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नगर काउंसिल चुनाव को लेकर राजपुरा में हलचल तेज, भाजपा के 23 प्रत्याशी मैदान में

राजपुरा नगर राजपुरा नगर काउंसिल चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी गतिविधियां तेज कर दी हैं। राजपुरा नगर कौंसिल के 31 वार्डों में से भाजपा के 23 उम्मीदवारों ने शुक्रवार को अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए। नामांकन भरने की अंतिम तिथि 16 मई होने के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों में खासा उत्साह देखने को मिला। भाजपा की ओर से नामांकन प्रक्रिया की जिम्मेदारी संभाल रहे रुपिंदर सिंह रूपी ने बताया कि 23 उम्मीदवारों की फाइलें पूरी होने के बाद उनके नामांकन पत्र संबंधित चुनाव अधिकारियों के पास जमा करवा दिए गए हैं। शेष उम्मीदवारों की फाइलें भी तैयार की जा रही हैं और शनिवार तक सभी प्रत्याशी अपने नामांकन दाखिल कर देंगे। रुपिंदर सिंह रूपी ने कहा कि भाजपा उम्मीदवार पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में हैं और उन्हें जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश के विभिन्न राज्यों में जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों पर विश्वास जताया है तथा आने वाले समय में पंजाब में भी भाजपा सरकार बनाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि राजपुरा नगर काउंसिल चुनावों में भाजपा भारी बहुमत से जीत हासिल करेगी। साथ ही कहा कि पार्टी शहर के विकास, मूलभूत सुविधाओं और बेहतर नागरिक सेवाओं के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।

शासकीय व्यय में मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन के लिए वित्त विभाग ने जारी किए नए निर्देश

शासकीय व्यय में मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन के लिए वित्त विभाग ने जारी किए नए निर्देश 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे निर्देश, सरकारी खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग ने शासकीय व्यय में मितव्ययिता एवं वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वित्त निर्देश जारी किया है। विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सभी विभागों, संभागीय आयुक्तों, कलेक्टरों तथा विभागाध्यक्षों को सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव द्वारा जारी इन निर्देशों का उद्देश्य राज्य के वित्तीय संसाधनों का कुशल प्रबंधन करना और सार्वजनिक व्यय में अनुशासन स्थापित करना है। यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं और 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। कारकेड वाहनों के उपयोग पर नियंत्रण निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारियों के कारकेड में केवल अत्यावश्यक वाहनों का ही उपयोग किया जाएगा। अन्य शासकीय संसाधनों का भी संयमित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा राज्य के शासकीय वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे ईंधन व्यय में कमी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। ईंधन और वाहन व्यय में मितव्ययिता पेट्रोल एवं डीजल पर होने वाले व्यय को न्यूनतम स्तर पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। एक ही दिशा में जाने वाले अधिकारियों के लिए वाहन पूलिंग व्यवस्था लागू की जाएगी। विदेश यात्राओं पर रोक अत्यंत अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर राज्य शासन के व्यय पर शासकीय सेवकों की विदेश यात्राओं पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। आवश्यक होने पर मुख्यमंत्री की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वर्चुअल बैठकों को प्रोत्साहन भौतिक बैठकों के स्थान पर वर्चुअल एवं ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा दिया जाएगा। निर्देशों के अनुसार भौतिक बैठकें यथासंभव माह में एक बार ही आयोजित की जाएंगी और विभागीय समीक्षा बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संचालित होंगी। ऊर्जा संरक्षण पर विशेष ध्यान कार्यालयीन समय के बाद सभी विद्युत उपकरण—जैसे लाइट, पंखे, एसी और कंप्यूटर—अनिवार्य रूप से बंद किए जाएंगे। शासकीय भवनों में ऊर्जा की बर्बादी रोकने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे। ई-ऑफिस और डिजिटल कार्यप्रणाली को बढ़ावा बैठकों में मुद्रित दस्तावेजों के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक फाइलों (PDF, PPT आदि) का उपयोग किया जाएगा। साथ ही, कार्यालयीन पत्राचार एवं नोटशीट का संचालन अनिवार्य रूप से e-Office के माध्यम से किया जाएगा, ताकि कागज और स्टेशनरी व्यय में कमी लाई जा सके। iGOT कर्मयोगी पोर्टल का अधिकतम उपयोग प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए भौतिक प्रशिक्षण के स्थान पर iGOT कर्मयोगी पोर्टल का उपयोग बढ़ाया जाएगा। विभागों को अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम इस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। शासन का मानना है कि इन उपायों से न केवल सरकारी खर्चों में कमी आएगी, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

