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एमपी में सूरज का कहर जारी, आसमान से बरस रहे अंगारे; कई जिलों में लू का रेड अलर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश में इन दिनों सूरज के सख्त तेवर और लू के थपेड़ों का सितम जारी है. मंगलवार को प्रदेश में पारा 47 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया. इस सीजन में पहली बार अधिकतम तापमान 47 डिग्री पर पहुंचा. इस बीच मौसम विभाग ने अगले 4 दिनों तक हीटवेव की चेतावनी जारी की है. IMD के अनुसार, बुधवार को भी मौसम बेहद गर्म रहने वाला है, जिससे स्थिति और बिगड़ने वाली है।  लू के थपेड़े से परेशान लोग एमपी में सुबह से निकली तेज धूप ने दोपहर तक आग बरसने जैसा एहसास करा रहा है. वहीं लू के थपेड़ों ने लोगों को बेहाल कर दिया है. सड़कों पर निकलने वाले लोग चेहरे को कपड़े से ढककर चलते नजर आ रहे हैं. राजधानी भोपाल, ग्वालियर, इंदौर समेत कई शहरों के बाजार दोपहर में सूने पड़ गए हैं।  गर्मी की वजह से दोपहर के समय में शहर के बाजारों और चौराहों पर आवाजाही कम हो गई है. जरूरी काम से ही लोग घर से बाहर निकल रहे हैं. हालांकि ठंडे पेय, नींबू पानी और गन्ने के रस की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई।  MP के इन शहरों में आज तीव्र लू का अलर्ट मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश भिंड, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, सतना, रीवा, मऊगंज, दमोह, सीधी, सिंगरौली, सागर, रायसेन और रतलाम में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. वहीं राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, नीमच, मंदसौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, आगर-मालवा, खरगोन, शाजापुर, विदिशा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, मंडला, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, सीहोर, शहडोल और मैहर में लू चलने का अलर्ट है. बैतूल, पांढुर्णा, अनूपपुर और सिवनी में भी भीषण गर्मी का दौर रहेगा. इसके अलावा उमरिया, डिंडौरी, बालाघाट, राजगढ़, रायसेन, कटनी और छिंदवाड़ा में वॉर्म नाइट घोषित किया गया है।  47 डिग्री पहुंचा पारा मंगलवार को छतरपुर के नौगांव सबसे गर्म रहा. यहां टेम्परेचर रिकॉर्ड 47 डिग्री दर्ज किया गया. वहीं खजुराहो में तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. दतिया में तापमान 45.8 डिग्री दर्ज किया गया. इसके अलावा राजगढ़ में पारा 45.6 डिग्री सेल्सियस, दमोह में 45.5 डिग्री सेल्सियस, शाजापुर, टीकमगढ़, गुना-सागर में तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस, सतना में 45.1 डिग्री सेल्सियस, मुरैना, शहडोल, रायसेन, रीवा-श्योपुर में 45 डिग्री, मंडला में 44.6 डिग्री सेल्सियस, उमरिया में 44.5 डिग्री, खरगोन में 44.4 डिग्री सेल्सियस, रतलाम में 44.2 डिग्री सेल्सियस और खंडवा में 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  इधर, ग्वालियर में तापमान 45 डिग्री पहुंच गया है. राजधानी भोपाल में पारा 44.2 डिग्री, इंदौर में तापमान 43.7 डिग्री सेल्सियस, उज्जैन में 43.8 डिग्री सेल्सियस और जबलपुर में पारा 44.6 डिग्री दर्ज किया गया।   मौसम विभाग ने गर्मी से बचने के लिए कुछ स्वास्थ्य सुझाव दिए हैं..     दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें.     धूप के सबसे गर्म घंटों (12 से 3 बजे) के दौरान बाहर जाने से बचें. यात्रा करते समय अपने साथ पानी जरूर रखें.     ओआरएस, छाछ की एवं पेय पदार्थ, ताजे फल (तरबूज, खीरा), नींबू पानी, मौसमी फल सेवन करें, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं.     गर्मी के समय बाहर निकलते के वक्त सिर को ढककर रखें और सूती कपड़े पहनने से बचें की सलाह दी जाती है.     छोटे बच्चों, बुजुर्गों एवं गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखें, उन्हें धूप से बचें.     बुखार एवं दस्त (डायरिया) होने पर लापरवाही न बरतें, शरीर गर्म होने पर डॉक्टर से संपर्क करें.     खेत, खदान और बाहर काम करने वाले श्रमिक दोपहर में धूप में काम करने से बचें.     भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और स्थानीय अधिकारियों की अधिकृत सूचना से अपडेट रहें.

