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सपा नेता को कार से खींचकर पीटा गया, प्लाजा कर्मियों पर बढ़ा गुस्सा

बाराबंकी यूपी में टोलकर्मियों की गुंडई लगातार सामने आ रही है। पहले मेरठ में सेना को पीटा गया अब बाराबंकी जिले में सपा नेता की पिटाई हुई है। जिसकी शिकायत पीड़ित ने पुलिस में दर्ज कराई है। आपको बता दें कि यह मामला लखनऊ बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग के शहाबपुर टोल प्लाजा का है। बूढ़ीपट्टी ग्राम प्रधान और सपा नेता देवेंद्र यादव घर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान टोल गेट से VIP मूमेंट हो रहा था। जिससे शहाबपुर टोल प्लाजा पर वाहनों की लम्बी कतारें लगी हुई थी, वीआईपी वाहन पास होने के बाद भी टोल गेट को चालू न करने पर सपा नेता ने टोलकर्मी से वाहन पास करने के गेट खोलने को कहा तो टोल कर्मियों से बहस शुरू हो गई। कुछ समय में टोल कर्मी आग बबूला होकर सपा नेता पर टूट पड़े। आरोप है कि सपा नेता को कार से खींच कर जमकर लात-घुसों से पिटाई कर दी। पीड़ित प्रधान ने थाना मसौली मे टोलकर्मियों के विरुद्ध मारपीट की तहरीर दी है।

राशन कार्ड धारकों के लिए नई व्यवस्था, मुफ्त गेहूं अब मशीनों के जरिए मिलेगा

लुधियाना  पंजाब में मुफ्त गेहूं पाने वाले राशन कार्ड धारकों के लिए बुरी खबर है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राशन डिपो पर लाभार्थी परिवारों को वितरित किया जा रहा गेहूं फिलहाल केवल उन्हीं लोगों को दिया जा रहा है जिन्होंने ई-के.वाई.सी. करवाया है क्योंकि ई-पॉश मशीन से केवल उनकी ही पर्चियां जारी हो रही हैं। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' से जुड़े परिवारों को दिए जा रहे मुफ्त गेहूं में लंबे समय से चल रहे घोटाले को रोकने के लिए सख्त रवैया अपनाया है, ताकि सरकारी अनाज की लगातार हो रही कालाबाजारी को रोका जा सके। सरकार ने इस योजना से जुड़े हर सदस्य को आदेश दिया है कि राशन कार्ड धारक अपने क्षेत्र के नजदीकी राशन डिपो पर जाकर मुफ्त में अपना ई-के.वाई.सी. करवा लें, अन्यथा उन्हें राशन डिपो से मिलने वाला मुफ्त गेहूं नहीं मिलेगा। यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि इस मौजूदा चरण के दौरान, केंद्र सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से जुड़े लाभार्थी परिवारों को जुलाई से सितंबर तक 3 महीने के लिए मुफ्त गेहूं वितरित कर रही है। 

