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स्ट्रीट वेंडर्स के लिए बड़ी राहत, मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम तेज, 30 जून तक विशेष अभियान

भोपाल  सड़कों और फुटपाथों पर दुकान चलाकर अपनी आजीविका चलाने वाले छोटे कारोबारियों (पथ विक्रेताओं) को डिजीटल, वित्तीय और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 'प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि' (पीएम स्वनिधि) योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरे प्रदेश में 1 जून से 30 जून तक एक विशेष महा-अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जहां एक ओर जिला मुख्यालयों पर उत्सव का माहौल रहेगा, वहीं दूसरी ओर नगरीय निकायों में 'सेवाएं आपके द्वार' की तर्ज पर काम होगा। बताई जाएंगी प्रेरक कहानियां ना के सफल लाभार्थियों और उनके परिवारों की प्रेरक सफलता की कहानियों को साझा किया जाएगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले पथ विक्रेताओं को सम्मानित कर अन्य हितग्राहियों को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य योजना के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक पात्र लोगों को लाभ पहुंचाना है। प्रदेश में राज्य शासन, नगरीय निकायों और ऋणदाता संस्थाओं के सहयोग से अब तक 10 लाख से अधिक पथ विक्रेताओं को योजना का लाभ मिल चुका है। लोक कल्याण मेलों में मिलेगी वित्तीय और डिजिटल सहायता नगरीय निकाय स्तर पर आयोजित लोक कल्याण मेलों के माध्यम से पथ विक्रेताओं को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें- – बिना गारंटी के 15 हजार रुपये तक का ऋण – न्यूनतम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता – क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी – डिजिटल लेन-देन के लिए मार्गदर्शन – बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच जैसी सुविधाएं शामिल हैं। बैंकर्स-वेंडर्स बैठकें और शिकायतों का समाधान अभियान के दौरान बैंकर्स और पथ विक्रेताओं की विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे बैंकिंग सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो सके। वहीं नगरीय निकाय सहायता केंद्रों के माध्यम से वेंडर्स की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित निराकरण भी किया जाएगा। दूरस्थ क्षेत्रों में लगेंगे स्वनिधि कैंप सेंसस टाउन स्तर पर “स्वनिधि कैंप” आयोजित कर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पथ विक्रेताओं को योजना से जोड़ा जाएगा। विशेष शिविरों में नए और छूटे हुए पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उनका पंजीयन कराया जाएगा तथा ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र वेंडर योजना के लाभ से वंचित न रहे।  

Parimal Nathwani को हरी झंडी, झारखंड राज्यसभा चुनाव में मुकाबला हुआ और दिलचस्प

रांची  झारखंड राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को बड़ी राहत मिली है. उनके नामांकन पर कांग्रेस की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों पर बुधवार को हुई सुनवाई पूरी हो गई. रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नाथवानी की ओर से दिए गए जवाब को संतोषजनक माना और उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी दे दी।  दरअसल, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान नाथवानी के दस्तावेजों में कुछ बिंदुओं को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं. कांग्रेस ने उनके नामांकन की वैधता पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने मामले को सुनवाई के लिए रखा था. सुनवाई के दौरान नाथवानी की ओर से सभी आपत्तियों का बिंदुवार जवाब प्रस्तुत किया गया. इसके बाद निर्वाचन पदाधिकारी उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नजर आए।  बता दें, इस आपत्ति के बाद परिमल नाथवानी का नामांकन पहले होल्ड पर रखा गया था और इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज था. माना जा रहा था कि नाम और दस्तावेजों में कथित विसंगतियों को लेकर उनकी उम्मीदवारी पर संकट आ सकता है, लेकिन अब स्थिति साफ हो गई है।  झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए अब मुकाबला और रोचक हो गया है. चुनावी मैदान में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी, इंडिया गठबंधन के 2 उम्मीदवारों और अन्य दावेदारों के बीच राजनीतिक गणित पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. नाथवानी की एंट्री ने पहले ही चुनाव को दिलचस्प बना दिया था और अब उनका नामांकन वैध पाए जाने के बाद मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है। 

पारंपरिक खेती से आगे बढ़ रहे किसान, मालवा-निमाड़ में उद्यानिकी और नवाचार आधारित फसलों पर बढ़ा फोकस

