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कलेक्टर के नाम से आदेश जारी करने पर घिरे DEO, RTI मामलों में अनदेखी का भी आरोप

बलरामपुर. बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) मनीराम यादव एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. डीईओ की कार्यप्रणाली को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. आरोप है कि विभागीय नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से काम किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, जिला शिक्षा अधिकारी अपने कार्यालय के आधिकारिक लेटरपैड का उपयोग करने के बजाय कई मामलों में कलेक्टर कार्यालय के नाम से आदेश जारी कर रहे हैं. इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकार क्षेत्र को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं. बताया जा रहा है कि डीईओ कार्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों से समन्वय स्थापित करने में असफल रहे हैं. कार्यालय के नियमित कर्मचारियों को दरकिनार कर बाहरी लोगों से काम लिया जा रहा है. इस बीच डीईओ पर यह भी आरोप है कि विद्यालयों से मंगाए गए महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कार्यालय में रखने के बजाय निजी निवास पर ले जाया जाता है. सूत्रों का कहना है कि कई बार संबंधित शाखा के कर्मचारियों को भी इन दस्तावेजों की जानकारी नहीं होती, जिससे कार्यालयीन कार्य प्रभावित होते हैं. सूचना के अधिकार (आरटीआई) के मामलों में भी गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि सैकड़ों आरटीआई आवेदन लंबित पड़े हैं, जबकि आवक-जावक शाखा को भी कई मामलों की जानकारी नहीं दी जाती. इससे आवेदकों को समय पर जानकारी नहीं मिल पा रही है. गौरतलब है कि जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव पूर्व में भी कई विवादों और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में रहे हैं. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभागीय सूत्रों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले में जिले के नवनियुक्त कलेक्टर संजय चंदन त्रिपाठी से टेलिफोनिक चर्चा की तो उन्होंने कहा कि मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है अगर ऐसा आदेश जारी किया जा रहा है तो विधिवत जांच कराई जाएगी और उचित क्रिया भी लिया जाएगा.

दिग्विजय सरकार में बंद हुआ ट्रिब्यूनल अब फिर होगा शुरू, ड्राफ्ट तैयार करा रही मोहन यादव सरकार

