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कचरे से बनेगी बिजली और बायो-CNG, शारजाह में BEEAH मुख्यालय पहुंचे CM मोहन यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित तीन दिवसीय प्रतिष्ठित 'एआईएम कांग्रेस-2026' के तीसरे दिन 8 सितंबर को शारजाह स्थित बी-आह (Bee’aH) मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बी-आह फैसेलिटी के ग्रुप सीईओ एवं वाइस-चेयरमैन खालिद अल हुरैमल के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, स्मार्ट सिटी विकास, सर्कुलर इकोनॉमी और अत्याधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट समाधानों को मध्यप्रदेश में लागू करने को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सभी प्रकार के इंडस्ट्रियल वेस्ट, सीवेज वेस्ट, वेस्ट रिप्रोसेसिंग और इनर्ट मटेरियल के डिस्पोजल संबंधी ट्रीटमेंट सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि यहां विश्व की सर्वाधिक उन्नत तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान बी-आह ग्रुप को मध्यप्रदेश के नगर निगमों में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट तथा वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीईईएएच की डिजिटल, एआई-सक्षम और सर्कुलर इकोनॉमी क्षमताएं मध्यप्रदेश के स्मार्ट सिटी विजन और क्लीन एनर्जी मिशन के बिल्कुल अनुकूल हैं। राज्य में ईवी-आधारित फ्लीट और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विस्तार में यह साझेदारी अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। इंदौर के स्वच्छता मॉडल के साथ वैश्विक तालमेल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि इंदौर ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और बायो-सीएनजी के क्षेत्र में देश और दुनिया के समक्ष एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित किया है। उन्होंने बी आह को इंदौर के स्थापित मॉडल के साथ जुड़कर नए आधुनिक समाधानों पर मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया, जिससे कचरा प्रबंधन के साथ-साथ जीरो-वेस्ट लैंडफिल के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। जीआईएस-2027 के लिए दिया आमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बी आह के ग्रुप के सीईओ खालिद अल हुरैमल को अगले साल भोपाल में आयोजित होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027' में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि बी आह ग्रुप अपनी आगामी वैश्विक विस्तार योजनाओं में मध्यप्रदेश को एक प्रमुख और प्राथमिकता वाले गंतव्य (डेस्टिनेशन) के रूप में शामिल करे। अत्याधुनिक मुख्यालय का किया अवलोकन बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसिद्ध आर्किटेक्ट ज़ाहा हदीद द्वारा डिज़ाईन किए गए बी-आह के प्रतिष्ठित एआई-सक्षम व नेट-ज़ीरो-रेडी मुख्यालय तथा उनकी विभिन्न उन्नत सुविधाओं की सराहना की। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित बी आह आज 46 राष्ट्रीयताओं के 13 हजार से अधिक कर्मचारियों और यूएई, सऊदी अरब व मिस्र में विस्तृत परिचालनों के साथ पर्यावरण, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन मोबिलिटी और टेक्नोलॉजी का अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय समूह बन चुका है। शारजाह में 90 प्रतिशत से अधिक लैंडफिल-डायवर्जन दर और कमर्शियल स्केल वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के संचालन में समूह ने वैश्विक मानक स्थापित किए हैं। एडवांस्ड सस्टेनेबल और एआई-सक्षम है बी आह फैसिलिटी का मुख्यालय बी आह सस्टेनेबिलिटी, इनोवेशन और एआई का वैश्विक मॉडल संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में मुख्यालय वाला बी-आह (BEEAH) वैश्विक स्तर पर सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित यह संस्था एक वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से विकसित होकर आज एनवायरमेंटल सर्विसेज, रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और सस्टेनेबल रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही है। बी-आह की पहचान एडवांस्ड वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकोनॉमी सॉल्युशन्स के लिए है। उच्च वेस्ट-डायवर्जन दर के साथ संस्था शारजाह के महत्वाकांक्षी सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इसका उद्देश्य कचरे को केवल निपटान की वस्तु न मानकर उसे संसाधन में बदलते हुए एक ऐसे मॉडल को विकसित करना है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी गति दे। बीईईएच का प्रतिष्ठित मुख्यालय इस सोच का जीवंत उदाहरण है। प्रसिद्ध वास्तुकार ज़ाहा हदीद द्वारा डिजाइन किया गया यह भवन दुनिया की अत्याधुनिक सस्टेनेबल और एआई-सक्षम इमारतों में शामिल है। भवन की डिजाइन, तकनीक और ऊर्जा दक्षता इसे भविष्य के स्मार्ट एवं पर्यावरण-अनुकूल शहरों के लिए एक प्रभावी मॉडल बनाती है। रणनीतिक साझेदारियों और नवाचार आधारित परियोजनाओं के माध्यम से बी-आह स्मार्ट और सस्टेनेबल शहरों के विकास को नई दिशा दे रहा है। पर्यावरणीय उत्कृष्टता, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में इसके प्रयासों ने शारजाह को क्षेत्रीय स्तर पर ग्रीन इनोवेशन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है।