4000 करोड़ की बड़ी सौगात! आरा-कोईलवर क्षेत्र में रेल और सड़क कनेक्टिविटी का होगा विस्तार

 आरा  दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाली दिल्ली-हावड़ा मेन लाइन पर जल्द ही बड़े स्तर पर आधारभूत ढांचे का विस्तार देखने को मिल सकता है।रेल मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरा जंक्शन होकर गुजरने वाले इस अत्यंत व्यस्त रेलखंड को आधुनिक और अधिक सक्षम बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।योजना के तहत लगभग 3500 से 4000 करोड़ रुपये की लागत से दो नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी। इसके साथ ही कोईलवर में सोन नदी पर देश का दूसरा चार लेन रेल पुल भी बनाया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना के पूरा होने के बाद वर्तमान दो लाइन वाले रेलखंड को चार लाइन में विकसित किया जाएगा। इसमें एक लाइन पैसेंजर ट्रेनों के संचालन के लिए, एक लाइन मालगाड़ियों के लिए तथा दो लाइन एक्सप्रेस ट्रेनों की आवाजाही के लिए निर्धारित की जाएगी। इससे ट्रेनों के परिचालन में काफी आसानी होगी और यात्रियों को समय पर ट्रेन सेवा का लाभ मिल सकेगा। सोन नदी पर बनेगा नया पुल   इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कोइलवर में सोन नदी पर नए रेल पुल का निर्माण है। यह पुल मौजूदा रेल पुल के समानांतर बनाया जाएगा। पूर्व मध्य रेलवे ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी से पहले परियोजना की तकनीकी और व्यवहारिकता रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। संभावना जताई जा रही है कि इसी माह जांच रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंप दी जाएगी। नए पुल के निर्माण के बाद पुराने और नए पुल को मिलाकर कुल चार रेल लाइनें उपलब्ध हो जाएंगी। इससे एक ही समय में तीन-तीन ट्रेनों का आवागमन संभव हो सकेगा। वर्तमान में केवल दो लाइन होने के कारण अप और डाउन दिशा में एक-एक ट्रेन ही एक समय में गुजर पाती है, जिससे ट्रेनों के परिचालन पर भारी दबाव बना रहता है। समय पालन में होगी बड़ी राहत हावड़ा-पटना-डीडीयू रेलखंड भारतीय रेल के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। इस रूट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, पैसेंजर और मालगाड़ियां गुजरती हैं। ट्रेनों का दबाव अधिक होने के कारण अक्सर परिचालन प्रभावित होता है और समय पालन बनाए रखना रेलवे के लिए चुनौती बन जाता है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि चार लाइन बनने के बाद ट्रेनों के संचालन को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकेगा। इससे मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों के कारण एक्सप्रेस ट्रेनों की गति प्रभावित नहीं होगी। वहीं लंबी दूरी की ट्रेनों को भी समय पर चलाने में सहायता मिलेगी।  आरा, पटना और आसपास के क्षेत्रों को मिलेगा लाभ  इस परियोजना से आरा, बक्सर, बिहिया, डुमरांव और पटना सहित पूरे शाहाबाद क्षेत्र को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। रेल ढांचे के मजबूत होने से औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। साथ ही यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और कम विलंब वाली ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इस परियोजना को अंतिम मंजूरी केंद्रीय कैबिनेट से मिलनी है। रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में पूर्व मध्य रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।  

MP में रेलवे का मेगा प्रोजेक्ट, 4329 करोड़ की चौथी लाइन से भोपाल-इटारसी सफर होगा और तेज

