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नीति आयोग की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ का जलवा, उसूर ब्लॉक ने हासिल किया दूसरा स्थान

नीति आयोग की रिपोर्ट: देश में चमका छत्तीसगढ़ का उसूर ब्लॉक, मिला दूसरा स्थान वन मंत्री केदार कश्यप ने दी बीजापुरवासियों को बधाई, मुख्यमंत्री साय बोले – यह सुशासन का प्रमाण रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 'सुशासन' और जन- कल्याणकारी नीतियों का असर अब राज्य के सबसे दूरस्थ अंचलों में दिखने लगा है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले से एक गौरवशाली खबर सामने आई है। नीति आयोग द्वारा जारी देश के आकांक्षी ब्लॉकों की 'चैंपियंस ऑफ द क्वार्टर' (अक्टूबर- दिसंबर 2025) की रिपोर्ट में बीजापुर के उसूर ब्लॉक ने सेंट्रल जोन में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई, कहा – यह जनता के भरोसे की जीत है           मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर उसूर ब्लॉक और बीजापुर जिले के नागरिकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा, "उसूर ब्लॉक का राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करना हमारे सुशासन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बस्तर के सुदूर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। उसूर ने कठिन परिस्थितियों में जो कर दिखाया है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। यह सफलता जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिन बहनों, एएनएम और डॉक्टरों के समर्पण का परिणाम है। हमारा लक्ष्य अब देश में प्रथम स्थान हासिल करना है।" मंत्री कश्यप ने जताया हर्ष, बढ़ाया हौसला           वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उसूर ब्लॉक की यह राष्ट्रीय सफलता बेहद गौरवशाली है। उन्होंने कहा, "यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि हमारी सरकार की नीतियां प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंच रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों और जिला प्रशासन ने जो समर्पण दिखाया है, वह सराहनीय है। हमारा संकल्प बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना है।"         मंत्री कश्यप कहा कि कभी बुनियादी सुविधाओं से दूर माना जाने वाला उसूर ब्लॉक आज देश के लिए विकास का मॉडल बन गया है। इस सफलता का श्रेय जमीनी डॉक्टरों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिन बहनों की दिन-रात की मेहनत को जाता है। विकास की नई इबारत: कड़े मानकों पर खरा उतरा उसूर            नीति आयोग ने स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया था, जिसमें उसूर ब्लॉक ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया: 1. संचारी रोगों पर नियंत्रण: मलेरिया, डेंगी और अन्य संचारी रोगों की रोकथाम के लिए सुदूर गांवों तक प्रभावी अभियान चलाया गया। 2. सुरक्षित मातृत्व: संस्थागत प्रसव की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, जिससे शिशु और मातृ मृत्यु दर में भारी कमी आई। 3. सशक्त टीकाकरण कवच: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण के साथ एचपीवी टीकाकरण को जमीनी स्तर पर सफल बनाया गया। 4. गंभीर बीमारियों की जांच: बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की मुफ्त जांच व उपचार की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाई गई। अगला संकल्प: देश में हासिल करना है प्रथम स्थान              कलेक्टर विश्वदीप और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गौरव पूरे जिले के लिए बड़ी प्रेरणा है। शासन और प्रशासन का अगला लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और निखारते हुए आगामी तिमाहियों में देश में पहला स्थान हासिल करना है, जिसके लिए काम तेज कर दिया गया है।