हाईकोर्ट सख्त: शराब घोटाले में आरोपी 22 अफसरों को आत्मसमर्पण का आदेश

रायपुर  छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में 22 आबकारी अधिकारियों को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए सख्त रुख अपनाया। जस्टिस अरविंद वर्मा ने कहा कि इतने बड़े घोटाले में आरोपियों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने सलाह दी कि आरोपी निचली अदालत में सरेंडर करें और वहां से जमानत के लिए आवेदन करें। इस फैसले से अधिकारियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। EOW की जांच में क्या खुलासा हुआ? आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच पूरी कर ली है। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि ओवर बिलिंग, नकली बारकोड और डमी कंपनियों के माध्यम से अवैध वसूली की गई। यह सब आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ। शराब दुकानों को सरकारी रिकॉर्ड में खपत दर्ज न करने के निर्देश थे, और बिना टैक्स चुकाए डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब सप्लाई होती थी। जांच के मुताबिक, फरवरी 2019 से शुरू हुए इस घोटाले में तीन साल में 60 लाख से अधिक शराब की पेटियां अवैध रूप से बेची गईं। शुरुआत में 200 ट्रक (800 पेटी प्रति ट्रक) प्रतिमाह सप्लाई होती थी। जब कोई विवाद नहीं हुआ तो इनलोगों ने 400 ट्रक तक सप्लाई कर दी। इतना ही नहीं प्रति पेटी की कीमत भी 2,840 से बढ़कर 3,880 रुपये कर दी गई। 22 आबकारी अधिकारी निशाने पर EOW ने 22 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। इन सभी को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है। इन पर आरोप है कि वे एक संगठित सिंडिकेट का हिस्सा थे, जिसके जरिए 88 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई। कोर्ट ने पहले ही इन अधिकारियों को 20 अगस्त तक पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाओं में अधिकारियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए फंसाने का आरोप लगाया और कुछ ने स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। आरोपियों ने याचिका में दावा किया कि वे निर्दोष हैं और उन्हें झूठे केस में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे EOW की जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। कई अधिकारियों ने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देकर जमानत मांगी, लेकिन हाईकोर्ट ने इन तर्कों को नामंजूर कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे संगठित अपराध में कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से याचिकाओं का विरोध किया गया। शासन ने कोर्ट को बताया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, जिससे चालान पेश करने में देरी हो रही है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। 22 आबकारी अधिकारियों पर EOW ने केस दर्ज किया है, जिन्हें राज्य सरकार ने पहले ही निलंबित कर दिया था। जांच में पता चला कि ये अधिकारी सिंडिकेट का हिस्सा थे, और उन्हें 88 करोड़ रुपये से अधिक की रकम मिली थी। इस घोटाले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। EOW और ACB की जांच में विदेशी शराब कमीशन, धन शोधन, और राजनीतिक संरक्षण की परतें खुल रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। विपक्षी कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है। कोर्ट के इस फैसले से आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों की गिरफ्तारी से घोटाले की और परतें खुल सकती हैं। जनता की नजर अब EOW की अगली कार्रवाई पर टिकी है, जो शराब घोटाले में शामिल अन्य लोगों को भी उजागर कर सकती है। ये है आरोपी अधिकारी जनार्दन कौरव, पिता पंचम सिंह, उम्र 50 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी। अनिमेष नेताम, पिता आनंद नेताम, उम्र 49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। विजय सेन शर्मा, पिता पीसी सेन शर्मा, उम्र 48 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। अरविंद कुमार पाटले, पिता नेवल सिंह पाटले, उम्र 49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। प्रमोद कुमार नेताम, पिता स्व. श्याम लाल नेताम उम्र 60 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। रामकृष्ण मिश्रा, पिता शैलेन्द्र मिश्रा, उम्र 36 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। विकास कुमार गोस्वामी, पिता विनोद गोस्वाम, उम्र 44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। इकबाल खान, पिता महूम मोहम्मद स्माईल खान, उम्र 56 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी। नितिन खंडुजा, पिता रवीन्द्र खंडुजा, उम्र 53 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी। नवीन प्रताप सिंग तोमर, पिता भगवान सिंह तोमर, उम्र 43 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। मंजुश्री कसेर, पति रामचन्द्र सारस, उम्र 47 वर्ष, सहायक आबकारी अधिकारी। सौरभ बख्शी, पिता राजीव बख्शी, उम्र 41 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। दिनकर वासनिक, पिता डॉ पीएल वासनिक, उम्र 42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। मोहित कुमार जायसवाल, पिता रामलाल जायसवाल, उम्र 46 वर्ष, अधिकारी जिला आबकारी। नीतू नोतानी ठाकुर, पति मोहन दास नोतानी, उम्र 45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। गरीबपाल सिंह दर्दी, पिता दिलबाग सिंह दर्दी, उम्र 59 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी। नोहर सिंह ठाकुर, पिता गौतम सिंह ठाकुर, उम्र 45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी। सोनल नेताम, पिता एम. एस. नेताम, उम्र 36 वर्ष, सहायक आयुक्त, आबकारी। प्रकाश पाल, पिता सपन कुमार पाल, उम्र 44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। अलेख राम सिदार, पिता मुरलीधर सिदार, उम्र 34 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। आशीष कोसम, पिता बृजलाल कोसम, उम्र 50 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी। राजेश जायसवाल, पिता हरीप्रसाद जायसवाल, उम्र 42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।

