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मौसम पूर्वानुमान में यूपी को बड़ी ताकत, लखनऊ में नया मौसम विज्ञान केंद्र शुरू, सीएम योगी ने किया उद्घाटन

 लखनऊ सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ.जितेंद्र सिंह के साथ बटन दबाकर लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया। सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ में इस केंद्र की स्थापना से उत्तर प्रदेश को विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि महज 11 फीसदी कृषि योग्य भूमि में यूपी देश का 21 फीसदी खाद्यान्न उत्पादन करता है। समय पर मौसम, बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि या ओलावृष्टि की जानकारी नहीं मिलेगी तो हम किसानों के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे। मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 सालों में किए गए कामों के परिणाम अब स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। सीएम ने सहारनपुर की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वहां शिवालिक पहाड़ी की तलहटी में मां शाकम्भरी देवी का मंदिर है। देहरादून व शिवालिक पहाड़ियों में भारी बरसात हुई। यहां बारिश होने से एकत्र होने वाला जल बाढ़ जैसा माहौल पैदा कर देता है। उस समय मंदिर में कीर्तन चल रहा था, काफी श्रद्धालु मौजूद थे, लेकिन मौसम विभाग ने समय से सही जानकारी दी तो सभी को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया, जिससे जनधन की व्यापक हानि रुक गई। उन्होंने कहा कि यूपी में अब आपदा से तीन घंटे पहले मोबाइल पर अलर्ट मिलने लगे हैं। उन्होंने बताया कि 13 मई को आंधी-तूफान से प्रदेश के कुछ जिलों में जनधन की काफी हानि हुई थी। बैठक में मैंने पूछा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम क्यों काम नहीं कर रहा था। पता चला कि सिस्टम तो काम कर रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की सक्रियता का अभाव है। फिर रात में पूरे प्रदेश के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मैंने कहा कि जब आपको अलर्ट मिल रहा है तो आपको भी स्थानीय स्तर पर लोगों व संस्थाओं को अलर्ट करना चाहिए। इस बैठक के चौथे-पांचवें दिन भी आपदा आई, लेकिन तीन घंटे पहले सबके मोबाइल पर अलर्ट आना प्रारंभ हो गया। सीएम योगी ने कहा कि हम लोग सीजन में अतिवृष्टि-अनावृष्टि, आकाशीय बिजली आदि के संबंध में मेट्रोलॉजिकल और अन्य विभागों की बैठक में चर्चा करते थे कि समय पर सटीक जानकारी मिलने से सही रणनीति संभव होती है। आज केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में लखनऊ खुद को मेट्रोलॉजिकल रीजनल सेंटर के रूप में स्थापित कर रहा है। य़ह यूपी के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सीएम ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रति आभार भी जताया। 12 वर्ष में आए परिवर्तन का दिखता है लाभ सीएम ने कहा कि आजादी के बाद इस विषय पर अपेक्षित ध्यान न देने का परिणाम था कि अन्नदाता किसान अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाए। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनधन की हानि को रोकने वाले प्रयास भी अधूरे रहे। लेकिन, पिछले 12 वर्ष में पीएम मोदी के नेतृत्व में डॉ. जितेंद्र सिंह ने जो अभियान प्रारंभ किया, उसका परिणाम सभी देख रहे हैं। 