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जमात रजा-ए-मुस्तफा के महासचिव फरमान मियां की समाजसेवा का डंका, अब सरकारी परीक्षा के सवालों में मिली जगह

लखनऊ उत्तर प्रदेश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं UPSSSC और UPPCS के हालिया प्रश्नपत्रों में फरमान हसन खान उर्फ फरमान मियां का नाम आने से प्रदेशभर में चर्चा तेज है. जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां सामाजिक, धार्मिक और जनसेवा कार्यों के लिए चर्चित हैं तथा कई सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं.  उत्तर प्रदेश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं UPSSSC और UPPCS के हालिया प्रश्न पत्रों में फरमान हसन खान उर्फ फरमान मियां का नाम शामिल होने के बाद प्रदेश भर में इसकी चर्चा शुरू हो गई है. खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच यह विषय तेजी से फैल रहा है. फरमान मियां 108 साल पुरानी संगठन जमात रजा-ए-मुस्तफ़ा के राष्ट्रीय महासचिव हैं और सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. वे काजी–ए–हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रजा ख़ान के दामाद हैं तथा आला हजरत ताजुश्शरिया वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक भी हैं. समाजसेवा के क्षेत्र में उनके नेतृत्व में समय-समय पर मेडिकल कैंप, जरूरतमंदों के लिए उपचार छात्रो के लिए मुफ्त शिक्षा सहायता और राहत कार्य आयोजित किए गए हैं. विशेष रूप से गरीब मरीजों के इलाज और सर्जरी की व्यवस्था जैसे प्रयासों को प्रदेश स्तर पर सराहा गया है. उनके इन्हीं कार्यों के लिए उन्हें भारत गौरव रत्न सम्मान से नवाजा जा चुका है. इसके अलावा स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और मानवाधिकार से जुड़े अभियानों में योगदान के लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया है. प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होना उसकी व्यापक पहचान का संकेत माना जाता है. ऐसे में फरमान मियाँ का उल्लेख प्रदेश स्तर पर एक चर्चा का विषय बन गया है. फिलहाल, इसको लेकर अभ्यर्थियों और आम लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन यह साफ है कि यह मुद्दा परीक्षा जगत में खास दिलचस्पी का कारण बना हुआ है.  

पिछड़े जिलों में उद्योग लगाने पर मिलेगी भारी सब्सिडी और सस्ती जमीन, यूपीसीडा ने शुरू किया जमीनी स्तर पर काम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को संतुलित करने के लिए छोटे व पिछड़े जिलों में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की रणनीति बनाई गई है। उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने बलिया, हाथरस, फतेहपुर, बाराबंकी और चित्रकूट जैसे जिलों में बड़े औद्योगिक केंद्र विकसित करने के लिए हालिया फैसलों के साथ पहले के निर्णयों को भी जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार पहले से ही औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत छोटे और पिछड़े जिलों में निवेश करने वाले उद्यमियों को अतिरिक्त सब्सिडी, सस्ती जमीन और स्टांप ड्यूटी में छूट जैसे लाभ दे रही। ओडीओपी योजना के जरिये स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम हो रहा है। यूपीसीडा के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में कई छोटे जिलों में मिनी औद्योगिक एस्टेट और फ्लैटेड फैक्टरी कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजनाओं को विस्तार देते हुए बड़े औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने बताया कि बलिया, हाथरस, फतेहपुर, बाराबंकी और चित्रकूट के औद्योगिक क्षेत्रों के प्रस्तावों पर विचार करते हुए कुछ शर्तों में ढील दी गई है। तलपट (लेआउट) मानचित्रों में संशोधन के निर्देश देते हुए उन्हें स्वीकृति दे दी गई है। इससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। पहले से बंद औद्योगिक इकाइयों और कताई मिलों की जमीन के पुनः उपयोग में लाने का फैसला भी लागू करना शुरू कर दिया गया है। बड़े शहरों पर औद्योगिक दबाव कम करने की रणनीति : छोटे जिलों में उद्योग स्थापित करने से न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि बड़े शहरों पर बढ़ता औद्योगिक दबाव भी कम होगा। यही नहीं पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में निवेश का संतुलित वितरण सुनिश्चित होगा। सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में छोटे जिलों में निवेशकों के लिए विशेष रोड शो और निवेश आमंत्रण कार्यक्रम भी होंगे।  