‘डॉक्टर हनुमान’ को हटाना मुश्किल, JCB-क्रेन भी फेल; मुस्लिम समुदाय भी बना भक्ति की मिसाल

उज्जैन  उज्जैन में सड़क चौड़ी करने के लिए मंदिर का ढांचा तोड़ दिया गया। जेसीबी और क्रेन से खड़े हनुमान की प्रतिमा हटाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से हिली तक नहीं। करीब 10 दिन की कोशिश के बाद प्रशासन ने एक्सपर्ट्स की मदद लेने का फैसला किया है। अब IIT इंदौर की टीम को बुलाया गया है। टीम ने स्पेशल इक्विपमेंट से प्रतिमा की गहराई और आसपास की जमीन की जांच की। पुरातत्व एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि प्रतिमा करीब 1000 साल पुरानी हो सकती है। IIT की रिपोर्ट के बाद तय होगा कि इसे सुरक्षित तरीके से हटाया जा सकता है या नहीं। वहीं, भक्तों के लिए यह सिर्फ प्रतिमा हटाने का मामला नहीं है। खड़े हनुमान को लोग ‘डॉक्टर हनुमान’ और मंदिर को ‘उज्जैन का एम्स’ कहते हैं। मान्यता है कि यहां बच्चों और बीमार लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। इसलिए प्रतिमा के नहीं हिलने को भक्त भगवान का संकेत और चमत्कार मान रहे हैं। सड़क चौड़ीकरण में मंदिर आड़े आया था कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। सड़क की चौड़ाई करीब 15 मीटर की जा रही है। इसी दायरे में खड़े हनुमान का मंदिर आ रहा था। कार्रवाई के दौरान मंदिर का ढांचा हटा दिया गया, लेकिन प्रतिमा को विस्थापित करने में परेशानी हुई। प्रतिमा हटाने के लिए निगम की टीम कटर लेकर भी पहुंची थी। भक्तों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि ज्यादा बल लगाने या कटर चलाने से प्रतिमा को नुकसान हो सकता है। दो दिन पहले मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई थी। भक्तों ने निगम कमिश्नर को ज्ञापन देकर विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की थी। प्रतिमा के नीचे क्या है, IIT पता लगाएगी आईआईटी इंदौर की टीम ने मंगलवार को करीब दो घंटे तक जांच की। विशेष उपकरणों से प्रतिमा की जमीन में गहराई और आसपास की संरचना की जानकारी जुटाई गई है। टीम अब अपनी रिपोर्ट देगी। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा के मुताबिक मंदिर के पंडित के आग्रह पर आईआईटी की टीम को बुलाया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया और तारीख तय होगी। प्रशासन यह देख रहा है कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाना संभव है या नहीं। पुरातत्व विशेषज्ञ बोले- 1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक प्रतिमा करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। उनके अनुसार पुराने समय में बड़ी प्रतिमाओं को इंटरलॉक तकनीक से स्थापित किया जाता था। खड़े हनुमान की प्रतिमा भी इसी तकनीक से स्थापित किए जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर की है। परमार वंश और राजा भोज के समय इस तरह के पत्थरों पर कलाकृतियां बनाने की परंपरा रही है। लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण प्रतिमा की मूल बनावट और भाव-भंगिमा साफ दिखाई नहीं देती। भक्त इसे चमत्कार मान रहे प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के बाद इसके नहीं हिलने की चर्चा सोशल मीडिया तक पहुंच गई। स्थानीय लोग, पुजारी और हिंदू संगठन इसे भगवान का संकेत और चमत्कार मान रहे हैं। इसे लेकर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया और प्रतिमा हटाने का विरोध हुआ। भक्तों के लिए यह सिर्फ मंदिर या प्रतिमा हटाने का मामला नहीं है। यहां खड़े हनुमान को ‘डॉक्टर हनुमान’ कहा जाता है, जबकि मंदिर को कई लोग ‘उज्जैन का एम्स’ कहते हैं। मान्यता है कि यहां बच्चों और बीमार लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। बच्चों के इलाज की मान्यता से पड़ा ‘डॉक्टर हनुमान’ नाम पुजारी महेश बैरागी के मुताबिक मंदिर में वर्षों से छोटे बच्चों को झाड़नी दी जाती है और ताबीज बांधे जाते हैं। उनका दावा है कि इससे कई बच्चों को फायदा मिला है। उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण देते हुए बताया कि उसका लीवर ट्रांसप्लांट होना था। परिवार एयर एंबुलेंस से बच्चे को दिल्ली ले जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हर बार उसकी तबीयत बिगड़ जाती थी। परिवार मंदिर आया और बच्चे को भगवान का ताबीज बांधा गया। इसके बाद उसे एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया और उसका लीवर ट्रांसप्लांट हुआ। मुस्लिम परिवार भी मन्नत मांगने आते हैं भक्त शिवेंद्र तिवारी के मुताबिक मंदिर में मुस्लिम समाज के परिवार भी मन्नत लेकर पहुंचते हैं। जिन परिवारों में संतान नहीं होती या जो किसी बीमारी से परेशान होते हैं, वे यहां मन्नत मांगते हैं। उनका कहना है कि वर्षों से लोग अपनी समस्याएं लेकर मंदिर आते रहे हैं और अब प्रतिमा को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। मंदिर के ऊपर लगाया गया टेंट मंदिर का ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने उसके ऊपर केनोपी यानी टेंट लगा दिया है। भक्त इसे अयोध्या के राम मंदिर से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तरह भगवान राम को एक समय टेंट में रहना पड़ा था, उसी तरह अब खड़े हनुमान भी टेंट के नीचे विराजित हैं।

