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भोपाल में बिना अनुमति कमर्शियल गतिविधियों पर गिरेगी गाज, हाईकोर्ट ने दिया 7 दिन का समय

भोपाल  भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर चल रहे मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिए हैं शहर में आवासीय और लो-डेंसिटी क्षेत्रों में अवैध निर्माण व गैर-कानूनी व्यावसायिक गतिविधियों पर संकट गहरा गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मॉल, होटल व व्यावसायिक संचालकों को वैधानिक अनुमति पत्र नगरनिगम को दिखाने का निर्देश दिया है। जिस पर निगम विधि पूर्वक उनकी पड़ताल करेगा। दूसरी ओर, शहर के लो-डेंसिटी इलाकों में तय सीमा से 10 गुना तक ज्यादा अवैध निर्माण हो चुके हैं। नगर निगम की नोटिस व सीलिंग कार्रवाई के बीच अफसर अब मास्टर प्लान के जरिए इन्हें नियमित करने का रास्ता तलाश रहे हैं, जिससे मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है। मास्टरप्लान नियमित करने की प्लानिंग शहर के जिन क्षेत्रों को 2005 के मास्टर प्लान में लो-डॅसिटी तय कर निर्माण की लिमिट तय कर रखी है, वहां बेशुमार व बड़े निर्माण हो गए है। अब इन निर्माणों को मास्टर प्लान के रास्ते नियमित कराने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आवासीय परिसरों से व्यावसायिक गतिविधि बंद कराने नगर निगम नोटिस और सीलिंग कर रहा है। दोनों ही पक्ष इसके लिए मास्टर प्लान को लागू करने की मांग कर रहे है। प्लानिंग एरिया के लो-डेंसिटी क्षेत्रों को नियमित करने बीते पंद्रह दिन से टीएंडसीपी और नगरीय प्रशासन के अफसर बैठकें कर रहे हैं। गौरतलब है कि लो-डेंसिटी एरिया में 10 हजार वर्गफीट जमीन पर 0.06 एफएआर से महज 600 वर्गफीट तक के निर्माण की अनुमति है, जबकि यहां दस गुना ज्यादा 6000 से 8000 वर्गफीट तक निर्माण हो गए। ये हैं लो-डेंसिटी के नियम ग्राम बैरागढ़ चिचली, नीलबड़ व मिंडोरी में लो-डेंसिटी तय है। इनमें 48 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर डेंसिटी तय है। इनमें निर्माण के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर यानि 10 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल जरूरी है। यहां निर्माण की अनुमति पर 0.06 एफएआर तय है। यानि 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर 600 वर्गफीट निर्माण ही हो सकता है। इससे अधिक अवैध है। इसमें भी जमीन पर कुल अनुमति का छह फीसदी ही निर्मित किया जा सकता है। कार्रवाई का रास्ता साफ कोर्ट के आदेश के बाद रिहायशी क्षेत्रों में बिना वैध अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की स्थिति साफ हो गई है। अब संबंधित पक्षों को अपने व्यावसायिक उपयोग की वैध अनुमति साबित करने के लिए दस्तावेज निगम के सामने रखने होंगे। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह रिहायशी इलाकों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम के सामने कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट न्यायिक निर्देश हैं। ट्रैफिक-पार्किंग की समस्या से जूझ रहे रहवासी रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को भी कोर्ट के आदेश से कार्रवाई की उम्मीद है। रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, अब कोर्ट के आदेश के बाद जमीन पर कार्रवाई की उम्मीद है। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी फैसले का स्वागत करते हुए नगर निगम से रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि जिनके पास वैध अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। ये हैं स्थिति -कलियासोत कैचमेंट में साक्षी ढाबे के पास से अंदर के के क्षेत्र में निर्मित वीआइपी कॉलोनी में 600 वर्गफीट की जगह 6000 वर्गफीट के बंगले बना लिए। मामला कोर्ट में चला गया। -चार इमली, श्यामला हिल्स पर अवैध तौर पर बंगले बन गए। -नरसिंहगढ़ रोड पर लो-डेंसिटी में 12 बड़ी कॉलोनियां बन गईं। -मिंडोरी और संबंधित क्षेत्र में बड़े मकान, रेस्टोरेंट विकसित हो गए। -केरवा डेम से लगी जमीन लो-डेंसिटी है, लेकिन इसकी ओर जाने वाली रोड किनारे अवैध तौर पर कॉलोनियां विकसित हो गईं। कोर्ट ने कहा-कागजात दिखाएं नगर निगम करेगा सभी के परीक्षण आवासीय क्षेत्र के मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अनुमति और वैधानिकता की जांच नगरनिगम भोपाल करेगा। हाईकोर्ट में सोमवार को 42 याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। वहीं, मंगलवार को दस नम्बर, कलियासोत और बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने सम्बंधी आदेश और शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। शोकॉज नोटिस की याचिकाओं का निराकरण करते हुए कोर्ट ने नगर निगम को याचिकाकर्ताओं के जवाब का विधि के अनुसार परीक्षण कर कारण सहित आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे। मकानों को तोड़ने के मामले में दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। एकलपीठ ने मकान तोड़ने पर लगी रोक बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर निर्धारित की है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत हाईकोर्ट के रुख का स्थानीय रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने इसे शहर के आवासीय इलाकों को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि अब अनुमति के नाम पर टालमटोल या बहानेबाजी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि असली परीक्षा भोपाल नगर निगम की है, जिसे यह साबित करना होगा कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति। शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई रहवासी लवनीश भाटी और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पैदा हो रही ट्रैफिक, पार्किंग, अत्यधिक शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई। रहवासियों का कहना हैं कि वे वर्षों से इन दिक्कतों को झेल रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।

