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CM योगी की घोषणा पर तेजी से कार्रवाई, टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन ट्रांसफर के आदेश, निवेशकों के लिए अवसर

 बरेली जिले में टेक्सटाइल पार्क का इंतजार जल्द पूरा होने वाला है। मुख्यमंत्री ने जहां बरेली समेत पांच शहरों में टेक्सटाइल पार्क की घोषणा की है, वही मिल की भूमि का टेक्सटाइल पार्क के लिए हस्तांतरण का आदेश भी जारी हो गया है। अभी तक यह भूमि सहकारी कताई मिल संघ के पास है। खास बात यह है कि कैबिनेट के आदेश पर भूमि हस्तांतरण निश्शुल्क रूप से किया जाएगा। इसके लिए सहकारी कताई मिल की ओर से भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना में एकीकृत टेक्सटाइल पार्क का लाभ बरेली को भी मिलेगा। जिले में लंबे समय से इसका इंतजार किया जा रहा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को इसकी घोषणा कर अंतिम मुहर भी लगा दी। प्रस्तावित पार्क बहेड़ी से लगभग 10 किलोमीटर दूर नानकपुरी-टांडा मार्ग पर ग्राम सैदपुर खुर्द स्थित उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल परिसर में विकसित किया जाएगा। करीब 79.61 एकड़ क्षेत्रफल में बनने वाला यह पार्क प्रदेश के वस्त्र एवं परिधान उद्योग को नई गति देने के साथ रोजगार सृजन का बड़ा केंद्र बनेगा। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की ओर से तैयार पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट के अनुसार पार्क का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल या नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जा सकेगा। इसके लिए लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है तथा योजना की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है। पार्क में वस्त्र उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धी दरों पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही रेडीमेड प्लग एंड प्ले शेड, आंतरिक सड़कें, विद्युत वितरण व्यवस्था, जल एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन, कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), गोदाम, लाजिस्टिक सुविधाएं, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्र, श्रमिक हास्टल, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामान्य प्रसंस्करण केंद्र विकसित किए जाएंगे। हथकरघा व वस्त्र उद्योग के सहायक आयुक्त सर्वेश शुक्ला ने बताया कि सहकारी कताई मिल संघ की ओर से पुराना भवन ध्वस्त करने की निविदा की गई है। भवन ध्वस्त होने के साथ ही मौके से पुरानी मशीनरी को भी हटाया जाएगा। इसके बाद बाउंड्रीवाल आदि बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। इन कार्यों में अभी एक महीने से अधिक समय लग सकता है। बिजली, पानी, सड़क का मांगा प्रस्ताव प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क के विकास के लिए हथकरघा व वस्त्रोद्योग विभाग की ओर से कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए बिजली, पानी आपूर्ति व सड़क निर्माण का प्रस्ताव संबंधित विभागों से मांगा गया है। इसके लिए विभाग की ओर से पत्र तैयार कर योजना की जानकारी देते हुए संबंधित विभागों को कार्ययोजना बनाने के लिए कहा गया है। पार्क में सहायक उद्योगों को मिलेगा स्थान पार्क में केवल वस्त्र निर्माण इकाइयां ही नहीं बल्कि सहायक उद्योगों को भी स्थान मिलेगा। इनमें बटन, जिपर, फास्टनर, ट्रिम्स, लेबल एवं टैग निर्माण, पैकेजिंग सामग्री, तकनीकी वस्त्र, गोदाम तथा अन्य संबंधित उद्योग शामिल होंगे। योजना के अनुसार पार्क में न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी और किसी एक इकाई को कुल औद्योगिक भूमि का 40 प्रतिशत से अधिक आवंटित नहीं किया जाएगा। कौशल विकास, प्रयोगशाला, प्रदर्शनी पार्क निर्माण से पहले पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट में प्रशासनिक भवन, अनुसंधान एवं विकास केंद्र, कौशल विकास केंद्र, गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला, विपणन एवं प्रदर्शनी केंद्र, खुदरा सुविधाएं, ट्रक पार्किंग, औद्योगिक श्रमिक आवास, कामन कैंटीन, फायर स्टेशन और हरित क्षेत्र जैसी व्यवस्थाओं का भी प्रस्ताव किया गया है। इससे एक ही जगह सभी सुविधाएं मिल सकेंगी। स्थापित होने वाली इकाइयों पर मिलेगा वित्तीय प्रोत्साहन उत्तर प्रदेश सरकार की टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के अंतर्गत पार्क में स्थापित होने वाली इकाइयों को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे। इसके तहत प्लांट एवं मशीनरी पर 25 प्रतिशत पूंजी अनुदान, ऋण पर ब्याज की 60 प्रतिशत प्रतिपूर्ति तथा अन्य अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यदि पार्क का विकास पीपीपी माडल पर होता है तो राज्य सरकार मास्टर डेवलपर को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत पूंजी अनुदान प्रदान करेगी। यह अनुदान अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति एकड़ की सीमा तक होगा और छह किस्तों में जारी किया जाएगा। वहीं, यदि पार्क का विकास सीधे नोडल एजेंसी से किया जाता है तो सरकार परियोजना लागत के बराबर ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराएगी। योजना के कार्यान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल एवं अपैरल औद्योगिक विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। यह एजेंसी भूमि चयन, व्यवहार्यता अध्ययन, मास्टर प्लान, भूमि आवंटन नीति तथा परियोजना के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएगी। उद्योग स्थापना के लिए उद्यमियों से मांगे आवेदन पार्क में उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों से विभाग ने आनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस संबंध में सहायक आयुक्त, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग बरेली परिक्षेत्र सर्वेश कुमार शुक्ला को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। विभाग को उम्मीद है कि इस परियोजना के माध्यम से बरेली क्षेत्र उत्तर प्रदेश के उभरते हुए टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बहेड़ी में प्रस्तावित यह पार्क बरेली मंडल के औद्योगिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे विशेष रूप से महिलाओं और कुशल श्रमिकों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा प्रदेश के वस्त्र उद्योग को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायता मिलेगी।

