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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर किया धर्म ध्वजारोहण

भारत को जोड़ने की ताकत हैं राम-कृष्ण और शिवः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर किया धर्म ध्वजारोहण  सीएम योगी ने भगवान शिव व रामलला का विधिवत दर्शन-पूजन कर उतारी आरती जहां अयोध्या और राम होंगे, वहां विजय सुनिश्चित हैः मुख्यमंत्री सीएम ने की अपील- महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए अयोध्या,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धर्म ध्वजारोहण किया। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव व श्रीरामलला का विधिवत दर्शन-पूजन कर आरती भी उतारी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम हमें जोड़ने के माध्यम बने हैं। श्रीराम उत्तर को दक्षिण से और श्रीकृष्ण पूरब को पश्चिम से जोड़ रहे हैं। इसी प्रकार भगवान शंकर द्वादश ज्योतिर्लिंग के माध्यम से भारत के कण-कण को जोड़ रहे हैं। ये तीनों भारत को जोड़ने की शक्ति हैं और यही हमारी भी सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. लोहिया कहते थे कि श्रीराम, श्रीकृष्ण व शिवशंकर हैं तो कोई भारत का बाल बांका नहीं कर सकता, लेकिन यह बात उनके शिष्य नहीं समझेंगे, क्योंकि समझ उन्हें आता है, जिनमें समझ का सामर्थ्य होता है। जिनमें समझ का सामर्थ्य नहीं, उन रामद्रोहियों-शिवद्रोहियों के लिए कोई ठौर-ठिकाना नहीं होगा।  जहां अयोध्या और राम होंगे, वहां विजय ही होगी  सीएम ने गर्व से कहा कि इतने बड़े आंदोलन ने बता दिया कि जहां अयोध्या होगी और जहां राम होंगे, वहां विजय होगी। सम-विषम परिस्थितियों में हम न रुकेंगे, न झुकेंगे, न डिगेंगे और लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे। दुनिया अयोध्या धाम का अनुसरण कर रही है। सीएम ने नई अयोध्या की स्थिति का भी जिक्र किया। कहा कि नई अयोध्या त्रेतायुग की याद दिला रही है और यही डबल इंजन की ताकत है। यह तभी हो पाया, जब एक साथ एक स्वर में सनातन धर्मावलंबी बोल उठे, तभी रामजन्मभूमि में मंदिर निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया था।  महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए सीएम ने लोगों से आग्रह किया कि सनातन धर्म की एकता के जरिए भारत की एकता व अखंडता को मजबूती दीजिए। महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए और बांटने वालों से सावधान रहिए। यह वही पाप कर रहे हैं, जो मध्यकाल में देश को बांटने और समाज की एकता को खंडित करने वालों ने किया था। बांटने का पाप देशद्रोह से कम नहीं है। यह पाप कभी मत होने दें। जिस दिन 140 करोड़ भारतवासी अपने नेतृत्व पर विश्वास करते हुए बढ़ेंगे, दुनिया उनके सामने बाधक नहीं बन सकती।  ईश्वरीय कृपा ही है कि मौसम सुहाना हो गया सीएम ने कहा कि ट्रस्ट के पदाधिकारी पहले तपती गर्मी, फिर बिजली की कड़क और बारिश की चेतावनी से चिंतित हो गए, लेकिन यह ईश्वरीय कृपा ही है कि मौसम सुहाना हो गया। प्रभु की कृपा के लिए शुद्ध नीयत से उनके पास शरणागत होना पड़ेगा। जब भक्त और याचक बनकर प्रभु के चरणों में जाते हैं तो हमारी मनोकामना पूर्ण होती है। जब यह अकड़ होती है कि हमने किया है, तो प्रभु उसे रगड़ भी देते हैं।  सभी के मन में एक ही भाव था कि प्रभु का मंदिर बने और हम अपनी आंखों से देख सकें सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण अभियान है। भारत व दुनिया में जहां भी सनातन धर्मावलंबी रहा, वह गिरिवासी, वनवासी, वंचित, भिक्षावृत्ति से जीवन यापन करने वाला हो या राजमहल जैसे प्रासाद में रहने वाला बड़ा उद्यमी, सभी के मन में एक ही भाव था कि प्रभु राम का भव्य मंदिर बने और वह इसे अपनी आंखों से देख सके। पीढ़ी दर पीढ़ी चली गईं, संघर्ष व आंदोलन बढ़ता गया। महिला, पुरुष, बच्चे, युवा समेत समाज के हर तबके ने, सनातन धर्म की हर उपासना विधियों से जुड़े लोगों ने लगातार 500 वर्ष तक संघर्ष किया। एक दिन वह काली रात आई थी, जब प्रभु श्रीराम के मंदिर को अपवित्र करके विवादित ढांचा खड़ा कर दिया गया, लेकिन 1528 से बिना किसी रोक-टोक या भय के कोई दिन ऐसा नहीं रहा होगा, जब सनातन धर्मावलंबियों ने श्रीराम जन्मभूमि के लिए सोचा न हो और कुछ करने की इच्छाशक्ति के साथ अभियान का हिस्सा न बनें हो।  देश के हर कोने में लोग जयश्रीराम कहते हैं  सीएम योगी ने कहा कि प्रभु जब अपना काम कराना चाहते हैं, तभी सफलता प्राप्त होती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जब 1983 में आंदोलन को अपने हाथों में लिया तो आंदोलन चरम की ओर बढ़ता गया। अशोक सिंहल जी ने बिखरी हुई ताकत को एक किया। इस आंदोलन में क्षेत्र, जाति, भाषा की दीवारें टूटी हैं। आज भी देश के किसी कोने में हम जाते हैं तो उसके प्रभाव को महसूस करते हैं। अरुणाचल या ओडिशा, नगालैंड हो या मिजोरम, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड का सुदूर कोना, पश्चिमी-पूर्वी, उत्तरी-दक्षिण, मध्य भारत हो या छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसा जनजाति क्षेत्र, जैसे ही लोग हमें देखते हैं, वे सबसे पहले जयश्रीराम कहते हैं। मैं पश्चिम बंगाल के चुनाव में दूरदराज के गांवों में गया। वहां भी सड़कों पर आकर महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी ने जयश्रीराम से अभिवादन किया।  जिस दिन राम मंदिर का फैसला आया, वह भारत के इतिहास का सबसे खुशहाल दिन  सीएम योगी ने कहा कि हम सभी गुलामी का ढांचा हटने और आंदोलन के साक्षी हैं। जब उच्चतम न्यायालय ने सर्वसम्मति से रामजन्मभूमि का फैसला दिया तो देश-दुनिया के सनातन धर्मावलंबी झूम उठे। कुछ लोग धमकाते थे कि राम जन्मभूमि का फैसला आएगा तो यह होगा-वह होगा। ये वही लोग हैं, जो वकील खड़ा करते थे, रामसेतु को तोड़ना चाहते थे, रामभक्तों पर गोलियां चलाते थे और चाहते थे कि समस्या का समाधान न निकले और सनातन धर्मावलंबी अपमानित हो, लेकिन जब उच्चतम न्यायालय ने सनातन धर्म की भावनाओं के अनुरूप साक्ष्यों के आधार पर सर्वसम्मति से फैसला किया तो देश-दुनिया ने भी उसका स्वागत किया। जिस दिन यह फैसला आया, वह भारत के इतिहास के सबसे शांत और खुशहाल दिन में से एक था।   जब मंदिर बना तो हर आंख में थे खुशी के आंसू सीएम योगी ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में श्रीरामजन्मभूमि … Read more

