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खजराना गणेश मंदिर में भक्तों की सुरक्षा पर बड़ा कदम, 20 करोड़ का कराया गया बीमा

इंदौर  इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में 10 दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मंदिर प्रबंधन समिति ने पहली बार 20 करोड़ रुपए की पब्लिक लायबिलिटी इंश्योरेंस पॉलिसी कराई है। महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए बीमा को सुरक्षा व्यवस्था के अतिरिक्त कवच के तौर पर लिया गया है। पॉलिसी के तहत गणेशोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं को निर्धारित नियम और शर्तों के अनुसार बीमा सुरक्षा मिलेगी। किसी दुर्घटना, अप्रिय घटना या जनहानि की स्थिति में पॉलिसी के प्रावधानों के मुताबिक बीमा कंपनी की ओर से भुगतान किया जा सकेगा। कलेक्टर बोले- भगवान से प्रार्थना, बीमा की जरूरत न पड़े मंदिर समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि इस बार श्रद्धालुओं का बीमा कराया गया है। इसकी क्लेम राशि 20 करोड़ रुपए रहेगी। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश से यही प्रार्थना है कि इसकी जरूरत न पड़े। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पहले करीब 2 करोड़ का था बीमा मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि भगवान गणपति की कृपा से बीमा सुविधा का उपयोग करने की स्थिति न आए, यही कामना है। उन्होंने बताया कि मंदिर में पहले भी इंश्योरेंस कराया जाता था, लेकिन उस समय करीब 2 करोड़ रुपए का बीमा रहता था। इस साल पहली बार बीमा राशि बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए की गई है। सीसीटीवी से निगरानी, पुलिस और गार्ड भी बढ़ाए गणेशोत्सव के 10 दिनों में खजराना गणेश मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। दर्शन व्यवस्था के साथ सुरक्षा के लिए भी अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। पुलिस बल के साथ सुरक्षा गार्डों की संख्या भी बढ़ाई गई है। मंदिर समिति के मुताबिक श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के साथ भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

किसाऊ बांध पर आज बड़ा फैसला, छह राज्यों में होगा पानी का बंटवारा, खत्म होगा इंतजार

चंडीगढ़ करीब छह दशक से लंबित अंतरराज्यीय जल विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठने जा रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच जल वितरण समझौते को 15 सितंबर को अंतिम रूप दिए जाने की तैयारी है। 15 जून को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री जल वितरण के प्रस्ताव पर सहमत हो चुके हैं। अब नई दिल्ली स्थित जल शक्ति भवन में होने वाली बैठक में हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के शीर्ष अधिकारी समझौते पर हस्ताक्षर के साथ करीब छह दशक से अटकी इस परियोजना के समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे। संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री भी बैठक में मौजूद रह सकते हैं। परियोजना के तहत हरियाणा को 836 क्यूसेक पानी मिलने का प्रस्ताव है। वहीं, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस लिहाज से परियोजना केवल एक राज्य की जल जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए जल उपलब्धता और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने वाली पहल बन सकती है। जल बंटवारे के विवाद से सहयोग की ओर बढ़ेंगे राज्य अंतरराज्यीय नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। किसाऊ परियोजना पर प्रस्तावित समझौता ऐसे विवादों के समाधान के लिए सहमति आधारित माडल का उदाहरण बन सकता है। हरियाणा को मिलने वाला पानी उसकी जल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण होगा, जबकि दिल्ली को अतिरिक्त जल उपलब्धता से राष्ट्रीय राजधानी की जरूरतों को राहत मिल सकती है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान को मिलने वाला निर्धारित पानी भी इन राज्यों की जल उपलब्धता को मजबूत करेगा। छह दशक की देरी के बाद परियोजना को गति मिलने की उम्मीद लंबे समय तक परियोजना के अटके रहने से इसकी लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है। अब इसकी अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जबकि पहले यह रकम आधी थी। ऐसे में छह राज्यों के बीच समझौता होने से परियोजना को संस्थागत आधार मिलने के साथ इसके निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है। टोंस नदी पर प्रस्तावित यह बहुउद्देशीय परियोजना जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ राज्यों के बीच सहयोग की नई राह भी खोल सकती है।

