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पंजाब में छात्रों के लिए नया विकल्प: PSEB ने लॉन्च किया ई-कॉमर्स पोर्टल, डायरेक्ट मिलेंगी किताबें

 चंडीगढ़  पंजाब में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 2026-27 शैक्षणिक सत्र से पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) निजी स्कूलों के पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को सीधे किताबें उपलब्ध कराएगा। इस पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए बोर्ड ने एक समर्पित ई-कॉमर्स पोर्टल और मोबाइल एप तैयार किया है, जिसके जरिए किताबों की खरीद और वितरण पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत छात्र और अभिभावक घर बैठे ही मोबाइल एप या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार किताबों का आर्डर दे सकेंगे। इसके साथ ही स्कूलों को कक्षा और विषयवार अपनी मांग डिजिटल रूप से अपलोड करनी होगी। प्रत्येक छात्र को अलग लागइन क्रेडेंशियल दिए जाएंगे, जिससे अभिभावक सीधे पोर्टल पर जाकर आर्डर प्लेस कर सकें और पूरी प्रक्रिया पर नजर रख सकें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किताबों की आपूर्ति में बिचौलियों की भूमिका खत्म करना, लागत को कम करना और समय पर किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। नई व्यवस्था में स्कूल केवल वितरण की जिम्मेदारी निभाएंगे और किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेंगे। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि छूट वाले प्रिंटेड बिल मूल्य से अधिक कोई राशि नहीं वसूली जाएगी, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा। पीएसईबी के चेयरमैन अमरपाल सिंह ने बताया कि इस पोर्टल को सुरक्षित ऑनलाइन पेमेंट गेटवे से जोड़ा गया है, जिससे लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ओवरचार्जिंग की कोई गुंजाइश न रहे और हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

रायपुर में छत्तीसगढ़ की दोहरी सफलता, फाइलेरिया और मलेरिया नियंत्रण में राज्य मॉडल की देशभर में हुई सराहना

रायपुर : राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की दोहरी उपलब्धि फाइलेरिया व मलेरिया नियंत्रण में राज्य मॉडल की देशभर में सराहना फाइलेरिया उन्मूलन में BIHAN मॉडल और ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ पहल को नवाचार व जनभागीदारी के लिए सराहना रायपुर जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। 30 अप्रैल और 01 मई 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित “National Summit on Innovation and Inclusivity – Best Practices Shaping India’s Future” में राज्य को फाइलेरिया और मलेरिया उन्मूलन के लिए अपनाई गई नवाचारी पहलों पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल राज्य की स्वास्थ्य रणनीतियों की प्रभावशीलता को रेखांकित करता है, बल्कि सामुदायिक भागीदारी आधारित मॉडल की सफलता का भी प्रमाण है। BIHAN मॉडल ने बदली तस्वीर, महिला समूह बने बदलाव की धुरी फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में BIHAN (स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन) से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। Mission Steering Group–Human Resource (MSG–HR) के अंतर्गत इस मॉडल को देश की सर्वश्रेष्ठ नवाचारी और समावेशी पहल के रूप में मान्यता मिली, जिसमें PCI India का तकनीकी सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान के दौरान महिलाओं ने घर-घर पहुंचकर न केवल दवा सेवन सुनिश्चित कराया, बल्कि समुदाय में व्याप्त भ्रांतियों को भी दूर किया। सामुदायिक बैठकों और जागरूकता गतिविधियों के जरिए लोगों में भरोसा कायम किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि दवा सेवन से इनकार करने वाले लगभग 74% लोगों को सहमति के लिए तैयार किया गया-जो इस मॉडल की सबसे बड़ी सफलता के रूप में उभरकर सामने आया। ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ ने दुर्गम क्षेत्रों में दिखाई प्रभावशीलता सम्मेलन में ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान को भी एक प्रभावी और परिणामोन्मुख पहल के रूप में विशेष सराहना मिली। बस्तर के दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में संचालित इस अभियान के तहत घर-घर स्क्रीनिंग, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) से समय पर जांच, त्वरित उपचार और Day-7 व Day-14 फॉलो-अप के माध्यम से पूर्ण इलाज सुनिश्चित किया गया। इस अभियान की खास उपलब्धि लक्षणहीन (Asymptomatic) मरीजों की पहचान रही, जिससे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में निर्णायक मदद मिली। इसके सकारात्मक परिणाम भी स्पष्ट रूप से सामने आए हैं- राज्य का API वर्ष 2019 में 1.97 से घटकर 2025 में 0.90 हो गया, जबकि बस्तर संभाग में यह 13.12 से घटकर 6.98 तक पहुंच गया। अन्य राज्यों के लिए प्रेरक मॉडल- राष्ट्रीय मंच पर उपस्थित विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने छत्तीसगढ़ के BIHAN आधारित सामुदायिक मॉडल और ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान को अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया। कम लागत में अधिक प्रभाव देने वाली ये पहलें यह साबित करती हैं कि जनभागीदारी और स्थानीय रणनीतियों के माध्यम से जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान संभव है। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी समुदाय आधारित, नवाचारयुक्त और क्षेत्र विशेष रणनीतियों को प्राथमिकता देते हुए जनस्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा

80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं उपार्जन के स्लॉट बुक, प्रदेश में लगातार बढ़ रहा आंकड़ा: CM यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में गेहूँ उपार्जन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। किसान भाइयों ने बड़ी संख्या में स्लॉट बुक किए हैं। अब तक 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ उपार्जन के लिए स्टॉल बुक हो चुके है। यह एक सकारात्मक संदेश है। स्टॉल बुकिंग का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के किसानों से गेहूँ उपार्जन करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। किसानों की सुविधा के लिए उपार्जन केन्द्रों पर सभी संभव व्यवस्थाएं की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूँ उपार्जन प्रक्रिया में व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के लिए आकस्मिक निरीक्षण लगातार चलता रहेगा और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। सभी मंत्री, विधायक और संबंधित अधिकारियों को उपार्जन प्रक्रिया में पूरी सक्रियता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने और किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए निर्देशित किया गया है। 23 मई तक गेहूं खरीदी की बढ़ी तारीख  न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उपज बेचने में हो रही परेशानी को देखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 23 मई कर दी है। इसके साथ ही खरीदी केंद्रों की क्षमता और सुविधाओं में भी इजाफा किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि जिन किसानों को अब तक स्लॉट नहीं मिल पाया है, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, ताकि वे अपनी फसल आसानी से बेच सकें। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी समयसीमा बढ़ाई गई थी, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होने के कारण दोबारा अवधि बढ़ानी पड़ी।  जिलों में बढ़ा रही तौल कांटों की संख्या  मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के लिए उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठक और कई अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की है। अब किसान जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय कर सकते हैं। इतना ही नहीं, किसानों को गेहूं की तौल के लिए इंतजार नहीं करना पड़े इसके लिए उपार्जन केन्द्रों में तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है। सरकार जिलों में और भी तौल कांटे बढ़ा रही है। सरकार ने चमक विहीन गेहूं की सीमा भी 50 प्रतिशत कर दी है। सूकड़े दाने की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक की गई है। क्षतिग्रत दानों की सीमा बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक की गई है। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन ,गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।  विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। सभी जिलों में लघु सीमांत के साथ ही मध्यम एवं बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बड़े एवं मध्यम वर्ग के एक लाख 60 हजार किसानों ने स्लॉट बुक कराया है। पूरे प्रदेश में स्लॉ्ट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। किसानों की सुविधा के लिए खरीदी के लिये प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। अभी तक प्रदेश मे समर्थन मूल्य् पर गेहूं उपार्जन के लिये 9.60 लाख किसानों द्वारा 57.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी न हो एवं उपज विक्रय के लिए इंतजार न करना पड़े इसके लिये किसानों को जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिये बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।  