हाईकोर्ट की सरकार को फटकार, बोला- बताइए संदीप पाठक पर FIR दर्ज हुई या नहीं

चंडीगढ़  राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ आपराधिक मामले को लेकर पंजाब सरकार की चुप्पी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- आप संकोच क्यों कर रहे हैं, एफआईआर है तो बता दीजिए, नहीं है तो भी बता दीजिए। अदालत ने सुनवाई टालते हुए बिना उसकी पूर्व अनुमति पाठक पर किसी कठोर कार्रवाई पर रोक जारी रखी। यह राहत अगले सप्ताह तक रहेगी। पाठक के वरिष्ठ अधिवक्ता रणदीप राय ने पंजाब सरकार पर अदालत से लुका-छिपी खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य आज तक यह बताने से बच रहा है कि पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई या नहीं। पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट जवाब मांगा था, लेकिन आज भी वही स्थिति है। 8 मई को सरकार ने कहा था- जानकारी नहीं, आज फिर वही जवाब। राय ने कहा कि यह सिर्फ एक सांसद का नहीं, हर नागरिक के मौलिक अधिकारों का सवाल है। अगर किसी के खिलाफ मामला दर्ज होता है तो उसे जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे में उसे सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है। पंजाब सरकार के वकील ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मीडिया रिपोर्टों पर आधारित आशंका है। याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का वैधानिक उपाय अपनाना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत यह समझने में असमर्थ है कि राज्य यह बताने में क्यों हिचक रहा है कि संज्ञेय अपराध दर्ज हुआ या नहीं। कोर्ट ने साफ किया- जब तक फैसला नहीं होता, बिना अदालत की इजाजत पाठक पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।  अगली सुनवाई अगले सप्ताह संजीव अरोड़ा की दलीलों से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं, फिलहाल नहीं दी कोई राहत कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपनी गिरफ्तारी व रिमांड को पूर्वनियोजित, कानूनविहीन और संवैधानिक सुरक्षा के खिलाफ बताया। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा- ईडी ने पीएमएलए की प्रक्रियाओं की अवहेलना कर गिरफ्तारी को औपचारिकता बना दिया। हाईकोर्ट ने लंबी बहस के बाद असंतुष्टि जताते हुए फिलहाल कोई राहत नहीं दी। अरोड़ा के वकीलों ने बताया कि उन्हें वास्तव में सुबह 7:15 बजे हिरासत में ले लिया गया जबकि आधिकारिक गिरफ्तारी का समय शाम 4 बजे दर्शाया गया। अदालत में कहा गया- यह स्वतंत्रता पर प्रहार है और गिरफ्तारी की पारदर्शिता व वैधानिकता पर सवाल खड़े करता है। घंटों नियंत्रण में रखकर बाद में गिरफ्तारी दिखाना कानून की मूल भावना के विपरीत है। अदालत को बताया गया कि 5 मई के ईसीआईआर और 9 मई की छापेमारी के बीच ईडी ने धारा 50 के तहत कोई समन जारी नहीं किया, न स्वतंत्र पूछताछ की, न कोई नया साक्ष्य जुटाया। बचाव पक्ष ने कहा- पुराने फेमा मामले की सामग्री को पीएमएलए गिरफ्तारी का आधार बनाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अरोड़ा की ओर से एक और बड़ा सवाल उठाया गया- जिस अधिकारी ने पहले फेमा में शिकायतकर्ता की भूमिका निभाई, वही पीएमएलए की धारा 19 के तहत रीजन टू बिलीव कैसे बना सकता है। इसे अपने मामले का जज बताते हुए कहा गया कि पूर्वाग्रहग्रस्त अधिकारी से निष्पक्ष संतुष्टि संभव नहीं। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद मामला सोमवार दोपहर के लिए टाल दिया। फिलहाल अरोड़ा को राहत नहीं मिली है। गौरतलब है कि अरोड़ा के खिलाफ गुरुग्राम में केस दर्ज हुआ था।  