मालवा-निमाड़ लंबे समय तक सोयाबीन और पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहे मालवा-निमाड़ में अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किसान आय बढ़ाने और जोखिम कम करने के लिए फल, सब्जी, औषधीय और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इंदौर संभाग की रबी 2025-26 समीक्षा और खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में सामने आए जिला-वार प्रस्तुतिकरणों से स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र में फसल विविधीकरण अब नीति और व्यवहार दोनों स्तरों पर गति पकड़ रहा है। कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम मूल्य वाली फसलों के बजाय अधिक मूल्य वाली फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इसका रकबा बढ़ाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही वैज्ञानिक खेती, नई तकनीकों और कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ रहे किसान आलीराजपुर : फलों और सब्जियों के नए क्लस्टर आलीराजपुर में आम, सीताफल और पपीता जैसी फल फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही भिंडी और टमाटर जैसी सब्जियों के उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिले में नए बागवानी क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक किसानों को उन्नत खेती और बेहतर बाजार से जोड़ा जा सके। झाबुआ : तरबूज से बनी नई पहचान झाबुआ ने तरबूज उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। बढ़ते उत्पादन और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। तरबूज अब जिले की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल हो चुका है। बड़वानी : केले से बढ़ रही समृद्धि बड़वानी में केले की खेती किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय बन गई है। यहां उत्पादित केले की मांग देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच रही है। इसके अलावा किसानों को मिलेट्स उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। खरगोन : सफेद मूसली बना आय का नया आधार खरगोन में सफेद मूसली जैसी औषधीय फसल किसानों की आय का नया स्रोत बनकर उभरी है। वहीं हाईब्रिड मक्का उत्पादन को आधुनिक कृषि नवाचार के रूप में अपनाया जा रहा है, जिससे उत्पादकता और आमदनी दोनों में वृद्धि हो रही है। खंडवा : चिया और कुसुम की बढ़ती खेती खंडवा में चिया, कोदो और कुटकी जैसी फसलों का रकबा बढ़ रहा है। बाजार में अच्छे दाम मिलने से किसानों का इन फसलों की ओर रुझान बढ़ा है। साथ ही कुसुम की खेती को बढ़ावा देकर फसल विविधीकरण को नई दिशा दी जा रही है। धार : ब्लूबेरी के साथ नए प्रयोग धार जिले में ब्लूबेरी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह फसल क्षेत्र में उच्च मूल्य वाली बागवानी के नए प्रयोग के रूप में उभर रही है और किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रही है। बुरहानपुर : ड्रिप सिंचाई से बढ़ा मुनाफा बुरहानपुर में ड्रिप सिंचाई तकनीक के माध्यम से केले की खेती को नई दिशा मिली है। पानी की बचत, बेहतर उत्पादन और कम लागत के कारण किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि दर्ज की जा रही है। सोयाबीन के विकल्पों पर बढ़ा जोर बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने सोयाबीन के विकल्प के रूप में अरहर पूसा-16 के उत्पादन को बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने खेतों में केवल बीटी कपास पर निर्भर रहने के बजाय कपास की अन्य प्रजातियों को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए, ताकि कीट प्रकोप की समस्या को कम किया जा सके। उन्होंने किसानों को जैविक खाद के उपयोग, मिट्टी परीक्षण और वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता बताई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को समय पर बीज और उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं तथा कृषि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। मालवा-निमाड़ में उभरता यह कृषि परिवर्तन संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पहचान केवल सोयाबीन उत्पादक क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि विविध और उच्च मूल्य वाली फसलों के केंद्र के रूप में भी स्थापित हो सकती है।  

लखनऊ के इकाना स्टेडियम की जांच के आदेश, LDA खंगालेगा निर्माण और रखरखाव से जुड़े सभी पहलू