हिंदूवादी नेताओं की हत्या और घरों पर ग्रेनेड हमले की साजिश रचने वाले दो आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ पाकिस्तानी अपराधी शहजाद भट्टी और आईएसआई के संपर्क में रहने वाले संदिग्ध आतंकी भारत में बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले थे। इन्होंने पांच हिंदूवादी नेताओं की गला रेतकर हत्या करने की साजिश रची थी। इन नेताओं के घरों पर ग्रेनेड से हमला करने की भी तैयारी में थे। एटीएस की जांच में इसका खुलासा हुआ है। अब एटीएस शुक्रवार से आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेकर और गहनता से पूछताछ करेगी। एटीएस ने 23 अप्रैल को नोएडा से बागपत के तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह अली खान व एटा के समीर को गिरफ्तार किया था। वर्तमान में तुषार मेरठ और समीर दिल्ली में रह रहा था। ये दोनों पाकिस्तानी अपराधी शजहाद भट्टी और आईएसआई एजेंट मेजर हमीद, मेजर इकबाल, मेजर अनवर, मोहम्मद हमाद बरकाती व आबिद जट के संपर्क में थे। उनके इशारे पर भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। एटीएस की जांच में सामने आया कि आरोपियों को शहजाद भट्टी ने हिंदूवादी नेता दक्ष चौधरी, अभिषेक ठाकुर, पिंकी चौधरी, युद्धि राणा और गौरव राजपूत की हत्या करने का टास्क दिया था। ये टास्क शहजाद ने आबिद जट के माध्यम से दिया था। ये भी कहा गया था कि इन सभी के घरों पर ग्रेनेड भी फेंकने हैं जिससे दहशत फैल सके। तीन लाख में करनी थीं पांच हत्याएं पाकिस्तानी हैंडलर्स ने तुषार और समीर को इन सभी की हत्या करने के लिए तीन लाख रुपये देने का वादा किया था। साथ ही उन्होंने दोनों को आश्वासन दिया था कि पासपोर्ट बनवाकर दुबई भेजा जाएगा। वहीं पर सेटल कर दिया जाएगा जिससे भारत की जांच एजेंसी उन तक नहीं पहुंच पाएंगी। एक्स मुस्लिमों को कॉन्फ्रेंस कॉल पर दी थी धमकी एटीएस की जांच में पता चला कि तुषार और समीर ने एक्स मुस्लिम इमरोज आलम, अंजली आर्या, समीर व सलीम वास्तिक को व्हाट्सएप व अन्य सोशल मीडिया के जरिये कॉल की थी। कॉल में कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये शहजाद भट्टी भी जुड़ा था। उसने इन सभी को धमकी दी थी। इससे संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग भी मिली हैं। छह दिन की मिली कस्टडी रिमांड आतंकी साजिश की तह तक पहुंचने के लिए एटीएस ने आरोपियों की रिमांड मांगी थी। एनआईए की विशेष अदालत में अर्जी दी थी। बृहस्पतिवार को अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश नीतू पाठक ने आरोपियों की छह दिन की कस्टडी रिमांड मंजूर की।  

