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जीवन का उद्देश्य केवल पाना नहीं, समाज को कुछ देना भी हो : राज्यपाल रमेन डेका

जीवन में ऐसा कार्य करें जिसमें केवल पाना नहीं, समाज को कुछ देना हो- राज्यपाल रमेन डेका राजभवन (लोक भवन) में बालिका गृह की बेटियों से राज्यपाल ने किया आत्मीय संवाद अंगदान और देहदान का संकल्प लेने वाले 75 नागरिकों का हुआ सम्मान रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोक भवन  में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में एसओएस बालिका गृह, माना की बालिकाओं से आत्मीय संवाद किया। इसके साथ ही उन्होंने अंगदान एवं देहदान का संकल्प लेकर मानवता की सेवा का अनुकरणीय संदेश देने वाले 75 नागरिकों को सम्मानित किया। राज्यपाल ने बालिका गृह की बेटियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वे समाज और राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य हैं। शिक्षा, अनुशासन, आत्मविश्वास और कड़े परिश्रम के बल पर जीवन में कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उन्होंने बालिकाओं से अपने सपनों को कभी छोटा न समझने और निरंतर सीखते हुए आगे बढ़ने का आह्वान किया। पुस्तकों से मिलता है स्थायी ज्ञान और आगे बढ़ने का साहस          राज्यपाल ने कहा कि आज के डिजिटल युग में इंटरनेट पर उपलब्ध बहुत सी जानकारियां समय के साथ बदल जाती हैं, लेकिन पुस्तकों में संचित ज्ञान लंबे समय तक हमारा मार्गदर्शन करता है। उन्होंने बालिकाओं को नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने की आदत विकसित करने की सलाह दी। विशेष रूप से सफल विभूतियों की जीवनी पढ़ने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इससे यह समझने का अवसर मिलता है कि कैसे कठिन संघर्षों और निरंतर प्रयासों के बाद लोग सफलता के शिखर तक पहुंचे हैं। ऐसी प्रेरक कहानियां जीवन में आगे बढ़ने का साहस और संकल्प देती हैं। उन्होंने बालिकाओं से कहा कि जीवन में हमेशा ऐसा कार्य करने का प्रयास करें जिसमें केवल पाने की लालसा न हो, बल्कि दूसरों की मदद करने और समाज के कल्याण में योगदान देने का निस्वार्थ भाव हो। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने बालिकाओं से सीधे बातचीत कर उनकी जिज्ञासाओं और प्रश्नों के आत्मीय जवाब दिए। उन्होंने बालिकाओं को उपहार स्वरूप स्टेशनरी सामग्री भेंट की, वहीं बालिकाओं ने भी राज्यपाल को स्व-निर्मित उपहार भेंट कर अपना स्नेह व्यक्त किया। मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन अनिवार्य           इस अवसर पर राज्यपाल ने पर्यावरण एवं जल संकट के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि मानव, पशु एवं प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। इस संतुलन को कायम रखने में वृक्षों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए पेड़ों को बचाना और व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।          राज्यपाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ष्हमने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन पानी भी खरीदकर पीना पड़ेगा। इसलिए जल का संवर्धन और संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि हमने आज पेड़ों को नहीं संभाला, तो आने वाले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ को गंभीर भू-जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इंसान ही स्वच्छ हवा और पानी को प्रदूषित कर रहा है, इसलिए इसे सुधारने की जिम्मेदारी भी इंसान की ही है। अंगदान और देहदान मानवता की सर्वाेच्च सेवा           राज्यपाल डेका ने कहा कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ने से कई जरूरतमंद लोगों को नया जीवन मिल सकता है। इसी प्रकार, चिकित्सा शिक्षा और शोध (त्मेमंतबी) के क्षेत्र में देहदान का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि जो लोग अंगदान और देहदान का संकल्प ले रहे हैं, वे समाज के सच्चे नायक हैं। उन्हें अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। यह संवेदनशीलता और मानवता का सबसे उच्च भाव है, जिसे हर स्तर पर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। 75 नागरिक और रायपुर कलेक्टर हुए सम्मानित          कार्यक्रम में राज्यपाल ने अंगदान एवं देहदान का संकल्प लेने वाले 75 नागरिकों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इसके साथ ही, रायपुर जिले के कलेक्टर गौरव सिंह को भी इस पुनीत क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय कार्य के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार श्रीमती सत्यभामा दुबे सहित राजभवन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, अंगदान व देहदान का संकल्प लेने वाले प्रबुद्ध नागरिक, बालिका गृह की बालिकाएं तथा उनके शिक्षक उपस्थित थे।

