samacharsecretary.com

कनाडा में छिपे मास्टरमाइंड पर शिकंजा, रेड कॉर्नर नोटिस की तैयारी शुरू

आगरा उत्तर प्रदेश के आगरा से शुरू हुए धर्मांतरण सिंडिकेट मामले में पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. सिंडिकेट के मुख्य आरोपी और फंडिंग के स्रोत दाऊद अहमद पर शिकंजा कसते हुए आगरा पुलिस ने भोपाल स्थित उसकी संपत्ति को कुर्क कर दिया है और अब पुलिस उसे विदेश से भारत लाने की तैयारी में जुट गई है. इस पूरे मामले में अब इंटरनेशनल कनेक्शन और फंडिंग नेटवर्क की जांच भी तेज हो गई है. आगरा पुलिस ने भोपाल के गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित रिलायबल हाईटेक सिटी में दाऊद अहमद के घर पर पहुंचकर कुर्की की कार्रवाई पूरी की. इससे पहले CrPC की धारा 82 के तहत नोटिस चस्पा किया गया था, लेकिन अदालत में पेश न होने पर अब धारा 83 के तहत संपत्ति कुर्क कर दी गई. कनाडा में छिपा है दाऊद आगरा पुलिस का मकसद साफ है कि आरोपी या उसका परिवार अब संपत्ति बेचकर फरार न हो सके. पुलिसिया सूत्रों के मुताबिक, पिछले 3 सालों से दाऊद अहमद कनाडा में मौजूद है. उसे भारत लाने के लिए आगरा पुलिस उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग से पत्राचार कर रही है ताकि CBI के जरिए इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया जा सके. इसके साथ ही MLAT यानी म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी के तहत भी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. इस पूरे मामले में एक बड़ा इंटरनेशनल कनेक्शन भी सामने आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, दाऊद अहमद का संबंध कनाडा के ब्राम्पटन इस्लामिक सेंटर (Brampton Islamic Centre) से बताया जा रहा है. जांच एजेंसियां इस एंगल की पड़ताल कर रही हैं कि विदेश से आने वाली फंडिंग का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जा रहा था और क्या इसके जरिए देश के अंदर कोई संगठित नेटवर्क ऑपरेट किया जा रहा था. बताया जा रहा है कि दाऊद अहमद पिछले करीब तीन साल से भारत नहीं आया है और उसकी गतिविधियां अब केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के रडार पर हैं. जानिए क्या है पूरा मामला दरअसल, इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा जुलाई 2025 में हुआ था. जब आगरा के सदर क्षेत्र से दो सगी बहनें लापता हो गई थीं. जांच में सामने आया कि दोनों एक संगठित गिरोह के संपर्क में आ गई थीं. पुलिस ने उन्हें कोलकाता से बरामद किया, जिसके बाद इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ. 14 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार इस मामले में अब तक 14 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. गिरोह का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान दिल्ली में सक्रिय था, जबकि उसकी सहयोगी आयशा गोवा से नेटवर्क चला रही थी. कनाडा और यूएई से फंडिंग पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस सिंडिकेट को विदेशों खासतौर पर कनाडा और यूएई से फंडिंग मिल रही थी. जांच में दाऊद अहमद को इस फंडिंग का अहम स्रोत बताया गया. पुलिस ने दाऊद अहमद की गिरफ्तारी के लिए भोपाल में दबिश भी दी, लेकिन वह हाथ नहीं आया. अदालत के आदेश के बावजूद पेश न होने पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है. थाना सदर बाजार में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 209 के तहत एक और मुकदमा भी दर्ज किया गया है. पुलिस कमिश्नर का कड़ा संदेश इस पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने कई लड़कियों को इस गिरोह के चंगुल से मुक्त भी कराया है. यानी साफ है कि पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के नेतृत्व में आगरा से हुए खुलासे के बाद अब यह मामला इंटरनेशनल नेटवर्क और फंडिंग तक जा पहुंचा है. फिलहाल, आगरा पुलिस इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने के लिए आगे भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है.