यूपी सरकार की पहल: श्रमिक कल्याण योजनाओं का लोकार्पण और मुफ्त राशन उपलब्ध

लखनऊ राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को श्रमवीर गौरव समारोह 2026 का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रमिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। इस मौके पर सीएम ने श्रमिकों को प्रमाणपत्र और टूल किट देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित हुआ। इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि अटल आवासीय छात्रों को मेरिट सूची में स्थान हासिल करने पर बधाई। प्रधानाचार्यों को भी शुभकामनाएं। हमारा श्रमिक किसी भी मौसम में काम करता है। वह न रुकता है, न थकता है, न डिगता है। आपके पसीने की बूंद से धरती माता सोना उगलता है। जो श्रमिक दूसरे के घरों में इज्जत घर बनाते थे, उनकी इज्जत सड़कों पर दिखती थी। जो दूसरे के लिए अन्न उपजाते थे, उनके बच्चे खाने को परेशान थे। जो बड़े बड़े अस्पताल बनाते थे, उन्हें ही इलाज नहीं मिलता था। आज ऐसा नहीं है। श्रमिक भी सरकारी एजेंडे का हिस्सा बन सकता है, ये तभी संभव है जब संवेदनशील सरकार बनती है। आज भी फ्री में राशन उपलब्ध कराया जा रहा सीएम ने आगे कहा कि कोरोना कालखंड में सारे विपक्षी रातनेता रजाई तानकर घरों में छिप गए थे। उस समय केवल और केवल डबल इंजन सरकार थी। हम लोगों ने एक साथ 14 हजार बसें भेजीं। हमने कहा यहां पर कहीं का भी श्रमिक आए सबको फ्री में रहना और खाना देंगे। आज कोरोना के बाद भी सबको फ्री में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। पीएम मोदी ने श्रमिकों के लिए सामाजिक गारंटी की व्यवस्था की। उन्होंने कहा कि यूपी में श्रम एवं सेवायोजन मंत्रालय द्वारा बेहतर काम किया गया। आज गोरखपुर में 200 श्रमिकों के बेटियों की शादी खुद मंत्री उपस्थित रहकर उनकी आवभगत करेंगे। विधायक के घर की शादी में जाएं या न जाएं, लेकिन श्रमिकों की बेटियों की शादी में मंत्री खुद जा रहे हैं। आज यूपी के लोगों को यूपी के अंदर ही काम मिल रहा है। 9 वर्षों में 18 हजार से अधिक नए उद्योग लगे। 65 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। आज यूपी भारत का ग्रोथ इंजन बनकर खड़ा है। काम के बदले दाम देना पड़ेगा सीएम ने कहा कि पहले लोग काम करा लेते थे, पैसे देने के समय टरका देते थे। लेकिन, हमने कहा कि काम कराओगे तो काम के बदले दाम देना पड़ेगा। यदि कोई दाम देने में हीलाहवाली करेगा तो उसका इलाज सरकार करेगी। 80 लाख के आसपास लोगों को पांच लाख तक के निशुल्क इलाज की व्यवस्था की है। हमने अभी उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों का कुछ मानदेय बढ़ाया है। दुर्घटना में मृतक श्रमिकों के लिए पांच लाख का बीमा कवर देने जा रहे हैं। सबकी इज्जत की पूरी ठेकेदारी सरकार की- ब्रजेश पाठक डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि आज प्रदेश हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने देशी अंदाज में लोगों से संवाद किया। कहा कि आज पहिले से अच्छी व्यवस्था है कि नहीं। काम करै के बाद जौन गारी गुप्ता करत रहे, आज उईं डेरात हैं कि नहीं? तुम्हार इज्जत की पूरी ठेकेदारी सरकार की है। कौनो दिक्कत होए तो हमका लिख भेजेएव। पीएम मोदी ने श्रमिकों के पैर धोकर सम्मानित किया डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पहली बार 2019 के अर्द्ध कुंभ में पीएम मोदी ने खुद जमीन पर बैठकर श्रमिकों को कुर्सी पर बैठाकर उनके पैर धोकर सम्मानित किया। यह दृश्य हृदय को द्रवित करने वाला था। इसी तरह काशी विश्वनाथ धाम के शुभारंभ में पीएम मोदी ने गंगा स्नान करके सबसे पहले श्रमिकों का सम्मान किया। आप सबका बेहतर करना ही डबल इंजन की सरकार का प्रयास है। इस मौके पर मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि भाजपा सरकार ने श्रमिकों की जीवन बदला है। ये बात दुनिया में चर्चा का विषय है। सरकार का सपना है कि आज मजदूर का बेटा मजदूर ही नहीं बनेगा। मजदूर का बेटा डॉक्टर बनेगा, इंजीनियर बनेगा, अधिकारी बनेगा। अटल आवासीय विद्यालय में बच्चे बेहतर शिक्षा ले रहे हैं। प्रदेश के श्रमिकों को बाहर न जाना पड़े, यहीं पर उन्हें काम मिले ये प्रयास जारी है।  

फरार आरोपियों दिलीप और बबलू के खिलाफ बाढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई

पटना पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत दाहौर गांव में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात सोनू-मोनू गिरोह के सक्रिय सदस्यों के खिलाफ कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की है। बाढ़ एसडीपीओ रामकृष्ण के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस टीम ने दिलीप सिंह और बबलू सिंह के घर पहुंचकर न्यायालय के आदेश पर चौखट, किवाड़ समेत घरेलू सामान जब्त कर लिया। यह कार्रवाई बाढ़ थाना कांड संख्या 418/23 के तहत की गई है। फरार आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पुलिस के अनुसार, इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। पुलिस ने पहले ही दोनों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी थी, लेकिन आरोपियों ने कानून की अनदेखी की, जिसके बाद उनके घरों की कुर्की-जब्ती की गई। शराब के खिलाफ आवाज उठाने पर हुई थी फायरिंग एसडीपीओ रामकृष्ण ने बताया कि यह पूरा मामला शराब के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर हुई हिंसा से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, शराब पीने से मना करने पर अपराधियों ने फायरिंग की थी। इसी मामले में नामजद होने के बाद से ही दिलीप सिंह और बबलू सिंह फरार चल रहे थे। सोनू-मोनू गिरोह से जुड़े हैं आरोपी पुलिस ने बताया कि दिलीप और बबलू कुख्यात सोनू-मोनू गिरोह के सदस्य हैं। इन दोनों के खिलाफ पहले से दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं और क्षेत्र में इस गिरोह की काफी दहशत रही है। स्थानीय स्तर पर इस गिरोह को मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह के विरोधी गुट के रूप में भी देखा जाता रहा है। हालांकि, वर्तमान मामले में सोनू और मोनू की सीधी भूमिका को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच जारी एसडीपीओ ने बताया कि सूचक के आधार पर आरोपियों का संबंध इस गिरोह से बताया जा रहा है, लेकिन इस पूरे मामले में मास्टरमाइंड की भूमिका को लेकर गहन जांच की जा रही है। बाढ़ पुलिस का कहना है कि फरार अपराधियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। इस कार्रवाई के दौरान दाहौर गांव में पुलिस की मौजूदगी से अन्य अपराधियों में भी हड़कंप मच गया।  

नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग का मुख्यमंत्री आवास छोड़ा, 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट

पटना  बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास 1 अणे मार्ग खाली कर दिया। वे 7 सर्कुलर रोड स्थित अपने आवास में शिफ्ट हो गए। सुबह से ही सामान की शिफ्टिंग की जा रही थी। दोपहर में वे स्‍वयं भी पहुंच गए। नए आवास को फूलों से सजाया गया था, जहां बौद्ध भिक्षुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इससे पहले भी आंशिक शिफ्टिंग की जा चुकी थी। शिफ्टिंग के दौरान प्लास्टिक कुर्सियां, किताबें, बुक शेल्फ, अलमारी, फाइलें और गमले जैसे सामान ट्रैक्टर के जरिए नए आवास तक पहुंचाए गए। पसंदीदा रहा 7 सर्कुलर रोड, पहले भी रह चुके हैं यहां बताया जाता है कि 7 सर्कुलर रोड स्थित यह बंगला नीतीश कुमार का पसंदीदा रहा है। वे पहले भी कई बार यहां आकर निरीक्षण कर चुके हैं। कुछ समय तक यहीं से कामकाज भी संचालित होता रहा। बंगले के लॉन में विशेष घास कोलकाता से मंगवाकर लगाई गई है। 20 साल में दूसरी बार छोड़ा CM आवास गौरतलब है कि नीतीश कुमार पहली बार 2006 में 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास में आए थे। 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद इस्तीफा देने पर वे इसी 7 सर्कुलर रोड बंगले में शिफ्ट हुए थे। तब जीतन राम मांझी को सत्‍ता सौंपी थी और करीब आठ महीने यहीं रहे। मांझी को हटाए जाने के बाद दोबारा मुख्यमंत्री आवास लौटे थे। अब करीब 20 वर्षों में यह दूसरी बार है जब उन्होंने 1 अणे मार्ग छोड़ा है। वर्तमान में उनके आवास पर Z+ सुरक्षा व्यवस्था तैनात है। लालू परिवार के करीब नया ठिकाना, सियासी चर्चा तेज दिलचस्प यह है कि 7 सर्कुलर रोड से महज 200 मीटर की दूरी पर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का आवास 10 सर्कुलर रोड स्थित है। उन्हें पूर्व में यह आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था और हार्डिंग रोड स्थित बंगला आवंटित किया गया था, लेकिन इस पर सियासी विवाद बढ़ने के बाद फिलहाल प्रक्रिया स्थगित है। क्या हैं राजनीतिक मायने? नीतीश कुमार का 1 अणे मार्ग छोड़ना सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और सत्ता संतुलन के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।  

