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‘स्वयं से साक्षात्कार’ कार्यशाला में विशेषज्ञों ने पंचकोश, षट्चक्र एवं आभामंडल की अवधारणाओं पर दी जानकारी

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग एवं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्वयं से साक्षात्कार’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में स्वामी महेश एवं डॉ. अनिल गुप्ता ने भारतीय परंपरा में वर्णित ऊर्जा, चेतना एवं आभामंडल की अवधारणाओं को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के संदर्भ में समझाया। कार्यशाला में आयोग के सदस्य श्री विवेक गनोदवाले, सचिव श्री सूर्यप्रकाश शुक्ला तथा पावर कंपनीज़ के प्रबंध निदेशक श्री एस.के. कटियार, श्री राजेश कुमार शुक्ला एवं श्री भीम सिंह कंवर विशेष रूप से उपस्थित थे। स्वामी महेश ने भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित अपरा विद्या और परा विद्या की जानकारी देते हुए कहा कि अपरा विद्या वह है, जिसे इंद्रियों के माध्यम से देखकर, पढ़कर और समझकर जाना जा सकता है, जबकि परा विद्या का संबंध सूक्ष्म एवं आंतरिक अनुभूति से है। उन्होंने बताया कि आत्मा और मन के माध्यम से शरीर की तंत्रिका प्रणाली तथा इंद्रियों के बीच समन्वय स्थापित होता है। उन्होंने मानव शरीर में वर्णित पंचकोश—अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष और आनंदमय कोष की अवधारणा को भी विस्तार से समझाया। डॉ. अनिल गुप्ता ने मानव शरीर में ऊर्जा के संचार तथा षट्चक्र की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का अपना आभामंडल होता है। आंतरिक ऊर्जा एवं चेतना को विकसित करने की भारतीय परंपरा में चर्चा की गई है। कार्यक्रम का संचालन उपमहाप्रबंधक (जनसंपर्क) श्री गोविन्द पटेल ने किया। आयोग की संयुक्त निदेशक श्रीमती प्राची श्रीवास्तव ने अतिथियों का परिचय दिया।  

रांची में करमा पर्व की तैयारी पूरी, 298 सरना स्थलों पर सफाई-रोशनी से लेकर पानी तक का इंतजाम