प्री-मानसून बारिश ने बदला मौसम का मिजाज, कुछ इलाकों में रिकॉर्ड बारिश, मौसम विभाग की चेतावनी बरकरार

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की आधिकारिक दस्तक अभी बाकी है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय हैं। जून के पहले नौ दिनों में हुई बारिश ने कई जिलों में सामान्य आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। हालात यह हैं कि प्रदेश के 14 जिलों में अब तक 100 प्रतिशत से लेकर 672 प्रतिशत तक अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। मौसम विभाग ने इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई है, लेकिन मानसून पूर्व बारिश ने फिलहाल राहत और चुनौती दोनों हालात पैदा कर दिए हैं। 1 से 9 जून के बीच प्रदेश में औसतन आधा इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। बारिश के बीच गर्मी भी बरकरार एक ओर कई इलाकों में बारिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर कम नहीं हुआ है। मंगलवार को खजुराहो सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दतिया में 44 डिग्री और राजगढ़, रीवा व टीकमगढ़ में 43 डिग्री के आसपास तापमान रहा। प्रदेश के 26 शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान 40 डिग्री के करीब रहा, जबकि ग्वालियर में 42.8 डिग्री दर्ज किया गया। निवाड़ी सबसे आगे, नीमच और भोपाल भी रिकॉर्ड सूची में बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो निवाड़ी में सामान्य 1.9 मिमी के मुकाबले 14.7 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो 672 प्रतिशत अधिक है। नीमच में 493 प्रतिशत, आगर-मालवा में 385 प्रतिशत, श्योपुर में 346 प्रतिशत, मंदसौर में 334 प्रतिशत और भोपाल में 304 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा अलीराजपुर, अशोकनगर, देवास, हरदा, मुरैना, राजगढ़, सीहोर और शाजापुर में भी सामान्य से दोगुने से ज्यादा पानी गिर चुका है। आज 16 जिलों में बारिश के आसार मौसम विभाग ने बुधवार को बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में बारिश की संभावना जताई है। वहीं भोपाल समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है। बदला मौसम का मिजाज, लू की जगह ओलों का अलर्ट मौसम विभाग ने ताजा पूर्वानुमान में बड़ा बदलाव किया है। जिन जिलों में पहले 10 और 11 जून के लिए लू का अलर्ट जारी किया गया था, वहां अब 12 जून को ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मुरैना, भिंड, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओले गिर सकते हैं। इसके अलावा प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने के संकेत हैं।  