भोपाल   मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बीना के बीच जल्द ही ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने जा रही है. इटारसी भोपाल बीना के बीच बनने जा रही चौथी रेल लाइन के काम ने तेजी पकड़ ली है. चौथी रेल लाइन को केन्द्रीय बजट में स्वीकृति मिलने के बाद इसके सर्वे का काम पूरा हो गया है. रेल्वे अधिकारियों के मुताबिक इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है, जो जल्द ही पूरी कर ली जाएगी. 237 किलोमीटर लंबे रूट की इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 100 करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया गया है।  237 किलोमीटर रूट पर बनेंगे 39 बड़े पुल इटारसी भोपाल बीना तीनों बड़े जंक्शन हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों को रेल लाइन से जोड़ते हैं. तीनों बड़े स्टेशनों के बीच कुल लंबाई 237 रूट किलोमीटर है. इन रूट पर लगातार यात्री गाड़ियों और मालगाड़ियों के संचालन का दबाव बढ़ रहा है. इसको देखते हुए इटारसी से बीना तक चौथी रेल लाइन का काम शुरू होने जा रहा है. इस परियोजना के पूरे होने के बाद ट्रेन 9 सुरंगों से होकर गुजरेगी. इसके अलावा 4 महत्वपूर्ण पुलों का भी निर्माण किया जाएगा।  4329 करोड़ होंगे खर्च इस रूट में 39 बड़े पुल, 151 छोटे पुल, 43 रोड ओवर ब्रिज और 39 रोड अंडर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा. इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 4329 करोड़ रुपए हैं. परियोजना के लिए समय सीमा 4 साल निर्धारित की गई है।  रेल रूट से जुड़ेगी हेरीटेज साइट चौथी रेल लाइन का काम पूरा होने से मध्यप्रदेश और आसपास के दूसरे राज्यों के प्रमुख हेरीटेज साइज और ईकोटूरिज्म साइट की कनेक्टीविटी और बेहतर होगी. खासतौर से वर्ल्ड हेरीटेज साइट सांची, भीमबेटिका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अलावा दूसरे कई टूरिस्ट स्पॉट्स तक पहुंचना और आसान हो जाएगा. यह नया रेल कॉरिडोर इटारसी से शुरू होकर भोपाल होते हुए बीना तक जाएगा. इस रूट पर सीहोर, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर जिले सीधे तौर से जुड़ेंगे।  उत्तर से दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी और बेहतर होगी इस रेल लाइन का काम पूरे होने से ट्रेफिक का दबाव कम होगा ओर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी. भोपाल रेल मंडल के डीसीएम नवल अग्रवाल ने बताया, '' इस परियोजना के पूरे होने से 15.2 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता सालाना विकसित होगी. इसका फायदा क्षेत्र में उद्योग और लॉजिस्टिक को मिलेगा. इस रूट पर 25 जोड़ी यात्री ट्रेनों के अलावा करीबन 200 मालगाड़ियों का संचालन और बढ़ेगा. इस परियोजना को चार चरणों में पूरा किया जा रहा है. पहला बीना से सुमेर, दूसरा सुमेर से रानी कमलापति स्टेशन, तीसरा रानीकमलापति रेल्वे स्टेशन से बरखेड़ा और बरखेड़ा से इटारसी तक रहेगा. इसके लिए भूमि अधिग्रहण काम चल रहा है। 

260 खिलाड़ी ले रहे 8 खेलों का प्रशिक्षण, खेल के साथ योग और सामान्य ज्ञान पर भी जोर