रांची  करम पर्व को लेकर रांची नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शहर के 53 वार्डों में चिन्हित 298 सरना स्थलों और अखड़ों में श्रद्धालुओं को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। पर्व के दौरान साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी, पेयजल, सड़क और नाली की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने शनिवार को निगम के पदाधिकारियों के साथ विभिन्न सरना स्थलों और अखड़ों का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें नगर आयुक्त ने सहजानंद चौक स्थित देशवाली सरना-सह-अखड़ा, सरना टोली, हातमा बस्ती, रांची कालेज छात्रावास और करमटोली चौक स्थित सरना स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पूजा समितियों के प्रतिनिधियों से भी आवश्यक जानकारी और सुझाव लिए। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि करमा पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के साथ लगातार निगरानी भी की जाए। सभी 298 स्थलों पर चलेगा विशेष सफाई अभियान नगर निगम की ओर से सभी सरना स्थलों और अखड़ों के परिसर के साथ वहां तक पहुंचने वाले संपर्क मार्गों की विशेष सफाई कराई जाएगी। झाड़ू लगाने के साथ घास की कटाई और आवश्यकता के अनुसार ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाएगा। वार्ड सुपरवाइजर और सफाईकर्मियों को नियमित रूप से स्थलों का निरीक्षण करने तथा पूजा समितियों के संपर्क में रहने का निर्देश दिया गया है। खराब स्ट्रीट लाइटें होंगी दुरुस्त करमा पर्व के दौरान रात में होने वाले कार्यक्रमों को देखते हुए सरना स्थलों और अखड़ों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाएगी। निगम की विद्युत शाखा को सभी स्थलों की स्ट्रीट लाइटों की जांच करने का निर्देश दिया गया है। संपर्क मार्गों पर खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराया जाएगा। इसके बाद भी नियमित रूप से प्रकाश व्यवस्था की निगरानी करने को कहा गया है। खुले नालों पर लगेंगे स्लैब श्रद्धालुओं के आवागमन को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरत के अनुसार सरना स्थलों के आसपास पेवर ब्लॉक, स्टोन डस्ट और जेएसबी से समतलीकरण कराया जाएगा। खुले नालों पर स्लैब लगाने की भी व्यवस्था की जाएगी। निगम के अभियंत्रण शाखा को स्थल की जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। पेयजल के लिए वाटर टैंकर की व्यवस्था पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए जरूरत वाले सरना स्थलों और अखड़ों में नगर निगम की ओर से वाटर टैंकर उपलब्ध कराए जाएंगे। जलापूर्ति शाखा को संबंधित पूजा समितियों से समन्वय कर आवश्यकता के अनुसार टैंकर भेजने का निर्देश दिया गया है। सूखी डालियों की होगी छंटाई श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरना स्थलों और अखड़ों में सूखे पेड़ों तथा लटकती डालियों की छंटाई भी कराई जाएगी। हॉर्टिकल्चर शाखा को आवश्यकतानुसार पौधारोपण और परिसर को व्यवस्थित करने का निर्देश दिया गया है। पूजा समितियों से समन्वय पर जोर नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि करमा झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और सामुदायिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। निगम का प्रयास है कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण के साथ सभी जरूरी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने अधिकारियों को पूजा समितियों से लगातार समन्वय बनाकर उनकी जरूरत और सुझाव के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी तरह की समस्या या आवश्यकता होने पर निगम के 24 घंटे सक्रिय कनेक्ट सेंटर 1800 5701235 पर सूचना दी जा सकती है।

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदलेगी तस्वीर, 472 स्कूलों पर खर्च होंगे ₹401 करोड़