UP Transport Data Leak? निजी DBA पर गंभीर सवाल, वर्षों से एक ही जगह जमे कर्मचारी निशाने पर

लखनऊ परिवहन विभाग का संवेदनशील डेटा निजी डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर (डीबीए) के हाथों में है। प्रदेश के कई जिलों में अफसरों के खास डीबीए वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, ये डीबीए दलालों को वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंसों से संबंधित विवरण उपलब्ध करा रहे हैं। इससे विभाग का पूरा डेटा गंभीर खतरे में है और दलालों से इनकी मिलीभगत उजागर हुई है।   करीब बीस वर्ष पहले परिवहन विभाग को ऑनलाइन डेटा रखरखाव के लिए ऐसे कर्मचारियों की आवश्यकता महसूस हुई थी। आरटीओ-एआरटीओ को डेटा निकासी के लिए अधिकृत किया गया था, लेकिन डीबीए ही उनकी यूजर आईडी से डेटा निकालते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ियों की फिटनेस, परमिट और उनकी संख्या सहित पूरा डेटा डीबीए की आसान पहुंच में है। वर्षों से एक ही जिले में तैनात डीबीए की दलालों से सांठगांठ हो गई है। वे दलालों को डीएल, परमिट और फिटनेस जैसी महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मिलीभगत की जानकारी वरिष्ठ अफसरों को भी है। प्रदेशभर में कुल 80 डीबीए कार्यरत हैं, जिनमें से दो लखनऊ में तैनात हैं। बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, अमरोहा, वाराणसी, मुरादाबाद, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और कानपुर में कई डीबीए वर्षों से एक ही जगह पर हैं। भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर सवाल ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी ने डीएल बनाने वाले निजीकर्मियों की शिकायत की थी। उन्होंने दलालों से मिलीभगत का हवाला देते हुए पूर्व परिवहन आयुक्त किंजल सिंह से शिकायत की। इसके बाद बिना किसी जांच के निजी डीएलकर्मियों का प्रदेशभर में स्थानांतरण और हटाने का सिलसिला शुरू हुआ। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अपर परिवहन आयुक्त, आईटी पर निजीकर्मियों से वसूली के आरोप भी लगे थे। किंजल सिंह ने इन मामलों में कोई जांच नहीं करवाई। सवाल उठता है कि जब निजी डीएलकर्मियों का स्थानांतरण हो सकता है, तो डीबीए को क्यों बचाया जा रहा है। डीबीए के स्थानांतरण में विफलता ऐसा नहीं है कि डीबीए के स्थानांतरण की कोशिशें नहीं हुईं। तीन साल पहले परिवहन विभाग के आला अफसरों ने स्थानांतरण की कवायद शुरू की थी। हालांकि, अफसरों के खास और जुगाड़ी डीबीए इस प्रक्रिया से बच निकलने में सफल रहे। उन पर किसी भी तरह की आंच नहीं आई और वे अपनी जगह पर बने रहे। सूत्र बताते हैं कि ये डीबीए दलालों के साथ मिलकर अफसरों के लिए भी काम करते हैं। इसी कारण अफसरों ने उन्हें बचाने के लिए पूरा जोर लगा दिया। डाटा सुरक्षा और मिलीभगत का खतरा डीबीए की आसान पहुंच के कारण विभाग का संवेदनशील डाटा लगातार खतरे में है। दलालों को गोपनीय जानकारी मिलने से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है। यह स्थिति परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अफसरों की मिलीभगत या उदासीनता के कारण यह समस्या वर्षों से बनी हुई है। डाटा सुरक्षा सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है। डीबीए की तैनाती और स्थानांतरण नीतियों की समीक्षा करना महत्वपूर्ण है।  

