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यूपी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा: अयोध्या-काशी के बाद अब ‘शक्ति चक्र’ बनेगा नया आकर्षण

लखनऊ  अयोध्या, काशी, मथुरा जैसे सनातन के प्रतीक स्थलों के सहारे धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर सर्वाधिक पर्यटकों की आमद के साथ चमक रहा उत्तर प्रदेश अब प्रमुख मंदिरों के साथ अल्पज्ञात मंदिरों को जोड़कर नये आकर्षण विकसित करने की भी तैयारी कर रहा है। इसके तहत ‘शक्ति चक्र’ के नाम से माता के मंदिरों का एक नया विशेष पर्यटन परिपथ (सर्किट) विकसित किया जाएगा। इसमें राज्य के उन 31 जिलों के माता के मंदिरों के शामिल किया गया है, जो अन्य राज्यों के सीमावर्ती हैं। पहले चरण में विभाग इन स्थलों पर पर्यटन विकास करा रहा है। इसके बाद इसे ‘शक्ति चक्र’ के रूप में प्रचारित किया जाएगा। प्रस्तावित शक्ति चक्र में उत्तर प्रदेश के उन जिलों को शामिल किया गया है, जो अन्य राज्यों की सीमाओं से सटे हुए हैं। इनमें सहारनपुर स्थित शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ के साथ-साथ बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, मीरजापुर, प्रयागराज, बांदा, झांसी, ललितपुर, जालौन, इटावा, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद और शामली जैसे जिलों के प्रमुख माता मंदिर लिए गए हैं। पर्यटन विभाग के अनुसार, इस परिपथ में शामिल कई मंदिर अभी तक व्यापक रूप से प्रसिद्ध नहीं हैं। योजना के पहले चरण में चयनित मंदिरों और उनके आसपास के क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर करना, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, पार्किंग और पर्यटक सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। दूसरे चरण में इन सभी स्थलों को एकीकृत कर ‘शक्ति चक्र’ के रूप में व्यापक स्तर पर प्रचारित करने की योजना है। इसके लिए डिजिटल माध्यमों, पर्यटन मेलों और धार्मिक आयोजनों के जरिए देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जाएगा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘शक्ति चक्र’ के रूप में माता मंदिरों की एक विशेष पर्यटन श्रृंखला विकसित होगी। हमारा प्रयास है कि अब तक कम प्रसिद्ध रहे शक्तिपीठों और देवी स्थलों को विकसित कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाए। जिस प्रकार अयोध्या, वाराणसी, नैमिषारण्य जैसे प्रमुख स्थलों के लिए टूर पैकेज संचालित हैं, उसी तरह इसके लिए भी योजनाएं बनाई जाएंगीं। यह पहल स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगी। स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प और परंपराओं को भी इससे नया मंच मिलेगा। शक्ति चक्र में शामिल मंदिर शाकुम्भरी देवी शक्तिपीठ सहारनपुर, रूक्मिणी गला माता मंदिर बिजनौर, काली माता मंदिर लालबाग मुरादाबाद, ज्वाला देवी सिद्धपीठ बरेली, गूंगा देवी मंदिर पीलीभीत, काली माता मंदिर लखीमपुर खीरी, मां गुल्लावीर मंदिर बहराइच, श्रीराम जानकी दुर्गा धाम सिद्धार्थनगर, मां दुर्गा मंदिर बलिया, सामिया माई मंदिर गाजीपुर, गुरसराय वाली माता मंदिर झांसी, अक्षरा देवी मंदिर जालौन, मां ब्रह्माणी मंदिर इटावा, देवी मंदिर कैराना शामली, जुआदेवी मंदिर बलरामपुर, करमैल माता मंदिर देवरिया, धाकम माता मंदिर आगरा, देवा माता मंदिर ललितपुर, काली मंदिर रामपुर, सीता माता मंदिर श्रावस्ती, चांचाई माता मंदिर महाराजगंज, हड़हवा मंदिर कुशीनगर, काली मंदिर चंदौली, तारा मंदिर मीरजापुर, इंद्री धाम मंदिर प्रयागराज, मां सिंहवाहिनी देवी मंदिर बांदा, काली माता मंदिर महोबा, प्राचीन देवी मंदिर मथुरा, चामुंडा माता मंदिर अलीगढ़, मां भूड़ावाली देवी मंदिर गौतमबुद्धनगर और चुकाय वाली माता मंदिर गाजियाबाद।  

