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18 अप्रैल तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा आयोजन, नवाचार व निवेश पर होगा मंथन

17 से होगा दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026: एक साथ एकत्र होंगे 10 हजार पशुपालक/दुग्ध उत्पादक  18 अप्रैल तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा आयोजन, नवाचार व निवेश पर होगा मंथन  दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026 का बुधवार को जारी किया गया आधिकारिक कर्टेन रेजर लखनऊ  दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर 17 व 18 अप्रैल को दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026 होगा। यह आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स हॉल में किया जाएगा। इसमें प्रदेश के 10 हजार पशुपालक/दुग्ध उत्पादक व निवेशक प्रतिभाग करेंगे। विभिन्न योजनाओं में उत्कृष्ट उपलब्धि अर्जित करने वाले पशुपालकों व निवेशकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। दो दिवसीय आयोजन में नवाचार व निवेश पर भी मंथन होगा। बुधवार को दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026 का बुधवार को आधिकारिक कर्टन रेजर जारी किया गया।  नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा नवीनतम प्रौद्योगिकी समेत अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की जाएंगी। महोत्सव में स्वदेशी व्यंजनों का फूड कोर्ट भी लगाया जायेगा।  दुग्ध क्षेत्र के उद्यम को बढ़ावा देने हेतु सिंगल विंडो के माध्यम से निवेशकों के साथ एमओयू भी होगा। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री दुग्ध विकास, पशुधन एवं राजनैतिक पेंशन धर्मपाल सिंह रहेंगे। साथ ही अपर मुख्य सचिव (पशुधन, मत्स्य एवं दुग्ध विकास) मुकेश कुमार मेश्राम, दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. आदि की भी मौजूदगी रहेगी।  इसमें प्रदेश के समस्त जनपदों के साथ-साथ देश-विदेश के लाखों गौ पालक/निवेशकों को ऑनलाइन जोड़ा जायेगा। विभिन्न योजनाओं में उत्कृष्ट उपलब्धि अर्जित करने वाले पशुपालकों एवं निवेशकों को सम्मानित/पुरस्कृत किया जाएगा। निजी क्षेत्र के निवेशकों द्वारा अपने स्टॉल कियोस्क के माध्यम से दुग्ध उत्पाद/नवाचार इत्यादि का प्रदर्शन किया जायेगा। साथ ही डेयरी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी, स्वदेशी नस्ल के गौ पालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर विचार विमर्श एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ विशेषज्ञों द्वारा साझा की जायेगी।  कार्यक्रम के प्रथम सत्र में ‘गौ पूजन, प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन, प्रगतिशील गौ पालकों एवं निवेशकों की सफलता की कहानी की पुस्तिका का विमोचन, नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अन्तर्गत विकासखण्ड स्तरीय विजेताओं को डीबीटी के माध्यम से पुरस्कार धनराशि का वितरण, प्रगतिशील गौपालकों, अग्रणी निवेशकों एवं प्रतिभाशाली नवाचारों का सम्मान, गौशाला एवं गोबर गैस के महत्व का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। द्वितीय सत्र में श्री बाबा गोरखनाथ कृष्ण तथा बलिनी एम०पी०सी० का प्रस्तुतिकरण, दुग्ध विज्ञान क्षेत्र के प्रख्यात शिक्षाविदों, नंद बाबा दुग्ध मिशन एवं दुग्ध नीति-2022 के लाभार्थियों द्वारा प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।

