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लखनऊ हादसे के बाद बड़ा फैसला, 200 स्कूलों में होगी फायर सेफ्टी जांच और प्रशिक्षण

लखनऊ  लखनऊ में पिछले सोमवार को कोचिंग सेंटर में लगी आग की घटना के बाद सभी जिलों में स्कूलों की अग्निसुरक्षा के लिए 10 सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित होने वाली समिति में एडीएम, पुलिस आयुक्त या एसएसपी द्वारा नामित पुलिस अधिकारी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, मुख्य कोषाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी, राज्य आपदा मोचन बल द्वारा नामित अधिकारी के अलावा एनसीसी द्वारा नामित अधिकारी को समिति का सदस्य बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गठित की जाने वाली समिति अपने-अपने जिलों में 200-200 स्कूलों को चिह्नित करेगी। इनमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के 100 विद्यालय, 60 निजी विद्यालय व 40 सरकारी व गैर सरकारी महाविद्यालय शामिल होंगे। चिह्नित स्कूलों में अग्निसुरक्षा के उपायों की जांच की जाएगी। साथ ही विद्यार्थियों को अग्निसुरक्षा व आपदा से बचाव को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। आपदा की स्थिति में सुरक्षा को लेकर होंगे काम इसके लिए एसडीआरएफ, पीएसी, एनडीआरएफ, अग्निसुरक्षा विभाग, एनसीसी, एनएसएस, सीआइएसएफ, सिविल डिफेंस विभागों के साथ समन्वय बनाकर विद्यार्थियों को मास्टर ट्रेनर के जरिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा इस संदर्भ में जारी आदेश के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों व स्कूलों के स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे आपदा की स्थिति में सभी मिलकर सुरक्षा के उपायों पर काम कर सकें। मास्टर ट्रेनर विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार, अग्निशमन यंत्रों का उपयोग, आपदा को लेकर विद्यालय या महाविद्यालय में सुरक्षित स्थल की पहचान, प्रवेश व निकासी की जानकारी देंगे। साथ ही बाढ़, आंधी, तूफान व बज्रपात से बचाव की भी जानकारी विद्यार्थियों को दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद हर जिले में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश आपदा प्राधिकरण ने दिए हैं। इस योजना के क्रिन्यावयन की जिम्मेदारी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपी गई है।

लोनी में प्रशासन का बुलडोजर ऐक्शन: 70 लाख की सरकारी जमीन से हटाया गया अतिक्रमण

गाजियाबाद उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों से अवैध अतिक्रमण हटाने का सिलसिला लगातार जारी है. इसी कड़ी में गाजियाबाद के लोनी इलाके के ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. जिला प्रशासन ने ट्रॉनिका सिटी के सेक्टर सी-8 में सरकारी भूमि पर बनी करीब 25 से 30 वर्ष पुरानी पीर बाबा की मजार को ध्वस्त कर दिया है. भारी सुरक्षा घेरे के बीच हुई इस कार्रवाई से प्रशासन ने लाखों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को पूरी तरह कब्जा मुक्त करा लिया है. मिली जानकारी के मुताबिक, यह मजार पिछले लगभग तीन दशकों (30 साल) से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाई गई थी. यहां एक खादिम (मुल्तवी) बैठकर मजार की देखरेख करता था. स्थानीय लोगों के अनुसार, मजार पर आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान-दक्षिणा से ही उसका घर चलता था. इसके साथ ही वहां टोने-टोटके और झाड़-फूंक का काम भी किया जाता था. चौंकाने वाली बात यह है कि इस मजार पर आस्था जताने वालों में सबसे बड़ी संख्या हिंदू समाज के लोगों की थी, जो यहां मन्नत मांगने आते थे. भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई शांतिपूर्ण कार्रवाई अवैध मजार को हटाने की इस संवेनदशील कार्रवाई के दौरान जिला प्रशासन पूरी तैयारी के साथ पहुंचा था. डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी और स्थानीय एसडीएम की सीधी निगरानी में पूरी ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया. मौके पर किसी भी तरह के विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया था. प्रशासन की मुस्तैदी के चलते पूरी कार्रवाई बिना किसी विरोध के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई. 70 लाख की जमीन मुक्त, आगे भी जारी रहेगा अभियान प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई के जरिए करीब 70 लाख रुपये मूल्य की बेशकीमती सरकारी भूमि को भू-माफियाओं और अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है. जिला प्रशासन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ यह अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा. यदि किसी भी व्यक्ति द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण या अतिक्रमण करने की कोशिश की गई, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में जहां-जहां भी सरकारी जमीनों पर अवैध धार्मिक स्थल या अन्य अतिक्रमण किए गए हैं, उन्हें चिन्हित कर लगातार हटाने की कार्रवाई की जा रही है.  

महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक समेत कई बड़े राज्यों को बिजली आपूर्ति में छोड़ा पीछे

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की बेहतरीन बिजली व्यवस्था लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। भीषण गर्मी, बढ़ती बिजली मांग और प्राकृतिक बाधाओं के बावजूद उप्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति कर रहा है। इसे योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वही मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और यूपीपीसीएल के कुशल प्रबंधन से यूपी देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति करने वाले राज्यों में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। विशेष बात यह है कि उत्तर प्रदेश लगातार अपने ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए बिजली आपूर्ति के नए मानक स्थापित कर रहा है। 19 जून से उत्तर प्रदेश लगातार डिमांड बिजली आपूर्ति में देश का नंबर-1 राज्य बना हुआ है। उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र, गुजरात जैसे बड़े औद्योगिक राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। साथ ही तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से भी आगे निकलकर अपनी क्षमता साबित की है। इस तरह बिजली मांग के मामले में यूपी ने देश के कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। 24 जून को रिकॉर्ड 32,673 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई अगर डिमांड बिजली आपूर्ति पर नजर डालें तो 27 जून को उत्तर प्रदेश में 31949 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई। इसी तरह 26 जून को 31,839 मेगावाट और 25 जून को 31,852 मेगावाट की आपूर्ति दर्ज की गई थी। इतना ही नहीं, 24 जून को उत्तर प्रदेश ने नया इतिहास रचते हुए रात करीब 9:51 बजे 32,673 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति की थी। यह अब तक की सर्वाधिक पीक डिमांड आपूर्ति थी। इसके पहले 23 जून की रात 10:26 बजे 32,405 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई थी। इसी तरह 22 जून को 31,841 मेगावाट, 21 जून को 32,348 मेगावाट, 20 जून को 31,549 मेगावाट और 19 जून को 30,968 मेगावाट बिजली आपूर्ति दर्ज की गई।  महानगर से लेकर गांव तक मिल रही लगातार बिजली योगी सरकार में प्रदेश के शहरों से लेकर गांव तक निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है। लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर और वाराणसी जैसे महानगरों में लगातार 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी 22 से 24 घंटे तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इससे आम जनता को बड़ी राहत मिली है। इस तरह जो प्रदेश 2017 से पहले बिजली कटौती और खराब आपूर्ति व्यवस्था के लिए चर्चा में रहता था, वही आज रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति और मजबूत ऊर्जा प्रबंधन के लिए देशभर में मिसाल बन गया है।  उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए यूपीपीसीएल कृत संकल्पित उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में लगे हुए कार्मिक दिन-रात परिश्रम कर रहे हैं। उच्च अधिकारियों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा ही है। यूपीपीसीएल उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए कृत संकल्पित है। निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने जिस तरह रिकॉर्ड स्तर पर डिमांड बिजली आपूर्ति की है, वह हमारी मजबूत विद्युत अवसंरचना, बेहतर प्रबंधन और टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी और रिकॉर्ड स्तर की बिजली मांग के बावजूद शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति की जा रही है।

हाथरस में योगी का बड़ा ऐलान: ₹548 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण, विकास पर जोर

