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महिलाओं के लिए बड़ी राहत, यूपी सरकार देगी आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ

लखनऊ  महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ट्रिपल तलाक और एसिड अटैक जैसी गंभीर सामाजिक कुरुतियों और आपराधिक कृत्यों से प्रभावित महिलाओं को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए उन्हें आवास और हेल्थ इंश्योरेंस कवर प्रदान करने की तैयारी कर रही है. योगी सरकार इन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ देने की दिशा में काम कर रही है।  इसके साथ ही निराश्रित महिलाओं को भी इन योजनाओं के दायरे में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग ने इस संबंध में कार्रवाई तेज कर दी है. विभाग ट्रिपल तलाक और एसिड अटैक से प्रभावित महिलाओं के साथ-साथ निराश्रित महिलाओं का विस्तृत और सत्यापित डेटा एकत्र कर रहा है, ताकि पात्र लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सके. सरकारी स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देशों और शासनादेश को तैयार करने की प्रक्रिया भी जारी है।  प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा. योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र महिला जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे. इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है. हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिया था।  उन्होंने कहा था कि ट्रिपल तलाक या एसिड अटैक जैसी परिस्थितियों का सामना कर चुकी और जिनके पास स्थायी आवास नहीं है, ऐसी महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर उपलब्ध कराया जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि इन महिलाओं और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।  बता दें कि एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, कई सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता होती है. वहीं ट्रिपल तलाक से प्रभावित अनेक महिलाएं आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना करती हैं. ऐसे में आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराकर योगी सरकार उनके जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासरत है। 

किसानों से लेकर मेट्रो तक, मोहन सरकार ने लिए कई अहम फैसले; 15 जून तक पूरे होंगे तबादले

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों, अधोसंरचना विकास, प्रशासनिक सुधार और कृषि क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार कश्यप ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने कृषि, परिवहन, उर्वरक वितरण और ग्रामीण विकास को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई प्रस्ताव भी पारित किया। प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्ष पूरे होने पर बधाई प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई प्रस्ताव पारित किया गया। मंत्री चैतन्य कुमार कश्यप ने कहा कि बीते 12 वर्ष भारत के विकास, सुशासन और जनकल्याण की दृष्टि से ऐतिहासिक रहे हैं। उन्होंने बताया कि 5 जून से 21 जून तक प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से सरकार जनता तक पहुंचकर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी दे रही है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का फैसला राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को रसायन-मुक्त खेती के लाभों की जानकारी दी जाएगी और उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। 15 जून तक पूरी होगी तबादला प्रक्रिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार की नई तबादला नीति के तहत विभागीय स्थानांतरण की प्रक्रिया 15 जून तक हर हाल में पूरी कर ली जाए। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से व्यवस्थित करना है। भोपाल मेट्रो परियोजना को मिली अतिरिक्त वित्तीय सहायता कैबिनेट ने भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त राशि मिलने से परियोजना के कार्यों में तेजी आएगी और राजधानी भोपाल में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। कपास उत्पादक किसानों को राहत किसानों को राहत देने के उद्देश्य से सरकार ने कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क में कमी करने का फैसला लिया है। अब कपास पर प्रति गठान लगने वाला मंडी शुल्क एक रुपये से घटाकर 50 पैसे कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से कपास उत्पादक किसानों और कृषि व्यापारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा तथा कृषि विपणन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उर्वरक वितरण पर रहेगी विशेष निगरानी खरीफ सीजन की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रत्येक जिले में उर्वरक वितरण की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय लिया है। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्रों के विधायक और मंत्री भी समन्वय की भूमिका निभाएंगे ताकि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जा सके और किसी प्रकार की कमी या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। मंडी टैक्स बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किया गया कैबिनेट ने मंडी टैक्स को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार इस निर्णय से प्रतिवर्ष लगभग 835 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। इस राशि का उपयोग कृषि मंडियों के अधोसंरचना विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं के विस्तार तथा गोसंवर्धन से जुड़े कार्यों पर किया जाएगा। अगले कृषि सीजन की तैयारियां अभी से शुरू राज्य सरकार ने आगामी कृषि सीजन को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारियां शुरू करने का निर्णय लिया है। उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और कृषि से जुड़ी अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को खेती के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और कृषि कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें।