बीकानेर/पाली पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की आहट के बीच सरकारी स्कूलों की बदहाली का मुद्दा आखिरकार सरकार के महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल हो गया है। गत वर्ष झालावाड़ में स्कूल भवन गिरने से सात बच्चों की मां की मौत के बाद हाईकोर्ट की सख्ती और सरकार को फटकार लगाने के बाद सरकार ने 472 स्कूलों के कायाकल्प के लिए 401 करोड़ 3 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। यह स्वीकृति ऐसे समय में आई है, जब राज्य में पंचायती राज चुनाव की तैयारियां तेज हैं। पिछले दिनों काकरोच जनता पार्टी ने भी विद्यालयों की बदहाली का मुद्दा उठाया था। राजस्थान पत्रिका ने यह मुद्दा लगातार उठाया। नाबार्ड की आरआईडीएफ योजना के तहत भवन निर्माण एवं पुनर्निर्माण के लिए यह प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई है। खास बात यह है कि स्वीकृत राशि में भवन निर्माण के साथ स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशाला, फर्नीचर, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं का प्रावधान भी किया गया है। स्वीकृति में विद्यालयों की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है। आदिवासी-ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल भी दायरे में स्वीकृत विद्यालयों में प्रदेश के कई दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्र शामिल है। उदयपुर और बांसवाड़ा के कोटड़ा, गोगुंदा, झाड़ोल, छोटी सरवन, कुशलगढ़ और आनंदपुरी जैसे क्षेत्रों के विद्यालयों में भवन निर्माण कार्य किए जाएंगे। झालावाड़ जिले के अकलेरा, खानपुर, मनोहरथाना और बारां के छबड़ा और किशनगंज क्षेत्र के विद्यालय भी शामिल है। जयपुर, अलवर और खैरथल-तिजारा क्षेत्र के चाकसू, सांगानेर, कठूमर, तिजारा और राजगढ़ सहित क्षेत्रों के विद्यालयों को भी योजना में शामिल किया गया है। 41 जिले, 12,500 करोड़ की कार्ययोजना राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक 12,500 करोड़ रुपए खर्च कर सरकारी स्कूलों को सुरक्षित, आधुनिक और डिजिटल बनाने की योजना तैयार की है। प्रदेश के 41 जिलों में सरकारी स्कूल भवनों का तकनीकी सर्वे कराया गया। सर्वे में सामने आई जरूरतों के आधार पर तीन साल की कार्ययोजना तैयार की गई है। जिलेवार स्कूल और राशि की सारणी (राशि करोड़ रुपए में) क्र.    जिला    स्कूल    राशि 1    अजमेर    03    3.84 2    अलवर    11    20.38 3    बांसवाड़ा    33    14.01 4    बारां    27    26.25 5    बाड़मेर    03    1.71 6    ब्यावर    06    4.83 7    भरतपुर    02    1.06 8    बीकानेर    06    10.98 9    बूंदी    12    8.73 10    चित्तौड़गढ़    02    1.30 11    चूरू    05    10.57 12    दौसा    12    20.79 13    डूंगरपुर    06    9.09 14    धौलपुर    08    6.37 15    डीडवाना-कुचामन    08    18.43 16    हनुमानगढ़    05    6.31 17    जयपुर    10    7.67 18    जालौर    03    1.95 19    झालावाड़    84    55.86 20    झुंझुनूं    09    15.06 21    जोधपुर    01    2.54 22    करौली    06    3.18 23    खैरथल-तिजारा    09    12.45 24    कोटा    03    1.95 25    प्रतापगढ़    10    4.82 26    सवाई माधोपुर    39    23.13 27    सीकर    06    12.70 28    सिरोही    12    5.64 29    श्रीगंगानगर    08    5.89 30    टोंक    04    5.90 31    उदयपुर    113    71.92 32    सलूंबर    01    0.41

देवप्रयाग के मेधावी छात्रों ने किया गोमती बुक फेस्टिवल का भ्रमण, मिली ‘एग्जाम वॉरियर्स’ पुस्तक

लखनऊ  भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड के देवप्रयाग से लखनऊ आए मेधावी विद्यार्थियों ने शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित गोमती बुक फेस्टिवल का भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखित पुस्तक 'एग्जाम वॉरियर्स' भेंट की गई। पुस्तक मेले में छात्रों ने विभिन्न पुस्तकों और साहित्यिक गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इससे पहले इन मेधावी विद्यार्थियों ने सीएम आवास पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों से परिचय प्राप्त कर उनका लखनऊ में स्वागत किया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि उत्तराखंड से आए इन विद्यार्थियों को गोमती बुक फेस्टिवल का भ्रमण कराया जाए और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक 'एग्जाम वॉरियर्स' उपलब्ध कराई जाए। इसी क्रम में अधिकारियों ने विद्यार्थियों को पुस्तक मेले का भ्रमण कराया और सभी बच्चों को यह पुस्तक भेंट की।