हमीदिया अस्पताल में इलाज पर संकट! स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर डॉक्टरों की हड़ताल, मरीज परेशान

भोपाल मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर्स स्टाइपेंड बढ़वाने 3 दिन से सड़कों पर हैं। भोपाल में सबसे बड़ा प्रदर्शन कमला पार्क के पास चल रहा है, जहां डॉक्टर सड़क पर बैठकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में इसका असर दिख रहा है। ओपीडी सेवाएं ठप हैं। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बुधवार को 12 बजे तक ओपीडी बंद कर दी गई। सीनियर डॉक्टर्स ने मरीजों को देखा। किडनी और लिवर के मरीज भटकते दिखे। हमीदिया में आज सिर्फ 2 ऑपरेशन हुए, जबकि बाकी दिन 40 से ज्यादा होते थे। कमला पार्क के पास आंदोलन, रास्ते को वन-वे किया गया भोपाल में कमला पार्क के पास बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठे हैं। प्रदर्शन के कारण ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। रास्ते को वन-वे किया गया है। पुलिस और प्रशासन डॉक्टरों से बातचीत कर रहे हैं, ताकि प्रदर्शन से आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो। इंटर्न डॉक्टर सौरभ सोनी ने बताया- जब तक मांग पूरी नहीं होगी, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। डॉ. शालिनी खन्ना ने बताया कि धूप और गर्मी से काफी दिक्कत हो रही है, लेकिन खाने-पीने की परेशानी नहीं है। सीनियर डॉक्टर, साथी और भोपाल के लोग भी हमारे लिए खाना भेज रहे हैं। भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा- जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इंटर्न डॉक्टरों की मांगों को लेकर कल मेडिकल कॉलेज में विस्तृत चर्चा हुई थी। आज भी उन्हें बातचीत के लिए बुलाया गया है। प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और ट्रैफिक भी सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होंने कहा- छात्रों को अपने बीच से तय प्रतिनिधियों के जरिए प्रशासन से तुरंत बातचीत करनी चाहिए। प्रदर्शन करना उनका अधिकार है, लेकिन सरकार के फैसले के बाद यह भी देखना चाहिए कि उनकी मांगों में से सरकार ने किस हद तक सहमति दी है। हर व्यक्ति के असंतुष्ट होने पर लगातार विरोध जारी रखना उचित नहीं है।

विचाराधीन कैदियों के मामलों की होगी समीक्षा, CG की अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी ने दिए निर्देश