12 वर्ष पहले बारिश, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, आकाशीय बिजली के खतरों के बारे में जो जानकारी मिलती थी, होता उससे ठीक उल्टा था, लेकिन अब मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त हो रही है। अर्ली वार्निंग सिस्टम का लाभ सीएम योगी ने कहा कि मीरजापुर, सोनभद्र, चंदौली आदि कई जनपदों में आकाशीय बिजली का खतरा बहुत रहता है। हर वर्ष 100-150 लोगों की मौत होती थी। चार-पांच वर्ष पहले प्रयागराज से पटना के बीच एक ही दिन में 90 मौतें हुई थीं। इसमें यूपी के 30 व बिहार के 60 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, एमडीएमए, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की बैठक में मैंने पूछा कि आखिर इन मौतों को कौन रोकेगा। क्या इसे तकनीक से रोका नहीं जा सकता, तब विभाग ने बताया कि यह संभव है। अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का परिणाम है कि उक्त जिलों में हर वर्ष होने वाली मौत के आंकड़े घटकर महज दर्जन भर रह गए। लोगों को भी ऐसे मौसम में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, सतर्क रहना चाहिए। अपना सेटेलाइट चाहती है राज्य सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी को सदैव डॉ. जितेंद्र सिंह का सकारात्मक सहयोग मिलता है। मौसम की पूर्व जानकारी किसानों की आमदनी बढ़ाने और आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, अनावृष्टि और ओलावृष्टि के कारण होने वाली जनधन की हानि को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमने इसरो से भी अनुरोध किया था कि राज्य सरकार चाहती है कि उसके पास अपना सेटेलाइट हो, जो मौसम की और सटीक जानकारी उपलब्ध करा सके। चिड़िया और जानवरों का व्यवहार बता देता था मौसम का रुख मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य ने जबसे बुद्धिमत्ता का उपयोग प्रारंभ किया होगा, उसके लिए सबसे पहले मौसम की जानकारी, आकाश में चमकती बिजली, बादलों से होने वाली वर्षा जैसी स्थितियां कौतूहल का विषय बनीं। ऋषि-मुनियों ने स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पंचांग का निर्माण किया। आज भी ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर की गई गणना मौसम की सटीक जानकारी का आधार बनती है। लोक कहावतों, लोक परंपराओं में भी हम देखते थे कि अमुक चिड़िया की बोली या जानवरों का व्यवहार परिवर्तन मौसम की पूर्व जानकारी देने का माध्यम बनता था। मौसम चक्र में आया एक महीने का अंतर सीएम ने कहा कि क्लाईमेट चेंज होने से मौसम चक्र में लगभग एक महीने का अंतर आया है। यही हाल रहा तो देश-दुनिया के सामने भीषण खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। हमने स्वार्थ के लिए प्रकृति का दोहन किया है तो प्रकृति भी हमसे विमुख होती दिख रही है। यदि हम संस्कारों को पुनर्जीवित और धऱती मां के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन कर लें तो इसे सुधारने में मदद मिल सकती है। समय पर मौसम विभाग की जानकारी मिलने से किसानों व अर्थव्यवस्था को होने वाली क्षति तथा खाद्यान्न संकट टालने में सफल हो सकते हैं। किसानों को देते हैं पांच लाख की सहायता सीएम योगी ने आकाशीय बिजली से मौतों पर दुख जताते हुए कहा कि किसान, सह किसान (बटाईदार) और पारिवारिक सदस्य की आपदा में मौत होने पर सरकार मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा के तहत तत्काल पांच लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराती है। गंगा, यमुना, सरयू, राप्ती व गंडक समेत कई नदियों में बाढ़ … Read more