छात्राओं के लिए बड़ी सौगात! रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत मुफ्त स्कूटी देगी योगी सरकार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई कर रही छात्राओं के लिए एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार स्नातक प्रथम वर्ष की मेधावी छात्राओं को अपनी तरफ से मुफ्त स्कूटी देने की एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। इस महत्वाकांक्षी पहल का नाम 'रानी लक्ष्मी बाई योजना' रखा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य की बेटियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के आने से छात्राओं को कॉलेज आने-जाने में होने वाली दिक्कतों से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी। मेरिट के आधार पर चमकेगी मेधावियों की किस्मत सरकार की इस योजना का लाभ सीधे तौर पर उन छात्राओं को मिलेगा जो पढ़ाई-लिखाई में अव्वल हैं। स्कूटी देने के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जाएगी। योजना के नियमों के मुताबिक, छात्राओं को उनके स्नातक प्रथम वर्ष में प्राप्त अंकों के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। इन अंकों के आधार पर एक राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, और जो छात्राएं इस मेरिट में स्थान बनाएंगी, उन्हें सरकार की तरफ से मुफ्त स्कूटी का तोहफा दिया जाएगा। पहले चरण में 50 हजार छात्राओं को मिलेगी रफ्तार उत्तर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में इस समय कुल मिलाकर लगभग नौ लाख छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सरकार इस योजना को चरणों में लागू करने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने जो खाका तैयार किया है, उसके तहत पहले चरण में राज्य की 50 हजार सबसे मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की पूरी तैयारी कर ली गई है। जल्द ही मुख्यमंत्री के सामने होगा प्रजेंटेशन इस योजना को धरातल पर उतारने और इसका लाभ जल्द से जल्द छात्राओं तक पहुंचाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग दिन-रात काम कर रहा है। विभाग की ओर से इस योजना का पूरा प्रस्ताव और गाइडलाइंस तैयार कर ली गई हैं। बहुत जल्द ही उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने इस पूरी योजना का एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण करेंगे। मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलते ही इस योजना के तहत आवेदन करने की प्रक्रिया और तारीखों की घोषणा कर दी जाएगी। उत्तर प्रदेश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक स्तर पर करीब 9 लाख छात्राएं नामांकित हैं। इन सभी छात्राओं में से कड़ी स्क्रीनिंग और मेरिट लिस्ट के जरिए ही भाग्यशाली मेधावियों का चुनाव किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है, बल्कि कॉलेज आने-जाने में उन्हें आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाना भी है।