आय से अधिक संपत्ति मामले में रेड, संयुक्त संचालक के ठिकानों से करोड़ों की संपत्ति मिली

इंदौर इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के यहां छापा मारकर आय से अधिक संपत्ति का पता लगाया।अधिकारी को अब तक के अपने सेवाकाल में वेतन से ढाई करोड़ रुपये प्राप्त हुए, लेकिन छापे में साढ़े नौ करोड़ रुपये की संपत्ति मिली है। उन्होंने अपनी आय से 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है।  छापे में स्कीम-103 में एक तीन मंजिला मकान और एक व्यावसायिक परिसर मिला। इसके अलावा स्कीम-140 में 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट भी मिले। 30 वर्षों के सेवाकाल में वे अलग-अलग जिलों में पदस्थ रहे। फिलहाल वे इंदौर में पदस्थ थे। कंडवाल के पास पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के तारापुर, बेकलाय और बनेड़िया में 11 प्लॉट भी मिले हैं। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय ने बताया कि शिकायत मिलने पर बुधवार सुबह छापे की योजना बनाई गई थी। इसके लिए तीन टीमों का गठन किया गया। मकान, जिम और एक डिपार्टमेंटल स्टोर पर टीमों ने छापा मारकर कथित काली कमाई से जुटाई गई संपत्ति का पता लगाया। कंडवाल के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया है।लक्ष्मीनारायण कंडवाल महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद पर वर्ष 1996 से पदस्थ हैं। अब विभाग उनके निलंबन की कार्रवाई कर सकता है। बेटे, बहू और रिश्तेदारों के नाम खरीदी जमीनें संयुक्त संचालक कंडारिया ने काली कमाई का पैसा पत्नी, बेटों, पुत्रवधु और रिश्तेदारों के नाम पर जमीनें खरीदने में लगाया। इंदौर के समीप सोनवाय गांव में 0.097 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी, जिसकी कीमत साढ़े छह लाख रुपये है। इसके अलावा पीथमपुर के समीप 2.560 हेक्टेयर कृषि भूमि तथा स्कीम-103 में भूखंड क्रमांक 149-सी खरीदा और उस पर जी+3 का 13 हजार वर्गफीट से अधिक निर्माण कराया। इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 140 स्थित भूखंड क्रमांक 220 ए.एम. को 21 लाख रुपये में खरीदा। इसके अलावा इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 140, सेक्टर ए-टाइप में भूखंड क्रमांक 378 भी 15 लाख रुपये में खरीदा। ग्राम बनेडिया, जिला धार में 0.879 हेक्टेयर कृषि भूमि ली। तारपुरा, तहसील सागौर, जिला धार में 2.195 हेक्टेयर कृषि भूमि भी खरीदी। ग्राम बेकल्या, तहसील पीथमपुर, जिला धार में 1.740 हेक्टेयर कृषि भूमि ली। आरोपी ने ज्यादातर पैसा संपत्ति खरीदने में ही लगाया। इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया की सांठा बाजार शाखा में एक बैंक लॉकर भी मिला है, जिसे गुरुवार को खोला जाएगा। पांच दिन पहले ही इंदौर में पदस्थापना कंडारिया की पांच दिन पहले ही इंदौर में पदस्थापना हुई थी और लोकायुक्त का छापा पड़ गया। उनका परिवार इंदौर में ही रहता था और ऐशो-आराम की जिंदगी जीता था। कंडारिया झाबुआ, नीमच, रतलाम, रीवा, शहडोल, उज्जैन और देवास में भी पदस्थ रहे। जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर भी खोला छापे के दौरान अधिकारियों को दो मंजिला आलीशान जिम भी मिला, जिसमें आधुनिक मशीनें हैं। इसके अलावा एक डिपार्टमेंटल स्टोर भी मिला, जिसका संचालन कंडारिया के परिवार के सदस्य करते हैं।  