ज्वैलरी शॉप पर GST विभाग की छापेमारी, कंप्यूटर डेटा से बैंक खातों तक की जांच

जालंधर  जालंधर में सराफा बाजार स्थित हनुमान चौक पर जीएसटी विभाग ने आभूषण की दुकान पर छापेमारी की। टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दुकान की बिक्री, खरीद, कंप्यूटर डेटा और बैंक खातों से जुड़े अहम दस्तावेजों की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। वी.के. ज्वैलर्स पर सोमवार को की गई इस कार्रवाई में क्या खामियां मिली हैं या कितनी टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। रेड करीब दो घंटे तक चली। जांच अधिकारी दस्तावेजों और खाते के आंकड़ों का मिलान कर रहे हैं, जिसके बाद ही पूरी स्थिति साफ हो पाएगी। ग्राहकों और व्यापारियों के लिए जरूरी नियम टैक्स चोरी पर लगाम लगाने और बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जीएसटी विभाग ने आम ग्राहकों से विशेष अपील की है। विभाग के अनुसार, ग्राहक जब भी सोने-चांदी या हीरे के आभूषणों की खरीदारी करें तो दुकानदार से हमेशा पक्का जीएसटी इनवॉइस अनिवार्य रूप से लें। पक्का बिल टैक्स चोरी रोकने में मदद करता है पक्का बिल न केवल टैक्स चोरी रोकने में मदद करता है, बल्कि आभूषणों की शुद्धता और भविष्य में री-सेल या एक्सचेंज के समय ग्राहक के कानूनी अधिकारों की रक्षा भी करता है। व्यापारियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने सभी लेन-देन का सही रिकॉर्ड रखें और नियमानुसार बिल जारी करें।  

किसानों के लिए जरूरी खबर: समर्थन मूल्य पर धान-ज्वार-बाजरा उपार्जन हेतु 10 अक्टूबर तक कराएं पंजीयन

समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन 10 अक्टूबर तक किसान निर्धारित समय पर करायें पंजीयन : खाद्य मंत्री राजपूत भोपाल खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये किसान पंजीयन प्रक्रिया का निर्धारण कर दिया गया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन 15 सितम्बर से शुरू हो रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था ‌द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। उपार्जित फसल के भुगतान हेतु बैंक खाता किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान ‌द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें। सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही 1 रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। आधार नंबर का वेरिफिकेशन पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा। किसानों को करें एसएमएस विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।  

नवा रायपुर ओपन 2026 का आज आगाज, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे टूर्नामेंट का उद्घाटन