रायपुर जिला प्रशासन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से बीजापुर में आयोजित 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन खेल शिविर में बच्चों की खेल प्रतिभाओं को नई दिशा मिल रही है। एजुकेशन सिटी में आयोजित इस आवासीय शिविर में जिले के दूरस्थ क्षेत्रों से आए बच्चे उत्साह के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। कलेक्टर  विश्वदीप और जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी मती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य ग्रामीण और सुदूर अंचलों के बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर उनकी खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है। शिविर में जिले के चारों विकासखंडों से आए 260 खिलाड़ी शामिल हैं। बीजापुर स्पोर्ट्स अकादमी के प्रशिक्षकों द्वारा बच्चों को दो पालियों में वालीबाल, फुटबॉल, सॉफ्टबॉल, तीरंदाजी, बैडमिंटन, तैराकी, एथलेटिक्स और कबड्डी सहित 8 खेलों का नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को खेलों के नियम, अनुशासन, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी भी दी जा रही है। प्रतिदिन योग सत्र आयोजित कर बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। खेल गतिविधियों के साथ बच्चों को सेंट्रल लाइब्रेरी में सामान्य ज्ञान और शैक्षणिक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। शिविर में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे चलकर स्पोर्ट्स अकादमी में प्रवेश देकर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह ग्रीष्मकालीन खेल शिविर बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी विकसित कर रहा है।

बीजापुर के ग्राम गमपुर में स्वास्थ्य विभाग का विशेष अभियान बना ग्रामीणों के लिए राहत

रायपु दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र ग्राम गमपुर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कठिन परिस्थितियों के बीच पहुंचकर जनसेवा का सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया। बीजापुर जिले के उप स्वास्थ्य केंद्र डोडीतुमनार की टीम ने जंगल और खराब रास्तों की चुनौतियों के बावजूद गांव में यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान कुल 771 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई। स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों की सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ मलेरिया, टीबी, एनीमिया, उच्च रक्तचाप और गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच भी की। सर्वेक्षण के दौरान 5 मलेरिया मरीजों की पहचान कर तुरंत उपचार शुरू किया गया। वहीं 2 संभावित टीबी मरीजों और 1 हाई रिस्क गर्भवती महिला को आगे की जांच और उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। जांच के दौरान 1 उच्च रक्तचाप और 2 एनीमिया से पीड़ित मरीजों को भी चिन्हित किया गया। उन्हें आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श उपलब्ध कराया गया। स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को साफ-सफाई, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और संक्रामक बीमारियों से बचाव के बारे में भी जागरूक किया। ग्रामीणों ने बताया कि पहली बार उनके गांव के पास इतने बड़े स्तर पर स्वास्थ्य जांच सुविधा उपलब्ध हुई है, जिससे लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। टीम के लगातार प्रयासों से ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है। ग्राम गमपुर में चलाया गया यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि यह भी दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य विभाग लोगों तक सेवाएं पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

गुणवत्ता सुधार की दिशा में बड़ा कदम, 252 संस्थाओं की मॉनिटरिंग अब मोबाइल ऐप से होगी

