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राज्यमंत्री गौर ने अशोकनगर जिले के कलेक्टर को दिए निर्देश

घुमंतू जनजाति के अगरिया (लोहापीट) समाज को जल्द दिये जाएं पट्टे-राज्यमंत्री गौर राज्यमंत्री गौर ने अशोकनगर जिले के कलेक्टर को दिए निर्देश चंदेरी में 20 वर्षों से निवासरत परिवारों की समस्या का होगा त्वरित निराकरण-राज्यमंत्री गौर भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर से उनके निवास पर घुमंतू जनजाति वर्ग के अगरिया (लोहापीट/गाड़िया लोहार) समाज के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने अशोकनगर जिले के चंदेरी क्षेत्र में लंबे समय से निवासरत समाज के लोगों को आवासीय पट्टे दिलाए जाने की मांग रखी। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे श्री राजू राणा ने बताया कि घुमक्कड़ समाज के कई परिवार पिछले लगभग 20 वर्षों से चंदेरी के तमरपुरा क्षेत्र में निवासरत हैं। इन परिवारों के सभी आवश्यक शासकीय दस्तावेज (आधार, वोटर आईडी आदि) भी चंदेरी के ही बने हुए हैं, लेकिन अब तक पट्टे नहीं मिले हैं। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने इस पर संज्ञान लेते हुए तत्काल अशोकनगर कलेक्टर को शीघ्र समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए। श्रीमती गौर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सभी पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का पूरा लाभ दिलाया जाएगा और पट्टे वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।  

मेट्रो रेल के लिए बड़ा फैसला, प्रोजेक्ट की जद में आ रहीं शॉ मिल हटाने पर सहमति

 भोपाल  शहर के बीच से आरा मशीन टिंबर मार्केट की शिफ्टिंग पर 50 साल बाद बात बन गई। मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की जद में आ रही पुल पातरा से ग्रांड होटल के पीछे तक 36 आरा मशीनों को हटाने पर सहमति बन गई है। आरा मशीन संचालकों को एयरपोर्ट के पास रातीबड़ में जगह आवंटित कर दी गई। 26 आरा मशीनों के दस्तावेज अपडेट है, जबकि दस आरा मशीनों के दस्तावेजों का अपडेटेशन बाकी है। जो अपडेट है, उन्हें नई जगह पर काम शुरू करने की अनुमति पहले दिन से ही मिल जाएगी। डिस्ट्रिक्ट फॉरेस्ट ऑफिसर की एनओसी बाकी है, जिसके बाद नई जगह पर काम शुरू हो जाएगा। रातीबड़ में लघु उद्योग निगम ने यहां आरा मशीनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है। 12 एकड़ में 36 आरा मशीनों के लिए पूरी तरह नया क्षेत्र विकसित कर दिया गया है। अफसरों का कहना है कि शिफ्टिंग के लिए पांच करोड़ रुपए भी दिए गए। शहर में कुल 165 आरा मशीनें है। मेट्रो लाइन, अंडरग्राउंड रैंप का काम हो सकेगा शुरू मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी बाधा टिंबर मार्केट है। पुल बोगदा से पुल पातरा के बीच एलिवेटेड और इसके बाद अंडरग्राउंड लाइन का काम शुरू ही नहीं हो पा रहा है। टिंबर मार्केट के दुकानदारों की सबसे बड़ी ताकत उनका कारोबार है। शहर की जरूरत की 60 फीसदी लकड़ी का सामान और लकड़ियां यहीं से जाती है। सभी दुकानें हटने से फर्नीचर व इसके लिए जरूरी लकड़ियों की आपूर्ति प्रभावित न हो इसका भी ध्यान रखना होगा। इसी कमजोर नब्ज पर लंबे समय से रोड किनारे कारोबार चल रहा है। सुनसान गली में टिंबर की दुकानें पुल बोगदा से पुल पातरा के बीच करीब दो किमी लंबी रोड पहले दुकानदारों और ग्राहकों से भरी रहती थी, लेकिन मेट्रो के काम के चलते हुई तोड़फोड़ ने पूरी रोड पर लगभग सन्नाटे की स्थिति बना दी। यहां सिर्फ लकड़ी बाजार ही बचा है और जब तक ये नहीं हटता काम मुश्किल है। ऐशबाग के 90 डिग्री ब्रिज के बाद इन्हीं टिंबर की दुकानों के बीच अंडरग्राउंड लाइन का काम शुरू होगा। आरा मशीनों की शिफ्टिंग पर सहमति आरा मशीनों की शिफ्टिंग पर सहमति बन गई है। उद्योग नियमों के अनुसार प्लॉट आवंटन हो चुका है। अब आरा मशीन संचालक अपने स्तर पर शिफ्टिंग शुरू कर देंगे। एक माह में पुल पातरा से ग्रांड होटल के पीछे तक की आरा मशीनें हट जाएगी। -बदर आलम, अध्यक्ष, टिंबर मार्केट एसोसिएशन रातीबड़ में जगह तय रातीबड़ में आरा मशीनों के लिए जगह तय कर दी। इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार हो गया। स्ट्रीट लाइट और कुछ काम बाकी है, इस सप्ताह ये काम पूरा हो जाएगा। डीएफओ की एनओसी मिलना है, नई जगह पर काम शुरू किया जा सकेगा। -दीपक पांडेय, एसडीएम, सिटी