पश्चिम मध्यप्रदेश में PM सूर्यघर योजना का लाभ, 74 हजार उपभोक्ताओं को मिली मदद

पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से पश्चिम मप्र में अब तक 74 हजार उपभोक्ता लाभान्वित केंद्र शासन की ओर से प्रति उपभोक्ता 78 हजार रूपए तक की सब्सिडी अब तक मालवा निमाड़ में 505 करोड़ रूपए सब्सिडी वितरित भोपाल  मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी प्रधानमंत्री सूर्य़घर मुफ्त बिजली योजना का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। अब तक 74 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं। पात्र उपभोक्ता को 78 हजार रूपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इन उपभोक्ताओं को प्रतिमाह तीन सौ यूनिट बिजली प्राप्त हो रही है। यह एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए काफी है। पीएम सूर्य़घर मुफ्त बिजली योजना में अब तक करीब 505 करोड़ रूपए की सब्सिडी राशि उपभोक्ताओं के बैंक खातों में केंद्र नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के माध्यम से जमा हो चुकी हैं। सब्सिडी आने का क्रम सतत जारी है। कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के निर्देश पर सौर ऊर्जा प्रकरण तेजी से मंजूर किए जा रहे हैं। इसी वजह से मालवा निमाड़ में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना लागू होने के बाद रूफ टॉप सोलर संयंत्रों की संख्या पांच गुना से ज्यादा हो चुकी है। वर्तमान में सौर ऊर्जा अपनाने वालों की कुल संख्या 91 हजार के पार एवं ऊर्जा उत्पादन क्षमता 525 मेगावाट से अधिक हो चुकी हैं, इसमें से 74 हजार से ज्यादा लाभान्वित उपभोक्ता पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। मालवा निमाड़ में अपने परिसर में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने वालों की कुल संख्या जल्दी ही एक लाख पहुंचने की उम्मीद है। पीएम सूर्य़घर मुफ्त बिजली योजना में सबसे ज्यादा 29 हजार उपभोक्ता इंदौर शहर के जुड़े हैं, जबकि इंदौर जिले के कुल 33 हजार उपभोक्ता पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े चुके हैं। सभी योजनाओं को मिलाकर इंदौर जिले में कुल 41 हजार परिसरों में सौर ऊर्जा उत्पादन हो रहा है। यह मप्र के सभी जिलों की तुलना में काफी ज्य़ादा हैं। पीएम सूर्य़घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत घरों पर सोलर पैनल्स लगाने के लिए एक किलो वाट के संयंत्र पर 30 हजार, दूसरे किलो वाट पर 30 हजार, तीसरे किलो वाट संयंत्र पर 18 हजार , इस तरह तीन किलो वाट के सोलर संयंत्र स्थापित करने पर अधिकतम 78 हजार रूपए की सब्सिडी केंद्र शासन के माध्यम से उपभोक्ता को सीधे डीबीटी से प्राप्त होती हैं। इंदौर के बाद सौर ऊर्जा के संबंध में कंपनी स्तर पर दूसरा स्थान उज्जैन जिले के 8400 परिसरों का हैं। इसके बाद तीसरा स्थान रतलाम जिले का 7800 व चौथा स्थान मंदसौर जिले का 5500, पांचवां स्थान देवास जिला 5000 स्थानों पर सोलर पैनल्स वाला जिला है। विशेष प्रकोष्ठ कार्यरत कंपनी स्तर पर सौर ऊर्जा प्रकरणों के जल्दी से मंजूरी एवं सब्सिडी समय पर दिलाने के लिए प्रकोष्ठ कार्यरत है, इसमें अतिरिक्त मुख्य अभियंता स्तर के प्रभारी कार्यरत हैं। साथ ही प्रत्येक जिले में अधीक्षण यंत्री पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना समेत सौर ऊर्जा से जुड़ी समस्त य़ोजनाओं के क्रिय़ान्वयन की सतत समीक्षा करते हैं।  

बिहार में उद्योगों की नई लहर! 5 साल में 10 हजार यूनिट लगाने का लक्ष्य, युवाओं को मिलेगा रोजगार