 लखनऊ लखनऊ का इकाना स्टेडियम… वही मैदान जहां चौके-छक्कों की गूंज सुनाई देती है, जहां हजारों दर्शक मैच का रोमांच देखने पहुंचते हैं. लेकिन इस बार चर्चा क्रिकेट की नहीं, बल्कि जांच की हो रही है. कारण है- लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का एक फैसला।  एलडीए ने इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण, संचालन, रखरखाव और अनुबंध की शर्तों की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित कर दी है. यानी अब स्टेडियम में रिकॉर्ड और फाइलें खंगाली जाएंगी. एलडीए यह पता लगाना चाहता है कि स्टेडियम का संचालन उन शर्तों के मुताबिक हो रहा है या नहीं, जिनके आधार पर इसका अनुबंध किया गया था।  सवाल सिर्फ इमारत का नहीं है. जांच का दायरा काफी बड़ा रखा गया है. समिति यह देखेगी कि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार हुआ या नहीं. रखरखाव व्यवस्था कैसी है. अनुबंध की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं. स्टेडियम परिसर में विकसित खेल सुविधाएं और अन्य ढांचागत परियोजनाएं किस स्थिति में हैं. यानि सिर्फ पिच नहीं, पूरे सिस्टम का निरीक्षण  होगा।  एलडीए ने समिति को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे. इस रिपोर्ट में निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव की स्थिति और अनुबंध से जुड़े सभी पहलुओं का विस्तृत ब्योरा होगा. इसके बाद एलडीए रिपोर्ट की स्टडी करेगा और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।  फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है और किसी तरह की अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन अगर समिति की रिपोर्ट में किसी प्रकार की लापरवाही, निर्माण संबंधी कमी या अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन की बात सामने आती है, तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।  इकाना स्टेडियम सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों में गिना जाता है. यहां अंतरराष्ट्रीय मैचों से लेकर आईपीएल तक के बड़े मुकाबले आयोजित होते हैं. ऐसे में स्टेडियम की निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा और रखरखाव को लेकर किसी भी तरह की जांच स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

राज्य कांग्रेस को जल्द मिल सकता है नया अध्यक्ष, दावेदारों के नामों से बढ़ी सियासी हलचल

रायपुर  छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई हैं। दरअसल, वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है। ऐसे में पार्टी के भीतर नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति होनी तय है। कई बड़े नामों पर चर्चा हो रही हैं। इस बार किसे युवा चेहरे को मौका मिलने की आशंका जताई गई है। माना जा रहा है कि संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में यह कदम उठाया जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। जिसमें पूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत कई अन्य नाम चर्चा में है। खास बात यह है कि उमेश पटेल को संगठनात्मक अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलित चेहरा माना जाता है। जबकि विधायक देवेंद्र यादव को एक ऊर्जावान और जनाधार वाले युवा नेता के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा टीएस सिंहदेव भी इस रेस में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह सरगुजा, कोरबा और जांजगीर-चांपा जैसे क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहकर अपना राजनीतिक आधार मजबूत कर रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है। वहीं, मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज की दावेदारी को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है। आदिवासी समाज में उनकी मजबूत पकड़ और संगठन में सक्रिय भूमिका उनके पक्ष में मानी जा रही है। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पार्टी हाईकमान युवा और अनुभवी चेहरों के बीच संतुलन बनाते हुए जल्द ही बड़ा फैसला ले सकता है।

Monsoon Update: बिहार-झारखंड में जल्द होगी जोरदार बारिश, जानिए यूपी और दिल्ली में कब देगा दस्तक