योगी सरकार की टेक होम राशन योजना से यूपी में कुपोषण में बड़ी गिरावट, डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ी

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश अब देश में मातृ एवं शिशु पोषण में सुधार करने वाला सबसे अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजनरी मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित 'टेक होम राशन' योजना ने राज्य से कुपोषण को जड़ से मिटाने की मुहिम को एक नई और वैज्ञानिक दिशा दी है। भारत सरकार की 'सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0' गाइडलाइन को इतने बड़े पैमाने पर धरातल पर उतारने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। वर्तमान में इस पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के जरिए हर महीने रिकॉर्ड 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक उच्च गुणवत्ता वाला पुष्टाहार सीधे पहुँच रहा है। डिजिटल निगरानी से पारदर्शी हुई वितरण प्रणाली योगी सरकार ने पुष्टाहार वितरण में होने वाले पुराने भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए पूरी सप्लाई चेन को आधुनिक तकनीक से लैस कर दिया है। हाईटेक ट्रैकिंग: राशन के हर पैकेट की डिजिटल निगरानी के लिए जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग और क्यूआर (QR) कोड प्रणाली लागू की गई है। ओटीपी सत्यापन: आंगनवाड़ी केंद्रों से लाभार्थियों को पुष्टाहार सौंपते समय ओटीपी आधारित सत्यापन किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि राशन केवल सही हकदार तक ही पहुँचे। दिखने लगा जमीनी असर बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर के अनुसार, सरकार की इस केंद्रित नीति के परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर के स्वास्थ्य सर्वे में भी प्रमाणित हो रहे हैं। स्टंटिंग में कमी: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम लंबाई) की दर 39.7 प्रतिशत से भारी गिरावट के साथ 31.5 प्रतिशत पर आ गई है। कुपोषण पर लगाम: बच्चों में अल्पवजन और दुबलेपन जैसी गंभीर समस्याओं में भी उल्लेखनीय और ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है। आयु के अनुसार तैयार हो रहे विशेष 'पोषण उत्पाद' इस योजना के तहत लाभार्थियों की शारीरिक जरूरत के हिसाब से अलग-अलग रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार तैयार किए जा रहे हैं। बच्चों के लिए: शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, आरोग्य पोषण और बाल संजीवनी जैसे ऊर्जा से भरपूर उत्पाद। माताओं के लिए: गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के संतुलित स्वास्थ्य के लिए विशेष 'संपूर्ण मातृ आहार'। महिला स्वयं सहायता समूहों को मिली उत्पादन की कमान यह योजना केवल स्वास्थ्य सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की भी नई मिसाल बन चुकी है। रोजगार की नई राह: टेक होम राशन के निर्माण और उसकी आपूर्ति की पूरी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। आर्थिक रूप से सशक्त: वर्तमान में प्रदेश की 4,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं सीधे तौर पर इन हाईटेक उत्पादन इकाइयों का संचालन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। 1.56 करोड़ लाभार्थियों को सुरक्षा कवच इस योजना के तहत हर महीने छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं और गंभीर रूप से अतिकुपोषित बच्चों समेत 1.56 करोड़ लोगों को कवर किया जा रहा है। तकनीक, सामाजिक समावेशन और पोषण के इस अनूठे समन्वय ने उत्तर प्रदेश को 'सक्षम और सुपोषित भारत' के संकल्प को सिद्ध करने वाला देश का सबसे सशक्त राज्य बना दिया है।  

मुख्यमंत्री सैनी करेंगे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ की शुरुआत, बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा

चंडीगड़ हरियाणा सरकार की ओर से प्रदेश के बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने की कड़ी में आज एक बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आज कुरुक्षेत्र पहुंच रहे हैं, जहां वे राज्य सरकार के विशेष उपक्रम 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आगाज करेंगे। इस योजना के तहत कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से गुजरात के सुप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के लिए एक विशेष ट्रेन रवाना की जाएगी। मुख्यमंत्री दोपहर ठीक 1 बजे इस पावन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर श्रद्धालुओं को गंतव्य के लिए विदा करेंगे। ऐन वक्त पर बदला मुख्यमंत्री का शिड्यूल, अब ब्रह्मसरोवर पर टेकेंगे माथा कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान मुख्यमंत्री के तय कार्यक्रम में आंशिक बदलाव किया गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री को ऐतिहासिक स्थाणु महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करनी थी। हालांकि, अब नए शिड्यूल के मुताबिक वे सीधे ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित सर्वेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे। यहां वे विशेष पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे और इसके तुरंत बाद सीधे कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन के लिए रवाना होंगे। 7 जिलों के श्रद्धालुओं को सौगात, रहने-खाने का पूरा खर्च उठाएगी सरकार इस विशेष तीर्थ यात्रा को लेकर कुरुक्षेत्र समेत पूरे प्रदेश के बुजुर्गों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से शुरू हो रही इस ट्रेन में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कैथल, फतेहाबाद और सिरसा जिलों के चयनित बुजुर्ग श्रद्धालु भी सवार होंगे। कुल 5 दिनों की इस धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के रहने, खाने-पीने और रेलवे स्टेशन से लेकर सोमनाथ मंदिर तक लाने-ले जाने की तमाम जिम्मेदारी और खर्च प्रदेश सरकार खुद उठा रही है।  

परिवार पहचान पत्र से पारदर्शी शासन को बढ़ावा, 2.99 करोड़ नागरिकों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार

चंडीगढ़  हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना केवल एक डिजिटल डाटाबेस नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। राज्य में कुल 77.50 लाख परिवार पहचान पत्र में पंजीकृत हैं, जिनमें से 23.30 लाख परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। यह कुल परिवारों का लगभग 30.07 प्रतिशत है, जो महिलाओं की बढ़ती सामाजिक भागीदारी और नेतृत्व क्षमता की तरफ इशारा कर रहा है। पीपीपी के स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र लगभग 2.99 करोड़ नागरिकों का एकीकृत डिजिटल रिकार्ड तैयार कर चुका है, जिससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचना सुनिश्चित हुआ है। महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे है, जहां 1.61 लाख से अधिक परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। इसके बाद करनाल (1.41 लाख), सोनीपत (1.29 लाख), जींद (1.23 लाख) और गुरुग्राम में (1.22 लाख) परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। राज्यभर में कुल 23 लाख 30 हजार 394 परिवारों में महिलाओं को परिवार के मुखिया के रूप में दर्ज किया गया है। डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी व्यापक पारिवारिक संरचना है। इस प्रणाली में 105 प्रकार के रिश्तों को दर्ज करने की सुविधा है, जिससे परिवारों का वास्तविक और सटीक डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से संभव हो रही है। पीपीपी के माध्यम से आय, परिवार संरचना और अन्य आवश्यक जानकारियों का डिजिटल सत्यापन होने से नागरिकों को विभिन्न विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सतीश खोला ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने परिवार पहचान पत्र में दर्ज जानकारी को समय-समय पर अपडेट करते रहें, ताकि सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ उन्हें निर्बाध रूप से मिलता रहे।

सतीश पूनियां और अलका गुर्जर ने दाखिल किया राज्यसभा पर्चा

जयपुर राजस्थान राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राजस्थान इकाई के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनियां और राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर ने अपना नामांकन भर दिया है. दोनों नेताओं ने विधानसभा परिसर पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़, डिप्टी सीएम प्रेम चंद बैरवा और दीया कुमारी, सांसद मंजू शर्मा, सांसद घनश्याम तिवारी समेत राजस्थान सरकार के कई मंत्री और दूसरे प्रमुख नेता मौजूद रहे. बीजेपी के दोनों प्रत्याशियों का जोरदार स्वागत सतीश पूनियां और अलका गुर्जर ने दोपहर करीब 12:30 बजे शुभ मुहूर्त में पर्चा दाखिल किया. दोनों प्रत्याशी और बाकी नेता इससे पहले जयपुर में बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में इकट्ठे हुए. वहां दोनों प्रत्याशियों का जोरदार स्वागत किया गया. संख्या बल के हिसाब से राजस्थान में बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलेगी. कांग्रेस के नीरज डांगी पहले ही अपना नामांकन कर चुके हैं. अगर आज किसी चौथे उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया तो बीजेपी और कांग्रेस के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो जाएंगे. 11 जून को नामांकन पत्रों की जांच के बाद औपचारिक तौर पर तीनों के निर्वाचन का ऐलान कर दिया जाएगा. सीएम भजनलाल शर्मा ने दी बधाई राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सतीश पूनियां और अलका गुर्जर के साथ तस्वीर शेयर कर उन्हें बधाई दी. सीएम भजनलाल शर्मा ने लिखा, "आज भाजपा प्रदेश कार्यालय में राज्यसभा चुनाव हेतु राजस्थान से भाजपा प्रत्याशी सतीश पूनियां और अलका गुर्जर से नामांकन से पूर्व आत्मीय भेंट कर उनका अभिनंदन किया तथा शुभकामनाएं दीं. इस अवसर पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन अजेय कुमार, और केंद्रीय गजेंद्र सिंह शेखावत सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारीगण, जनप्रतिनिधिगण एवं सम्मानित कार्यकर्ता उपस्थित रहे." मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट – इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति – धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं.  