लखनऊ उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (28 जून) को हाथरस में 548 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. इस दौरान उन्होंने जनता को संबोधित किया. उन्होंने खासतौर पर मुहर्रम का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस बार राज्य में करीब 12 हजार मोहर्रम जुलूस निकले, लेकिन कहीं भी दंगा, पथराव या कर्फ्यू जैसे हालात नहीं बने. उन्होंने कहा कि पहले कुछ लोग दूसरों के घरों के सामने ढोल-ताशे बजाकर माहौल बिगाड़ते थे, लेकिन अब यह सब बंद हो गया है और सभी धार्मिक आयोजन शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हो रहे हैं. सीएम ने कहा कि 2017 के पहले राज्य के हर जिले में दंगे होते थे, महीनों महीनों कर्फ्यू होता था जिससे आमजन त्रस्त होता था. लेकिन आज हालात बदल गए हैं. उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश दंगों और कर्फ्यू के कारण बदनाम था, लेकिन पिछले 9 सालों में प्रदेश में न कोई दंगा हुआ, न कर्फ्यू लगा और न ही गुंडागर्दी होने दी गई. ‘मोहर्रम का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ’ उन्होंने कहा कि हाल ही में मोहर्रम का आयोजन भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. उन्होंने कहा कि पहले मोहर्रम के नाम पर सड़कों पर हथियारों का प्रदर्शन होता था, तलवारबाजी के दौरान राहगीरों पर हमले हो जाते थे. ताजिया निकालने के नाम पर गरीबों की झोपड़ियां हटाई जाती थीं, मकानों के छज्जे तोड़े जाते थे और हाईटेंशन बिजली की लाइनों को हटाने का दबाव बनाया जाता था. सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने स्पष्ट व्यवस्था बनाई है कि किसी गरीब की झोपड़ी या मकान नहीं हटेगा और न ही हाईटेंशन लाइनें हटाई जाएंगी. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ताजिया की ऊंचाई कम करनी होगी. उन्होंने कहा कि अगर ताजिया ज्यादा ऊंचा होगा तो हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने का खतरा रहेगा, इसलिए सुरक्षा सर्वोपरि है. ‘ताजिए की ऊंचाई सीमित रखनी होगी’ उन्होंने कहा कि मुहर्रम के नाम पर अब राज्य में कोई हंगामा नहीं होता. अब न किसी की झोपड़ी तोड़ी जाती है और न ही किसी को किसी तरह की परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि आप ताजिए को सजाइए, लेकिन किसी गरीब का घर तोड़ने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि ताजिए की ऊंचाई सीमित रखनी होगी. अगर ताजिया बहुत ऊंचा होगा, तो बिजली के तारों की चपेट में आने का खतरा रहेगा . विकास तभी संभव है, जब सुरक्षा का बेहतर माहौल हो’ मुख्यमंत्री ने कहा कि वह हाथरस की तीनों विधानसभा क्षेत्रों—हाथरस, सादाबाद और सिकंदराराऊ—के लिए करीब 550 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का उपहार देने के लिए विशेष रूप से आए हैं. उन्होंने इसके लिए हाथरस जनपद के सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि विकास तभी संभव है, जब सुरक्षा का बेहतर माहौल हो. उन्होंने कहा कि सुरक्षित वातावरण में ही विकास की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जहां सुरक्षा नहीं होती, जहां दंगे और अराजकता का माहौल होता है, वहां विकास और उज्ज्वल भविष्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती. ‘पहले प्रदेश के हर जिले में दंगे होते थे’ उन्होंने कहा कि साल 2017 से पहले प्रदेश का ऐसा कौन-सा जिला था, जो दंगों से अछूता रहा हो. उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग की घटना, कोसीकलां के दंगे, मेरठ और अलीगढ़ के दंगे तथा मुजफ्फरनगर की हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय आए दिन कर्फ्यू लगते थे. इससे आम जनता का व्यापार चौपट हो जाता था, नौजवानों की नौकरियां प्रभावित होती थीं, जनजीवन अस्त-व्यस्त रहता था और प्रदेश की छवि पूरे देश में खराब होती थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में व्यापारी, किसान और आम नागरिक असुरक्षित महसूस करते थे. जगह-जगह लूटपाट होती थी और बेटियों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता था. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने अपराधियों और माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है. उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है एवं देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है. समाजवादी पार्टी पर बोला हमला अपने संबोधन में सीएम ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने अखिलेश यादव का बयान पढ़ा, जिसमें अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि आप क्या अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाएंगे, पहले आप अपना इतिहास देखिए. उन्होंने कहा कि रामभक्तों पर गोली आपकी ही सरकार ने चलवाई थी. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या आज अपनी गौरवशाली पहचान वापस प्राप्त कर रही है. योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान कृष्ण जन्माष्टमी जैसे आयोजनों को भी रोका गया और कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया था. उन्होंने कहा कि आज प्रदेश सरकार धार्मिक परंपराओं और आस्था के आयोजनों को सम्मान के साथ आगे बढ़ा रही है. उन्होंने कहा कि हाथरस में 22 से अधिक मंदिरों का सुंदरीकरण कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि पहले जो धनराशि कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल के निर्माण पर खर्च की जाती थी, उसी धन का उपयोग अब मंदिरों के विकास और सुंदरीकरण के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बिना भेदभाव विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है और प्रदेश में सुशासन एवं सुरक्षा का वातावरण स्थापित किया गया है. कांग्रेस पर भी जमकर बरसे मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी हमेशा जनता को गुमराह करने का काम करती रही हैं. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों दल संविधान बचाने की बात कर रहे थे, जबकि 25 जून 1975 को आपातकाल लगाकर संविधान की हत्या कांग्रेस ने ही की . उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान का सबसे बड़ा अपमान कांग्रेस ने किया.

यीडा द्वारा विकसित हो रहे चार मुख्य अर्बन नोड्स में हाथरस बनेगा इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब

ग्रेटर नोएडा/हाथरस  योगी सरकार में उत्तर प्रदेश के एक और जिले व उसके कई गांवों को हाईटेक शहर बनाने की तैयारी चल रही है। यह जल्द ही इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के साथ लाखों रोजगार पैदा करने वाला डेस्टिनेशन बनकर उभरेगा। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की गति को और तेज करते हुए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने एक बेहद महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। यमुना एक्सप्रेसवे के फेज-2 विकास के तहत 'महायोजना/मास्टर प्लान 2041' के अंतर्गत 'हाथरस अर्बन सेंटर' को एक हाई-टेक औद्योगिक और आवासीय सैटेलाइट टाउन के रूप में डिजाइन किया जा रहा है।  यीडा द्वारा विकसित किए जा रहे चार मुख्य अर्बन नोड्स (अलीगढ़, मथुरा, आगरा और हाथरस) में से हाथरस को विशेष तौर पर एक प्रमुख इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में चुना गया है। 10 हजार एकड़ में बसेगा नया शहर इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए हाथरस और सासनी तहसील के कुल 50 से अधिक गांवों को अधिसूचित किया गया है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 4 हजार हेक्टेयर (करीब 10 हजार एकड़) होगा। इस अत्याधुनिक शहर के नियोजन के लिए कंसल्टेंट कंपनी 'आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड' को नियुक्त किया गया है, जो जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तकनीक पर आधारित नक्शे से इसका सुनियोजित विकास सुनिश्चित कर रही है। अर्बन सेंटर की चार प्रमुख श्रेणियां मास्टर प्लान 2041 के तहत इस अर्बन सेंटर को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहला औद्योगिक जोन, इस विशाल भूभाग का मुख्य ध्यान फैक्ट्रियों और भारी विनिर्माण इकाइयों पर केंद्रित होगा। दूसरा आवासीय क्षेत्र, यहां काम करने वाले लोगों के लिए आधुनिक सोसाइटी, फ्लैट्स और किफायती आवास  विकसित किए जाएंगे। तीसरा कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स हब जो व्यापारिक गतिविधियों के लिए मॉल, कमर्शियल टावर, होटल्स और विशाल वेयरहाउस के लिए विशेष स्थान आरक्षित हैं। चौथा ग्रीन बेल्ट, जहां पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए कुल योजना क्षेत्र का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरी तहत हरित और खुले क्षेत्र के रूप में संरक्षित रहेगा। शानदार कनेक्टिविटी और रणनीतिक लाभ प्रस्तावित हाथरस अर्बन सेंटर की भौगोलिक स्थिति इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यह नया शहर सीधे नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के कैचमेंट एरिया में आता है, जिसके लिए यीडा एक एक्सप्रेस-रोड नेटवर्क विकसित कर रहा है। इसके साथ ही यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेसवे के काफी करीब है और नेशनल हाईवे-93 (आगरा-अलीगढ़), बरेली-मथुरा हाईवे तथा स्टेट हाईवे-33 से बेहतर रूप से जुड़ा हुआ है। इसे आगरा के एक 'सैटेलाइट टाउन' के रूप में देखा जा रहा है, जिससे ताजनगरी का औद्योगिक दबाव भी कम होगा। स्थानीय उद्योगों को मिलेगी ग्लोबल पहचान हाथरस में वर्तमान में सक्रिय 10 हजार से अधिक पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों को इस सेंटर में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान किया जाएगा। एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओडी) के तहत हाथरस की विश्वप्रसिद्ध हींग और गुलाल उद्योग को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पैकेजिंग और एक्सपोर्ट हब की सुविधाएं मिलेंगी। वहीं कृषि और फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र को भी फायदा होगा, जिसके तहत ब्रज क्षेत्र की कृषि प्रधानता को देखते हुए यहां बड़े कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और डेयरी प्लांट्स को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही रेडीमेड गारमेंट्स (होजरी), ग्लास बीड्स (कांच के मोती), पीतल के आभूषण (पायल), मशीन टूल्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के कलपुर्जों के लिए विशेष ब्लॉक बनाए जाएंगे। अगले चरण में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे मेडिकल-सर्जिकल उपकरण और पावर ग्रिड मशीनरी बनाने वाली वैश्विक कंपनियों को भी आमंत्रित किया जाएगा। लाखों की संख्या में रोजगार की संभावनाएं प्राधिकरण के अनुसार इस महायोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए लाखों की संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा।

सपा अध्यक्ष सच में धार्मिक हैं तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर खुलकर बोलें: सीएम योगी