मौसम ने ली करवट: बारिश के बाद हरियाणा में अब हीटवेव का खतरा, अलर्ट जारी

हिसार. प्रदेश में हुई बारिश के बाद अब आज से मौसम साफ रहेगा। मौसम विभाग की ओर से लू का येलो अलर्ट जारी किया गया है। यह चेतावनी 21 मई तक प्रभावी रहेगी। अब 16 मई से मौसम साफ रहेगा और उसके साथ ही लू चलने का यलो अलर्ट भी जारी किया गया है। इससे तापमान के फिर से बढ़ने की संभावना है। लू की चेतावनी 21 मई तक रहेगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण वीरवार को वर्षा हुई। शुक्रवार को दिन के समय धूल भरी हवाएं चली, लेकिन मौसम में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। दिन के समय धूप तेज होने के कारण अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। अब मौसम साफ होने के कारण लू चल सकती है। विज्ञानियों ने इस दौरान लू से बचने और जरूरी काम को समय से करने की सलाह दी है। पारा रहेगा 39-42 डिग्री सेल्सियस हरियाणा, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में दिन के समय तापमान 39-42 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। 16 और 17 मई को तेज गर्म हवाएं चलने की संभावना है, जबकि शाम या रात में कुछ जगहों पर धूलभरी आंधी और हल्की बारिश राहत दे सकती है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी और दिल्ली में मौसम विभाग ने तेज हवाओं और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 80 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

आय से अधिक संपत्ति मामले में हड़कंप, ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर पर शिकंजा

पटना बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त मुहिम के तहत शनिवार सुबह जमुई जिले में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम ने ग्रामीण कार्य प्रमंडल, झाझा में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के चार ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी। सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई से विभागीय महकमे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी EOU की अलग-अलग टीमों ने जमुई शहर के केकेएम कॉलेज के समीप स्थित किराये के मकान, झाझा स्थित कार्यालय समेत चार स्थानों को एक साथ घेर लिया। पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में चल रही इस कार्रवाई में दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश और संपत्ति से जुड़े कागजातों की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज सूत्रों के अनुसार कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्रारंभिक जांच में करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह संपत्ति उनकी वैध आय से लगभग 81.5 प्रतिशत अधिक है, जिसने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। कोर्ट से वारंट मिलने के बाद कार्रवाई बताया जा रहा है कि विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी वारंट मिलने के बाद EOU ने सुनियोजित तरीके से यह कार्रवाई शुरू की। तलाशी अभियान के दौरान बैंक लॉकर, जमीन खरीद-बिक्री के दस्तावेज, बीमा निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है। कई बड़े खुलासों की संभावना आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद तत्काल कानूनी कार्रवाई की गई। फिलहाल सभी ठिकानों पर तलाशी जारी है और कार्रवाई पूरी होने के बाद कई बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। इस हाईप्रोफाइल छापेमारी के बाद ग्रामीण कार्य विभाग समेत प्रशासनिक गलियारों में दिनभर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।  

सिर पर दुपट्टा, हाथ में कड़ा… Rupi Gill ने कान्स में दिखाया पंजाब की संस्कृति का खूबसूरत रंग

