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अयोध्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के दान में हेराफेरी मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज

यूपी सरकार का कड़ा रुख, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र दान प्रकरण में दर्ज हुई पहली एफआईआर  अयोध्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के दान में हेराफेरी मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज सीएम योगी के निर्देश पर गठित एसआईटी ने प्रारंभिक प्रतिवेदन में की हैं कठोर संस्तुतियां ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में दर्ज किया गया मामला एफआईआर में 8 नामजद के अलावा अज्ञात आरोपियों का भी उल्लेख आरोपियों से जारी है पूछताछ लखनऊ/अयोध्या  यूपी सरकार के सख्त रुख की वजह से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र दान प्रकरण में 8 नामजद व अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज कर ली गई है। तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर सीएम योगी द्वारा गठित एसआईटी के प्रारम्भिक प्रतिवेदन में कठोर संस्तुतियां की गई हैं। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर  श्रीराम जन्मभूमि थाने में दर्ज की गई इस एफआईआर (अपराध संख्या 90/2026) में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, श्री राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को नामजद तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया है। आरोपियों के खिलाफ धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) बीएनएस व 13(1)(a) पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। दरअसल, अयोध्या राम मंदिर में बीते दिनों दान चोरी का मामला सामने आया. यह चंदा चोरी का मामला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद दान और अन्य चढ़ावे में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है. उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी की प्रारंभिक जांच के बाद मंदिर ट्रस्ट की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. आरोप है कि दान की राशि में हेराफेरी, आपराधिक साजिश और भरोसे का उल्लंघन किया गया. कितने का गबन है और कौन-कौन इसके मास्टरमाइंड हैं, इसकी जांच जारी है।  राम मंदिर चंदा चोरी मामले में गुरुवार को बड़ा एक्शन बहरहाल, राम मंदिर चंदा चोरी मामले में गुरुवार देर रात तक हलचल थी. गुरुवार देर रात तक सबकी गिरफ्तारी हो गई. ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज की गई. इस एफआईआर (अपराध संख्या 90/2026) में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, श्री राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को नामजद और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया है।  एफआईआर में किस-किसका नाम, कौन-कौन अरेस्ट?     रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू (चम्पत राय का करीबी और ड्राइवर)     अनुकल्प मिश्र     अविनाश शुक्ला     करुणेश पांडेय     मनीष यादव     लवकुश मिश्र     रमा शंकर मिश्र     सुभाष श्रीवास्तव (गणना इंचार्ज और रिटायर्ड बैंक कर्मी)   करुणेश पांडेय का क्या रोल था राम मंदिर में चंदा चोरी में गिरफ्तार करुणेश पांडेय का काम मंदिर में चढ़ाए जाने वाले चढ़ावों का गणना कक्ष तक पहुंचाने का रोल था. श्रीराम मंदिर में जो भी चढ़ाया जाया करता था, उस चढ़ावे को गणना कक्ष सिर्फ ले जाने का ही नहीं बल्कि गेनने का काम था.  करुणेश पर आरोप है कि इन्होंने दानराशि चुराकर संपत्ति अर्जित की है।  रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू  श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को गिरफ्तार किया गया. राम मंदिर में उनका काम व्यवस्थापक, मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन कराने से लेकर जनसुविधाओं का ध्यान रखता था. टुन्नू यादव अकेला ऐसा शख्स था, जो बेरोकटोक मंदिर में कही आ जा सकता है. टुन्नू यादव की गाड़ी बुलेट मंदिर के अंदर जाकर खड़ी होती थी. इनका काम दानपात्रों की देखरेख करना और उन्हें बेसमेंट तक पहुंचाने का था।    सुभाष चंद्र श्रीवास्तव  राम मंदिर चंदा चोरी में फंसे सुभाष चंद्र श्रीवास्तव एसबीआई से रिटार्ड बैंक कर्मी है. राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे वाले नोट गिनने की पूरी प्रक्रिया के इंचार्ज थे.  कैश काउंटिंग सेंटर के स्टाफ की निगरानी करना था. सुभाष कैश काउंटिंग सेंटर के स्टाफ का प्रभारी था।  लवकुश मिश्रा  अयोध्या के राम मंदिर में आने वाले तमाम चढ़ावा और नकदी को गिनने वाली टीम में लवकुश मिश्रा शामिल थे.  लवकुश मिश्र मंदिर में आने वाले चढ़ावे को गिनने का काम करता था. लवकुश मिश्र के घर से करीब 10 लाख रुपए बरामद हुए थे।  अनुकल्प मिश्रा  राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे को गणना कक्ष में गिनने की जिम्मेदारी अनुकल्प मिश्रा के पास थी. मंदिर में चढ़ावे वाले रुपये को गिनने के काम से लगभग दो साल से कर रहा था. श्रद्धालुओं की मदद के लिए बने सुविधा सेंटर में तैनात था, लेकिन वह नोट गिनने की प्रक्रिया में शामिल था. उस पर ऊपर चढ़ावा के वाउचर में गड़बड़ी करने का आरोप है. लवकुश मिश्रा का रिश्ते में साला लगता है।  मनीष यादव  मनीष यादव पर राम मंदिर के दानपात्रों में चढ़ाए गए चढ़ावे में नकली नोट निकालने और उसे गिनकर अलग रखने की जिम्मेदारी थी. मनीष पर भी चढ़ावा चोरी का आरोप है।  अविनाश शुक्ला राम मंदिर में चढ़ावे वाले पैसे और नकदी को दान पात्रों से निकालने और धनराशि को गणना कक्ष तक ले जाने का काम अविनाश शुक्ला करता था. वहां गिनती करने वाली टीम में शामिल था. अविनाश शुक्ला पर आरोप है कि इन्होंने दान राशि चुराने का काम किया है।  किन-किन धाराओं में केस दर्ज? आरोपियों के खिलाफ धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) बीएनएस व 13(1)(a) पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।  एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट कब सौंपी? इस प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख सदस्य लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने बीते मंगलवार को टीम के अन्य दो सदस्यों के साथ शासन को प्रारंभिक प्रतिवेदन सौंपा था, जिसमें कठोर अनुशंसा हैं।  क्यों हुआ था एसआईटी का गठन इसके बाद ही गुरुवार को एफआईआर दर्ज किए जाने की कार्रवाई अंजाम दी गई है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के भेंट/चढ़ावा में चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने विशेष जांच का अनुरोध किया था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए ट्रस्ट का गठन हुआ था।  एफईआईर में चंपत राय का नाम है या नहीं राम मंदिर दान चोरी मामले में जिन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की … Read more