हाथरस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कड़ा प्रहार किया है। सीएम ने कहा कि अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाने की बात करने वालों को पहले अपना इतिहास देखना चाहिए। जिस समाजवादी पार्टी की सरकार ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया, कृष्ण जन्माष्टमी के आयोजनों पर रोक लगाई और कांवड़ यात्रा तक प्रतिबंधित कर दी, वह आज अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाने की बात कर रही है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को हाथरस, सिकंदराराऊ व सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में 548 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 143 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। वहीं लाभार्थियों को आवास की चाभी, स्मार्ट फोन, युवा उद्यमी योजना के तहत चेक वितरित किए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों का निरीक्षण किया। इस दौरान स्टॉल के पास एक नन्ही बच्ची को चम्मच से दूध पिलाया, गोद में लेकर दुलार किया।    सीएम योगी ने कहा अखिलेश यादव का बयान पढ़कर आश्चर्य हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार बनने पर अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, अरे, आप क्या धार्मिक नगरी बनाएंगे। पहले अपना इतिहास देखिए। आपकी ही समाजवादी पार्टी की सरकार ने रामभक्तों पर गोलियां चलाई थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज अयोध्या त्रेता युग की स्मृतियों को साकार करती दिखाई दे रही है। रामभक्तों के परिश्रम और पुरुषार्थ से अयोध्या विश्वभर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी है। ऐसे में अब समाजवादी पार्टी को भी अयोध्या की याद आने लगी है। कब्रिस्तानों की नहीं, मंदिरों की आवश्यकता है मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने थानों और जेलों में होने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के कार्यक्रम तक बंद करा दिए थे। कांवड़ यात्रा पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। अब हाथरस में 22 से अधिक मंदिरों का सौंदर्यीकरण कराया गया है, लेकिन यह कार्य समाजवादी सरकार में कभी संभव नहीं था। तब यही पैसा कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल बनाने में खर्च होता था। हमने वही पैसा मंदिरों की ओर डायवर्ट किया है। कब्रिस्तानों की नहीं, मंदिरों की आवश्यकता है क्योंकि मंदिर हमारी आस्था के केंद्र हैं। रामलला के दर्शन कर लो, शायद सद्बुद्धि आ जाए मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि वे अयोध्या की चिंता छोड़ दें क्योंकि अयोध्या अपनी पहचान के लिए किसी की मोहताज नहीं है। अखिलेश जी, अयोध्या को रामभक्तों ने सजाया और संवारा है। आप उसकी चिंता मत करिए। पश्चाताप कर एक बार रामलला के दर्शन कर लीजिए, शायद सद्बुद्धि आ जाए। सपा वास्तव में धार्मिक आस्था का सम्मान करना चाहती है तो उसे खुलकर मथुरा-वृंदावन और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में बोलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन चला था, उसी प्रकार श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए भी अभियान चलाने की बात समाजवादी पार्टी को खुलकर करनी चाहिए। खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे योगी ने कहा कि उनकी सरकार श्रीकृष्ण जन्मभूमि आने वाले श्रद्धालुओं को सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। लेकिन समाजवादी पार्टी में इतनी हिम्मत नहीं है क्योंकि उसका पूरा एजेंडा केवल तुष्टिकरण की राजनीति तक सीमित है। अखिलेश जी, आपमें हिम्मत नहीं है। आप तो मुल्ला-मौलवियों के सामने घुटने टेकने के अलावा कोई ऐसा एजेंडा नहीं रखते जो प्रदेश के विकास, अयोध्या, मथुरा और काशी के उत्थान तथा उनकी पौराणिक पहचान को मजबूत करने का हो। जनता की आंखों में धूल झोंकना बंद करिए। 'खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे' वाली कहावत को चरितार्थ मत करिए। अयोध्या की पहचान पूरी दुनिया में है और उसे किसी राजनीतिक दल के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस ने संविधान का गला घोंटा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों दल संविधान बचाने की बात कर रहे थे, जबकि देश में संविधान की सबसे बड़ी हत्या कांग्रेस ने 25 जून 1975 को आपातकाल लगाकर की थी। कांग्रेस ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान का गला घोंटा था। उस समय लोकतंत्र की आवाज उठाने वाले सभी विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। जयप्रकाश नारायण, राज नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव और कल्याण सिंह जैसे तमाम नेताओं को कांग्रेस सरकार ने जेल में बंद कर दिया था ताकि वे जनता के बीच जाकर कांग्रेस का विरोध न कर सकें। एक लाख से अधिक लोगों की गिरफ्तारियां हुई थीं। मुलायम सिंह यादव का भी कांग्रेस ने अपमान किया था और उन्हें जेल भेजा था। कांग्रेस व सपा ने वही काम किए जो समाज और राष्ट्रहित के प्रतिकूल रहे योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज वही समाजवादी पार्टी कांग्रेस के साथ खड़ी होकर मुलायम सिंह यादव की विरासत का भी अपमान कर रही है। कांग्रेस ने बाबा साहब आंबेडकर के सपनों को तोड़ने का काम किया और समाजवादी पार्टी उसी कांग्रेस के साथ खड़ी होकर उसके पापों में भागीदार बन रही है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने हमेशा वही काम किए जो समाज और राष्ट्रहित के प्रतिकूल रहे। उन्होंने जनता से ऐसे दलों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि प्रदेश का विकास, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और आस्था के केंद्रों का सम्मान केवल डबल इंजन सरकार में ही संभव हुआ है। 2017 से पहले दंगे, कर्फ्यू और माफिया थे पहचान, आज यूपी विकास और सुरक्षा का मॉडल बना : सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास केवल वहीं संभव है, जहां सुरक्षा और कानून व्यवस्था का मजबूत वातावरण हो। तीनों विधानसभा क्षेत्रों को लगभग 548 करोड़ रुपये की परियोजनाएं उपहार स्वरूप मिली हैं, जिसके लिए सभी क्षेत्रवासियों को बधाई देता हूं। सुरक्षा के बेहतर माहौल में ही विकास की आशा और आकांक्षाएं पूरी होती हैं। जहां दंगे, उपद्रव और बार-बार कर्फ्यू लगता हो, वहां विकास और उज्ज्वल भविष्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की यही स्थिति थी। कौन-सा ऐसा जिला था, जहां दंगे नहीं हुए। मथुरा के जवाहरबाग की घटना, कोसीकलां के दंगे, मेरठ, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर के दंगे प्रदेश की पहचान बन गए थे। … Read more