पंजाब में जल्द पक्की होगी 65 हजार कर्मचारियों की नौकरी, कैबिनेट ले सकती है बड़ा फैसला

चंडीगढ़. पंजाब में नगर निकाय चुनावों के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में सोमवार को पंजाब कैबिनेट की अहम बैठक होने जा रही है। खास बात यह है कि निकाय चुनावों के बाद शनिवार को भी मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी और अब दो दिन के भीतर दूसरी बार कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है। सूत्रों के अनुसार बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा जनहित से जुड़े मुद्दों, विकास परियोजनाओं और लंबित प्रशासनिक मामलों पर भी चर्चा होने की संभावना है। कुछ विभागों की ओर से भेजे गए प्रस्तावों को मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है। हालांकि सरकार की ओर से बैठक का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। इसके साथ ही वित्तीय मामलों और विभागीय कार्यों से जुड़े मुद्दों पर भी मंत्रियों के साथ चर्चा हो सकती है। निकाय चुनावों के नतीजों के बाद यह लगातार दूसरी कैबिनेट बैठक है। ऐसे में सरकार की आगामी प्राथमिकताओं और प्रशासनिक रणनीति को लेकर भी बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि मंत्रिमंडल की बैठक में कौन-कौन से फैसले लिए जाते हैं और उनका राज्य की राजनीति तथा प्रशासन पर क्या असर पड़ता है। कैबिनेट बैठक मुख्यमंत्री आवास, सेक्टर-2, चंडीगढ़ में आयोजित होगी। बैठक के बाद सरकार की ओर से लिए गए फैसलों की जानकारी साझा की जाएगी। पक्की नौकरी का दमदार फॉर्मूला सरकार ने कर्मचारियों को रेगुलर करने का पारदर्शी और कड़ा ब्लूप्रिंट तैयार किया है. नियम के तहत जिन ग्रुप-C और ग्रुप-D के कर्मचारियों ने 5 साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, उन्हें अब सीधे सरकारी ठेके के अधीन लाया जाएगा. वहीं, अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने वाले फायर सर्विस कर्मचारी, पी.एस.पी.सी.एल. लाइनमैन, सीवर वर्कर और सफाई कर्मचारियों को महज 3 साल की सेवा के बाद ही यह लाभ मिल जाएगा. इसके बाद, सरकारी ठेके पर 10 साल पूरे करने वाले कर्मचारियों को मंजूरशुदा खाली पदों पर पूरी तरह से ‘रेगुलर’ कर दिया जाएगा।  ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने का ऐलान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘पंजाब के 65,000 से अधिक कॉन्ट्रैक्ट वर्करों ने सूबे की सेवा में अपनी जिंदगी के कई-कई साल दिए हैं. इस फैसले के साथ पंजाब सरकार ने उन्हें वह दे दिया है, जो उनका हक है. अब कोई भी ठेकेदार इन कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच खड़ा नहीं होगा.’ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘इन कर्मचारियों को अब सीधा रोजगार, पूरा सम्मान और पक्की नौकरी का स्पष्ट रास्ता मिलेगा. पंजाब सरकार के विभागों और संस्थाओं में निजी ठेकेदारों के माध्यम से काम करने वाले कर्मचारियों को सीधे राज्य सरकार की अपनी रोजगार प्रणाली के अधीन लाया जाएगा, जिससे बिचौलिया ठेकेदारी प्रथा समाप्त हो जाएगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब राज्य आउटसोर्स्ड पर्सनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्टुअल एंगेजमेंट) बिल, 2026 के तहत आउटसोर्स्ड ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के कर्मचारियों, जिन्होंने पांच साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, को सीधे