साइबर अपराध पीड़ित महिलाओं-बच्चों को बड़ी राहत, इंदौर के नए सेंटर में तकनीकी- कानूनी सहायता मुफ्त

महिलाओं-बच्चों के लिए इंदौर में शुरू हुआ साइबर वेलनेस सेंटर साइबर अपराध और डिजिटल नुकसान के पीड़ितों को मिलेगी मुफ्त तकनीकी और कानूनी सहायता – महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया  इंदौर साइबर अपराध, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल नुकसान का सामना कर रही महिलाओं और बच्चों को अब इंदौर में एक ही स्थान पर काउंसलिंग से लेकर कानूनी और तकनीकी सहायता तक मिल सकेगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बुधवार को केंद्र का उद्घाटन किया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अहान फाउंडेशन के प्रोजेक्ट रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म और कोगटा फाउंडेशन के सहयोग से साइबर वेलनेस सेंटर का  इंदौर में शुभारंभ किया गया है। केंद्र का उद्देश्य साइबर घटनाओं के पीड़ितों और सर्वाइवर्स को तत्काल, मुफ्त और संवेदनशील सहायता उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में डिजिटल सुरक्षा और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के लिए मजबूत सहायता तंत्र तैयार करना है। केंद्र में साइबर नुकसान से प्रभावित लोगों को मुफ्त काउंसलिंग, मनो-सामाजिक एवं भावनात्मक सहायता, तकनीकी और कानूनी मार्गदर्शन तथा साइबर घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज कराने में सहयोग मिलेगा। इसके अलावा महिलाओं, बच्चों और समुदायों के लिए साइबर वेलनेस, डिजिटल रेजिलिएंस और साइबर अधिकारों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि महिलाओं और बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाने के लिए सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े मामलों में पीड़ितों को मानसिक और भावनात्मक सहारे की भी जरूरत होती है।  