भोपाल  मॉनसून ने 4 जून को केरल में दस्तक देने के बाद तेज रफ्तार बरकरार रखी है. वो अब तक 14 राज्यों के पार निकल गया है. भारत मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून अगले 3-4 दिनों में छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा पहुंच सकता है.दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल बने हुए हैं। अगले 3-4 दिनों में मॉनसून महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के बाकी हिस्सों, पश्चिम बंगाल के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगा।  बुधवार को भारत मौसम विभाग ने ये पूर्वानुमान जारी किया. अगले 5-7 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत और उप हिमालयी क्षेत्र पश्चिम बंगाल में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश (7-20 सेमी) होने की संभावना है. साथ ही केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी भारी बारिश हो सकती है।  मॉनसून दिल्ली-यूपी कब पहुंचेगा मॉनसून ने मंगलवार को सभी उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों को कवर कर लिया था.भारत मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मॉनसून पिछले सात दिनों में पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गोवा पहुंच चुका है. मॉनसून दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यो में 25 जून तक पहुंच सकता है. जबकि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड समेत पहाड़ी राज्यों में मॉनसून जून के अंत तक या जुलाई में पहुंच सकता है।  दिल्ली, यूपी में कल से झमाझम बारिश मॉनसून अभी भले ही उत्तर भारत न पहुंचा हो, लेकिन दिल्ली, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गुरुवार से दो दिन बारिश का अलर्ट है. मौसम विभाग का कहना है कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत वेस्ट यूपी, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड में गुरुवार से बारिश देखने को मिल सकती है. दिल्ली में बारिश के साथ गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं. इस दौरान तेज हवाएं भी चलेंगी।  दिल्ली एनसीआर में पिछले हफ्ते भी दो दिन तेज बारिश देखने को मिली थी. जबकि मंगलवार रात को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी आई थी. दिल्ली एनसीआर में 11-12 जून को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश का अलर्ट है।  केरल में ऑरेंज अलर्ट मॉनसून सीजन के पहले हफ्ते में केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और बंगाल के कुछ क्षेत्रों में जबरदस्त बारिश हो रही है. केरल के अलपुझा और एर्नाकुलम जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है. केरल के कोल्लम, पथनमिट्टा, कोट्टायम, त्रिशूर, मल्लपुरम, कोझिकोड और कन्नूर जैसे जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है।  तेलंगाना भी भारी बारिश तेलंगाना के विकाराबाद, महबूबनगर, नारायणपेट और जोगुलांबा गडवाल में भी भारी बारिश हो रही है. हालांकि मौसम विभाग ने इस साल मजबूत अल नीनो की भविष्यवाणी की है, जो मॉनसूनी बारिश के लिए खतरा साबित हो सकता है. बारिश में कमी से जून-जुलाई के दौरान तापमान दो डिग्री तक ज्यादा रह सकता है। 

ओरछा के हरदौल बैठका से जुड़ा है महेश केवट का परिवार, अब राज्यसभा उम्मीदवार बनकर चर्चा में