सरकारी ठेके पर रोजगार के अधीन लाया जाएगा. जोखिम वाली श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारी तीन साल की सेवा पूरी करने के बाद योग्य हो जाएंगे. पांच साल की निरंतर आउटसोर्स्ड सेवा के बाद सीधे राज्य सरकार के अधीन रोजगार प्रदान किया जाएगा. इसके बाद सरकारी ठेके पर 10 साल सेवा पूरी करने के बाद, कर्मचारियों को रेगुलर मंजूरशुदा असामियों के विरुद्ध रेगुलर करने के लिए विचार किया जाएगा. दो नए कानून लाए जा रहे हैं, जिनमें से एक आउटसोर्स्ड रोजगार से सीधे राज्य सरकार के अधीन ठेके पर करने के लिए और दूसरा मंजूर खाली असामियों के विरुद्ध सरकारी ठेके से रेगुलर कैडर में करने के लिए है।  51 विभागों के 65 हजार कामगार को सरकारी नौकरी इस पहल के पैमाने को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ’51 विभागों में कुल 65,048 आउटसोर्स कामगार इस सुधार के दायरे में आते हैं और 26,000 से अधिक कामगार पहले लाभार्थियों में शामिल होंगे.’ उन्होंने आगे घोषणा की कि जीवन और स्वास्थ्य के लिए जोखिम से संबंधित ड्यूटी निभाने वाले कामगारों पर नीति के तहत तेजी से विचार किया जाएगा. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘जिन कामगारों की रोजाना ड्यूटी में खतरा होता है, उन्हें पांच साल की बजाय तीन साल बाद विचार किया जाएगा. इनमें फायर सर्विसेज कर्मचारी, पी.एस.पी.सी.एल. लाइनमैन, सीवर वर्कर, शहरी स्थानीय संस्थाओं के सेनिटेशन कर्मचारी, कूड़ा-कर्कट संभालने वाले कर्मचारी और फील्ड शिकायत स्टाफ शामिल हैं।  लाभार्थी में किस विभाग से कौन-कौन? लाभ लेने वाले विभागों का विवरण देते हुए बयान में कहा गया है कि सुधार में बिजली क्षेत्र के 15,753 कर्मचारियों को शामिल किया गया है, जिसमें शिकायतों का समाधान करने वाला स्टाफ, पैसको कर्मचारी, मीटर रीडर और नोडल सेंटर वर्कर शामिल हैं. स्थानीय सरकार विभाग के 8,436 कर्मचारी, जिनमें मुख्य रूप से सफाई कर्मचारी, चीनी मिलों, स्पिनफेड और मार्कफेड समेत सहकारी संस्थाओं के 8,373 कामगार; स्कूल शिक्षा के 7,704 कर्मचारी, परिवहन विभाग के 4,746 कर्मचारी और 1,472 आउटसोर्स्ड फायर कर्मचारी शामिल हैं।  इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के 2,688 कर्मचारी, जल आपूर्ति और सेनिटेशन के 1,575 कर्मचारी, कृषि के 1,533 कर्मचारी, जेलों के 1,311 कर्मचारी, तकनीकी शिक्षा के 1,251 कर्मचारी, पी.डब्ल्यू.डी. (बी एंड आर) के 1,570 कर्मचारी, सामान्य प्रशासन विभाग के 1,322 कर्मचारी और मेडिकल शिक्षा के 1,231 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।  ठेकेदारी खत्म, मजदूर-मालिक के बीच और कोई नहीं मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘मजदूरों का अब मालिकों से सीधा संपर्क होगा. इस प्रणाली में अब ठेकेदारों के लिए कोई जगह नहीं होगी.’ मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ‘मेहनताने के बिना किसी एजेंसी की कटौती या कमीशन के सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा की जाएंगी. कर्मचारियों को हर कैलेंडर वर्ष में कानूनी प्रसूति लाभ और 10 दिनों की कैजुअल छुट्टी मिलेगी. वे बायोमेट्रिक हाजिरी और आई.एच.आर.एम.एस. प्रणालियों के अधीन भी कवर किए जाएंगे।  काम में पारदर्शिता, मनमानी पर कार्रवाई कर्मचारियों की सुरक्षा के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यहां पारदर्शिता और मनमानी वाली कार्रवाई नहीं चलेगी. किसी भी कर्मचारी को लिखित कारण … Read more