क्वालिटी ऑडिट मोबाइल ऐप : संस्थाओं की गुणवत्ता सुधार की नई डिजिटल पहल मध्यप्रदेश में 252 सामाजिक संस्थाओं की निगरानी अब मोबाइल ऐप से भोपाल  मध्यप्रदेश में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक अभिनव पहल के रूप में क्वालिटी ऑडिट मोबाइल एप लागू किया गया है। यह पहल डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन की जनकल्याणकारी सोच को आगे बढ़ाती है। साथ ही विभागीय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों ने इस व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी रूप से स्थापित किया है। प्रदेश में संचालित शासकीय एवं अशासकीय संस्थाएं जैसे दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र, वृद्धाश्रम, दिव्यांगजनों के संचालित विशेष विद्यालय और नशा मुक्ति केंद्र समाज के कमजोर वर्गों को आश्रय और सेवाएं प्रदान करते हैं। वर्तमान में 252 संस्थाओं के सुचारू संचालन और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया गया है। एमपीएसईडीसी के सहयोग से विकसित यह मोबाइल ऐप निरीक्षण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाता है। इस ऐप की कार्यप्रणाली एक व्यवस्थित प्रक्रिया पर आधारित है, जिसकी शुरुआत जिला अधिकारी द्वारा विभागीय पोर्टल पर लॉगइन करने से होती है। इसके बाद स्थानीय निकाय में पदस्थ सामाजिक सुरक्षा अधिकारी को पोर्टल पर पंजीकृत कर यूजर आईडी प्रदान की जाती है, जो उन्हें एसएमएस के माध्यम से प्राप्त होती है। निरीक्षण कार्य को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए निरीक्षण दल का गठन किया जाता है और उसकी जानकारी पोर्टल पर दर्ज की जाती है। अगले चरण में संबंधित संस्था का चयन कर सामाजिक सुरक्षा अधिकारी को निरीक्षण के लिए असाइन किया जाता है। अधिकारी मोबाइल ऐप डाउनलोड कर आवश्यक अनुमतियां प्रदान करते हैं तथा लोकेशन ऑन कर लॉगइन करते हैं। इसके बाद जिस संस्था का निरीक्षण किया जाना है, उसका चयन कर निरीक्षण प्रक्रिया प्रारंभ होती है। निरीक्षण के दौरान मोबाइल ऐप के माध्यम से संस्था के न्यूनतम 5 फोटो लिए जाते हैं, जिनके साथ विस्तृत विवरण और रिमार्क दर्ज किए जाते हैं। ऐप में निर्धारित प्रश्नों के उत्तर संस्था की वास्तविक स्थिति के आधार पर भरे जाते हैं, जिससे मूल्यांकन निष्पक्ष और तथ्यात्मक बनता है। निरीक्षण के आधार पर अंत में संस्था को ग्रेडिंग प्रदान की जाती है और रिपोर्ट को सबमिट कर निरीक्षण पूर्ण किया जाता है। पूरी प्रक्रिया के बाद निरीक्षण रिपोर्ट संचालनालय और जिला स्तर पर ऑनलाइन उपलब्ध हो जाती है। जिला अधिकारी इन रिपोर्टों और ग्रेडिंग का परीक्षण कर संस्थाओं में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करते हैं। इससे न केवल निगरानी व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि संस्थाओं के संचालन में निरंतर सुधार भी देखने को मिलता है। राज्य शासन इन संस्थाओं में रहने वाले दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य जरूरतमंदों को बेहतर जीवन स्तर, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित कर रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली अनुदान राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करने में भी यह एप महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुल मिलाकर, यह मोबाइल ऐप मध्यप्रदेश में सामाजिक क्षेत्र की संस्थाओं के लिए एक आधुनिक और प्रभावी निगरानी तंत्र के रूप में उभरा है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से शासन ने यह सुनिश्चित किया है कि सेवा प्रदायगी में पारदर्शिता बनी रहे और प्रत्येक हितग्राही तक गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं पहुंचें। यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार का उदाहरण है, बल्कि संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम भी है। 

क्या दतिया में BJP की बड़ी रणनीति तैयार? नरोत्तम मिश्रा की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी चर्चाएं