महंत अवैद्यनाथ के संकल्प से बदला शहजादपुर मंदिर, आज बना भव्य सिद्धपीठ

अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में स्थित शहजादपुर मोहल्ले में श्रीराम जानकी सिद्धपीठ एक ऐसा मंदिर है जो 120 साल की आस्था,संघर्ष और पुनर्जागरण की जीवंत कहानी कहता है। आज यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। वर्ष 1904 में देश में अंग्रेजों का राज था। लेकिन, यहां के जमींदारों के मन में राम भक्ति की लौ जल रही थी। शहजादपुर के जमींदारों ने लगभग पांच बिस्वा जमीन भगवान राम को समर्पित की। उस जमीन पर एक मंदिर बनाया गया। वह मंदिर मिट्टी और गारे से बना था। उसकी दीवारें मोटी और मजबूत थीं। मंदिर सादा था लेकिन भक्ति से भरा हुआ था। श्रीराम-जानकी मंदिर का किया था निर्माण मंदिर में भगवान श्रीराम माता जानकी, लक्ष्मण जी और बजरंगबली के विग्रह स्थापित किए गए। हर रोज पूजा, भोग और आरती होती थी। यह सिलसिला पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहा। जमींदार परिवार के वंशज अवधेश कुमार मेहरोत्रा ने इस जिम्मेदारी को पूरी लगन से निभाया। मंदिर की इमारत जर्जर हो गई समय बीतता गया, मंदिर में पूजा तो होती रही लेकिन इमारत कमजोर होने लगी। मिट्टी और गारे की दीवारों में दरारें आ गईं। छत से पानी टपकने लगा। जो मंदिर कभी मोहल्ले की शान था वह अब जर्जर हो चला था। भक्तों के मन में दुख था। पैसे नहीं थे और कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। तभी एक बड़ा बदलाव आया जिसने इस मंदिर की किस्मत पलट दी। महंत अवैद्यनाथ का आना और एक बड़ा संकल्प वर्ष 1992 में पूरे देश में राम जन्मभूमि का आंदोलन चल रहा था। अयोध्या में राम मंदिर का सपना करोड़ों लोगों के दिल में था इस आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे गोरक्षा पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ जी महाराज। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु भी थे। अपनी धर्म यात्रा के दौरान वे शहजादपुर के इस मंदिर में आए। मंदिर को जर्जर हालत देखकर उनका मन दुखी हो गया। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी राम भक्ति में लगाई थी। उनसे यह हालत देखी नहीं गई। उन्होंने उसी समय संकल्प लिया कि यह मंदिर भव्य बनेगा। उनका यह संकल्प एक दिव्य आशीर्वाद बन गया। मंदिर का नया अध्याय हुआ शुरू महंत अवैद्यनाथ के आशीर्वाद से 23 फरवरी 2015 को मंदिर के पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ। यह दिन इस मंदिर के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। स्थानीय भक्तों, दानदाताओं और ट्रस्ट के लोगों ने मिलकर यह काम शुरू किया। करीब तीन साल तक निर्माण चलता रहा। हर ईंट में भक्ति और मेहनत की छाप थी। धीरे धीरे एक टूटा हुआ मंदिर एक भव्य सिद्धपीठ में बदल गया। आज का भव्य मंदिर आज यह मंदिर लगभग 7000 वर्ग फुट में फैला हुआ है। यह दो मंजिला बन चुका है। मंदिर में कदम रखते ही एक अलग शांति और ऊर्जा का अहसास होता है। यहां कुल पांच दरबार हैं। पहला है श्रीराम दरबार जहां भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी के विग्रह हैं। यह मंदिर का मुख्य दरबार है। दूसरा है माता जगदंबा दरबार जहां माँ की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तीसरा है संकटमोचन बजरंगबली दरबार जहां हनुमान जी भक्तों को शक्ति और साहस देते हैं। चौथा है भगवान शिव दरबार जहां शिव भक्त अपनी पूजा करते हैं। पांचवां है श्री राधा-कृष्ण दरबार जो प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। धार्मिक यात्रियों के लिए खास जगह श्रीराम जानकी मंदिर ट्रस्ट हर रोज सभी पांचों दरबारों में पूजा, भोग और आरती कराता है। सुबह मंगला आरती से लेकर रात की शयन आरती तक मंदिर में भक्ति का माहौल रहता है। पूरे साल यहां कई धार्मिक आयोजन होते हैं। रामनवमी पर शोभायात्रा और अखंड रामायण पाठ होता है। हनुमान जयंती पर सुंदरकांड पाठ और भंडारा होता है। जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण दरबार में सुंदर झांकियां सजती हैं। नवरात्रि में माता दरबार में नौ दिन का महोत्सव मनाया जाता है। सावन में शिव दरबार में खास अभिषेक होता है। अगर आप उत्तर प्रदेश की धार्मिक यात्रा पर हैं तो इस मंदिर जरूर आएं। अयोध्या, वाराणसी या प्रयागराज के दर्शन के साथ यहां भी दर्शन करें। यह मंदिर आपकी यात्रा को और पवित्र बना देगा। यहां आकर आप पांचों दरबारों में पूजा कर सकते हैं। एक महान संत के संकल्प की शक्ति को महसूस कर सकते हैं। 120 साल की यह यात्रा आज एक नए मोड़ पर है। शहजादपुर का यह सिद्धपीठ अब सिर्फ एक मंदिर नहीं है। यह सनातन धर्म की ताकत का, एक महान गुरु के संकल्प का और लाखों भक्तों की आस्था का जीवंत प्रमाण है।

अयोध्या प्रकरण में नया मोड़: इस्तीफों की पुष्टि के बाद ट्रस्ट की पारदर्शिता पर विवाद गहराया