लखनऊ में बिजली उपभोक्ता परिषद की मांग, स्मार्ट मीटर विवाद को एजेंडे में शामिल करने की अपील

 लखनऊ  प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी राज्य सलाहकार समिति की 18 मई को बैठक बुलाई गई है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार की अध्यक्षता में हाल ही में गठित समिति की पहली बैठक में विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की है। विद्युत अधिनियम-2003 के तहत गठित राज्य सलाहकार समिति में राज्य सरकार के ऊर्जा, खाद्य, कृषि, आईआईडीसी व एमएसएमई विभाग के अपर मुख्य सचिव के साथ ही पावर कॉरपोरेशन, ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन व मध्यांचल डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक सहित उपभोक्ता व अन्य संगठनों के प्रतिनिधि आदि रहते हैं। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने समिति के सदस्य होने के नाते आयोग के अध्यक्ष को विस्तृत प्रस्ताव भेज कहा है कि वर्तमान में स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को भी आयोग के मुख्यालय में होने वाली बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाए। वर्मा का कहना है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन इस संबंध में विद्युत अधिनियम का उल्लंघन कर मनमानी कर रहा है। लगभग 75 लाख उपभोक्ताओं के कनेक्शन बिना उनकी सहमति के पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में कर दिए गए हैं। इनमें जिन 67 लाख से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं उनमें लगभग 43 लाख एक किलोवाट जबकि 24 लाख दो किलोवाट के कनेक्शन हैं। रिचार्ज के बाद स्वतः कनेक्शन न जुड़ने सहित अन्य तकनीकी दिक्कतों के चलते प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर व्यापक जन आक्रोश एवं विरोध की स्थिति बनी हुई है। वर्मा ने उपभोक्ताओं से आंदोलन शांतिपूर्ण करने की अपील करते हुए कहा कि समिति में चर्चा से उनके हित में ठोस निर्णय निकल सकता है। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जब उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर पहले से ही लगभग 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस निकल रहा है तब किसी भी तरह से बिजली की दरों में बढ़ोतरी का भी कोई आचित्य नहीं है।

पटना से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज, मंत्रिमंडल विस्तार से पहले अहम बैठकों का दौर जारी

पटना  बिहार की राजनीति में हलचल तेज है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल विस्तार से पहले दूसरी बार दिल्ली दौरे पर हैं। रविवार को उनकी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और कई केंद्रीय मंत्रियों से अहम मुलाकातें तय हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण बैठक अमित शाह के साथ मानी जा रही है। 6 मई को प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार से पहले यह दौरा निर्णायक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री के साथ बैठक में मंत्रिमंडल के अंतिम स्वरूप पर मुहर लग सकती है। दिनभर बैठकों का मैराथन दिल्ली में मुख्यमंत्री का पूरा दिन बैठकों से भरा रहेगा। सुबह 10:15 बजे वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इसके बाद 11 बजे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिले।र 11:30 बजे जीतन राम मांझी से मुलाकात निर्धारित है। दोपहर 1 बजे गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, शाम 6 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और 6:30 बजे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से उनकी बैठक होगी। मंत्रिमंडल विस्तार पर क्या संकेत? राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बिहार में भाजपा कोटे से 16 मंत्री बनाए जाने की तैयारी है। इनमें 13 पुराने चेहरे बरकरार रह सकते हैं, जबकि 3 नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा है। इन नए नामों को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है। जदयू खेमे में बड़े बदलाव के संकेत कम हैं, लेकिन वहां से भी 2–3 नए चेहरों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। एनडीए के अन्य घटक दलों में भी लगभग नाम तय माने जा रहे हैं। नीतीश से मुलाकात के बाद दिल्ली रवाना दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच मंत्रिमंडल के फॉर्मूले पर चर्चा हुई। यह वीडियो भी देखें सादगी से शपथ, विस्तार होगा भव्य सूत्रों के अनुसार, हालिया शपथ ग्रहण समारोह सादगी से संपन्न हुआ था, लेकिन अब मंत्रिमंडल विस्तार को भव्य रूप देने की तैयारी है। संभावना है कि इस कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता शामिल हो सकते हैं। फिलहाल, सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा कोटे से वे तीन नए चेहरे कौन होंगे, जो बिहार की सियासत में नई भूमिका में नजर आएंगे।