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद खादर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली  यमुना नदी के खादर क्षेत्र में बसी अनधिकृत कालोनियों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने यमुना के संरक्षित ओ-जोन इलाके से अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर एक्शन शुरू कर दिया है। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद डीडीए अवैध निर्माणों और बस्तियों को हटाने की कार्रवाई तेज कर सकती है। क्या है दिल्ली का O-Zone ? दिल्ली सरकार के मास्टर प्लान-2021 के अनुसार, यमुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को O-Zone घोषित किया गया है। यह इलाका वजीराबाद से ओखला तक करीब 22 किलोमीटर में फैला हुआ है और लगभग 9,700 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है। राजधानी का यह इलाके का उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और यमुना नदी को प्रदूषण से बचाना है। नियमों के अनुसार यहां आवासीय निर्माण और स्थायी मकान का निर्माण नहीं किया जा सकता है। क्यों चर्चा में है O-Zone? डीडीए के अनुसार, पिछले कई सालों में यमुना के खादर क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध बस्तियां और कालोनियां विकसित हो गई हैं। इनमें से कई जगहों पर सीवर और अन्य बुनियादी जरूरतों का भी अभाव है, जिसके कारण गंदा पानी सीधे यमुना में पहुंचता है। इससे नदीं प्रदूषित होती और बाढ़ का खतरा बढ़ता है। दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद डीडीए इसी ओ-जोन इलाके को मूल अवस्था में लाने के लिए बुलडोजर एक्शन शुरू कर रहा है। दिल्ली के O-Zone में कौन से इलाके? DDA के रिकॉर्ड के मुताबिक, यमुना फ्लडप्लेन के भीतर करीब 90 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां मौजूद हैं। इनमें मदनपुर खादर, जैतपुर, मीठापुर, झंगोला, सोनिया विहार के कुछ हिस्से, खजूरी खास, करावल नगर समेत यमुना किनारे के कई अन्य इलाके शामिल बताए जाते हैं। बता दें ओ-जोन बाढ़ क्षेत्र है, इसलिए कई इलाकों का पूरा हिस्सा इसके अंतर्गत नहीं आता है। बल्कि केवल यमुना के करीब स्थित कुछ हिस्से ही आते हैं।     मदनपुर खादर     जैतपुर     मीठापुर     झंगोला     सोनिया विहार के कुछ हिस्से     खजूरी खास     करावल नगर के कुछ हिस्से     जगतपुर     बुराड़ी के यमुना किनारे वाले क्षेत्र     उस्मानपुर     गढ़ी मांडू     शेरपुर     बेहटा हाजीपुर     ताजपुर खुर्द     छिल्ला गांव क्षेत्र     कोंडली के कुछ हिस्से     मयूर विहार के यमुना किनारे स्थित क्षेत्र     ओखला बैराज के आसपास के इलाके     आईटीओ बैराज के आसपास का फ्लडप्लेन क्षेत्र  

नारनौल बैठक में लापरवाही पर गिरी गाज, समय पर न पहुंचने पर अधिकारी निलंबित

चंडीगढ़ प्रशासनिक कामकाज में लापरवाही और अनुशासनहीनता को लेकर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने सख्त रुख अपनाया है। नारनौल के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में अधिकारियों की एक अहम बैठक के दौरान मंत्री ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी प्रमोद कुमार को सस्पेंड कर दिया है। क्यों गिरी निलंबन की गाज स्वास्थ्य मंत्री आज नारनौल में जिले के विकास कार्यों और प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा के लिए अधिकारियों की बैठक ले रही थीं। डीडीपीओ प्रमोद कुमार पर यह सख्त कार्रवाई मुख्य रूप से दो कारणों से की गई। क्षेत्र में चल रहे विभिन्न पंचायत एवं विकास कार्यों में खामियों और अनियमितताओं की बात सामने आई थी, जिसे लेकर मंत्री नाराज थीं। मंत्री द्वारा बुलाई गई इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में सभी प्रमुख अधिकारियों को समय पर उपस्थित होना था, लेकिन डीडीपीओ प्रमोद कुमार बैठक में देरी से पहुंचे। लापरवाही और समय की पाबंदी न होने पर मंत्री ने तुरंत प्रभाव से एक्शन लेते हुए उन्हें निलंबित करने के आदेश दे दिए। इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। बैठक में इनकी रही मौजूदगी स्वास्थ्य मंत्री द्वारा ली जा रही इस महत्वपूर्ण बैठक में स्थानीय विधायक ओमप्रकाश यादव, जिले के उपायुक्त सहित प्रशासन के सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस कार्रवाई के माध्यम से मंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  

तंजानिया के किलिमंजारो पर MP की बेटी का कमाल, महिला पुलिस अधिकारी ने की ऐतिहासिक चढ़ाई