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे सवाल यही है कि सबूत सुरक्षित हैं या नहीं? शनिवार को तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के त्यागपत्र की पुष्टि के बाद घटनाक्रम की समयरेखा को देखें तो कई ऐसे बिंदु सामने आते हैं, जिन पर जवाब अब भी बाकी हैं। एफआईआर होने तक सभी आठ आरोपी भी मंदिर में पहले जैसे ही आते-जाते रहे। अंदर उनसे काम लिया जा रहा था या नहीं, इसकी भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। सवाल उठता है कि मंदिर के अंदर किसी की निगरानी थी या नहीं या जो कठघरे में हैं उन्हीं के हवाले छोड़कर सभी मौन हैं। चंपत राय ने क्यों कहा- कुछ उल्लेखनीय नहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, विशेषकर महामंत्री चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा को कथित अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, तो सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने या जांच की पहल करने में देरी क्यों हुई। अखिलेश यादव के बयान के बाद चंपत राय ने वीडियो जारी कर यहां तक कहा था कि ट्रस्ट में नियमित ऑडिट होता है। कोई उल्लेखनीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है। मगर अब रुपयों की बरामदगी और गिरफ्तारी ने साफ कर दिया कि गड़बड़ी तो थी। जांच के दौरान भी आरोपी कार्य करते रहे ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रारंभिक स्तर पर सब कुछ सामान्य था तो एसआईटी जांच की आवश्यकता क्यों महसूस हुई। जांच की निष्पक्षता को लेकर भी विपक्ष और कई सामाजिक कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि एसआईटी गठन से लेकर एफआईआर दर्ज होने तक जिन आठ कर्मचारियों पर आरोप लगे, वे अपने पदों पर कार्यरत रहे। साथ ही ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी भी अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे। 23 जून को आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में भी संबंधित पदाधिकारी व्यवस्थाओं की कमान संभालते दिखाई दिए। राम भक्तों का विश्वास बनाए रखने की चुनौती यहीं से एक और महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है-क्या जांच शुरू होने और एफआईआर दर्ज होने के बीच संबंधित लोगों की संस्थान तक निरंतर पहुंच से संभावित साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका थी। फिलहाल इसका कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है और न ही एसआईटी या सरकार ने ऐसा कोई निष्कर्ष जारी किया है। अब इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी चुनौती केवल दोषियों को सजा दिलाने की नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के विश्वास को बनाए रखने की है। आने वाले दिनों में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया ही तय करेगी कि कथित हेराफेरी की वास्तविक जिम्मेदारी किस पर है और क्या जांच के दौरान साक्ष्यों की सुरक्षा तथा ट्रस्ट की भूमिका पर उठे सवालों के संतोषजनक उत्तर मिल पाते हैं। 24 घंटे में बदली तस्वीर, पहले इनकार, फिर इकरार राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में आठ आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद अगले 24 घंटे में घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला कि अयोध्या से लेकर देशभर में इसकी चर्चा होने लगी। शुक्रवार दोपहर अचानक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, लेकिन शुरुआत में ट्रस्ट से जुड़े लगभग हर व्यक्ति ने इससे इनकार किया। गोपाल राव का प्रचार माध्यम पर निशाना कारसेवकपुरम से लेकर कार्यशाला तक मौजूद सेवादारों का कहना था कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यह भी बताया गया कि चंपत राय पूरे दिन कारसेवकपुरम स्थित अपने आवास 'भरत कुटी' से बाहर नहीं निकले। ट्रस्ट के व्यवस्था प्रभारी गोपाल राव ने भी मुस्कुराते हुए कहा, ‘प्रचार माध्यमों को देखकर लगता है कि ये लोग चंपत राय जी का इस्तीफा लेकर ही मानेंगे।’ उनके इस बयान के बाद भी अटकलों का दौर थमा नहीं। उधर सोशल मीडिया पर इस्तीफे की चर्चा लगातार तेज होती गई। अयोध्या में लोग एक-दूसरे को फोन कर इसकी पुष्टि करने की कोशिश करते रहे। विपक्षी दलों ने भी इसे मुद्दा बनाते हुए सोशल मीडिया पर सरकार और ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया। नासिक से सबसे पहले इस्तीफे की पुष्टि सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने इसे बड़े स्तर की कार्रवाई की शुरुआत बताते हुए दावा किया कि अब ‘बड़ी मछलियों’ पर भी कार्रवाई तय है। इसके बावजूद न तो ट्रस्ट और न ही विश्व हिंदू परिषद की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई। करीब 24 घंटे बाद शनिवार को घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया। नासिक में मौजूद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरी ने कुछ पत्रकारों के व्हाट्सएप संदेशों का जवाब देते हुए चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र की पुष्टि कर दी। इस्तीफे के बाद सोना-चांदी के सुरक्षित होने का दावा इसके तुरंत बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। प्रेस विज्ञप्ति में केवल इस्तीफों की पुष्टि ही नहीं की गई, बल्कि पहली बार यह भी स्पष्ट किया गया कि रामलला को समर्पित चांदी की ईंटें, सोना-चांदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान समर्पण सुरक्षित हैं तथा उनका पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध है। इस तरह महज 24 घंटे में इनकार से आधिकारिक पुष्टि तक का घटनाक्रम पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।

ईएमसी पार्क और सेमीकंडक्टर यूनिट से यूपी में रोजगार की बड़ी छलांग, हजारों युवाओं को मिलेगा फायदा