पटना बिहार में 5 साल में दस हजार उद्योग स्थापित होंगे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में औद्योगिक माहौल तैयार हो चुका है और अब तक करीब एक हजार उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। अगले पांच वर्षों में 10 हजार उद्योगों को बिहार की धरती पर स्थापित करने का लक्ष्य है। सीएम ने शनिवार को तारामंडल में सेवा संकल्प अभियान के तहत राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज कार्यक्रमका शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नेशनल इनोवेशन चैलेंज पोर्टल का लोकार्पण किया। साथ ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी कार रैली के तहत 25 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि बिहार के बाहर यहां के 12 लाख लोग मजदूरी करने के लिये जा रहे हैं। हमलोगों का लक्ष्य है कि बिहार के बाहर कोई मजदूरी करने न जाय, इसके लिये उद्योगों और उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हमारे युवा उद्यमी नये स्टार्टअप के साथ बिहार की दिशा बदल सकते हैं। राज्य सरकार उनके प्रयासों को हरसंभव सहयोग देगी। बिहार टेक पोर्टल फॉर इनोवेशन इन आईटी सेक्टर के माध्यम से आईटी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण विकास का महत्वपूर्ण आधार है। हमलोगों ने एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। युवा ऊर्जा, तकनीकी क्षमता और उद्यमशीलता को जोड़कर राज्य को तेज विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, मंत्री नंद किशोर राम, सांसद डॉ. संजय जायसवाल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज की प्रदेश संयोजक डॉ. अमृता भूषण राठौर की उपस्थिति रही। युवा शक्ति के दम पर बिहार को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की विकास यात्रा में सेवा, नवाचार, तकनीक और उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य की युवा शक्ति और बड़ी आबादी को चुनौती नहीं, बल्कि विकास की ताकत बनाकर बिहार को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। वर्ष 2047 में विकसित भारत के संकल्प को हम सभी को मिलकर पूरा करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सेवाकाल के 25 वर्ष पूरे होने पर उन्हें बधाई और शुभकामनायें देता हूं। उनकी कल्पना और नवाचार के प्रति उनकी दृष्टि हम सभी को प्रेरित करता है। हमलोगों की सरकार इन्हीं उद्देश्यों के साथ आगे बढ़ रही है।

योगी सरकार का बड़ा रोजगार प्लान, पुलिस-होमगार्ड समेत 1 लाख से अधिक भर्तियों की तैयारी

 लखनऊ आगामी छह माह में एक लाख से अधिक सरकारी नौकरियों के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए प्रदेश सरकार ने नियुक्तियों का सिलसिला शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न विभागों में चयनित 818 अभ्यर्थियों को शनिवार को नियुक्ति पत्र बांटते हुए सपा पर प्रहार किया। यह कहते हुए कि ‘वह गिनते जाएं, हम नियुक्ति पत्र बांटते जाएंगे। हम छह महीने में एक लाख से अधिक नौजवानों को नियुक्ति देंगे।’ बताया कि रविवार को भी करीब एक हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलेंगे। अगले छह माह में पुलिस, होमगार्ड और विभिन्न भर्ती आयोगों की चयन प्रक्रियाएं पूरी होने के साथ नियुक्तियां जारी रहेंगी। लोकभवन में आयोजित समारोह में नियुक्ति पत्र पाने वालों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के 357 एक्सरे टेक्नीशियन, आयुष विभाग के 404, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के 48 अनुदेशक और उद्योग निदेशालय के नौ सहायक सांख्यिकीय अधिकारी शामिल थे। मिशन रोजगार के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस में 36 हजार से अधिक और होमगार्ड में 41-42 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इन भर्तियों में मेडिकल और शारीरिक दक्षता परीक्षण की प्रक्रिया जारी है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से अगले छह माह में 25 से 30 हजार, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से 20 से 25 हजार और लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के बाद 15-16 हजार युवाओं को नियुक्ति मिलने की उम्मीद है। शिक्षा सेवा चयन आयोग के परिणाम तीन-चार माह में आने की संभावना है। इनमें से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अभी परीक्षा, परिणाम या चयन की प्रक्रिया में हैं। प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। प्रदेश में अब तक करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। विज्ञापन जारी होने से लेकर नियुक्ति पत्र वितरण तक पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने ग्रुप-3 और ग्रुप-4 की भर्तियों में साक्षात्कार समाप्त किए जाने का भी उल्लेख किया। 2017 से पहले की सरकारों पर भर्ती प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि कभी विज्ञापन जारी होते ही वसूली का तंत्र सक्रिय हो जाता था और ऐसे लोगों को भी नियुक्ति पत्र मिल जाते थे, जिन्होंने आवेदन तक नहीं किया था। आवेदन करने वाले अभ्यर्थी देखते रह जाते थे। आज वही लोग उपदेश दे रहे हैं, लेकिन 2027 के बाद वे उपदेश देने की स्थिति में भी नहीं रहेंगे। मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में एक अयोग्य व्यक्ति को अध्यक्ष बनाए जाने का भी आरोप लगाया। कहा कि भर्ती व्यवस्था के खिलाफ युवाओं को न्यायालय और सड़क तक संघर्ष करना पड़ा। 2017 से पहले प्रदेश में करीब 120 स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी संख्या 24 हजार से अधिक हो गई है। ये स्टार्टअप हजारों करोड़ रुपये का कारोबार कर रहे हैं। 25 से 29 सितंबर तक गौतमबुद्धनगर में होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण का भी उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें 650 विदेशी खरीदार और 2500 से अधिक प्रदर्शक शामिल होंगे। कार्यक्रम में आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, एमएसएमई राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे। नियुक्ति पत्र पाने वाले कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि निष्पक्ष व पारदर्शी भर्ती से सरकारी नौकरी का सपना पूरा हुआ। मिशन एक लाख का हिसाब घोषित लक्ष्य छह माह में एक लाख से अधिक नियुक्तियां शनिवार को नियुक्ति पत्र वितरण, 818 रविवार को मिलने वाले नियुक्ति पत्र, करीब 1,000 अलग से भर्ती प्रक्रिया में बताए गए पद, पुलिस 36 हजार, होमगार्ड 41-42 हजार यूपीएसएसएससी से संभावित अवसर, 25-30 हजार शिक्षा चयन आयोग के जरिये संभावित भर्तियां, 20-25 हजार यूपीपीएससी के माध्यम से संभावित नियुक्तियां, 15-16 हजार सरकार के अनुसार 2017 के बाद अब तक कुल सरकारी नियुक्तियां, 9.50 लाख