यात्री सुरक्षा को लेकर योगी सरकार का बड़ा कदम, 30 दिन चलेगा विशेष जांच अभियान

लखनऊ अग्निकांड के बाद परिवहन विभाग अलर्ट, बसों में फायर सेफ्टी की होगी सघन जांच यात्री सुरक्षा को लेकर योगी सरकार का बड़ा कदम, 30 दिन चलेगा विशेष जांच अभियान अग्निशमन यंत्र नहीं तो नहीं मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट, परिवहन विभाग का सख्त निर्देश 23 जुलाई तक चलेगा विशेष अभियान, परिवहन मुख्यालय को देनी होगी रिपोर्ट लखनऊ  लखनऊ अलीगंज अग्निकांड के बाद योगी सरकार लोगों को सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हो गई है। विभिन्न विभागों ने ऐसे हादसों को रोकने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने यात्री सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देश पर प्रदेशभर में अगले 30 दिनों तक विशेष अभियान चलाकर स्लीपर बसों, स्कूल बसों, स्टेज कैरिज बसों और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों में अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता की सघन जांच की जाएगी। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनकी प्रभावशीलता जनजीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी संभागीय और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान के तहत फिटनेस जांच के समय वाहनों में लगे अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, क्षमता, वैधता, कार्यशीलता तथा उनके उचित स्थान पर स्थापित होने की विशेष रूप से जांच की जाएगी। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अग्निशमन यंत्र निर्धारित अवधि के भीतर रिफिल अथवा सर्विस किए गए हों और उनकी वैधता समाप्त न हुई हो। फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने को लेकर शर्तें निर्देशों के अनुसार जिन वाहनों में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं पाए जाएंगे, अथवा उपकरण कार्यशील स्थिति में नहीं होंगे या उनकी वैधता समाप्त हो चुकी होगी, ऐसे वाहनों को कमियां दूर होने तक फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा। साथ ही आवश्यक प्रवर्तन कार्रवाई भी की जाएगी। विशेष अभियान के दौरान प्रवर्तन अधिकारी बस अड्डों, प्रमुख मार्गों, टोल प्लाजा, जनपद सीमाओं और अन्य उपयुक्त स्थानों पर वाहनों की सघन जांच करेंगे। स्लीपर बसों की जांच में आपातकालीन निकास, हैमर, विद्युत वायरिंग और अन्य सुरक्षा उपकरणों की भी पड़ताल की जाएगी। वहीं स्कूल बसों में अग्निशमन यंत्रों के साथ अन्य निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुपालन का सत्यापन भी किया जाएगा। जांच अभियान की मुख्यालय को देनी होगी रिपोर्ट परिवहन विभाग ने वाहन स्वामियों, बस संचालकों, परिवहन कंपनियों और विद्यालय प्रबंधन को अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक करने, अग्निशमन यंत्रों के नियमित अनुरक्षण और समयबद्ध परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह 30 दिवसीय विशेष अभियान 23 जुलाई 2026 तक संचालित किया जाएगा। सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को अभियान के दौरान की गई जांच और प्रवर्तन कार्रवाई का विस्तृत विवरण परिवहन मुख्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

योगी सरकार की पारदर्शी भर्ती का बड़ा असर, होम्योपैथिक भेषजिक के 395 पदों पर हुआ चयन