कोंडागांव. जिला स्तर पर लंबे समय से विचाराधीन मामलों में बंद कैदियों को राहत दिलाने की दिशा में समीक्षा की गई. अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी और मॉनिटरिंग सेल की बैठक में पात्र बंदियों के मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई. ऐसे बंदियों के मामलों की समीक्षा की गई, जिन्हें लंबे समय से जमानत का लाभ मिलने के बावजूद शर्तें पूरी करने में परेशानी है. इसके अलावा उन बंदियों के मामलों पर भी ध्यान दिया गया, जो अपनी संभावित अधिकतम सजा की तुलना में पर्याप्त समय जेल में बिता चुके हैं. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश खिलावन राम रिगरी ने अधिकारियों को पात्र मामलों में तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए. बैठक में बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें न्याय तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. मॉनिटरिंग सेल की बैठक में नए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने पर भी चर्चा हुई. ग्राम तोतर में मेगा ड्राइव के तहत प्रत्येक सप्ताह कैंप लगाने को लेकर भी संबंधित विभागों के साथ समन्वय पर जोर दिया गया. कैंप के जरिए ग्रामीणों तक विभिन्न विभागों की सेवाएं पहुंचाने की योजना पर चर्चा हुई. बैठक में न्यायिक, पुलिस, प्रशासन और अभियोजन से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे. अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पात्र बंदियों और ग्रामीणों से जुड़े मामलों में प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए.

मौतों के बाद भी सागर में खुलेंगी शराब दुकानें! 28 लोगों की जान गई, 100+ गांवों में चलेगा नशामुक्ति अभियान

 सागर  मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने वाले लोगों की मौत का सिलसिला जारी है। मंगलवार को तीन और लोगों की मौत हुई। इनको मिलाकर मरने वालों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है।इस बीच प्रभावित क्षेत्रों में उन सात शराब की दुकानों को फिर से खोलने का आदेश हो जारी हो गया है, जिन्हें मौतों के बाद बंद करा दिया गया था। हालांकि आदेश में कहा गया है कि जिले में केवल संदिग्ध बाम्बे व्हिस्की और सागर गोल्ड ब्रांड की देसी शराब की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। मामले में पुलिस और प्रशासन ने अवैध शराब के नेटवर्क को ध्वस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए रणनीति बनाई है। अब प्रशासन ने तीन स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। इसमें घर-घर सर्वे, चौपाल और कानूनी कार्रवाई शामिल है। बंडा सिविल अस्पताल में शराब सेवन से प्रभावित मरीजों के आने का सिलसिला अब थमने लगा है। हालांकि, मामले में अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने शासन-प्रशासन पर मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप लगाया है। मंगलवार को छापरी, घूरमार और रिछवार सानौधा गांव के एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। करीब 13 लोग बुंदेलखंड मेडिकल कालेज की आइसीयू में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं, जबकि डेढ़ सौ से अधिक लोग भर्ती हैं। हालांकि कुछ लोगों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है। इस बीच, प्रारंभिक जांच में संदिग्ध शराब किसी अधिकृत डिस्टिलरी से तैयार होकर बाजार में आने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि डिस्टिलरी स्तर पर तैयार शराब में गड़बड़ी होती तो उसका असर संभाग के अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देता। फिलहाल जांच का फोकस शराब की पैकेजिंग और उसमें मिलावट के स्तर पर है। शराब की जांच के लिए तीन टीमें गठित की हैं। पिछले दो दिनों में शराब दुकानों, आरोपितों के कब्जे, फैक्ट्री सहित अन्य स्थानों से शराब के करीब 80 नमूने लिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि नकली शराब की बोतल का ढक्कन ढीला होने और शराब का रंग सामान्य से अलग होता है। मृतकों के विसरा की फॉरेंसिक जांच पर जताया संदेह जिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मोहासा ने कहा कि सरकार अभी भी जहरीली शराब से हुई मौतों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही है। प्रशासन द्वारा बताए जा रहे आंकड़ों और जमीनी हकीकत में अंतर दिखाई दे रहा है। पहले मृतकों के शव परिजनों को सौंपने में देरी हुई, पोस्टमार्टम में देरी हुई और अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मृतकों के विसरा की फॉरेंसिक जांच पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से होगी या नहीं। कांग्रेस की मांग है कि सभी मृतकों के विसरा की जांच भोपाल की स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर किसी प्रकार का सवाल न उठे। भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार मध्यप्रदेश में-राहुल गांधी राहुल गांधी ने सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद X पर लिखा- भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्यप्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं। दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। नए कानून बना दिए जाते हैं, लेकिन अगले हादसे तक उन्हें किसी तहखाने में डाल दिया जाता है। उन्होंने लिखा- जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है, लेकिन मध्यप्रदेश को पता है आगे क्या होगा। कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि ये पहली बार नहीं है। शिकायतों पर क्लीनचिट भारी पड़ी, वेयर हाउस प्रभारी को हटाया सागर में लंबे समय से आबकारी वेयर हाउस की प्रभारी मंजूषा सोनी को मंगलवार देर शाम हटा दिया गया। उनके स्थान पर राम चित्रकार को नया प्रभारी बनाया गया है। दरअसल, पिछले महीने एक शराब ठेकेदार ने बाम्बे व्हिस्की की नकली बोतल देकर उसके मिलावटी होने की आशंका जताई थी। 10-12 दिन उसे रखे रहने के बाद सहायक आबकारी आयुक्त ने उसे जांच के लिए वेयर हाउस भेजा। बताया गया है कि एडीओ मंजूषा सोनी ने करीब एक घंटे में केवल बैच नंबर का मिलान कर शराब को पीने योग्य बताते हुए रिपोर्ट भेज दी। अब इसी ब्रांड की शराब से बंडा तहसील मुख्यालय से सटे आठ गांवों में मौतों के बाद क्लीनचिट पर सवाल है। शराब ठेकेदारों का कहना है मंजूषा सोनी 20-22 साल से सागर में ही कार्यरत हैं। राहुल गांधी ने कहा- सरकार जवाब दे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष्य राहुल गांधी ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर की पोस्ट में लिखा है कि भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्य प्रदेश में शासन नाम की कोई चीज बची ही नहीं। जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर जिले में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है। मगर पूरे मध्य प्रदेश को पता है आगे क्या होगा- कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि यह पहली बार नहीं है। कुछ ही वक्त पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई। पिछले साल जहरीली कफ सीरप से छोटे बच्चों की जान चली गई। मध्य प्रदेश में दवा जहरीली। शराब जहरीली। पानी जहरीला। 20 साल से ज्यादा समय से भाजपा की सरकार है, लेकिन जवाबदेही कहां है? उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, इन मौतों की पूरी सच्चाई सामने आए और सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं, जिसकी भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसकी जवाबदेही तय हो। शिवपुरी में महिलाओं ने शराब की दुकान पर लगाई आग सागर जिले में जहरीली शराब पीने से मौतों के बाद शिवपुरी जिले के अमोला गांव की शराब की दुकान पर महिलाओं ने धावा बोल दिया। उन्होंने बोतलें फेंक जमकर तोड़फोड़ की और दुकान में आग लगा दी। पूरी दुकान जलकर राख हो गई। कर्मचारियों ने भागकर खुद को महिलाओं के आक्रोश से बचाया। सभी महिलाएं हाथों में लाठियां लेकर पहुंचीं थीं। दरअसल, शराब ठेकेदारों ने जगह-जगह शराब बिक्री के ठिकाने बना दिए हैं। आमोला में ऐसी ही दुकान खोली गई है। इससे गांव में शराब पीकर रोज हंगामा … Read more

कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, 13 दिन बाद सरकार से बनी बात; मांगों पर हुआ समझौता

चंडीगढ़. पंजाब सरकार के कर्मचारियों और सरकार के बीच पिछले कई दिनों से चल रहा टकराव बुधवार को खत्म हो गया। मुख्य सचिव के साथ कर्मचारी संगठनों की बैठक के बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस लेने का औपचारिक एलान कर दिया। बैठक में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर भी लगभग सहमति बन गई है। सरकार की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए दोनों पत्र वापस लेने पर भी सहमति बनी है। कर्मचारी संगठनों ने लंबित मांगों को लेकर मंगलवार से सामूहिक अवकाश लेकर आंदोलन शुरू किया था और बाद में हड़ताल को 11 सितंबर तक बढ़ाने की घोषणा की थी। इससे पंजाब सिविल सचिवालय समेत विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ था। सरकार की ओर से भी सख्त रुख अपनाते हुए ड्यूटी से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का नियम लागू करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। मुख्य सचिव के साथ हुई बातचीत बुधवार को मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। बैठक के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। कर्मचारियों की मांगों पर भी सरकार के साथ लगभग सहमति बनने की बात कही गई है। इसके साथ ही सरकार की ओर से जारी दोनों पत्रों को वापस लेने का फैसला हुआ है। इस घटनाक्रम से सरकार और कर्मचारियों के बीच बढ़ा तनाव फिलहाल खत्म हो गया है। कर्मचारियों के हड़ताल वापस लेने के बाद अब सरकारी कार्यालयों में सामान्य कामकाज बहाल होने की उम्मीद है। कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार की ओर से आगे की प्रक्रिया जल्द स्पष्ट की जाएगी। क्या थी मांगें? कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, अस्थायी कर्मियों को नियमित और वेतन से जुड़ी विसंगतियां दूर करने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