PPP से बदली तस्वीर! हरियाणा में लाखों महिलाओं को मिली परिवार की मुखिया की पहचान

चंडीगढ़. हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना केवल एक डिजिटल डाटाबेस नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, पारदर्शी प्रशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। राज्य में कुल 77.50 लाख परिवार पहचान पत्र में पंजीकृत हैं, जिनमें से 23.30 लाख परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। यह कुल परिवारों का लगभग 30.07 प्रतिशत है, जो महिलाओं की बढ़ती सामाजिक भागीदारी और नेतृत्व क्षमता की तरफ इशारा कर रहा है। पीपीपी के स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र लगभग 2.99 करोड़ नागरिकों का एकीकृत डिजिटल रिकार्ड तैयार कर चुका है, जिससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचना सुनिश्चित हुआ है। महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे महिला मुखिया परिवारों की संख्या में फरीदाबाद सबसे आगे है, जहां 1.61 लाख से अधिक परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। इसके बाद करनाल (1.41 लाख), सोनीपत (1.29 लाख), जींद (1.23 लाख) और गुरुग्राम में (1.22 लाख) परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं। राज्यभर में कुल 23 लाख 30 हजार 394 परिवारों में महिलाओं को परिवार के मुखिया के रूप में दर्ज किया गया है। डॉ. सतीश खोला के अनुसार परिवार पहचान पत्र की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक व्यापक पारिवारिक संरचना है। इस प्रणाली में 105 प्रकार के रिश्तों को दर्ज करने की सुविधा है, जिससे परिवारों का वास्तविक और सटीक डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से संभव हो रही है। पीपीपी के माध्यम से आय, परिवार संरचना और अन्य आवश्यक जानकारियों का डिजिटल सत्यापन होने से नागरिकों को विभिन्न विभागों में बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सतीश खोला ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने परिवार पहचान पत्र में दर्ज जानकारी को समय-समय पर अपडेट करते रहें, ताकि सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ उन्हें निर्बाध रूप से मिलता रहे।

सीमा पार से हथियार सप्लाई का नेटवर्क बेनकाब, पंजाब पुलिस ने 4 आरोपियों को दबोचा

अमृतसर. पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए हथियारों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मिली जानकारी के अनुसार, अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने बॉर्डर पार से गैर-कानूनी हथियारों की तस्करी और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एक अफगान नागरिक समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पंजाब पुलिस के DGP गौरव यादव ने इस संबंधी जानकारी देते हुए ट्विटर पर शेयर की। DGP ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से 8 अल्ट्रा-मॉडर्न पिस्तौल और 7 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी विदेश में बैठे एक तस्कर के संपर्क में थे, जो छिपी हुई जगहों से गैर-कानूनी हथियारों की खेप भेजता था। बरामद हथियारों की सप्लाई के लिए क्रिमिनल लोगों तक पहुंचाया जाना था। अमृतसर के पुलिस स्टेशन इस्लामाबाद और पुलिस स्टेशन गेट हकीमा में FIR दर्ज की गई है। DGP ने कहा कि विदेश में मौजूद नेटवर्क से जुड़े दूसरे साथियों की पहचान करने और और बरामदगी और गिरफ्तारियों का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है। पंजाब पुलिस गैर-कानूनी हथियारों की तस्करी, हवाला ऑपरेशन और ऑर्गनाइज्ड क्राइम के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी पर पूरी तरह से कायम है।

वन्यजीव सुरक्षा में बड़ा कदम, हाथियों से जुड़े मामलों की जांच के लिए वन कर्मियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

सूरजपुर/ रायपुर. प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा रायगढ़ में हाथियों की मृत्यु की वैज्ञानिक जांच एवं वन्यजीव अपराधों की पहचान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।  “कार्यक्रम में एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच की आवश्यक प्रक्रियाएं” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों से आए 78 वन अधिकारी एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, वन्यजीव अपराधों की पहचान तथा संरक्षण संबंधी प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना था। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 450 हाथियों की उपस्थिति है। रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जैसे जिलों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही तथा मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों को देखते हुए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। वन विभाग का मानना है कि किसी हाथी की मृत्यु के पीछे बीमारी, विद्युत प्रवाह, विषप्रयोग, शिकार अथवा अन्य कारणों की सटीक पहचान किए बिना भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम और दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई संभव नहीं है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को हाथियों की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य, व्यवहार एवं प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी हाथी की मृत्यु की जांच केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित विस्तृत अध्ययन है। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि जंगल में मिला मृत हाथी संभावित रूप से एक अपराध स्थल भी हो सकता है, इसलिए घटनास्थल को सुरक्षित रखने, साक्ष्य एकत्रित करने तथा संदिग्ध परिस्थितियों की पहचान करने की प्रक्रियाओं का पालन अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में वन्यजीव अपराधों की जांच, साक्ष्यों के संरक्षण, हाथी दांत तस्करी से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं तथा न्यायालय में उपयोगी वैज्ञानिक प्रमाणों के संकलन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों को यह भी सिखाया गया कि जांच के दौरान प्राप्त जैविक नमूनों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए ताकि प्रयोगशाला परीक्षणों में उनकी गुणवत्ता बनी रहे। प्रशिक्षण के दूसरे दिन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को फील्ड स्तर पर हाथियों के शव परीक्षण, नमूना संग्रहण, रक्त एवं ऊतक नमूनों के संरक्षण तथा विष विज्ञान एवं रोग परीक्षण के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कठिन परिस्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षित तरीके से शव परीक्षण करने की तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान तथा वन्यजीव फोरेंसिक एवं स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान के विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए आधुनिक वन्यजीव फोरेंसिक तकनीकों और वैज्ञानिक जांच पद्धतियों की जानकारी साझा की। प्रशिक्षण के दौरान दोनों विभागों के अधिकारियों ने वन्यजीव रोगों की निगरानी, वन्यजीव अपराधों की जांच तथा संरक्षण संबंधी गतिविधियों में साझा कार्यप्रणाली विकसित करने पर बल दिया। अचानकमार टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक प्रियंका पांडे सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सक्रिय रूप से भागीदारी की। प्रशिक्षण में सभी 78 प्रतिभागियों को हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों की मृत्यु जांच के लिए मानकीकृत वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इससे छत्तीसगढ़ वन विभाग की फोरेंसिक जांच, रोग निगरानी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण तथा वन्यजीव संरक्षण की क्षमता और अधिक मजबूत होगी। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है। हाथियों सहित सभी वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने विभाग निरंतर क्षमता निर्माण, अनुसंधान और नवाचार आधारित प्रयास कर रहा है। यह प्रशिक्षण उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो प्रदेश में हाथियों के दीर्घकालिक संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगा।

नामांकन खत्म होते ही तय हुई जीत, बिहार विधानपरिषद की 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन

पटना बिहार विधानपरिषद चुनाव के लिए एनडीए और महागठबंधन उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया सोमवार को पूरी हो गई। अंतिम दिन एनडीए की ओर से नौ उम्मीदवारों ने नामांकन किया जबकि महागठबंधन की ओर से केवल एक ही नामांकन किया । विधानपरिषद की दस सीटों के लिए दस उम्मीदवार मैदान में हैं। तीन बजे नामांकन की अवधि खत्म होते ही इन सभी उम्मीदवारों की जीत भी पक्की हो गई क्योंकि, दीपक प्रकाश के नामांकन नहीं करने से वोटिंग की स्थिति नहीं बन पाई। 18 जून को मतदान होना सुनिश्चित किया गया था नामांकन करने वालों में जदयू से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद के अलावा भाजपा से संजय प्रकाश मयूख, पवन सिंह, अनिल ठाकुर और शीला पंडित जबकि लोजपा ने अशरफ अंसारी हैं। निशांत कुमार सदन का सदस्य बनने से पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन चुके हैं। राजद ने राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनील सिंह को टिकट दिया है। उन्हें दूसरी बार यह मौका मिला है। सुनील सिंह ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। हालांकि, लालू की बेटी और तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्या ने सुनील सिंह को टिकट दिए जाने का विरोध किया है। बिहार विधान परिषद की जिन दस सीटों के चुनाव हो रहे हैं उनमें सात सीटें विधान पार्षदों का टर्म पूरा होने के कारण खाली हो रहे हैं। दो सीट सम्राट चौधरी और और भगवान सिंह कुशवाहा के विधानसभा जाने से खाली हुआ। सभी का टर्म 28 जून को पूरा हो रहा है। इन सीटों पर जीतने वाले उम्मीदवारों का कार्यकाल 6 सालों का होगा। एक सीट नीतीश कुमार के इस्तीफे के कारण खाली हुआ। इस सीट पर जदयू ने ललन प्रसाद को मौका दिया है। ललन प्रसाद का कार्यकाल चार वर्षों का होगा। इस चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा के मंत्री बेटे दीपक प्रकाश को मौका नहीं मिला। एनडीए ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया। सोमवार को अंतिम दिन उन्होंने नामांकन भी दाखिल नहीं किया। इस वजह से उनके मंत्री पद पर भी तलवार लटक गई है क्योंकि, दीपक प्रकाश वर्तमान में किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। उपेंद्र कुशवाहा खेमे में इससे नाराजगी देखी जा रही है। सोमवार को एनडीए के सभी घटक दलों के नेता नामांकन में पहुंचे पर उपेंद्र कुशवाहा और दीपक प्रकाश नहीं दिखे। इससे पहले रविवार को पार्टी के अधिवेशन में उपेंद्र कुशवाहा नें कहा कि जदयू और आरएलएम की विचारधारा मेल खाती है पर भाजपा की अलग है। भाषण में उनका दर्द भी छलका। उपेंद्र कुशवाहा पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए दिल्ली जा रहे हैं।