लकड़ी के चूल्हे पर गुड़ और घी से बनता शुगर-फ्री पेड़ा, अयोध्या से लेकर विदेश तक सप्लाई

बस्ती उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में इन दिनों मुस्लिम महिलाओं के हाथों से बना "राम जी पेड़ा" देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जमकर धूम मचा रहा है. इन पेड़ों के प्रसिद्ध होने के पीछे कारण देशी स्टाइल में बनाना है. जिसे बड़े-बड़े बर्तनों में लकड़ी के चूल्हों की मदद से महिलाओं द्वारा गुड़ डालकर शुद्ध दूध व देशी घी से बनाया जाता है. जिस वजह से ये काफी स्वादिष्ट होते हैं, इतना ही नहीं लकड़ी के चूल्हों पर पकने की वजह से इन पेड़ों में सोंधापन आने से इनके स्वाद में चार चांद लग जाते हैं. गुड में बनने की वजह से ये शुगर फ्री होते हैं, जिस वजह से इन पेड़ों की मांग देश से ज्यादा विदेशों में है. क्योंकि ये किसी को नुक़सान नहीं पहुंचाते हैं. हालांकि इन महिलाओं का सपना साकार नहीं होता अगर इन्हें युवा उद्यमी का साथ नहीं मिला होता. क्योंकि युवा उद्यमी ने ही इन्हें बिजनेस प्लान बताया. जिसके बाद महिलाओं ने इस अमल में लाया. अयोध्या में भोग लगाने के बाद भेजा जाता है विदेश जानकारी के अनुसार बस्ती जिले के रहने वाले युवा उद्यमी मनीष मिश्रा गांव ने बेरोज़गार और गरीब महिलाओं को रोजगार के लिए पहले तो पेड़े बनाने की ट्रेनिंग दी. उसके बाद उन्हें रा-मैटेरियल देकर काम की शुरुआत की और धीरे-धीरे महिलाओं का कारवां बढ़ता गया और आज 500 गरीब महिलाएं इस रोजगार से जुड़ीं हैं. ये महिलाएं हजारों रुपए कमाकर अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं, सबसे हैरानी कि बात यह है कि इस काम में मुस्लिम महिलाएं भी अपना हाथ बंटाती हैं. "राम जी का पेड़ा" देशी स्टाइल में बेहद ही स्वच्छता और हाइजीन तरीके से बनाया जाता है. जिसे लकड़ी के चूल्हे पर दूध में गुड़ डालकर शुद्ध देशी घी में पकाया जाता है. चूल्हे पर पकने की वजह से पेड़े में सोंधी खुशबू आ जाती है. जिससे इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. गुड़ से बने इस पेड़े की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूर्ण रूप से शुगर फ्री होता है. जिस वजह से इसकी देश विदेश के बाजारों में मांग है. "राम जी पेड़ा" बनने के बाद पहले अयोध्या जाता है. यहां भगवान राम को भोग लगाया जाता है फिर देश- विदेश में इसकी सप्लाई की जाती है. दो दिनों में ही तैयार हो जाता है कई किलो पेड़ा इस संस्था के मैनेजर ने बताया कि हमारा "राम जी का पेड़ा"देश ही नहीं बल्कि विदेशों में जैसे रूस व यूरोप जैसे देशों में सप्लाई किया जा रहा है. ऑर्डर आने के बाद महिलाएं काम में जुट जाती हैं. दो दिनों में ही कई किलो पेड़े बनाकर उसे मटके में पैक कर देती हैं. जिसके बाद इन पेड़ों का अयोध्या में भोग लगाया जाता है. फिर देश के अलावा विदेशों में भी सप्लाई किया जाता है.