बिरसिंगपुर 500 मेगावाट यूनिट ने बिना रूके किया 150 दिन तक विद्युत उत्पादन

भोपाल मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) के संजय गांधी ताप विद्युत गृह, बिरसिंगपुर की 500 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने उत्कृष्ट तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए 150 दिनों तक निरंतर व निर्बाध विद्युत उत्पादन कर लगातार विद्युत उत्पादन करने की शृंखला में एक कड़ी और जोड़ दी। यह इकाई दिनांक 16 नवम्बर 2025 से सतत् संचालन में है, जो कि संयंत्र की विश्वसनीयता, संचालन क्षमता व उच्च स्तरीय रखरखाव का जीता जागता प्रमाण है। विद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक मानदंड में श्रेष्ठ प्रदर्शन 150 दिनों तक लगातार विद्युत उत्पादन करने के दौरान 500 मेगावाट की यूनिट ने न केवल सतत् उत्पादन का कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि विभिन्न परिचालन व तकनीकी मानकों पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। यूनिट ने 98.64 प्रतिशत का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (Plant Availability Factor) बनाए रखा, जो विद्युत उत्पादनके लिये यूनिट की स्थ‍िरता एवं उपलब्धता को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त यूनिट ने 98.45 प्रतिशत का प्लांट लोड फैक्टर (Plant Load Factor) दर्ज किया, जो कि उत्पादन क्षमता के अधिकतम उपयोग को इंगित करता है। यूनिट नंबर 5 ने सहायक विद्युत खपत (Auxiliary Power Consumption) को मात्र 5.52 प्रतिशत तक सीमित रखा गया, जो कि ऊर्जा दक्षता एवं संसाधनों के समुचित उपयोग का परिचायक है। मशीन के साथ ‘मेन’ का कमाल यूनिट नंबर 5 ने जहां मशीन के संदर्भ में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया, वहीं इस यूनिट से संलग्न अभियंताओं, तकनीकी कार्मिकों एवं ठेका श्रमिकों की समर्पित कार्यशैली, सतत निगरानी व समयबद्ध गुणवत्तापूर्ण रखरखाव के कारण यूनिट नंबर 5 श्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सफल हुई है। कठिन परिस्थितियों में भी संयंत्र की मशीनरी का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना टीम की उच्च पेशेवर दक्षता को परिलक्षित करता है। यूनिट नंबर 5 ने तीसरी बार बनाया रिकार्ड वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल 13 विद्युत यूनिट ने 100 दिन से ऊपर निर्बाध विद्युत उत्पादन का कीर्तिमान बनाया था। जिसमें संजय गांधी ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 3 ने एक बार और यूनिट नंबर 4 व 5 ने 2-2 बार यह उपलब्धि हासिल की थी। इस तरह यूनिट नंबर 5 ने अपने इस कीर्तिमान की दूसरी पारी को आगे बढ़ते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 का आग़ाज़ 150 दिन निर्बाध विद्युत उत्पादन कर किया।  

संबल योजना में आयु संशोधन पर सख्ती, मृत्यु के बाद बदलाव अब पूरी तरह प्रतिबंधित

भोपाल मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना में पंजीकृत श्रमिकों की आयु संबंधी प्रावधानों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि समग्र पोर्टल में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर ही संबल पोर्टल पर श्रमिक की आयु की गणना की जाएगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, किसी भी पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु के बाद उसकी आयु (जन्म तिथि) में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा। अपर सचिव श्रम विभाग संजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह नियम संबल योजना में भी सख्ती से लागू रहेगा। उन्‍होंने बताया है कि  समग्र पोर्टल पर मृत्यु प्रविष्टि दर्ज करने से पहले संबंधित हितग्राही की जन्म तिथि का गहन परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। एक बार मृत्यु दर्ज हो जाने के बाद किसी भी परिस्थिति में आयु परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी श्रमिक की आयु पोर्टल पर त्रुटिपूर्ण पायी जाती है, तो उसके सुधार के लिए आवेदन केवल आईटी विभाग के माध्यम से ही किया जा सकेगा। अन्य किसी माध्यम से आयु संशोधन मान्य नहीं होगा।  

मध्यप्रदेश में महिला नेतृत्व को बढ़ावा, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 91% लक्ष्य पूरा

भोपाल  मध्यप्रदेश में महिला-नेतृत्व विकास की दिशा में लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सहयोग को ध्यान में रखते हुए संचालित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत राज्य ने 91 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भुरिया ने कहा कि यह सफलता राज्य सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध प्रयासों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है। योजना के माध्यम से न केवल मातृ स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जा रहा है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह योजना भारत सरकार द्वारा 01 जनवरी 2017 से लागू की गई है, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुरूप संचालित है। योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को आंशिक वेतन हानि की भरपाई हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करना तथा विशेष रूप से दूसरी संतान के रूप में बालिका जन्म को प्रोत्साहित करना है। योजना में प्रथम प्रसव पर महिलाओं को 5,000 रुपये की राशि दो किश्तों में प्रदान की जाती है, जबकि दूसरी संतान के रूप में बालिका के जन्म पर 6,000 रुपये की राशि एकमुश्त दी जाती है। उल्लेखनीय उपलब्धियां प्रदेश में योजना की शुरुआत से अब तक 52.5 लाख से अधिक हितग्राही पंजीकृत किए जा चुके हैं। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6.61 लाख के लक्ष्य के विरुद्ध 6.01 लाख हितग्राहियों का पंजीयन किया गया, जो कि 91 प्रतिशत उपलब्धि को दर्शाता है।  