रायपुर आबकारी कार्यालय में वर्षों से जमे अधिकारियों पर चर्चा तेज, तबादला नीति पर घिरा विभाग

रायपुर छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग में लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक रायपुर आबकारी कार्यालय में पदस्थ एडीओ जेबा खान और एडीओ हरिशंकर पैकरा लगभग तीन वर्षों से एक ही जगह पर कार्यरत हैं। इसे लेकर विभागीय गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारों का कहना है कि शासन समय-समय पर तबादला नीति लागू करता है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और किसी अधिकारी का लंबे समय तक एक ही स्थान पर प्रभाव न बढ़े। हालांकि आबकारी विभाग में कुछ अधिकारियों पर यह नीति प्रभावी होती नजर नहीं आ रही है। सूत्रों के अनुसार विभाग में यह चर्चा भी है कि संबंधित अधिकारी खुद को काफी प्रभावशाली बताते हैं और दावा करते हैं कि सरकार किसी की भी आए या जाए, उनसे कोई फर्क नहीं पड़ता। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभागीय चर्चाओं में यह मुद्दा लगातार बना हुआ है। बताया जा रहा है कि इन अधिकारियों का प्रभाव पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के दौरान भी काफी मजबूत माना जाता था। लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों को लेकर विभागीय कर्मचारियों और आम लोगों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तबादला नीति का पालन कब होगा। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर अधिकारियों का स्थानांतरण आवश्यक होता है। इस मामले में आबकारी कमिश्नर एल्मा और एडिशनल कमिश्नर साहू से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं संबंधित अधिकारियों ने भी कॉल रिसीव नहीं किया। अब देखना होगा कि शासन और वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या लंबे समय से जमे अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