भोपाल  म.प्र. के अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर राज्य सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल गठित करने की तैयारी में है। इसको लेकर सहमति बन चुकी है। वर्तमान में जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में कर्मचारियों के भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े करीब साढ़े चार लाख मामले लंबित हैं। ट्रिब्यूनल के गठन से इन मामलों का अलग से और तेजी से निपटारा हो सकेगा। दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान इसे बंद कर दिया गया था जिसे अब एक नए स्वरूप में फिर से चालू किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर राज्य सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल) गठित करने की तैयारी में है। इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच बनी सहमति बन चुकी है। अब सामान्य प्रशासन विभाग इसके गठन का खाका तैयार करने में जुटा है। उधर, एमपी हाईकोर्ट में पेंडिंग केस बढ़ने के कारण न्यायाधीशों के नए पद सृजित किए जाने के प्रस्ताव भी सरकार तक पहुंचे हैं। राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के गठन की कवायद को लेकर सरकार का मानना है कि इससे एमपी के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से संबंधित विवादों और शिकायतों के मामले कोर्ट के बजाय ट्रिब्यूनल के जरिए निराकृत हो सकेंगे। सरकार का यह भी मानना है कि स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (एसएटी) के गठन के बाद एमपी के मुख्य हाईकोर्ट जबलपुर, खंडपीठ इंदौर और ग्वालियर में कर्मचारियों से संबंधित मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल में हो सकेगी। ऐसे में इन न्यायालयों पर पड़ने वाले न्यायालयीन मामलों का बोझ कम हो सकेगा। कर्मचारियों की सेवा शर्तों से संबंधित मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल के फैसले की अपील के लिए ही किए जा सकेंगे। सरकार ने ड्राफ्ट को मंजूरी मिलते ही तीनों ही न्यायालय में कर्मचारियों से संबंधित साढ़े 4 लाख मामलों की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से इस फैसले को जल्दी ही लागू करने के संकेत भी दिए हैं। दूसरे राज्यों के ट्रिब्यूनल की वर्किंग की स्टडी मोहन यादव सरकार मध्य प्रदेश के एसएटी के गठन के पहले दूसरे राज्यों में संचालित राज्य प्रशासनिक अधिकरण की वर्किंग और वक्त के हिसाब में किए गए बदलाव की स्टडी भी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग दूसरे राज्यों के ट्रिब्यूनल की जानकारी लेकर एमपी की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर प्रस्ताव तैयार करेंगे जिसे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की स्वीकृति मिलने के बाद कैबिनेट में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। फिर इसे विधानसभा में विधेयक लाकर मंजूरी दी जाएगी। दिग्विजय सरकार में बंद किया गया था प्रशासनिक ट्रिब्यूनल मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण (MPAT) को राज्य सरकार ने 2001 में ही बंद कर दिया था। इसके पीछे तब की दिग्विजय सिंह सरकार द्वारा एमपी का पुनर्गठन और प्रशासनिक कारण बताए गए थे। इसके बाद राज्य सरकार के आग्रह पर भारत सरकार द्वारा एक अधिसूचना के माध्यम से 17 अप्रैल 2003 को आधिकारिक रूप से ट्रिब्यूनल को समाप्त कर दिया गया था। 13 साल ही काम कर पाया था ट्रिब्यूनल इस अधिकरण को राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 4(2) के अंतर्गत 29 जून 1988 को स्थापित किया गया था। इसके बाद प्रदेश के कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों का निपटारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य बेंच (जबलपुर) और खंडपीठों (इंदौर और ग्वालियर) द्वारा किया जाता है। मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण राज्य के कर्मचारियों को सेवा संबंधी मामलों में त्वरित और सस्ता न्याय दिलाने के लिए यह एक प्रमुख संस्था थी जिसमें वर्ष 2001 से काम बंद हुआ और 2003 में केंद्र ने इसको मंजूरी दे दी थी। भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवाद, शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार जब यह ट्रिब्यूनल काम कर रहा था तो इसमें उच्च न्यायालय का न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश तथा न्यायिक व प्रशासनिक सदस्य नियुक्त किए जाते थे। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाती थी। ट्रिब्यूनल को राज्य सरकार के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवादों और शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार था। इसमें यह व्यवस्था भी थी कि ट्रिब्यूनल के निर्णयों के खिलाफ अपील सीधे उच्च न्यायालय में की जा सकती थी। प्रशासनिक न्याय अधिकरण को जब बंद किया गया था, तब प्रदेश में कर्मचारियों से संबंधित लंबित मामलों की संख्या 30 हजार थी, जिसे राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया था।  

Bhopal Administration सख्त, 15 दिन में देना होगा परमिशन का रिकॉर्ड; 576 अवैध कॉलोनियां निशाने पर

