग ने कहा है कि यह कदम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत लिया जा रहा है, ताकि मतदाता सूचियों की अखंडता बनी रहे। बैठक में इन मुद्दों पर होगी चर्चा 10 सितंबर की बैठक में चुनाव आयोग मुख्य चुनाव अधिकारियों से 10 बिंदुओं पर जानकारी मांगेगा। इनमें मतदाताओं की मौजूदा संख्या, पिछली SIR की तारीख और डेटा और डिजिटलीकरण की स्थिति शामिल है। इसके अलावा मतदान केंद्रों की संख्या और उनकी व्यवस्था तथा अधिकारियों और BLO की नियुक्ति और प्रशिक्षण पर भी चर्चा होगी। आयोग ने भारतीय नागरिकों को इसमें शामिल करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों के बारे में भी सुझाव मांगे हैं।    बिहार में जारी है प्रक्रिया बिहार में SIR की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है और यह 30 सितंबर तक पूरी हो जाएगी। चुनाव आयोग ने अपने 24 जून के आदेश में ही यह संकेत दे दिया था कि यह प्रक्रिया पूरे देश में लागू की जाएगी, लेकिन बिहार में चुनाव होने की वजह से इसे वहां पहले शुरू किया गया।