सोलर पैनल से घटा बिजली बिल, किसान नेतराम को हर माह ₹2,000 की बचत

सौर ऊर्जा से रोशन हुआ किसान नेतराम का घर, पीएम सूर्य घर योजना से हर माह 2000 रुपए की बचत  खेती-किसानी को मिला नया बल ​रायपुर        प्रदेश में 'सेवा संकल्प अभियान' के माध्यम से जन-कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से न केवल आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है। ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम गोबरसिंहा निवासी किसान नेतराम पटेल का है, जिनके जीवन में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' आर्थिक संबल बनकर उभरी है। ​बिजली के भारी-भरकम बिल से मुक्ति       ​योजना का लाभ लेने से पहले नेतराम पटेल के घर का मासिक बिजली बिल करीब 2,200 से 2,300 रुपए तक आता था, जो उनके बजट पर एक बड़ा वित्तीय बोझ था। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत छत पर सौर पैनल (रूफटॉप सोलर सिस्टम) स्थापित होने के बाद अब उनका मासिक बिजली बिल घटकर मात्र 250 से 300 रुपए रह गया है। ​बचत की राशि से कृषि कार्यों में मिला संबल        ​सोलर पैनल के माध्यम से बिजली की जरूरतें घर पर ही पूरी होने से नेतराम को हर महीने लगभग 2,000  रुपए की सीधी बचत हो रही है। इस बचत राशि का उपयोग वे अपनी खेती-किसानी से जुड़े दैनिक खर्चों को पूरा करने में कर रहे हैं। इससे उन्हें खाद, बीज व अन्य कृषि आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संबल मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहले हर महीने बिजली बिल के रूप में एक बड़ी राशि देनी पड़ती थी। अब वही पैसा बचकर खेती के काम आ रहा है। इस योजना ने मेरी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया है। ​शासन के प्रति जताया आभार         ​योजना से जीवन में आए इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए नेतराम पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अन्य किसान भाइयों और ग्रामीणों से भी इस योजना से जुड़कर बिजली खर्च घटाने और अपनी बचत बढ़ाने की अपील की है। ​धरातल पर असर दिखा रहा 'सेवा संकल्प अभियान'       ​नेतराम पटेल की यह सफलता की कहानी यह साबित करती है कि जब शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचती हैं, तो उनका प्रभाव केवल मुफ्त या सस्ती बिजली तक सीमित नहीं रहता; बल्कि वह बचत, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण का स्थायी माध्यम बन जाता है।