पंजाबी इंफ्लुएंसर मंजीत कौर हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई, रिंकू का साथी पिंदा पकड़ा गया

चंडीगढ़. पंजाबी इंफ्लुएंसर मंजीत कौर की किडनैपिंग के बाद हत्या के मामले में सेक्टर-34 थाना पुलिस ने मुख्य आरोपित रिंकू के साथी परमिंदर सिंह उर्फ पिंदा (25) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपित को वारदात में इस्तेमाल रिंकू की फॉर्च्यूनर कार के साथ सेक्टर-48 की मोटर मार्केट से गिरफ्तार किया। परमिंदर सिंह पंजाब के कपूरथला जिले के खानोवाल का रहने वाला है। उसका खरड़ में इमिग्रेशन का काम था, लेकिन वारदात से कुछ दिन पहले से वह रिंकू के लिए ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा था। दोनों के बीच दोस्ती भी है। मंजीत कौर को सेक्टर-34 से बुलाने और अगवा करने के दौरान परमिंदर भी रिंकू के साथ था। पुलिस आरोपित को बुधवार को अदालत में पेश करेगी। पुलिस की ओर से उससे पूछताछ के लिए रिमांड मांगा जाएगा। वहीं, मामले के मुख्य आरोपित रिंकू की तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं। फोन कर सेक्टर-34 बुलाने का आरोप मंजीत कौर की मां कांता देवी ने सेक्टर-34 थाना पुलिस को बयान दिया था कि उनकी बेटी को उसके दो जानकार रिंकू और पिंदा ने फोन कर सेक्टर-34 बुलाया था। 3 और 4 जुलाई की रात दोनों आरोपितों ने मंजीत कौर के साथ कथित तौर पर मारपीट की और उसे कार में अगवा कर मोरिंडा के जंगल क्षेत्र में ले गए। आरोपित मंजीत कौर को मोरिंडा के जंगल क्षेत्र में ले गए और वहां एक पेड़ से बांधकर आग लगा दी। इसके बाद दोनों आरोपित मौके से फरार हो गए। इसी दौरान मंजीत कौर का एक जानकार वहां पहुंचा और कंबल डालकर आग बुझाई। गंभीर रूप से झुलसे मंजीत कौर को उपचार के लिए मोरिंडा अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे पीजीआई रेफर किया गया। मंजीत कौर को बाद में मोहाली स्थित मैक्स अस्पताल ले जाया गया। वहां कुछ दिनों तक उसका इलाज चला। इसके बाद उसे दोबारा पीजीआई रेफर किया गया। उपचार के दौरान मंजीत कौर की मौत हो गई। मामले में पुलिस ने अब परमिंदर सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि वारदात में उसकी क्या भूमिका थी और मुख्य आरोपित रिंकू की घटना के बाद कहां-कहां मौजूदगी रही। पुलिस रिंकू की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार दबिश दे रही है।