MP STF की लगातार दूसरे दिन रेड, 50 लाख की नशीली कफ सिरप बरामद, मचा हड़कंप

भोपाल राजधानी भोपाल में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 50 लाख रुपये कीमत की नशीली कफ सिरप की खेप बरामद की है। लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई ने यह संकेत दे दिया है कि भोपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में नशीली दवाओं का संगठित नेटवर्क गहराई तक अपनी जड़ें जमा चुका है। एसटीएफ अब इस पूरे सिंडिकेट की परतें खोलने में जुट गई है। जानकारी के अनुसार 30 और 31 मई की दरमियानी रात एसटीएफ की टीम ने एयरपोर्ट रोड स्थित मुबारकपुर क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और नशे के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली कफ सिरप बरामद की गई। जब्त माल में ऑफ-कफ और ऑनरेक्स ब्रांड की बड़ी खेप शामिल है, जिनका दुरुपयोग युवाओं और नशे के आदी लोगों द्वारा किए जाने की आशंका जताई जा रही है।   आरोपितों को पांच दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, जिसमें उन्होंने बताया कि मुबारकपुर में भी एक मकान में कफ सिरप रखा हुआ है। एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया कि आरोपित दिल्ली से आनरेक्स और आफ-कफ सिरप मंगाते थे। इनसे एक्सपायरी और बैच नंबर हटाने के लिए रैपर बदल देते थे। यह सिरप ग्रामीण अंचलों में खपाया जाता था। नियमानुसार, डाक्टर के पर्चे के बिना इसे नहीं खरीदा-बेचा जा सकता है। पूछताछ में आरोपितों ने बताया था एक सप्ताह पहले ही दिल्ली से कफ सिरप मंगाया था। लगभग एक वर्ष से यह धंधा चल रहा था, पर पुलिस को भनक नहीं लगी। संरक्षण देने वालों की तलाश में जुटी एसटीएफ  एसटीएफ को लंबे समय से मुबारकपुर क्षेत्र में नशीली दवाओं के अवैध भंडारण और वितरण की शिकायतें मिल रही थीं। इसी सूचना के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई। एसटीएफ अधीक्षक राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि यह खेप कहां से लाई गई, किसके संरक्षण में रखी गई और इसे किन-किन क्षेत्रों में भेजा जाना था। इसके साथ ही इस अवैध कारोबार से जुड़े सभी लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।  गौरतलब है कि इससे पहले एसटीएफ ने गांधीनगर क्षेत्र की डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी में छापेमारी कर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये कीमत की नशीली कफ सिरप बरामद की थी। उस कार्रवाई में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान मामले में भी गिरफ्तार आरोपियों को एसटीएफ ने न्यायालय से पांच दिन के रिमांड पर लिया है। पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।  