रायपुर में IPL का रोमांच, आज से मिलेंगी मैच की टिकटें

रायपुर क्रिकेटर लवर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. रायपुर के शहीद वीर नारायण अंतराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में इस साल दो आईपीएल मैच होने वाले हैं. पहला मैच रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू और मुंबई इंडियंस के बीच होने वाला है. इस मैच के टिकटों की ऑनलाइन बिक्री आज से https://shop.royalchallengers.com/ticket पर शुरू होने वाली है. आरबीसी ऑफिशियल्स की ओर से बताया गया कि टिकट केवल आधिकारिक आरसीबी वेबसाइट और ऐप पर उपलब्ध हैं. अनौपचारिक प्लेटफॉर्म या वेबसाइटों को टिकट बेचने का दावा करने वाले लोगों से बचने, आधिकारिक वेबसाइट और ऐप पर निर्भर रहने की सलाह दी गई है. एम-टिकट विवरण एम-टिकट में महत्वपूर्ण विवरण जैसे प्रवेश द्वार, आंतरिक द्वार, स्टैंड, पंक्ति और सीट नंबर शामिल होंगे. स्टेडियम के प्रवेश द्वार को खोजने के लिए, स्टेडियम मैप और स्टैंड इंडेक को देख सकते हैं. वहीं बाहर आने के लिए उन्हें इंतजार नहीं करना चाहिए. मैप में स्टैंड नाम, पार्किंग जोन, रैंप, द्वार, मेडिकल कमांड सेंटर और एम्बुलेंस स्थान शामिल हैं, जो आपको आसानी से नेविगेट करने में मदद करेंगे. स्टेडियम पहुंचने से पहले अपने स्टैंड और संबंधित प्रवेश द्वार के डिटेल्स की जांच कर लें.   बता दें कि 10 मई को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) vs मुंबई इंडियंस और 13 मई को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु vs कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मुकाबला खेला जाएगा. दोनों मैच शाम 7:30 बजे से शुरू होंगे. अब तक अपडेट के मुताबिक आरसीबी की टीम 8 मई को रायपुर पहुंचेगी और यहां 6 दिन तक रहेगी. टीम मैदान पर प्रैक्टिस भी करेगी. मुंबई इंडियंस की टीम भी 8 मई के बाद राजधानी पहुंचने की संभावना है. 2 हजार का हो सकता सबसे सस्ता टिकट टिकट आरसीबी की आधिकारिक वेबसाइट से ही ऑनलाइन बुक किए जाएंगे। सबसे सस्ती टिकट ₹2000 की होगी। इसके अलावा ₹2500, ₹3500, ₹5000 और ₹8000 तक की कैटेगरी में होगी। इसके अलावा प्लैटिनम सीटों के सामने लगे कांच के पैनल हटा दिए गए हैं। अब दर्शक खिलाड़ियों को बिना किसी रुकावट के और करीब से देख सकेंगे।