योगी सरकार में आज़मगढ़ की चमकी पहचान, निज़ामाबाद की ब्लैक पॉटरी को मिला वैश्विक सम्मान

योगी सरकार में चमकी आज़मगढ़ की पहचान: निज़ामाबाद की ब्लैक पॉटरी को मिला वैश्विक सम्मान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना बनी वैश्विक ब्रांड, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढ़ी मांग कॉमन फैसिलिटी सेंटर की सुविधा मिलने के बाद ब्लैक पॉटरी का व्यापार तेजी से बढ़ा आजमगढ़  आज़मगढ़ जनपद अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां के निज़ामाबाद क्षेत्र की ब्लैक पॉटरी (काली मिट्टी की कारीगरी) विश्वभर में अपनी अनूठी पहचान बनाए हुए है। इस शिल्प में प्रयुक्त विशेष प्रकार की चिकनी मिट्टी स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होती है, जो इस कला को और भी विशिष्ट बनाती है।      निज़ामाबाद क्षेत्र में 200 से अधिक कारीगर परंपरागत शिल्प से जुड़े हुए हैं। ये कारीगर अपने हुनर से विभिन्न प्रकार के उत्पाद जैसे फूलदान, बर्तन, चायदान, शक्करदान और सजावटी वस्तुएँ तैयार करते हैं। इन उत्पादों की मांग देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि ये वस्तुएं उपयोगी होने के साथ-साथ सौंदर्य की दृष्टि से भी बेहद आकर्षक होती हैं।      आज़मगढ़ का यह शिल्प उद्योग न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक रूप से भी स्थानीय लोगों के जीवन का एक मजबूत आधार है। जिले की अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ-साथ यह प्राचीन उद्योग भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। निज़ामाबाद की फैंसी पॉटरी विशेष रूप से अपनी नक्काशी और चमकदार काले रंग के लिए प्रसिद्ध है।      कुम्हार समुदाय द्वारा बनाए जाने वाले मिट्टी के बर्तन और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं जैसे गणेश, लक्ष्मी, शिव, दुर्गा और सरस्वती मेलों और त्योहारों के दौरान विशेष रूप से लोकप्रिय रहती हैं। इन कलाकृतियों में पारंपरिक आस्था और कलात्मकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।     ब्लैक पॉटरी की सबसे खास विशेषता इसका गहरा काला रंग है, जो एक विशेष प्रक्रिया से प्राप्त किया जाता है। कारीगर पहले तैयार बर्तन को मिट्टी और वनस्पति के घोल में डुबोते हैं, जिससे उसका आधार रंग बनता है। इसके बाद उसे विशेष तकनीक से पकाया जाता है और आकर्षक चमक देने के लिए पारा, रांगा और सीसा जैसे तत्वों का उपयोग किया जाता है।    इस दिशा में योगी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में “एक जिला एक उत्पाद” योजना के माध्यम से आज़मगढ़ की ब्लैक पॉटरी को नई पहचान और व्यापक बाजार मिला है, जिससे कारीगरों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बेहतर विपणन अवसर प्राप्त हो रहे हैं तथा उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। यही कारण है कि यह पारंपरिक कला आज के आधुनिक समय में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखते हुए प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इस अनमोल धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत है और कारीगरों को निरंतर प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है, ताकि यह कला आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और जीवंत बनी रह सके।  निज़ामाबाद के ब्लैक पॉटरी फाउंडेशन के निदेशक संजय कुमार यादव बताते हैं कि योगी सरकार के कारण उन्हें कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की सुविधा प्राप्त हुई। इस सुविधा के मिलने के बाद उनका व्यापार तेजी से बढ़ा है। आधुनिक मशीनों की उपलब्धता के कारण अब वे अपने ऑर्डर समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरा कर पा रहे हैं। वे कहते हैं कि यह सब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना का परिणाम है। आज ब्लैक पॉटरी न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुकी है। कॉमन फैसिलिटी सेंटर से मिली सुविधा   कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना से उत्पादन प्रक्रिया काफी आसान हो गई है। यहां कच्चे माल से लेकर सभी आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। कारीगर वहां आकर अपने उत्पाद तैयार करते हैं, उन्हें पैक करते हैं और फिर बाजार में अपने निर्धारित मूल्य पर बेचते हैं। इस सुविधा के कारण वे बड़े से बड़े ऑर्डर को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम हुए हैं, जिससे उनके व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