किसानों के लिए नया नियम लागू, बस्तर में बिना आधार कार्ड नहीं मिलेगी खाद

बस्तर. बस्तर में रासायनिक खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण रोकने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है. अब सहकारी समितियों के साथ-साथ जिले के सभी निजी खाद विक्रेताओं को भी पॉश मशीन के जरिए ही खाद बेचनी होगी. नई व्यवस्था के तहत बिना आधार कार्ड के किसानों को खाद नहीं मिलेगी. हर खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड सीधे सरकारी पोर्टल पर दर्ज होगा. फसलों और भूमि की जरूरत के अनुसार खाद वितरण की सीमा भी तय कर दी गई है. जिले में 184 निजी खाद विक्रेता पंजीकृत हैं, लेकिन अभी 20 दुकानदारों के पास पॉश मशीन नहीं है. कृषि विभाग को आशंका है कि बिना मशीन वाले विक्रेता नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं. इसीलिए उनकी यूनिक आईडी तैयार कर निगरानी बढ़ाई जा रही है. पिछले पांच वर्षों में जिले में रासायनिक खाद की खपत 27 हजार टन से बढ़कर 40 हजार टन से अधिक पहुंच गई है. बढ़ती मांग के बीच विभाग पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित करने में जुटा है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. नई व्यवस्था से खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ने और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध होने की उम्मीद है.

बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी, बकाया बिल पर 75% तक डिस्काउंट; 30 जून तक करें रजिस्ट्रेशन

रायपुर. राज्य सरकार की ओर से पुराने बकाया बिजली बिल में बड़ी छूट दी जा रही है। लेकिन इसके लिए लोगों को मोर बिजली एप में पंजीयन कराना होगा। इसके बाद ही पुराने बिल की गणना की जाएगी। फिर तय किया जाएगा कि कितनी छूट दी जा सकती है। अभी तक केवल रायपुर जिले में ही 30 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन करा लिया है। प्रारंभिक गणना में इन सभी को 40 लाख तक की छूट मिलने की संभावना है। बिजली बिल में छूट और माफी के लिए 30 जून तक पंजीयन कराया जा सकता है। इसलिए अंतिम आंकड़े तय तारीख के बाद ही जारी किए जाएंगे। अफसरों का दावा है कि यह योजना लोगों को काफी पसंद आ रही है। इसलिए एक महीने के बाद आंकड़ा दोगुना से भी ज्यादा होने की संभावना है। इससे राज्य सरकार को भी बड़ा फायदा होगा। लंबित बिजली बिल का भुगतान होने से करोड़ों की आय होगी। जाने क्या है योजना छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से प्रदेश के लाखों घरेलू, कृषि और बीपीएल उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में भारी राहत देने के लिए मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना लाई गई है। इस योजना के तहत ही 30 जून तक पंजीयन कराया जा सकता है। इस तरह कर सकते हैं पंजीयन लोग घर बैठे इस योजना में पंजीयन करा सकते हैं। इसके लिए मोबाइल पर मोर बिजली एप डाउनलोड करना होगा। इसके बाद योजना की जानकारी वाला विज्ञापन स्क्रीन पर दिखाई देगा। इस पर क्लिक करते ही एक फॉर्म आएगा। इस पर बिजली बिल उपभोक्ता क्रमांक, नाम, बिजली बिल जानकारी, मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। इसके साथ ही योजना के तहत फायदा लेने के लिए ग्राहक का पंजीयन हो जाएगा। 30 जून के बाद इस आवेदन पर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कैटेगरी के अनुसार छूट तय की जाएगी।