गीडा के उद्यमियों ने उठाए बिजली, मेंटेनेंस शुल्क और सीईटीपी मुद्दे; तत्काल निस्तारण का आदेश

 गोरखपुर मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में गीडा औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी का मामला छाया रहा।उद्यमियों के द्वारा ट्रिपिंग, कटौती और बिजली संबंधी समस्याओं के दूर करने में विभाग की लापरवाही संबंधी मामला उठाने पर कमिश्नर ने सख्त रूख अपनाया। उन्होंने मुख्य अभियंता को तत्काल प्रभाव से एक्सईएन से नोडल की जिम्मेदारी हटाने और एसडीओ की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि उद्योगों की स्थापना एवं संचालन में आने वाली बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए तथा निवेशकों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। गुरुवार को कमिश्नर अनिल ढींगरा की अध्यक्षता में हुई मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक आयोजित हुई। बैठक में चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि गीडा के उद्यमी लंबे समय से बिजली संकट झेल रहे हैं। इस दौरान अन्य उद्यमियों ने बताया कि गीडा में तैनात एक्सईएन के पास नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी भी है, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा। एक्सईएन से संपर्क करने पर अक्सर वह शहर से बाहर या बैठक में होने की बात कहते हैं, जिससे समस्याओं का समाधान लंबित रहता है। इस पर डीएम दीपक मीणा ने भी एक्सईएन से नोडल प्रभार हटाने की जरूरत बताई, जिसे स्वीकार करते हुए विभाग ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर कमिश्नर के तत्काल प्रभाव से एक्सईएन से नोडल की जिम्मेदारी हटाने और एसडीओ की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मुख्य अभियंता ने मौके पर ही इस आदेश का पालन करने का भरोसा दिया। एलपीजी टैंकर का मामला सुलझा, मेंटेनेंस शुल्क व सीईटीपी अटका बैठक में उद्यमियों ने गीडा क्षेत्र में सड़कों पर अवैध रूप से खड़े एलपीजी टैंकरों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। इसे गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर ने एसपी ट्रैफिक और आरटीओ को संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण करने और नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उद्योगों की स्थापना और संचालन में आ रही बाधाओं को लेकर भी चर्चा हुई। कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निवेशकों को अनुकूल माहौल देने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। हालांकि, गीडा क्षेत्र में उद्यमियों की समस्याएं लगातार उठने के बावजूद समाधान नहीं निकल पा रहा है। मेंटेनेंस शुल्क का मुद्दा लगातार तीन बैठकों से लंबित है। उद्यमियों का कहना है कि गीडा एक्ट के अनुसार लैंड कास्ट का एक प्रतिशत से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सकता, जबकि प्रशासन हर वर्ष करीब 13 प्रतिशत वसूल रहा है। इसके बावजूद इस बार भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। वहीं, कामन इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का मामला करीब 12 बैठकों से एजेंडे में होने के बावजूद अधर में है। इसके संचालन को लेकर स्पष्ट नीति नहीं बन सकी है। निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश बैठक में निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित स्वीकृतियों, अनापत्तियों और अनुमोदनों की समीक्षा भी की गई। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का शत-प्रतिशत निस्तारण तय समय सीमा के भीतर प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। इस दौरान सांख्यिकी विभाग से जुड़े मामलों में भी बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। बैठक में जिलाधिकारी दीपक मीणा, सीईओ गीडा अनुज मलिक, उद्यमी प्रवीण मोदी, भोला जायसवाल, अशोक साव, उमेश छापड़िया समेत कई अधिकारी और उद्यमी मौजूद रहे। कमिश्नर सभागार में हो गई उद्योग बंधु की बैठक बुधवार को विकास भवन स्थित सभागार में शाम पांच बजे से जिला उद्योग बंधु की बैठक आयोजित होनी थी। जबकि चार बजे से मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक। मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में सभी अधिकारी व उद्यमी भी मौजूद रहे। इस दौरान डीएम ने मौके पर उद्यमियों से उनकी परेशानियों और मुद्दों पर चर्चा की। वहां भी बिजली के अलावा कुछ मामले उठाए गए। डीएम ने सभी मामलों पर बातचीत कर उनके तत्काल निस्तारण का भरोसा दिया।  