शुरुआत में 17 शहरों के लिए घरेलू उड़ानें, एयरलाइंस कंपनियों ने खाका तैयार किया

नोएडा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अगले महीने उड़ानें शुरू करने की तैयारी है. एयरलाइंस कंपनियों ने शुरुआत में 17 शहरों के लिए घरेलू उड़ानें शुरू करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है. यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की एयरपोर्ट साइट पर बोर्ड बैठक हुई. बैठक में एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होने में आ रही रुकावटों समेत अन्य प्रस्तावों पर चर्चा की गई. मई के अंत तक एयरपोर्ट से घरेलू और कार्गो विमान सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया. तीन एयरलाइंस कंपनियों के पदाधिकारियों से वार्ता की गई, जिन्होंने शुरुआत में एयरपोर्ट से 17 फ्लाइट्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. 17 शहरों के लिए मिलेगी कनेक्टिविटी बैठक में पूरा खाका तैयार करने और टिकट बुकिंग सेवा शुरू करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के आदेश दिए गए. हालांकि, उड़ान के लिए शहरों का चयन अभी नहीं हो सका है. नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) से उड़ान के लिए अंतिम मंजूरी के प्रस्ताव पर भी यापल और नायल के अधिकारियों के बीच बैठक हुई. सुरक्षा और विदेशी CEO का मसला बकास से अभी एयरपोर्ट सिक्योरिटी प्रोग्राम (ASP) को मंजूरी मिलना बाकी है. इसके बाद ही उड़ान सेवा शुरू की जाएगी. इस दौरान गृह मंत्रालय की आपत्तियों को दूर करने और विदेशी सीईओ से संबंधित मसले को सुलझाने पर भी अधिकारियों के बीच मंथन हुआ. यापल के अधिकारियों ने दावा किया कि इस पर काम शुरू हो गया है और एएसपी के लिए सभी आपत्तियां इसी माह में दूर कर ली जाएंगी, ताकि मई तक उड़ानें शुरू की जा सकें. इंफ्रा पर बड़ा निवेश, 300 करोड़ खर्च होंगे यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की बोर्ड बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एयरपोर्ट पर अगले दो वर्षों में विमानों को खड़ा करने के लिए 25 नए स्टैंड बनेंगे, जिस पर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. वर्तमान में 28 स्टैंड बनकर तैयार हैं, जिनमें तीन कार्गो और 25 व्यावसायिक विमानों के लिए हैं. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर 10 एयरोब्रिज जोड़े गए हैं, जिससे विमान यात्री एक साथ उड़ान भर सकेंगे. एयरपोर्ट के रनवे को प्रति घंटे लगभग 30 विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग की क्षमता के साथ तैयार किया गया है.

Sangrur में हिंसक झड़प, ट्रक यूनियन विवाद के बीच पुलिस पर हमला

संगरूर. संगरूर जिले के भवानीगढ़ क्षेत्र में ट्रक यूनियन की प्रधानगी को लेकर शुरू हुआ विवाद शनिवार देर रात हिंसक रूप ले बैठा। नेशनल हाईवे जाम करने और पुलिस पर पथराव करने के मामले में पुलिस ने दर्जन भर लोगों के खिलाफ इरादा कत्ल सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। इस घटना में दो पुलिस कर्मचारी घायल हो गए, जबकि पुलिस की दो गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। जानकारी के अनुसार, ट्रक यूनियन की प्रधानगी को लेकर दो गुटों के बीच पहले से तनाव बना हुआ था। शनिवार को प्रधानगी के चयन के लिए दिन तय किया गया था। इस दौरान एक पक्ष को डीएसपी दफ्तर बुलाकर वहीं बैठा लिया गया, जबकि दूसरे गुट की ओर से मालविंदर सिंह माला को प्रधान घोषित कर दिया गया। प्रधान घोषित करते ही विवाद हुई शुरू जब इस फैसले की जानकारी दूसरे पक्ष को मिली तो क्षेत्रीय विधायक नरिंदर कौर भराज डीएसपी दफ्तर पहुंचीं और अपने समर्थकों को वहां से बाहर निकाला। इसके बाद उनके समर्थकों ने लवली शर्मा काकड़ा को अपना प्रधान घोषित कर दिया। इसी को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद और अधिक बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लवली शर्मा को हिरासत में ले लिया। इसके विरोध में उनके समर्थकों ने बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे को देर रात तक जाम रखा। जब पुलिस ने हाईवे खुलवाने की कोशिश की तो गुस्साए ट्रक आपरेटरों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इस दौरान पुलिस कर्मियों को चोटें आईं और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। हिंसक धाराओं के तहत मामला दर्ज एसएसपी सरताज सिंह चाहल ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें हत्या के प्रयास, सरकारी काम में बाधा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी और अब तक दस से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून हाथ में लेने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।