लू के कहर पर बरसात का ब्रेक, लेकिन कल से फिर बढ़ेगा तापमान

चंडीगढ़  पंजाब में भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बठिंडा में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले एक महीने तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है. लगातार बढ़ते तापमान के कारण बिजली की मांग में भारी इजाफा हुआ है, जिससे कई इलाकों में बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. वहीं किसान भी गर्म हवाओं और पानी की बढ़ती जरूरत के कारण परेशान हैं. तेज गर्मी का असर फसलों पर भी देखने को मिल रहा है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।  पंजाब में भीषण लू के कहर से हल्की राहत मिली है। शुक्रवार सुबह बरसात के बाद लुधियाना, मोगा के लोगों को हल्की ठंडक का एहसास हुआ। वहीं वीरवार को आसमान आग उगल रहा था।   लुधियाना, पटियाला, हलवारा और बठिंडा लू की चपेट में रहे। पटियाला का पारा सामान्य से 4.8 डिग्री ऊपर दर्ज किया गया। पंजाब में सबसे अधिक 45.9 डिग्री का पारा फरीदकोट का रहा। इसी बीच मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए पंजाब के छह जिलों में 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ हल्की से मध्यम बारिश पड़ने की चेतावनी जारी कर दी है। इन जिलों में पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला और फिरोजपुर शामिल हैं। जबकि पंजाब के बाकी जिलों के लिए भीषण लू चलने का ओरेंज अलर्ट जारी हुआ है। मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल के मुताबिक एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है। इसके असर में जम्मू-कश्मीर में मौसम बदला है और हिमाचल प्रदेश में भी कुछ जगहों पर हल्की बारिश हुई है। पंजाब में बुधवार रात फरीदकोट, फाजिल्का आकाश में आंशिक तौर पर बादल रहे। इस वजह से वीरवार को पंजाब के तापमान में 0.9 डिग्री की मामूली गिरावट दर्ज की गई। अभी पारा सामान्य से 3.5 डिग्री ऊपर बना हुआ है। डायरेक्टर ने बताया कि शुक्रवार से पंजाब में मौसम फिर से शुष्क हो जाएगा और साथ में भीषण लू चलेगी। इससे तापमान में फिर से वृद्धि दर्ज की जाएगी। पंजाब के न्यूनतम तापमान में 1.6 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। यह सामान्य से 3.1 डिग्री ऊपर दर्ज किया गया। सबसे कम 22.4 डिग्री का न्यूनतम पारा रूपनगर का दर्ज किया गया। अमृतसर का अधिकतम पारा 41.5 डिग्री, लुधियाना का 43.0 डिग्री, पटियाला का 44.9 डिग्री, पठानकोट का 42.4 डिग्री, बठिंडा का 45.6 डिग्री, फाजिल्का का 42.1 डिग्री, फिरोजपुर का 41.6 डिग्री, एसबीएस नगर का 42.8 डिग्री और रूपनगर का 43.2 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 28.5 डिग्री, लुधियाना का 27.4 डिग्री, पटियाला का 28.5 डिग्री, पठानकोट का 25.0 डिग्री, फाजिल्का का 28.4 डिग्री, होशियारपुर का 24.3 डिग्री दर्ज किया गया।  जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के निचले तराई इलाकों और तलहटी भागों में बदलवाही के बीच गरज चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है। हालांकि यहां बारिश का दायरा ज्यादा बड़ा नहीं रहेगा, लेकिन मौसम में हल्का बदलाव जरूर महसूस होगा। पंजाब के उत्तर व पूर्वी जिलों, हरियाणा के उत्तरी जिलों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उत्तरी जिलों में कल सुबह या फिर दोपहर बाद के घंटों में कहीं कहीं बूंदाबांदी की संभावना बन रही है।  इसके अलावा राजस्थान के उत्तरी जिलों और पश्चिमी हरियाणा में भी कहीं कहीं बूंदाबांदी की संभावना है। शाम के समय बादल बनने के कारण कुछ इलाकों में हल्की राहत महसूस हो सकती है। हालांकि यह सिस्टम इतना मजबूत नहीं है कि बड़े इलाकों में व्यापक तेज बारिश हो सके। गर्मी से राहत भी सिर्फ कुछ एक इलाकों तक सीमित रहेगी। दिन के समय तेज गर्मी बनी रहेगी, लेकिन शाम के घंटों में मौसम का मिजाज बदलता हुआ नजर आ सकता है। कुछ जगहों पर बादल बनने के कारण बूंदाबांदी की गतिविधियां मैदानी इलाकों में देखने को मिल सकती हैं। आगे का मौसम पूर्वानुमान: कल से इस सिस्टम का प्रभाव मैदानी इलाकों में शुरू होगा, जो कि 23 मई तक जारी रहेगा। इस दौरान कुछ जगहों पर तेज धूल भरी आंधी, गरज चमक के साथ हल्की बारिश और कहीं कहीं ओलावृष्टि भी देखने को मिल सकती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, बुंदेलखंड, अवध और पूर्वांचल के इलाकों में फिलहाल बारिश की किसी भी तरह की गतिविधियां नहीं होंगी। इन इलाकों में मौसम साफ और बेहद गर्म बना रहेगा। दिन के समय तेज धूप और लू का असर लगातार बना रहेगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी मौसम सिर्फ शाम बाद के घंटों में ही बदलेगा। दिन में प्रचंड गर्मी का दौर इन इलाकों में जारी रहेगा और तापमान में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। तो बारिश कब होगी? इस सिस्टम के गुजरने के बाद एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी 25 मई को उत्तर भारत की तरफ बढ़ेगा, जिसके कारण पंजाब, हरियाणा, उत्तर राजस्थान, पश्चिम उत्तर प्रदेश और शायद पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी हल्की बारिश और बूंदाबांदी की गतिविधियां फिर से नए सिरे से शुरू हो सकती हैं। कुछ इलाकों में गरज चमक के साथ हल्की तेज बौछारें भी देखने को मिल सकती हैं। इसके बाद 28 मई से एक नया मजबूत चक्रवर्ती हवाओं का क्षेत्र बनने वाला है, जो बंगाल की खाड़ी से नमी को खींचेगा। साथ में नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस के आने और दोनों हवाओं के मिलने से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र सहित बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां शुरू होंगी।  यह बारिश की गतिविधियां 28 मई से धीरे धीरे बढ़ेंगी और 30 व 31 मई को जोर पकड़ते हुए 3 जून तक जारी रह सकती हैं। उत्तर और मध्य भारत के कई इलाकों में मौसम पूरी तरह बदलता हुआ नजर आ सकता है। उत्तर भारत में गर्मी का यह दौर 28 मई तक ही रहने की संभावना है। इसके बाद बारिश और पूर्वी हवाओं के चलने से उमस वाली गर्मी जरूर परेशान करेगी, लेकिन लगातार बारिश की गतिविधियों के कारण लोगों को भीषण गर्मी से राहत भी मिलने लगेगी।