एक-दो नहीं, 19 सरकारी नौकरियों में चयन! चारू पांडेय की सफलता की कहानी बनी मिसाल

रायपुर  किसी ने क्या खूब कहा है कि "कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती". इस पंक्ति को छत्तीसगढ़ की एक होनहार बेटी चारू पांडे ने अपने जुनून से सच साबित कर दिया है. महज 23 साल की उम्र में चारू ने वह कर दिखाया है, जिसका सपना लाखों एस्पिरेंट्स देखते हैं. उन्होंने SSC, बैंकिंग, रेलवे और पुलिस समेत कुल 19 सरकारी भर्ती परीक्षाएं पास कर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है. उनकी इसी असाधारण उपलब्धि के लिए स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित करेंगी।  रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा की रहने वाली चारू आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनकी सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही रणनीति के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।  छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर चारू पांडे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई तिल्दा-नेवरा में पूरी की. इसके बाद उन्होंने दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से मैथमेटिक्स में बीएससी की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स की तैयारी शुरू कर दी थी. चारू फिलहाल चेन्नई स्थित कैग (CAG) कार्यालय में असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. उनकी उपलब्धियों की चर्चा अब सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में हो रही है।  किन परीक्षाओं में हासिल की सफलता चारू ने SSC की कई प्रमुख परीक्षाएं जैसे SSC CGL, SSC CHSL, SSC MTS, SSC GD और SSC CPO को पास किया है. इसके अलावा उन्होंने IBPS PO, IBPS Clerk, SBI PO और SBI Clerk जैसी बैंकिंग परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की. रेलवे भर्ती बोर्ड की NTPC और ग्रुप-D परीक्षाएं भी उन्होंने पास कीं. वहीं पुलिस सेवाओं में दिल्ली पुलिस, छत्तीसगढ़ सब-इंस्पेक्टर और ट्रांसपोर्ट सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षाओं में भी उन्होंने सफलता का परचम लहराया. इसके अलावा CG NHM सहित कई दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया।  असफलताओं को बनाया सफलता की सीढ़ी चारू का सफर आसान नहीं था. शुरुआती दौर में उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा. कई परीक्षाओं में चयन नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचाना और लगातार सुधार किया. चारू का मानना है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का अवसर होती है. यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही।  सफलता का मंत्र क्या है? चारू बताती हैं कि उनकी तैयारी का आधार सब्जेक्ट वाइज रणनीति, रेग्युलर मॉक टेस्ट और लगातार सेल्फ-इवैल्यूएशन रहा. वह हर परीक्षा के बाद अपनी गलतियों को एनालाइज करती थीं और अगली परीक्षा में उन्हें सुधारने की कोशिश करती थीं. उनका कहना है कि अगर छात्र लक्ष्य तय करें, समय को सही से मैनेज करें और लगातार मेहनत करें, तो सफलता जरूर मिलती है।  चारू पांडे की कहानी यह संदेश देती है कि सपने बड़े हों तो चुनौतियां मायने नहीं रखतीं. छोटे शहर की यह बेटी आज देशभर के युवाओं के लिए उम्मीद, संघर्ष और सफलता का प्रतीक बन चुकी है. उनकी उपलब्धि न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। 

Jhajjar की रुपांशी का कमाल, अंडर-17 नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया मान