महारत्न कंपनी Steel Authority of India Limited में कटौती की आहट, मैनपॉवर कॉस्ट बना कारण

भिलाई नगर. महारत्न कम्पनी सेल में इस समय नियमित कार्मिक 49752 व ठेका श्रमिक 68066 हैं। दोनों को मिलाकर कुल मैनपॉवर 117818 है। सेल का मैनपॉवर कास्ट 11.62 प्रतिशत है। इसी को आधार बनाकर सेल की सभी यूनिटों में मैनपॉवर को कम करने कवायद जारी है। छंटनी में कितने की नौकरी जाएगी यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। इस समय नियमित कार्मिकों की तुलना में ठेका श्रमिकों की संख्या 18314 ज्यादा है। मैनपॉवर कास्ट कम करने के लिए अब दोनों की संख्या में कटौती करने के लिए सभी यूनिटों में कवायद चल रही है । इस्पात मंत्रालय का मानना है कि निजी स्टील कम्पनियों की तुलना में सेल का मैनपॉवर कास्ट 11.62 प्रतिशत है जो कि बहुत ज्यादा है। इस कास्ट को कम करने अब सेल को मैनपॉवर कम करने कहा गया है। नियमित कार्मिकों को जहां कम्पलसरी और वालंटरी रिटायरमेंट के जरिए कम किया जाएगा वहीं ठेका श्रमिकों की सीधे सीधे छंटनी की जाएगी। बीएसपी में ज्यादा छंटनी होने के आसार आंकड़ों की बात करें तो इस समय बीएसपी में नियमित कार्मिकों की संख्या 12552 है जबकि ठेका श्रमिक 16738 हैं। बीएसपी चूंकि सबसे बड़ी यूनिट है इसलिए यहां नियमित कार्मिकों और ठेका श्रमिकों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे में तुलनात्मक रूप से यहां छंटनी की ज्यादा गुंजाइश है। सेल की अन्य यूनिटों- दुर्गापुर, राउरकेला, बोकारो, इस्को में भी आंकड़े बड़े हैं। जहां तक लेबर प्रोडक्टिविटी की बात है तो बीएसपी में यह पिछले माह 879 टन क्रूड स्टील / मैन/ वर्ष था। विगत वित्त वर्ष की औसतन लेबर प्रोडक्टिविटी 774 टन कूड स्टील/ मैन/ वर्ष थी। दुर्गापुर का मैनपॉवर कास्ट सबसे ज्यादा बीएसपी का मैनपॉवर कास्ट 10.90 प्रतिशत, दुर्गापुर का 13.47 प्रतिशत, राउरकेला का 10.08 प्रतिशत, बोकारो का 9.22 प्रतिशत, इस्को का 6.54 प्रतिशत है। इस तरह इस समय सबसे ज्यादा मैनपॉवर कास्ट दुर्गापुर का है। इन यूनिटों के अलावा अन्य यूनिटों को अपना मैनपॉवर कास्ट कम करने कहा जा रहा है। मैनपॉवर कास्ट को ही इस्पात मंत्रालय ने मैनपॉवर में कटौती करने का आधार बनाया है।

निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी, Mohan Yadav सरकार देगी खाली पड़ी सरकारी जमीन उद्योगों को