देवरिया दौरे पर विवाद: विकास योजनाओं से नाराजगी और विपक्ष पर प्रशासनिक कार्रवाई के आरोप

देवरिया यूपी के देवरिया जिले के भीमपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन से पहले ही रात से ही सपा नेता समेत कई संगठनों के लोगों पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया गया था। ताकि वह किसी तरह का आंदोलन न कर सके। विपक्षी दल आवाज दबाने वाली कार्रवाई बता रहे हैं। सपा नेता अवनीश यादव को भी हाउस अरेस्ट किया गया था। मुख्यमंत्री के दौरे में घोषित परियोजनाओं की सूची में बरहज व रुद्रपुर क्षेत्र के लिए एक भी योजना शामिल नहीं है, जिससे स्थानीय जनता ठगा हुआ महसूस कर रही है। यादव ने बताया कि बरहज की जनता ने भाजपा को सांसद से लेकर विधायक तक जिताया है, फिर भी विकास योजनाओं में क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष गेंदा लाल यादव को उनके घर पर नजरबंद किया गया था। बैतालपुर चीनी मिल को चालू कराने और बैतालपुर रेलवे ढाले पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे “चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति” के अध्यक्ष बृजेंद्र मणि त्रिपाठी को भी पुलिस ने देर रात घर पर हाउस अरेस्ट कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने से रोकने के लिए प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। खुखुन्दू ब्लॉक बनाओ संघर्ष समिति के संरक्षक नथुन राय और अध्यक्ष सोबराती किदवई को भी पुलिस ने हाउस अरेस्ट किया। बताया जा रहा है कि ये दोनों मुख्यमंत्री को खुखुन्दू को ब्लॉक बनाए जाने संबंधी ज्ञापन सौंपने वाले थे। उधर ऋषि पांडेय समेत कई अन्य लोगों को भी पुलिस रात से ही हाउस अरेस्ट कर रखी है। मुख्यमंत्री को लेकर मेडिकल कॉलेज में सेफ हाउस सीएम के भीमपुर में कार्यक्रम को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन चौकन्ना रहा। नए भवन के तीसरी मंजिल पर सेफ हाऊस बनाया गया, जो जीवन रक्षक प्रणाली सहित अन्य उपकरणों से लैस है। चार विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ अन्य कर्मचारियों की तैनाती की गई। सेफ हाऊस में अत्याधुनिक उपकरण वेंटिलेटर, एचएफएएनसी, मानीटर, ग्लूकोमीटर, वाइपैप के अलावा अन्य उपकरण से लैस किया गया। यहां मेडिसिन विभाग के डॉ. ओमकार मिश्रा के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सक सर्जन डॉ. मानवेंद्र सिंह, आर्थो सर्जन डॉ. रजनीश कुमार, एनेस्थेटिक डॉ. प्रशांत शाही के अलावा चीफ फार्मासिस्ट अशोक राय, नर्सिंग आफिसर सुमैरा सलीम, पूजा प्रसाद, एमपीडब्लू सिन्टू व सफाई कर्मी गोविन्द की ड्यूटी लगाई गई। कड़ी सुरक्षा रही मुख्यमंत्री शुक्रवार को देवरिया के भीमपुर आए। मुख्यमंत्री व कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था चार एएसपी ने संभाली। साथ ही कुल 963 पुलिस कर्मियों की कार्यक्रम को सकुशल संपन्न कराने के लिए तैनाती की गई थी।