3 साल में 22,500 पुलिसकर्मी भर्ती होंगे, CM यादव की घोषणा पर तेज हुई प्रक्रिया

भोपाल  मध्य प्रदेश के पुलिस थानों में खाली पड़े हजारों पद जल्दी भर लिए जायेंगे, सरकार ने इसकी तैयारियां तेज कर दी है, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बीते 15 अगस्त को घोषणा करते हुए कहा कि अगले तीन साल में ये भर्तियाँ हो जायेंगी इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने भर्तियों के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन की भी घोषणा की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री डॉ मोहन यादव की घोषणा के बाद से प्रदेश के युवा उत्साहित हैं, विशेष रूप से उन युवाओं में बहुत उत्साह है जो लंबे समय से पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे थे और खाकी वर्दी पहनने का सपना दिल में संजोये बैठे हैं, उनके सपने जल्दी ही हकीकत में बदलने वाले हैं। सीएम डॉ मोहन यादव ने 15 अगस्त को पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी जानकारी में आया है हमने  7500 पदों पर भर्ती की अनुमति दी है लेकिन अभी भी 20 हजार पद पुलिस विभाग में खाली है, उन्होंने कहा कि हम अगले तीन सालों में सभी खाली पदों को भर देंगे। सीएम ने की पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा  सीएम ने पुलिस के आला अधिकारियों की तरफ देखते हुए कहा कि पहले ये भर्तियाँ कर्मचारी चयन मंडल करता था  जिसमें कई तरह की परेशानियाँ आती थी इसलिए आप इसके लिए बोर्ड बनाइये मैं पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा करता हूँ, जिससे आप अपने हिसाब से भर्ती कर सकेंगे।  इससे पुलिस भर्ती में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। तीन वर्ष तक हर साल होगी 7500 पदों पर भर्ती  मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 के लिए पुलिस में स्वीकृत पदों की भर्ती मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से कर्मचारी चयन मंडल करेगा। वर्ष 2026 से ये भर्तियां पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा ही की जाएंगी। प्रतिवर्ष पुलिस के रिक्त 7500 पदों पर भर्ती की जाएगी और इस प्रकार आगामी 3 वर्ष में पुलिस विभाग के सभी रिक्त 22,500 पद भर दिए जाएंगे। वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात अफसरों के लिए ये घोषणा   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस, जेल और नगर सेवा एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी पाठ्यक्रमों में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियां में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिये जाने की घोषणा भी की है। वीवीआइपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी पात्रता अनुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिये जाने का निर्णण भी लिया गया है।

PA की हरकतों ने चौंकाया, बड़े अफसर और CM तक पहुंचा विवाद

लुधियाना राज्य जी.एस.टी. विभाग में अधिकारियों को पसंदीदा जिले हासिल कराने के नाम पर हो रही कथित धांधली चर्चा का विषय गर्माया हुआ है। सूत्रों के अनुसार इसी सन्दर्भ में एक उच्चाधिकारी के खास इंस्पैक्टर उर्फ पी.ए. को अचानक एक सिंगल ऑर्डर के तहत पटियाला से ट्रांसफर कर दिया गया है। जानकारी मिली है कि उक्त इंस्पैक्टर अधिकारियों से बदलियों व मनचाहे जिलों के लिए पैसे वसूल कर गैर-जरूरी अधिकारियों को पसंदीदा जिलों में तैनात करवा रहा था। इसे लेकर विभाग के ईमानदार अधिकारियों में काफी राहत मिली है क्योंकि इससे कई काबिल अधिकारी दूरस्थ या छोटे जिलों में लंबे समय तक फंसे रहते थे, जबकि कई सिफारशी अधिकारी बड़े व मुख्य स्टेशनों पर बने रहते थे। वहीं यह भी जांच का विषय है कि इंस्पैक्टर स्तर का अधिकारी किस की शह पर और ट्रांसफर रुकवा और करवा रहा था, उक्त किस उच्च अधिकारी के साथ मिलकर बदलियों का नेटवर्क चला रहा था। साथ ही उच्चाधिकारी के खिलाफ डिपार्टौंटल इन्क्वायरी होनी चाहिए या विजिलेंस ब्यूरो को ट्रांसफर धांधली के पीछे मास्टरमाइंड पर बनती कार्रवाई करनी चाहिए। एक स्थानीय कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लुधियाना स्टेशन में कई ऐसे अधिकारी हैं जो लंबे समय से यहीं स्थिर हैं और अधिकतर अधिकारी इस बड़े स्टेशन से हटना ही पसंद नहीं करते। अधिकारियों का कारोबारियों के साथ अच्छी सांठ-गांठ बनी होने के कारण ही ये अधिकारी लुधियाना में टिके रहते हैं। इससे अधिकारियों को कानून का अनुपालन करने में ये अधिकारी ढील देते हैं, जिसके एवज में अधिकारी उक्त अधिकारियों की जरूरतों का ध्यान रखते है।  लुधियाना के कारोबारियों ने अधिकारियों की स्थायी तैनाती पर लगाई आपत्ति  एक कारोबारी ने लुधियाना जिले में पदस्थ कुछ अधिकारियों की 5 से 6 वर्षों से स्थायी तैनाती को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि ये अधिकारी बिना विभागीय ट्रांसफर नीति का पालन किए लंबे समय से एक ही शहर में जमे हुए हैं और इसी दौरान कई अधिकारी लुधियाना में रहकर लगातार प्रमोशन भी प्राप्त कर चुके हैं। कारोबार ने इस स्थिति को प्रशासनिक अनियमितता बताते हुए पंजाब सरकार, मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के मुख्य सचिव को लिखित शिकायत भी सौंपी है। शिकायत में पूछा गया है कि इन अधिकारियों को इतनी लंबी अवधि तक एक ही जिले और पद पर नियुक्त रखने के पीछे क्या कारण है और वे किस आधार पर ट्रांसफर नीति का उल्लंघन कर प्रदेश के अन्य हिस्सों में तैनाती से बच रहे हैं।