योगी सरकार में पारदर्शी भर्ती का असर, होम्योपैथिक भेषजिक के 395 पदों पर अभ्यर्थियों का चयन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने गुरुवार को जारी किया परिणाम  397 पदों के सापेक्ष 395 अभ्यर्थियों का चयन, दो पद रहे रिक्त अनारक्षित वर्ग की कटऑफ 48.75, ओबीसी की 42.75 अंक रही योगी सरकार में निष्पक्ष और मेरिट आधारित भर्ती से युवाओं का बढ़ा भरोसा  लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध बनाकर युवाओं का भरोसा मजबूत किया है। इसी का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने होम्योपैथिक भेषजिक भर्ती के 397 पदों में से 395 पदों पर चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली। इसी क्रम में आयोग ने गुरुवार, 25 जून को भर्ती का अंतिम परिणाम और कटऑफ जारी कर दिया है। आयोग ने कुल 397 रिक्त पदों के सापेक्ष 395 अभ्यर्थियों का चयन किया है, जबकि दिव्यांग वर्ग की दो उपश्रेणियों में उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध न होने के कारण दो पद रिक्त रह गए। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से जारी सूचना के अनुसार लिखित परीक्षा तथा अभिलेख परीक्षण के आधार पर अंतिम चयन सूची तैयार की गई है। चयनित अभ्यर्थियों में 159 अनारक्षित, 83 अनुसूचित जाति, 7 अनुसूचित जनजाति, 107 अन्य पिछड़ा वर्ग तथा 39 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के अभ्यर्थी शामिल हैं। भर्ती परिणाम में महिला श्रेणी में 82 अभ्यर्थी चयनित हुई है। वहीं उत्कृष्ट खिलाड़ी श्रेणी के 7 पदों पर योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध न होने के कारण इन पदों पर मेरिट के अनुसार अन्य अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। आयोग ने श्रेणीवार कटऑफ भी जारी की है। अनारक्षित वर्ग की कटऑफ 48.75 अंक, अनुसूचित जाति की 38.75 अंक, अनुसूचित जनजाति की 34.50 अंक, अन्य पिछड़ा वर्ग की 42.75 अंक और ईडब्ल्यूएस की 38.50 अंक रही। आयोग के अनुसार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी के सात पदों में केवल चार अभ्यर्थी उपलब्ध हुए जबकि भूतपूर्व सैनिक श्रेणी के लिए कोई पात्र अभ्यर्थी नहीं मिला। इसी प्रकार दिव्यांगजन वर्ग की एलसी और एएवी उपश्रेणी में एक-एक पद रिक्त रह गया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिक्त पदों को शासनादेशों के अनुरूप अनारक्षित श्रेणी में समायोजित किया गया है। चयनित अभ्यर्थियों की विस्तृत सूची और श्रेणीवार विवरण आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है।

हर ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी एवं एक नामित डायट मेंटर मिलकर संभालेंगे शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार की जिम्मेदारी

बुनियादी शिक्षा को नई गति, योगी सरकार ने एआरपी व्यवस्था का किया पुनर्गठन – हर ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी एवं एक नामित डायट मेंटर मिलकर संभालेंगे शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार की जिम्मेदारी – सेवानिवृत्ति में केवल पांच वर्ष शेष होने पर भी पात्र, किसी भी विषय के शिक्षक कर सकेंगे आवेदन – माइक्रो टीचिंग प्रदर्शन हटाकर चयन प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया गया – पारदर्शी चयन, वार्षिक मूल्यांकन और क्षमता संवर्धन की नई व्यवस्था लागू – निपुण भारत मिशन और सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर रहेगा विशेष फोकस लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बुनियादी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार को नई गति देने के लिए अकादमिक नेतृत्व व्यवस्था को और मजबूत बना रही है। इसी क्रम में समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित ब्लॉक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) की अकादमिक व्यवस्था को नई संरचना देते हुए अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) प्रणाली का व्यापक पुनर्गठन किया गया है। अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन पार्थ सारथी सेन शर्मा के हस्ताक्षर से जारी शासनादेश में एआरपी के चयन, कार्यदायित्व, प्रशिक्षण, मूल्यांकन और जवाबदेही संबंधी विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। शासनादेश के अनुपालन में स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को जुलाई तक रिक्त एआरपी पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि नए शैक्षणिक सत्र में ब्लॉक स्तर का अकादमिक सहयोग तंत्र पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके। विद्यालयों तक पहुंचेगा मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी और एक नामित डायट मेंटर मिलकर शैक्षणिक सहायता टीम का गठन करेंगे। यह अकादमिक टीम विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने, शिक्षकों को सतत शैक्षणिक सहयोग प्रदान करने, कक्षा-कक्ष की चुनौतियों के समाधान तथा विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार की दिशा में कार्य करेगी। पारदर्शी और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया एआरपी का चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होगा। नई व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक योग्य और अनुभवी शिक्षकों को इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक दायित्व से जोड़ा जा सके। अब सेवानिवृत्ति में केवल पांच वर्ष शेष रहने वाले शिक्षक भी एआरपी पद के लिए पात्र होंगे, जबकि पहले यह सीमा 10 वर्ष थी। अब किसी भी विषय के परिषदीय शिक्षक आवेदन कर सकेंगे, जबकि पहले केवल चयनित विषयों के शिक्षकों को ही पात्रता प्राप्त थी। चयन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए माइक्रो टीचिंग का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। अब चयन केवल लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होगा। जिला स्तर पर गठित चयन समिति पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगी। निपुण भारत मिशन को मिलेगा जमीनी आधार निपुण भारत मिशन को बालवाटिका से कक्षा 5 तक विस्तारित करने की दिशा में यह व्यवस्था महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगी। एआरपी विद्यालयों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), गतिविधि आधारित शिक्षण, टीएलएम के प्रभावी उपयोग, प्रिंट-रिच वातावरण तथा बेहतर कक्षा प्रबंधन को बढ़ावा देंगे। साथ ही वे शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग में भी सहयोग करेंगे, जिससे ब्लॉक स्तर पर सतत शैक्षणिक सहयोग की मजबूत व्यवस्था विकसित होगी। प्रदर्शन आधारित जवाबदेही से बढ़ेगी गुणवत्ता नई व्यवस्था में एआरपी का कार्यकाल प्रदर्शन आधारित होगा। नियमित मूल्यांकन के आधार पर ही कार्यकाल का विस्तार किया जाएगा। इससे शैक्षणिक नेतृत्व में जवाबदेही, प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। शासनादेश में एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स के लिए नियमित प्रशिक्षण तथा क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों का भी प्रावधान किया गया है। शिक्षा सुधारों को मिलेगा नया बल प्रदेश में निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, बालवाटिका, विद्यालय कायाकल्प और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। नई एआरपी व्यवस्था इन सभी प्रयासों को विद्यालय स्तर तक सशक्त रूप से पहुंचाने का माध्यम बनेगी। ब्लॉक स्तर पर मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र विकसित होने से शिक्षकों को निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा, अधिगम परिणामों में सुधार आएगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