गंगा की बाढ़ में डूबा भागलपुर का सिल्क हब, जीआई टैग वाले तीन उत्पादों पर खतरा

पटना बिहार के रेशमी शहर की आर्थिक रीढ़ बाढ़ के थपेड़ों से टूट गई है। भागलपुर में गंगा की उफनाती लहरों और बाढ़ की विभीषिका ने न केवल लाखों लोगों को बेघर किया है, बल्कि यहां की पहचान माने जाने वाले तीन वैश्विक ब्रांड (तसर सिल्क, कतरनी धान और जर्दालू आम) के वजूद पर भी गहरा संकट खड़ा कर दिया है। बता दें कि तसर सिल्क, कतरनी धान और जर्दालू आम को जीआई टैग दिया गया है। कृषि और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की बाढ़ से भागलपुर की अर्थव्यवस्था को ऐसा झटका लगा है, जिससे उबरने में सालों लग सकते हैं। नाथनगर और चंपानगर के सिल्क हब इस समय पानी में पूरी तरह डूबे हुए हैं। आर्थिक मामलों के स्थानीय जानकार अधिवक्ता राजेश सर्राफ ने बताया कि भागलपुर का सिल्क उद्योग लगभग 50 फीसदी घरेलू और 50 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर है। पावरलूम मशीनों और कच्चे माल के पानी में डूबने से करोड़ों का नुकसान हुआ है। नाथनगर स्थित बुनकर समाज के इनायत अंसारी बताते हैं कि विदेशों से मिले ऑर्डर की समय पर डिलीवरी नहीं होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारी साख खतरे में है। यदि बुनकरों का बनारस या कोलकाता पलायन शुरू हुआ, तो इस पारंपरिक क्लस्टर को भारी क्षति पहुंचेगी। दूसरी ओर, जिले की कृषि अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ कतरनी धान और जर्दालू आम के बागों को भी प्रकृति का कहर झेलना पड़ रहा है। सुल्तानगंज के आभा रतनपुर निवासी कृषक एवं निर्यातक मनीष कुमार सिंह बताते हैं, बाढ़ का पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहने के कारण कतरनी धान के नाजुक पौधे पूरी तरह सड़ जाएंगे। इस अनूठे सुगंधित चावल का अंतरराष्ट्रीय बाजार ठप होने के कगार पर है। जर्दालू आम के बगीचे में जलभराव पर चिंता जताते हुए वो कहते हैं कि बगीचों में जलभराव सबसे खतरनाक होता है। पीरपैंती के आम उत्पादक पप्पू यादव कहते हैं कि बगीचे में एक सप्ताह से अधिक दिनों तक पानी जमा रह गया तो पेड़ सूख जाएंगे। इससे आम की उत्पादकता में कमी आएगी। सिल्क बुनकरों को विशेष राहत पैकेज मिले : चैंबर भागलपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल पोद्दार बताते हैं कि बुनकर और किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं। सरकार को इस संकट से निपटने के लिए सिल्क बुनकरों के लिए विशेष राहत पैकेज और किसानों के लिए फसल बीमा का त्वरित भुगतान सुनिश्चित करना होगा, तभी इन जीआई टैग उत्पादों को बचाया जा सकता है। सरकारी आंकड़े में (सालाना) सिल्क: 100 करोड़ कतरनी धान की पैदावार : 2000 एकड़ कतरनी धान का कारोबार: 30 करोड़ जर्दालू आम की प्रतिवर्ष पैदावार-बाजार : 10,000 मीट्रिक टन

झारखंड में मतदाता सूची को लेकर सख्ती, कोई पात्र नागरिक नाम जुड़ने से न रहे वंचित

रांची मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बुधवार को सभी उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर एसआइआर के तहत दावा-आपत्ति एवं सुनवाई, युवा मतदाता पंजीकरण तथा मतदाता सेवाओं से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने सभी कार्य भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दावा-आपत्ति की सुनवाई के दौरान अनावश्यक भीड़ न लगने दें। एक साथ अधिक लोगों को बुलाने की जगह टोकन सिस्टम के माध्यम से क्रमवार सुनवाई कराई जाए। प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर दिया जाए तथा उपलब्ध दस्तावेज एवं तथ्यों के परीक्षण के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाए। उन्होंने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को लंबित मामलों एवं प्रतिदिन हो रहे निष्पादन की नियमित समीक्षा करें। एक से पांच फार्म-6 वाले मतदान केंद्रों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने शून्य तथा एक से पांच फार्म-6 वाले मतदान केंद्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। कहा, ऐसे मतदान केंद्रों की मतदान केंद्रवार समीक्षा करते हुए बीएलओ के माध्यम से उन नए एवं युवा पात्र भारतीय नागरिकों की पहचान की जाए, जिनकी आयु एक अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष पूर्ण हो रही है, लेकिन उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है। ऐसे सभी पात्र नागरिकों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्म-6 एवं आवश्यक घोषणा-पत्र प्राप्त कर उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे। साथ ही साहिबगंज में सामने आई अनियमितता की पुनरावृत्ति किसी अन्य जिले में न हो, इसके लिए आवेदन, दस्तावेज, सत्यापन एवं निर्वाचन डेटा पर प्रभावी निगरानी रखी जाए तथा किसी भी अनियमितता पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब कार्यक्रमों की तैयारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने 19 एवं 20 नवंबर को राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब कार्यक्रमों की तैयारियां अभी से प्रारंभ करने का निर्देश दिया। इसके लिए ईएलसी को-आर्डिनेटर नियुक्त कर स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। स्कूल एवं कॉलेज स्तर पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर विद्यार्थियों एवं युवा मतदाताओं के बीच ईसीनेट का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा उन्हें उपलब्ध डिजिटल मतदाता सेवाओं की जानकारी दी जाए। उन्होंने एनवीएसपी पर प्राप्त शिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन तथा ईसीनेट की ‘बुक ए काल’ सुविधा के माध्यम से प्राप्त मतदाताओं की शिकायतों एवं समस्याओं पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