देश सेवा से उद्यम तक का सफर, PMFME योजना ने बदली सफलता की कहानी

देश सेवा से उद्यम सेवा तक – प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना ने बनाया सफल उद्यमी भोपाल  भिण्ड शहर के चतुर्वेदी नगर निवासी संतोष सिंह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना पीएमएफएमई अंतर्गत प्राप्त सहायता के माध्यम से सफल उद्यमी बने हैं। भारतीय सेना में हवलदार के पद पर 17 वर्षों तक सेवा देने वाले सिंह ने देश-सेवा के बाद जिले में उद्यम-सेवा के जज्बे के साथ खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कदम रखा। वैष्णवी ऑयल मिल के माध्यम से ओडीओपी उत्पाद – सरसो का प्रसंस्करण कर वे न केवल 10 लाख की वार्षिक आय प्राप्त कर रहे हैं बल्कि 5 अन्य स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार भी दे रहे है। शुरुआती दिनों में वैष्णवी ऑयल मिल की सीमित संसाधनों के कारण उत्पादन क्षमता कम थी और उत्पाद को बड़ा बाजार नहीं मिल पा रहा था। पीएमएफएमई योजना अंतर्गत आवेदन करने पर योजना के तहत उन्हें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 13.50 लाख रुपए का ऋण और 5.25 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। उन्होंने इस सहायता से मिल के उन्नयन हेतु आधुनिक एक्सपेलर, फिल्टर और मोटर मशीनें लगाई जिससे उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई। आज वे ग्रामीण क्षेत्रों से किसानों से सीधे सरसों खरीद कर शुद्ध सरसों का तेल निकालते हैं और उसे खुला एवं टीन के डिब्बों में पैक कर स्थानीय बाजार में बेचते हैं। सिंह का कहना है कि पीएमएफएमई योजना अत्यंत लाभकारी है जिसके अंतर्गत सहायता प्राप्त कर युवा अपना उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। सिंह अपने खाद्य प्रसंस्करण उद्यम के सफल संचालन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत संचालित इस योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना पर अधिकतम 10 लाख रुपए की सीमा तक 35 प्रतिशत अनुदान और 3 प्रतिशत ब्याज माफी का प्रावधान है। जिले के युवा, कृषक, और छोटे व्यवसायी व्यक्तिगत स्तर पर, तथा किसान उत्पाद संगठन, स्वसहायता समूह और उत्पादक सहकारी समिति उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से संपर्क कर नए औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अथवा मौजूदा इकाइयों के उन्नयन के लिए योजना अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।  

Budhni Railway Station: बुदनी को मिलेगी नई रेल कनेक्टिविटी, ट्रेनों के स्टॉपेज से यात्रियों को राहत