इन्वेस्ट यूपी-टीमलीज की बड़ी साझेदारी, GCC के लिए तैयार होगा स्किल्ड टैलेंट का विशाल पूल

जीसीसी के लिए प्रचुर टैलेंट उपलब्ध कराएगा इन्वेस्ट यूपी व टीमलीज का समझौता नए जीसीसी के लिए 90 दिन का मुफ्त वर्कफोर्स और एआई एडवाइजरी पैकेज मुहैया कराएगी टीमलीज   नोएडा-ग्रेटर नोएडा से आगे लखनऊ, कानपुर जैसे टियर-2/3 शहरों तक फैलेगा टैलेंट नेटवर्क लखनऊ/बेंगलुरु उत्तर प्रदेश में स्थापित किए जा रहे नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) को कुशल वर्कफोर्स उपलब्ध कराने के लिए 'इन्वेस्ट यूपी' ने टीमलीज ग्रुप के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। बेंगलुरु में गत दिवस “उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026” आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद तथा टीमलीज सर्विसेज की एमडी एवं ग्रुप सीईओ सुपर्णा मित्रा व टीमलीज डिजिटल की सीईओ नीति शर्मा ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी उत्तर प्रदेश को जीसीसी सेक्टर में निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी और भरपूर टैलेंट की उपलब्धता वाला हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब ग्लोबल कंपनियां पारंपरिक मेट्रो शहरों से आगे बढ़कर नए शहरों में जीसीसी स्थापित कर रही हैं। उभरते जीसीसी शहरों में नौकरियों की वृद्धि 40-45% है, जबकि मेट्रो हब में यह 19% ही है। ऐसे में इन्वेस्ट यूपी व टीमलीज का यह समझौता नए जीसीसी के लिए नियुक्तियों में लगने वाला समय कम करेगा और शुरुआती चरण की टैलेंट भर्ती को आसान बनाएगा। यूपी का जीसीसी विजन 2031   जीसीसी पॉलिसी-2024 के तहत यूपी ने वर्ष 2031 तक 500 ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अब नोएडा-ग्रेटर नोएडा से आगे बढ़कर लखनऊ, कानपुर जैसे टियर-2 व टियर-3 शहरों पर फोकस किया जा रहा है। इस साझेदारी के तहत टीमलीज ग्रुप नए जीसीसी के लिए 'स्टार्टर पैकेज' देगा। इसमें किसी भी जीसीसी को सेटअप के लिए 90 दिनों तक वर्कफोर्स और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) परामर्श निःशुल्क मिलेगा। गौरतलब है कि हर चरण की भर्तियों, इंडक्शन/ऑनबोर्डिंग, एआई/मशीन लर्निंग जैसी विशिष्ट जरूरतों वाली नियुक्तियों, एआई रणनीति व उसके क्रियान्वयन में टीमलीज को विशेषज्ञता हासिल है। इस असर पर इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरण आनंद ने कहा कि हम यूपी को भारत के अग्रणी जीसीसी डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की नींव रख रहे हैं। जब कंपनियां पारंपरिक स्थानों से आगे बढ़ रही हैं, तो यह जरूरी है कि टैलेंट के अवसर भी राज्य के उभरते केंद्रों तक पहुंचें। टीमलीज के साथ यह साझेदारी वर्कफोर्स की तैयारी मजबूत करेगी तथा उद्योग व कौशल विकास के संबंधों को नई गति देगी। नए उभरते क्षेत्रों में स्किल्ड मैनपावर से राज्य की विकास यात्रा तेजी से आगे बढ़ेगी। टीमलीज की एमडी एवं ग्रुप सीईओ सुपर्णा मित्रा ने कहा कि किसी नए जीसीसी का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कुशल मैनपावर कितनी जल्दी और कितनी बड़ी संख्या में उपलब्ध होता है। देशभर में 110 से अधिक जीसीसी पार्टनरशिप और यूपी में 1,470 से अधिक सक्रिय जीसीसी कर्मियों के साथ हम योजना स्तर पर ही कंपनियों को स्किल्ड वर्कफोर्स समेत तमाम तकनीकी आवश्यकताओं में मदद देने की स्थिति में हैं। इन्वेस्ट यूपी के साथ यह साझेदारी से यूपी में टैलेंट व स्किलिंग इकोसिस्टम और मजबूत होगा। टीमलीज ग्रुप 4,000 से अधिक नियोक्ताओं को हायरिंग, उत्पादकता और एंड-टू-एंड वर्कफोर्स समाधान उपलब्ध कराती है। कंपनी ने 25 साल में 24 लाख से अधिक पेशेवरों की प्लेसमेंट की है और दुबई व सिंगापुर तक अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने दी खुशखबरी- यूपी के 6.18 लाख नए परिवारों को मिलेगा पीएम आवास (ग्रामीण) योजना का लाभ