भोपाल/दतिया  मध्यप्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद यहां उपचुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पत्र के बाद दतिया कलेक्टर ने निर्वाचन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी बीच प्रदेश की सियासत में उस समय नई हलचल पैदा हो गई, जब दतिया से पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। मुलाकात की तस्वीर खुद विधानसभा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर साझा की और लिखा — “पूर्व मंत्री, मध्यप्रदेश शासन डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी ने आज विधानसभा में सौजन्य भेंट की…” हालांकि इसे औपचारिक मुलाकात बताया गया, लेकिन दतिया उपचुनाव की संभावनाओं के बीच इस भेंट के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा दतिया सीट को प्रतिष्ठा का चुनाव मानकर रणनीति तैयार कर रही है। दरअसल, दतिया वही सीट है जहां पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को कड़े मुकाबले में हराया था। मिश्रा लंबे समय तक इस क्षेत्र की राजनीति का मजबूत चेहरा रहे हैं और उनकी हार को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना गया था। अब जब अदालत के फैसले के बाद सीट खाली हुई है, तो भाजपा इसे वापसी के मौके के तौर पर देख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई बन सकता है। खासकर नरोत्तम मिश्रा और राजेंद्र भारती के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता इस चुनाव को और दिलचस्प बना रही है। फिलहाल सभी की नजर चुनाव आयोग की घोषणा और भाजपा-कांग्रेस की रणनीति पर टिकी हुई है। दतिया का सियासी रण एक बार फिर गर्माने लगा है। पारदर्शिता पर प्रशासन का विशेष फोकस प्रशासन की ओर से चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने राजनीतिक दलों से कहा है कि वे 18 मई तक अपने अधिकृत प्रतिनिधियों की सूची, फोटो और पहचान पत्र उपलब्ध कराएं ताकि मशीनों की जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। जानकारी के अनुसार दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों के लिए उपयोग होने वाली ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की तकनीकी जांच की जाएगी। इस दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे ताकि प्रक्रिया पर सभी की निगरानी बनी रहे। दतिया सीट का राजनीतिक महत्व फिर बढ़ा दतिया विधानसभा सीट लंबे समय से प्रदेश की सबसे चर्चित और हाईप्रोफाइल सीटों में गिनी जाती रही है। इस क्षेत्र की राजनीति केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर प्रदेश की व्यापक राजनीति पर भी दिखाई देता है। यहां कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच वर्षों से सीधा मुकाबला देखने को मिलता रहा है। यही वजह है कि उपचुनाव की हलचल शुरू होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजेंद्र भारती और नरोत्तम मिश्रा की प्रतिद्वंद्विता रही चर्चा में दतिया की राजनीति में कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बीच मुकाबला हमेशा सुर्खियों में रहा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को पराजित कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। इस हार ने प्रदेश की राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी क्योंकि नरोत्तम मिश्रा को भाजपा का प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है। अब भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद एक बार फिर यह सीट सियासी प्रतिष्ठा का केंद्र बनती दिखाई दे रही है। उपचुनाव में दोनों दलों की प्रतिष्ठा दांव पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया का आगामी उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह दोनों प्रमुख दलों की राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल सकता है। कांग्रेस जहां पिछली जीत को बरकरार रखने की चुनौती के साथ मैदान में उतरेगी, वहीं भारतीय जनता पार्टी इस सीट को दोबारा अपने कब्जे में लेने के लिए पूरी ताकत झोंक सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में दतिया में चुनावी सभाओं, रणनीतिक बैठकों और राजनीतिक बयानबाजी का दौर और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। जनता की नजरें अब राजनीतिक रणनीतियों पर उपचुनाव की तैयारियों के बीच दतिया की जनता भी अब राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर नजर बनाए हुए है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और क्षेत्रीय समीकरणों का असर चुनावी परिणामों पर कितना पड़ेगा, यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर चुनावी मशीनरी सक्रिय हो चुकी है और राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में दतिया का यह उपचुनाव प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नई हलचल पैदा करता दिखाई दे रहा है। दोनों के लिए प्रतिष्ठा की सीट है दतिया एमपी के बड़े नेताओं की भी निगाह एमपी की दतिया सीट क्यों लगी है, इसका कारण यह हाईप्रोफाइल सीट है। इस सीट पर राजेंद्र भारती कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ते आ रहे हैं और भाजपा की तरफ से नरोत्तम मिश्रा चुनाव लड़ते आ रहे हैं। दोनों ही व्यक्तियों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा से भी जुड़ी है। कभी नरोत्तम मिश्रा जब भाजपा की ओर से विधायक थे तो राजेंद्र भारती की शिकायतों के बाद उन्हें भी अयोग्य घोषित कराने का मामला कोर्ट तक पहुंचा था। इसके बाद राजेंद्र भारती कांग्रेस के विधायक बने तो वे एक सहकारी बैंक के एफडी घोटाले में फंस गए। इन्हें सजा हो गई और राजेंद्र भारती को अयोग्य घोषित कर दिया। अब वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसके लिए राजेंद्र भारती ने भाजपा नेता पर साजिशन फंसाने के आरोप लगाए थे। नरोत्तम ने कहा था- मैं लौटकर आउंगा 2023 में राजेंद्र भारती को 88977 वोट मिले थे, जबकि नरोत्तम मिश्रा को 81235 वोट मिले थे। अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी से चुनाव हारने के बाद नरोत्तम मिश्रा काफी निराश हो गए थे। कुछ ही दिनों में उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने शायराना अंदाज में कहा था कि मैं लौटकर आउंगा, यह वादा रहा। जब राजेंद्र … Read more