झज्जर. एक साधारण हलवाई की बेटी ने उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित अंडर-17 राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे जिले का नाम चमका दिया है। सिलाना गांव की बेटी रुपांशी (इशु) ने 53 किलोग्राम भारवर्ग के फ्री स्टाइल मुकाबले में देश के शीर्ष पहलवानों को धूल चटाते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। राष्ट्रीय स्तर पर इस शानदार उपलब्धि के बाद गांव पहुंचने पर रुपांशी सिलाना का ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ जोरदार नागरिक अभिनंदन किया गया। शौक से शुरू हुआ सफर, अब देश को मेडल दिलाने की जिद : चैंपियन पहलवान रुपांशी ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके गांव में जब अखाड़ा खुला था, तो वह महज 9 साल की उम्र में शौक-शौक में वहां चली गई थीं। शुरुआत में वह अखाड़े में अकेली लड़की थी, जिसे देखकर लोग कुछ संकोच भी था, लेकिन उनके माता-पिता सहित परिवार ने अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया। रुपांशी ने कहा, शुरुआत में न्यूं तो कवै थे कि लड़की कुश्ती करेगी, पर मेरे पापा और मम्मी हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। आज बहुत खुशी हो रही है, जब मैं गोल्ड मेडल जीतकर आई, तो सारा गाम मेरे स्वागत में खड़ा था। इससे पहले रुपांशी रोहतक में हुई स्टेट चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल कर चुकी हैं। पिता बनाते हैं मिठाई, बेटी ने कुश्ती में घोली मिठास रुपांशी के परिवार की पृष्ठभूमि बेहद साधारण है। उनके पिता तिलक राज गांव में ही हलवाई का काम करते हैं और मां घरेलू महिला हैं। दो बहनों और एक बड़े भाई में सबसे छोटी रुपांशी ने अपनी खेल प्रतिभा से साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। रुपांशी का बड़ा भाई भी खेल में रुचि रखता है। खेल के साथ-साथ पढ़ाई को तरजीह देते हुए रुपांशी ने हाल ही में 12वीं कक्षा की परीक्षा भी 60 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की है। कड़ी मेहनत और ठेठ हरियाणवी डाइट का कमाल : रुपांशी रोजाना सुबह और शाम 3-3 घंटे अखाड़े में कड़ा अभ्यास करती हैं। अपनी डाइट को लेकर बताया कि वह पूरी तरह से पारंपरिक और पौष्टिक आहार पर निर्भर हैं, जिसमें दूध, दही, घी, चूरमा और खीर मुख्य रूप से शामिल हैं। अभ्यास के ठीक बाद वह नियमित रूप से बादाम रगड़ा पीती हैं। अब रुपांशी का अगला लक्ष्य 14 जून को होने वाली एशियाई चैंपियनशिप के ट्रायल को पास करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना है। गुरुओं की मेहनत और ग्रामीणों का मिला भरपूर आशीर्वाद रुपांशी ने अपनी सफलता का श्रेय कोच अमित कुमार को दिया, जिन्होंने सिलाना अखाड़े में उनकी प्रतिभा को निखारा। इसके साथ ही खलीफा पहलवान कली राम, पहलवान कदम कोच और पहलवान राजबीर उर्फ सांडा आदि खलीफाओं के मार्गदर्शन ने मैट पर मजबूत बनाया। गांव आगमन पर आयोजित ''प्रतिभा सम्मान समारोह'' के दौरान सरपंच राकेश कुमार, पूर्व पार्षद हरेंद्र सिलाना, जोहरी पहलवान, पूर्व सरपंच सूरज मल, धर्मबीर, आजाद सिंह, साहब सिंह, रामफल सिंह, लीलू राम और धर्मेंद्र पहलवान, नरेश सहित भारी संख्या में खेल प्रेमियों ने बेटी को आशीर्वाद दिया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

Punjab News: आनंदपुर साहिब की हाइडल नहर में ओवरफ्लो, ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन ने शुरू की जांच