यूपी में मौसम बना आफत: तेज आंधी, बारिश और वज्रपात से 18 लोगों की जान गई

लखनऊ  प्रदेश में जारी भीषण गर्मी और लू के दौर के बीच बुधवार को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश कुछ जिलों के लिए आफत बनकर बरसी। इस दौरान आंधी-बारिश के कारण दीवार ढहने, पेड़ गिरने और बिजली गिरने से हुए हादसों में प्रदेश में 18 लोगों की मौत हो गई। सुल्तानपुर में 7, अमेठी व अयोध्या में 3-3 लोगों की जान चली गई। पूर्वांचल के जिलों में पांच लोगों की मौत हुई है। लखनऊ में शहर से गांव तक की बिजली व्यवस्था चरमरा गई। 100 खंभे और बिजली के तार टूट गए। मौसम की मार ट्रेनों के संचालन पर भी पड़ी। उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल की कई ट्रेनें प्रभावित हुईं। मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार को भी प्रदेश के करीब 35 जिलों में गरज-चमक और बूंदाबांदी की संभावना जताई है। प्रदेश के करीब 20 जिलों में बुधवार को गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश का दौर चला। वाराणसी में 109 किमी प्रति घंटे, अयोध्या में 87 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। हालांकि, इन सबके बीच 45.8 डिग्री सेल्सियस के साथ बांदा बुधवार को भी प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा। लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, सीतापुर में तेज बारिश के साथ ओले भी गिरे। गोरखपुर में 19.2 मिमी, प्रयागराज में 11.2 मिमी और वाराणसी में 9 मिमी वर्षा दर्ज की गई। अमेठी और आजमगढ़ में 5 मिमी बारिश हुई। लखनऊ में जगह-जगह तार पर पेड़ों के गिरने से 400 गांवों व कस्बों की बिजली व्यवस्था तीन से सात घंटे तक ध्वस्त रही। 24 घंटे तक रहेगा ऐसा ही मौसम मध्य क्षोभमंडल में उत्तरी पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के आसपास बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से पूरे प्रदेश में यह बदलाव देखने को मिला। अगले 24 घंटे तक मौसम का यही रुख बने रहने के संकेत हैं। अतुल कुमार सिंह, आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक   यहां है गरज चमक के साथ वज्रपात की संभावना बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, रायबरेली, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर महोबा, झांसी, ललितपुर व आस पास के क्षेत्र। यहां है झोंकेदार हवा (गति 40-50 किमी/घंटा) की आशंका बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही, कन्नीज, कानपुर देहात, कानपुर नगर व आस पास के क्षेत्र।    

अंश निर्धारण में बहराइच ने मारी बाजी, 99.6% निस्तारण के साथ बना मॉडल जिला

अंश निर्धारण में बहराइच अव्वल, 99.6% निस्तारण के साथ बना मॉडल जिला मुख्यमंत्री योगी के राजस्व सुधार अभियान को मिली गति, जमीनी स्तर पर सक्रियता से हासिल हुई बड़ी उपलब्धि डीएम अक्षय त्रिपाठी के नियमित समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने से यह उपलब्धि हासिल हुई लखनऊ  प्रदेश में भूमि संबंधी कार्यों को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए चल रहे योगी सरकार के अंश निर्धारण अभियान में बहराइच जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के नेतृत्व में जिले ने निर्धारित समय सीमा के भीतर 99.6 प्रतिशत मामलों का निस्तारण कर एक नई मिसाल कायम की है। जमीनी स्तर पर सक्रियता बनी सफलता की कुंजी योगी सरकार की प्राथमिकता वाले इस अभियान के तहत बहराइच जिला प्रशासन ने गांव-गांव जाकर अंश निर्धारण की प्रक्रिया को गति दी। राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों ने किसानों एवं भूमिधरों के बीच विवादित हिस्सों का सत्यापन कर रिकॉर्ड को अपडेट किया, जिससे वर्षों से लंबित मामलों का समाधान संभव हो सका। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि नियमित समीक्षा, जिम्मेदारी तय करने और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण के कारण यह उपलब्धि हासिल हुई। प्रशासन की इस सक्रियता से न केवल भूमि विवादों में कमी आएगी, बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अधिक सुगम होगी। प्रदेश के लिए बन सकता है रोल मॉडल अंश निर्धारण की प्रक्रिया भूमि प्रबंधन और विकास कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। पहले कई परियोजनाएं इसी कारण अटक जाती थीं, लेकिन अब बहराइच जैसे जिलों के बेहतर प्रदर्शन से यह समस्या दूर होती दिख रही है। बहराइच का यह मॉडल अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की दिशा में देखा जा रहा है, जिससे पूरे प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी और विवादमुक्त बनाया जा सके।

योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना

गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी, जिसने लिखी विकास की महागाथा योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना गंगा एक्सप्रेसवे : कड़ी चुनौतियों के बीच भी नहीं रुकी रफ्तार, निर्धारित समयसीमा में पूरा हुआ सपना लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा देखा गया एक सपना बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के रूप में देश को समर्पित हो गया। यह कहानी सिर्फ एक सड़क बनने की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जहां स्पष्ट नीति, मजबूत इच्छाशक्ति, तकनीक और प्रशासनिक दक्षता ने कच्ची मिट्टी पर विकास की महागाथा लिख दी। गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण यात्रा इस बात का प्रमाण है कि बुलंद इरादों और प्रभावी क्रियान्वयन से कुछ भी संभव है। गंगा एक्सप्रेसवे, निर्णय से निर्माण तक की वह कहानी है, जो उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ की दिशा में नई गति देगी। 2017–2019: सुनियोजित विकास की रूपरेखा वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार के मुखिया के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यभार संभाला और ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड गंगा एक्सप्रेसवे विकसित करने का फैसला किया गया। 2018–19 में डीपीआर, भूमि चिन्हांकन और टेक्नो-इकोनॉमिक स्टडी पूरी की गई। यही वह चरण था, जहां प्रदेश के समावेशी विकास तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इस एक्सप्रेसवे की डिजाइन तैयार की गई और इसे अमली जामा पहनाने के लिए डेडिकेटेड टीम तैयार की गई। 2020–2021: नीति से क्रियान्वयन तक वर्ष 2020 गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जब परियोजना को आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त हुईं और इसके वित्तीय ढांचे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत अंतिम रूप दिया गया। इससे न केवल निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ, बल्कि परियोजना के समयबद्ध और पेशेवर क्रियान्वयन की मजबूत नींव भी रखी गई। इसके बाद वर्ष 2021 में टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से पूरा करते हुए पूरे प्रोजेक्ट को 4 प्रमुख ग्रुप/पैकेज में विभाजित किया गया। इन पैकेजों का कार्यान्वयन देश की अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, आईआरबी, अडानी, एचजी इंफ्रा और एलएंडटी जैसी एजेंसियों को सौंपा गया। यह मल्टी-पैकेज रणनीति परियोजना के लिए गेम चेंजर साबित हुई, क्योंकि इससे अलग-अलग हिस्सों में एक साथ निर्माण कार्य शुरू हो सका। 2021–2025: नींव से निर्माण तक 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया, जिसके साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने जमीन पर वास्तविक गति पकड़ी। शिलान्यास के तुरंत बाद 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के अलग-अलग पैकेजों में निर्माण कार्य शुरू किया गया। नतीजतन, जहां पहले ऐसी मेगा परियोजनाएं वर्षों तक खिंच जाती थीं, वहीं इस रणनीतिक योजना के कारण गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण ने अभूतपूर्व गति पकड़ी और यह प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ने लगा। 2026: सपना बना हकीकत ट्रायल रन, सेफ्टी ऑडिट और अंतिम तकनीकी जांच पूरी होने के बाद 29 अप्रैल 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस परियोजना का 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया था, उसी का उद्घाटन भी उनके कर-कमलों से संपन्न हुआ, जो समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रतिबद्धता का प्रतीक है।  चुनौतियां आईं, लेकिन रुकी नहीं रफ्तार भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय संतुलन, कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी और जटिल तकनीकी कार्यों जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कभी थमा नहीं। लगभग एक लाख किसानों से भूमि अधिग्रहण को पारदर्शी मुआवजा और डीबीटी के माध्यम से तेज और विवाद-मुक्त बनाया गया, वहीं पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए अलाइनमेंट को संतुलित ढंग से विकसित किया गया। कोविड काल में श्रमिकों और सप्लाई चेन की बाधाओं के बीच भी स्थानीय संसाधनों के उपयोग और चरणबद्ध निर्माण रणनीति से कार्य निरंतर चलता रहा। सीएम योगी की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता रही निर्णायक इस पूरे प्रोजेक्ट की गति बनाए रखने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता निर्णायक रही। उन्होंने नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से हर चरण की प्रगति पर नजर रखी, जबकि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की सक्रिय भूमिका ने जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को गति दी। ड्रोन सर्वे, डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की गई। परिणामस्वरूप, यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल चुनौतियों को पार करता हुआ आगे बढ़ा, बल्कि तय समयसीमा में पूरा होकर प्रभावी प्रशासन और मजबूत नेतृत्व का उदाहरण भी बना।