 इंदौर  इंदौर से रेल रूट से बुदनी और नर्मदापुरम की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा में समय भी बचेगा। बुदनी रेलवे स्टेशन आने वो समय में जंक्शन के रूप में लेने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक इटारसी और भोपाल के बीच यह बड़ा जंक्शन होगा। बुदनी स्टेशन पर ट्रेनों के स्टॉपेज से यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही इससे यात्रा में लगने वाला लंबा समय भी कम होगा। इस स्टेशन पर पहले कुछ ट्रेनों का स्टॉपेज था, अब जंक्शन बनने के बाद इसमें कई ट्रेनों का स्टॉपेज रहेगा। इससे इस क्षेत्र के यात्रियों को सुविधा मिलेगी। बुदनी रेलवे स्टेशन पर नई बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही यह बनकर तैयार हो जाएगी। जिस रेलवे स्टेशन पर तीन दिशाओं की ओर से ट्रेन आती है उसे जंक्शन कहा जाता है। ऐसे में आने वाले समय में बुदनी रेलवे स्टेशन भोपाल और इटारसी के बीच महत्वपूर्ण रहेगा। सलकनपुर मार्ग से जुड़ेगा जुड़ेगा क्षेत्र बुदनी रेलवे स्टेशन के जंक्शन बनने से तीसरी लाइन मिलेगी। इसके साथ ही सलकनपुर मार्ग भी इससे जुड़ जाएगा। इस नए रूट के बनने से अब ट्रेनों को भोपाल घूमकर नहीं जाना होगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा। पहले इस रेलवे स्टेशन कुछ गाड़ियों का हाल्ट था। लेकिन जंक्शन बनने से नई ट्रेमें रुकने के रास्ते खुल गए हैं। नई बिल्डिंग नए स्ट्रक्चर का कंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। लेकिन यहां पर पहले से बनी रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग अभी भी है। जंक्शन बनने के साथ ही यहां अत्याधुनिक सुविधाओं वाली नई बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेजी से जारी है। बढ़ते भारत के लिए एक नया रेल गलियारा  भोपाल-इटारसी कॉरिडोर पहले से ही अत्यधिक व्यस्त है, और मध्य प्रदेश का पश्चिमी भाग राज्य के केंद्रीय और पूर्वी भागों से संपर्क के लिए लगभग पूरी तरह से इसी पर निर्भर है। इंदौर-बुदनी लाइन एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी, जिससे नेटवर्क की क्षमता में काफी वृद्धि होगी और मौजूदा रेल बुनियादी ढांचे पर भीड़भाड़ कम होगी। एक बार चालू हो जाने पर, यह कॉरिडोर इंदौर और जबलपुर के बीच की दूरी को लगभग 68 किलोमीटर और यात्रा के समय को लगभग दो घंटे कम कर देगा, जिससे यात्रियों और माल ढुलाई के लिए एक तेज और अधिक कुशल संपर्क उपलब्ध होगा। इससे इंदौर, देवास और सीहोर जिलों के कई कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में भी सुधार होगा, जिनमें से कई पारंपरिक रूप से रेल नेटवर्क से बाहर रहे हैं। बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग यह मध्य भारत में चल रही सबसे महत्वाकांक्षी रेलवे निर्माण परियोजनाओं में से एक है। इस कॉरिडोर को लेवल-क्रॉसिंग-मुक्त रेलवे लाइन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे परिचालन सुरक्षा और दक्षता में काफी सुधार होगा। इसका पैमाना निर्माणाधीन बुनियादी ढांचे में परिलक्षित होता है: • 80 महत्वपूर्ण पुल • 96 छोटे पुल • 139 सड़क अंडरब्रिज (आरयूबी)। • 5 सड़क ओवरब्रिज (आरओबी) • 18 स्टेशन: 3 ठहराव स्टेशन, 15 क्रॉसिंग स्टेशन • 10.6 किमी से अधिक की कुल लंबाई वाले 3 पुल • लगभग 10 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 2 रेलवे सुरंगें दूरी कम होगी नया जंक्शन बनने से तीसरी लाइन मिल जाएगी। इससे अनकनेक्टेट सलकनपुर मार्ग के क्षेत्र जुड़ जाएंगे। साथ ही भोपाल की अपेक्षा नये रूट से जाने पर दूरी कम होगी और समय भी बचेगा। -नवल अग्रवाल, पीआरओ रेलवे