नंगल. श्री आनंदपुर साहिब में उस समय लोगों की चिंता बढ़ गई जब हाइडल नहर का पानी भनुपली साइफन के निकट अचानक ओवरफ्लो होकर बाहर निकलने लगा। नहर से पानी बाहर आने की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों में हलचल मच गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि शुरुआती जानकारी के अनुसार नहर के ढांचे को किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। घटना की जानकारी मिलते ही पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड के सिविल विंग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। टीम ने तत्काल स्थिति का जायजा लेना शुरू किया और पानी के प्रवाह की निगरानी बढ़ा दी। विभागीय अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि साइफन क्षेत्र में जल प्रवाह के दौरान किसी प्रकार की रुकावट आने के कारण नहर का पानी निर्धारित मार्ग से बाहर निकलने लगा। हालांकि ओवरफ्लो की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच जारी है। विभागीय अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं। पीएसपीसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों के अनुसार नहर से पानी बाहर निकलने की सूचना फैलते ही ग्रामीणों में चिंता का माहौल बन गया। लोगों को आशंका थी कि यदि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। हालांकि मौके पर पहुंची टीम ने स्थिति को संभालते हुए आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए। पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड के सिविल विंग के कार्यकारी अभियंता इंजीनियर अविनाश शर्मा ने बताया कि विभाग के अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद हैं और ओवरफ्लो के कारणों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। जांच रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट उन्होंने यह भी बताया कि पानी के प्रवाह को सामान्य बनाए रखने के लिए आवश्यक तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। विभाग का प्रयास है कि समस्या का जल्द समाधान कर नहर व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य किया जाए। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि नहरों और जलमार्गों में कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक तथा अन्य अपशिष्ट सामग्री न फेंकें। ऐसे पदार्थ जल प्रवाह में बाधा उत्पन्न करते हैं और कई बार ओवरफ्लो जैसी समस्याओं का कारण बन जाते हैं। विभाग ने कहा कि जन सहयोग से ही इस प्रकार की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल विभागीय टीमें मौके पर तैनात हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ओवरफ्लो के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

दुर्ग में 25 ग्रामों की भूमि के लेनदेन पर प्रतिबंध, डंकुनी–सूरत कॉरिडोर निर्माण के चलते बड़ा फैसला

दुर्ग. जिले में प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ( डंकुनी – सूरत) परियोजना के निर्माण हेतु तहसील दुर्ग एवं पाटन के ग्रामों की भूमि पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध संबंधी आदेश में संशोधन किया गया है। कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूर्व में जारी आदेश की कंडिका-4 में उल्लेखित ग्रामों के स्थान पर संशोधित ग्रामों की सूची प्रभावशील होगी। संशोधित आदेश के तहत दुर्ग तहसील के ग्राम बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई एवं डुमरडीह, पाटन तहसील के ग्राम परेवाडीह, पहडोर, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, नारधी, महकाकला, महकाखुर्द, कुरूदडीह एवं बटंग तथा भिलाई-3 तहसील के ग्राम सिरसाकला, परसदा (पाहंदा), सोमनी, गनियारी, देवबलोदा एवं उरला सहित कुल 25 ग्रामों को आदेश में शामिल किया गया है। इन ग्रामों की निजी भूमि के खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन, खरीदी- बिक्री पर तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक अस्थायी प्रतिबंध लागू रहेगा। प्रशासन द्वारा प्रभावित ग्रामीणों के हितों की रक्षा तथा परियोजना के पारदर्शी एवं सुचारू क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है। आदेश की अन्य सभी शर्तें पूर्ववत प्रभावी रहेंगी।

पंजाब में यात्री परेशान, कर्मचारियों की हड़ताल से दोपहर बाद बंद हुईं सरकारी बस सेवाएं