रांची: तंबाकू निषेध पर सख्ती, पूरे राज्य में छापेमारी और जनजागरूकता अभियान शुरू

 रांची  राज्य में तंबाकू के विरुद्ध एक माह विशेष अभियान 26 मई से 26 जून तक चलाया जाएगा। विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) के अवसर पर यह आयोजन होगा। इस दौरान न केवल तंबाकू तथा उससे जुड़े उत्पादों के उपयोग नहीं करने को लेकर जनजागरुकता अभियान चलाया जाएगा, बल्कि विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। साथ ही व्यापक छापेमारी भी चलाई जाएगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान, झारखंड के निदेशक शशि प्रकाश झा ने इसे लेकर सभी उपायुक्तों, सिविल सर्जनों एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से 'तंबाकू और निकोटीन की लत से लड़ने की अपील को सामने लाएं' थीम तय की गई है। इसी थीम के आधार पर राज्य के सभी जिलों में जागरूकता कार्यक्रम, छापेमारी अभियान और सामुदायिक गतिविधियां आयोजित होंगी। 26 मई से 30 मई तक विशेष अभियान इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को तंबाकू और निकोटिन की लत से दूर रखना है। जारी दिशा-निर्देश के अनुसार, पहले चरण में 26 मई से 30 मई तक चौक-चौराहों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाए जाएंगे। साथ ही प्रचार-प्रसार की अन्य गतिविधियां होंगी। इस दौरान लोगों को कोटपा एक्ट और झारखंड तंबाकू संशोधन अधिनियम 2021 की जानकारी दी जाएगी। सरकारी भवनों में नो स्मोकिंग जोन के बोर्ड लगाए जाएंगे और स्कूलों के आसपास तंबाकू बिक्री के विरुद्ध विशेष जांच अभियान चलेगा। 31 मई को मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा। इस दौरान सरकारी कार्यालयों, पुलिस थानों और स्वास्थ्य केंद्रों में अधिकारियों और कर्मचारियों को तंबाकू सेवन नहीं करने की शपथ दिलाई जाएगी। स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह की विशेष जांच भी होगी। दो से छह जून तक जिला और प्रखंड स्तर पर तंबाकू नियंत्रण समितियों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। 10 से 17 जून तक ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधियों और वार्ड सदस्यों को अभियान से जोड़ा जाएगा। 18 से 26 जून तक तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान स्कूलों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू बिक्री रोकने के लिए पीली रेखा का चिह्न अंकित किया जाएगा। इस बीच 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भी धूम्रपान और तंबाकू छोड़ने का संदेश दिया जाएगा।

बड़ाकरौंजा में 23 मई को लगेगा सुशासन तिहार जनशिविर

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार प्रदेशभर में “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के जनपद पंचायत जशपुर अंतर्गत ग्राम बड़ाकरौंजा में 23 मई 2026 को शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एवं लाभ भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस शिविर में बड़ाकरौंजा, नीमगांव, रातामाटी, पैकू, पीड़ी, बघिमा, गलौण्डा, टेकूल, तुरीलोदाम, झरगांव, गिरांग, घोलेंग, देवीडड़गांव, जशपुर एवं जुरगुम सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के नागरिक अपनी मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। सुशासन तिहार के तहत नागरिकों से लिखित आवेदन प्राप्त कर उनका प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा शिविरों को शासन और आमजन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है, ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूरस्थ कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। कलेक्टर रोहित व्यास ने शिविर के सुचारू संचालन के लिए नोडल एवं विभागीय अधिकारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता एवं निष्ठा के साथ निर्वहन करने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन ने संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में शिविर में पहुंचकर शासन की योजनाओं का लाभ उठाने और अपनी समस्याओं के समाधान हेतु आवेदन प्रस्तुत करने की अपील की है।