निर्माण समिति अध्यक्ष का दावा: दिसंबर तक राममंदिर का काम पूरा

अयोध्या श्रीराम मंदिर निर्माण समिति की बैठक के बाद निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य दिसंबर अंत तक पूरा हो जायेगा। श्रीराम मंदिर निर्माण समिति की बैठक के बाद निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि मंदिर के लोअर प्लिंथ में लगने वाले 90 म्यूरल्स में से 85 तैयार होकर आ चुके हैं, जबकि 3डी मूर्तियों में 15 से 30 दिन का विलंब हुआ है। बैठक में इसे लेकर विस्तार से समीक्षा की गई।   'ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्री होगी तैयार'  मिश्र ने बताया कि निर्माण स्थल पर लगाए गए पाँच टाइम-लैप्स कैमरों से रिकॉर्ड हो रही पूरी यात्रा को ‘‘इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स'' घोषित किया गया है। यह अधिकार सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, रुड़की को शर्तनामा के साथ सौंपे जाएंगे ताकि इस सामग्री का उपयोग शिक्षा-प्रशिक्षण के साथ-साथ पाँच वर्षों की निर्माण यात्रा पर एक ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट्री तैयार करने में किया जा सके। इसमें खुदाई, सॉइल टेस्ट से लेकर प्रस्तावों और चरणबद्ध निर्माण तक की पूरी कहानी दर्ज होगी।   'अक्टूबर के अंत तक अधिकांश कार्य पूरे हो जाएंगे' समीक्षा के दौरान अस्थायी मंदिर स्मारक और शहीदों की स्मृति में लगाए गए ग्रेनाइट पिलर्स के स्वरूप पर भी विस्तार से विचार हुआ। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मंदिर की पवित्रता और मूल स्वरूप पर किसी भी प्रकार का प्रभाव न पड़े। निर्माण समिति के अध्यक्ष ने कहा कि निर्माण कार्य की रफ्तार को देखते हुए अनुमान है कि अक्टूबर के अंत तक अधिकांश कार्य पूरे हो जाएंगे। दिसंबर 2025 तक राम मंदिर के शेष निर्माण को लक्ष्य के अनुसार पूरा करने का विश्वास जताया गया। आज तीन कंपनियों द्वारा फसाद लाइटिंग का डेमोंस्ट्रेशन किया जाएगा। हाइब्रिड मॉडल, प्रोजेक्टर और लीनियर लाइटिंग के विकल्पों में से अंतिम चयन किया जाएगा। इस पूरी व्यवस्था पर 8 से 10 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है।