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस की इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो फतह कर नया इतिहास रच दिया है। वह मध्यप्रदेश पुलिस की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्होंने इस विश्व प्रसिद्ध पर्वत पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की है। दीपिका भोपाल स्थित एससीआरबी (SCRB) पीएचक्यू में पदस्थ है। उन्होंने 29 मई को करीब 5,895 मीटर ऊंची माउंट किलिमंजारो की चोटी पर पहुंचकर यह उपलब्धि हासिल की। खास बात यह रही कि इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में वह भारत की एकमात्र प्रतिभागी थीं। ‘सपनों को नहीं छोड़ा पीछे’ दीपिका कहती हैं कि नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अक्सर लोग अपने सपनों को पीछे छोड़ देते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनका मानना है कि “सपनों के बिना जिंदगी अधूरी होती है,” और यही सोच उन्हें किलिमंजारो तक ले गई। पांच दिन का कठिन अभियान किलिमंजारो पर चढ़ाई पांच दिन का कठिन सफर था, जिसमें तीन बेस कैंप पार करने के बाद अंतिम चढ़ाई रात में शुरू हुई। इस दौरान तापमान माइनस 10 से 15 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम भी बेहद अनिश्चित था, जो हर पल बदल रहा था। पहले कर चुकी हैं कई ट्रेक हालांकि यह उनका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियान था, लेकिन इससे पहले वह अमरनाथ और केदारनाथ जैसे धार्मिक ट्रेक कई बार कर चुकी हैं। खुद को मल्टीटास्किंग बताते हुए दीपिका लगातार नई चुनौतियों को अपनाने में विश्वास रखती हैं। अगला मिशन जल्द इस उपलब्धि के बाद अब उनका अगला लक्ष्य भी तय है, हालांकि उन्होंने इसे फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया है। संकेत दिए हैं कि अगले साल वह विदेश में एक और पर्वत अभियान पर जा सकती हैं।

हर घर से उठेगा कचरा! गुरुग्राम के 606 करोड़ रुपये के मेगा टेंडर पर बड़ी बैठक

गुरुग्राम. साइबर सिटी में घर-घर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था को स्थायी और बेहतर बनाने पर मंगलवार को फैसला होगा। नगर निगम गुरुग्राम द्वारा जारी 606 करोड़ रुपये के डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर को चंडीगढ़ में होने वाली हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में मंजूरी मिलने की संभावना है। वहीं, मंजूरी मिलने के बाद अगले पांच वर्षों के लिए प्राइवेट एजेंसियों को काम सौंप दिया जाएगा, जिससे शहर में कूड़ा उठान व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जैसे ही बैठक में टेंडर पर मुहर लगेगी। एजेंसियां तीन महीने में काम शुरू कर देगी। नगर निगम क्षेत्र में 14 जून 2024 के बाद से कोई स्थायी एजेंसी कार्यरत नहीं है। पिछले करीब दो वर्षों से कूड़ा कलेक्शन का कार्य अस्थायी व्यवस्था के तहत विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से कराया जा रहा है। स्थायी एजेंसी नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में समय पर कूड़ा उठान और निगरानी से जुड़ी समस्याएं सामने आती रही हैं। चार जोन को दो क्लस्टर में बांटा नई व्यवस्था के तहत नगर निगम ने शहर के चारों जोनों को दो अलग-अलग क्लस्टर में विभाजित किया है। जोन-1 और जोन-2 को एक क्लस्टर तथा जोन-3 और जोन-4 को दूसरे क्लस्टर में शामिल किया गया है। पहले क्लस्टर के लिए चार निजी एजेंसियों ने आवेदन किया है, जबकि दूसरे क्लस्टर के लिए दो एजेंसियों ने भागीदारी की है। 606 करोड़ रुपये का है टेंडर नगर निगम ने दोनों क्लस्टरों के लिए कुल 606 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। इसमें जोन-एक और जोन-दो के क्लस्टर के लिए 295 करोड़ रुपये तथा जोन-तीन और जोन-चार के क्लस्टर के लिए 311 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। टेंडर आवंटन के बाद संबंधित एजेंसियां अगले पांच वर्षों तक कूड़ा कलेक्शन का कार्य करेंगी। गीले और सूखे कचरे के अलग संग्रह पर रहेगा जोर नई डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था में स्रोत स्तर पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करने पर विशेष फोकस रहेगा। निगम प्रशासन का मानना है कि इससे कचरा प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। हाई पावर कमेटी देगी अंतिम मंजूरी नगर निगम के चीफ इंजीनियर विजय ढाका ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली हाई पावर वर्क्स परचेज कमेटी में टेंडर सौंपने पर निर्णय होगा। कमेटी की मंजूरी के बाद चयनित एजेंसियों को कार्य आवंटित कर दिया जाएगा और नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। तीन महीने के अंदर एजेंसियां काम शुरू करेंगी।