दिल्ली में हीट स्ट्रोक का पहला केस, 24 साल का युवक अस्पताल में भर्ती

नई दिल्ली  दिल्ली में इस मौसम में हीट स्ट्रोक का पहला मरीज रात में इसका शिकार बना। बुधवार गुरुवार की रात 24 साल के युवक को RML हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा, जहां इलाज के बाद भी उसकी हालत गंभीर है। राहुल आनंद ने एम्स के डॉ. नीरज निश्चल से पूछे इससे बचने के उपायः जानें क्या होता है हीट स्ट्रोक? लंबे समय तक तेज गर्मी में रहने से शरीर का तापमान तेजी से बढ़कर 104 डिग्री फारेनहाइट यानी 40 डिग्री सेल्सियस के भी पार चला जाता है। यह मेडिकल इमरजेंसी और जानलेवा स्थिति हो सकती है। लक्षण या संकेतः तेज सिरदर्द, चक्कर आना, मतली या उल्टी, भ्रम या दिमागी संतुलन खोने लगना, बेहोशी, दौरे पड़ना, त्वचा का बहुत गर्म और लाल होना, सूखी हो जाना। क्या करें जब खुद में दिखें ये लक्षण? तुरंत धूप या गर्म जगह से हटकर ठंडी जगह पर जाएं, ठंडा पानी या शिकंजी आदि लें, शरीर का तापमान कम करने के लिए ठंडे पानी की पट्टियां लगाएं, ठंडे पानी से नहाएं। अगर चक्कर, भ्रम, बेहोशी या तेज बुखार हो तो तुरंत अस्पताल जाएं। किसी और को हीट स्ट्रीक हो तो… तुरंत इमरजेंसी सर्विस को कॉल करें या मरीज को अस्पताल पहुंचाएं। ठंडी पट्टियां, आइस पैक या ठंडा पानी इस्तेमाल करें। मरीज बेहोश है, तो उसे कुछ भी खाने-पीने को न दें। मदद आने तक मरीज की हालत पर नजर रखें। यह गर्मी और कैसे शरीर को नुकसान पहुंचाती है? ज्यादा पसीना आने से शरीर में पानी और सॉल्ट (नमक) की कमी हो जाती है। डिहाइड्रेशन, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन और चक्कर आने लगते हैं। तापमान लगातार बढ़ने पर दिमाग, दिल, किडनी और लिवर पर भी बुरा असर पड़ सकता है। गंभीर स्थिति में मल्टी ऑर्गन फेल्योर, बेहोशी, दौरे और मौत तक का खतरा हो सकता है। बचाव के लिए क्या करें? दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, बहुत ज्यादा धूप में न निकलें, खासकर दिन में 11 से दोपहर 3 बजे के बीच निकलने से बचें, हल्के रंग वाले ढीले कपड़े पहनें। बाहर जाते समय टोपी, छाता और सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। नारियल पानी, दही, फल और इलेक्ट्रोलाइट्स वाली चीजें लें।

बकरीद गाइडलाइन्स :सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी पर पाबंदी, उल्लंघन पर कार्रवाई