भारी बरसात से पंजाब में अलर्ट, भाखड़ा बांध के गेट खोले गए

चंडीगढ़ पंजाब के कई इलाकों में इस समय तेज बारिश हो रही है। इसी बीच भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने भाखड़ा डैम के फ्लड गेट खोलने का फैसला लिया है। बीबीएमबी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, आज दोपहर 3 बजे से क्रमबद्ध तरीके से भाखड़ा डैम के गेट खोले जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, आज दोपहर 3 बजे पहले चरण में फ्लड कंट्रोल गेट 1 फुट तक, 4 बजे दूसरे चरण में 2 फुट तक और 5 बजे तीसरे चरण में 3 फुट तक खोले जाएंगे। बीबीएमबी प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि पानी छोड़ने की प्रक्रिया सुचारू और सुरक्षित तरीके से पूरी की जा सके। इसी बीच डैम के आस-पास सायरन बजाए जाएंगे, ताकि लोगों को समय रहते सावधान किया जा सके और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सतर्कता बरती जा सके। बीबीएमबी के अनुसार, आज सुबह 6 बजे भाखड़ा डैम का जलस्तर 1665.06 फुट तक पहुंच चुका था, जबकि डैम की सामान्य जल भंडारण क्षमता 1680 फुट है। इस समय डैम की कुल क्षमता का 87 प्रतिशत हिस्सा पानी से भरा हुआ है और इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 

58 की उम्र पार करने वालों को अब सिर्फ 2 साल तक ही नौकरी का मौका, सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियोजन (री-इम्पलॉयमेंट) से संबंधित मामलों के निपटान के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हरियाणा सिविल सेवा (सामान्य) नियम, 2016 के नियम-143 के अनुसार केवल असाधारण या अपवादस्वरूप परिस्थितियों में ही 58 साल के बाद अधिकतम 2 वर्ष तक री-इम्पलॉयमेंट की अनुमति दी जा सकती है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा सभी प्रशासकीय सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को एक पत्र जारी किया गया है। पत्र अनुसार राज्य सरकार ने 18 जून, 2025 को जारी आदेशों के माध्यम से एक समिति का पुनर्गठन किया है। यह समिति उन व्यक्तिगत मामलों और श्रेणी या वर्ग के स्तर पर मामलों की समीक्षा करेगी जिनकी सेवाएं संगठन के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक हैं। प्रस्तावों पर विचार के लिए हर महीने एक निश्चित तिथि को समिति की बैठक होगी। संशोधित प्रक्रिया के अंतर्गत, प्रशासनिक विभाग यह सुनिश्चित करेंगे कि किन परिस्थितियों में संवानिवृत्त अधिकारियों या कर्मचारियों की सेवाएं सेवानिवृत्ति के बाद भी आवश्यक हैं। री-इम्पलॉयमेंट केवल उन्हीं मामलों में विचाराधीन होगी, जहां सेवाओं की प्रभावी आपूर्ति के लिए यह अपरिहार्य हो और जहां कनिष्ठ कर्मचारियों की पदोन्नति की संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसके अलावा, संबंधित अधिकारी का सेवा रिकॉर्ड अच्छा होना अनिवार्य है और उसके विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित न हो। री-इम्पलॉयमेंट की अधिकतम आयु सीमा 63 वर्ष निर्धारित की गई है ताकि अधिकारी या कर्मचारी 65 वर्ष की आयु तक कम से कम 2 वर्ष तक सेवा कर सकें। प्रशासनिक विभाग को अपने मंत्री-प्रभारी की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद संबंधित मामले मानव संसाधन विभाग (मानव संसाधन-1 शाखा) को भेजने होंगे। इसके बाद समिति अपनी सिफारिशें संबंधित प्रशासनिक विभाग को भेजेगी। इसके बाद संबंधित विभाग वित्त विभाग की सहमति प्राप्त कर मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद ही री-इम्पलॉयमेंट आदेश जारी करेंगे।

आयुष मंत्री परमार ने विभाग को स्कॉच अवॉर्ड-2025 पर दी बधाई, टीमवर्क और नवाचार को सराहा