भोपाल भोपाल प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. कोलार इलाके की 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें उन्हें 15 दिनों के भीतर संबंधित अनुमति दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है. पूरे शहर में कुल 576 अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई है, और उनसे जुड़े मामलों के संबंध में अब तक 300 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. कॉलोनी सेल की एक बैठक के दौरान, सभी ज़ोनल अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करें, जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।  हालांकि पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। शहर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गईं और बड़ी संख्या में एफआईआर भी दर्ज हुईं, लेकिन किसी भी मामले में कार्रवाई अंतिम परिणाम तक नहीं पहुंच सकी। आंकड़ों में सख्ती, जमीनी स्तर पर असर नहीं प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों के तहत राहत देते हुए वैधीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया गया। बाकी कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। 300 एफआईआर दर्ज, फिर भी नहीं हुई गिरफ्तारी अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई जगहों पर केवल औपचारिक कार्रवाई के तहत बाउंड्रीवाल या निर्माण के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में विकास कार्य लगातार जारी रहे। आंकड़ों में बड़ी कार्रवाई, जमीन पर नतीजे शून्य प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों में छूट देकर वैध करने की प्रक्रिया शुरू की गई। शेष कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणाएं तो हुईं, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। 300 एफआईआर दर्ज, गिरफ्तारी एक भी नहीं अवैध कॉलोनियों के मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई स्थानों पर केवल प्रतीकात्मक तौर पर बाउंड्रीवाल या निर्माण का हिस्सा तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में गतिविधियां जारी रहीं। कोलार की इन 15 कॉलोनियों पर कार्रवाई नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र में 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा क्षेत्र की कई निर्माणाधीन कॉलोनियां शामिल हैं। संबंधित कॉलोनाइजरों से स्वीकृत नक्शे, डायवर्जन और अन्य वैधानिक अनुमतियों के दस्तावेज मांगे गए हैं। फिर शुरू हुआ नोटिस अभियान 1 जून को हुई कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध निर्माण या बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। कोलार क्षेत्र की 15 कॉलोनियां जांच के दायरे में नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र के रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा सहित विभिन्न इलाकों में विकसित हो रही 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। कॉलोनाइजरों से सभी आवश्यक वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। इन कॉलोनाइ्रजर्स को नगर निगम का नोटिस मनीष शर्मा (चित्रांश ग्रुप, ग्राम रतनपुर), खान, (राधापुरम, ग्राम बैरागढ़ चीचली), दूलीचंद यादव (माइल स्टोन स्कूल के पास, ग्राम अकबरपुर), संजय राठौर, (ऐन्जल होम्स कान्हाकुंज के पास, ग्राम अकबरपुर), घनश्याम पाटीदार (ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन पलिया, (हेवेन्स पार्क, ग्राम बैरागढ़ चीचली),चंदप्रताप सिंह, (कुसुमा विहार, ग्राम बैरागढ़ चीचली), राघवेंद्र सिंह (ग्राम बैरागढ़ चीचली), दीपक शर्मा, (हिल्स व्यू सिटी, ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन मारन (दुर्गा विहार कॉलोनी, नयापुरा कोलार रोड), दिनेश पाल (व्यंकटेश्वर धाम, नयापुरा कोलार), रमेश मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), गोविंद मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), अशोक पवार (ग्राम बैरागढ़ चीचली) और अशोक मीणा (सांई रेसीडेन्सी, ग्राम बैरागढ़ चीचली) बाहरी दीवारें गिराकर खानापूर्ति रिकॉर्ड बताते हैं कि अवैध कॉलोनियों पर अब तक 300 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद एक भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई और किसी भी मामले में अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कुछ स्थानों पर दीवारें गिराकर खानापूर्ति की गई। सिटी प्लानर अनिल साहनी के अनुसार 1 जून को हुई 10 सदस्यीय कॉलोनी सेल की बैठक के बाद 15 नए नोटिस जारी किए गए हैं। सेल में जिला प्रशासन, नगर निगम, टीएंडसीपी, सहकारिता और भू-संसाधन प्रबंधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। जोन अधिकारी बना रहे कार्रवाई की सूची सभी जोन अधिकारियों को अवैध कॉलोनियों की लिस्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार के निर्माण की सूचना मिलने या संदिग्ध पाए जाने पर उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। – नीरज आनंद लिखार, ग्राम तथा नगर निवेश सभी ज़ोन को मिले जांच और नई सूची बनाने के निर्देश कॉलोनी सेल की बैठक में अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा कि आम जनता की गाढ़ी कमाई को ठगने वाले भू-माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। सभी जोन के अधिकारियों को अपने इलाकों में सक्रिय अवैध कॉलोनियों की पूरी जांच करने और उनकी सूची अपडेट करने को कहा गया है। इसके साथ ही आम लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे किसी भी नई कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीदने से पहले नगर निगम या रेरा (RERA) से उसके वैध होने की जांच जरूर कर लें। फिर शुरू हुआ अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान 1 जून को आयोजित कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों और संदिग्ध निर्माण गतिविधियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

रायपुर में बनेगा विश्वस्तरीय हॉस्पिटैलिटी और वेलनेस सेंटर, PPP मॉडल पर तैयार होगी परियोजना