रायबरेली: एनटीपीसी परियोजना का विस्तार, 1550 से बढ़कर होगी और अधिक क्षमता

 रायबरेली  बिजली उत्पादन बढ़ेगा एनटीपीसी में नई यूनिट लगाने तैयारी जारी हो गई है 800 मेगावाट की नई यूनिट लगाई जाने से बिजली की मांग को पूरा करने में आसानी होगी ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना में बिजली उत्पादन बढ़ाने की तैयारी है यहां पर 800 मेगावाट की नई यूनिट लगाई जाएगी उच्च स्तर पर इसके कवायद शुरू हो गई है। ऊंचाहार परियोजना में यह सबसे बड़ी यूनिट होगी इसके बनने से बिजली की मांग को पूरा करने में आसानी होगी । बिजली की मांग दिनों दिन बढ़ रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए तमाम प्रयास हो रहे हैं इसके लिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। एनटीपीसी परियोजना की अभी 1550 मेगावाट क्षमता है। इसकी क्षमता में और वृद्धि की जाएगी। उच्च स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है यहां 800 मेगावाट की इकाई लगाई जाएगी नई इकाई लगाने के लिए परियोजना में पर्याप्त जगह है। नई यूनिट लगने के यहां पर सारे पैरामीटर भी दुरुस्त आए नई इकाई लगाने के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू होगी इसके लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी इन यूनिट के लगने से बिजली उत्पादन और बढ़ जाएगा लोगों को बेहतर बिजली मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। अभी 6 यूनिट कर रही हैं काम वर्तमान में एनटीपीसी परियोजना में 6 इकाइयां हैं इसमें यूनिट संख्या 1 से लेकर 5 तक प्रत्येक के उत्पादन क्षमता 210-210 मेगावाट है छठवीं यूनिट का उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट है। इस परियोजना से 1550 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। अब इसकी क्षमता में वृद्धि की तैयारी है। नौ राज्यों को मिलती है बिजली ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना में विद्युत आपूर्ति उत्तरी ग्रिड के माध्यम से की जाती है। इस परियोजना में से 9 राज्यों दिल्ली हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ को बिजली मिलती है। इन राज्यों में भी बिजली की मांग दिनों दिन बढ़ रही है। क्षमता बढ़ाने से मांग को काम किया जा सकेगा। ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना के मानव संसाधन विभाग के अपर महाप्रबंधक पंकज कुमार का कहना है कि ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना की क्षमता बढ़ेगी अब जहां भी नहीं यूनिट लगती है। उसकी क्षमता 800 मेगावाट की होती है। यहां भी 800 मेगावाट की यूनिट लगेगी अभी कर योजना प्रारंभिक स्तर पर चल रहा है।

छत्तीसगढ़ के किसान की बदली किस्मत, सागौन खेती से कमाए 9.69 लाख रुपए

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि-वानिकी) एवं निजी भूमि पर वृक्षारोपण को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार की इसी दूरगामी पहल का एक बेहद सफल और प्रेरणादायी परिणाम बालोद जिले के किसान अनिल जाजू की सफलता के रूप में सामने आया है। नवा रायपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ग्राम पलारी (तहसील गुरूर) निवासी कृषक अनिल जाजू को उनकी निजी भूमि पर तैयार किए गए सागौन वृक्षों के एवज में 9.69 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का चेक प्रदान किया।  एग्रोफॉरेस्ट्री और जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के जोखिमों से उबारने के लिए वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली अपनाने हेतु प्रेरित कर रही है।  उन्होंने कहा कि एग्रोफॉरेस्ट्री किसानों के लिए दीर्घकालिक आय का मजबूत माध्यम बन रही है। साथ ही एक पेड़ माँ के नाम अभियान के जरिए जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ निर्माण को भी गति मिल रही है। 'एक पेड़ माँ के नाम अभियान वन मंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से अब जनभागीदारी से पूरे प्रदेश को हरा-भरा बनाने की मुहिम को एक नई और अभूतपूर्व गति मिल रही है। 24 वर्षों की मेहनत का  फल मीठा मिला, किसान अनिल जाजू की यह सफलता अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन केस-स्टडी है। वर्ष 2001 में अपनी 3.35 हेक्टेयर निजी भूमि पर सागौन के पौधे लगाए थे। लगभग 24 वर्षों तक देखरेख और संरक्षण के बाद वर्ष 2025 में उन्होंने वृक्ष कटाई नियम 2022 के तहत अनुमति लेकर सागौन वृक्षों की कटाई कराई। वन विभाग की देखरेख में कुल 173 सागौन वृक्षों की कटाई की गई, जिससे 949 नग लकड़ी प्राप्त हुई। इसका कुल आयतन 33.24 घनमीटर दर्ज किया गया। वन विभाग द्वारा निर्धारित दर पर लकड़ी का क्रय किया गया और इसके बदले लगभग 9.69 लाख रूपए की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा कराई गई। ’पर्यावरण और आर्थिक समृद्धि का अनूठा संगम’ जाजू की यह शानदार सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से वृक्षारोपण किया जाए, तो यह किसानों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करता है। इससे न केवल किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनते हैं, बल्कि प्रदेश के हरित आवरण में भारी वृद्धि होती है। जलवायु परिवर्तन के खतरों से लड़ने में मदद मिलती है। स्थानीय स्तर पर जैव विविधता का संरक्षण होता है। किसानों को वन विभाग का निरंतर सहयोग मिलता है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा निजी भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण करने वाले इच्छुक किसानों को पौधों के चयन से लेकर तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशासनिक प्रोत्साहन और आवश्यक सहायता लगातार मुहैया कराई जा रही है। शासन का मुख्य ध्येय यही है कि अधिक से अधिक किसान एग्रोफॉरेस्ट्री मॉडल को अपनाएं और अपनी बंजर या खाली जमीनों को मुनाफे के जंगल में बदल सकें।