ओरछा  निवाड़ी जिले के ओरछा कस्बे के वार्ड नंबर 12 स्थित हरिशंकरी मुहल्ले में रहने वाले महेश केवट के राज्यसभा जाने का रास्ता लगभग साफ है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद यदि कांग्रेस को कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो महेश केवट मध्य प्रदेश से केवट, माझी, मल्लाह, रैकवार, भोई समाज के पहले राज्यसभा सांसद होंगे। पत्नी हार गई थी नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव महेश केवट 2000 से लेकर 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष भी रहे। महेश की पत्नी ने ओरछा नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। बीजेपी ने कर दिया था निष्कासित, 2022 के नगर परिषद ओरछ़ा के चुनाव में उस समय स्थानीय बीजेपी नेतृत्व ने महेश केवट पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों में उन्हें निष्कासित कर दिया था। महेश के साथ उन कार्यकर्ताओं को निष्कासित किया गया था जिन्होंने भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ा था। महेश के साथ करीब दर्जन भर भाजपाई और पार्टी से बाहर किए गए थे। लेकिन, महेश और निवाड़ी विधायक अनिल जैन ने भोपाल में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में महेश केवट के निष्कासन की फाइल निकलवाई तो यहां कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। महेश ने पार्टी को यह जानकारी दी कि उन्होंने और उनके परिवार के किसी सदस्य ने बागी होकर चुनाव नहीं लड़ा है। बल्कि सोशल मीडिया में कई ऐसे पत्र वायरल हुए जिनमें महेश के निष्कासन के आदेश में कुछ और नाम जोड़कर उन्हें भी बीजेपी से निष्कासित बताया गया। इसके बाद पार्टी ने अधिकारिक तौर पर 2023 में महेश के निष्कासन को समाप्त करने का आदेश तत्कालीन प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी की तरफ से जारी किया गया। हरदौल बैठका पर सेवा करता है परिवार महेश केवट के परिवार के सदस्य ओरछा के फूलबाग में स्थित हरदौल बैठका की सेवा करते हैं। लाला हरदौल बुन्देलखंड के लोकदेवता हैं। महेश के छोटे भाई हरदौल बैठका में आज भी नियमित सेवा कार्य करते हैं। महेश सीमेंट व्यवसायी हैं। ऐसे बीजेपी की नजर में आए महेश केवट हेमंत खंडेलवाल के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के संगठन और सरकार के विभिन्न बोर्ड, निगम मंडलों में नए ऐसे चेहरों को शामिल करने पर मंथन चल रहा था कि ऐसे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए जो अब तक किसी अहम जिम्मेदारी पर न रहे हों। यह भी तय हुआ कि उन जातियों में से नेताओं को छांटा जाए जिन वर्गों की राजनीतिक भागीदारी बहुत कम रही हो। ऐसे में मल्लाह, केवट, मांझी समाज से शिवपुरी भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजू बाथम और महेश केवट के नाम सामने आए। सीताराम बाथम पहले कई पदों पर रह चुके थे। ऐसे में महेश केवट को मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष के लिए चुना गया। जैसे ही महेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बने उसके तुरंत बाद उनके विरोधी भाजपाई एक्टिव हुए और उन्हें भाजपा से निष्कासित नेता बताते हुए उनके निष्कासन के आदेशों को सोशल मीडिया पर शेयर कराना शुरु कर दिया। इसके बाद भोपाल में एक दिन निवाड़ी भाजपा के नेताओं, विधायक, जिलाध्यक्ष सहित चुनिंदा पदाधिकारियों की भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष ने बैठक ली। इस बैठक में तत्कालीन जिलाध्यक्ष अखिलेश अयाची से कहा गया कि आप महेश के निष्कासन के मामले का पटाक्षेप कीजिए। सोशल मीडिया पर पूरी जानकारी विस्तार से लिखिए। उसके बाद तत्कालीन जिलाध्यक्ष ने अपने फेसबुक पर सिर्फ लेटर पोस्ट कर दिया। राज्यसभा के लिए कैसे चुने गए बीजेपी ने एमपी में बीजेपी के कब्जे वाली दो सीटों पर राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को घोषित किया। रजनीश को वीडी शर्मा की सिफारिश पर उम्मीदवार बताया गया। इसके बाद सीएम डॉ मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल ने यह तय किया कि उम्मीदवार सामाजिक जातिगत समीकरणों के हिसाब से उतारा जाएगा। कई नामों पर विचार-मंथन हुआ लेकिन, जब जीत के लिए जरूरी 58 विधायकों के आंकड़े को लेकर टेंशन दिखी तो तय किया गया कि ऐसे केंडिडेट को उतारा जाए जिसकी उम्मीदवारी मात्र से बड़ा संदेश जाए। यूपी चुनाव में महेश की भूमिका होगी अहम अगले साल फरवरी- मार्च में यूपी में विधानसभा के चुनाव होने हैं। चूंकि ओरछा तीन तरफ से एमपी-यूपी के बॉर्डर पर लगा हुआ है। बुन्देलखंड के मुख्य शहर झांसी की ओरछा से दूरी मात्र 15 किलोमीटर है। ओरछा में धार्मिक स्थल के साथ ही बडे़ होटल भी हैं। ऐसे में यूपी सरकार और राजनीतिक दलों की बैठकें और नेताओं का आना-जाना होता रहता है। यूपी की राजनीति में अकेले भाजपा ही नहीं, सपा बसपा में भी केवट निषाद समाज के नेता बडे़ पदों पर रहे हैं। ऐसे में अब महेश केवट का उपयोग पार्टी यूपी के चुनाव में करेगी। झांसी से लेकर पूरे गंगा किनारे केवट समाज में महेश भाजपा के प्रचारक के तौर पर काम करेंगे। यूपी में केवट समाज की राजनीतिक पकड़ समझिए सबसे पहले बीजेपी में निषाद समाज का दबदबा देखिए     डॉ संजय निषाद : निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, वर्तमान में योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।     साध्वी निरंजन ज्योति: फतेहपुर से लोकसभा सांसद और केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुकी हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष हैं।     जयप्रकाश निषाद: पूर्वांचल (गोरखपुर क्षेत्र) में भाजपा संगठन के बेहद मजबूत स्तंभ हैं। भाजपा में क्षेत्रीय स्तर पर विभिन्न दायित्वों को संभालने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (मत्स्य एवं पशुधन विभाग) के पद पर रह चुके हैं। वे बीजेपी के राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं।     बाबूराम निषाद : बाबूराम निषाद हमीरपुर से जिला अध्यक्ष, भाजयुमो क्षेत्रीय अध्यक्ष, भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष, बुंदेलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) रहने के बाद वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं।     भगवान दास निषाद: बुंदेलखंड और कानपुर क्षेत्र के पुराने भाजपा नेता हैं। पार्टी संगठन में विभिन्न जिला व क्षेत्रीय पदों पर रहने के साथ-साथ इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के तहत मत्स्य विकास बोर्ड का अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) बनाकर समाज के संगठनात्मक प्रतिनिधित्व को मजबूत किया गया था। अब सपा में समाज की हिस्सेदारी     रामभुआल निषाद: … Read more

उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार, योगी ने UPEIDA की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली

लखनऊ  ये बात तो पक्‍की है कि उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक के दौरान अगर किसी सरकारी एजेंसी ने राज्य की तस्वीर बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है तो वह है UPEIDA (Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority). आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट इसी ने जमीन पर उतारे हैं. अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने UPEIDA की कमान सीधे अपने हाथ में ले ली है. सीएम ने साफ संकेत दिया है कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे और औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं की गति और तेज की जाएगी. राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के फोकस के रूप में देखा जा रहा है।  क्या है UPEIDA? दरअसल, UPEIDA यानी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना राज्य में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और उनसे जुड़े विकास काममों के लिए की गई थी. इसका मुख्य मकसद केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि सड़क के किनारे उद्योग, निवेश, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और रोजगार के मौके भी विकसित करना भी है. यही वजह है कि यूपी में एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में देखा जाता है. ऐसे में यह भी जान लेना जरूरी है कि UPEIDA ने प्रदेश में कौन से सबसे बड़े प्रोजेक्ट डिलीवर किए हैं.. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 302 किमी उद्घाटन: 2016 इससे यात्रा समय में भारी कमी आई. पश्चिमी यूपी और राजधानी लखनऊ के बीच सीधी कनेक्टिविटी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 341 किमी लखनऊ से गाजीपुर तक बनाया गया है. लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये आई. पूर्वी यूपी को राजधानी क्षेत्र से जोड़ा. बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 296 किमी चित्रकूट से इटावा क्षेत्र तक कनेक्टिविटी अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये बुंदेलखंड क्षेत्र को NCR नेटवर्क से जोड़ने वाला अहम मार्ग है. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे लंबाई: लगभग 91 किमी गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ता है. इससे पूर्वी यूपी की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया. गंगा एक्सप्रेसवे लंबाई: 594 किमी मेरठ से प्रयागराज तक लागत लगभग 36,000 करोड़ से अधिक. यह राज्य का सबसे महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट है. यूपीडा अभी किन परियोजनाओं पर काम कर रहा है?     गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार और उससे जुड़े लिंक     आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेसवे     अलीगढ़-आगरा एक्सप्रेसवे     अलीगढ़-पलवल एक्सप्रेसवे     अवध एक्सप्रेसवे     चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे     कई औद्योगिक कॉरिडोर और ई-वे हब परियोजनाएं     इसके अलावा पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे ई-वे हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिन पर सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।      पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में एक्सप्रेसवे के बाद औद्योगिक निवेश और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।  सीएम योगी के कमान संभालने से क्या बदलेगा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की रेगुलर समीक्षा करते रहे हैं. हाल के महीनों में उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे समेत कई परियोजनाओं की वीकली मॉनिटरिंग और तय समयसीमा में काम पूरा करने पर जोर दिया है. वह कई बार मौकों पर निरीक्षण भी करने पहुंचे थे और मकसद साफ था कि ये इन अहम प्रोजेक्‍ट्स में भी किसी भी तरह का डिले नहीं चाहते. सीएम के UPEIDA की सीधी निगरानी में आने से भूमि अधिग्रहण में आने वाली दिक्‍कतें पहली बात तो तेजी से दूर हो सकती हैं. साथ ही विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा. खास बात ये भी है कि इसकी वित्तीय मंजूरियों में भी तेजी आएगी. परियोजनाओं की समयसीमा पर सख्ती बढ़ेगी और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कई बड़े प्रोजेक्ट धरातल पर दिखाई दे सकते हैं।  2027 चुनाव से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर होगा सबसे बड़ा मुद्दा? देखा जाए तो यूपी की राजनीति में एक्सप्रेसवे अब सिर्फ सड़क नहीं बल्कि विकास का भी हैं. भाजपा सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गंगा एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और नए लिंक एक्सप्रेसवे को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहेगी. यही वजह है कि UPEIDA की कमान पर मुख्यमंत्री की सीधी नजर को केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि विकास और राजनीति दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 