शिलान्यास से उद्घाटन तक: योगी सरकार की तेज़ी से विकास की पहचान

शिलान्यास से लेकर उद्घाटन तक का संकल्प, तेज गति है योगी सरकार की पहचान एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर से उत्तर प्रदेश को मिली नई पहचान योगी सरकार में हर विकास योजना को रिकॉर्ड समय में किया गया पूरा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने यह दिखाया है कि योजनाओं को केवल शुरू करना ही नहीं, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करना ही असली विकास है। सीएम योगी ने यूपी को ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ दिया। इसमें परियोजनाओं की परिकल्पना से लेकर उनके पूर्ण होने तक काम कभी नहीं रुकता, चाहे जेवर एयरपोर्ट, गंगा, पूर्वांचल, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे हों या इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अन्य योजनाएं। ताजा उदाहरण देखा जाए तो गंगा एक्सप्रेसवे हमारे सामने है। 595 किलोमीटर के एक नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे का उत्तर प्रदेश में 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया गया और 29 अप्रैल 2026 को आज जनता को समर्पित कर दिया गया। सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश को 9 वर्षों में बीमारू राज्य की पहचान से बाहर निकाला। उन्होंने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सड़क, मेट्रो, एयरपोर्ट समेत अन्य तमाम क्षेत्रों में सौगात दी। सीएम योगी के कार्यकाल में सिर्फ योजनाएं बनी ही नहीं बल्कि वह जमीन पर भी उतरीं। उन्होंने योजनाओं का शिलान्यास किया फिर जमीनी स्तर पर इनकी तैयारी, विभागों की जिम्मेदारी, निर्माणाधीन योजनाओं की लगातार निगरानी खुद की और आखिर में उनका लोकार्पण कर प्रदेश की जनता को लाभ पहुंचाया। सीएम योगी के निर्देशन में ही जेवर एयरपोर्ट के पहले फेज का रिकॉर्ड टाइम में उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ, जिसका शिलान्यास 25 नवंबर 2021 को किया गया था। यह उत्तर प्रदेश का पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते हवाई यातायात के दबाव कम करने का काम कर रहा है। साथ ही सीएम योगी के विजन के चलते ही उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना, जहां 5 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे बन चुके हैं। पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे समेत लिंक एक्सप्रेस पूरे हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन की ही देन है कि 14 जुलाई 2018 को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास हुआ और 16 नवंबर 2021 को इसका उद्घाटन भी कर दिया गया। इसी क्रम में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की आधारशिला फरवरी 2020 में रखी गई और जुलाई 2022 में इसे जनता को समर्पित किया गया। उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकालने के लिए बुंदेलखंड जैसे तमाम पिछड़े क्षेत्रों सड़क नेटवर्क को बढ़ावा दिया गया। इससे क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव हो रहा है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का भी मार्च 2019 में शिलान्यास हुआ। यह एक्सप्रेसवे भी लगभग बनकर तैयार है, जिसका लोकार्पण योगी सरकार अगले कुछ महीने में कर सकती है। इससे लखनऊ-कानपुर के बीच की यात्रा का समय लगभग दो घंटे से घटकर 45 मिनट हो जाएगा।  वहीं पूर्वांचल की राह आसान करने वाले गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पूरा किया गया। इस परियोजना पर काम फरवरी 2020 से शुरू हुआ था। प्रदेश सरकार के दृढ़ संकल्प के चलते इसका जून 2025 में योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन किया। वहीं 115 किलोमीटर लंबे झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर भी कार्य योजना बनाई जा रही है। अनुमान है कि इस पर 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह 63 गांव से होकर गुजरेगा, जिससे विकास की धारा बहेगी। इन्हीं विजन के चलते आज देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में शानदार उपलब्धि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल दो एयरपोर्ट संचालित हो रहे थे, जिसमें लखनऊ और वाराणसी का नाम शामिल है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन ने देश में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल दी। राज्य 21 एयरपोर्ट का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी ने यूपी को 5 इंटरनेशनल एयपोर्ट वाले राज्य के रूप में पहचान दिलाई है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण अयोध्या एयरपोर्ट भी है। अयोध्या में फरवरी 2022 से महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनना शुरू हुआ था। यह रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुआ और 30 दिसंबर 2023 में उद्घाटन किया गया। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के लिए 10 मार्च 2024 की तारीख काफी अहम रही। इस दिन एक साथ आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, मुरादाबाद और श्रावस्ती के हवाई अड्डों का उद्घाटन किया गया। सीएम योगी के विजन का नतीजा है कि जहां 2016-17 में महज 59.97 लाख लोगों ने हवाई यात्रा की थी। वहीं 2024-25 में यह संख्या 14 करोड़ से ज्यादा हो गई। हर शहर को मेट्रो देने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में रैपिड रेल और मेट्रो परियोजनाओं को लेकर भी काफी काम हुआ है। इस तरफ भी योगी सरकार ने पूरा ध्यान दिया है। यूपी के शहरों के अंदर यातायात सुधारने के लिए तेजी से मेट्रो कनेक्टिविटी भी बढ़ाई जा रही है। इसी क्रम में 7 दिसंबर 2020 को आगरा मेट्रो की नींव रखी गई। महज चार साल के अंदर मार्च 2024 में इसका उद्घाटन कर संचालन शुरू किया गया। वहीं 22 फरवरी 2026 को मेरठ मेट्रो का संचालन शुरू हुआ। वहीं योगी सरकार ने गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज में भी मेट्रो संचालन की मंशा जाहिर की है। रक्षा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का बढ़ रहा योगदान केंद्र सरकार ने योगी सरकार पर भी भरोसा जताया और नतीजा रहा कि आज यूपी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट भी बन चुकी है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट का उद्घाटन मई-जून 2025 में हुआ, जिससे देश में यूपी की अलग छवि बनी है। वहीं वर्ष 2019 में यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) की नींव रखी गई और वर्ष 2023 से इसका संचालन शुरू हुआ। इसके तहत कानपुर में गोला-बारूद और मिसाइल संयंत्र अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस में फरवरी 2024 से काम शुरू हो गया है। रक्षा उत्पादों के निर्माण में उत्तर प्रदेश बड़ी भूमिका निभा रहा है। इन विकास योजनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि योगी सरकार के ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ की सफलता के पीछे बदलाव की लाने की इच्छा और प्रशासनिक सुधार महत्वपूर्ण कारण हैं। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है और काम में लापरवाही के लिए सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इसके साथ ही तकनीक का उपयोग बढ़ाकर परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाया गया, जिससे सफलता … Read more

योगी सरकार के तहत पर्यटन को मिली नई दिशा, यूपी बना आस्था और विकास का केंद्र

योगी सरकार में पर्यटन को नई उड़ान, यूपी बना आस्था और विकास का केंद्र बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, पर्यटन मंत्री ने दिए जनसुझावों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश पर्यटन बजट 22 गुना, संस्कृति के लिए बजट 20 गुना बढ़ा 1 साल में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का यूपी आगमन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के नए स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुका है। योगी सरकार की मजबूत नीतियों, पारदर्शी कार्यशैली और विरासत संरक्षण के संकल्प ने प्रदेश को देश के सबसे तेजी से उभरते पर्यटन राज्यों में शामिल कर दिया है। पर्यटन विभाग की स्थायी समिति की बैठक में सामने आए आंकड़ों ने इस सफलता पर मुहर लगा दी, जहां बताया गया कि पर्यटन बजट में 22 गुना और संस्कृति के लिए बजट में 20 गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन प्रदेश की लोकप्रियता का प्रमाण है। अयोध्या, काशी, प्रयागराज समेत धार्मिक स्थलों का भव्य विकास योगी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। पर्यटन को रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ रही सरकार मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश का पर्यटन क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2017 से पहले जहां पर्यटन विकास सीमित दायरे में था, वहीं आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता, सुशासन और योजनाबद्ध विकास के माध्यम से पर्यटन को रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ रही है। 156 करोड़ से अधिक पर्यटक आए यूपी अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन विभाग के बजट में लगभग 22 गुना और संस्कृति विभाग के बजट में करीब 20 गुना वृद्धि की गई है। यह बढ़ोतरी मुख्यमंत्री योगी की दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी बनाने में पर्यटन की अहम भूमिका होगी। बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2025 में 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का उत्तर प्रदेश आगमन हुआ, जो अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। महाकुंभ-2025 के आयोजन ने दुनिया भर का ध्यान खींचा महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन ने दुनिया भर का ध्यान उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित किया। प्रयागराज, अयोध्या और काशी को जोड़ने वाला स्पिरिचुअल ट्रायंगल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अनूठा आध्यात्मिक अनुभव दे रहा है। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार अब एक्सपीरियंशल टूरिज्म पर फोकस कर रही है, ताकि पर्यटक सिर्फ भ्रमण न करें बल्कि प्रदेश में अधिक समय रुकें और स्थानीय संस्कृति, खानपान तथा परंपराओं को करीब से जान सकें। इससे स्थानीय रोजगार और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने झांसी में हेली सेवा, प्रयागराज में वाटर स्पोर्ट्स, सहारनपुर में जंगल सफारी, कानपुर में औद्योगिक पर्यटन और गाजीपुर सहित अन्य क्षेत्रों में पर्यटन विस्तार से जुड़े सुझाव भी दिए हैं।