तामेश्वरनाथ धाम बनेगा भव्य कॉरिडोर: मुख्यमंत्री योगी  सीएम योगी ने किया संत कबीर नगर व गोरखपुर की 475 करोड़ रुपये से अधिक की 139 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास मुख्यमंत्री ने दी खुशखबरी- यूपी के 6.18 लाख नए परिवारों को मिलेगा पीएम आवास (ग्रामीण) योजना का लाभ बखिरा झील बनेगी इको-टूरिज्म केंद्र: सीएम योगी संत कबीर नगर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाबा तामेश्वरनाथ धाम, बाबा बैजूनाथ धाम सहित क्षेत्र के धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण केवल आस्था का सम्मान नहीं, बल्कि उन पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता है जिन्होंने इन धरोहरों की स्थापना की थी। सरकार बाबा तामेश्वरनाथ धाम को नई पहचान देने के लिए भव्य कॉरिडोर निर्माण की योजना पर कार्य कर रही है। कॉरिडोर बनने से क्षेत्र का विकास तीव्र गति से होगा और इसे काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम तथा मां विंध्यवासिनी धाम की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।  मुख्यमंत्री गुरुवार को कुआनो नदी तट स्थित बैजूनाथ धाम में संत कबीर नगर व गोरखपुर की 475 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 139 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण/स्वीकृति पत्र भी वितरित किए। इन परियोजनाओं में धनघटा विधानसभा क्षेत्र के लिए लगभग 225 करोड़ रुपये तथा खजनी विधानसभा क्षेत्र के लिए लगभग 251 करोड़ रुपये के विकास कार्य शामिल हैं।  6.18 लाख नए ग्रामीण परिवारों को आवास स्वीकृत मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में आने से पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान उत्तर प्रदेश के 6 लाख 18 हजार नए पात्र परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास स्वीकृत किए गए। डबल इंजन सरकार का यह निर्णय गरीबों को पक्की छत उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे ने बदली तस्वीर सीएम ने कहा कि कभी सबसे पिछड़े क्षेत्रों में गिने जाने वाले धनघटा और खजनी आज पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से राजधानी लखनऊ से सीधे जुड़ रहे हैं। पहले जहां इन क्षेत्रों को उपेक्षित माना जाता था, अब ये विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन चुके हैं। बेलघाट, खजनी और धनघटा के लोगों को अब लखनऊ पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए दो घंटे में राजधानी तक पहुंचना संभव है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय एवं ग्रामीण सड़कों का विस्तार, नए पुलों और संपर्क मार्गों का निर्माण क्षेत्र की तस्वीर बदल रहा है। धुरियापार क्षेत्र में ग्रेटर गीडा की स्थापना से नए उद्योग लग रहे हैं और धनघटा क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। मगहर में संत कबीर एकेडमी, ऑडिटोरियम और महापरिनिर्वाण स्थली के विकास के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार से हजारों युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। बखिरा झील बनेगी इको-टूरिज्म केंद्र मुख्यमंत्री ने मेहन्दावल विधानसभा क्षेत्र की बखिरा झील का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब रामसर साइट और इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े कार्य कर रही है। जहां उच्च शिक्षण संस्थान नहीं थे, वहां डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक व आईटीआई खोले जा रहे हैं। ऑपरेशन कायाकल्प, प्रोजेक्ट अलंकार, अटल आवासीय विद्यालय और मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय जैसी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। गरीबों, किसानों और युवाओं को अधिकार दिलाने का संकल्प मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार का लक्ष्य आने वाली पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाना है। डबल इंजन सरकार गरीब, किसान, नौजवान व महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। आज गरीबों को मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है। आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय मुख्यमंत्री ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटा, नागरिक अधिकारों को निलंबित किया और विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। कांग्रेस व समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो दल लोकतंत्र व संविधान की बात करते हैं, वही संविधान के सबसे बड़े अपमान के लिए जिम्मेदार रहे हैं। उत्तर प्रदेश बना देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश पहचान का मोहताज नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है। गांव, गरीब, किसान, नौजवान और महिलाओं को उनका अधिकार देने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने किया है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से विकास व सुशासन की इस यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर क्षेत्र व प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। 2024 के चुनाव में विपक्ष ने किया गुमराह विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस व समाजवादी पार्टी जनता की आंख में धूल झोंकने का काम करती हैं। जब देश लोकतंत्र की हत्या के 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहा था, तब ये दोनों दल देश की जनता के साथ झूठे वायदे कर रहे थे। इन लोगों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता जनार्दन को गुमराह किया था। ये लोग संविधान की प्रति लेकर घूम रहे थे। राहुल गांधी व अखिलेश यादव किस मुंह से जनता के बीच जाकर लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, किस मुंह से संविधान की प्रति लेकर घूमते हैं?  संविधान का जितना बड़ा अपमान कांग्रेस व सपा ने किया, किसी ने भी नहीं किया। डबल इंजन सरकार ने बाबा साहेब का सपना साकार करने, संविधान, विरासत व समाज के हर तबके को सम्मान देने का काम किया है। इन लाभार्थियों को सीएम योगी ने दिए स्वीकृति पत्र  राधिका (मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना) शबनम कुमारी (मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना) रीता उपाध्याय (स्वंय सहायता समूह, 5,71,50,000 रुपये का चेक) अभिज्ञान राय (मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास, 5 लाख का चेक)  राम शरण विश्वकर्मा (श्रम सम्मान योजना से लाभान्वित)  यशुवर्धन पांडेय (अनुदान पत्र)  इस अवसर पर मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, डुमरियागंज के सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक गणेश चंद्र चौहान, विधायक श्रीराम चौहान, विधायक अंकुर राज तिवारी, विधायक अनिल त्रिपाठी, विधान परिषद सदस्य संतोष सिंह, सुभाष यदुवंशी, … Read more