एनटीपीसी क्षेत्र में रातभर चला अवैध खनन, 15 फीट गहरे गड्ढे मिले

पटना पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित एनटीपीसी थाना क्षेत्र के ढीबर गांव के पास गंगा किनारे अवैध मिट्टी खनन का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां लगातार तीन रातों तक अवैध मिट्टी कटाई होती रही, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जिस जगह मिट्टी की कटाई की जा रही है, वहीं से एनटीपीसी प्लांट के लिए पानी की सप्लाई भी होती है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और पुलिस की गश्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रातभर चलता रहा अवैध खनन स्थानीय लोगों के अनुसार, ढीबर गांव के दियारा इलाके में लगातार रातभर गंगा बालू और मिट्टी की कटाई की जा रही थी। लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी थाना की मिलीभगत से यह अवैध खनन हो रहा है, जिससे खनन माफियाओं का मनोबल बढ़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को सबकुछ पता होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। एसडीपीओ की छापेमारी, लेकिन माफिया फरार मामले की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ रामकृष्णा ने देर रात मौके पर छापेमारी की। हालांकि, छापेमारी की भनक लगते ही सभी खनन माफिया मौके से फरार हो गए। छापेमारी के दौरान खेतों में करीब 15 फीट तक गहरे गड्ढे पाए गए। इसके बाद एसडीपीओ ने तुरंत खनन विभाग को इसकी जानकारी दी। पहले भी हो चुके हैं हादसे स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे पहले बारिश के दौरान खेतों में बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से कई लोगों की डूबकर मौत हो चुकी है। अब एनटीपीसी डैम के पास खुदाई होने से ग्रामीण किसी बड़े हादसे की आशंका से डरे हुए हैं। किसान रातभर कर रहे खेतों की रखवाली अवैध मिट्टी कटाई से परेशान किसान अब रातभर जागकर अपने खेतों की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी थाना से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर यह अवैध खनन चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। रोज लाखों की कमाई का आरोप एक स्थानीय व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जिस जमीन से मिट्टी काटी जा रही है, उसे एनटीपीसी ने अधिग्रहित कर रखा है। हालांकि, मुआवजा नहीं मिलने के कारण किसान अभी भी उस जमीन पर खेती कर रहे हैं।  उसने बताया कि खनन माफिया एक ट्रिप मिट्टी 800 रुपये में बेचते हैं। इसमें 300 रुपये ट्रैक्टर मालिक को दिए जाते हैं, जबकि 500 रुपये माफिया के पास बचते हैं। बताया गया कि करीब 20 ट्रैक्टर लगाए गए हैं और हर ट्रैक्टर लगभग 20 ट्रिप मिट्टी की ढुलाई करता है। इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 400 ट्रिप मिट्टी बेची जा रही है और माफिया रोज लगभग दो लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। स्थानीय व्यक्ति ने यह भी आरोप लगाया कि छह दिनों तक लगातार मिट्टी कटाई हुई और माफियाओं ने लगभग “50 प्रतिशत पर थाना मैनेज” कर रखा था। एसडीपीओ ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी एसडीपीओ रामकृष्णा ने बताया कि ढीबर दियारा में मिट्टी कटाई की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की गई थी। मौके पर कोई व्यक्ति नहीं मिला, लेकिन मिट्टी कटाई के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अवैध कटाई से पर्यावरण समेत कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अब पुलिस खुद इस पूरे इलाके की निगरानी करेगी। एसडीपीओ ने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी अवैध मिट्टी कटाई हो रही हो तो तुरंत सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने खनन माफियाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि नियम और कानून के तहत ही कोई काम किया जाए। अगर कोई अवैध गतिविधि पाई गई तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