ट्विशा शर्मा मर्डर केस की जांच तेज, CBI ने गिरिबाला सिंह के घर किया सीन रीक्रिएट

भोपाल  ट्विशा शर्मा केस की जांच तेज हो गई है। सीबीआई की टीम सोमवार को क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए गिरिबाला सिंह के घर पहुंची है। गिरिबाला सिंह ने कहा था कि समर्थ ने ही फंदे से ट्विशा को उतारा था। रीक्रिएशन के लिए सीबीआई की टीम ट्विशा शर्मा का डमी पुतला लेकर पहुंची है। साथ ही वेट के लिए पुलिस के जवान डंबल भी ले आए हैं। पूरा सीन क्रिएट करेगी सीबीआई दरअसल, समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह अभी सीबीआई की रिमांड पर हैं। दोनों से पूछताछ में सीबीआई को कई तरह की जानकारी मिली है। सीबीआई की टीम अब गिरिबाला सिंह के घर पर क्राइम सीन को रीक्रिएट कर रही है। इसके लिए सीबीआई की टीम पूरी तैयारी के साथ पहुंची है। सीबआई की टीम गिरिबाला सिंह के घर में ट्विशा शर्मा का डमी पुतला लेकर पहुंची है। साथ ही वेट के लिए डंबल भी लेकर पहुंची है। फंदे पर लटकाया जाएगा पुतला पुतले को फंदे पर लटकाया जाएगा। पुतले का वेट ट्विशा शर्मा के वजन के अनुसार ही होगा। साथ ही ट्विशा के ससुरालवालों ने कहा था कि उसने बेल्ट से फंदा लगाया है। सीबीआई टीम बेल्ट भी लेकर आई है। छत पर पूरा सीन रीक्रिएशन करवाया जाएगा। साथ ही ट्विशा के वजन जितना पुतले को समर्थ से उतरवाया जाएगा। ट्विशा और गिरिबाला सिंह ने सीबीआई को जो जानकारी दी है, उसी हिसाब से सीन को रिक्रिएट की जाएगी। दो जून को रिमांड खत्म हो रहा ट्विशा की सासा गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह अभी सीबीआई की रिमांड पर है। दोनों की रिमांड दो जून को दो बजे खत्म हो रही है। इनके बयानों और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद सीबीआई की तरफ से मामले में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इसके बाद कोर्ट में मामले की सुनवाई होगी। फरारी के दौरान जबलपुर और भोपाल में रहा समर्थ वहीं, ट्विशा शर्मा की मौत के बाद समर्थ सिंह फरार हो गया था। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि समर्थ सिंह कुछ दिनों तक भोपाल में छुपा रहा। इसके बाद वह जबलपुर में जाकर छुप गया था। हाईकोर्ट से जमानत याचिका वापस लेने के बाद समर्थ सिंह ने जबलपुर हाईकोर्ट में ही सरेंडर किया था। सीबीआई ने आरोपियों के दर्ज किए हैं बयान गौरतलब है कि इस मामले में सीबीआई ने सभी आरोपियों और केस से संबंधित लोगों से पूछताछ की है। ट्विशा के शव उतारने में जिनलोगों ने समर्थ की मदद की थी, उनसे भी पूछताछ की गई है।  

मुख्यमंत्री का जीरो टॉलरेंस संदेश, अशिष्ट व्यवहार करने वाले अफसर पर गिरी गाज

मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश : जनता से अशिष्ट व्यवहार पर जीरो टॉलरेंस, दुर्ग जनपद सीईओ निलंबित मुख्यमंत्री की दोटूक : सुशासन में जवाबदेही सर्वोपरि, जनता से अशिष्ट व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं रायपुर   सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में आम जनता से अशिष्ट व्यवहार और कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दुर्ग संभागायुक्त को दिए थे। मुख्यमंत्री साय के निर्देशों के परिपालन में कमिश्नर दुर्ग ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत दुर्ग, रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। संभागायुक्त दुर्ग द्वारा जारी निलंबन आदेश में उल्लेखित है कि कलेक्टर दुर्ग से प्राप्त प्रस्ताव एवं ग्राम थनौद में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में पाण्डेय द्वारा आम जनता से अशिष्ट व्यवहार संबंधी वीडियो क्लिप के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने शासन द्वारा आयोजित सुशासन तिहार एवं शिविर में कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही तथा अशिष्टतापूर्ण व्यवहार किया। यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के विपरीत है। इस संबंध में संभागायुक्त दुर्ग द्वारा पाण्डेय को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, किंतु उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब समाधानकारक नहीं पाया गया। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के तहत प्रत्येक शासकीय सेवक को सदैव पूर्ण रूप से सत्यनिष्ठ एवं कर्तव्यपरायण रहना है तथा ऐसा कोई कार्य नहीं करना है, जो शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय हो। नियम 3-क के खण्ड (क) के अनुसार, कोई भी शासकीय सेवक अपने पदीय कृत्यों के पालन में अशिष्टता से कार्य नहीं करेगा।  लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासन तंत्र आम नागरिकों के प्रति उत्तरदायी होता है, इसलिए प्रत्येक लोकसेवक द्वारा आम नागरिकों से शिष्ट व्यवहार को आचरण संहिता का महत्वपूर्ण घटक माना गया है। तदनुसार रूपेश कुमार पाण्डेय को कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही एवं कदाचरण के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।  निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