2017 से पहले बिजली के लिए तरसते थे ग्रामीण, अब मिल रही 22 घंटे से अधिक आपूर्ति

लखनऊ  कभी बिजली संकट, अघोषित कटौती और खस्ताहाल व्यवस्था के लिए चर्चित रहने वाला उत्तर प्रदेश आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बिजली उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। वर्ष 2014 से 2017 के बीच प्रदेश में बिजली व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से जूझ रही थी। उस समय बिजली दरों में 60 प्रतिशत तक की वृद्धि होने के बावजूद उपभोक्ताओं को मांग के अनुरूप बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक लंबे समय तक बिजली कटौती आम बात थी लेकिन, आज शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 22.30 घंटे बिजली दी जा रही है।  वर्ष 2017 में प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधारों की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने, वितरण व्यवस्था में सुधार और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए गए। परिणामस्वरूप आज उत्तर प्रदेश बिजली आपूर्ति के नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है। बिजली आपूर्ति में यूपी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-15 में प्रदेश में अधिकतम 13,003 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इसी तरह वर्ष 2015-16 में 14,503 मेगावाट और वर्ष 2016-17 में 16,110 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। उस समय बढ़ती मांग के मुकाबले आपूर्ति काफी कम थी, जिससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था लेकिन वर्ष 2017 के बाद बिजली क्षेत्र में हुए सुधारों का असर साफ तौर से दिखाई देने लगा था। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश बिजली आपूर्ति के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है।  इस साल मई महीने में 31,824 मेगावाट रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति की गई वर्ष 2024-25 में प्रदेश ने 30,618 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग पूरी की थी। इसके बाद वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 31,486 मेगावाट तक पहुंच गया था। वहीं वर्ष 2026-27 में मई महीने प्रदेश ने 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग को पूरा कर नया इतिहास रच दिया है। यह उत्तर प्रदेश के इतिहास में अब तक की सर्वाधिक बिजली आपूर्ति मानी जा रही है। वहीं भीषण गर्मी के इस दौर में जब प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है और बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है, तब भी सरकार उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में सफल रही है।  योगी सरकार में रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही योगी सरकार द्वारा निर्धारित बिजली आपूर्ति शिड्यूल के अनुसार जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 21.30 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है। हालांकि वर्तमान में बढ़ी हुई मांग और भीषण गर्मी को देखते हुए सरकार निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली उपलब्ध करा रही है। इस समय जिला मुख्यालयों, महानगरों और तहसील क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 22.30 घंटे तक लगातार बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। यह स्थिति प्रदेश की बिजली व्यवस्था में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है। 2017 से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 11 घंटे होती थी बिजली आपूर्ति वहीं वर्ष 2014 से 2017 के दौर की तुलना की जाए तो उस समय जनपद मुख्यालयों पर औसतन 17 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर लगभग 12 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 11 घंटे बिजली आपूर्ति हो पाती थी। लगातार कटौती और कम आपूर्ति के कारण आम जनता, किसान, व्यापारी और उद्योग सभी प्रभावित होते थे लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बिना कटौती के बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मार्च 2014 में थी 4839 मेगावाट उत्पादन क्षमता बिजली उत्पादन क्षमता के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। 31 मार्च 2014 को प्रदेश की उत्पादन क्षमता 4,839 मेगावाट थी। वर्ष 2017 में प्रदेश का अधिकतम तापीय विद्युत उत्पादन 5,160 मेगावाट दर्ज किया गया था। योगी सरकार के कार्यकाल में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किये गए, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि देखने को मिली। 31 मार्च 2019 तक उत्पादन क्षमता बढ़कर 5,474 मेगावाट हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2022 में यह आंकड़ा 6,134 मेगावाट तक पहुंच गया था। उत्पादन क्षमता 31 मार्च 2026 तक 9120 मेगावाट पहुंची वर्ष 2024 में उत्पादन क्षमता 7,140 मेगावाट, वर्ष 2025 में यह बढ़कर 7,800 मेगावाट हो गई थी। 31 मार्च 2026 तक प्रदेश की कुल उत्पादन क्षमता 9,120 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। जोकि वर्ष 2014 की तुलना में लगभग दोगुनी क्षमता है। सरकार उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। इस तरह योगी सरकार के कार्यकला में ऊर्जा क्षेत्र में हुए इन सुधारों का लाभ आम जनता, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को समान रूप से मिल रहा है। यही कारण है कि आज उत्तर प्रदेश बिजली संकट से निकलकर ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करता दिखाई दे रहा है।  बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रयास जारी यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य किया गया है, जिसका परिणाम है कि आज भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली मांग के बावजूद प्रदेश के सभी क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। वर्तमान समय में जिला मुख्यालयों, महानगरों और तहसील क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 22.30 घंटे तक बिजली उपलब्ध कराई जा रही है साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