बस्तर दशहरा की भव्य तैयारी, 1.22 करोड़ के खर्च का बजट प्रस्ताव तैयार

जगदलपुर. बस्तर की ऐतिहासिक दशहरा परंपरा इस साल भी भव्यता और पारंपरिक रस्मों के साथ मनाई जाएगी, लेकिन आयोजन का बजट पिछले साल की तुलना में बढ़ गया है। पाट जात्रा विधान पूरा होने के बाद अब आगे होने वाले विभिन्न विधानों की तैयारियां तेज हो गई हैं। कलेक्टोरेट में बस्तर दशहरा समिति की दो घंटे से अधिक चली बैठक में आयोजन की व्यवस्थाओं के साथ खर्च का खाका भी रखा गया। वर्ष 2026 के लिए 1 करोड़ 22 लाख 53 हजार 629 रुपए खर्च का प्रस्ताव तैयार किया गया है। पिछले साल वास्तविक खर्च 1 करोड़ 11 लाख 39 हजार 663 रुपए रहा था। यानी इस बार करीब 11.14 लाख रुपए ज्यादा खर्च प्रस्तावित है। बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा पारंपरिक रस्मों में उपयोग होने वाले बकरा-सूअर और शराब पर होने वाले खर्च को लेकर रही। प्रस्ताव के अनुसार बकरा-सूअर पर 15.40 लाख रुपए और दशमी सामग्री व शराब पर 4.13 लाख यानी कुल 19.52 लाख का प्रावधान किया है। पिछले साल इन मदों पर करीब 17.75 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस लिहाज से इन मदों का खर्च भी बढ़ा है। टेंपल कमेटी के सचिव एवं तहसीलदार राहुल गुप्ता ने बताया कि बस्तर दशहरा धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत स्वरूप है। बस्तर दशहरा की अलग-अलग रस्मों को पूरा करने के लिए बजट में चावल से लेकर किराना, फल-फूल, भोग सामग्री, कपड़ा और रथ की लकड़ी तक का इंतजाम किया गया है। चावल पर 2.31 लाख, किराना पर 10.98 लाख, विदाई रस्म पर 5.40 लाख और विद्युत सजावट पर 10.61 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। कुश्ती प्रतियोगिता के लिए 9.26 लाख और डीजल के लिए 10.71 लाख रुपए रखे गए हैं। रथ-कपड़ा, रंगाई-पुताई, पटाखे और प्रचार- प्रसार पर भी अलग-अलग राशि प्रस्तावित है। इस बार इन मदों पर बड़ा खर्च किए जाने की तैयारी बकरा-सूअर 15.40 लाख, कपड़ा 15.40 लाख, रंगाई-पुताई 11.72 लाख, डीजल 10.71 लाख, विद्युत सजावट 10.61 लाख, किराना 10.98 लाख और कुश्ती 9.26 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। यानी दशहरा की रस्मों के साथ व्यवस्थाओं पर भी बड़ा खर्च होगा। 75 लाख मिले, लेकिन पुराना भुगतान बाकी 2026 के आयोजन के लिए संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग से 25 लाख और कलेक्टर कार्यालय से 50 लाख रुपए मिले हैं। यानी अभी कुल 75 लाख रुपए उपलब्ध हैं। वहीं वर्ष 2025 के वास्तविक खर्च में 36 लाख 39 हजार 663 का अतिरिक्त भुगतान लंबित बताया गया है। 1.22 करोड़ के बजट में ये रस्में होंगी पूरी प्रस्ताव में चावल, किराना, बकरा-सूअर, दशमी सामग्री व शराब, विदाई रस्म, विद्युत सजावट, कुश्ती, वाहन, डीजल, लोहा, फल-फूल व भोग, रथ-कपड़ा, रंगाई-पुताई, कपड़ा, पटाखे, प्रचार-प्रसार, लकड़ी चिरान और अन्य सामग्री शामिल हैं।