मैनिट के वैज्ञानिकों का कमाल, चार पैरों वाला क्वाड्रेट रोबोट और एडवांस ड्रोन तैयार

भोपाल भोपाल: राजधानी का मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानि मैनिट अब सिर्फ इंजीनियरिंग केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य की रोबोटिक क्रांति की प्रयोगशाला बनता जा रहा है. यहां ऐसे स्मार्ट रोबोट और एडवांस ड्रोन तैयार किए जा रहे हैं, जो खदानों, सीवर लाइन, जहरीली गैस वाले इलाकों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के मिशन में इंसानों की जगह काम करेंगे. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस ये मशीनें उन जगहों पर भेजी जाएंगी, जहां हर कदम पर जान का खतरा होता है।  मैनिट में भविष्य की रोबोटिक टेक्नोलॉजी मैनिट स्थित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर और आईओटी एंड रोबोटिक्स लैब में कई हाईटेक प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है. यहां वैज्ञानिक और रिसर्चर्स ह्यूमनॉइड रोबोट, क्वाड्रेट रोबोट और एडवांस सर्विलांस ड्रोन विकसित कर रहे हैं. इन मशीनों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि वे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और रिस्क एरिया में बिना मानवीय हस्तक्षेप के काम कर सकें. यह तकनीक आने वाले समय में औद्योगिक सुरक्षा और सामरिक मिशनों में बड़ा बदलाव ला सकती है।  जहां इंसान नहीं पहुंच सकते, वहां जाएंगे ये रोबोट खदानों, केमिकल इंडस्ट्री और गैस रिस्क एरिया में अक्सर जहरीली गैसों के रिसाव या आक्सीजन की कमी के कारण बड़े हादसे होते हैं. ऐसे हालात में इंसानों को भेजना बेहद खतरनाक साबित होता है. मैनिट में तैयार किए जा रहे रोबोट्स को खासतौर पर ऐसे ही क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया जा रहा है. ये मशीनें खतरनाक जगहों पर जाकर डेटा जुटाएंगी, गैस लेवल की जांच करेंगी और रियल टाइम मॉनिटरिंग करेंगी. इससे रेस्क्यू ऑपरेशन ज्यादा सुरक्षित और तेज हो सकेंगे।  चार पैरों वाले क्वाड्रेट रोबोट होंगे खास आकर्षण मैनिट की लैब में विकसित किए जा रहे क्वाड्रेट रोबोट सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. चार पैरों पर चलने वाले ये रोबोट ऊबड़-खाबड़ रास्तों, पहाड़ी इलाकों और संकरी सुरंगों में आसानी से मूव कर सकते हैं. इनकी डिजाइनिंग ऐसी की जा रही है कि वे इंसानों की तरह संतुलन बनाए रखते हुए कठिन परिस्थितियों में भी लगातार काम कर सकें. भविष्य में इनका उपयोग सेना, आपदा प्रबंधन और इंडस्ट्रियल सर्विलांस में किया जा सकता है।  हाई-अल्टीट्यूड मिशन के लिए बन रहे एडवांस ड्रोन मैनिट के प्रोफेसर मितुल कुमार अहिरवार ने बताया कि "रोबोटिक्स प्रोजेक्ट के साथ-साथ मैनिट में हाई-अल्टीट्यूड ड्रोन टेक्नोलॉजी पर भी रिसर्च चल रही है. ये ड्रोन पहाड़ी क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और जटिल संरचनाओं की निगरानी कर सकेंगे. खराब मौसम या जोखिम वाले क्षेत्रों में भी इनकी मदद से सटीक सर्विलांस किया जा सकेगा. आपदा प्रबंधन के दौरान यह तकनीक राहत और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  कम लागत में तैयार होगी स्वदेशी तकनीक दरअसल, विदेशी रोबोटिक मशीनों की कीमत काफी अधिक होती है, जिससे उनका बड़े स्तर पर उपयोग मुश्किल हो जाता है. मैनिट की टीम इन रोबोट्स और ड्रोन को कम लागत में विकसित करने पर फोकस कर रही है. रिसर्च का दावा है कि कम बजट के बावजूद इनकी एक्यूरेसी और कार्यक्षमता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इससे देश में सस्ती और भरोसेमंद रोबोटिक तकनीक उपलब्ध हो सकेगी।  पेटेंट के बाद बाजार में आएंगी तकनीकें मैनिट में चल रहे कई प्रोजेक्ट अब एडवांस रिसर्च लेवल तक पहुंच चुके हैं. इन तकनीकों के लिए पेटेंट भी फाइल किए जा चुके हैं. पेटेंट प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन रोबोट्स और ड्रोन को कमर्शियल मार्केट और पब्लिक डोमेन में उतारा जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ये तकनीकें देश की सुरक्षा, इंडस्ट्रियल मानिटरिंग और रिस्की आपरेशंस का चेहरा बदल सकती हैं। 