टाइगर रिजर्व में बढ़े टिकट के दाम, विदेशी पर्यटकों को अब देने होंगे 1000 रुपये

लखनऊ यूपी में पयर्टकों को पीलीभीत टाइगर रिजर्व में घूमने के लिए अब ज्यादा रुपए देने पड़ेंगे। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में अब सैलानियों को सप्ताह के अंत में यानी शनिवार और रविवार को घूमना महंगा पड़ेगा। अभी तक शनिवार और रविवार को 150 रुपये प्रति व्यक्ति टिकट का देना होता था और अब इसे बढ़ाकर 200 रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया है। अन्य दिनों में पहले की ही तरह 120 रुपये का टिकट लेना होगा। वहीं विदेशी सैलानियों को अब 800 रुपये की बजाए 1000 रुपये देने होंगे। वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में हुई पीलीभीत बाघ संरक्षण फाउंडेशन के शासी निकाय की बैठक में फाउंडेशन के कार्यों की समीक्षा के साथ पर्यटन सत्र 2026-27 की इन प्रस्तावित दरों और विभिन्न विकास कार्यों को स्वीकृति दे दी गई। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए 1.96 करोड़ का बजट मंजूर कर दिया गया है। बैठक में ईको टूरिज्म को विकसित करने पर सर्वाधिक जोर दिया गया। साथ ही नए पर्यटन सत्र को लेकर आवश्यक चर्चा की गई। घटनाओं की रोकथाम के लिए किए गए प्रयासों की प्रशंसा प्रमुख सचिव वन, प्रधान मुख्य संरक्षक समेत नामित कार्यकारिणी के सदस्यों ने भी अहम मुद्दों पर अपने तर्क रखे। बैठक में वन मंत्री ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व व उसके आसपास के क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रोकथाम के लिए किए गए प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित ग्रामीणों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता बरतने के साथ ही सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है। बाघ संरक्षण फाउंडेशन से होने वाले कार्यों की योजनाओं को रखा गया। जंगल में पर्यावरण के सरंक्षण से लेकर पर्यटन को बढ़ावा देने तक के लिए कई स्तर पर चर्चा की गई। वन व वन्यजीव संरक्षण के मानकों को सख्ती से लागू किया जाने पर जोर पीलीभीत टाइगर रिजर्व में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पर्यटकों को पर्यावरण मित्र की सुविधाएं अधिक से अधिक दी जाएंगी। यही नहीं पर्यटन के विस्तार के साथ वन व वन्यजीव संरक्षण के मानकों को सख्ती से लागू किया जाने पर जोर दिया गया। बैठक में प्रमुख सचिव, वन वी. हेकाली झिमोमी ने कहा कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व फाउंडेशन की आय के साधन बढ़ाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। स्वैच्छिक दानदाताओं को फाउंडेशन में योगदान को प्रेरित किया जा रहा है। बैठक में वन राज्य मंत्री केपी मलिक और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।  