भोपाल. प्रदेश में खाली पड़ी वर्षों पुरानी अनुपयोगी शासकीय भूमि अब राज्य सरकार बेचेगी नहीं बल्कि निवेशकों को उद्योग लगाने के लिए दी जाएगी। इस दिशा में राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग ऐसी भूमि चिह्नित कर रहा है जिनका उपयोग बड़े उद्योगों के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के लिए किया जा सकेगा। दरअसल, कुछ जमीनें ऐसी है जो शहर के नजदीक या शहर के बीच में हैं। यहां बड़े उद्योग लगाना संभव नहीं इसलिए इन्हें लघु उद्योगों को आवंटित करने पर विचार किया जा रहा है। 198 एकड़ भूमि है खाली तिलहन संघ का सीहोर के पचामा में 70 एकड़ का सोयाबीन प्रोसेसिंग प्लांट, नर्मदापुरम के बनापुरा में 45 एकड़ में सोयाबीन प्रोसेसिंग प्लांट, मुरैना के जड़ेरूआ में 40 एकड़ में सरसों तेल प्लांट और सीधी जिले के चुरहट में 43 एकड़ में स्थित वनस्पति तेल का प्लांट है। कुल 198 एकड़ भूमि पर बंद पड़े इन चारों तेल उत्पादन प्लांटों की भूमि पर उद्योग स्थापित करने के लिए एमएसएमई और एमपीआइडीसी को देने की तैयारी है। बता दें, मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने हाल ही में कहा था कि सरकार अब सरकारी जमीनों को सीधे निजी हाथों में बेचने के बजाय, उन पर स्वयं या सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में आइटी पार्क, डाटा सेंटर और हाईटेक टाउनशिप विकसित करेगी। हाईवे किनारे की भूमि पर क्लस्टर विकसित करने की तैयारी राज्य सरकार की तैयारी है कि हाईवे किनारे से लगी प्राइम लोकेशन की जमीन पर क्लस्टर विकसित किए जाएं। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत फूड प्रोसेसिंग इकाई और टेक्सटाइल पार्क जैसे क्लस्टर लगाए जाएं। ऐसी प्राइम लोकेशन चिह्नित कर निवेशकों को बताई जाएगी। पांच साल में बेच दीं 101 शासकीय संपत्तियां मध्य प्रदेश सरकार ने पांच साल में 1,110 करोड़ रुपये में 101 शासकीय संपत्तियां बेच दीं। यह संपत्तियां प्रदेश में और प्रदेश के बाहर स्थित थीं। वर्ष 2020 में बनाए गए लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के अस्तित्व में आने के बाद ये संपत्तियां बेची गईं। राज्य परिवहन निगम के बस डिपो, विभिन्न बोर्ड की जमीन, सरकारी कार्यालय, जेल विभाग की भूमि सहित कुल 101 सरकारी संपत्तियों का विक्रय किया गया। ग्वालियर की 19 संपत्तियां, इंदौर की 13, भोपाल की चार, जबलपुर की तीन, उज्जैन की छह, मुरैना की तीन, नर्मदापुरम तीन, भिंड दो, बालाघाट की तीन सहित कुल 101 सरकारी संपत्तियां विक्रय की गई हैं। 4,44,941.88 वर्ग किमी क्षेत्रफल की परिसंपत्ति का विक्रय किया गया है। भोपाल में प्राइम लोकेशन पर स्थित आरटीओ और मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम की संपत्ति भी विक्रय करने की तैयारी थी लेकिन बाद में इसका प्रस्ताव टाल दिया गया। कलेक्टरों को पत्र भी लिखा है – सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए जिलों से भूमि मांगी है। खाली पड़ी शासकीय भूमि उद्योग को देने के लिए कलेक्टरों को पत्र भी लिखा है। – दिलीप कुमार, आयुक्त, एमएसएमई  