करनाल के इंडस्ट्रियलिस्ट्स का सरकार को सुझाव: ‘मेक इन हरियाणा 2026’ में संपदाओं के एकीकरण पर जोर

करनाल. हरियाणा सरकार द्वारा आगामी मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति- 2026 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य को औद्योगिक केंद्र बनाने के विजन के साथ तैयार किए जा रहे। इस मसौदे पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। इसी कड़ी में करनाल कृषि उपकरण निर्माता संघ (पंजीकृत) काइमा और औद्योगिक विकास निगम कल्याण संघ ने सरकार को महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव भेजकर औद्योगिक संपदाओं के प्रबंधन में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने की अपील की है। नीति के दायरे को व्यापक बनाने पर जोर काइमा के अध्यक्ष मनीष गाबा और औद्योगिक विकास निगम कल्याण संघ के अध्यक्ष राज बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि सरकार की प्रस्तावित पहल स्वागत योग्य है, लेकिन इसके लाभ का दायरा केवल उद्योग विभाग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, औद्योगिक नीति के खंड 14.4.6 में उन संपदाओं को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, जो पूर्व में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की गई थीं और अब हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड द्वारा अधिग्रहित या हस्तांतरित कर ली गई हैं। आइडीसी और एचएसवीपी आवंटियों की साझा कठिनाइयां एसोसिएशन के महासचिव अक्षय कटारिया द्वारा दिए गए सुझावों में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में उद्योग विभाग द्वारा विकसित औद्योगिक विकास कालोनी और एचएसवीपी से हस्तांतरित संपदाएं एचएसआइआइडीसी की संपदा प्रबंधन प्रक्रिया के अधीन आती हैं। इन संपदाओं के मालिकों को अपने आवंटन पत्र की शर्तों और औद्योगिक प्रबंधन को लेकर कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यदि नई नीति में एचएसवीपी द्वारा विकसित क्षेत्रों को भी आईडीसी के समान श्रेणी में शामिल किया जाता है, तो सैकड़ों उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी और प्रशासनिक बाधाएं दूर होंगी। नई नीति से औद्योगिक विकास को लगेंगे पंख उद्यमियों का मानना है कि मेक इन हरियाणा नीति का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है जब सभी औद्योगिक क्लस्टर एक समान नियमों के तहत काम करें। यह है संघ की मांग उद्योग विभाग द्वारा विकसित आइडीसी को उनके आवंटन पत्र की मूल शर्तों के तहत नीति में जगह मिले। एचएसआइआइडीसी द्वारा अधिग्रहित पुरानी संपदाओं के लिए नियम सरल किए जाएं। प्रस्तावित नीति निवेश और रोजगार के साथ-साथ ईज आफ डूइंग बिजनेस के मूल मंत्र पर आधारित हो। बता दें कि सरकार ने नीति का मसौदा सार्वजनिक कर उद्योगपतियों से इनपुट मांगे हैं। करनाल के इन प्रमुख औद्योगिक संघों द्वारा दिए गए सुझावों पर अब राज्य स्तर पर चर्चा होने की उम्मीद है। यदि सरकार इन सुझावों को स्वीकार करती है, तो यह प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

सेना प्रमुख और रक्षा सचिव की सैलरी में कटौती, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला रिटायर्ड मेजर की याचिका पर