रायपुर में विकसित होगा विश्वस्तरीय हॉस्पिटैलिटी एवं वेलनेस सेंटर, क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के उन्नयन हेतु PPP मॉडल पर प्रस्तावित परियोजना इनडोर स्पोर्ट्स, जिम, स्विमिंग पूल, आधुनिक आवासीय सुविधाओं सहित होगा व्यापक आधुनिकीकरण रायपुर,  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा राजधानी रायपुर स्थित क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन एवं रख-रखाव के लिए लाइसेंस आधार पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत एजेंसी नियुक्त करने की महत्वपूर्ण परियोजना प्रस्तावित की गई है। यह पहल रायपुर को एक आधुनिक एवं प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी तथा वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। परियोजना के तहत क्लब परिसर में स्क्वैश कोर्ट, टेनिस कोर्ट, जिम, स्विमिंग पूल, बैडमिंटन हॉल, बिलियर्ड रूम तथा टेबल टेनिस हॉल जैसी आधुनिक खेल एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं विकसित एवं संचालित की जाएंगी। साथ ही वर्तमान अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण एवं नवीनीकरण भी किया जाएगा। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह परियोजना रायपुर को एक नए प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा गुणवत्तापूर्ण शहरी अधोसंरचना विकास को नई गति प्राप्त होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्वींस क्लब ऑफ इंडिया की विशेष आवास योजना के अंतर्गत सांसद एवं विधायक वर्ग के 108 सदस्यों की विशेष सदस्यता पूर्ववत जारी रहेगी। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान वर्तमान सदस्यों के हितों एवं सुविधाओं का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि परियोजना को लाइसेंस, डेवलप, ऑपरेट एवं ट्रांसफर (LDOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार क्लब की मौजूदा सुविधाओं का बेहतर संचालन एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा तथा टेनिस कोर्ट क्षेत्र के रिक्त भूभाग पर लगभग 61 कमरों वाले आधुनिक आवासीय एवं हॉस्पिटैलिटी ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना में लगभग 25 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इससे अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास होने के साथ-साथ दीर्घकालिक राजस्व सृजन, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि तथा रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना की लाइसेंस अवधि 20 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें अतिरिक्त 10 वर्ष तक विस्तार का प्रावधान रहेगा। देव ने कहा कि शहर के प्रमुख क्षेत्रों से उत्कृष्ट सड़क संपर्क एवं बेहतर कनेक्टिविटी के कारण यह परियोजना निवेशकों और उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इसके माध्यम से राजधानी में उच्चस्तरीय आतिथ्य, खेल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का नया केंद्र विकसित होगा।

मतदाता सूची सुधार अभियान: धनबाद के 2372 बूथों पर रोज 3 घंटे मिलेंगी सेवाएं

धनबाद  झारखंड में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले की तैयारी की प्रक्रिया चल रही है। 30 जून से एसआइआर होना है। मतदाताओं की सुविधा और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारियों को लेकर धनबाद जिला निर्वाचन विभाग ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। चार जून से धनबाद जिले के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) प्रतिदिन सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे। इस संबंध में उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी आदित्य रंजन जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेंगे। जिला निर्वाचन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, बीएलओ की बूथ पर नियमित उपस्थिति से मतदाताओं को विभिन्न कार्यों के लिए कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। निर्धारित समय के दौरान अनमैप्ड मतदाताओं की मैपिंग, मतदाता सूची से संबंधित त्रुटियों का सुधार, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, पता परिवर्तन तथा अन्य निर्वाचन संबंधी कार्य किए जा सकेंगे। धनबाद में कुल 2,372 मतदान केंद्र वर्तमान में जिले में 2,372 मतदान केंद्र हैं, जहां बीएलओ प्रतिदिन तीन घंटे उपलब्ध रहेंगे। हालांकि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिले में मतदान केंद्रों की संख्या बढ़कर 2,484 हो जाएगी। जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी कालिदास मुंडा ने बताया कि प्रत्येक बीएलओ को प्रतिदिन तीन घंटे अपने संबंधित बूथ पर रहना अनिवार्य होगा। इससे आम मतदाताओं को सीधे बूथ स्तर पर सेवाएं मिल सकेंगी और अनमैप्ड मतदाताओं की पहचान व मैपिंग का कार्य भी तेजी से पूरा होगा। मदताता सूची को अद्यतन बनाने में मिलेगी मदद उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से एसआईआर अभियान को भी गति मिलेगी और मतदाता सूची को अधिक शुद्ध एवं अद्यतन बनाने में सहायता मिलेगी। निर्वाचन विभाग को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से मतदाताओं की भागीदारी बढ़ेगी और चुनावी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाया जा सकेगा।  

भरतपुर में रिश्तों की मिसाल: हरियाणवी सिंगर काजल चौधरी बनीं ‘कलयुग की श्रवण कुमार’