Bhopal में आग का तांडव, कचरा स्टेशन पर काबू पाने में घंटों मशक्कत

भोपाल. शहर के अन्ना नगर इलाके में स्थित कचरा ट्रांसफर स्टेशन में शनिवार देर रात भीषण आग लग गई, जिसकी सूचना मिलते ही फायर दमकल मौके पर पहुंची और करीब 10 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान स्टेशन में रखा कचरा पूरी तरह से जलकर खाक हो चुका था। नगर निगम के फायर अधिकारी सौरभ पटेल का कहना है की सूचना मिलते ही मौके पर सभी फायर स्टेशनों से दमकलों को रवाना कर दिया गया था। किसी भी तरह की जनहानि नहीं आग पर काबू पा लिया गया है इस दौरान किसी भी तरह की कोई जनहानि नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार, अन्ना नगर स्थित कचरा ट्रांसफर स्टेशन में शनिवार देर रात 12 बजे आग लग गई। स्टेशन से आग की लपटें देख लोगों ने फायर कंट्रोल रूम को सूचना दी। जानकारी मिलते ही गोविंदपुरा, फतेहगढ़, संत हिरदाराम नगर, कोलार, गांधीनगर समेत सभी 11 फायर स्टेशनों से दमकलें मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया गया था। आग पर काबू पाने में लग गए 10 घंटे 50 से अधिक दमकल व पानी के टैंकरों की मदद से 10 घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका था। बताया जा रहा है कि कचरा ट्रांसफर स्टेशन में रिसीलिंग वाले कपड़ों का ढेर लगा था। यह करीब 150 टन था। वहीं, 25 टन कचरा भी था। रिसाइकलिंग यूनिट में सबसे पहले आग लगी थी, जो करीब एक महीने से बंद पड़ा था। हालांकि, आग कैसे लगी इसका खुलासा नहीं हो सका है। इलाके में हड़कंप, रातभर नहीं सोए रहवासी अन्ना नगर में यह कचरा प्लांट मुख्य रोड से कुछ ही दूरी पर स्थित है। ऐसे में भीषण आग लगने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और लोग रात भर नहीं सोए। भीषण आग होने की वजह से फायर ब्रिगेड ,नगर निगम और पुलिस बल सुरक्षा के मद्देनजर रविवार सुबह तक मौके पर तैनात रहे। वहीं कुछ दमकलों को भी तैनात किया गया है।

भीषण गर्मी का कहर: Rajnandgaon में तापमान 45 डिग्री पहुंचा

राजनांदगांव. तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज होती जा रही है। आज फिर से जिले का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है। गर्मी से राहत पाने के लिए छांव ही एकमात्र सहारा बना हुआ है। मौसम में लगातार हो रहे परिवर्तन के चलते न केवल तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज होती जा रही है। बल्कि सूरज की किरणें भी पूरी तरह से लोगों को झुलसा रही है। तेज गर्मी पड़ने से राजनांदगांव जिले में लू जैसे हालात निर्मित हो गए हैं। कर्फ्यू जैसे हालात होने के कारण शहर और जिले की सड़के भी पूरी तरह से सुनसान नजर आ रही है। आसमान से बादल हट जाने के साथ ही फिर से सूरज की किरणें हलाकान कर रही है। दोपहर में चलना भी कठिन हो गया है। तेज गर्मी का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। जिले में पढ़ रही भीषण गर्मी के बाद प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट नजर आ रहा है। ज्ञात हो कि राजनांदगांव जिले में अचानक मौसम में आए परिवर्तन से लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, राजनांदगांव जिले में भी मौसम में फिर से परिवर्तन आ चुका है। आसमान से बादल हट जाने के बाद सूरज की किरणें तरह से धरती पर पड़ रही है। सुबह 8 बजे से लेकर शाम को 5 तक यही स्थिति बनी है। 