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने बकरीद को लेकर सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। रेखा गुप्ता सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने स्पष्ट किया कि बकरीद के अवसर पर गोवंश, गाय, बछड़े, ऊंट और अन्य प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी देना पूरी तरह गैरकानूनी है। ऐसा करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे। मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि इन गाइडलाइंस का उल्लंघन होने पर पुलिस और दिल्ली सरकार के विकास मंत्रालय को सूचित कर सकते हैं। बकरीद पर सरकार की गाइडलाइंस दिल्ली सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार, 'बकरीद के दौरान सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, गलियों या पार्कों में किसी भी प्रकार की कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी। कुर्बानी केवल निर्धारित और अधिकृत स्थानों पर ही दी जा सकेगी। कुर्बानी के बाद निकलने वाले कचरे, खून या अन्य अवशेषों को नालियों, सीवरों या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर फेंकना सख्ती से प्रतिबंधित है।' 'सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं' इसके साथ ही, बाजारों में अवैध रूप से मवेशियों की खरीद-बिक्री, सड़कों पर अस्थायी पशु बाजार लगाना और जानवरों की गैरकानूनी तस्करी पर भी पूरी तरह से पाबंदी रहेगी। दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर वीडियो जारी कर इन निर्देशों की जानकारी दी और कहा कि किसी भी तरह के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कपिल मिश्रा ने क्या कहा     दिल्ली सरकार के विकास मंत्रालय ने बकरीद के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।     गाय-बछड़ों और प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी देना गैरकानूनी है।     सार्वजनिक जगहों पर कुर्बानी पर पूरी तरह रोक है।     नालियों में खून या कचरा फेंकना भी मना है।     कुर्बानी केवल तय जगहों पर ही होनी चाहिए। कपिल मिश्रा की दिल्लीवासियों से अपील कपिल मिश्रा ने दिल्लीवासियों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति इन दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए दिखे तो तुरंत दिल्ली पुलिस या दिल्ली सरकार के विकास मंत्रालय को सूचित करें। मंत्री ने कहा कि त्योहार शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने सभी को बकरीद की शुभकामनाएं भी दीं। दिल्ली पुलिस ने की तैयारी दिल्ली पुलिस और विकास मंत्रालय इन दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने के लिए तैयार है। पिछले वर्षों में भी दिल्ली में बकरीद के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी और सफाई संबंधी शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद सरकार ने इस बार पहले से ही सख्ती बरतने का फैसला किया है।  

खेत के रास्ते में लगाए खंभे-ट्रांसफार्मर, CM Nayab Saini ने मांगी जांच रिपोर्ट

 चंडीगढ़ जनसंवाद के मंच पर जब एक किसान अपनी शिकायत लेकर पहुंचा तो मामला सिर्फ रास्ता बंद होने तक सीमित नहीं रहा। शिकायत में आरोप था कि खेत तक जाने वाले रास्ते के बीच बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर लगवा दिए गए, जिससे आने-जाने में परेशानी खड़ी हो गई। इतना ही नहीं, विरोध करने पर धमकियां मिलने की बात भी सामने आई। शिकायत सुनते ही मुख्यमंत्री ने मंच से ही अधिकारियों को सख्त निर्देश दे दिए। दरअसल, हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini गुरुवार को कुरुक्षेत्र के लाडवा स्थित शिवाला रामकुंडी में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में आमजन की समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान गांव बकाली के एक शिकायतकर्ता ने बताया कि कई वर्ष पहले खरीदी गई करीब 7 एकड़ जमीन के रास्ते में बिजली विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से खंभे और ट्रांसफार्मर लगा दिए गए। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि अब उसे जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस एसडीओ ने खेत के रास्ते के बीच में खंभे और ट्रांसफार्मर लगवाए, उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए। साथ ही पूरे मामले की जांच एसडीएम लाडवा को सौंपने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को भी शिकायतकर्ता को धमकी देने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए। जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आम नागरिकों को दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश का विकास और हर नागरिक तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कुल 338 शिकायतें सुनीं और कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। स्कूल अपग्रेड करने, ग्रामीण सड़कों के निर्माण, ट्रांसफार्मर बदलने और आरटीई के तहत बच्चों के दाखिले जैसे मामलों पर भी संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के आदेश दिए गए। मुख्यमंत्री ने लाडवा क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि पेयजल, सड़क, आवास और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि लाडवा विधानसभा क्षेत्र में बीते वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये के विकास कार्य किए गए हैं और बाकी परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी है।

पंजाब में अजनाला पंचायत चुनाव टले, कोर्ट ने परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को कहा