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक रिटायर्ड मेजर की पेंशन के मामले में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह पर ही 2 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि यह रकम दोनों की सैलरी से काटकर याचिकाकर्ता को दी जाए। रिपोर्ट के मुताबिक सेवा के दौरान ही मेजर को 24 सर्जरी करवानी पड़ी थी। इसके अलावा उनकी किडनी डैमेज हो गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक पुणे के रहने वाले मेजर राजदीप दिनकर पांडेर (रिटायर्ड) साल 2012 में भारतीय सेना में कमीशन हुए थे। उस समय वह एकदम फिट थे। उन्हें लद्दाख में ऊंचाई वाले इलाके में पोस्टिंग दी गई। सेवा के पांच साल के बाद वह बुरी तरह बीमार हो गए। इसके बाद दिल्ली छावनी में उन्हें सिक लीव मेडिकल बोर्ट के सामने पेश किया गया। जांच में पता चला कि उन्हें 'सिस्टाइटिस सिस्टिका ग्लैंडुलरिस ' है। इसमें मत्रूशय में छोटी-छोटी गांठें बन जाती हैं। अकसर पेशाब में संक्रमण की वजह से यह होता है। इसके बदा मेजर पंडेर की सर्जरी हुई और उन्हें 'लो मेडिकल कैटिगरी' में डाल दिया गया। 2022 में उन्हें पंचकूला में चंडीमंदिर वेस्टर्न कमांड हॉस्पिटल की सिफारिश पर लो मेडिकल कैटिगरी में रखते हुए ही रिलीज कर दिया गया जबकि वह 15 फीसदी तक दिव्यांग हो गए थे। उन्होंने दिव्यांग पेंशन के लिए आवेदन किया जिसे खारिज कर दिया गया। चंडीमंदिर आर्म्ड फोर्सेज ट्राइब्यूनल ने माना कि मेडिकल बोर्ड की सिफारिश पर कई बार उनकी सर्जरी हुई और सेवा के दौरान ही वह दिव्यांग हुए थे। बेंच ने कहा, हमें समझ नहीं आता कि जब सेवा के दौरान ही वह 15 फीसदी तक दिव्यांग हो गए थे तब उनको रिलीज करते हुए यह क्यों कहा गया कि यह सैन्य सेवा के दौरान नहीं हुई है। ट्राइब्यूनल ने ही 2008 के एक फैसले में कहा था कि जब किसी की सीरम क्रिएटनिन 1,13 है तो उसे 40 फीसदी दिव्यांगता की श्रेणी में रखा जाए। इस हिसाब से उन्हें 40 से 50 फीसदी की दिव्यांगता श्रेणी में ऱखा जा सकता था। ट्राइब्यूनल के आदेश के खिलाफ 2025 में केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में याचिका फाइल की थी जिसे खारिज कर दिया गया था। मेजर पंडेर ने रक्षा सचिव राजेश कुमार और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के खिलाफ कंटेंप्ट पिटीशन फाइल करके कहा कि उन्होंने हाई कोर्ट और ट्राइब्यूनल के आदेश का पालन नहीं किया है। 30 अप्रैल को जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा कि आखिरी सुनवाई के दौरान भी कोई जवाब नहीं दिया गया है इसलिए 2 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। यह रकम रक्षा सचिव और सेना प्रमुख की सैलरी से काटकर डिमांड ड्राफ्ट के जरिए याचिकाकर्ता को दी जाए।

बिक्रमगंज की बिस्को इंडस्ट्रीज का अंत, 30 एकड़ का औद्योगिक परिसर खंडहर में तब्दील हुआ