एक्सप्रेस-वे, मेट्रो और एयरपोर्ट से UP बना देश की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था

लखनऊ राजनीतिक इच्छाशक्ति प्रबल हो तो राज्य को नक्शे की सीमाओं से निकलकर विचार बनते देर नहीं लगती, जैसा कि आज उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। यह राज्य आज जीवंत, स्पंदित और संकल्पशील दिखाई देता है तो इसलिए कि यहां हर मोड़ पर नवाचार और निश्चय की छाप दिखाई देती है। यह परिवर्तन दूरदर्शी सोच और निरंतर प्रयासों का वह सशक्त परिणाम है, जो आने वाली पीढ़ियों की मजबूत आधारशिला बनेगा। जेवर की धरती पर उठता हुआ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक्सप्रेस-वे का फैलता हुआ जाल, लखनऊ और कानपुर की धमनियों में दौड़ती मेट्रो ये केवल स्टील और कंक्रीट की संरचनाएं नहीं हैं। ये उस सामूहिक आकांक्षा की अभिव्यक्ति हैं, जो करोड़ों लोगों के भीतर दशकों से दबी पड़ी थी और जो आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच की वजह से अपने साकार रूप में आकर विकसित उत्तर प्रदेश की सशक्त बुनियाद बनने जा रही हैं। उत्तर प्रदेश वह राज्य है जिसकी मिट्टी ने गंगा-यमुना की सभ्यता को सींचा, जिसके आंगन में बुद्ध की करुणा और कबीर की फक्कड़ी एक साथ पली, जिसके खेतों से उठे किसानों ने स्वाधीनता संग्राम की लौ को जलाए रखा। लेकिन स्वतंत्रता के बाद के दशकों में यही राज्य एक विरोधाभास का प्रतीक बन गया। विशाल जनशक्ति और अपार संसाधनों के बावजूद विकास की दौड़ में पिछड़ा, राजनीतिक उठापटक में उलझा और पलायन की पीड़ा को चुपचाप सहता रहा। लेकिन पिछले नौ वर्षों इसी राज्य ने अपने परिदृश्य को बदला है। अपने प्रति देश-दुनिया में गहरे तक धंसी भ्रांतियों से मुक्ति पाई। और इसीलिए इस परिवर्तन को समझना, परखना और उससे सवाल करना, तीनों एक साथ जरूरी हैं। राजनीतिक इच्छाशक्ति ने बदली तस्वीर उत्तर प्रदेश… यह नाम सुनते ही कुछ वर्ष पहले तक जो तस्वीर मन में उभरती थी, वह अव्यवस्था, पलायन, जातीय समीकरणों की राजनीति और विकास की अनंत प्रतीक्षा की थी। लेकिन आज जब इस राज्य की चर्चा होती है, तो बात जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की होती है। गंगा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वेज की होती है। लखनऊ और कानपुर मेट्रो की होती है। यह परिवर्तन महज एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक ऐसी वास्तविकता है, जो जमीन पर दिख रही है, जो आंकड़ों में प्रकट हो रही है और जो उस आम नागरिक की आंखों में पूरी होती उम्मीदों के रूप में देखी जा सकती है। यह परिवर्तन एक रात में नहीं हुआ। इसकी जड़ें उस राजनीतिक इच्छाशक्ति में हैं, जो केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि क्रियान्वयन तक भी पहुंची। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं। उत्तर प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 2017 में 13.30 लाख करोड़ था जो आज 36 लाख करोड़ के करीब है। राज्य ने अपने आप को देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है और वर्ष 2027 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह कोई हवाई महत्वाकांक्षा नहीं, यह उस बुनियाद पर टिकी योजना है जो जेवर से लेकर पूर्वांचल तक बिछाई जा रही है। एक्सप्रेस-वे पर अवसरों की रफ्तार जब किसी राज्य में एक्सप्रेस-वे का जाल बिछता है, तो यह केवल सड़कें नहीं बनतीं, उन सड़कों पर अवसरों की आवाजाही होती है। आज देश के एक्सप्रेस-वे का 55 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने जा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की 341 किलोमीटर की लंबाई लखनऊ को गाजीपुर से जोड़ती है, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे 296 किलोमीटर में फैला है, और गंगा एक्सप्रेस-वे, जो 594 किलोमीटर लंबा होगा, देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे बनने की ओर अग्रसर है। जब एयरपोर्ट का निर्माण होता है, तो केवल रनवे नहीं बनता, एक क्षेत्र की आकांक्षाएं उड़ान भरती हैं। जेवर हवाई अड्डा, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा, लगभग 29,560 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रहा है। पूर्णतः निर्मित होने पर यह एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा और प्रतिवर्ष सात करोड़ से अधिक यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। यह केवल एक अवसंरचना परियोजना नहीं है। यह इस बात का प्रतीक है कि भारत का सबसे बड़ा राज्य अब वैश्विक मानचित्र पर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए तत्पर है। आर्थिक शक्ति में बदलती विशाल जनसंख्या किसी भी राज्य की विकास यात्रा को समझने के लिए केवल परियोजनाओं की गणना पर्याप्त नहीं होती। यह समझना भी जरूरी है कि इन परियोजनाओं का सामाजिक और आर्थिक संदर्भ क्या है। उत्तर प्रदेश, जो देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहां 25 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, अपनी जनसांख्यिकीय शक्ति को अब धीरे-धीरे आर्थिक शक्ति में रूपांतरित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश-विदेश के निवेशक इसे अब सुरक्षित गंतव्य मानते हैं तो उन्हें यहां की कनेक्टिविटी भी आकर्षित करती है। उद्योगों का बढ़ना रोजगार का सबसे बड़ा आधार है। जब राज्य का युवा पलायन करने के बजाय अपने जिले में ही उद्योग और रोजगार की संभावना देखने लगे, तो यह सबसे बड़ा परिवर्तन है। डिफेंस कॉरिडोर जैसी योजनाएं सिर्फ औद्योगिक परियोजना ही नहीं, बल्कि उस पलायन की त्रासदी का उत्तर है जो दशकों से प्रदेश को खोखला कर रही थी। मेट्रो और एमआरटीएस की बात करें तो यह केवल शहरी सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि एक मानसिकता का परिवर्तन है। मेट्रो और एमआरटीएस केवल यातायात के साधन नहीं, ये उस आधुनिक उत्तर प्रदेश की रीढ़ हैं जो अपने नागरिक को यह अहसास दिलाना चाहता है कि वह किसी महानगर से कम नहीं। किसी शहर में मेट्रो दौड़ती है, तो केवल यातायात की समस्या हल नहीं होती, उस शहर के नागरिक का आत्मसम्मान भी बदलता है। साहस की परीक्षा दे रहा उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश का यह दौर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां संभावनाएं असीमित हैं और जिम्मेदारियां भी उतनी ही विशाल। इतिहास उन्हीं क्षणों को याद रखता है जब कोई समाज अपनी नियति को स्वयं गढ़ने का साहस करता है। उत्तर प्रदेश आज उसी साहस की परीक्षा दे रहा है। वह केवल वर्तमान को नहीं बदल रहा, आने वाली पीढ़ियों के लिए नींव रच रहा है। यह भारत के उस केंद्र का जागरण है जिसे सदा से शक्ति का स्रोत माना गया है। अब बड़ी चुनौती यह सिलसिला बनाए रखने की है क्योंकि अनवरत … Read more