पोला पर्व पर छत्तीसगढ़ में खास आयोजन, CM विष्णुदेव साय होंगे शामिल

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज पोला पर्व के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 2.30 बजे रायपुर से दुर्ग के लिए रवाना होंगे। दोपहर 3 बजे ग्राम मडियापार में आयोजित पोरा महोत्सव-2026 में शामिल होंगे। कार्यक्रम के बाद 3.45 बजे भिलाई के रिसाली सेक्टर के लिए रवाना होंगे। यहां मुख्यमंत्री शाम 4.30 बजे दशहरा मैदान में आयोजित पोला उत्सव कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री शाम 5.45 बजे तक रायपुर लौटेंगे। सक्ती में होगा ग्रामीण विकास का बड़ा आयोजन रायपुर। सक्ती जिले के ग्राम जेठा में 11 सितंबर को ग्रामीण विकास को लेकर बड़ा आयोजन होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि होंगे, जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 2 लाख परिवारों को पक्के घर की सौगात देते हुए गृह प्रवेश कराया जाएगा। साथ ही आवास योजना में एआई आधारित जियो-टैग सत्यापन प्रणाली की शुरुआत होगी। इस दौरान नदियों और जलधाराओं के पुनर्जीवन के लिए ‘धार अपार अभियान’ शुरू किया जाएगा। ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए 270 नए इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर भी शुरू होंगे। कार्यक्रम में लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और रानी मिस्त्री को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा उत्कृष्ट कार्य करने वाली 5 पंचायतों के प्रतिनिधियों का भी सम्मान होगा। कार्यक्रम के दौरान 122 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 39 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन-शिलान्यास किया जाएगा। आयोजन में प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और पंचायत प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण मौजूद रहेंगे।

न्यायमूर्ति कोगजे ने संभाली MP हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति की कमान, बने 30वें चीफ जस्टिस

राज्यपाल पटेल ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति को दिलाई शपथ न्यायमूर्ति कोगजे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के बने 30वें मुख्य न्यायाधिपति भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने मध्य प्रदेश के 30 वें मुख्य न्यायाधीपति की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन गुरूवार को लोकभवन के सांदीपनि सभागार में किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे। राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शपथ ग्रहण के बाद नव नियुक्त मुख्य न्यायाधिपति कोगजे को पुष्प-गुच्छ भेंट कर बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने शपथ ग्रहण समारोह का संचालन किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को नियुक्त किए जाने की अधिसूचना का वाचन किया। समारोह का प्रारंभ और समापन राष्‍ट्रीय गीत वंदे मातरम् तथा राष्‍ट्र गान जन-गण-मन के गायन के साथ हुआ। शपथ ग्रहण समारोह में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्‍द्र सिंह तोमर, उप मुख्‍यमंत्री द्वय जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्‍ल, कौशल विकास एवं रोजगार राज्‍यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्‍यक्ष अवधेश प्रताप सिंह, पूर्व राज्‍यपाल कप्‍तान सिंह सोलंकी, न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर, न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट, न्यायमूर्ति विनय सराफ, न्यायमूर्ति रमेश फड़के, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, अपर मुख्‍य सचिव डॉ. शिवशेखर शुक्‍ला और संजय शुक्‍ल, राज्‍यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, विधायक, सांसद मध्‍यप्रदेश, गुजरात और उत्तरप्रदेश राज्‍य के उच्‍च न्‍यायालयों के न्‍यायमूर्तिगण, वरिष्‍ठ प्रशासनिक, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और आयोगों के पदाधिकारी मौजूद थे।  

सिंहस्थ 2028 की तैयारी में बड़ा फैसला, उज्जैन की पुरानी मस्जिद हटाने पर हाईकोर्ट ने राहत से किया इनकार