एमपी में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत ₹993 बढ़ी, 20 हजार से ज्यादा शादियों पर पड़ेगा असर

भोपाल  दो महीने की किल्लत के बीच मध्य प्रदेश में कमर्शियल LPG सिलेंडर 993 रुपए महंगा हो गया है। भोपाल में 3074 रुपए, इंदौर में 3179 रुपए, जबलपुर में 3290 रुपए, ग्वालियर में 3296 रुपए और उज्जैन में 3241 रुपए में सिलेंडर मिलेगा। दो महीने में रेट 1248 रुपए बढ़ चुके हैं। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। कमर्शियल सिलेंडर के रेट ऐसे समय बढ़े हैं, जब होटल, रेस्टोरेंट-ढाबों को जरूरत की 50 प्रतिशत गैस ही मिल रही है। जुलाई तक प्रदेश में 20 हजार से ज्यादा शादियां होनी हैं, ऐसे में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 500 लोगों के खाने पर 50 हजार रुपए खर्च बढ़ेगा मध्य प्रदेश टेंट कैटर्स एसोसिएशन के रामबाबू शर्मा ने बताया कि सिलेंडर के रेट बढ़ने से होटल और कैटर्स में 10 प्रतिशत तक कॉस्टिंग का फर्क पड़ेगा। 500 लोगों के 5 लाख रुपए के खाने का बजट अब 45 से 50 हजार रुपए तक बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि सिलेंडर पर 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी ठीक थी, लेकिन करीब 50 प्रतिशत बढ़ोतरी न्याय संगत नहीं है। सरकार को फैसला वापस लेना चाहिए। होटल संचालक बोले- खाना महंगा करना पड़ेगा भोपाल होटल एवं रेस्टोरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडर 2 महीने में साढ़े 12 सौ रुपए तक महंगा हुआ है। यानी पहले की तुलना में 60% रेट बढ़े हैं। फरवरी तक सिलेंडर 1800 रुपए में मिल जाता था, लेकिन अब 50 प्रतिशत आपूर्ति ही हो रही है। कमर्शियल गैस नहीं मिलने से डीजल भट्‌टी और इंडक्शन का उपयोग हो रहा है। इससे डीजल और बिजली का खर्च बढ़ा हुआ है। अब खाने के रेट बढ़ाने पड़ेंगे। 3323 रुपए में रीवा में मिलेगा सबसे महंगा सिलेंडर प्रदेश में सबसे महंगा सिलेंडर रीवा में 3323 रुपए में मिलेगा। सिंगरौली और सतना-नरसिंहपुर में 3321 रुपए, कटनी में 3320 रुपए, बालाघाट में 3319 रुपए, पन्ना में 3318 रुपए, शहडोल में 3317 रुपए, अनूपपुर, सीधी, मंडला, उमरिया और डिंडौरी में 3315 रुपए, सिवनी में रेट 3308 रुपए हो गए हैं। भोपाल में रेट सबसे कम 3074 रुपए है। शाजापुर-सीहोर में 3081 रुपए, हरदा में 3104 रुपए, सागर में 3105 रुपए, विदिशा-नर्मदापुरम में 3109 रुपए में सिलेंडर मिलेगा। रेस्टोरेंट में खाने का रेट 10 से 20 प्रतिशत बढ़ेगा नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के एमपी हेड अभिषेक बहेती ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें हर महीने बढ़ रही हैं। पहले 60 रुपए, फिर 195 रुपए और अब 993 रुपए तक रेट बढ़े हैं। इससे रेस्टोरेंट में खाने का रेट 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। यह आम लोगों पर बोझ डालेगा।

टीबी नियंत्रण अभियान में राजस्थान का बड़ा कदम, ग्रामीण अंचलों में बीमारी पर काबू

जयपुर राजस्थान को टीबी की बेड़ियों से आजाद करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में चलाए गए गहन 'टीबी नियंत्रण अभियान' के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2025 के लिए प्रदेश की 6,547 ग्राम पंचायतों को 'टीबी मुक्त' घोषित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। केंद्र सरकार की मुहर का इंतजार राज्य स्वास्थ्य विभाग के टीबी नोडल अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम सोनी ने बताया कि राज्य सरकार ने अपने स्तर पर इन 6,547 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त चिह्नित कर लिया है। अब केंद्र सरकार की ओर से अंतिम सत्यापन और आधिकारिक मुहर लगने का इंतजार है, जिसके बाद इन्हें सार्वजनिक रूप से टीबी मुक्त घोषित कर दिया जाएगा। इन 6 कड़े मानकों पर परखी गई पंचायतों की 'सेहत' किसी भी पंचायत को टीबी मुक्त घोषित करना इतना आसान नहीं होता। इसके लिए केंद्र सरकार ने छह बेहद कड़े मानक तय किए हैं। राजस्थान की इन 6,547 पंचायतों ने इन सभी संकेतकों पर शानदार प्रदर्शन किया है।     प्रति 1,000 की जनसंख्या पर टीबी के संदिग्ध मरीजों की पहचान की दर 30 या उससे अधिक होनी चाहिए।     प्रति 1,000 की आबादी पर टीबी के नए पुष्ट मरीजों की संख्या 1 या उससे कम होनी चाहिए।     अधिसूचित सभी टीबी रोगियों में से कम से कम 60% मरीजों का 'दवा संवेदनशीलता परीक्षण' (DST) होना अनिवार्य है।     कम से कम 50% पात्र मरीजों को सीधा आर्थिक लाभ मिला हो और उनके खाते में कम से कम एक भुगतान पहुंच चुका हो।     इस अभियान के तहत चिन्हित मरीजों को 100% 'पोषण किट' का वितरण सुनिश्चित किया गया हो।     टीबी के मरीजों में इलाज सफल होने और पूर्ण स्वस्थ होने की दर कम से कम 85% होनी चाहिए। सिर्फ पहचान ही नहीं, पोषण पर भी जोर अधिकारियों के अनुसार, इन मानदंडों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि केवल बीमारी को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि मरीज को सही निदान, सही पोषण और इलाज पूरा करने तक की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाती है। 'निक्षय मित्र' पहल ने राजस्थान के गांवों में टीबी मरीजों को सामाजिक और पोषण संबंधी सहारा देने में बड़ी भूमिका निभाई है। क्यों अहम है यह उपलब्धि? राजस्थान जैसे भौगोलिक रूप से विशाल राज्य में ग्रामीण स्तर पर टीबी पर नियंत्रण पाना एक बड़ी चुनौती रही है। 6,547 पंचायतों का टीबी मुक्त होने की राह पर बढ़ना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ता और ग्राम पंचायतों के बीच बेहतर तालमेल रहा है। केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद ये पंचायतें अन्य क्षेत्रों के लिए 'रोल मॉडल' का काम करेंगी। राज्य सरकार का विजन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के '2025 तक टीबी मुक्त भारत' के सपने को साकार करने में राजस्थान अग्रणी भूमिका निभाए। इन गांवों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि राजस्थान टीबी को मात देने के बेहद करीब पहुँच चुका है। पुलकित सक्सेना