नवा रायपुर में आज  से सजेगा गोल्फ का रोमांच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे ‘नवा रायपुर ओपन 2026’ का शुभारंभ फेयरवे गोल्फ एंड लेक रिजॉर्ट में होगा उद्घाटन, क्रिकेट लीजेंड कपिल देव और डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई के सीईओ अमनदीप जौहल होंगे शामिल रायपुर, नवा रायपुर को गोल्फ खेल के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने और प्रदेश में खेल पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल ‘नवा रायपुर ओपन 2026’ का शुभारंभ आज  15 सितंबर को होगा। फेयरवे गोल्फ एंड लेक रिजॉर्ट, नवा रायपुर में आयोजित उद्घाटन समारोह एवं प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। आयोजन में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी एवं डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई के अध्यक्ष कपिल देव तथा डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमनदीप जौहल की विशिष्ट उपस्थिति रहेगी। राष्ट्रीय स्तर के खेल दिग्गजों की मौजूदगी से नवा रायपुर में आयोजित इस प्रतियोगिता को नई पहचान मिलने के साथ प्रदेश में गोल्फ और खेल पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। सेरेमोनियल टी-ऑफ से होगा प्रतियोगिता का औपचारिक शुभारंभ निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शाम 3:05 बजे सेरेमोनियल टी-ऑफ के साथ ‘नवा रायपुर ओपन 2026’ का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री एवं विशिष्ट अतिथियों की गोल्फ खिलाड़ियों से मुलाकात एवं प्रतियोगिता की ट्रॉफी का अनावरण किया जाएगा। इसके पश्चात प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी, जिसमें मुख्यमंत्री एवं आयोजन से जुड़े अतिथि मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और प्रतियोगिता के उद्देश्यों तथा इससे जुड़ी संभावनाओं पर जानकारी साझा करेंगे। नवा रायपुर को गोल्फ और खेल पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल ‘नवा रायपुर ओपन 2026’ के आयोजन का उद्देश्य प्रदेश में गोल्फ के प्रति रुचि को बढ़ावा देने के साथ उभरती खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही नवा रायपुर की आधुनिक अधोसंरचना और खेल सुविधाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का भी यह महत्वपूर्ण अवसर है। इस आयोजन से नवा रायपुर को आधुनिक खेल, गोल्फ और खेल पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को बल मिलने की उम्मीद है। गोल्फ जैसे खेल के बड़े आयोजन से प्रदेश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहन मिलने के साथ देशभर के खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और पर्यटकों का आकर्षण भी बढ़ सकता है। ‘नवा रायपुर ओपन 2026’ नवा रायपुर की खेल क्षमता, आधुनिकता और उभरती खेल संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बनने जा रहा है।

जैन समाज के धार्मिक पर्व को लेकर बड़ा फैसला, लुधियाना में आज नॉनवेज की बिक्री पर रोक

लुधियाना लुधियाना में जैन समाज की ओर से आज धार्मिक पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन को अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। जैन धर्म के अनुसार आज किसी भी जीव की हत्या करना धार्मिक रीति-रिवाजों के विपरीत माना जाता है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले में मांस-मछली की दुकान बंद रहेगी।  जिला मजिस्ट्रेट लुधियाना ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, 15 सितंबर को लुधियाना जिले में मीट/मछली और अंडों की दुकानें, नॉन-वेजीटेरियन होटल-ढाबे और अहाते बंद रहेंगे। इसके साथ ही मीट-मछली की कटाई भी पूरी तरह बंद रहेगी। उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आदेश की पालना सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जिला लोक संपर्क अधिकारी को भी आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार करवाने के लिए कहा गया है। जिला मजिस्ट्रेट की ओर से यह आदेश जारी किया गया है। आदेश की प्रतियां पंजाब सरकार के संबंधित अधिकारियों, पुलिस कमिश्नर लुधियाना, नगर निगम और अन्य विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।  

UP कैडर की 2013 बैच की IAS दिव्या मित्तल ने छोड़ी सेवा, केंद्र सरकार ने मंजूर किया इस्तीफा

लखनऊ उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित और तेजतर्रार 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने मंजूर कर लिया है. निजी कारणों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए उन्होंने 30 अगस्त को यह पद छोड़ने की घोषणा की थी, जो 15 सितंबर से प्रभावी हो गया है।   लंदन की नौकरी छोड़ बनी थीं आईएएस दिव्या मित्तल ने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई करने के बाद लंदन में अच्छी नौकरी की थी, लेकिन सब कुछ पाने के बाद भी उन्हें कुछ अधूरा लगा. इसके बाद उन्होंने भारत लौटकर यूपीएससी की तैयारी की. उन्होंने पहले प्रयास में आईपीएस और दूसरे प्रयास में 2013 में आईएएस की सफलता हासिल की. उनके पति गगनदीप सिंह ने भी 2022 में अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर एक कंपनी शुरू की थी।  सख्त कार्यशैली और भविष्य की राह मिर्जापुर, बस्ती और देवरिया में डीएम रहीं दिव्या मित्तल की गिनती सख्त और बेबाक अफसरों में होती थी. मिर्जापुर में उन्होंने आजादी के 75 साल बाद पानी की व्यवस्था कराई थी. इस्तीफा मंजूर होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर जयशंकर प्रसाद की पंक्ति "प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो" लिखकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने के संकेत दिए हैं।  मामले में सियासत भी आपको बता दें कि दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सियासत भी देखने को मिली थी. सपा प्रमुख ने आरोप लगाया था कि प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों को काम नहीं करने दिया जा रहा है, वहीं कांग्रेस नेता अजय राय ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी. उन्होंने इशारा भी किया था अगर दिव्या मित्तल कांग्रेस से चुनाव लड़ना चाहेंगी तो उसपर विचार किया जाएगा। 