गौतम अडाणी ने सीएम योगी से मुलाकात की, डेढ़ घंटे तक निवेश और प्रोजेक्ट्स पर हुई चर्चा, अयोध्या में परिवार संग रामलला के दर्शन

लखनऊ  प्रख्यात उद्योगपति गौतम अदाणी ने उत्तर प्रदेश के एकदिवसीय दौरे पर गुरुवार को अयोध्या में दिन में सपरिवार राम दरबार में दर्शन-पूजन के बाद देर शाम लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद गौतम अदाणी ने उनके 'विकसित उत्तर प्रदेश' के रोडमैप को बेहद प्रभावशाली बताया। मुख्यमंत्री से भेंट करने के बाद गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया पर अपने विचार को पोस्ट भी किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के बाद जाने माने उद्योगपति गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया “कुछ दूरदृष्टियां राष्ट्रों का स्वरूप बदल देती हैं। मुख्यमंत्री योगी जी द्वारा विकसित उत्तर प्रदेश के रोडमैप को सुनना एक अविस्मरणीय क्षण था। 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था। यह उत्तर प्रदेश की क्षमता का प्रमाण है। अदाणी समूह को बिजली, रक्षा, हवाई अड्डों, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक पार्कों और डेटा केंद्रों में निवेश के माध्यम से उत्तर प्रदेश के परिवर्तन में योगदान देने पर गर्व है। हम उस भविष्य के निर्माण में सहयोग करने के लिए यहां हैं। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और उत्तर प्रदेश के भविष्य को लेकर उनके बड़े विजन की सराहना की। मुलाकात के बाद उन्होंने साफ किया कि उनका अदाणी ग्रुप उत्तर प्रदेश के कायाकल्प में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके इस ट्वीट ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य को वर्ष 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और वर्ष 2047 तक छह ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अडानी ने अपने ट्वीट में कहा कि यह केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं है। यह उत्तर प्रदेश की क्षमताओं और संभावनाओं का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने यह भी लिखा कि राज्य में तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर नीतियां और निवेश के अनुकूल वातावरण इसे उद्योगों के लिए आकर्षक बना रहे हैं।अडानी समूह ने उत्तर प्रदेश के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी का भरोसा जताया है। समूह बिजली, रक्षा, हवाई अड्डों, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक पार्क और डेटा सेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश कर रहा है। इन परियोजनाओं से रोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ साथ राज्य की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।इसी बीच अडानी गुरुवार को परिवार समेत अयोध्या भी पहुंचे। वहां उन्होंने रामलला के दर्शन और पूजन किए। अपने परिवार के साथ उन्होंने मंदिर परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने गुरुकुल को एआई आधारित लैब विकसित करने में सहयोग देने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण भारत की आस्था और विकास का प्रतीक है और यह देश को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।अडानी ने स्पष्ट किया कि उनका समूह उत्तर प्रदेश के इस परिवर्तनकारी सफर में एक मजबूत साझेदार के रूप में काम करेगा। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत यह पहल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी। गौतम अदाणी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'विकसित उत्तर प्रदेश' के रोडमैप को बेहद प्रभावशाली बताया है। अदाणी ग्रुप उत्तर प्रदेश में केवल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर ही नहीं, बल्कि रक्षा और तकनीक जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी भारी निवेश कर रहा है। कंपनी के निवेश पोर्टफोलियो में एनर्जी, पावर, एयरपोर्ट, डिफेंस और लॉजिस्टिक्‍स जैसे सेक्‍टर शामिल हैं। अदाणी ग्रुप ने वर्ष 2022 के इन्वेस्टर्स समिट में उत्तर प्रदेश में 70,000 करोड़ के निवेश का ऐलान किया था, जिससे कम से कम 30,000 रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। गुरुकुल महाविद्यालय में छात्रों से मुलाकात की गौतम अडाणी ने अयोध्या के गुरुकुल महाविद्यालय में छात्रों से मुलाकात की। उन्हें सम्मानित किया। गुरुकुल की पुरानी और आधुनिक परंपरा के बारे जाना। उन्होंने कहा कि मैंने बच्चों के साथ समय बिताया। गुरुकुल आज के युग में हमारी संस्कृति को जागृत रखने का काम कर रहा है। अडाणी फाउंडेशन AI के इस दौर में इस गुरुकुल संस्कृति को संरक्षित करने में हर संभव सहयोग देगा। लखनऊ में योगी से मुलाकात करेंगे इसके बाद, गौतम अडाणी लखनऊ के लिए रवाना हो गए। यहां सीएम योगी से मुलाकात करेंगे। इससे पहले गौतम अडानी 22 जनवरी 2024 को अयोध्या आए थे। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे।