क्यों अहम है जनगणना? विकास, संसाधन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर दिखेगा व्यापक प्रभाव

लखीमपुर  खीरी में जनगणना-2027 के प्रथम चरण से मिले शुरुआती संकेत बताते हैं कि जिले की आबादी 46.59 लाख के करीब पहुंच गई है। पिछले 15 वर्षों में जनसंख्या और परिवारों की संख्या में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का सीधा असर विकास योजनाओं पर पड़ेगा। अकेले खीरी जिले में 6.37 लाख की आबादी बढ़ी है। बढ़ती आबादी के अनुरूप शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग भी बढ़ेगी। जनगणना के आंकड़े सरकार को यह तय करने में मदद करेंगे कि किन क्षेत्रों में नए विद्यालय, अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं स्थापित की जाएं। परिवारों की बढ़ती संख्या से आवास, रोजगार और शहरीकरण की चुनौतियां भी सामने आएंगी। वहीं, पक्के मकानों की बढ़ती संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार का संकेत दे सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार जनगणना केवल आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की विकास नीतियों, संसाधनों के वितरण और सरकारी योजनाओं की प्राथमिकताओं का आधार है। इससे जिले के समग्र विकास की नई रूपरेखा तैयार होगी। क्या कहते हैं विशेषज्ञ     लखीमपुर खीरी की बढ़ती आबादी और परिवारों की संख्या में हो रही वृद्धि जिले की विकास आवश्यकताओं को नए सिरे से परिभाषित करेगी। जनगणना के आंकड़ों से यह स्पष्ट होगा कि जिले के किन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की सबसे अधिक जरूरत है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच विकास के अंतर को समझने में भी ये आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके आधार पर जिले में नए विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, सड़कों और आवासीय योजनाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी। साथ ही सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की वास्तविक स्थिति सामने आने से उनके लिए लक्षित योजनाएं तैयार करना आसान होगा।     डॉ. सुभाष चन्द्रा, प्रोफेसर, वाईडीसी     लखीमपुर खीरी में जनसंख्या और परिवारों में हुई वृद्धि प्रशासन के लिए नई चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आएगी। जनगणना से प्राप्त आंकड़े यह तय करने में मदद करेंगे कि जिले में सरकारी संसाधनों का वितरण किस प्रकार किया जाए ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंच सके। बढ़ती आबादी के अनुरूप आधारभूत ढांचे का विस्तार भी जरूरी होगा। जनगणना के आंकड़े जिले की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का वास्तविक चित्र प्रस्तुत करेंगे, जिससे विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा सकेगा।     डॉ. एससी मिश्रा, प्रोफेसर (सेवानिवृत्त)     लखीमपुर खीरी की अनुमानित आबादी 46 लाख से अधिक पहुंचना जिले के विकास की नई दिशा तय करेगा। जनगणना केवल लोगों की संख्या बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जिले की भविष्य की जरूरतों का रोडमैप भी तैयार करती है। बढ़ती आबादी के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, आवास और रोजगार के क्षेत्र में मांग बढ़ेगी। जनगणना के आधार पर शासन और प्रशासन यह तय कर सकेंगे कि किन क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधनों और निवेश की आवश्यकता है। आने वाले वर्षों में जिले के संतुलित और समावेशी विकास के लिए ये आंकड़े सबसे महत्वपूर्ण आधार साबित होंगे।     राम मोहन गुप्ता, समाजसेवी  

पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए वरदान बनी दशमोत्तर छात्रवृत्ति