इंदौर के जल संकट पर एक्शन मोड में सीएम डॉ. यादव, हालात की समीक्षा के लिए बुलाई अहम बैठक

इंदौर के जल संकट की स्थिति पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक ली अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश संकटग्रस्त वार्डों में विशेष जलापूर्ति योजना लागू की जाए जल चोरी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश पाइप-लाइन लीकेज और वितरण हानि को सुधारने के निर्देश नागरिकों को राहत मिले, हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  इंदौर स्थित संभागायुक्त कार्यालय पहुंचकर शहर में उत्पन्न जल संकट की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की तथा अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 24×7 जल नियंत्रण कक्ष के माध्यम से प्रतिदिन सुबह एवं शाम जलापूर्ति की समीक्षा की जाए। संकटग्रस्त वार्डों में विशेष जलापूर्ति योजना लागू कर प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर राहत प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि नल से जल सप्लाई के समय में असमानता और विसंगतियों को तत्काल दूर किया जाये। साथ ही सभी क्षेत्रों में संतुलित जल वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने शासकीय महाविद्यालयों, छात्रावासों तथा अन्य आवासीय संस्थानों में जल उपलब्धता की विशेष चिंता करने के निर्देश दिए। साथ ही जल चोरी करने वालों एवं मोटरों के माध्यम से अवैध रूप से पानी खींचने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई करने को कहा। जल टंकियों का पूर्ण क्षमता से उपयोग सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शहर की बड़ी जल टंकियों का पूर्ण क्षमता से उपयोग सुनिश्चित किया जाए। निजी एवं नगर निगम के टैंकरों की मिनट-टू-मिनट मॉनिटरिंग की जाए। पाइपलाइन लीकेज एवं वितरण हानि को तत्काल सुधारकर जल की बर्बादी रोकी जाए। इउन्होंने कहा कि भोपाल से वरिष्ठ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी पूर्व में भी इंदौर का दौरा कर चुके हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पुनः भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और नागरिक समितियों के साथ नियमित संवाद तथा समन्वय बनाए रखने तथा जल संकट की स्थिति से संबंधित जानकारी एवं प्रतिवेदन मुख्यमंत्री कार्यालय को निरंतर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्ला, विधायक श्रीमती मालिनी गौर, विधायक मधु वर्मा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से मजबूत हो रही सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्य : सीएम विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना सामाजिक समरसता, सादगी और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त कर रही : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बेमेतरा में सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, नवदंपतियों को दिया आशीर्वाद विधायक दीपेश साहू ने सामूहिक विवाह में शामिल होकर प्रस्तुत की प्रेरणादायी मिसाल, बैलगाड़ी में निकली बारात बनी आकर्षण का केंद्र रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बेमेतरा में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुए और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर उनके सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की।  मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समाज में समानता, सामाजिक समरसता, सादगी और सकारात्मक मूल्यों को सशक्त करने का प्रभावी माध्यम बन रही है। यह योजना बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार की संवेदनशील सोच को प्रतिबिंबित करती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन सामाजिक एकता और सहभागिता की भावना को मजबूत करते हैं। सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए यह योजना सम्मानजनक और गरिमापूर्ण विवाह का अवसर प्रदान कर रही है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण निर्मित हो रहा है। उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कृतियों और सामाजिक मूल्यों का मिलन होता है। इस अवसर पर बेमेतरा विधायक दीपेश साहू भी वैवाहिक बंधन में बंधे। मुख्यमंत्री साय ने विधायक साहू के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए सामूहिक विवाह जैसे आयोजन का हिस्सा बनना और सादगीपूर्ण तरीके से विवाह करना समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक बैलगाड़ी में बारात निकालकर विधायक दीपेश साहू ने हमारी समृद्ध लोक परंपराओं, सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक समरसता को सम्मान देने का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह संदेश देता है कि आधुनिक जीवनशैली और सार्वजनिक दायित्वों के बीच भी अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़ाव बनाए रखा जा सकता है। मुख्यमंत्री साय ने नवदंपतियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन विश्वास, प्रेम, सम्मान और पारस्परिक सहयोग की मजबूत नींव पर आगे बढ़ता है। उन्होंने प्रभु राम से सभी नवदंपतियों के सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय दाम्पत्य जीवन की प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी जोड़े समाज और परिवार के लिए प्रेरणादायी जीवन का उदाहरण बनें।