योगी सरकार की पहल से बदली हमीरपुर की कीर्ति की जिंदगी

योगी सरकार की पहल से बदली हमीरपुर की कीर्ति की जिंदगी संगठन की शक्ति: प्रेरणा कैंटीन से कीर्ति  ने खड़ा किया खुद का व्यवसाय सरकारी पहल से बदली दिशा: आत्मनिर्भरता बनी पहचान लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की योजनाएं आज ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहीं हैं। हमीरपुर जनपद की कीर्ति इसकी जीवंत मिसाल बनकर उभरीं हैं। एक समय अध्यापिका और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने वाली कीर्ति ने जब महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया, तो यह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। वर्ष 2018 में समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी, बल्कि समाज में खुद की एक नई पहचान भी बनाई। आज वही कीर्ति “प्रेरणा कैंटीन” के माध्यम से न सिर्फ खुद सशक्त हुईं हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर दे रहीं हैं। 'प्रेरणा कैंटीन: सामूहिक प्रयास से बना 1.25 करोड़ के टर्नओवर का मॉडल वर्ष 2025 अगस्त में कीर्ति ने 10 महिलाओं के साथ मिलकर हमीरपुर के दरियापुर स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में “प्रेरणा कैंटीन” की शुरुआत की। लगभग 11 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुआ यह प्रयास आज उनके लिए सफल उद्यम बना, जिसका टर्नओवर 1.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वर्तमान में कैंटीन से 8 महिलाएं जुड़ीं हैं। हर महीने प्रत्येक महिला को लगभग ₹8,000 वेतन मिल जाता है। यह कैंटीन केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि पोषण और स्वच्छता का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है जहां 332 बच्चों को रोजाना पौष्टिक नाश्ता, दूध और भोजन बेहद किफायती दर पर उपलब्ध कराया जाता है। शिक्षकों के लिए भी भोजन की व्यवस्था है। कीर्ति का मानना है कि स्वच्छ और पौष्टिक भोजन ही स्वस्थ समाज की नींव है, और इसी सोच के साथ वह पूरी जिम्मेदारी से इस कार्य को आगे बढ़ा रही हैं। आत्मनिर्भरता से प्रेरणा तक: योगी सरकार की योजनाओं ने बदली दिशा कीर्ति सिंह की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं विशेषकर स्वयं सहायता समूह और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की उपयोगिता का प्रमाण है। कीर्ति ने पहले बैंक सखी के रूप में काम करते हुए अनुभव हासिल किया और अब उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखकर नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। कीर्ति का कहना है कि योगी सरकार की इस पहल ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत ऋण के लिए भी आवेदन किया है, जिससे वे अपने इस व्यवसाय को और विस्तार देना चाहतीं हैं। कीर्ति का यह सफर बताता है कि जब सरकार की योजनाएं सही हाथों तक पहुंचतीं हैं और उनमें मेहनत व संकल्प जुड़ जाता है, तो बदलाव निश्चित होता है। आज वह न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रहीं हैं।

उत्तर प्रदेश का सोलर अभियान: 2025-26 में 3.47 लाख संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य

सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश की बड़ी छलांग, 2025-26 में रिकॉर्ड 3.47 लाख संयंत्र स्थापित मार्च में सर्वाधिक 52,729 इंस्टॉलेशन, कुल क्षमता 1161 मेगावाट के पार अप्रैल से मार्च तक इंस्टालेशन में हुई लगातार बढ़ोतरी, अंतिम तिमाही में जबरदस्त उछाल ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ता प्रदेश, कुल क्षमता 1524 मेगावाट से अधिक लखनऊ उत्तर प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए रिकॉर्ड 3,47,729 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए हैं। इस दौरान राज्य की कुल स्थापित क्षमता 1161.756 मेगावाट तक पहुंच गई, जो प्रदेश की ग्रीन एनर्जी की दिशा में तेजी को दर्शाता है।    माहवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष की शुरुआत अप्रैल 2025 में 15,836 इंस्टॉलेशन से हुए थे, जो मई और जून में बढ़कर क्रमशः 18,509 और 18,494 तक पहुंच गए। जुलाई से इस रफ्तार में बड़ी उछाल देखने को मिली, जहां 29,850 संयंत्र स्थापित हुए और क्षमता 100 मेगावाट के पार पहुंच गई। अगस्त और सितंबर में भी यह गति बरकरार रही, जबकि अक्टूबर में थोड़ी गिरावट के बाद नवंबर और दिसंबर में फिर से तेजी आई। नवंबर में 30,894 और दिसंबर में 31,164 इंस्टॉलेशन दर्ज किए गए।     वास्तविक तेजी वर्ष के अंतिम तीन महीनों में देखने को मिली। जनवरी 2026 में 33,314, फरवरी में 35,804 और मार्च में रिकॉर्ड 52,729 संयंत्र स्थापित किए गए, जो पूरे वर्ष का सर्वाधिक आंकड़ा रहा। केवल मार्च माह में ही 173.84 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई, जो किसी एक माह में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है।    यूपीनेडा के डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि अंतिम तिमाही में आई यह तेजी सरकार की प्रभावी नीतियों, सब्सिडी योजनाओं और जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन का परिणाम है। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ा है, बल्कि उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ बिजली भी उपलब्ध हो रही है।    इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में तेजी से उभर रहा है। उत्तर प्रदेश पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में नंबर वन राज्य बन गया है। कुल मिलकर उत्तर प्रदेश में कुल 4,48,233 सोलर रूफटॉप इंस्टॉल किए जा चुके हैं, जिससे रोजाना 1524  मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। लगातार बढ़ती इंस्टॉलेशन दर यह संकेत देती है कि आने वाले समय में प्रदेश ग्रीन एनर्जी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को और तेजी से हासिल करेगा।

छात्रवृत्ति की फिर होगी व्यवस्था, योगी सरकार वंचित छात्रों के लिए पोर्टल फिर से खोलेगी

छात्रवृत्ति से वंचित छात्रों को दूसरा मौका, योगी सरकार फिर खोलेगी पोर्टल सामान्य, एससी-एसटी और ट्रांसजेंडर छात्रों को मिलेगा लाभ, किसी भी पात्र छात्र को नहीं रहने दिया जाएगा वंचित 2025-26 सत्र के छूटे छात्रों के लिए दोबारा आवेदन का अवसर, पिछले वर्ष 53 हजार से अधिक छात्रों को ₹81 करोड़ से ज्यादा की सहायता हर वर्ग तक शिक्षा और आर्थिक सहयोग पहुंचाना योगी सरकार का लक्ष्य लखनऊ उत्तर प्रदेश में छात्र-छात्राओं के हित में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए योगी सरकार ने छात्रवृत्ति से वंचित रह गए छात्रों को बड़ा मौका देने का फैसला किया है। समाज कल्याण विभाग जल्द ही शैक्षिक सत्र 2025-26 के अंतर्गत संचालित छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के छूटे हुए छात्रों के लिए पोर्टल दोबारा खोलेगा, ताकि वे पुनः आवेदन कर इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र छात्र केवल तकनीकी या अन्य कारणों से छात्रवृत्ति से वंचित न रह जाए। इस योजना का लाभ सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ ट्रांसजेंडर समुदाय के विद्यार्थियों को भी मिलेगा, जो सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समाज कल्याण विभाग के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी इसी तरह की पहल के तहत पोर्टल खोला गया था, जिसके माध्यम से 53,041 छात्रों को कुल 81.12 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति प्रदान की गई। इनमें अनुसूचित जाति के 25,395 छात्रों को 30.65 करोड़ रुपये तथा सामान्य वर्ग के 27,646 छात्रों को 50.47 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि हर जरूरतमंद छात्र तक शिक्षा का लाभ पहुंचे और कोई भी छात्र आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। योगी सरकार की यह पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे हजारों छात्रों को अपनी शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलेगा और उनका भविष्य मजबूत होगा।