नारी शक्ति वंदन: मध्यप्रदेश में लखपति दीदी पहल के जरिए महिलाओं का हुआ आर्थिक सशक्तिकरण

नारी शक्ति वंदन: लखपति दीदी पहल से मध्यप्रदेश में महिलाओं को मिली आर्थिक सशक्तिकरण की नई दिशा भोपाल  मध्यप्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित “लखपति दीदी” पहल उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का लक्ष्य स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उनकी वार्षिक आय कम से कम 1 लाख रुपये तक पहुंचाना है। राज्य सरकार ने आगामी दो वर्षों में 16.41 लाख परिवारों को “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में 12.49 लाख महिलाएं इस श्रेणी में पहुंच चुकी हैं, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है। इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 526 मास्टर ट्रेनर और 20 हजार 517 लखपति सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) को प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षित कर्मी महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों में प्रशिक्षण देने के साथ उनकी आय-व्यय योजना तैयार करने और वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। योजना के तहत महिलाओं को कम से कम दो या अधिक आय स्रोतों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे जोखिम कम हो और आय में स्थिरता बनी रहे। कृषि क्षेत्र में पहल महिलाओं को व्यावसायिक सब्जी उत्पादन, मसाला खेती (हल्दी, धनिया, मिर्च आदि) और फलदार वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ड्रिप सिंचाई, पॉली मल्चिंग और पॉलीहाउस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, जैविक खाद और कीटनाशक निर्माण को भी बढ़ावा मिल रहा है। “ड्रोन दीदी” पहल के माध्यम से महिलाएं फसलों पर छिड़काव कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। गैर-कृषि क्षेत्र में विस्तार स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम, माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण योजना जैसे कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। पारंपरिक उत्पाद जैसे हैंडलूम, टेराकोटा, जरी-जरदोजी और स्थानीय अनाज (कोदो, कुटकी, रागी) को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। पशुपालन में सशक्तिकरण पशुपालन क्षेत्र में “पशुसखी” तैयार की जा रही हैं, जिन्हें तकनीकी प्रशिक्षण देकर आजीविका के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। क्लस्टर आधारित विकास और किसान उत्पादक कंपनियों के माध्यम से बाजार से जुड़ाव सुनिश्चित किया जा रहा है। समग्र विकास की दिशा में कदम यह पहल केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को सम्मानजनक जीवन, वित्तीय प्रबंधन और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बना रही है। विभिन्न विभागों के समन्वय से योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। “लखपति दीदी” पहल मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बनकर उभर रही है, जो आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करेगी। महिलाओं की आर्थिक उड़ान: 5 लाख स्व-सहायता समूहों से 59 लाख परिवार सशक्त प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में स्व-सहायता समूह (SHG) एक मजबूत आधार बनकर उभरे हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग 5 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर करीब 59 लाख परिवार आज आजीविका से सशक्त हो रहे हैं। डिजिटल आजीविका रजिस्टर (DAR) में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक “लखपति दीदी” योजना के तहत अब तक करीब 12.49 लाख महिलाएं इस श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि ग्रामीण महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है और वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने और नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ाया है। छोटे-छोटे बचत समूह अब बड़े आर्थिक नेटवर्क में बदलते जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। महिलाएं अब कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं। समूह आधारित गतिविधियों ने उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा है, जिससे वे ऋण लेकर अपने कार्यों का विस्तार कर पा रही हैं। सरकारी योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाओं को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से लाभ मिल रहा है। DAR में हो रही नियमित एंट्री से यह भी सुनिश्चित हो रहा है कि योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचे।  

28 हजार कर्मचारियों से हर घर का सर्वे, जानें मान सरकार के इस बड़े कदम के पीछे की रणनीति