योगी सरकार के पर्यटन विभाग की परियोजना से अयोध्या की सुंदरता और पहचान को मिला विस्तार

अयोध्या  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी पहल से अयोध्या को नित नई पहचान मिल रही है। इसी क्रम में अयोध्या-लखनऊ मार्ग पर स्थित फिरोजपुर गांव के पास 20.20 करोड़ रुपये की लागत से भव्य गेट कॉम्प्लेक्स व बाउंड्रीवॉल का निर्माण कर लिया गया है। यह परियोजना अब अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए स्वागत द्वार बन गई है। अयोध्या लखनऊ हाईवे पर रोड दोनों तरफ दो भव्य प्रवेश द्वार अब मार्ग को नया स्वरूप प्रदान कर रहे हैं।       मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या को विश्व स्तर का पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में यह एक और महत्वपूर्ण कदम है। राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है। इस गेट कॉम्प्लेक्स से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक प्रथमदृष्टया ही भव्यता का अनुभव करेंगे। पर्यटन विभाग के इस प्रोजेक्ट ने अयोध्या की सुंदरता और पहचान को और विस्तार दिया है। अब अयोध्या न केवल धार्मिक नगरी है बल्कि आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित शहर के रूप में भी उभर रहा है। स्थानीय लोगों में भी इस विकास कार्य को लेकर उत्साह है। हस्तांतरण की चल रही प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (निर्माण इकाई, अयोध्या) द्वारा पूरा किया गया। कार्य की शुरुआत 1 नवंबर 2023 को हुई थी और निर्धारित समय से पहले 28 फरवरी 2026 को इसे पूर्ण कर लिया गया। वर्तमान में कार्य पूर्ण होने के बाद हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। निर्माण में दिखा भारतीय वास्तुकला का अद्भुत संगम गेट कॉम्प्लेक्स में दो भव्य गेट बनाए गए हैं जो पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और आधुनिक सुविधाओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। इन गेट्स के साथ-साथ रोड निर्माण, पार्किंग व्यवस्था, सीवर लाइन, ड्रेनेज सिस्टम, सिंचाई लाइन रेनवाटर हार्वेस्टिंग, फायर फाइटिंग सिस्टम और इंटरनल इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य भी पूरा हो चुका है। यह गेट कॉम्प्लेक्स अयोध्या की सांस्कृतिक गरिमा को बढ़ाते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। प्रवेश द्वार परिसर में हरित क्षेत्र, सुव्यवस्थित पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा गया है। बाउंड्रीवॉल ने पूरे परिसर को सुरक्षित घेरा प्रदान किया है। इस परियोजना से अयोध्या-लखनऊ मार्ग अब न केवल सुंदर दिख रहा है बल्कि यातायात और पर्यटन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। जल्द उद्घाटन होने की संभावना यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि गेट कॉम्प्लेक्स में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, फायर फाइटिंग और पर्याप्त विद्युतीकरण जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे परिसर पर्यावरण अनुकूल और सुरक्षित बन गया है। मार्ग पर यात्रा करने वाले वाहनों के लिए बेहतर पार्किंग व्यवस्था और स्वच्छता का ध्यान रखा गया है। यह परियोजना रामनगरी अयोध्या के प्रवेश मार्ग को भव्य बनाने के साथ-साथ पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने वाली साबित होगी। गेट कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन शीघ्र होने की संभावना है, जिसके बाद यह श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय व्यापार, होटल और परिवहन क्षेत्र को फायदा होगा।