 जयपुर राजस्थान के जिले भरतपुर में  रिश्तों की एक ऐसी अनूठी मिसाल सामने आई है, जिसने हर आंख को नम कर दिया. हरियाणा की एक बहू अपनी 90 साल की सास को प्लास्टिक के टब में बिठाकर, उसे अपने सिर पर उठाए पैदल ही '84 कोस' की कठिन परिक्रमा करवा रही है.  जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायल होते ही हर कोई इस नजारे को देखकर भावुक हो गया.  कौन हैं टब में सांस को बिठाकर कंधो पर '84 कोस' की परिक्रमा करने वाली बहू? इस बहू का नाम काजल चौधरी है. जो हरियाणा के हताना गांव की रहने वाली हैं और पेशे से एक लोकप्रिय हरियाणवी लोक गायिका (सिंगर) हैं. काजल की 90 साल की सास चन्द्री देवी पिछले कई सालों से शारीरिक रूप से बेहद कमजोर और चलने-फिरने में लाचार हैं. चन्द्री देवी के मन में लंबे समय से ब्रज की प्रसिद्ध 84 कोस की परिक्रमा करने की इच्छा थी, लेकिन शारीरिक अक्षमता के कारण वह बेबस थीं. जब उनकी बहू काजल को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अपनी सास के इस सपने को पूरा करने की कोशिश की.  टब में बैठी सास, सिर पर उठाए बहू हरियाणा के हताना गांव की हरियाणवी सिंगर काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चन्द्री देवी को बड़े प्लास्टिक के टब में बिठाकर सिर पर रखकर पैदल 84 कोस की परिक्रमा करवा रही हैं. गांव बनचारी से परिक्रमा शुरू कर सिंगर काजल ने जहां-जहां से गुजर रही थीं, लोग फूल-मालाओं से उनका स्वागत कर रहे थे. बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने पहुंच रहे हैं. 'सास ने बेटी की तरह पाला, अब फर्ज निभाने की बारी मेरी' काजल चौधरी ने बताया कि उनकी सास चलने-फिरने में असमर्थ हैं. बरसों से उनके मन में 84 कोस परिक्रमा करने की इच्छा थी. सास की यही इच्छा पूरी करने के लिए वह उन्हें भरतपुर की ब्रजभूमि लेकर आई है. काजल ने कहा कि सास ने उन्हें हमेशा बेटी जैसा प्यार दिया.आज जो कुछ भी है सास के आशीर्वाद से है. ऐसे में उनकी इच्छा पूरी करना मेरा फर्ज है. सिंगर काजल बनीं कलयुग की श्रवण कुमार ब्रजभूमि में सास-बहू के इस अद्भुत प्रेम की चर्चा हर जुबान पर है. लोग काजल को कलयुग की श्रवण कुमार बता रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में जब रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं, काजल ने समाज को नई दिशा दिखाई है.

सूर्या हत्याकांड के बाद खोड़ा में बड़ा एक्शन, अवैध मदरसों पर कार्रवाई और अपराधियों की परेड