चंडीगढ़  पंजाब की सियासत और सामाजिक ताने-बाने में 1 अप्रैल 2026 से एक ऐसी हलचल शुरू हो चुकी है, जो आने वाले दशकों तक अपना असर छोड़ेगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब के पहले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वे का बिगुल फूंक दिया गया है। करीब 250 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट और 28 हजार प्रगणकों की फौज के साथ पंजाब के करीब 65 लाख परिवारों का दरवाजा खटखटाने की यह कवायद जारी है। सरकार का लक्ष्य साफ है कि अगले तीन महीनों में पंजाब के हर घर का कच्चा चिट्ठा सरकारी फाइलों में दर्ज हो जाए।  हम समझेंगे कि क्या यह सिर्फ एक सरकारी गिनती है या फिर पंजाब की रवायतों और हकीकतों को बदलने वाला कोई बड़ा मास्टरप्लान। आखिर क्यों पड़ी इस भारी भरकम सर्वे की जरूरत ? हकीकत यह है कि पंजाब में अनुसूचित जाति आबादी करीब 32 प्रतिशत है, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। लेकिन यहां एक बड़ा पेंच है। यह आबादी कोई एकजुट समूह नहीं है। इस वर्ग में वाल्मीकि, रविदासिया, अधर्मी और मजहबी सिख जैसी कई जातियां शामिल हैं। इन सभी जातियों के बीच अपनी-अपनी अलग चुनौतियां और दूरियां हैं। अब तक सरकारों के पास कोई ठोस डाटा नहीं था कि विकास का पैसा वाकई किस घर की दहलीज तक पहुंचा है और कौन सा वर्ग आज भी पीछे छूटा हुआ है। यह सर्वे इसी बड़े डाटा गैप को भरने की एक गंभीर कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और कानूनी पेच इस सर्वे का एक बहुत गहरा कानूनी कनेक्शन भी है। अगस्त 2024 का वह ऐतिहासिक दिन याद कीजिए जब सुप्रीम कोर्ट ने द स्टेट ऑफ पंजाब बनाम दविंदर सिंह केस में एक अहम फैसला सुनाया था। अदालत ने साफ कहा था कि राज्य सरकारें आरक्षण के अंदर उप-वर्गीकरण कर सकती हैं। यानी आरक्षण के भीतर भी उन जातियों को प्राथमिकता दे सकती हैं जो सबसे ज्यादा पिछड़ी हुई हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की एक सख्त शर्त भी थी। कोर्ट का कहना था कि सरकारों के पास ऐसा करने के लिए मात्रात्मक और विश्वसनीय डाटा होना चाहिए। एक अप्रैल से शुरू हुआ यह सर्वे असल में वही डाटा जुटाने की कानूनी कवायद है, जिससे कल को सरकार के किसी भी फैसले को अदालत में चुनौती ना दी जा सके। सियासत की बिसात और 2027 के चुनाव का कनेक्शन जाहिर है जहां डाटा है, वहां राजनीति भी होगी। पंजाब की राजनीतिक पिच पर फिलहाल सभी दल इस सर्वे के साथ खड़े दिख रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और उनके निरंतर दबाव की जीत बता रही है, वहीं भाजपा के दिग्गज नेता भी इसे सामाजिक न्याय के लिए एक क्रांतिकारी कदम मान रहे हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए यह अपना चुनावी वादा पूरा करने और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े वोट बैंक को साधने का सीधा मौका है। निजता का डर: क्या सुरक्षित रहेगी आपकी निजी जानकारी ? इस बड़े कदम के साथ सबसे बड़ी चिंता निजता की उठ रही है। जब 28 हजार सरकारी कर्मचारी आपके घर आकर आपकी जाति, आपकी कमाई और आपकी निजी जिंदगी के सवाल पूछेंगे, तो डर लगना लाजमी है। क्या यह डाटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा? क्या डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट के इस दौर में सरकार लोगों की प्रोफाइलिंग होने से रोक पाएगी? हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूर्ण गोपनीयता का भरोसा दिया है, लेकिन डिजिटल दौर में भरोसे और हकीकत के बीच हमेशा एक बारीक लकीर होती है। अंत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह डाटा वाकई पंजाब की सदियों पुरानी असमानता को खत्म करने का औजार बनेगा या फिर यह जातियों की दीवारें और ऊंची कर देगा। सर्वे के नतीजे ही भविष्य के इस पंजाब की असली तस्वीर साफ करेंगे।

महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी होगी आधी कीमत में, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला

आधी कीमत में महिलाओं के नाम होगी प्रॉपर्टी, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का फैसला, प्रदेश की तस्वीर बदलने वाला कदम महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी होगी आधी कीमत में, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का बड़ा फैसला: महिलाओं को मिलेगी आधी कीमत पर प्रॉपर्टी, प्रदेश की तस्वीर बदलने की दिशा में कदम रायपुर छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने एक ही झटके में प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक दिशा बदलने वाले दो बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी है। बुधवार को रायपुर में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने UCC यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए हाई-लेवल कमेटी के गठन और महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्री शुल्क में 50% कटौती का ऐलान किया। इसका उद्देश्य राज्य में कानूनों में एकरूपता लाना और महिलाओं को संपत्ति का अधिकार दिलाने में मदद करना है, जिसे ड्राफ्ट तैयार कर विधानसभा में पेश किया जाएगा। UCC के लिए रंजना देसाई फॉर्मूला छत्तीसगढ़ सरकार ने वही रास्ता चुना है जो उत्तराखंड ने अपनाया था। रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी नागरिकों, कानूनी विशेषज्ञों और संस्थाओं से सीधा संवाद करेगी। एक समर्पित वेब पोर्टल के जरिए जनता की राय ली जाएगी। इसका मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों को खत्म कर एक समान कानून लाना है। खजाने पर 153 करोड़ की चोट कैबिनेट ने महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50% की छूट को मंजूरी दी है। हालांकि, इससे सरकारी खजाने पर 153 करोड़ रुपये का सालाना बोझ पड़ेगा, लेकिन सरकार इसे खर्च नहीं बल्कि निवेश मान रही है। प्रशासन का तर्क है कि इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के नाम पर संपत्ति का स्वामित्व बढ़ेगा, जो लंबे समय में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। 2026 के बड़े मिशन की तैयारी UCC का मुद्दा सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरा राजनीतिक महत्व रखता है। रंजना प्रकाश देसाई वही जस्टिस हैं जिन्होंने उत्तराखंड के UCC ड्राफ्ट में मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्हें छत्तीसगढ़ की कमान सौंपना यह साफ करता है कि सरकार बिना किसी देरी के एक सटीक और कानूनी रूप से मजबूत मॉडल चाहती है। वहीं, रजिस्ट्री में छूट देना एक चतुर आर्थिक दांव है, जो मध्यम वर्ग की महिलाओं को सीधे तौर पर सरकार से जोड़ता है। यह कदम विपक्षी दलों के लिए महिला कार्ड और सांप्रदायिक कार्ड दोनों को एक साथ फेल करने की रणनीति जैसा है।     छत्तीसगढ़ में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित।     जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में जनता और विशेषज्ञों से ली जाएगी राय।     महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्री फीस अब आधी होगी, जिससे मालिकाना हक बढ़ेगा।     राजस्व में ₹153 करोड़ की कमी के बावजूद इसे सामाजिक निवेश बताया गया।     कमेटी की सिफारिशों को मंजूरी के बाद विधानसभा में विधेयक के रूप में लाया जाएगा।  