चंडीगढ़  कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 की शुरुआत के साथ ही फ्रेंच रिवेरा का रेड कार्पेट भारतीय सितारों की चमक से जगमगा उठा है। आलिया भट्ट, तारा सुतारिया और पूजा बत्रा जैसी हस्तियों ने अपनी मौजूदगी से माहौल ग्लैमरस बना दिया है, लेकिन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा एक नए चेहरे की हो रही है। व्हाइट आइवरी सूट और डायमंड-एमराल्ड ज्वेलरी में सजी यह खूबसूरत हसीना हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। यह पंजाबी मॉडल और एक्ट्रेस रूपी गिल हैं, जिन्होंने अपने कान्स डेब्यू से ही स्टाइल और एलिगेंस का नया ट्रेंड सेट कर दिया है। कौन है रूपी गिल? पंजाबी सिनेमा की उभरती हुई एक्ट्रेस रूपी गिल का पूरा नाम रूपिंदर कौर गिल है। 28 साल की रूपी ने अपने करियर की शुरुआत करण औजला के लोकप्रिय गाने 'यारियां च फिक' के म्यूजिक वीडियो से की थी। इसके बाद उन्होंने 2018 में पंजाबी फिल्म 'अश्के' से अपना फीचर फिल्म डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने नूर नाम का किरदार निभाया था। उन्हें पीटीसी पंजाबी फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस कैटेगरी में नामांकन भी मिला। इसके बाद उन्होंने “मां दा लाडला”, “परिंदा पार गया”, “जट्ट नू चुड़ैल टकरी”, “बीबी रजनी” और “मझाइल” जैसी कई फिल्मों में अकाम किया। रूपी जल्द ही एमी विर्क के साथ फिल्म “चढ़दी कला” में नजर आने वाली हैं, जो 29 मई को रिलीज होगी। क्यों खास था रुपी गिल का लुक? रेड कॉर्पेट के लिए रूपी गिल व्हाइट आइवरी कलर का देसी आउटफिट चुना, जो सादगी और शालीनता का सुंदर मेल था। सिर पर रखा दुपट्टा और हाथ में पहना कड़ा उनके लुक को पूरी तरह पारंपरिक टच दे रहा था। अपने इस एथनिक अवतार को रॉयल टच देने के लिए उन्होंने डायमंड और एमराल्ड ज्वेलरी कैरी की। उन्हें ड्रेस के बाजू पर पंजाबी भाषा में 'चढ़दी कला' लिखा हुआ था। कैमरों की चमक के बीच रूपी की मुस्कान और ग्रेस ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और फैंस उन्हें 'नई ग्लोबल पंजाबी सेंसेशन' कह रहे हैं। कान्स 2026 में जहां कई सितारे अपनी चमक बिखेर रहे हैं, वहीं रूपी गिल ने अपने पहले ही डेब्यू से साबित कर दिया कि असली स्टारडम सिर्फ नाम से नहीं, बल्कि स्टाइल और आत्मविश्वास से बनता है।

डेंगू के बढ़ते खतरे से अमृतसर में चिंता, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी

अमृतसर. बरसाती मौसम से पहले ही अमृतसर में डेंगू के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग एक्शन मोड में आ गया है। पंजाब सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत सिविल सर्जन डॉ. सतिंदरजीत सिंह बजाज द्वारा “हर शुक्रवार डेंगू ते वार” मुहिम की शुरूआत करते हुए टीमों को शहर के विभिन्न हाट-स्पॉट क्षेत्रों की ओर रवाना किया गया। ये टीमें शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में एंटी लारवा गतिविधियों, फॉगिंग, स्प्रे के साथ-साथ लोगो को जागरूक भी करेंगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जून माह में डेंगू का डंक गंभीर रूप धारण कर सकता है इसलिए मई माह से ही तैयारियां तेज कर ली गई हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि बारिश के दौरान पानी जमा होना आम बात है लेकिन यही स्थान मच्छरों के पनपने के केंद्र बन जाते हैं। यदि लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो हालात बिगड़ सकते हैं। इसलिए हर घर की जिम्मेदारी बनती है कि कूलरों, टंकियों, गमलों और छतों पर पड़े बेकार सामान में पानी जमा न होने दिया जाए। डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत इलाज करवाएं : डॉ. हरजोत कौर जिला एपिडैमियोलॉजिस्ट डॉ. हरजोत कौर ने बताया कि डेंगू एक वायरल बुखार है जो एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टियां तथा नाक या मसूड़ों से खून आना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में मुफ्त जांच और इलाज करवाना चाहिए। पिछले वर्ष जिले में आए थे डेंगू के 69 मामले पिछले वर्ष जिले में डेंगू के 69 मामले सामने आए थे और 11 स्थानों को हॉटस्पॉट घोषित किया गया था। इस बार स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। इससे पहले आशा वर्करों और पैरामैडीकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया ताकि जमीनी स्तर पर अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। डेंगू से बचाव के लिए क्या करें? – कूलर, टंकी और गमलों में पानी जमा न होने दें। – सप्ताह में एक दिन पानी वाले बर्तनों की सफाई करें। – पूरी बाजू वाले कपड़े पहनें। – मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल करें।