 रोहतास  कभी बिक्रमगंज की पहचान और औद्योगिक शान रहा बिस्को इंडस्ट्रीज अब इतिहास बन चुका है। वर्षों से उपेक्षा और बदहाली झेल रहे इस प्रतिष्ठान को आखिरकार कबाड़ में बेच दिया गया। इसके साथ ही इसके दोबारा चालू होने की बची-खुची उम्मीद भी खत्म हो गई। करीब 30 एकड़ में फैला यह औद्योगिक परिसर कभी सैकड़ों लोगों को रोजगार देता था और इलाके की अर्थव्यवस्था की धुरी माना जाता था। आज यहां सिर्फ जर्जर इमारतें, बंद गोदाम और वीरानी नजर आती है। कभी वीआईपी ठहरते थे, अब खंडहर एक समय ऐसा था जब बिस्कोमान परिसर का निरीक्षण भवन वीआईपी मूवमेंट का केंद्र हुआ करता था। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से लेकर कई केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी यहां ठहर चुके हैं। 9 अप्रैल 1984 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने बिक्रमगंज अनुमंडल का उद्घाटन भी यहीं से किया था। लेकिन आज हालात यह हैं कि परिसर में जब्त ट्रक, पत्थर-गिट्टी और कबाड़ जमा है। कभी यहां जब्त शराब और मांस के विनष्टीकरण जैसी कार्रवाई भी की जाती थी, जिसे बाद में अधिकारियों की आपत्ति के बाद बंद करना पड़ा। आय के स्रोत बंद, हालत बदतर बिस्को इंडस्ट्रीज की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। पहले यहां चावल मिल, गोदाम किराया, ब्रान बिक्री और बिस्कोमान भवन से अच्छी आमदनी होती थी। लेकिन चावल मिल बंद होने से ब्रान उत्पादन ठप हो गया। भवन जर्जर होने के कारण यहां अब कोई ठहरता नहीं है। पहले जहां एफसीआई और एसएफसी समेत कई एजेंसियां गोदाम किराए पर लेती थीं। वहीं अब सिर्फ एक गोदाम एसएफसी को किराए पर है। वर्तमान में यहां सीमित स्तर पर केवल रासायनिक खाद की बिक्री हो रही है और महज 3–4 कर्मचारी बचे हैं। सरकारी उपेक्षा से बुझा उद्योग करीब आठ दशक पहले स्थापित यह राइस मिल अपने समय में अत्याधुनिक मानी जाती थी। बताया जाता है कि 1940 के दशक में जापानी तकनीक से इसकी शुरुआत हुई थी। हालांकि बिजली की कमी के कारण यह पूरी तरह स्वचालित रूप से संचालित नहीं हो सका और धीरे-धीरे बंद हो गया। 80 के दशक में सहकारिता नेता स्व. तपेश्वर सिंह के प्रयास से बिस्कोमान ने इसे अधिग्रहित किया। यहां कैटल फीड और साल्वेंट प्लांट जैसी परियोजनाओं की शुरुआत भी हुई, लेकिन उनके निधन के बाद योजनाएं अधूरी रह गईं और उद्योग लगातार गिरावट की ओर बढ़ता गया। हजारों रोजगार की उम्मीद टूटी अगर समय रहते इस उद्योग को पुनर्जीवित किया जाता, तो आज यहां करीब एक हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता था। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह सिर्फ एक फैक्ट्री का बंद होना नहीं, बल्कि पूरे इलाके की आर्थिक संभावनाओं का खत्म होना है। आज बिस्को इंडस्ट्रीज का कबाड़ में बिकना न सिर्फ एक औद्योगिक इकाई का अंत है, बल्कि बिक्रमगंज के स्वर्णिम औद्योगिक अतीत के अंतिम अध्याय का भी समापन है।  

रेलवे विकास योजना: भागलपुर में एफओबी, ड्रेनेज और रूट रिले सिस्टम से बदलेगा स्टेशन