पॉलिटेक्निक कालेज के विद्यार्थियों को मिलेगी सौ सीटर छात्रावास की सुविधा : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने नवीन सर्किट हाउस सभागार में आयोजित बैठक में विभिन्न निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पॉलिटेक्निक कालेज के विद्यार्थियों के लिए सौ सीटर छात्रावास निर्माण के लिए 11 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। छात्राओं के लिए कालेज परिसर तथा छात्रों के लिए राजस्व अधिकारी द्वारा निराला नगर में चिन्हित जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कराएं। इसके साथ पॉलिटेक्निक कालेज को 144 लाख रुपए की लागत से स्पोर्ट्स काम्पलेक्स निर्माण की भी मंजूरी दी गई है। तकनीकी अधिकारी स्वीकृत कार्यों को तत्काल शुरू कराएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बायपास मार्ग में पुल के सुधार का कार्य 15 दिन में अनिवार्य रूप से पूरा कराएं। पुल से आवागमन बंद होने के कारण रीवा शहर तथा आसपास के क्षेत्रों में जाम लगने के कारण आमजन को कठिनाई हो रही है। रात में भी विवाह समारोहों के कारण सड़कों पर चहल-पहल रहती है। ऐसे में भारी वाहनों को शहर से निकालना भी कठिन है। बायपास रोड के चौड़ीकरण का कार्य भी तय समय सीमा में पूरा कराएं। कलेक्टर निर्माण कार्यों की सतत निगरानी करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सोहागी घाट में दुर्घटनाएं रोकने के लिए सुधार कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति जारी हो गई है। इसके लिए 14 करोड़ रुपए से अधिक की राशि मंजूर कर दी गई है। वन मण्डलाधिकारी निर्माण कार्यों के लिए शीघ्र स्वीकृति जारी कराएं, जिससे निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। बैठक में एमपीआरडीसी के प्रभारी जीएम अंशुल करोड़िया ने बताया की बायपास में पुल के सुधार का कार्य 30 अप्रैल तक पूरा हो जाएगा। सोहागी घाटी में निर्माण कार्य के लिए वन विभाग द्वारा पूर्व में अनुमति दी गई थी। नवीन कार्य के लिए ऑनलाइन आवेदन किया गया है। अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, प्रभारी आयुक्त नगर निगम मेहताब सिंह गुर्जर, वन मण्डलाधिकारी लोकेश निरापुरे, शैलेन्द्र शुक्ला, एसडीएम हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी तथा निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

जयपुर: मुख्यमंत्री ने पदोन्नति नियमों में छूट और नए पदों की घोषणा की

जयपुर जयपुर सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कर्मचारियों और अधिकारियों के हित में कई बड़ी घोषणाएं की हैं. मुख्यमंत्री ने सहायक शासन सचिव के 15 नए पद सृजित करने का ऐलान किया. इसके साथ ही पदोन्नति को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने अनुभव की शर्त में 2 वर्ष की छूट देने की घोषणा की है, जिससे सचिवालय के बड़े वर्ग को लाभ मिलने की संभावना है. इस फैसले से अधिकारियों और कर्मचारियों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है. अनुकंपा नियुक्ति के दायरे को बढ़ाते हुए अब पुत्रवधू को भी इसका लाभ देने का फैसला किया गया है. आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर विचार के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी. नवनिर्वाचित कार्यकारिणी की शपथ शासन सचिवालय प्रांगण में राजस्थान सचिवालय सेवा अधिकारी संघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन हुआ. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अध्यक्षता करते हुए नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस दौरान मंत्री कन्हैयालाल चौधरी भी मौजूद रहे.  मुख्यमंत्री ने कहा कि पद केवल अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है, और अधिकारियों का आचरण संतुलित, जवाबदेह और पारदर्शी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सचिवालय राज्य की 8 करोड़ जनता की उम्मीदों और योजनाओं का केंद्र है, जहां से महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं. पारदर्शिता के साथ काम करने की अपील मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों से निष्ठा, समर्पण और पारदर्शिता के साथ काम करने की अपील की और कहा कि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने मिशन कर्मयोगी का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए नई तकनीक, ई-गवर्नेंस और पेपरलेस व्यवस्था को अपनाना जरूरी है. सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जल और बिजली व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है और आने वाले समय में प्रदेश में इन दोनों क्षेत्रों में और सुधार देखने को मिलेगा. कार्यक्रम में मुख्य सचिव बी. श्रीनिवास और संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष अगवन शर्मा सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे.

69554 किसानों से 30 लाख 79 हजार 96 क्विंटल गेहूँ उपार्जित : मंत्री राजपूत

भोपाल.  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक 69 हज़ार 554 किसानों से 30 लाख 79 हजार 96 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 178 करोड़ 57 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। गेहूँ का उपार्जन सभी संभागों में शुरू हो चुका है। अभी तक 3 लाख 32 हजार 58 किसानों द्वारा 1 करोड़ 45 लाख 92 हजार 76 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। किसान गेहूँ बिक्रय के लिये 24 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुक कर सकते हैं। खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूँ विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 1500 क्विंटल की गई है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूँ बिक्री की सभी सुविधाएं मंत्री राजपूत ने बताया है कि जिन जिलों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहाँ गेहूँ विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने, तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूं में से 20 लाख 43 हजार 438 क्विंटल गेहूँ का परिवहन किया जा चुका है। प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।