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े औद्योगिक और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। यहां अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, टॉय पार्क, एमएसएमई पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क, ओडीओपी पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये का निवेश आने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। बनेगा 206 एकड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-10 में 206.40 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी पार्क) को 24 जून 2025 को मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली औद्योगिक अवसंरचना विकसित कर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए विश्वस्तरीय इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके लिए यीडा ने 28 मार्च 2024 को परियोजना प्रबंधन एजेंसी एसटीपीआई लिमिटेड के माध्यम से प्रस्ताव भेजा था। स्वीकृति मिलने के बाद 3 जुलाई 2025 को यीडा और एसटीपीआई के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। परियोजना के अनुसार ईएमसी पार्क का निर्माण कार्य 31 दिसंबर 2027 तक पूरा किया जाएगा। इसके लिए अवसंरचना निर्माण हेतु ईपीसी मोड पर टेंडर जारी किया गया, जिसके बाद मैसर्स जेएसपी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को कार्य आवंटित किया गया है। समस्त आधारभूत संरचना का कार्य सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ईएमसी पार्क पर 417 करोड़ का निवेश, विकसित होगा विश्वस्तरीय इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम 206.40 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस ईएमसी पार्क पर लगभग 417 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें केंद्र सरकार लगभग 144.48 करोड़ रुपये का योगदान देगी, जबकि यमुना प्राधिकरण द्वारा लगभग 272.52 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह पार्क उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा। सोलर उद्योग में 8,253 करोड़ का बड़ा निवेश, 5,000 युवाओं को मिलेगा रोजगार यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-8 में सात्विक सोलर प्रा. लि. की अत्याधुनिक इकाई स्थापित की जा रही है। कंपनी को 200 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहां सोलर सेल एवं सोलर मॉड्यूल का निर्माण होगा। इस परियोजना में 8,253 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिससे लगभग 5,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। परियोजना का भूमिपूजन 14 नवंबर 2025 को किया गया था और वर्तमान में निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 3,250 करोड़ का निवेश यीडा के सेक्टर-10 स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में एसेंड सर्किट्स प्रा. लि. को 16 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। कंपनी यहां फ्लेक्सिबल पीसीबी, हाई डेंसिटी इंटरकनेक्ट (एचडीआई) पीसीबी तथा सेमीकंडक्टर सब्सट्रेट्स का निर्माण करेगी। इस परियोजना में 3,250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिससे लगभग 1,500 लोगों को रोजगार मिलेगा। कंपनी को भूमि आवंटन 16 जनवरी 2026 को किया गया तथा 28 अप्रैल 2026 को लीज डीड निष्पादित की गई। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण में 3,532 करोड़ का निवेश यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-8 में अंबर एंटरप्राइजेज इंडिया लि. को 100 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। यहां कंपनी कॉपर क्लैड लैमिनेट्स (सीसीएल), असेम्बली, कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक्स एप्लायंसेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण करेगी। इस परियोजना में 3,532 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके माध्यम से लगभग 2,000 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। कंपनी को भूमि आवंटन 16 जनवरी 2026 को किया गया। क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास से बदल रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित किए जा रहे अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, टॉय पार्क, एमएसएमई पार्क, ओडीओपी पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर उत्तर प्रदेश को नई औद्योगिक पहचान दे रहे हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश, आधुनिक तकनीक, निर्यात क्षमता और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल रहा है। योगी सरकार की औद्योगिक नीति का दिख रहा असर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निवेशक-हितैषी नीतियों, बेहतर कानून व्यवस्था, आधुनिक अवसंरचना और त्वरित स्वीकृति प्रणाली का परिणाम है कि देश और विदेश की बड़ी कंपनियां उत्तर प्रदेश में निवेश कर रही हैं। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, सोलर ऊर्जा और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में हो रहे निवेश उत्तर प्रदेश को भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के युवाओं के लिए हजारों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राज्य की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मजबूत आधार मिलेगा।

कोई क्षेत्र पीछे नहीं रहेगा, विकास कार्यों में जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता को मिलेगी अहम जगह: मुख्यमंत्री योगी

गौतमबुद्धनगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग की मेरठ मंडल की वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं को सर्वोच्च महत्व देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सांसद एवं विधायक अपने-अपने लोकसभा तथा विधानसभा क्षेत्रों की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्तावों का प्राथमिकता क्रम निर्धारित करें, ताकि जनहित की परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देकर समयबद्ध ढंग से क्रियान्वित किया जा सके। अब तक मेरठ मंडल में ₹6568.36 करोड़ लागत की कुल 1284 विकास परियोजनाएं अब तक चिन्हित की जा चुकी हैं। शनिवार को गौतमबुद्धनगर में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने मेरठ मंडल के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि विकास कार्यों के प्रस्ताव ऐसे क्षेत्रों के लिए तैयार किए जाएं, जहां इस प्रकार के कार्य पूर्व में नहीं हुए हैं, ताकि विकास का लाभ नए क्षेत्रों तक पहुंचे तथा उपलब्ध संसाधनों का संतुलित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के विकास प्रस्तावों को कार्ययोजना में समुचित स्थान दिया जाए। कोई भी विधानसभा क्षेत्र विकास कार्यों से वंचित न रहे तथा संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी स्वीकृत परियोजना का कोई अवशेष कार्य शेष है, तो उसे भी कार्ययोजना में सम्मिलित कर शीघ्र पूर्ण कराया जाए, ताकि जनता को उसका लाभ समय पर मिल सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि धर्मार्थ कार्यों से संबंधित प्रस्ताव ऐसे स्थलों के लिए तैयार किए जाएं, जहां श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो तथा निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त एवं उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो। ऐसे प्रस्ताव स्थानीय आवश्यकता एवं जनसुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी कार्ययोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे विकास परियोजनाओं का क्रियान्वयन बिना किसी अनावश्यक विलंब के प्रारंभ हो सके। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए जनप्रतिनिधियों के सुझावों एवं स्थानीय आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। बैठक में औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री श्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' जी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री के. पी. मलिक जी, पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नरेंद्र कुमार कश्यप जी, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सोमेंद्र तोमर जी, लोक निर्माण विभाग के राज्य मंत्री एवं गौतमबुद्धनगर के प्रभारी मंत्री श्री बृजेश सिंह जी, जल शक्ति राज्य मंत्री श्री दिनेश खटीक जी, मेरठ मंडल के सांसदगण, विधायकगण, मंडलायुक्त मेरठ श्री भानु चंद्र गोस्वामी जी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी नोएडा श्री कृष्णा करुणेश जी, पुलिस आयुक्त श्रीमती लक्ष्मी सिंह जी, जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर सुश्री मेधा रूपम सहित शासन, प्रशासन, प्राधिकरण एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।