भागलपुर  भागलपुर रेलवे स्टेशन में बड़े पैमाने पर यार्ड आधुनिकीकरण की शुरुआत हो गई है। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 और 3 के विस्तार के साथ ही फुटओवर ब्रिज (एफओबी) की सीढ़ियों को चौड़ा किया जा रहा है। एफओबी की एक सीढ़ी को तोड़कर उसके स्थान पर चौड़ी सीढ़ी का निर्माण किया जाएगा। हालांकि इस काम की शुरुआत अप्रैल में करने की योजना थी, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों के कारण देरी हुई। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि प्लेटफार्म के विस्तार और यार्ड आधुनिकीकरण का कार्य दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के लिए कुल 20 करोड़ रुपये की राशि भी मंजूर की जा चुकी है। मालदा एडीआरएम ने किया निरीक्षण शनिवार को मालदा एडीआरएम अमरेंद्र कुमार मौर्य अधिकारियों की टीम के साथ भागलपुर पहुंचे और निर्माणस्थल का निरीक्षण किया। यह उनके पद संभालने के बाद पहली बार निरीक्षण था। एडीआरएम ने कहा कि यार्ड का आधुनिकीकरण चरणबद्ध तरीके से होगा। प्लेटफार्म संख्या 2 और 3 का विस्तार कर 23 कोच तक लंबाई बढ़ाई जाएगी। स्टेशन का आधुनिकीकरण ट्रेनों की संचालन क्षमता और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाएगा। यह वीडियो भी देखें दो चरणों में होगा काम यार्ड और प्लेटफार्म के विस्तार का काम दो चरणों में पूरा किया जाएगा।     पहले चरण में: लोहिया पुल की ओर वाले एफओबी की सीढ़ियों की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी।     दूसरे चरण में: नाथनगर छोर वाली सीढ़ियों का काम शुरू होगा। इसके साथ ही प्लेटफार्मों को चौड़ा करने का काम भी धीरे-धीरे शुरू किया जाएगा। एफओबी की चौड़ाई बढ़ाने और प्लेटफार्म विस्तार से यात्रियों की आने-जाने में सुविधा होगी प्लेटफार्म विस्तार से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी वर्तमान में भागलपुर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2, 3, 5 और 6 की लंबाई कम है, जिससे बड़ी ट्रेनों को प्लेटफार्म 1 और 4 पर ही ठहराया जाता है। प्लेटफार्म दो-तीन के विस्तार और एफओबी की चौड़ाई बढ़ाने के बाद दो नंबर प्लेटफार्म की रेल लाइन को मेन ट्रैक में बदला जाएगा, जिससे ट्रेनें 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकेंगी। वर्तमान में ट्रेनें 30 किमी प्रति घंटे की गति से ही प्लेटफार्म पार कर पाती हैं। प्लेटफार्म का विस्तार करने के लिए स्वीच और प्लेटफार्म बदलने होंगे, जिससे स्टेशन में अधिक जगह मिलेगी और ट्रेनों की संचालन क्षमता बढ़ेगी। रूट रिले सिस्टम से ट्रेन संचालन होगा आसान भविष्य में भागलपुर स्टेशन पर रूट रिले सिस्टम की व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत सेंट्रलाइज पैनल से ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने के बाद, स्टेशन के पूर्वी और पश्चिमी पैनल की अलग-अलग मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। स्टेशन मास्टर एक ही पैनल से ट्रेन संचालन और शंटिंग का निर्णय ले सकेंगे। पुराने सिस्टम की जगह सिंगलिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लागू होगी। सेंट्रलाइज पैनल के लिए दो मंजिला भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए कुछ रेलवे क्वार्टर तोड़े जाएंगे। यह व्यवस्था भागलपुर-दुमका रेललाइन के दोहरीकरण से भी जोड़ी जाएगी। यार्ड परिसर में ड्रेनेज और नई लाइनों का विकास यार्ड में ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे बरसात में जल जमाव की समस्या खत्म होगी। इसके अलावा बड़हरवा से भागलपुर तक तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। यार्ड के भीतर तीन नए लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेट भी लगाए जाएंगे। सुरक्षा और दुर्घटना रोकने की दृष्टि से यह कार्य अहम माना जा रहा है। इस विकास योजना पर 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे, और राशि मंजूर भी हो चुकी है। माड्यूल होल्डिंग और पार्सल बुकिंग कार्यालय का स्थानांतरण मालदा एडीआरएम ने सर्कुलेटिंग एरिया में माड्यूल होल्डिंग एरिया का निरीक्षण किया। इसके लिए रिजर्वेशन टिकट बुकिंग केंद्र के सामने स्थान चिन्हित किया गया है। होल्डिंग एरिया के निर्माण के लिए रेलवे कर्मियों के क्वार्टर तोड़े जाएंगे, और पार्सल बुकिंग कार्यालय को होल्डिंग एरिया के बगल में शिफ्ट किया जाएगा। बुक किए गए पार्सलों को स्टेशन तक पहुंचाने के लिए लिंक रोड का निर्माण किया जाएगा। होल्डिंग एरिया से प्लेटफार्म तक जाने के लिए फुटओवर ब्रिज का निर्माण होगा। एडीआरएम ने कहा कि नक्शा मंजूर होने के बाद ही काम शुरू किया जाएगा। योजना के अनुसार, इस साल छठ पर्व से पहले कार्य शुरू हो पाएगा