गायक, शायर और आरजे के लिए बड़ा मौका: Voice of U.P. टैलेंट हंट की हुई लॉन्च

लखनऊ फीवर एफएम नेटवर्क और हिन्दुस्तान ने उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े वॉयस टैलेंट हंट 'Voice of U.P.' की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यूपी के गायक, शायर और आरजे जैसे कलाकार लाइव हिन्दुस्तान के ऐप पर इस टैलेंट हंट में हिस्सा ले सकते हैं। 'Fever in U.P.: Ab Machega Bhaukaal' के बैनर तले इस टैलेंट हंट का लॉन्च इवेंट लखनऊ में रखा गया था, जिसमें U.P. के कलाकारों, क्रिएटर्स और इंडस्ट्री के दिग्गजों का जमावड़ा दिखा। इस मौके पर पद्मश्री मालिनी अवस्थी, यूपी के सीएम के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, Bigg Boss के अनाउंसर विजय विक्रम सिंह, एक्टर शारिब हाश्मी, कथाकार लक्ष माहेश्वरी और डिजिटल क्रिएटर्स मारूफ कलमेन, छोटी फिलिम, अपेक्षा गुरनानी, और द फीमेल बैंड मौजूद रहे। आज की युवा पीढ़ी के बारे में बात करते हुए मालिनी अवस्थी ने कहा कि यह पीढ़ी आत्मविश्वासी है, मंच पर खड़े होने से घबराती नहीं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ सामने आना काफी नहीं है, अब क्रिएटर्स को अपने कंटेंट में गंभीरता चाहिए। मालिनी ने कहा 'मैं हर कलाकार में वही देखती हूं, जो मैं थी। बदायूँ, फर्रुखाबाद, कन्नौज- ये वो इलाके हैं, जहां दुनिया के सबसे कमाल के कलाकार पैदा हुए, लेकिन वहां कोई नहीं पहुँचता। प्रतिभा की कमी नहीं है- बस पहुंचाने वाला कोई नहीं था। जिस तरह रेडियो ने कभी कलाकारों को आवाज़ दी- 'Voice of UP' वही काम करेगा।' सीएम योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा, 'पहले लोग बताते नहीं थे कि वो UP के हैं, आज वही लोग गर्व से कहते हैं कि हम U.P. के हैं। अयोध्या और वाराणसी आज दुनिया के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले शहरों में हैं। यह U.P. का नया दौर है, और इस दौर में गांव-देहात के कलाकारों को एक असली मंच मिलना चाहिए। 'Voice of U.P.' वही मंच है।' विजय विक्रम सिंह ने कहा कि UP की आवाज़ों में वो दम है जो पूरे देश को सुनाई देना चाहिए। शारिब हाश्मी और लक्ष माहेश्वरी ने भी नए क्रिएटर्स को कंटेंट और निरंतरता पर ध्यान देने की सलाह दी। हिंदुस्तान के चीफ ऑपरेटिंग अफसर रजत कुमार ने कहा, ‘101 साल पुराना Hindustan Times, 90 साल का Hindustan और 20 साल का Fever FM- यह तीनों मिलकर UP में जो Voice Of U.P. लाने जा रहे हैं, वो काबिले तारीफ होगा।’ HT मीडिया ग्रुप के रेडियो बिज़नेस के सीईओ रमेश मेनन ने कहा, 'Fever Network आज UP का सबसे बड़ा रेडियो नेटवर्क है- और 'Voice of U.P.' उसी का अगला कदम है। हमारा मानना है कि U.P. में वही जीतेगा, जो यहां के लोगों तक सिर्फ पहुंचे नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बने। 'Voice of U.P.' के जरिये हम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनना चाहते हैं, क्यूंकि जो आवाज़ यहां से उठेगी, वो पूरे देश को सुनाई देगी।' इस मौके पर मालिनी अवस्थी, विजय विक्रम सिंह, मारूफ कलमेन, छोटी फिलिम, अपेक्षा गुरनानी, और मेरी जिंदगी- द फीमेल बैंड को पहले Voice of U.P. के अवार्ड से नवाज़ा गया। साथ ही उत्तर प्रदेश के जाने-माने उद्योगपति और मीडिया एजेंसियों के प्रतिनिधि भी बड़ी तादाद में मौजूद रहे। राज्य के बड़े कारोबारी और एजेंसियों को उनके काम और योगदान के लिए भी 'Voice of U.P.' के खिताब से नवाज़ा गया। Voice of U.P. क्या है? Voice of U.P. उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा वॉयस टैलेंट हंट है, जो Fever FM और Hindustan मिलकर लाए हैं। इस मुहिम का मकसद सीधा है- उत्तर प्रदेश के हर उस इंसान को एक मंच देना, जिसकी आवाज़ में दम है, लेकिन मौका नहीं मिला। चाहे आप गाते हों, या शायरी लिखते हों, कॉमेडी करते हों या RJ बनने का सपना देखते हों- Voice of UP में सबकी जगह है। वॉयस ऑफ यूपी में कैसे हिस्सा लें? वॉयस ऑफ यूपी में भाग लेना बेहद आसान है। इसके लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें, वीडियो के साथ एंट्री सबमिट करें और अपनी आवाज को वो मंच दें, जिसका वो हकदार है। Voice of UP के लिए रजिस्ट्रेशन 1 मई, 2026 को खुलेगा कैसे Voice of UP में शामिल हो सकते हैं     सबसे पहले हिंदुस्तान ऐप को गूगल प्लेस्टोर या ऐप स्टोर से डाउनलोड करें     Voice of UP को सेलेक्ट करें     रजिस्टर करें 1 मई के बाद     अपना वीडियो अपलोड करें     ऐप कैसे डाउनलोड करें