रायपुर के गोल बाजार में CM विष्णु देव साय ने की गणपति पूजा, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

रायपुर : 117 वर्षों से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपरा में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गोल बाजार में विराजे विघ्नहर्ता के किए दर्शन-पूजन, प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की रायपुर गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर का ऐतिहासिक गोल बाजार आज गणपति बप्पा की भक्ति और उत्सव के उल्लास से सराबोर रहा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रात्रि गोल बाजार पहुंचे और यहां बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति द्वारा विराजित विघ्नहर्ता भगवान गणेश के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान गणेश से छत्तीसगढ़ के प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने गोल बाजार स्थित हनुमान मंदिर के समीप गणेशोत्सव पंडाल में विराजित भगवान गणेश को मुकुट पहनाया और तिलक लगाकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश की आरती उतारी और विघ्नविनायक से प्रदेश की प्रगति, समृद्धि तथा प्रदेशवासियों के मंगलमय जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान गणेश प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता हैं। गणेशोत्सव हमारी आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व होने के साथ समाज को एक सूत्र में जोड़ने वाली हमारी समृद्ध परंपरा का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गणपति बप्पा की कृपा से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़े तथा प्रदेश के हर घर-परिवार में सुख और खुशहाली का वास हो, यही उनकी कामना है। मुख्यमंत्री ने गोल बाजार में 117 वर्षों से निरंतर चली आ रही गणेशोत्सव की गौरवशाली परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी आस्था और सामाजिक सहभागिता के साथ किसी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखना अपने आप में विशेष है। ऐसी परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जोड़ती हैं। उल्लेखनीय है कि राजधानी के ऐतिहासिक गोल बाजार स्थित हनुमान मंदिर के समीप बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति द्वारा पिछले 117 वर्षों से गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यहां विराजित होने वाली गणेश प्रतिमा अपनी भव्यता और आकर्षक स्वरूप के कारण गोल बाजार ही नहीं, पूरे रायपुर में श्रद्धालुओं की आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती है। गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान गणेश के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री साय के गोल बाजार पहुंचने पर गणेशोत्सव समिति के पदाधिकारियों, स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की मंगलध्वनि और गणपति बप्पा के जयकारों के बीच मुख्यमंत्री का फूल-मालाओं से अभिनंदन किया गया। समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें गजमाला पहनाकर स्वागत किया। पूरे परिसर में गणेशोत्सव का उल्लास और भक्तिमय वातावरण दिखाई दिया। भगवान गणेश के दर्शन और पूजा-अर्चना के पश्चात मुख्यमंत्री साय गोल बाजार में ही स्थित 150 वर्ष से अधिक पुराने हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने यहां भगवान हनुमान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने राजधानी की इस प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, श्रीचंद सुंदरानी, केदार गुप्ता, छगन मूंदड़ा, अमरजीत छाबड़ा सहित गणेशोत्सव समिति के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, व्यापारीगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

यूपी में 1500-2000 मेगावाट की कमी के बावजूद बिजली सप्लाई व्यवस्था पटरी पर, जल्द बढ़ेगी उपलब्धता