DIOS ने जारी किए आदेश, आकस्मिक अनुमति के बिना शिक्षक नहीं जा सकेंगे बाहर

लखनऊ माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मी जून-जुलाई में जिला मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। इस दौरान होने वाली भर्ती परीक्षाओं के कारण शिक्षकों के जिला मुख्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी। जिला स्तर पर डीआईओएस द्वारा इसके आदेश जारी किए जा रहे हैं। जून-जुलाई में लेखपाल भर्ती लिखित परीक्षा, पुलिस भर्ती, जीआईसी प्रवक्ता, बीएड परीक्षा, यूपीटेट समेत आधा दर्जन से अधिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही जनगणना का भी भौतिक काम शुरू होने वाला है। ऐसे में ये शिक्षक गर्मी की छुट्टियों का भी लाभ नहीं उठा सकेंगे। डीआईओएस की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि आकस्मिक व वैध कारण होने पर ही जिला विद्यालय निरीक्षक की अनुमति से वे जिला मुख्यालय से बाहर जा सकेंगे। इसके लिए उन्हें लिखित अनुमति लेनी होगी। वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. महेंद्र देव ने कहा कि परीक्षा कराने के लिए अनुभवी शिक्षकों की जरूरत होती है। लिहाजा स्कूलों के शिक्षक व स्टाफ को ही इसमें ड्यूटी लगाई जाती है। कक्ष निरीक्षक बनाया जाता है ताकि किसी प्रकार की कोई समस्या न हो।   माध्यमिक के दो अपर शिक्षा निदेशक के कार्यक्षेत्र में बदलाव माध्यमिक शिक्षा विभाग ने समूह क श्रेणी के दो अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। विभाग के संयुक्त सचिव संदीप परमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) सुरेंद्र कुमार तिवारी को अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) के पद पर तैनात किया गया है। वहीं अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) मनोज कुमार द्विवेदी को अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) बनाया गया है। इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करके इसका प्रमाण शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।   आकांक्षी जिलों के शिक्षक तबादले के लिए पहुंचे निदेशालय प्रदेश के आकांक्षी जिलों के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों ने अपने साथ दोहरा व्यवहार करने और तबादले का लाभ न देने का आरोप लगाया है। अपने तबादले के लिए कई जिलों के शिक्षक शुक्रवार को बेसिक से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के चक्कर काटते रहे लेकिन उन्हें कोई प्रभावी आश्वासन नहीं मिला है। शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2018 और 2020 में इन जिलों के तबादले पर रोक लगा दी गई थी। 2023 में मात्र 10 फीसदी शिक्षकों के ही तबादले हुए। इसमें अधिक भारांक वाले शिक्षकों का ही तबादला हुआ। वरिष्ठ शिक्षक इससे वंचित हैं। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा नियमावली के तहत वरिष्ठता के आधार पर एक से दूसरे जिले में तबादला किया जाए। इसमें भारांक की भेदभावपूर्ण नीति को समाप्त किया जाए। वहीं, इन जिलों में लगी अघोषित रोक को तत्काल हटाया जाए ताकि हमारे परिवार को राहत मिल सके। शिक्षकों ने इस गर्मी की छुट्टी में इस आधार पर जल्द तबादला प्रक्रिया पूरी करने की मांग उठाई।  

पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद सार्वजनिक वाहनों ने बढ़ाया किराया, यात्रियों में नाराजगी

 पटना पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में वृद्धि के बाद अब सार्वजनिक वाहन चालक मनमाने ढंग से किराया वसूल रहे हैं। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पटना जंक्शन से बेली रोड से सगुना मोड़ या अन्य जगह जाने के लिए किराये में 15 से 20 रुपये तक अधिक वसूला जा रहा है। शनिवार सुबह आशियाना मोड़ निवासी पप्पू कुमार ने बताया कि वह पटना जंक्शन से आशियाना मोड़ तक आए तो उनसे 50 रुपया किराया वसूल लिया गया। यह 20 रुपया अधिक है। पूछने पर ऑटो चालक ने कहा कि पेट्रो उत्पादों की कीमतों में वृद्ध के कारण ऐसा हो रहा है। इसी तरह की शिकायत गोला रोड निवासी आशुतोष कुमार ने भी की। उन्होंने कहा कि उनसे 15 रुपया किराया अधिक लिया गया। यात्रियों ने कहा कि प्रशासन से अपील है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले। पटना जिला प्रशासन ने क्या कहा? इधर, इस मामले में पटना जिला प्रशासन की ओर कहा गया कि विभिन्न माध्यमों से सूचना मिल रही है कि टेम्पू, ऑटो और अन्य सार्वजनिक वाहनों का किराया मनमाने तरीके से बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि प्रमंडल-स्तरीय भाड़ा निर्धारण समिति की अनुमति के बिना यात्री किराया बढ़ाना पूरी तरह अवैध है। Bihar News: निशांत को वैशाली, विजय सिन्हा को गयाजी की कमान; जानिए कौन-किस जिले के प्रभारी मंत्री बने अधिक किराया वसूलने पर कार्रवाई प्रशासन के अनुसार, टेम्पू, ऑटो एवं नगर सेवा बसों के भाड़े में किसी भी प्रकार की वृद्धि सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बिना नहीं की जा सकती। यदि कोई वाहन चालक या संचालक निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए अधिक किराया वसूलता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित किराया ही दें और अधिक वसूली की शिकायत संबंधित अधिकारियों को तुरंत उपलब्ध कराएं

जमीन घोटाला मामले में Robert Vadra को राहत, अदालत ने मंजूर की बेल

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम के शिकोहपुर लैंड डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहत मिल गई है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।  रॉबर्ट वाड्रा बुधवार को खुद अदालत में पेश हुए थे. अदालत में पेशी के बाद उन्हें नियमित प्रक्रिया के तहत जमानत दे दी गई. कानूनी जानकारों के मुताबिक, किसी भी आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में पेश होकर जमानत लेना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है।  ‘मैं निडर हूं, ईडी को झेलना है’ कोर्ट से मिली जमानत के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, ‘मैं निडर हूं. मैं डरता नहीं हूं. अब तक ईडी को झेलना है, क्योंकि वह तो सरकार के इशारे पर चलती है।  क्या है पूरा मामला? यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़ा है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है. ईडी ने 17 जुलाई 2025 को इस मामले में रॉबर्ट वाड्रा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।  इससे पहले पिछली सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने वाड्रा को कोई अंतरिम राहत नहीं दी थी और उन्हें निचली अदालत में पेश होने के लिए कहा था. मामले की सुनवाई के दौरान वाड्रा की ओर से पेश वकील ने दलील दी थी कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं बनता. वाड्रा के वकील ने अदालत से यह भी कहा था कि ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया जाना चाहिए. हालांकि अदालत ने 2 अगस्त 2025 को वाड्रा सहित 10 अन्य आरोपियों को प्री-समन जारी किए थे।  ईडी का आरोप है कि शिकोहपुर भूमि सौदे में वित्तीय अनियमितताएं हुईं और इसी से जुड़े लेन-देन की जांच मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से की जा रही है. मामले में आगे की सुनवाई अब राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी।