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Census 2027: रांची नगर निगम की पहल, 16 भाषाओं में ऑनलाइन जनगणना सुविधा

रांची  जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना (स्वयं विवरण भरने) विषय पर बुधवार को रांची नगर निगम में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता रौशनी खलखो ने की, जबकि उप महापौर नीरज कुमार, नगर आयुक्त सुशांत गौरव एवं अपर नगर आयुक्त संजय कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर बताया गया कि इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और जनभागीदारी आधारित होगी। नागरिक अब अपने मोबाइल फोन के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। स्व-गणना (स्वयं विवरण भरना) के तहत लोगों को स्व-गणना जनगणना की एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें निवासी अपने परिवार से संबंधित जानकारी स्वयं आनलाइन भरकर जमा करते हैं। वही नागरिक 1 मई से 15 मई तक अपने मोबाइल के https://se.census.gov.in/⁠ के माध्यम से स्व-गणना कर सकेंगे। 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण इसके बाद यह सुविधा बंद कर दी जाएगी। इस चरण में सबसे पहले मकान सूचीकरण (घर-घर का विवरण) किया जाएगा, जिसके बाद जनसंख्या गणना शुरू होगी। इसके अतिरिक्त 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। नागरिक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। महापौर रौशनी खलखो ने नागरिकों से निर्धारित अवधि में स्व-गणना पूरा करने की अपील करते हुए कहा कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाए, ताकि भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें। लोगों को डेटा रहेगा सुरक्षित को लेकर नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने बताया कि यह डिजिटल जनगणना रांची नगर निगम के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मकान गणना के दौरान कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे और नागरिकों को 16 भाषाओं में फार्म भरने की सुविधा मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में ओटीपी (एक बार उपयोग होने वाला पासवर्ड) या संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगी जाएगी तथा सभी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगी। टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक सभी प्रशासनिक इकाइयों की सीमाएं स्थिर रहेंगी। इस दौरान कोई नया वार्ड या नगर निकाय नहीं बनाया जाएगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। कोई भी अधिकारी आपसे ओटीपी या दस्तावेज की मांग नहीं करेगा। केवल फार्म में पूछी गई जानकारी ही भरनी होगी। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, रांची विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि, जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक सत्येंद्र कुमार गुप्ता, नगर निगम के अधिकारी एवं मीडिया प्रतिनिधि मौजूद थे।

आत्मसमर्पण के बाद बढ़ी अंदरूनी कलह, Naxal Central Committee का देवजी पर बड़ा हमला

जगदलपुर. नक्सल मोर्चे से बड़ी खबर सामने आई है, जहां माओवादी संगठन के भीतर आंतरिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। नॉर्थ कोऑर्डिनेशन कमेटी (NCC) द्वारा जारी एक प्रेस नोट में आत्मसमर्पण कर चुके शीर्ष माओवादी नेता वेणुगोपाल देवजी पर तीखा हमला किया गया है। NCC ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि देवजी अब संगठन के लिए “गद्दार” हैं और उनके आत्मसमर्पण के बाद संगठन का उनसे कोई संबंध नहीं रह गया है। इस बयान के बाद माओवादी खेमे में हलचल और तेज हो गई है। आत्मसमर्पण के बाद बढ़ा विवाद बता दें कि वेणुगोपाल देवजी के आत्मसमर्पण को लेकर संगठन के भीतर लंबे समय से असंतोष की स्थिति बताई जा रही थी। अब NCC के ताजा बयान ने इस विवाद को सार्वजनिक रूप से और बढ़ा दिया है। संगठन ने यह भी कहा है कि उनका संघर्ष अब भी जारी रहेगा और वे सशस्त्र आंदोलन को ही अंतिम रास्ता मानते हैं। ‘गोरिल्ला युद्ध’ जारी रखने का दावा प्रेस नोट में NCC ने दोहराया है कि संगठन कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन वह खत्म नहीं हुआ है। बयान में कहा गया है कि वे “गोरिल्ला युद्ध” के जरिए अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाते रहेंगे और “क्रांति” को जारी रखेंगे। प्रतिबंध हटाने की मांग खारिज, आंतरिक एकता का दावा देवजी द्वारा माओवादी संगठन पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग को भी NCC ने सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन ने इसे व्यक्तिगत राय बताते हुए कहा कि यह विचार संगठन की आधिकारिक नीति नहीं है। अपने बयान में NCC ने यह भी दावा किया है कि संगठन के भीतर किसी भी तरह की दरार या मतभेद नहीं हैं और वे पूरी तरह एकजुट हैं।

ड्रग माफिया पर सरकार का वार, Bathinda में अवैध निर्माण ध्वस्त

बठिंडा. पंजाब में नशा विरोधी अभियान के तहत सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में बठिंडा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत धोबियाना बस्ती में वीरवार को प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एनडीपीएस मामले के आरोपी की अवैध इमारत पर बुलडोजर चला दिया। यह निर्माण कमल गर्ग पुत्र रमेश कुमार द्वारा गैरकानूनी तरीके से किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार संबंधित व्यक्ति को कई बार नोटिस जारी किए गए थे और अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके आरोपी ने न तो निर्माण हटाया और न ही प्रशासन के आदेशों का पालन किया। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर कम मजिस्ट्रेट के निर्देशों पर सिविल प्रशासन ने पुलिस सुरक्षा के बीच कार्रवाई करते हुए इमारत को गिरा दिया। नशा तस्करी के चार मामले पहले से दर्ज बताया जा रहा है कि आरोपी के खिलाफ मादक पदार्थ से जुड़े कानून के तहत चार मामले पहले से दर्ज हैं। इस वजह से प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान के तहत की गई है, जिसके अंतर्गत जिले में लगातार अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि नशे के खिलाफ इस अभियान में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें। इसके लिए एंटी ड्रग हेल्पलाइन नंबर 97791-00200 और 91155-02252 जारी किए गए हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। अब तक 16 अवैध निर्माण गिराए जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार बठिंडा में अब तक 16 अवैध निर्माणों को गिराया जा चुका है। इसके अलावा एक मार्च 2025 से अब तक 2418 मामले दर्ज किए गए हैं और 3458 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 89 बड़े तस्कर भी शामिल हैं। वहीं वर्ष 2023 से अब तक 87 आरोपियों की करीब 14 करोड़ 21 लाख रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की जा चुकी है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी और नशा तस्करों के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

कच्चे माल के संकट में फंसी कॉटन इंडस्ट्री, पंजाब का टेक्सटाइल सेक्टर अब दूसरे राज्यों पर निर्भर

लुधियाना कच्चे माल की कमी ने पंजाब की कॉटन इंडस्ट्री की रफ्तार थाम दी है। हालत यह है कि स्थानीय स्तर पर जरूरत के अनुसार कपास उपलब्ध नहीं हो रही, जिसके चलते उद्योगों को महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से कच्चा माल मंगवाकर उत्पादन चलाना पड़ रहा है।  इस संकट ने खासकर जिनिंग सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां कभी 422 इकाइयां संचालित होती थीं, अब उनकी संख्या घटकर मात्र 25 रह गई है। उद्यमियों का कहना है कि यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो उद्योग के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो सकता है। 7 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.2 लाख पर सिमटा रकबा एक समय पंजाब में सात लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की खेती होती थी, जिससे राज्य में जिनिंग और स्पिनिंग उद्योग तेजी से विकसित हुआ। लेकिन बीते वर्षों में कपास का रकबा लगातार घटता गया, 2019 में यह 3.35 लाख हेक्टेयर था और अब यह करीब 1.2 लाख हेक्टेयर तक सिमट चुका है। रकबा घटने के पीछे कीटनाशक हमले, कम पैदावार और किसानों का अन्य फसलों की ओर झुकाव प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। उन्नत बीज की कमी से पिछड़ रहा पंजाब पंजाब कॉटन फैक्ट्रीज एंड जिनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवान बांसल के अनुसार, महाराष्ट्र में किसानों को जी-4 जैसी उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, जो गुलाबी सुंडी और सफेद मक्खी जैसी बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी है। इससे वहां प्रति एकड़ 12-15 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है। इसके विपरीत, पंजाब अभी भी पुरानी किस्मों पर निर्भर है, जिससे पैदावार कम है और किसान कपास की खेती से दूरी बना रहे हैं। उत्पादन में भारी अंतर, बाहर से मंगानी पड़ रही कपास आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में महाराष्ट्र में लगभग 1.15 करोड़ गांठ कपास का उत्पादन हुआ, जबकि पंजाब में यह आंकड़ा केवल 1.5 लाख गांठ तक सीमित है। यही कारण है कि राज्य की स्पिनिंग मिलों और जिनिंग इकाइयों को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। –देशभर में 26 अप्रैल 2026 तक कपास की आवक 308.70 लाख गांठ को पार कर चुकी है और 30 अप्रैल 2026 तक 311 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है। पूरे सीजन में कुल उत्पादन 335 लाख गांठ से अधिक रहने की संभावना है, लेकिन इसमें पंजाब की हिस्सेदारी बेहद कम है। कई इकाइयां बंद, कारोबार का पलायन कपास की कमी के चलते राज्य में बड़ी संख्या में जिनिंग मिलें बंद हो चुकी हैं। कई उद्योगपति अपना कारोबार राजस्थान और अन्य राज्यों में स्थानांतरित कर चुके हैं। इससे न केवल उद्योग प्रभावित हुआ है, बल्कि रोजगार पर भी असर पड़ा है। सरकार का फोकस: सब्सिडी और रकबा बढ़ाने का लक्ष्य स्थिति को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने कपास की खेती को बढ़ावा देने हेतु प्रमाणित बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी देने का फैसला किया है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, सरकार ने 2026 के लिए कपास का रकबा 1.25 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के तहत पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित 87 बीटी हाइब्रिड और चार देसी किस्मों को शामिल किया गया है। सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। धान से कपास की ओर शिफ्ट की अपील सरकार ने किसानों से अधिक पानी खपत करने वाली धान की खेती छोड़कर कपास की ओर रुख करने की अपील की है। इसे ‘सफेद सोना’ बताते हुए वैज्ञानिक खेती और उन्नत बीजों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि सरकार के प्रयास जारी हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उद्योग को तत्काल राहत मिलती नजर नहीं आ रही। जब तक उत्पादन और रकबा दोनों में ठोस वृद्धि नहीं होती, तब तक पंजाब की कॉटन इंडस्ट्री पर संकट के बादल छाए रहेंगे।  

लैंडिंग के दौरान बड़ा हादसा टला, Lucknow रनवे पर बंदर आने से यात्रियों की थमी सांसें

लखनऊ. राजधानी के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बड़ा हादसा टल गया। जब रायपुर जा रही एक फ्लाइट के रनवे पर अचानक एक बंदर आ गया।पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया, जिससे 132 यात्रियों और क्रू सदस्यों की जान बच गई। घटना की जांच के लिए नागरिक उड्डयन विभाग ने आदेश दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस फ्लाइट में 132 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे। 132 में से आधे से ज्यादा यात्री रायपुर के रहने वाले थी। जानकारी के अनुसार फ्लाइट रनवे पर तेज गति से दौड़ रहा था और टेकऑफ की प्रक्रिया में था। इसी दौरान अचानक बंदर रनवे पर आ गया। जिसे तुरंत पायलट ने देख लिया और इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। पायलट की सूझबूझ से 132 लोगों की जान बच गई। घटना के दौरान कुछ समय के लिए विमान में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एयरपोर्ट प्रशासन सूचना मिलते ही हरकत में आया और कुछ समय के लिए रनवे को बंद कर दिया गया। फिर बंदर को पकड़ने के लिए पूरे परिसर में अभियान चलाया गया। एयरपोर्ट से जुड़े अफसरों ने बताया कि फ्लाइट में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं और विमान को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। इधर, नागरिक उड्डयन विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने एयरपोर्ट प्रशासन से इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि फ्लाइट टेकऑफ के दौरान रनवे पर किसी भी जीव या वस्तु का आना खतरनाक साबित हो सकता है। इस स्थिति को बर्ड स्ट्राइक या रनवे इंट्रूजन कहा जाता है और इससे विमान के इंजन या पहियों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। पायलट ने यदि समय रहते एक्शन नहीं लिया होता तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।

किसानों को मिली बड़ी राहत, गेहूं उपार्जन की तारीख बढ़ाई गई, नया अपडेट जानें

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन की तारीखों को आगे बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से अबतक अपनी फसलें सरकार को न बेच पाने वाले किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। गेहूं उपार्जन व्यवस्था में आ रही दिक्कतों के बीच राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए अहम निर्णय लिए हैं। सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्जाट करते हुए कहा कि, जिन किसानों का अब तक स्लॉट नहीं मिल पाया है, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, ताकि वो अपनी फसल आसानी से बेच सकें। आपको बता दें कि, अबतक समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन खरीदी की तारीख 9 मई 2026 निर्धारित थी, जिसे मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने बढ़ाकर 23 मई तक कर दिया है। यानी किसान सरकार को अपनी फसल समर्थन मूल्य पर नई निर्धारित तारीख तक बेच सकते हैं। इसी के साथ, मुख्यमंत्री डॉ यादव ने प्रदेश में गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के भी निर्देश दिए हैं। लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा- सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि, गेहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों को निर्देशानुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध करने की व्यवस्था कर स्थितियां सुनिश्चित करें। उपार्जन केंद्र पर चल रही गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। गेहूं के लिए FAQ क्राइटेरिया में रिलेक्सेशन सीएम के निर्देश पर उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्था कर ली गई है। किसान जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज का विक्रय आसानी से कर सकेगा। गेहूं के लिए एफएक्यू मापदंड में शिथिलता प्रदान की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर करने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। खरगोन में सीएम का औचक निरीक्षण इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को खरगोन जिले की मंडलेश्वर तहसील के कतरगांव स्थित उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद किसानों से बातचीत की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बताया गया कि, महेश्वर प्रवास के दौरान वो अचानक केंद्र पहुंचे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण भी कर सकते हैं। केंद्रों पर की गई ये व्यवस्थाएं उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और राज्य सरकार द्वारा 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि समेत 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के लिए गेहूं उपार्जन एवं स्लॉट बुकिंग की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई कर दी है। अब तक कितनी गेहूं खरीदी? बता दें कि अबतक प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए 9.83 लाख किसानों द्वारा 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। प्रदेश में अभी तक 5 लाख 8 हजार 657 किसानों से 22 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस साल युद्ध के विपरीत हालातों के बावजूद किसानों के हित में सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य तय किया है।

सिवनी हवाला कांड में हाईकोर्ट ने दी राहत, डीएसपी समेत 3 की एफआईआर रद्द, कोर्ट ने कहा- काल डिटेल से अपराध सिद्ध नहीं होता

सिवनी सिवनी हवाला कांड एक बार फिर सुर्खियों में है, जब इस मामले की सुनवाई कर रही हाई कोर्ट ने आरोपियों को बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने डीएसपी पंकज मिश्रा, आरक्षक प्रमोद सोनी और व्यापारी पंजू गिरी गोस्वामी की याचिका पर सुनवाई के बाद एफआईआर रद्द करने के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, इसी केस में आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज कर दी गई है। यह मामला पिछले साल अक्टूबर में सामने आया था, जब पुलिस ने सीलादेही चौक पर महाराष्ट्र के हवाला कारोबारी सोहन लाल परमार की कार से 2.96 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की थी। विवाद तब शुरू हुआ जब पुलिस रिकॉर्ड में केवल 1.45 करोड़ रुपये की रकम दर्ज की गई। इस पर आरोप लगे कि रकम की असली मात्रा छुपाई गई। इसके बाद लखनवाड़ा थाना में सिवनी पुलिस की तत्कालीन एसडीओपी पूजा पाण्डेय और डीएसपी पंकज मिश्रा सहित 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। 81 फोन कॉल और व्हाट्सएप चैट थे आधार राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि घटना के दौरान मिश्रा और पूजा पांडे के बीच 81 बार फोन पर बातचीत हुई थी। साथ ही आरोप लगाया गया कि मिश्रा ने अपने मोबाइल से कुछ अहम व्हाट्सएप चैट और वीडियो हटाए (डिलीट किए), जिससे उनकी भूमिका संदिग्ध बनती है। हाईकोर्ट ने खारिज कर दी FIR? जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने केस डायरी का विश्लेषण करते हुए पाया कि केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) किसी अपराध को साबित करने के लिए काफी नहीं है। कोर्ट ने साफ कहा कि बातचीत का कोई रिकॉर्ड या ट्रांसक्रिप्ट पेश नहीं किया गया, जिससे साजिश साबित हो सके। पंकज मिश्रा को न पैसा मिला, न नाम आया कोर्ट ने यह भी माना कि मिश्रा के पास से कोई भी रकम बरामद नहीं हुई और न ही किसी गवाह या शिकायतकर्ता ने उनका नाम लिया। साथ ही यह भी कहा गया कि सूचना साझा करना एक पुलिस अधिकारी की ड्यूटी का हिस्सा हो सकता है। SC केस का हवाला देकर FIR और चार्जशीट की रद्द जबलपुर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित भजन लाल केस का हवाला देते हुए कहा कि जब FIR में प्रथमदृष्टया (पहली नजर में) अपराध नहीं बनता, तो ऐसी कार्यवाही जारी रखना न्याय के खिलाफ है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संदेह कितना भी गहरा हो, वह सबूत की जगह नहीं ले सकता। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने DSP पंकज मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, उन्हें पूरी तरह आरोपों से मुक्त कर दिया है। हाई कोर्ट ने दी तीन आरोपियों को राहत हाई कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई में तीन आरोपियों के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पैरवी की। कोर्ट ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। कोर्ट के अनुसार, मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं जो साजिश या आपसी मिलीभगत साबित करते हों। 2.96 करोड़ जब्त किए रिकॉर्ड में 1.45 करोड़ दिखाए यह मामला 8 अक्टूबर 2025 को सिवनी में सामने आए हवाला कांड से जुड़ा है। उस समय डीएसपी पूजा पाण्डेय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सीलादेही चौक पर महाराष्ट्र के हवाला कारोबारी सोहनलाल परमार की कार से करीब 2.96 करोड़ रुपए नकद जब्त किए थे। आरोप था कि पुलिस टीम ने पूरी रकम जब्त की, लेकिन रिकॉर्ड में सिर्फ 1.45 करोड़ रुपए ही दिखाए गए। मामला सामने आने पर लखनवाड़ा थाना में एसडीओपी पूजा पाण्डेय, डीएसपी पंकज मिश्रा सहित 11 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया था। साजिश या समझौते का ठोस सबूत नहीं मामले की सुनवाई जस्टिस हिमांशु जोशी की अदालत में हुई। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों के बीच पहले से कोई साजिश या आपसी समझौता था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोप केवल शक और अनुमान पर आधारित हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मात्र से अपराध सिद्ध नहीं होता। साजिश के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं। ऐसे में मुकदमा चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) और 238(b) के आवश्यक तत्व इन आरोपियों पर लागू नहीं होते, इसलिए चार्जशीट और सभी आपराधिक कार्यवाही रद्द की जाती है। नीरज राजपूत को राहत नहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जिस टीम ने कार रोकी और नकदी बरामद की, उसमें उसकी भूमिका महत्वपूर्ण थी, इसलिए उसके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि केवल कॉल रिकॉर्ड या संदेह के आधार पर किसी को आपराधिक मुकदमे में नहीं फंसाया जा सकता। जांच एजेंसियों को गंभीर मामलों में भी ठोस साक्ष्य पेश करना अनिवार्य है। कोर्ट का निर्णय: आरोप आधारहीन और शक पर आधारित हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामला केवल अनुमान और संदेह पर आधारित है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर कोई अपराध सिद्ध नहीं होता। इसका कोई सुनिश्चित सबूत नहीं मिला है कि आरोपितों के बीच मिलीभगत या अपराधिक साजिश रची गई हो। चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही पर रोक कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) और 238(b) के अनुसार यह माना कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाना कानून का दुरुपयोग होगा। इसलिए चार्जशीट को निरस्त करते हुए आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का निर्देश दिया। आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज हालांकि, आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका को कोर्ट ने खारिज किया है। कोर्ट के अनुसार, उसने टीम के साथ कार रोकी और रकम की जब्ती में भूमिका निभाई थी, इसलिए उसके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल शक और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति को बिना ठोस सबूत के आपराधिक मुकदमे में नहीं लाया जा सकता। यह फैसला जांच एजेंसियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल है कि अब उन्हें गंभीर मामलों में स्पष्ट और मजबूत साक्ष्य पेश करना होगा।

सफलता की कहानी: पलाश फूल से बढ़ती आजीविका और समृद्धि

सफलता की कहानी: पलाश फूल से बढ़ती आजीविका और समृद्धि रायपुर पलाश (टेसू या ढाक) का फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका और स्वास्थ्य के लिए एक बहुमूल्य संसाधन है। इसके नारंगी-लाल फूलों को जंगल की आग भी कहा जाता है, जो वसंत ऋतु में ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाते हैं। पलाश के फूल, बीज और गोंद (कमरकस) आयुर्वेद में चर्म रोग, पेट के कीड़े, डायबिटीज, और यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रयुक्त होते हैं। इन औषधीय उत्पादों को बेचकर भी ग्रामीण अपनी आय बढ़ाते हैं। औषधीय और सांस्कृतिक फूल है पलाश               पलाश फूल (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा), जिसे टेसू, ढाक या “जंगल की आग” (फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट) भी कहा जाता है, भारत का एक महत्वपूर्ण औषधीय और सांस्कृतिक फूल है। बसंत ऋतु में खिलने वाले इसके आकर्षक नारंगी फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि औषधीय उपयोग, प्राकृतिक होली रंग और त्वचा की देखभाल में भी काम आते हैं। छत्तीसगढ़ के वन मण्डल कटघोरा में पलाश के वृक्ष बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, कटघोरा, चौतमा और पाली जैसे क्षेत्रों में इसकी भरपूर उपलब्धता है। यहां के आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए लघु वनोपज संग्रहण आजीविका का प्रमुख साधन है। पलाश फूल का संग्रहण मुख्यत मार्च-अप्रैल माह में किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में इसका संग्रहण दर 11.50 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया। यह दर संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में मददगार साबित हुई है। कटघोरा वनमण्डल में पलाश फूल का संग्रहण लगातार बढ़ रहा है          वर्ष 2022-23 में 116 संग्राहकों से 402 क्विंटल, वर्ष 2023-24 में 40 संग्राहकों से 58 क्विंटल,वर्ष 2024-25 में 107 संग्राहकों से 147 क्विंटल और वर्ष 2025-26 में 20 संग्राहकों से 76 क्विंटल संग्रहण किया गया इसके साथ ही साथ पलाश के मूल्य में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में 900 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला पलाश वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके बाद संघ मुख्यालय द्वारा इसे 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया गया, जिससे संग्राहकों को बेहतर लाभ मिला। 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान             वन धन विकास केंद्र पसान, मोरगा, डोंगानाला, गुरसियां और मानिकपुर के माध्यम से संग्रहण कार्य को संगठित रूप दिया गया है। इन केंद्रों ने स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, संग्रहण और विपणन में सहयोग प्रदान किया। वर्ष 2025-26 में पलाश फूल संग्रहण करने वाले 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में सुधार आया। यह पहल शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें लघु वनोपज के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं। ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन पलाश के फूल        पलाश के फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इन्हें पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इन्हें तिजोरी में रखने से धन-समृद्धि बढ़ती है। पलाश के पत्तों से बने पत्तल और दोने शादियों और अन्य आयोजनों में इको.फ्रेंडली विकल्प के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं, जो ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन है। आगामी सीजन में कटघोरा वनमण्डल के सभी समितियों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को पलाश फूल संग्रहण से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल आजीविका के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वन संसाधनों का सतत और समुचित उपयोग भी सुनिश्चित होगा। पलाश सिर्फ फूलों की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता,आजीविका और समृद्धि की नई उड़ान की कहानी है।  पलाश के फूलों से प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग          पलाश के फूलों का सबसे बड़ा व्यावसायिक उपयोग होली के लिए प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग बनाने में होता है। आदिवासी और ग्रामीण महिलाएं पलाश ब्रांड के माध्यम से इन फूलों से इको-फ्रेंडली रंग तैयार कर अपनी आजीविका बढ़ा रही हैं।

एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी, आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ

रांची ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। दरअसल, आम दिनचर्या में शामिल होने वाली वस्तुएं सर्फ, साबुन, टूथपेस्ट, बिस्किट आदि की कीमतों में इजाफा कर दिया गया है। इससे हर किसी के जेब पर हर दिन भार पड़ना शुरू हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार, फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों ने वस्तुओं की की मतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। इसमें साबुन-सर्फ, टूथपेस्ट से लेकर बिस्किट, बैटरी आदि की कीमतों में एक से लेकर 26 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी की वजह कंपनियां युद्ध के कारण रॉ मैटेरियल की कीमतों में हुई वृद्धि को बता रही हैं। सबसे अधिक बढ़ोतरी 26 रुपये आधा किलो वाले स्टैंडर्ड हॉर्लिक्स के पाउच में की गई है। इनो, बैटरी और कपड़ा धोने वाले साबुन समेत कई उत्पादों में एक रुपये प्रति पीस की वृद्धि की गई है। इसके अलावा अन्य उत्पादों के दामों में वृद्धि की गई है। डीजल महंगा हुआ दूसरा कारण इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में इजाफा है। डीजल महंगा होने से उत्पादन लागत और परिवहन खर्च बढ़ा है। इसका असर कंपनियों के कुल खर्च पर पड़ा है, जिसे वे कीमत बढ़ाकर संतुलित कर रही हैं। पैकिंग लागत बढ़ी सबसे पहला कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में वृद्धि है। कच्चे तेल के महंगे होने से प्लास्टिक, पैकेजिंग और अन्य पैकिंग मैटेरियल की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर उत्पादों की एमआरपी पर पड़ा है। कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि कच्चे माल यानी रॉ मैटेरियल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी है। कई उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले बेसिक इनपुट महंगे हो गए हैं, जिससे सहायक (सब्सिडियरी) इकाइयों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। जेसीपीडीए के मुताबिक कीमतों में वृद्धि के 3 कारण झारखंड कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (जेसीपीडीए) के अध्यक्ष संजय अखौरी के अनुसार, एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे तीन प्रमुख वजह हैं। क्रूड ऑयल, डीजल और रॉ मैटेरियल के दाम बढ़े हैं। हज के विमान किराये में 10 हजार रुपए की बढ़ोतरी केंद्रीय हज कमेटी ने आजमीन ए हज के विमान किराए में वृद्धि कर दी है। 15 मई तक हर आजमीन ए हज को 10 हजार रुपए अतिरिक्त विमान किराया देना होगा। केंद्रीय हज कमेटी ने इससे संबंधित आदेश जारी किया है। हज कमेटी के खुर्शीद अनवर ने बताया कि विमान किराया में अचानक वृद्धि की गई है, जिसकी वजह से केंद्रीय हज कमेटी ने सभी हज यात्रियों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय तक हर हाल में कमेटी की वेबसाइट या ऐप पर बढ़ी हुई राशि जमा करें, नहीं तो हज यात्रियों को यात्रा में असुविधा हो सकती है। बता दें कि झारखंड के हज यात्रियों की कोलकाता एम्बारकेशन प्वाइंट से 18 अप्रैल से जेद्दा के लिए रवानागी शुरू हुई। 30 अप्रैल को हज यात्रियों का आखिरी काफिला जेद्दा के लिए रवाना होगा।

चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू, छात्रों को मिलेगी फेलोशिप

 रांची  राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन वर्तमान में थर्ड पार्टी के रूप में चयनित निजी एजेंसियों द्वारा ही कराया जाता रहा है। अब राज्य सरकार ने इस कार्य में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को भी लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू करेगा, जिसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन की सामान्य सभा की हुई बैठक में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। प्रस्तावित चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना के तहत विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए बकायदा उन्हें फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। स्नातकोत्तर छात्र न केवल योजनाओं का मूल्यांकन करेंगे, बल्कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने चीफ मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप स्कीम के ही एक कंपोनेंट के रूप में इसे शुरू करने का निर्णय लिया है।   किसी क्षेत्र के विकास व प्रोजेक्ट पर काम करेंगे पीएचडी छात्र इस स्कीम के एक अन्य कंपोनेंट के तहत झारखंड के चिह्नित क्षेत्रों के विकास के लिए शोध कार्य करने तथा किसी खास प्रोजेक्ट आधारित शोध के लिए फेलोशिप प्रदान की जाएगी। यह फेलोशिप कार्यक्रम पीएचडी विद्यार्थियों के लिए होगा। झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन ऐसे क्षेत्रों तथा प्रोजेक्ट की पहचान करेगा, जिनमें शोध किया जाना है। इसके लिए विशेषज्ञ टीम गठित की जाएगी। क्षेत्रों एवं प्रोजेक्ट की पहचान के बाद विज्ञापन प्रकाशित कर इसके लिए अर्हता प्राप्त विद्यार्थियों से आवेदन मंगाए जाएंगे। विशेषज्ञ टीम उन आवेदनों की स्क्रूटनी कर योग्य अभ्यर्थियों की अनुशंसा काउंसिल को करेगी।