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रभावी कार्य कर रही है। खासतौर पर पिछड़े वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में योगी सरकार की छात्रवृत्ति योजनाएं बेहद कारगर साबित हुई हैं। सरकार की पिछड़ा वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति योजना लाखों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। लाभार्थियों की संख्या के मामले में प्रयागराज जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है।  प्रयागराज में सबसे ज्यादा 1.69 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मजबूत आधार दे रही है। योगी सरकार की इस पहल से लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिला है और छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मार्ग आसान हुआ है। गाजीपुर में 1.34 लाख से ज्यादा छात्रों को मिली छात्रवृत्ति वर्ष 2025-26 में पिछड़ा वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत करीब 27 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई है। प्रयागराज में 1,69489 छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। प्रयागराज के बाद गाजीपुर जिला दूसरे स्थान पर रहा है, जहां 1.34 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई है। वहीं आजमगढ़ में 1.19 लाख से ज्यादा छात्रों को लाभ मिला है। इसी तरह जौनपुर में 1.15 लाख से अधिक छात्रों को योजना का लाभ मिला है, जबकि वाराणसी में 88,859 छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में छात्रवृत्ति योजना व्यापक स्तर पर प्रभाव छोड़ रही है। छात्र-छात्राओं के साथ ट्रांसजेंडरों को भी मिली सहायता छात्रवृत्ति वितरण के आंकड़ों पर नजर डालें तो कक्षा 11-12 में 4,72,764 छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। जबकि 3,80,667 छात्रों और 2 ट्रांसजेंडरों को भी छात्रवृत्ति दी गई है। वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 10,01,084 छात्राओं, 9,31,906 छात्रों और 8 ट्रांसजेंडरों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया गया है। दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना केवल इंटरमीडिएट स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल कोर्स तक को कवर करती है। कक्षा 11 और 12 के छात्रों के साथ-साथ बीटेक, एमबीबीएस, एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स तथा बीए, बीएससी, बीकॉम, आईटीआई और पॉलिटेक्निक जैसे पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को भी इसका लाभ दिया जा रहा है। छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना है। जिन छात्रों के अभिभावकों की वार्षिक आय 2 लाख रुपये या उससे कम है, उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में योगी सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सरल बनाया है। छात्र छात्रवृत्ति प्रबंधन प्रणाली की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करते हैं, जिससे प्रक्रिया तेज और आसान हुई है। स्वीकृति के बाद छात्रवृत्ति की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। छात्रवृत्ति योजना का लाभ बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच रहा पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी छात्र आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और अन्य पात्र वर्गों तक पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आर्थिक संबल प्रदान करना है।

लोकतंत्र सेनानियों का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने की बनेगी व्यवस्था

लखनऊ आपातकाल की 51वीं बरसी 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र को बचाने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इसके साथ ही सीएम ने घोषणा की कि प्रदेश सरकार लोकतंत्र सेनानियों के लिए जल्द ही 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी। सीएम ने लोकतंत्र सेनानियों के स्वस्थ व दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था बनाई जा रही है। सीएम योगी ने कहा कि आज लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करते हुए गौरव की अनुभूति हुई। उनकी अपनी पीड़ा है। उन्होंने लोकतंत्र को बचाने के लिए जेल की यातनाएं सहीं। इसलिए प्रदेश में जब लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित सरकार आई तो लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान के लिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। प्रदेश में 3,780 लोकतंत्र सेनानी तथा 1,461 उनके आश्रित हैं। सरकार वर्ष 2018 से लोकतंत्र सेनानियों व मरणोपरांत उनके आश्रितों को प्रत्येक माह 20 हजार रूपये की सम्मान राशि दे रही है। साथ ही लोकतंत्र सेनानी या उनके उत्तराधिकारी (पति अथवा पत्नी) को एक सहायक के साथ पूरे प्रदेश में परिवहन निगम की सभी श्रेणी की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। लोकतंत्र सेनानियों को राजकीय चिकित्सालयों में निशुल्क चिकित्सा भी उपलब्ध कराई जा रही है।  पांच लाख की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा जल्द सीएम योगी ने कहा कि अब सरकार लोकतंत्र सेनानियों को कैशलेस 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष स्वास्थ्य सुविधा भी उलब्ध कराने जा रही है। इसके साथ ही लोकतंत्र सेनानी के दिवंगत होने पर उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था सरकार द्वारा बनाई जा रही है। आने वाली पीढ़ी हमेशा इस बात को ध्यान में रखेगी कि जो भी देश व लोकतंत्र के हित में काम करेगा, सरकारें उन्हें सम्मानित करेंगी।  सीएम योगी ने किया लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इसमें 6 महीने तक जेल में यातनाएं झेलने वाले लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित, गया प्रसाद सोनकर, राम सिंह कुशवाहा (हरदोई), विद्या राम वर्मा (हरदोई), अजय सिंह (बाराबंकी) व ओम प्रकाश गुप्ता (सीतापुर) शामिल रहे।  लोकतंत्र सेनानियों ने सुनाई आपबीती इस दौरान लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित ने बताया कि आपातकाल लगाने का कोई कारण नहीं था। कांग्रेस बस किसी भी तरह सत्ता में रहना चाहती थी। आपातकाल के दौरान हमारी गिरफ्तारी के समय कपड़े फाड़ दिए गए। हम लोगों ने इसके बाद भी सत्याग्रह में भाग लिया, तब बहुत ज्यादा अत्याचार किए गए। लोकतंत्र सेनानी विद्या राम वर्मा ने बताया कि इतने साल बीत जाने के बाद भी आपातकाल के बारे में सोचता हूं तो मन भावुक हो जाता है। सीपीआई को छोड़कर बाकी सभी दलों के साथ अत्याचार किया गया। मेरा घर रात में घेरा गया, जैसे किसी डकैत को पकड़ने आए हों। जेल में कैदियों के नाखून उखाड़े गए और जबरन नसबंदी की गई। उस समय की सरकार ने कैसे अत्याचार किए गए, आज कोई अहसास भी नहीं कर सकता।