UP में 1645 विस्थापित परिवारों के लिए बड़ा दिन, योगी सरकार देगी जमीन का अधिकार

 बिजनौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को बिजनौर के आलमपुर गौंरी, अफजलगढ़, धामपुर में एक बड़े कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान से विस्थापित 1645 परिवारों को जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण पत्र वितरित करेंगे. सरकार वंचित, शोषित और विस्थापित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें अधिकार दिलाने के लिए यह कदम उठा रही है. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के हाथों 50 पूर्व सैनिकों व पट्टाधारकों को भी लाभ मिलेगा. इसके अलावा, वह प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के लाभार्थियों को आवंटन पत्र और चेक सौंपकर स्थानीय लोगों को बड़ी विकास योजनाओं से जोड़ेंगे।  बिजनौर में भव्य कार्यक्रम और कैफे का उद्घाटन इस भव्य आयोजन के दौरान सीएम योगी महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं द्वारा संचालित 'विदुर प्रेरणा कैफे' का भी उद्घाटन करेंगे. सरकार का मुख्य उद्देश्य इन विस्थापित और वंचित परिवारों को नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में सुरक्षा, सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है, जिससे उनका भविष्य बेहतर हो सके।  पहले भी विस्थापितों को मिले अधिकार उत्तर प्रदेश सरकार इससे पहले भी कई वंचित समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ चुकी है. अप्रैल के महीने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से विस्थापित हुए 331 परिवारों को जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण पत्र बांटा था. इसके अलावा, चंदन चौकी (पलिया) में आयोजित कार्यक्रम में नदियों के कटान से प्रभावित पूर्वी उत्तर प्रदेश के 2350 परिवारों और थारू जनजाति के 4356 परिवारों को भूमि अधिकार पत्र आवंटित किए गए थे।  पुनर्वास के लिए करोड़ों की आर्थिक मदद इसी सिलसिले में मार्च महीने में बहराइच की ग्राम पंचायत सेमरीहना में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. वहां सीएम योगी ने भरथापुर गांव के 118 लाभार्थियों को पुनर्वास सहायता, कृषि भूमि और अन्य संपत्तियों के समकक्ष मूल्य के रूप में प्रति लाभार्थी 15 लाख रुपये की दर से 21.55 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की थी. साथ ही 136 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास, शौचालय और आवासीय पट्टे भी दिए गए थे।