फर्जी सिम के सहारे करोड़ों की ठगी! पंजाब में अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़

लुधियाना. एनफोर्समैंट डायरैक्टोरेट (ई.डी.) ने साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े मामले में पंजाब के लुधियाना सहित राजस्थान के विभिन्न शहरों में व्यापक कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पी.एम.एल.ए.) के तहत की गई। ईडी अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 5 जून को लुधियाना, किशनगढ़ (अजमेर), नागौर और जोधपुर में कुल 7 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एक ऐसे साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़ी है, जिसमें भारतीय मोबाइल नंबरों को फर्जी तरीके से सक्रिय कर मलेशियाई नागरिकों को उपलब्ध कराया गया था। बाद में इन नंबरों का इस्तेमाल कंबोडिया से संचालित साइबर ठगी के लिए किया गया। ई.डी. की जांच में सामने आया कि पॉइंट ऑफ सेल (पी.ओ.एस.) संचालकों द्वारा बड़ी संख्या में सिम कार्डों का दुरुपयोग किया गया। जांच एजैंसी के अनुसार हजारों भारतीय मोबाइल नंबरों को सक्रिय कर विदेश भेजा गया जिनका उपयोग देश के विभिन्न राज्यों में साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया गया। जांच के दौरान लगभग 2.30 लाख मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया। इनमें से करीब 36 हजार सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय पाए गए, जबकि लगभग 5,300 नंबर विभिन्न साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल होने के संकेत मिले। एजैंसी का अनुमान है कि इस नेटवर्क के कारण देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई है।

राजनांदगांव में स्वास्थ्य विभाग पर गिरी गाज, नाबालिग मामले में BMO के खिलाफ सख्त कार्रवाई

राजनांदगांव. सोमनी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में नाबालिग बालिका की गलत जांच मामले में राज्य शासन ने घुमका के बीएमओ डॉ. एनके टंडन पर कार्यवाही करते हुए उन्हे निलंबित कर दिया गया है. इस मामले को लेकर जिला प्रशासन द्वारा जांच टीम गठित की गई थी. गहन जांच के बाद जिला प्रशासन ने राज्य शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी. जिसके आधार पर राज्य शासन ने प्रथम दृष्टि में घुमका बीएमओ को दोषी पाया है. सूत्रों ने बताया कि प्रेगनेंसी कीट की खरीदी किए जाने के मामले में लापरवाही बरती गई थी. जिसके चलते किट से लिए गए सैंपल में रिपोर्ट पॉजिटिव पाया गया था. जब परिजनों ने दोबारा जांच के लिए जिला अस्पताल में सैंपल दिए थे, जहां रिपोर्ट निगेटिव पाई गई थी. जिसके बाद इस मामले में जमकर बवाल हुआ था. कांग्रेसियों ने पुलिस पर नाबालिग को प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया था. पहले भी हो चुकी कार्रवाई इस मामले में पुलिस प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर अलग जांच कराई गई थी. जिसमें सोमनी टीआई को एसपी द्वारा पहले ही निलंबित कर दिया गया था. वही दूसरी तरफ जिला प्रशासन स्तर पर गठित टीम ने अपने स्तर पर जांच की है. जिसमें बीएमओ को दोषी पाते हुए निलंबन की कार्रवाई  की गई है.