960 मीटर लंबा फ्लाईओवर जाम से छुटकारा दिलाएगा, अयोध्या रोड-सीतापुर रोड की राह आसान

 लखनऊ  इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर अब जाम नहीं लगेगा, क्योंकि यहां फ्लाईओवर मई माह से बनने जा रहा है। कार्यदायी संस्था ने अपनी मशीनें जहां शहर के बाहर स्थित यार्ड में पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है। वहीं कर्मचारियों ने इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे के आसपास नाप जोख भी शुरू कर दी है। लोक निर्माण विभाग की एनएच शाखा इस फ्लाईओवर का निर्माण करवाने जा रही है। इसे डेढ़ साल से पौने दो साल में बनाकर तैयार कर लिया जाएगा। यह 960 मीटर लंबा होगा और इसके निर्माण पर करीब 108 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस फ्लाईओवर को बनवाने के लिए क्षेत्रीय विधायक डॉ. नीरज बोरा पिछले कई सालों से प्रयासरत थे। रक्षामंत्री व सांसद राजनाथ सिंह द्वारा खुर्रमनगर फ्लाईओवर के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के सामने ही रक्षामंत्री ने इंजीनियरिंग कालेज चौराहे का प्रस्ताव रखा था, विधायक ने भी नितिन गडकरी को पत्र लिखकर मांग की थी। अब यह बनने जा रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर बनने वाले फ्लाईओवर के मार्ग में यहां बना फुटओवर ब्रिज बाधा बना हुआ था, अब इसे भी लोक निर्माण विभाग स्थायी रूप से हटा देगा। फ्लाईओवर बनने से अयोध्या रोड से सीतापुर रोड के बीच वाहनों की रफ्तार और बेहतर होगी। लोक निर्माण विभाग की एनएच शाखा ने सभी प्रकार की औपचारिकताएं अपने स्तर से पूरी कर ली हैं। बिजली विभाग, जलकल की लाइनों को शिफ्ट करने के लिए संबंधित विभागों को भी निर्देशित कर दिया गया है। उद्देश्य है कि निर्माण के दौरान कोई टूट फूट न हो, जिससे आम नागरिकों को परेशानी उठनी पड़े। स्थानीय लोगों के मुताबिक चार लेन का फ्लाईओवर आईआईएम रोड फ्लाईओवर से मडियांव फ्लाइओवर, इंजीनियरिंग कालेज फ्लाइओवर, टेढ़ी पुलिया फ्लाईओवर, खुर्रमनगर फ्लाइओवर, मुंशी पुलिया फ्लाइओवर और पालीटेक्निक फ्लाइओवर होते हुए अयोध्या रोड पर सीधे पहुंच सकेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इस सुविधा से हाईकोर्ट से लेकर सीतापुर रोड तक लगने वाला ट्रैफिक जहां काफी हद तक कम हो जाएगा, वहीं वाहनों को रफ्तार मिलेगी। इन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा मिलेगा लाभ इंजीनियरिंग कालेज चौराहे पर फ्लाइओवर बनने से विकास नगर, खुर्रमनगर, गुडंबा, जानकीपुरम व जानकीपुरम विस्तार के आसपास बसी पांच लाख आबादी को राहत मिलेगी और सर्विस लेन पर जो जाम लगता था, उस पर नियंत्रण काफी हद तक होगा।     मई 2026 से इंजीनियरिंग कालेज चौराहे पर बनने वाले फ्लाइओवर का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।- राज कुमार पिथौरिया, अधिशसाी अभियंता, एनएच (शाखा) पीडब्ल्यूडी