कोयला संकट के बीच योगी सरकार का प्रभावी प्रबंधन, रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति जारी 1500-2000 मेगावाट की कमी के बावजूद यूपी में आपूर्ति व्यवस्था संभली, जल्द बढ़ेगी उपलब्धता करीब 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद लखनऊ  कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि से देशभर में कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने और तापीय विद्युत उत्पादन में आई कमी के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को संभालने के लिए प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया है। विषम परिस्थितियों के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश के ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत और बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार और कई स्थानों पर उससे अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सोमवार को विद्युत आपूर्ति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में निर्धारित शिड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जहां से भी विद्युत उपलब्ध हो, उसे प्राप्त कर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए। 1500 से 2000 मेगावाट की कमी के बावजूद आपूर्ति वर्तमान में कोयले की कमी के कारण उत्तर प्रदेश को सामान्य दिनों की तुलना में करीब 1500 से 2000 मेगावाट विद्युत की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में विद्युत की मांग भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी है। वहीं कोयले की कमी के कारण लगभग 35 गीगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। विंड एवं हाइड्रो पावर के उत्पादन में भी कमी आई है। इसके बावजूद वर्तमान परिस्थितियों में लगभग 27,000 मेगावाट तक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली देने की कोशिश की जा रही है। जल्द मिलेगी अतिरिक्त बिजली रात्रि में 2000 से 3000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध न हो पाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कटौती की जा रही है। हालांकि आगामी दो-तीन दिनों में अनपरा डी, हरदुआगंज-ई तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयों के उपलब्ध होने से लगभग 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की संभावना है। इसके अलावा अनपरा के कोयले को लैंको की ओर डायवर्ट करने तथा बारा में कोयला आपूर्ति में सुधार के चलते रात्रि में अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने से लगभग 700 मेगावाट विद्युत उपलब्धता एवं आपूर्ति में वृद्धि हुई है। योगी सरकार का फोकस, जनता को अधिकतम राहत पावर कारपोरेशन प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2017 एवं 2021 जैसी कोयला आपूर्ति संबंधी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए दिन के समय प्रदेश के सभी क्षेत्रों में कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत एवं बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक घंटे विद्युत आपूर्ति देने का प्रयास लगातार जारी है। कोयला आपूर्ति में सुधार के लिए कोयला मंत्रालय के उच्च प्रबंधन से भी समुचित कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

बिना भेदभाव जरूरतमंदों तक पहुंची राहत, पांच वर्षों में 2.44 लाख लाभार्थियों को सहायता