Ravi River और Sutlej River में माइनिंग पर कोर्ट सख्त, Punjab सरकार को समयसीमा तय

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रावी और सतलुज दरिया के क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में पंजाब सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों पर तीन हफ्ते के भीतर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने यह आदेश ड्रोन सर्वे रिपोर्ट के आधार पर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि निर्धारित खनन क्षेत्र से बाहर खुदाई पाई जाती है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाए। चंडीगढ़ निवासी गुरबीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि पंजाब में अवैध खनन का कार्य जोरों पर चल रहा है, जिससे राज्य सरकार को हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अमृतसर बार्डर और रावी दरिया किनारे में अवैध रेत खनन अभी भी जारी है। सुनवाई के दौरान सर्वे आफ इंडिया द्वारा प्रस्तुत ड्रोन आधारित सर्वे रिपोर्ट को अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। रिपोर्ट में हाई रिजोल्यूशन इमेजरी और डिजिटल टेरेन माडल के माध्यम से यह संकेत मिला कि कई स्थानों पर खुदाई निर्धारित खनन क्षेत्र से बाहर की गई है। हालांकि, ड्रोन सर्वे अभी केवल कुछ गांवों तक सीमित है और पूरे रावी-सतलुज बेल्ट का आकलन बाकी है। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधूरी रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक स्थिति का आकलन संभव नहीं है। कोर्ट ने सर्वे आफ इंडिया को निर्देश दिया कि शेष क्षेत्रों का व्यापक सर्वेक्षण तीन सप्ताह के भीतर पूरा कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे, ताकि पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। अदालत ने पंजाब सरकार को भी निर्देशित किया कि जैसे ही अंतिम रिपोर्ट प्राप्त हो, अवैध खनन से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जाए। इस पहले सुनवाई पर केंद्र सरकार ने भी बताया था कि बीएसएफ, सेना और केंद्र सरकार अवैध खनन और इसके जरिये सीमा क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने की दिशा में काम कर रही है। हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय को आदेश दिया था कि वह बताएं कि सीमा के निकट कैसे वैध खनन की अनुमति दी जा सकती है। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा था कि सीमा पर अवैध खनन बंद है और केवल रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही खनन की इजाजत दी जा रही है।

Punjab में सुरक्षा पर सियासत तेज, Harbhajan Singh की Z सिक्योरिटी हटी, केंद्र सरकार ने संभाली जिम्मेदारी

चंडीगढ़. पंजाब की राजनीति में उठापटक के बीच मान सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व क्रिकेटर और आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य हरभजन सिंह की जेड प्लस सुरक्षा वापस ले ली है। रविवार सुबह जालंधर स्थित उनके आवास से सुरक्षाकर्मियों को हटा लिया गया। इस कदम ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर टूट और बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा वापस लेने का निर्णय हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर लिया गया है। इससे पहले आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा में भी बदलाव किया गया था। बाद में उन्हें केंद्र की ओर से जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिल गई थी। अब हरभजन सिंह को भी केंद्र सरकार ने तुरंत सुरक्षा दे दी है।  दरअसल, राघव चड्ढा ने दावा किया था कि आप के सात राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं, जिनमें हरभजन सिंह का नाम भी शामिल बताया गया। हालांकि, हरभजन सिंह ने इस पूरे मामले पर अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, आप नेतृत्व ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि केवल तीन सांसदों ने ही पार्टी छोड़ी है। इधर, पार्टी छोड़ने की खबरों के बीच आप कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। जालंधर, लुधियाना और फगवाड़ा में कुछ सांसदों के आवास और संस्थानों के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए। दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे गए, जिससे माहौल और गरमा गया। पुलिस मौके पर मौजूद रही, लेकिन प्रदर्शन को लेकर सख्ती कम नजर आई। राष्ट्रपति से मिलने के लिए सीएम मान ने मांगा समय राजनीतिक तनाव के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। माना जा रहा है कि वे पार्टी बदलने वाले सांसदों के खिलाफ संवैधानिक कार्रवाई की मांग उठा सकते हैं। दूसरी ओर, आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर इन सांसदों की सदस्यता रद करने की मांग करेंगे। पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति को चुनावी मोड में ला दिया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की उठापटक को बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह संकट गहराता है तो इसका असर पार्टी के संगठन और चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल, हरभजन सिंह की चुप्पी और सुरक्षा वापसी के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि वे इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और पंजाब की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।