शानदार उपलब्धि: वंदना शिशु शिक्षा निकेतन के विद्यार्थियों ने रचा सफलता का नया इतिहास

शानदार उपलब्धि: वंदना शिशु शिक्षा निकेतन के विद्यार्थियों ने रचा सफलता का नया इतिहास मनेन्द्रगढ़/एमसीबी वनांचल क्षेत्र जनकपुर स्थित वंदना शिशु शिक्षा निकेतन इंग्लिश हायर सेकेंडरी स्कूल का इस वर्ष बोर्ड परीक्षा परिणाम बेहद उत्कृष्ट और प्रशंसनीय रहा। विद्यालय के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जिससे पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। कक्षा 12वीं में नव्या गुप्ता ने 87% अंक हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया, वहीं अविनाश सोनी और गौरव कुशवाहा ने 73-73%, सिम्मी पांडे ने 72% और स्वाति गुप्ता ने 71% अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसी तरह कक्षा 10वीं में राजेश यादव ने 80% अंक लाकर विद्यालय का नाम रोशन किया, जबकि शैलेन्द्र अहिरवार (70%) और मीनाक्षी सिंह (65%) ने भी सराहनीय सफलता हासिल की। विशेष उल्लेखनीय बात यह रही कि इस वर्ष प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक रही, जो विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासित वातावरण और शिक्षकों के समर्पण को दर्शाता है। विद्यालय प्रबंधन ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर प्राचार्य श्रीमती नीरजा सिंह ने विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और शिक्षकों के मार्गदर्शन को इस सफलता का प्रमुख आधार बताया। अभिभावकों ने भी विद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए इस शानदार परिणाम पर हर्ष व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व आयोजित आंतरिक परीक्षाओं में भी शत-प्रतिशत परिणाम दर्ज किया गया था, जिसमें सभी सफल विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया तथा शिक्षकों के योगदान को भी विशेष रूप से सराहा गया। कुल मिलाकर, यह परिणाम न केवल विद्यालय के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया है।

कलम की आज़ादी ही लोकतंत्र की मजबूती : विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर अधिवक्ता संजय गुप्ता का संदेश

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अधिवक्ता संजय गुप्ता ने क्षेत्र के सभी पत्रकार बंधुओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का एक सशक्त और आधारभूत स्तंभ है, जो समाज को सही दिशा देने के साथ-साथ सत्य को उजागर करने और आमजन तक सटीक जानकारी पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य करती है।उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ और सशक्त लोकतंत्र के निर्माण में स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत अहम होती है। पत्रकार न केवल समाज की समस्याओं को उजागर करते हैं, बल्कि उनके समाधान की दिशा में भी जनजागरूकता लाने का कार्य करते हैं। यही कारण है कि पत्रकारिता को राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। अधिवक्ता संजय गुप्ता ने आगे कहा कि आज के दौर में पत्रकारों के समक्ष कई चुनौतियाँ हैं, बावजूद इसके वे निर्भीकता और ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, जो सराहनीय है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि निष्पक्ष, निर्भीक और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्रोत्साहित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।अंत में उन्होंने कहा कि "कलम की आज़ादी ही लोकतंत्र की मजबूती है", और इसी भावना के साथ हमें पत्रकारिता के मूल्यों को बनाए रखते हुए समाज और देश के हित में कार्य करना चाहिए।