 गाजियाबाद  यूपी के गाजियाबाद में पुलिस-प्रशासन का 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' जारी है. सूर्या हत्याकांड के बाद खोड़ा इलाके को अपराध मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे इस ऑपरेशन के तीसरे और फाइनल दिन मंगलवार को तीन अवैध मदरसों को सील कर दिया. वक्फ निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा. पुलिस ने घर-घर जाकर 600 अपराधियों का सत्यापन किया, संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और पुराने बदमाशों से अपराध न करने की शपथ दिलवाई।  खोड़ा के तीन अवैध मदरसे किए गए सील आपको बता दें कि गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे रविन्द्र गौड़, डीएम रविन्द्र एम और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कैलाश चन्द्र तिवारी की संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन की अगुवाई की. मोहल्ले-मोहल्ले जाकर अपराधियों की शिनाख्त की गई और कानूनी एक्शन लिया गया।  इन सबके बीच प्रशासन की टीम ने खोड़ा के मदरसा रहमानिया अरबिया कासिम-उल उलूम (मोहल्ला बीरबल), सुल्तान अलारफीन मदरसा और एक अन्य मदरसे को सील कर नोटिस चस्पा कर दिया है. यह कार्रवाई मदरसों के गैर-मान्यता प्राप्त होने, अवैध संचालन, कार्यालय में पंजीकृत न होने और परिसर में अग्निशमन व विद्युत सुरक्षा विभाग की एनओसी (NOC) न होने के कारण की गई. संचालक को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।  अपराधियों का सत्यापन और थानों में ली शपथ 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' का असर अब पूरे गाजियाबाद जिले में दिखने लगा है. खोड़ा कॉलोनी में घर-घर जाकर 3 दिन के अंदर 600 अपराधियों और हिस्ट्रीशीटर्स का वेरिफिकेशन किया गया. इसके अलावा, साहिबाबाद, इंदिरापुरम और खोड़ा थानों में करीब 150 पुराने अपराधियों को बुलाकर चेतावनी दी गई, जिसके बाद करीब 80 लोग तख्ती लेकर साहिबाबाद थाने पहुंचे और भविष्य में कभी अपराध न करने की शपथ ली।  संदिग्ध किराएदारों की जांच और असद के घर पर नोटिस खोड़ा के घने आबादी वाले इलाके में बिना वेरिफिकेशन के रह रहे किराएदारों और कमर्शियल जगहों की लिस्ट खंगालकर चेकिंग चलाई जा रही है. मुख्य आरोपी असद के घर के दरवाजे पर एसडीएम (SDM) का नोटिस लगा है, जिसे सोमवार को कुछ लोगों ने तोड़ने की कोशिश की थी. पड़ोसी ललित के मुताबिक असद के पिता नवाब ने यह मकान 6 महीने पहले किसी डीलर को बेच दिया था, लेकिन असद कभी-कभार गली में आया करता था।  असद के मददगार गिरफ्तार, सारिक मेवाती फरार पुलिस ने इस मामले में गहराई से जांच करते हुए कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है और कुछ को छोड़ दिया गया है. मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर के बाद पुलिस ने साजिश रचने और मदद करने के आरोप में उसके पिता नवाब, फरहान और आतिफ को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, मामले का एक अन्य आरोपी सारिक मेवाती अभी भी पुलिस की गिरफ्त से फरार है। 

चेचक के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता, अंबाला में 20 संक्रमितों को किया गया होम आइसोलेट

अंबाला. अंबाला कैंट के टैगोर गार्डन में चेचक के केस सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। आनन-फानन में विभाग की टीमों ने इस क्षेत्र का दौरा किया और मरीजों की जांच शुरू की। इस दौरान लोगों की स्क्रीनिंग की और जो भी मरीज सामने आए उनका उपचार शुरू कर दिया गया है। विभाग की मानें, तो अभी तक इस क्षेत्र में बीस केस सामने आ चुके हैं, जिनमें बच्चे व व्यस्क भी शामिल हैं। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर कोई कसर नहीं छोड़ रहा है, जबकि इन मरीजों का रोजाना फालोअप किया जाएगा। मरीजों को दवाइयां आदि दी हैं तथा बताया है कि कैसे अन्य लोगों को इस बीमारी से बचना है। जो भी मरीज हैं उनको उनके घर में ही आइसोलेट कर दिया गया है। फिलहाल मरीजों के स्वजनों को कहा गया है कि स्वास्थ्य पर नजर रखें और यदि दिक्कत बढ़े तो डाक्टर से संपर्क करें। इस तरह से केस आए सामने जानकारी के अनुसार टैगोर गार्डन के कुछ बच्चे एक स्थान पर खेलने व पढ़ने जाते हैं। इसके बाद उनमें चेचक के लक्षण दिखाई देने लगे। शुरुआत में यह कम थे, जबकि धीरे-धीरे यह बढ़ने लगे। इसकी जानकारी जब स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाई तो विभाग ने अपनी टीम इस क्षेत्र में भेजी। इस दौरान जब डाक्टरों ने चेक किया तो पाया कि सही में इन में चेचक के लक्षण थे और मरीज काफी बीमार हैं। इन मरीजों के सारे आवश्यक टेस्ट किए गए। डाक्टरों का दावा है कि अभी किसी भी मरीज की स्थिति गंभीर नहीं है। यह बीमारी कैसे आई और कौन इसका कैरियर है, इसके बारे में अभी कुछ पता नहीं है। माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में और भी मरीज सामने आ सकते हैं, जबकि स्क्रीनिंग कई लोगों की हुई है। टैगोर गार्डन के दो हिस्सों में हैं मरीज स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब टैगोर गार्डन के क्षेत्र में जांच शुरू की तो दो हिस्सों में यह मरीज मिले। विभाग का कहना है कि अभी बीस मरीज सामने आए हैं। सूत्रों का कहना है कि मरीजों की संख्या इससे अधिक हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग लगातार स्क्रीनिंग कर रहा है ताकि मरीजों का पता लगाया जा सके। दावा, मरीजों की संख्या ज्यादा हाे सकती है जिस तरह से एक ही क्षेत्र से करीब बीस केस चेचक के सामने आए हैं, उससे माना जा रहा है कि मरीजों की संख्या इससे अधिक हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग अभी बीस केसों की पुष्टि कर रहा है। हालांकि टीमें मंगलवार को भी इन क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगी, जबकि मरीजों का फालोअप करेंगे और अन्य को भी चेक करेंगी। करीब 70 मरीजों का चेकअप, तीन वार्डों में केस स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब 70 लोगों का चेकअप किया और मौके पर उनको दवाइयां दी हैं। इसी तरह बताया जा रहा है कि वार्ड 14, 16 और 18 में भी ऐसे ही केस सामने आए हैं। हालांकि अभी स्क्रीनिंग का काम किया जाएगा, लेकिन माना जा रहा है कि केसों की संख्या बीस से अधिक है और यदि लगातार स्क्रीनिंग हुई तो यह संख्या और बढ़ सकती है। यह है चेचक चेचक एक वायरस है और संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को आइसोलेट यानी कुछ दिनों के लिए अन्य लोगों से अलग रखना पड्ता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। खांसने, छींकने पर भी यह फैल सकता है। इसमें शरीर पर बड़े-बड़े दाने हो जाते हैं, जिनमें तरल पदार्थ रहता है। मरीज के लिए खाने के बरतन, कपड़े, तौलिया आदि अलग रखा जाता है। दस दिनों का विंडो पीरियड होता है और इसके बाद धीरे-धीरे यह समाप्त होने लगता है। खास है कि इस दौरान मरीज को दवाइयां नियमित रूप से लेते रहना चाहिए। मरीजों को घरों में आइसोलेट किया अंबाला कैंट के टैगोर गार्डन क्षेत्र से बीस मरीज चेचक के सामने आए हैं। इन मरीजों को विभाग की टीम ने दवाइयां दी हैं और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए हैं। इन को घरों में ही आइसोलेट किया गया है। मरीजों का फालोअप किया जाएगा और नियमित दवाइयां दी जाएंगी। दस दिनों का विंडो पीरियड है और इसके बाद मरीज सामान्य होने लगता है। इस में काफी सावधानी व परहेज बरतना होगा। -डॉ. सुनील हरि, महामारी नियंत्रक, नागरिक अस्पताल अंबाला शहर  

ऑपरेशन सिंदूर की जीत को समर्पित रही 15 हजार किमी की यात्रा, साइकिल से चारधाम पहुंचे दीपक शर्मा