कुलपति पर लगे आरोपों की होगी जांच, हेमचंद यादव विवि पहुंची उच्चस्तरीय कमेटी

दुर्ग. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी के विरुद्ध प्राप्त वित्तीय, प्रशासनिक एवं मूल्यांकन संबंधी शिकायतों की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्यपाल सचिवालय द्वारा कुलपति को शिकायतों से संबंधित नस्तियां, नोटशीट एवं अभिलेख प्रस्तुत करने दिए गए अंतिम अवसर की समय-सीमा समाप्त होने के बाद जांच समिति के सदस्य विश्वविद्यालय पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि समिति द्वारा संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की मौके पर जांच- पड़ताल की जा रही है। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब राज्यपाल सचिवालय द्वारा कुलपति को स्पष्ट समय-सीमा में दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, और वह अवधि भी समाप्त हो चुकी है, तो अब जांच समिति स्वयं विश्वविद्यालय पहुंचकर अभिलेखों की जांच कर रही है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था। राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना द्वारा 30 जुलाई को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया था। बताया जाता है कि दुर्ग ग्रामीण के विधायक एवं छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ललित चंद्राकर ने कुलपति के विरुद्ध विभिन्न बिंदुओं को लेकर कलाधिपति के समक्ष शिकायत प्रस्तत की थी। इसके बाद शिकायतों की जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय ने 19 अगस्त 2026 के पत्र के माध्यम से कुलपति के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज एवं नस्तियां जांच समिति को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके लिए 24 अगस्त 2026 तक की समय- सीमा निर्धारित की गई थी। बताया जाता है कि कुलपति की ओर से विभिन्न विभागों से अभिलेख एकत्र करने तथा उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित जानकारी के लिए आरटीआई आवेदन किए जाने का हवाला देते हुए समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 किए जाने का अनुरोध किया गया। हालांकि, निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी अपेक्षित दस्तावेज जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई। विधायक ललित चंद्राकर ने की है शिकायत हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलपति डॉ. संजय तिवारी के विरुद्ध गंभीर वित्तीय, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनियमितताओं सबंधी शिकायती पत्र राज्यपाल को प्रेषित किया है। पत्र में लिखा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा माह मार्च 2026 में लगभग 12 लाख से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं की खरीदी हेतु निविदा आमंत्रित की गई थी। निविदा प्रक्रिया में शासकीय फर्म “संवाद” द्वारा न्यूनतम दर प्रस्तुत किए जाने के बावजूद कुलपति द्वारा एक निजी फर्म के पक्ष में अर्धशासकीय पत्र जारी कर कार्य आबंटित किए जाने की अनुशंसा की गई। तत्पश्चात उक्त फर्म को ही कार्य प्रदान किया गया तथा लगभग 40 लाख रुपए से अधिक का भुगतान भी किया गया। यह कृत्य शासकीय निविदा प्रक्रिया एवं वित्तीय नियमों के प्रतिकूल प्रतीत होता है। इसके अलावा विश्वविद्यालय द्वारा एमबीए, एमसीए, पीजीडी बीएम सहित 8 नये पाठ्यक्रम प्रारंभ करने हेतु एआईसीटीसी एवं आरसीआई से निरीक्षण कराया गया, जबकि इसके पूर्व राज्य शासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त नही की गई। यह तथ्य भी सामने आया है कि एक ही विभागीय सरंचना को परिवर्तित स्वरुप में प्रस्तुत कर विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु मान्यता प्राप्त करने का प्रयास किया गया। नए पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक पुस्तकों की खरीदी में भी गंभीर अनियमितता बरती गई है। कुलपति द्वारा बिना किसी विधिवत निविदा प्रक्रिया के सिर्फ मौखिक निर्देश पर लगभग 40 लाख रुपए मूल्य की 380 पुस्तकें तत्काल खरीद ली गईं। पुस्तकों के मूल्य एवं खरीदी प्रक्रिया दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न उत्पन्न हो रहे हैं। शासकीय नियमों के अनुसार अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पश्चात की जाती है, परंतु कुलपति द्वारा मई माह में ही 5 विषयों हेतु 15 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई, जबकि संबंधित विभाग अभी विधिवत अस्तित्व में नहीं हैं तथा उनमें विद्यार्थियों का प्रवेश भी नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में उनके वेतन भुगतान के स्रोत एवं औचित्य की जांच आवश्यक है। कुलपति डॉ. तिवारी विश्वविद्यालय के अनेक महत्वपूर्ण एवं वित्तीय विषयों को कार्यपरिषद के समक्ष अनुमोदन हेतु प्रस्तुत नहीं करते, जबकि निर्धारित सीमा से अधिक राशि की खरीदी एवं वित्तीय निर्णयों में कार्यपरिषद की स्वीकृति आवश्यक होती है। यह आचरण विश्वविद्यालय अधिनियम एवं प्रशासनिक अनुशासन के विपरीत प्रतीत होता है।

पंजाब में कर्मचारियों की हड़ताल से सरकारी कामकाज प्रभावित, लुधियाना में हाईवे पर लगा जाम

चंडीगढ़  लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सामूहिक अवकाश के बाद कर्मचारी संगठनों ने अब 11 सितंबर तक हड़ताल जारी रखने का एलान किया है। पंजाब सिविल सचिवालय, निदेशालयों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के इस फैसले से आने वाले दिनों में सरकारी कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। दूसरी ओर, सरकार ने भी सख्त रुख अपनाते हुए नो वर्क नो पे (काम नहीं तो वेतन नहीं) का आदेश जारी कर दिया। कार्यालयों में होगी जनता को परेशानी साथ ही, ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि कई कर्मचारी कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद काम के दौरान कार्यालयों से अनुपस्थित हो जाते हैं। इससे आम जनता को परेशानी होती है। बसों के चक्का जाम की चेतावनी  पंजाब रोडवेज, पनबस और पी. आर. टी. से. काट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। यूनियन के राज्य अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर परिवहन मंत्री के साथ 8 सितम्बर को बैठक तय की गई थी, लेकिन मंत्री ने निजी कारणों का हवाला देते हुए बैठक को 9 सितम्बर तक टाल दिया है। रेशम सिंह गिल ने स्पष्ट किया कि यूनियन सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन कर्मचारियों की मांगों को लगातार लंबित रखने को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 9 सितम्बर को दोपहर 12 बजे तक परिवहन मंत्री के साथ बैठक का समय तय नहीं किया गया तो यूनियन पंजाब में बसों का चक्का जाम कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर देगी। क्यों हो रहा आंदोलन? इसे "अनधिकृत अनुपस्थिति" मान उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। कर्मचारी आंदोलन के पिछले चरण में सरकार ने 2,500 कर्मचारियों को नोटिस जारी किए थे। कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ता और एरियर जारी करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, अस्थायी कर्मियों को नियमित और वेतन से जुड़ी विसंगतियां दूर करने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।