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने, आयुष विभाग को प्रतिष्ठित "स्कॉच अवॉर्ड- 2025" (SKOCH Award-2025) मिलने पर बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। आयुष मंत्री  परमार ने कहा कि "स्कॉच अवॉर्ड- 2025" प्राप्त करना, प्रदेश के लिए गौरव का क्षण है। यह उपलब्धि टीम भावना, नवाचार और उत्कृष्ट कार्य का परिणाम है, जिससे नागरिकों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो रही हैं। प्रमुख सचिव आयुष  डी.पी. आहूजा ने भी इस उपलब्धि के लिए विभाग को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।  आहूजा ने कहा कि "आयुष ई-मॉनिटरिंग ने पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है तथा राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में आयुष चिकित्सा की सुलभता और गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।" विभागीय अधिकारियों की सतत् निगरानी एवं समन्वय ने विभाग की इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से ई-मॉनिटरिंग सिस्टम के सभी घटकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ, जिससे राज्यभर में आयुष सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आयुष विभाग को यह सम्मान 'आयुष ई-मॉनिटरिंग सिस्टम' परियोजना के सफल क्रियान्वयन एवं उत्कृष्ट परिणामों के लिए प्रदान किया गया है। यह अवार्ड तीन चरणों की विस्तृत प्रस्तुतियों (Presentations) और दो चरणों की सार्वजनिक डिजिटल वोटिंग के बाद प्रदान किया गया, जो इस उपलब्धि की पारदर्शिता और गुणवत्ता को और अधिक प्रमाणित करता है। "स्कॉच अवॉर्ड-2025" वितरण समारोह, 20 सितम्बर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली स्कॉच समिट के दौरान होगा। आयुष ई-मॉनिटरिंग के मुख्य उद्देश्य हैं- प्रदेश के आयुष चिकित्सालयों और चिकित्सा महाविद्यालयों में OPD (आउट पेशेंट विभाग) में अधिकतम वृद्धि करना, अधिक से अधिक नागरिकों को आयुष सुविधा कवरेज में लाना और लोगों को स्वस्थ एवं रोगमुक्त बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण आयुष सेवाएं उपलब्ध कराना। आयुष विभाग ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए माह में दो बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) कर सभी आयुष चिकित्सा अधिकारियों एवं आयुष मेडिकल कॉलेजों के साथ अनुभव साझा करना, समस्याओं का समाधान, कठोर निगरानी और मूल्यांकन, हर केंद्र के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा, प्रत्येक आयुष सुविधा की रैंकिंग प्रकाशित करना, प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण तैयार कर गुणवत्ता बढ़ाना, आयुष अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना अस्पतालों और कॉलेजों में आधुनिक सुविधाओं का विकास करना जैसे अनेक नवाचार अपनाए हैं।  

महंगाई पर राहत: छत्तीसगढ़ सरकार ने डीए बढ़ाया, अब मिलेगा 55% महंगाई भत्ता

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री ने महंगाई भत्ता (DA) में 2 प्रतिशत की वृद्धि का ऐलान किया है। इस बढ़ोतरी के बाद अब प्रदेश के कर्मचारियों को 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलेगा, जो केंद्र सरकार के बराबर होगा। महंगाई की मार झेल रहे कर्मचारियों के लिए यह निर्णय बड़ी राहत लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई भत्ते में हुई यह वृद्धि सीधे कर्मचारियों की आय को प्रभावित करेगी और त्योहारी सीजन में उनकी जेब थोड़ी और मजबूत होगी। केंद्र के समान लाभ अब राज्य कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में वही लाभ मिलेगा जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दिया जा रहा है। इससे प्रदेश के कर्मचारियों और अधिकारियों में उत्साह का माहौल है।  DA में 2% बढ़ोतरी; अब कुल 55% (केंद्र के समकक्ष) लाभार्थी: सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारी एवं पेंशनभोगी लागू होने की तिथि: वित्त विभाग की अधिसूचना के बाद प्रभावी वेतन/पेंशन बिल पर अतिरिक्त वित्तीय भार; सरकार ने इसे बजट प्रावधानों से वहन करने की बात कही सरकार ने महंगाई और लागत-जीवन सूचकांक में हालिया बदलावों को देखते हुए महंगाई भत्ते में 2% की बढ़ोतरी का फैसला लिया है। इस कदम से राज्य के कर्मचारियों का DA अब 55% हो जाएगा, जो केंद्र सरकार के बराबर है। वित्त विभाग जल्द ही औपचारिक अधिसूचना जारी करेगा, जिसके बाद बढ़ा हुआ DA आगामी वेतन और पेंशन भुगतान में समायोजित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय त्योहारी सीज़न से पहले खपत को बढ़ावा देगा और कर्मचारियों की क्रय-शक्ति में सुधार करेगा। साथ ही, पेंशनभोगियों को भी समकक्ष लाभ मिलेगा। मद पहले अब परिवर्तन महंगाई भत्ता (DA) 53% 55% +2%