चंडीगढ़  राज्य चुनाव आयोग ने खरड़ के बाद अजनाला नगर पंचायत का चुनाव स्थगित कर दिया है। अब पहले नगर पंचायत की परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद ही नए सिरे से चुनाव करवाए जाएंगे। यह फैसला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद लिया गया है। आयोग की ओर से जारी आदेश के अनुसार स्थानीय निकाय विभाग ने आयोग को सूचित किया था कि हाईकोर्ट ने अजनाला नगर पंचायत चुनाव पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते 26 मई को प्रस्तावित चुनाव स्थगित कर दिया गया है। आयोग ने अब तक की पूरी चुनाव प्रक्रिया भी रद्द कर दी है। इसमें नामांकन प्रक्रिया भी शामिल है। जिन उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे उनकी फीस वापस की जाएगी।आदेश में कहा गया है कि स्थानीय निकाय विभाग से नया पत्र प्राप्त होने के बाद दोबारा चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद परिसीमन प्रक्रिया पूरी कर चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। इससे पहले खरड़ नगर परिषद चुनाव को लेकर भी इसी तरह का फैसला लिया जा चुका है। अब अजनाला में भी परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव प्रक्रिया पर रोक रहेगी।

नायब सैनी बोले: पंजाब-हरियाणा सिर्फ पड़ोसी नहीं, एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं

 चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने पंजाब और हरियाणा के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों राज्यों के संबंध को सिर्फ पड़ोसी राज्यों का रिश्ता नहीं, बल्कि “नाखून और उंगली” जैसा बताया। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पंजाब की राजनीति को लेकर भी लगातार चर्चा तेज है। एक इंटरव्यू के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पंजाब को करीब से समझने और देखने का मौका मिला है। उन्होंने बताया कि पंजाब ओबीसी मोर्चा का प्रभारी रहते हुए उन्होंने पूरे प्रदेश का दौरा किया और शायद ही कोई ऐसा चुनाव रहा हो, जहां उन्हें जाने का अवसर न मिला हो। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने पंजाब और हरियाणा के सामाजिक व सांस्कृतिक जुड़ाव को बेहद मजबूत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की जमीन एक है, छत एक है और दोनों का सफर भी एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “पंजाब-हरियाणा का रिश्ता सामान्य नहीं है, यह नाखून और उंगली का रिश्ता है।” उनके इस बयान को दोनों राज्यों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने राजनीतिक स्तर पर पंजाब की मौजूदा सरकार पर निशाना साधने से भी परहेज नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की सोच आम आदमी पार्टी से अलग है। मुख्यमंत्री का आरोप था कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने आम लोगों को अपमानित करने का काम किया है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब की जागरूक जनता भ्रष्टाचार में लिप्त आम आदमी पार्टी को बाहर का रास्ता दिखाएगी। साथ ही कहा कि अगर पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है तो सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान हरियाणा की उपलब्धियों का भी जिक्र किया और कहा कि प्रदेश ने खेल, कृषि, उद्योग और विकास के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वहीं, पंजाब और हरियाणा के रिश्ते पर दिया गया उनका “नाखून और उंगली” वाला बयान अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

चुनाव होंगे समय पर या दिसंबर तक टलेंगे? राजस्थान हाईकोर्ट आज करेगा साफ

 जयपुर राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय (नगर पालिका/नगर निगम) के चुनाव समय पर होंगे या दिसंबर तक के लिए टल जाएंगे, इस पर आज तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकती है. राज्य सरकार और इलेक्शन कमिशन के चुनाव टालने वाले प्रार्थना पत्र पर राजस्थान हाईकोर्ट आज (22 मई) अपना बड़ा फैसला सुना सकता है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले में बीते 11 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित (Reserve) रख लिया था, जो आज कोर्ट रूम में सुनाया जा सकता है. क्या है पूरा मामला और सरकार क्यों मांग रही है समय? दरअसल, हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को एक साथ 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सख्त आदेश दिए थे कि 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में पंचायत और निकाय चुनाव करा लिए जाएं. हालांकि, भजनलाल सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाकर इस समय-सीमा में चुनाव कराने को व्यावहारिक रूप से असंभव बताया और दिसंबर 2026 तक का समय मांग लिया. सरकार ने चुनाव टालने के पीछे कोर्ट के सामने प्रशासनिक और व्यावहारिक दलीलों की पूरी लिस्ट रखी थी:- सरकार का तर्क है कि मई-जून में राजस्थान में भयंकर लू (Heatwave) चलती है, जबकि जुलाई से सितंबर तक भारी बारिश और कृषि कार्यों में ग्रामीण मतदाता व्यस्त रहते हैं.  शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 68 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनेंगे, जिनके लिए 3.4 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, जो फिलहाल संभव नहीं है. महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन पर दो अलग-अलग फैसलों और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने के कारण आरक्षण तय करने में देरी हुई. 11 मई की सुनवाई में कोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार पिछली सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने सरकार की इन दलीलों पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था- 'सरकार का रवैया ठीक नहीं है और उन्हें चुनाव की तैयारियों के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है.' जब सरकार ने मौसम और ओबीसी आयोग का हवाला दिया, तो बेंच ने साफ कहा कि आदेश निकायों को लेकर था, तो फिर पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए? और ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह कोर्ट के सामने विषय नहीं है. कोर्ट ने सरकार के 'गर्मी-बरसात' वाले तर्कों को स्वीकार न करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 'जनता परेशान, सिस्टम बेहाल: विपक्ष हमलावर दूसरी तरफ, पूर्व कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया है. उन्होंने इस मामले में एक अवमानना याचिका (Contempt Petition) भी दायर की है, जिस पर जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच में अगली सुनवाई 26 मई को होनी है. संयम लोढ़ा ने कहा, 'राजस्थान की जनता को उनके वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है. चुनाव न होने से पंचायतों और निकायों में भारी अव्यवस्था है, स्थानीय स्तर पर विकास के सारे काम पूरी तरह ठप हैं। लोग परेशान हैं और पूरा सिस्टम बेहाल है.' आज के फैसले पर टिकी सबकी नजरें यदि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच आज सरकार के प्रार्थना पत्र को खारिज कर देती है, तो सरकार और राज्य चुनाव आयोग को तुरंत चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. वहीं, यदि कोर्ट से राहत मिलती है, तो प्रदेश में स्थानीय सरकार के गठन के लिए जनता को दिसंबर तक का इंतजार करना पड़ेगा.