MP के सरकारी स्कूलों में जल्द होगी गेस्ट टीचर्स की एंट्री, छुट्टियों के बाद शुरू होगा जॉइनिंग अभियान

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्रीष्मावकाश समाप्त होने के बाद 16 जून से स्कूल खुलते ही रिक्त पदों पर ज्वाइनिंग दी जाएगी। इसके लिए विभाग द्वारा विषयवार खाली पदों की सूची भी जारी कर दी गई है। इसके अनुसार माध्यमिक शिक्षक वर्ग में सबसे अधिक रिक्तियां अंग्रेजी, गणित और संस्कृत विषय में सामने आई हैं। इन विषयों में नियमित शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। ऐसे में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले ही अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिलेवार और विषयवार रिक्त पदों के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित स्कूलों में आवश्यकता के अनुसार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति एक जुलाई से की जाएगी। इससे स्कूलों में पढ़ाई सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी। 70 हजार पद पर अतिथि शिक्षक पदस्थ प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में हर वर्ष बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है। इस बार भी 70 हजार पदों पर अतिथि शिक्षकों को अवसर मिलने की संभावना है। इनकी सेवाएं 30 अप्रैल को समाप्त हुई है। अब एक जुलाई से इनकी पदस्थापना की जाएगी। अतिथि शिक्षकों से आनलाइन पोर्टल पर स्कोर कार्ड जनरेट किए जा रहे हैं।

बढ़ते पेट्रोल-डीजल दामों के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे टैक्सी चालक, दिल्ली में 3 दिन चक्का जाम की चेतावनी

 नई दिल्ली ईंधन बढ़ते दामों के बीच दिल्ली के टैक्सी और ऑटो चालकों ने फेयर (किराया) बढ़ाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है. दिल्ली के कमर्शियल वाहन चालकों की विभिन्न यूनियनों ने 21 से 23 मई तक तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर अपनी मांगें रखी हैं।  समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने कहा, 'सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण मिडिल क्लास के चालक अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इसलिए दिल्ली के अन्य संगठनों के समन्वय से 'चालक शक्ति यूनियन' ने 21, 22 और 23 मई को चक्का जाम (हड़ताल) का आह्वान किया है और लोगों से इन दिनों वाहन न चलाने की अपील की है।  ड्राइवरों की प्रमुख मांग दिल्ली में टैक्सी, ऑटो और अन्य कमर्शियल वाहनों के चालक लंबे वक्त से फेयर हाइक (किराया बढ़ोतरी) की मांग कर रहे थे. ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद यह मांग और तेज हो गई है. यूनियनों का कहना है कि टैक्सी-ऑटो किराया बढ़ाया जाए, बढ़ते ईंधन दामों को देखते हुए किराए के रेट लिस्ट की समीक्षा की जाए. साथ ही चालकों की आय में वृद्धि हो।  इस तीन दिवसीय चक्का जाम को सफल बनाने के लिए ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने प्रशासनिक स्तर पर अपनी मांगें पहुंचा दी हैं. उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र भेजकर चालकों की समस्याओं से अवगत कराया गया है. यूनियनों ने दिल्ली के सभी चालकों से अपील की है कि वे 21, 22 और 23 मई को अपने वाहन सड़क पर न उतारें।