नव भारत साक्षरता अभियान में बड़ी सफलता, योगी सरकार ने 11.68 लाख से अधिक लोगों को बनाया साक्षर

नव भारत साक्षरता अभियान: योगी सरकार ने 11.68 लाख से अधिक लोगों को बनाया साक्षर – 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए प्रदेशभर में चलाया जा रहा नव भारत साक्षरता कार्यक्रम – वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 13.81 लाख प्रतिभागियों ने दी साक्षरता परीक्षा – 11.68 लाख से अधिक नव साक्षरों ने सफलतापूर्वक हासिल की साक्षरता – वर्ष 2026-27 में भी व्यापक अभियान चलाकर निरक्षरता उन्मूलन को दी जाएगी नई गति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और निरक्षरता मुक्त प्रदेश के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में संचालित नव भारत साक्षरता कार्यक्रम लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रहा है।  15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक प्रदेश में 11.68 लाख से अधिक लोगों को साक्षर बनाया जा चुका है। यह अभियान शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता, जागरूकता और सामाजिक सशक्तीकरण को नई मजबूती दे रहा है। केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर नागरिकों को चिह्नित कर वालंटियर्स और प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के सहयोग से साक्षर बनाया जा रहा है। कार्यक्रम के अन्तर्गत लाभार्थियों को पढ़ना, लिखना और गणना करना सिखाने के साथ-साथ दैनिक जीवन में उपयोगी बुनियादी ज्ञान से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे वे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में अधिक प्रभावी भागीदारी कर सकें। लाखों लोगों को साक्षर बनाकर सरकार न केवल निरक्षरता के खिलाफ लड़ाई को मजबूती दे रही है, बल्कि आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त उत्तर प्रदेश के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। घर-घर पहुंच रही शिक्षा की रोशनी अभियान के अंतर्गत चिह्नित वालंटियर्स को प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके बाद वालंटियर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से साक्षरता कक्षाओं का संचालन करते हैं। प्रदेशभर में संचालित ये कक्षाएं हजारों लोगों के जीवन में नया आत्मविश्वास पैदा कर रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल अक्षर ज्ञान उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नागरिकों को जागरूक, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना भी है। 13.81 लाख प्रतिभागियों ने दी परीक्षा, 11.68 लाख हुए सफल नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में अब तक सात साक्षरता मूल्यांकन परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं। इन परीक्षाओं में कुल 13,81,530 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 11,68,292 प्रतिभागी सफल घोषित हुए। वर्ष 2022-23 में आयोजित परीक्षा में 1.46 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि वर्ष 2025-26 में आयोजित नवीनतम परीक्षा में 4.01 लाख से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता दर्ज की गई। यह आंकड़े अभियान की बढ़ती पहुंच और प्रभावशीलता के गवाह हैं। वर्ष 2026-27 के लिए तैयार नई कार्ययोजना योगी सरकार नव भारत साक्षरता कार्यक्रम को वर्ष 2026-27 में और अधिक व्यापक एवं परिणामोन्मुख बनाने की तैयारी कर चुकी है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश के सभी जनपदों को 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को चिह्नित कर उन्हें साक्षर बनाने का लक्ष्य सौंपा गया है। इसके अंतर्गत चिह्नित असाक्षरों को वालंटियर्स से जोड़ा जाएगा, जिन्हें प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स द्वारा विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके बाद वालंटियर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से साक्षरता कक्षाओं का संचालन करेंगे। अभियान की प्रगति का नियमित अनुश्रवण होगा तथा भारत सरकार के निर्देशानुसार वर्ष में दो बार साक्षरता मूल्यांकन परीक्षाएं आयोजित कर नव साक्षरों की उपलब्धियों का आकलन किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों को शिक्षा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर, जागरूक और समाज की मुख्यधारा का सक्रिय भागीदार बनाना है।