चंडीगढ़  सरकारी बसों में सफर करने वाले यात्रियों को आज बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कांट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। यूनियन के आह्वान पर बुधवार दोपहर 12 बजे से बस सेवाओं को प्रभावित करते हुए प्रदेशभर में रोष प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि हड़ताल में करीब आठ हजार कर्मचारी शामिल हैं। इसके चलते प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत सरकारी बस रूट प्रभावित हुआ है। ऐसे में यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले बसों की उपलब्धता की जानकारी लेने की सलाह दी जा रही है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब के वरिष्ठ उपप्रधान हरकेश कुमार विक्की ने बताया कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही। निजीकरण का हो रहा विरोध उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों का लगातार निजीकरण किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो रहा है। यूनियन नेताओं का कहना है कि आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें जेल भेजने जैसी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। बसों की पर्याप्त खरीद नहीं हुई कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि पिछले चार वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद परिवहन विभाग में नई सरकारी बसों की पर्याप्त खरीद नहीं की गई। साथ ही लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी पूरी नहीं हुई है। इन मुद्दों को लेकर कर्मचारियों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। आंदोलन के अगले चरण में 11 जून को मुख्यमंत्री के चंडीगढ़ स्थित आवास के बाहर धरना देने की भी घोषणा की गई है। लोग हो रहे परेशान हड़ताल के कारण दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है। परिवहन सेवाओं पर निर्भर हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना है। वहीं, सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत को लेकर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और विवाद का समाधान निकल सके।  

विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें- राज्यपाल डेका

विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें- राज्यपाल डेका रायपुर,   राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉक्टर कमलप्रीत सिंह ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान राज्यपाल ने राज्य के विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति तथा वहां उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की।            राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर देते हुए संबंधित समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने तथा उनके लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।           राज्यपाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की शिक्षा, छात्रावास सुविधा, विद्यालयीन अधोसंरचना और शिक्षकों की उपलब्धता से जुड़े विषयों का संवेदनशीलता के साथ निराकरण किया जाना चाहिए, ताकि इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त हो सकें और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

हरियाणा सरकार की बड़ी सौगात, 20 वर्षों से शामलात भूमि में रह रहे लोगों को मिलेगा स्वामित्व अधिकार

पंचकूला. मुख्यमंत्री नायब सैनी ने घोषणा की है कि जो परिवार गांव की शामलात भूमि पर 20 वर्षों से मकान बना कर रह रहे हैं, वे मालिकाना हक के लिए अब 16 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं। ऐसे परिवारों से वर्ष 2004 की कलेक्टर दर की डेढ़ गुणा के अनुसार भूमि खरीद की राशि जमा करवाई जाएगी। दस्तावेजी कठिनाइयों के कारण कई पात्र लोग आवेदन नहीं कर सके थे, ऐसे में सरकार ने उन्हें राहत दी है। नायब सिंह सैनी मंगलवार को पंचकूला के इंद्रधनुष आडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय सशक्त पंचायत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 17 जिलों के 179 गांवों की फिरनियों पर एलईडी स्ट्रीट लाइटों का उद्घाटन भी किया, जिन पर 23 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत आई है। इसके साथ ही 17 जिलों में 44 करोड़ से बनी 350 अटल लाइब्रेरियों का भी लोकार्पण किया। छह ग्राम पंचायतें विकास, स्वच्छता और सुशासन के लिए सम्मानित: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जागृत ग्राम पुरस्कारों के तहत प्रदेश की 6 ग्राम पंचायतों को विकास, स्वच्छता और सुशासन के नए मानदंड स्थापित करने के लिए सम्मानित किया तथा उन्हें 1 करोड़ 66 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। इन पंचायतों में फतेहाबाद की जांडली कलां पंचायत को 51 लाख, चरखी दादरी के झिंझर की पंचायत को 31 लाख, अंबाला के साहा की पंचायत को 21 लाख की राशि प्रदान की गई। द्वितीय श्रेणी में फतेहाबाद के जल्लोपुर की पंचायत को 31 लाख, गदली को 21 लाख तथा करनाल के मर्दानहेड़ी ग्राम पंचायत को 11 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 2,697 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई। सैनी ने कार्यक्रम के दौरान हर महीने डीबीटी के जरिए दी जाने वाली विभिन्न योजनाओं की किस्त भी रिमोट का बटन दबाकर जारी की।