 इंदौर  उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के तहत सड़कों के चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। कंठाल से बड़े गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण की जद में आ रही करीब 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर दोनों याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने बुधवार को खारिज कर दिया। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई की और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाएं निरस्त कर दीं।  उज्जैन की 100 साल पुरानी शाही मस्जिद के तोड़ने पर फिलहाल कोई रोक नहीं है। सिंहस्थ 2028 के तहत किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण के दायरे में यह मस्जिद भी आ रही है।उज्जैन नगर निगम ने इसे हटाने के लिए नोटिस दिया था जिसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत हुई थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निगम की कार्रवाई पर किसी तरह की रोक लगाने से इंकार करते हुए याचिका निराकृत कर दी। हाई कोर्ट में प्रस्तुत इन याचिकाओं में मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, भवन अधिकारी और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था। उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव ने याचिका निरस्त करने और कार्रवाई पर किसी तरह का स्टे नहीं दिए जाने की पुष्टि की है। मस्जिद पक्ष की ओर से प्रस्तुत याचिका में नगर निगम के भवन अधिकारी द्वारा जारी सूचना पत्र को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई थी। कहा था कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी और मुगलकालीन मस्जिद है। क्या है वजह प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मस्जिद को 100 वर्ष से अधिक पुराना और ऐतिहासिक बताया गया। पंचायत ने पुराने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें कुछ भूमि के अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख होने का दावा किया गया है। पहली याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान के प्रतिनिधि अशफाक अहमद और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी वक्फ पंच मोचियान के प्रतिनिधि और वाइस चेयरमैन अशफाक अहमद की ओर से दायर की गई थी। इसमें मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, बिल्डिंग ऑफिसर और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था। दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसीडेंट अशान हुसैन की अपर से लगाई गई थी। इसमें मप्र दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसीडेंट अरशान हुसैन की ओर से लगाई गई थी। इसमें मप्र शासन, उज्जैन नगर निगम और मप्र वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अशहर अली वारसी ने कहा कि अभी विस्तृत लिखित आदेश आना बाकी है। याचिकाएं खारिज की गई हैं, लेकिन आदेश का अध्ययन करने के बाद फैसले के खिलाफ डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मस्जिद ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की है, इसलिए इसे हटाया नहीं जाना चाहिए।मस्जिद प्रबंधन ने पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया था। प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। सिंहस्थ के दौरान यातायात को सुचारू रखने और भीड़ का दबाव कम करने के लिए इस मार्ग का चौड़ीकरण जरूरी माना जा रहा है। नगर निगम का कहना है कि कार्रवाई मास्टर प्लान और निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है। अनवर कादरी की पार्षदी खत्म करने का मामला पहुंचा हाई कोर्ट, दायर हुई याचिका इंदौर :नगर निगम वार्ड 58 से पार्षद रहे अनवर कादरी की पार्षदी समाप्त करने के मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई है। याचिका कादरी की पत्नी ने दायर की है।याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने शासन से कहा कि वह दो दिन में स्पष्ट करे कि कादरी की ओर से की गई अपील की क्या स्थिति है। एडवोकेट विभोर खंडेलवाल के मुताबिक कादरी की पार्षदी खत्म करने के संभागायुक्त के निर्णय को प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन के समक्ष चुनौती देते हुए अपील दायर की गई थी जो अब भी लंबित है। अपील लंबित रहने के दौरान प्रमुख सचिव ने निर्वाचन आयोग से चुनाव के लिए अनुशंसा कर दी। इसी को चुनौती देते हुए याचिका प्रस्तुत हुई है। बुधवार को हुई सुनवाई में शासन कोर्ट को बताया कि फिलहाल वार्ड में चुनाव स्थगित कर दिए हैं। इस पर कादरी के वकील ने सवाल उठाया कि अपील लंबित है तो फिर ऐसी स्थिति में चुनाव कराए कैसे जा सकते हैं। इस पर कोर्ट ने अपील की स्थिति के बारे में पूछा जिस पर सरकारी वकील ने जानकारी लेने की बात कही। इस पर कोर्ट ने शासन को दो दिन का समय दिया है। शासन को बताना है कि कादरी की ओर से दायर अपील की क्या स्थिति है। मामले में अब 11 सितंबर को सुनवाई होगी। शाही मस्जिद 100 वर्ष पुरानी, ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध याचिकाओं में मस्जिद कमेटी ने उज्जैन नगर निगम के नोटिस को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रबंधन का दावा है कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और इससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्पूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें भूमि अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख था। इसके अलावा 13 सितंबर 1985 के मप्र शासन के राजपत्र में भी मस्जिद और उसकी पैमाइश का उल्लेख होने का दावा किया गया है। वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी प्रबंधन का यह भी कहना है कि वर्ष 1975 में यातायात सुगम बनाने के लिए मस्जिद की ओर से स्वेच्छा से भूमि दी गई थी। वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी है और आवागमन में कोई बड़ी बाधा नहीं … Read more