योगी सरकार के 9 वर्षों में विकास के पहिए ने पकड़ी रफ्तार, तराई के 1500 गांवों में फैला दूध का कारोबार

तराई में आई श्वेतक्रांति से 51 हजार महिलाएं बनीं उद्यमी योगी सरकार के 9 वर्षों में विकास के पहिए ने पकड़ी रफ्तार, तराई के 1500 गांवों में फैला दूध का कारोबार हर महीने 03, 13 और 23 तारीख को आता है सभी के खाते में पैसा तराई के छह जिलों में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं बना रहीं रिकॉर्ड एक लाख लीटर से ज्यादा प्रतिदिन की बिक्री से महिलाओं ने किया सवा दो सौ करोड़ से ज्यादा का कारोबार लखनऊ  उत्तर प्रदेश के तराई और आसपास के क्षेत्र अब महिला सशक्तीकरण और आर्थिक क्रांति का नया केंद्र बन चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आई श्वेतक्रांति ने बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर जैसे जिलों की दिशा और दशा बदल दी है। यहां 1500 गांवों में फैले दुग्ध व्यवसाय के जरिए 51 हजार महिलाएं उद्यमी बनकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। इन सभी महिलाओं के खाते में हर महीने 03, 13 और 23 तारीख को पैसा आ जाता है। सृजनी एमपीसीएल के नेतृत्व में तराई के इन जिलों में अब हर सुबह दूध संग्रहण किया जाता है, जहां महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उत्पादन से लेकर संग्रहण और विपणन तक की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं। परिणामस्वरूप क्षेत्र में प्रतिदिन एक लाख लीटर से अधिक दूध का कारोबार हो रहा है और अब तक महिलाएं सवा दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यवसाय कर चुकीं हैं। जो क्षेत्र पहले विकास की दौड़ में पिछड़े माने जाते थे, वहीं योगी सरकार के कार्यकाल में अब महिलाओं की मेहनत से नई आर्थिक पहचान बन रही है और गांव-गांव में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। गांव की अर्थव्यवस्था की प्रमुख संचालक बन रहीं महिलाएं इस परिवर्तन के पीछे उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसने महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने का काम किया। इसी का परिणाम है कि महिलाएं अब केवल सहयोगी नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की प्रमुख संचालक बन गईं हैं। छह हजार से अधिक गांवों में सक्सेज मॉडल  प्रदेश स्तर पर भी यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश आज दुग्ध उत्पादन में देश में अग्रणी बन चुका है, जहां ग्रामीण महिलाएं प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहीं हैं। 31 जिलों में महिलाओं ने पांच हजार करोड़ रुपये का कारोबार किया है और छह हजार से अधिक गांवों में इस मॉडल ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। तराई की यह श्वेतक्रांति केवल आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी सशक्त उदाहरण है। महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।

अभ्युदय योजना: यूपीपीसीएस चयनित अभ्यर्थियों ने योगी सरकार की सराहना की, बनी सफलता की सीढ़ी

अभ्युदय योजना बनी सफलता की सीढ़ी, यूपीपीसीएस चयनित अभ्यर्थियों ने योगी सरकार की सराहना की डीएसपी से नायब तहसीलदार तक चयनित युवाओं ने कहा – मुफ्त कोचिंग और गाइडेंस से मिली बड़ी मदद रायबरेली के हर्ष सिंह को मिली 7वीं रैंक, बोले- इंटरव्यू तक अभ्युदय से मिला मार्गदर्शन नमन तिवारी ने कहा- सिलेबस समझने से लेकर रणनीति तक हर स्तर पर मिली मदद आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए वरदान बनी योजना, विजेंद्र सिंह ने बताई उपयोगिता लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना एक बार फिर युवाओं की सफलता की मजबूत आधारशिला बनकर उभरी है। यूपीपीसीएस 2024 के परिणाम में चयनित अभ्यर्थियों ने इस योजना को अपनी सफलता का अहम कारण बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना की है। चयनित अभ्यर्थियों ने एक स्वर में कहा कि योगी सरकार की यह पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान कर रही है, बल्कि प्रदेश के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का मंच भी दे रही है। रायबरेली के हर्ष सिंह, जिन्हें यूपीपीसीएस 2024 में 7वीं रैंक प्राप्त हुई है और डिप्टी एसपी पद पर चयन हुआ है, ने बताया कि अभ्युदय योजना से जुड़कर उन्हें तैयारी के हर चरण में मार्गदर्शन मिला। उन्होंने कहा कि मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू की तैयारी में भी इस योजना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। हर्ष सिंह ने इसे युवाओं के लिए एक “महत्वाकांक्षी और परिवर्तनकारी योजना” बताते हुए कहा कि इससे प्रतिभाशाली युवाओं को अपने लक्ष्य तक पहुंचने का अवसर मिलता है। वहीं, उन्नाव के नमन तिवारी, जिनका चयन नायब तहसीलदार पद पर हुआ है, ने कहा कि अभ्युदय योजना ने परीक्षा के पैटर्न को समझने और रणनीति बनाने में उनकी काफी मदद की। उन्होंने बताया कि कई बार सिलेबस और विषयों को समझने में कठिनाई होती थी, लेकिन योजना के तहत उपलब्ध फैकल्टी और मार्गदर्शन ने इन चुनौतियों को आसान बना दिया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि यह योजना उन छात्रों के लिए बेहद उपयोगी है, जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। अमरोहा के विजेंद्र सिंह, जिन्हें 741वीं रैंक प्राप्त हुई है, ने भी इस योजना को आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए वरदान बताया। उन्होंने कहा कि अभ्युदय योजना के तहत न केवल कोचिंग, बल्कि आवासीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे छात्रों को बेहतर तैयारी का माहौल मिलता है।

सीएम योगी ने पद्म पुरस्कार विजेताओं और आकाशवाणी के वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को किया सम्मानित

सीएम योगी ने पद्म पुरस्कार से सम्मानित विभूतियों और आकाशवाणी के वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को किया सम्मानित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आकाशवाणी लखनऊ के 89वें स्थापना दिवस पर अनेक विभूतियों को सम्मानित किया। इन विभूतियों ने पद्म पुरस्कार से सम्मानित होकर उत्तर प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है। वहीं आकाशवाणी की सफलता में ‘नींव के पत्थर’ रहे वरिष्ठ लोकसेवा प्रसारकों को भी सम्मानित किया गया। सीएम योगी ने कहा कि सम्मान पाने वाले लोगों का योगदान खुद के लिए नहीं, बल्कि देश-प्रदेश और विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए है। सीएम ने कहा कि नींव के पत्थरों को ढूंढना व सम्मानित करना गौरव का क्षण होता है। मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार पाने वाली विभूतियों का किया सम्मान मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार प्राप्त विभूतियों को सम्मानित किया। सीएम के हाथों मंच पर साहित्यकार विद्या बिंदु सिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पं. हदय नारायण दीक्षित (उनके पुत्रों अरुण दीक्षित व दिलीप दीक्षित ने ग्रहण किया), प्रो. सोनिया नित्यानंद (कुलपति केजीएमयू), मालिनी अवस्थी (लोकगायिका), अरुणिमा सिन्हा (दिव्यांग पर्वतारोही), डॉ. अनिल रस्तोगी (रंगमंच), रामशरण वर्मा (प्रगतिशील किसान), डॉ. सुनील प्रधान (चिकित्सक), डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. केके ठकराल, प्रो. नवजीवन रस्तोगी, प्रो. शादाब मोहम्मद, सुधा सिंह (खेल), एसएस सरकार (पुरस्कार प्रमोद मिश्र ने प्राप्त किया) को सम्मान मिला।  आकाशवाणी के वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को भी किया सम्मानित  सीएम योगी ने आकाशवाणी केंद्रों को ऊंचाई देने वाले वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सुशील राबर्ट बनर्जी, सतीश कुमार ग्रोवर, यज्ञदेव पंडित, विजय कुमार बनर्जी, रज्जन लाल, नवनीत मिश्र, भोलानाथ, केवल कुमार को सम्मान मिला।