पानीपत सौंधापुर गांव निवासी 37 वर्षीय दीपक शर्मा ने 15 हजार किलोमीटर चार धाम की यात्रा साइकिल से तय की। यह यात्रा एक साल में मई 2026 में पूरी की है। यह यात्रा ऑपरेशन सिंदूर की जीत को समर्पित रही। दीपक शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के समय देश की जीत पर यात्रा का संकल्प लिया था। दीपक इससे पहले दो फरवरी 2025 को पानीपत से महाकुंभ तक (एक हजार किलोमीटर) की लगभग 10 दिन की यात्रा केवल साइकिल से पूरी कर चुके हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने विभिन्न शहरों में लोगों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया। दीपक ने बताया कि वह रोजाना 70 से 80 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर अपने आगे के लक्ष्य की ओर बढ़ते थे। युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे दीपक उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं, जिन्होंने अपने जुनून को समाज सेवा और राष्ट्रहित के संदेश से जोड़ दिया। दीपक ने साइकिल से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ भारत, जल बचाओ और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। साइकिल यात्रा कर 25 मई 2025 से 30 मई 2026 तक चार धाम द्वारकाधीश, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी और बद्रीनाथ के दर्शन किए। पत्नी ने भी दीपक से हुई प्रेरित दीपक की साइकिल यात्रा का सबसे प्रेरणादायक पहलू उनकी पत्नी जयंती बनी हैं। शादी के बाद दोनों ने ऋषिकेश से पानीपत तक की यात्रा साइकिल से पूरी की थी। पति के जज्बे और समर्पण को देखकर जयंती भी साइकिल के प्रति प्रेरित हुईं। कई यात्राओं में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलीं। दोनों दंपती आज समाज के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बन चुके हैं। पत्नी जब साइकिल से गांव पहुंची तो उनको सब देखकर सलाम कर रहे थे। साइकिल बनी पहचान, कई मंचों पर मिला सम्मान दीपक को साइकिल यात्रा के दौरान जागरूकता फैलाने के लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, मंत्री कृष्णलाल पंवार, मंत्री महिपाल ढांडा, गुजरात, गोवा के राज्यपाल, गोवा के मुख्यमंत्री, कर्नाटक व केरल के भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सम्मानित कर चुके हैं। दीपक का कहना है कि सम्मान उनका लक्ष्य नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना उनकी प्राथमिकता है। उनका सपना है कि अधिक से अधिक युवा साइकिल को अपनाएं और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़ें। विकसित भारत का संदेश लेकर निकले चारधाम यात्रा के दौरान दीपक ने प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने लोगों को स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण बचाने, स्थानीय उत्पादों के उपयोग, डिजिटल लेनदेन, महिलाओं के सम्मान और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया। दीपक ने एक पेड़ मां के नाम अभियान का संदेश भी दिया।  

अमृतसर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर बढ़ाई गई निगरानी

अमृतसर. ब्लू स्टॉर ऑपरेशन की बरसी की वर्षगांठ के मद्देनजर अमृतसर में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत कर दिया गया है। पंजाब पुलिस के स्पेशल डीजीपी प्रवीण सिन्हा ने मंगलवार को अमृतसर पहुंचकर सुरक्षा तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से भी बातचीत की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मीडिया से बातचीत करते हुए स्पेशल डीजीपी प्रवीण सिन्हा ने कहा कि हर वर्ष छह जून से पहले अमृतसर में धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पंजाब पुलिस ने इस बार भी व्यापक और बहुस्तरीय सुरक्षा योजना तैयार की है। उन्होंने बताया कि पूरे अमृतसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा ग्रिड स्थापित किया गया है, जिसमें विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया गया है। प्रवीण सिन्हा ने बताया कि पंजाब पुलिस के अलावा सीमा सुरक्षा बल, त्वरित कार्रवाई बल और अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों की कुल 11 कंपनियां अमृतसर तथा आसपास के जिलों में तैनात की गई हैं। इसके साथ ही अमृतसर शहर में 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों और लगभग 30 अनुभवी राजपत्रित अधिकारियों को विशेष ड्यूटी पर लगाया गया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है, ताकि किसी को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण तथा व्यवस्थित ढंग से संपन्न हों। इसके लिए अमृतसर पुलिस, आसपास के जिलों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच लगातार तालमेल बनाए रखा गया है। हर संभावित चुनौती से निपटने के लिए विशेष योजना के तहत सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। अमृतसर अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र स्पेशल डीजीपी ने कहा कि अमृतसर अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। कुछ असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्व पंजाब के शांतिपूर्ण माहौल को प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं, लेकिन पंजाब पुलिस ऐसी हर गतिविधि पर पूरी तरह नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब पुलिस प्रमुख के दिशा-निर्देशों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया गया है। आतंकी घटनाओं का बरसी से सीधा संपर्क नहीं हाल के दिनों में सामने आई कुछ घटनाओं के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में प्रवीण सिन्हा ने स्पष्ट किया कि उनका छह जून के कार्यक्रमों से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस को पहले से कुछ संभावित योजनाओं की जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर समय रहते कार्रवाई कर आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने दावा किया कि पंजाब पुलिस की केस सुलझाने की दर देश में सबसे बेहतर दरों में शामिल है और बाकी मामलों की जांच भी तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जांच में जैसे-जैसे महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे, उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा। फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस छह जून के कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने और प्रदेश में अमन-शांति बनाए रखने पर है।