पंजाब के तीन धार्मिक शहरों में नॉनवेज पर बैन, मांस की बिक्री और सेवन भी प्रतिबंधित

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य के तीन पवित्र शहरों में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक से संबंधित नोटिफिकेशन अब असाधारण गजट में प्रकाशित कर दिया है। पंजाब सरकार के 9 सितंबर 2026 के असाधारण गजट में पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास विभाग की ओर से जारी आदेश को प्रकाशित किया गया है। खास बात यह है कि गजट में प्रकाशित आदेश पर 23 दिसंबर 2025 की तारीख दर्ज है। यानी प्रतिबंध का आदेश करीब साढ़े आठ महीने पहले जारी किया गया था, लेकिन अब इसे सरकारी गजट में प्रकाशित किया गया है। सरकार का यह आदेश अमृतसर की चारदीवारी वाले क्षेत्र, रूपनगर जिले के श्री आनंदपुर साहिब और बठिंडा जिले के तलवंडी साबो (श्री दमदमा साहिब) में लागू होगा। आदेश में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक तत्काल प्रभाव से लागू की जाएगी। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ राज्य में लागू संबंधित कानूनों और नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। गृह विभाग के निर्देश पर जारी हुआ आदेश पशुपालन विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई गृह मामले विभाग की 15 दिसंबर 2025 की अधिसूचना में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की गई है। इसके बाद पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास विभाग ने 23 दिसंबर 2025 को प्रतिबंध संबंधी आदेश जारी किया। अब इसे 9 सितंबर 2026 को पंजाब सरकार के असाधारण गजट में प्रकाशित किया गया है। अमृतसर में पूरे शहर पर नहीं, चारदीवारी क्षेत्र में रोक नोटिफिकेशन में अमृतसर के लिए पूरे शहर को प्रतिबंधित क्षेत्र नहीं बनाया गया है। इसमें विशेष तौर पर अमृतसर के चारदीवारी वाले शहर का उल्लेख है। वहीं श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो (श्री दमदमा साहिब) की संबंधित नगर पालिका सीमाओं में यह आदेश लागू होगा। पवित्र शहर घोषित करने के फैसले की पृष्ठभूमि राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों को धार्मिक महत्व को देखते हुए पवित्र शहर घोषित करने का फैसला किया था। अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब में तख्त श्री केसगढ़ साहिब और तलवंडी साबो में तख्त श्री दमदमा साहिब जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। इन क्षेत्रों की धार्मिक मर्यादा और गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंध का फैसला लिया गया था। हालांकि, वर्तमान गजट में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध का स्पष्ट उल्लेख है। शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों पर रोक संबंधी व्यापक घोषणा को अलग सरकारी आदेश के बिना इसी नोटिफिकेशन का हिस्सा नहीं माना जा सकता।

नुआखाई, महाअष्टमी और गोवर्धन पूजा के अवसर पर शासकीय कार्यालय एवं संस्थाएं रहेंगी बंद

नुआखाई, महाअष्टमी और गोवर्धन पूजा के अवसर पर शासकीय कार्यालय एवं संस्थाएं रहेंगी बंद तीन स्थानीय अवकाश किए घोषित रायपुर  सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा जारी आदेश के तहत रायपुर जिले में तीन स्थानीय अवकाश घोषित किए हैं। यह अवकाश रायपुर जिले, शहर (राजधानी) स्थित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं में लागू होंगे।         जारी आदेश के अनुसार नुआखाई पर्व के लिए 15 सितंबर 2026 (मंगलवार), महाअष्टमी के लिए 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) तथा गोवर्धन पूजा (दीपावली के दूसरे दिन) के लिए 9 नवंबर 2026 (सोमवार) को स्थानीय अवकाश रहेगा। जारी आदेश के अनुसार ये अवकाश रायपुर जिले के अंतर्गत संबंधित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं पर लागू होंगे।