आपातकाल की 51वीं बरसी ‘संविधान हत्या दिवस’ पर लखनऊ में आयोजित ‘लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में बने रहने के लिए आपातकाल लगाने का पाप किया था। आज पूरा देश 25 जून 1975 का काला दिन याद कर रहा है, जब कांग्रेस ने देश के लोकतंत्र का गला घोटने का काम किया था। सत्ता में बने रहने और न्यायालय के आदेश लागू न होने देने के लिए इंदिरा गांधी ने नागरिकों के अधिकार छीनने का प्रयास किया। कांग्रेस का यह पाप लोकतंत्र और बाबा साहेब के सपनों पर सीधा प्रहार था। लालू प्रसाद व मुलायम सिंह यादव की वर्तमान पीढ़ी कांग्रेस का चाबुक भूलकर उसी के साये में राजनीति कर रही है। मुख्यमंत्री गुरुवार को आपातकाल की 51वीं बरसी 'संविधान हत्या दिवस' पर लखनऊ में आयोजित 'लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान भी किया। लोकतंत्र समर्थकों की आवाज को दबाया सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र के समर्थक राजनीतिक दलों, जनसामान्य व मीडिया से जुड़े सभी लोगों की आवाज को दबाया। ऐसा क्या था कि कांग्रेस को आपातकाल थोपना पड़ा, एक ही निष्कर्ष निकलता है कि कांग्रेस ने सिर्फ अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए यह पाप किया और इस पाप को छिपाए रखने के लिए नौजवानों, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं व सामाजिक संगठनों की आवाज को दबाने की चेष्टा की। कांग्रेस के युवराज देशवासियों की आंख में झोंक रहे धूल मुख्यमंत्री ने कहा, आपातकाल के दौरान न्यायपालिका के अधिकार सीमित कर दिए गए। मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया गया। यही नहीं, रात के अंधेरे में भारत के संविधान की प्रस्तावना भी बदल दी गई। यह काम उसी कांग्रेस ने किया, जिसके युवराज संविधान की प्रति लेकर देशवासियों की आंख में धूल झोंक रहे हैं। इनका दोहरा चरित्र वर्तमान पीढ़ी को पता होना चाहिए। इसीलिए 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ आयोजित कर पूरे देश व नौजवान पीढ़ी को इससे अवगत कराने का प्रयास हो रहा है। मुलायम करते थे कांग्रेस से गठबंधन का विरोध सीएम ने कहा कि इंदिरा गांधी के अत्याचार से आमजन व राजनीतिक दलों के नेता कराह रहे थे। लोकतंत्र के समर्थन में जेल जा रहे थे। ऐसे ही नेताओं लालू प्रसाद व स्वर्गीय मुलयाम सिंह यादव की वर्तमान पीढ़ी आज उसी कांग्रेस के साये में अपनी राजनीति करती दिखाई दे रही है। कांग्रेस जब भी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन का प्रयास करती थी, मुलायम उसका विरोध करते थे। वह कहते थे कि कुछ भी हो, कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होना चाहिए। लेकिन उनके उत्तराधिकारी कांग्रेस के डूबते जहाज पर सवार होकर मुलायम सिंह की विरासत भी डुबोने पर उतारू हैं। ये लोग आज भी एक साथ होकर लोकतंत्र को कमजोर करने और परिवारवाद की राजनीति को प्रोत्साहित करने के लिए संवैधानिक मान्यताओं के विपरीत आचरण करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। भारत लोकतंत्र की जननी भी मुख्यमंत्री ने कहा कि जी-20 की बैठक में पीएम मोदी जी ने बताया था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा ही नहीं, सबसे प्राचीन लोकतंत्र भी है। भारत लोकतंत्र की जननी भी है। जब दुनिया लोकतंत्र के बारे में नहीं जानती थी, तब भारत के तमाम गांवों व क्षेत्रों में लोकतंत्र स्थापित था। यह भारत के डीएनए में है। समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति के लिए शासन की योजनाओं का बनना ही लोकतंत्र का आधार है। पीएम मोदी ने कोविड महामारी के दौरान आमजन के लिए वैक्सीन, टेस्ट, उपचार व राशन की फ्री सेवाएं सुनिश्चित कराईं। उन्होंने अहसास कराया कि हमारी जवाबदेही अंतत: जनता के प्रति है। सबका साथ-सबका विकास का भाव भी लोकतंत्र की पुष्टि करता है। मोदी जी की सभी योजनाएं आमजन को समर्पित हैं। जाति, मत, महजब, क्षेत्र व भाषा देखे बगैर पात्रता की श्रेणी में आने वाले हर व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना हमारा लक्ष्य है।   लोकतंत्र के प्रति हमारी जवावदेही सीएम ने कहा कि 4 करोड़ गरीबों को आवास, 12 करोड़ गरीबों के घर में शौचालय, 10 करोड़ गरीबों के घर में रसोई गैस, 80 करोड़ लोगों को फ्री राशन, 50 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत की सुविधा, 25 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से उभरना, ये सभी कार्य भारत के पुष्ट लोकतंत्र को प्रदर्शित करते हैं। एक तरफ मोदी जी के नेतृत्व में लोकतंत्र पुष्ट हो रहा है तो दूसरी तरफ स्वार्थ के लिए लोकतंत्र का गला घोंटने वाली कांग्रेस, जिसके द्वारा आज भी उसी प्रकार के प्रयास किए जाते हैं। हम सबको इसके प्रति सजग रहना चाहिए। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, भारत दीक्षित, गया प्रसाद सोनकर, राम सिंह कुशवाहा, विद्याराम वर्मा, अजय सिंह व ओमप्रकाश गुप्ता समेत बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी, विधायकगण, संयोजक बृज बहादुर, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष कमलेश मिश्र, महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, जिलाध्यक्ष विजय मौर्य व प्रबुद्धजन आदि उपस्थित रहे।