181 हेल्पलाइन पर त्वरित समाधान की समीक्षा, नथमल डिडेल ने लंबित मामलों पर जताई सख्ती

जयपुर वित्त (कर) विभाग के विशिष्ट शासन सचिव श्री नथमल डिडेल ने मंगलवार को शासन सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क पोर्टल (181) का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वित्त विभाग से संबंधित आमजन की शिकायतों के निवारण की स्थिति, पोर्टल की कार्यप्रणाली और दर्ज प्रकरणों के निस्तारण की प्रगति का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान श्री डिडेल ने 'राजस्थान संपर्क स्टेट व्यू' डैशबोर्ड के माध्यम से वित्त विभाग से जुड़े लोक सेवा गारंटी और अन्य परिवेदनाओं के आंकड़ों का लाइव अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनभावनाओं के अनुरूप आमजन की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। पोर्टल पर उपलब्ध सांख्यिकी की समीक्षा करते हुए विशिष्ट शासन सचिव ने बताया कि वित्त विभाग के अंतर्गत अब तक कुल 1,024 शिकायतें पंजीकृत की गई हैं, जिनमें से 913 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है, उन्होंने अधिकारियों को इन लंबित मामलों को तय समय-सीमा में जांच कर क्लोज करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान श्री डिडेल ने अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित कर आमजन को अधिक से अधिक राहत पहुंचाने के लिए पाबंद किया। निरीक्षण के दौरान राजस्थान संपर्क पोर्टल के माध्यम से त्वरित राहत पाने वाले विभिन्न आवेदकों से वार्ता में बेहद सकारात्मक परिणाम और जनता का संतोष देखने को मिला। पोर्टल पर दर्ज शिकायत के संबंध में बात करने पर दिव्यांग लाभार्थी डॉ. नीरज गुप्ता ने बताया कि उन्हें कम्यूटेशन (कम्युटेशन की राशि) और 300 पी.एल. की राशि का भुगतान प्राप्त हो चुका है। उन्होंने राजस्थान सरकार द्वारा संचालित इस सुगम व्यवस्था की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री महोदय का विशेष आभार व्यक्त किया। इसी प्रकार, एक अन्य शिकायत के मामले में दीनदयाल जी ने भी पुष्टि की कि उन्हें भी उनकी कम्यूटेशन और 300 पी.एल. की बकाया राशि का भुगतान मिल चुका है, जिसके लिए उन्होंने राज्य सरकार के प्रति सहर्ष धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके अतिरिक्त, ऑनलाइन सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्रथम अपील के शीघ्र निस्तारण हेतु आवेदन करने वाले आशु जी की परिवेदना का भी संपर्क पोर्टल के माध्यम से त्वरित समाधान किया गया, जिस पर उन्होंने भी इस विशेष सुविधा के लिए मुख्यमंत्री महोदय के प्रति गहरा आभार प्रकट किया। विशिष्ट शासन सचिव श्री नथमल डिडेल ने 'टाइमलाइन पेंडेंसी' का विश्लेषण करते हुए संतोष व्यक्त किया कि 181 से 365 दिनों से अधिक का कोई भी मामला गंभीर रूप से लंबित नहीं है और वर्तमान में अधिकांश लंबित प्रकरण  30 दिनों के भीतर की श्रेणी में हैं। उन्होंने जीएसटी  चोरी से संबंधित शिकायतों के विषय में गंभीरता दिखाते हुए शिकायतकर्ताओं से स्वयं बात की तथा उन्हें आश्वस्त किया कि इस संबंध में एक विशेष कमेटी का गठन कर पूरी पारदर्शिता के साथ पूर्ण रूप से जांच करवाई जाएगी। विभिन्न स्तरों L1, L2 व L3 पर मैप्ड अधिकारियों के कार्य की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि आमजन की समस्याओं का समाधान धरातल पर होना चाहिए और शिकायतकर्ता की संतुष्टि ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।   उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार आमजन की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए सभी विभागों के सचिव निर्धारित तिथियों पर राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम में उपस्थित होकर परिवादियों से सीधे संवाद कर रहे हैं। इस पहल के माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर शीघ्र समाधान प्राप्त कर रहे हैं