भर्ती प्रक्रिया में सुधार की तैयारी, 5 जून तक मांगे जाएंगे सुझाव

भोपाल  राज्य सरकार प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए भर्ती करने वाली दो एजेंसियों के भर्ती नियमों में बदलाव करने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए मप्र लोक सेवा आयोग और मप्र कर्मचारी चयन मंडल के भर्ती नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट तैयार किया है और पांच जून से इसको लेकर प्रदेश के लोगों से सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित नियमों के अनुसार अब मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को छोड़कर सभी सरकारी भर्तियां कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) के माध्यम से होंगी। नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे और 2013 के पुराने नियमों की जगह लेंगे। सरकार ने 5 जून 2026 तक आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। पात्रता परीक्षा और स्कोर कार्ड पर होगी भर्ती नियमों में बदलाव के लिए तैयार ड्राफ्ट में कहा गया है कि अब भर्ती प्रक्रिया “पात्रता परीक्षा” और “स्कोर कार्ड सिस्टम” पर आधारित होगी। ईएसबी हर साल तीन प्रकार की पात्रता परीक्षाएं आयोजित करेगा जो सामान्य पात्रता परीक्षा, तकनीकी पात्रता परीक्षा और शिक्षक पात्रता परीक्षा के रूप में होंगी। पात्रता परीक्षा में तय न्यूनतम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को ही स्कोर कार्ड जारी किया जाएगा, जिसका उपयोग विभिन्न सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए किया जा सकेगा। सामान्य और तकनीकी पात्रता परीक्षा का स्कोर कार्ड रिजल्ट जारी होने वाले वर्ष के बाद अगले दो वर्षों की 31 दिसंबर तक वैध रहेगा, शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार जीवनभर पात्र माने जाएंगे, लेकिन नौकरी आवेदन के लिए उनका स्कोर कार्ड भी सीमित अवधि तक ही मान्य रहेगा। एक स्कोर से कई भर्तियों में आवेदन नई व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों को बार-बार प्रारंभिक परीक्षाएं नहीं देनी पड़ेंगी। एक बार अच्छा स्कोर आने पर उसी स्कोर कार्ड के आधार पर कई विभागों की भर्तियों में आवेदन किया जा सकेगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने का दावा किया गया है। ऐसा होगा परीक्षा पैटर्न सामान्य पात्रता परीक्षा में 100 प्रश्न होंगे, जिन्हें चार हिस्सों में बांटा जाएगा। इसमें सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान एवं योजनाएं, गणित, तार्किक क्षमता, डेटा विश्लेषण और कंप्यूटर ज्ञान से प्रश्न पूछे जाएंगे। तकनीकी पात्रता परीक्षा में भी 100 प्रश्न होंगे, जिनमें 25 प्रश्न सामान्य विषयों से और 75 प्रश्न संबंधित तकनीकी विषय से होंगे। पीएससी परीक्षा के नियम तैयार, लागू करने से पहले मांगे सुझाव उधर राज्य शासन ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं को संचालित करने के लिए नए प्रारूप नियमों को तैयार किया है और इन्हें लागू करने से पहले 5 जून 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने बताया कि राज्य शासन द्वारा "मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा नियम 2026" अधिसूचित किया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित नियमों के प्रारूप विभाग की वेबसाइट gad.mp.gov.in पर उपलब्ध है। प्रस्तावित नियमों के संबंध में यदि किसी व्यक्ति, संस्था या हितधारक को कोई आपत्ति या सुझाव देना हो तो वे 5 जून 2026 तक लिखित रूप में अपने सुझाव ई-मेल sogad1@mp.gov.in पर प्रेषित कर सकते हैं। साथ ही सुझाव gad.mp.gov.in पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से भी विभाग को दिए जा सकते हैं। समयावधि के बाद प्राप्त होने वाले सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