LAC सुरक्षा को मिलेगी नई ताकत, लखनऊ में बनेगा उत्तरी थिएटर कमांड

लखनऊ चीन पर नजर रखने के लिए लखनऊ में स्थापित मध्य कमांड को ही उत्तरी थिएटर कमांड बनाया जाना तय है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश के किबिथू तक फैली वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के 3,488 किलोमीटर क्षेत्र की देखरेख की जिम्मेदार होगी। यह चीन के साथ भारत की वास्तविक सीमा है। दो दिन पूर्व सीडीएस अनिल चौहान की लखनऊ यात्रा को इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने सेवानिवृत्त सैन्य अफसरों के साथ थिएटराइजेशन पर गंभीर चर्चा की थी। उम्मीद जताई जा रही है कि तीन प्रस्तावित थिएटर कमांडों की स्थापना 30 मई को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल समाप्त होने से पहले हो जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार उत्तरी थिएटर कमांड का नेतृत्व एक सेना जनरल करेंगे। उत्तरी मोर्चे पर अधिक जमीनी सैनिकों की आवश्यकता होने की उम्मीद है, इसलिए सेना अधिकारी थिएटर का नेतृत्व कर सकता है। ठोस शुरुआत 2019 में थिएटर कमांड बनाने की आधिकारिक और ठोस शुरुआत 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद बनने और सशस्त्र बलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद हुई। जुलाई 2024 में रक्षा मंत्रालय ने लखनऊ को उत्तरी थिएटर कमांड के आधार के रूप में नामित किया। 4 और 5 सितंबर 2024 को पहला संयुक्त कमांडर सम्मेलन (जेसीसी) लखनऊ में आयोजित किया गया था। उसमें तय हुआ था कि थिएटर कमांड के कमांडर-इन-चीफ और वाइस चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, सेना प्रमुखों (जनरल, एयर चीफ मार्शल और एडमिरल) की तरह चार सितारा रैंक के अधिकारी होंगे। थिएटर कमांड के मुख्य चरण कारगिल समीक्षा समिति 1999- कारगिल युद्ध के तुरंत बाद बनी इस समिति ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए 'इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड' की सिफारिश की थी। अंडमान निकोबार कमांड 2001- इस सिफारिश के तहत पहला कदम 2001 में उठाया गया। भारत की एकमात्र त्रि-सेवा कमांड अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थापित की गई। शेकातकर समिति 2016- इस समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में तीनों सेनाओं की एकजुटता और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में थिएटर कमांड बनाने का सुझाव दिया था। सीडीएस की नियुक्ति वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेनाओं को एक साथ लाने की प्रक्रिया को हरी झंडी दी। देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने इन कमांड्स को धरातल पर उतारने की मूल योजना (प्रस्तावित 5 थिएटर कमांड) तैयार की।