बिना भेदभाव जरूरतमंदों तक पहुंचा मुख्यमंत्री राहत कोष का लाभ पांच साल में 2.44 लाख लाभार्थियों को मिली 4,324 करोड़ की सहायता, प्रदेश के सभी मंडलों और जिलों तक पहुंची राहत 2025-26 में 74,531 लाभार्थियों तक पहुंची मदद, पिछले पांच वर्षों में लाभार्थियों की संख्या में 4.5 गुना वृद्धि लखनऊ,   आर्थिक विपन्नता, गंभीर बीमारी और विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंदों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। इस सहायता का दायरा लगातार विस्तृत हुआ है और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बिना किसी भेदभाव समभाव से जरूरतमंदों तक राहत पहुंची है। उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पांच पूर्ण वित्तीय वर्षों में 2,44,263 लाभार्थियों को कुल 4,324.60 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत हुई। इस अवधि में वार्षिक लाभार्थियों की संख्या 16,640 से बढ़कर 74,531 हो गई, यानी करीब 4.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई। मंडल और जिला स्तर के आंकड़े भी सहायता के व्यापक भौगोलिक विस्तार की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। पांच साल में सहायता का दायरा बढ़ा  मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता पाने वाले लाभार्थियों की संख्या में पिछले वर्षों के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2021-22 में 289.71 करोड़ रुपये की सहायता से 16,640 लाभार्थी लाभान्वित हुए थे। वर्ष 2022-23 में सहायता राशि बढ़कर 572.97 करोड़ रुपये रही और लाभार्थियों की संख्या 31,745 तक पहुंच गई। वर्ष 2023-24 में 1,008.50 करोड़ रुपये की सहायता से 54,473 लाभार्थियों को राहत मिली। वर्ष 2024-25 में सहायता राशि 1,344.94 करोड़ रुपये रही, जो पांच पूर्ण वित्तीय वर्षों में सर्वाधिक है। इसी वर्ष 66,874 लाभार्थियों को सहायता मिली और प्रति लाभार्थी औसत सहायता 2.01 लाख रुपये के उच्चतम स्तर पर रही। वर्ष 2025-26 में सहायता राशि 1,108.48 करोड़ रुपये रही, जबकि लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 74,531 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस वर्ष प्रति लाभार्थी औसत सहायता 1.49 लाख रुपये रही। लाभार्थियों की संख्या में हुआ निरंतर विस्तार आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति यह भी सामने आती है कि सहायता राशि में वर्षवार बदलाव के बावजूद लाभार्थियों की संख्या में व्यापक वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में सहायता राशि पिछले वर्ष की तुलना में 17.6 प्रतिशत कम रही, लेकिन लाभार्थियों की संख्या 11.4 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इससे स्पष्ट होता है कि अधिक संख्या में जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने का क्रम लगातार जारी रहा। बिना भेदभाव सभी मंडलों तक पहुंची राहत वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के उपलब्ध रिकॉर्ड के मंडलवार विश्लेषण में लखनऊ मंडल में 19,507, गोरखपुर मंडल में 13,621, प्रयागराज मंडल में 12,019, अयोध्या मंडल में 10,427, वाराणसी में 9,364 और कानपुर में 8,433 लाभार्थियों को सहायता मिली है। देवीपाटन मंडल में 7,201, आजमगढ़ में 6,760, बस्ती में 3,740 और मिर्जापुर में 3,335 लाभार्थी दर्ज हैं। झांसी मंडल में 2,263, चित्रकूट में 1,894, आगरा में 1,617, मुरादाबाद में 1,441 तथा मेरठ में 1,308 लाभार्थी हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि सहायता का वितरण प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में हुआ है और जरूरतमंदों तक राहत का दायरा केवल बड़े मंडलों तक सीमित नहीं रहा। छोटे जिलों से बड़े जिलों तक पहुंची सहायता जिला स्तर के आंकड़ों में लखनऊ में 7,491, प्रयागराज में 6,572, गोरखपुर में 5,463 और कानपुर नगर में 4,890 लाभार्थियों को सहायता मिली है। इसके बाद गोंडा में 3,647, आजमगढ़ में 3,417, प्रतापगढ़ में 3,240, वाराणसी में 3,220, जौनपुर में 3,219 और सीतापुर में 3,192 लाभार्थी दर्ज हैं। कुशीनगर में 3,179, देवरिया में 2,914, बाराबंकी में 2,911, रायबरेली में 2,701 और अयोध्या में 2,246 लाभार्थियों को सहायता मिली है। जिला स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों में बड़े जिलों के साथ-साथ अपेक्षाकृत छोटे जिलों तक भी राहत पहुंचने का क्रम स्पष्ट दिखाई देता है। कम जनसंख्या वाले जिलों में भी जरूरतमंदों तक सहायता पहुंची है। यह वितरण इस बात को रेखांकित करता है कि मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से सहायता का दायरा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक विस्तृत रहा है। जिला स्तर के आंकड़े भी व्यापक पहुंच और जरूरतमंदों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की दिशा में जारी प्रयासों की तस्वीर सामने रखते हैं। समभाव के साथ जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मुख्यमंत्री राहत कोष के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में सहायता पाने वाले लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2.44 लाख से अधिक लाभार्थियों को सहायता मिलना और प्रदेश के सभी मंडलों व जिलों तक राहत पहुंचना इस व्यवस्था की व्यापक पहुंच को रेखांकित करता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे जरूरतमंदों को सहारा देने की यह व्यवस्था जनकल्याण और सामाजिक समभाव की दिशा में महत्वपूर्ण है। आंकड़ों में सहायता के बढ़ते दायरे के साथ यह संदेश भी स्पष्ट होता है कि जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया को व्यापक बनाने पर जोर दिया गया है।