सुशासन तिहार 2026: बालोद के राहुद में जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हुए हजारों हितग्राही, 1428 आवेदन निपटाए गए

रायपुर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम राहुद में गुरुवार को शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ग्राम पंचायत राहुद सहित राहुद कलस्टर में शामिल आसपास के 18 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया।  इसके अंतर्गत गुण्डरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, पूर्व विधायक वीरेन्द्र साहू, जनपद अध्यक्ष पुरूषोत्तम चंद्राकर, जनपद उपाध्यक्ष नीतेश मोंटी यादव, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती कांति सोेनेश्वर सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर हितग्राहियों को कृषि विभाग अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य कार्ड, मत्स्य पालन प्रसार योजना अंतर्गत जाल एवं आईस बॉक्स का वितरण किया गया। इसी तरह समाज कल्याण विभाग अंतर्गत श्रवण यंत्र एवं छड़ी, स्वामित्व योजना अंतर्गत अधिकार अभिलेख पत्र का वितरण किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास निर्माण पूर्णता प्रमाण पत्र एवं केसीसी कार्ड का वितरण किया। इसके अलावा शिविर में राज्य शासन के निर्देशानुसार दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने हेतु मेडिकल बोर्ड लगाया गया था। इस दौरान मेडिकल बोर्ड में शामिल विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा शिविर में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने पहुँचे दिव्यांगजनों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी बनाया गया। शिविर में अतिथियों के द्वारा नन्हें-मुन्हें बच्चों को स्वादिष्ट खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। इसके अलावा गर्भवती माताओं को सुपोषण किट भेंटकर उनके गोदभराई के रस्म को पूरा किया गया। ग्राम राहुद में आयोजित शिविर में आज विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 1838 आवेदन प्राप्त हुए थे जिसमें से 1428 आवेदनों को मौके पर निराकरण सुनिश्चित किया गया।  शिविर को संबोधित करते हुए विधायक कुंवर सिंह निषाद ने विभिन्न विभाग के अधिकारियों को सुशासन तिहार के दौरान आम जनता से प्राप्त आवेदनों का समुचित निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। जिससे सुशासन तिहार का आयोजन सार्थक हो सके। उन्होंने शिविर में उपस्थित लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के संबंध में जानकारी देते हुए इसके रोकथाम के कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की शपथ भी दिलाई। बालोद जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर ने आम नागरिकों को सुशासन तिहार के उद्देश्यों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केेन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। सुशासन तिहार के दौरान शासन-प्रशासन के लोग आम जनता के बीच पहुँचकर इनके वास्तविक समस्याओं का पड़ताल कर रहे हैं।  शिविर में अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी सुशासन तिहार के उद्देश्यों के संबंध में सभी विभाग के अधिकारियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ आम जनता से प्राप्त आवेदनों का समुचित निराकरण भी सुनिश्चित करने को कहा। इस मौके पर विभिन्न विभागों के द्वारा शिविर में आज अपने-अपने विभागों से संबंधित कुल आवेदन एवं उनके निराकरण की स्थिति के अलावा आम नागरिकों को शासन के जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में जानकारी दी। शिविर में आज ग्रामीण महिलाओं द्वारा नीर चेतना अभियान के अंतर्गत पानी के महत्व के संबंध में आम जनता को जानकारी प्रदान करने हेतु नुक्कड़ नाटक की भी प्रस्तुति दी।