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गायक, शायर और आरजे के लिए बड़ा मौका: Voice of U.P. टैलेंट हंट की हुई लॉन्च

लखनऊ फीवर एफएम नेटवर्क और हिन्दुस्तान ने उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े वॉयस टैलेंट हंट 'Voice of U.P.' की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यूपी के गायक, शायर और आरजे जैसे कलाकार लाइव हिन्दुस्तान के ऐप पर इस टैलेंट हंट में हिस्सा ले सकते हैं। 'Fever in U.P.: Ab Machega Bhaukaal' के बैनर तले इस टैलेंट हंट का लॉन्च इवेंट लखनऊ में रखा गया था, जिसमें U.P. के कलाकारों, क्रिएटर्स और इंडस्ट्री के दिग्गजों का जमावड़ा दिखा। इस मौके पर पद्मश्री मालिनी अवस्थी, यूपी के सीएम के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, Bigg Boss के अनाउंसर विजय विक्रम सिंह, एक्टर शारिब हाश्मी, कथाकार लक्ष माहेश्वरी और डिजिटल क्रिएटर्स मारूफ कलमेन, छोटी फिलिम, अपेक्षा गुरनानी, और द फीमेल बैंड मौजूद रहे। आज की युवा पीढ़ी के बारे में बात करते हुए मालिनी अवस्थी ने कहा कि यह पीढ़ी आत्मविश्वासी है, मंच पर खड़े होने से घबराती नहीं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ सामने आना काफी नहीं है, अब क्रिएटर्स को अपने कंटेंट में गंभीरता चाहिए। मालिनी ने कहा 'मैं हर कलाकार में वही देखती हूं, जो मैं थी। बदायूँ, फर्रुखाबाद, कन्नौज- ये वो इलाके हैं, जहां दुनिया के सबसे कमाल के कलाकार पैदा हुए, लेकिन वहां कोई नहीं पहुँचता। प्रतिभा की कमी नहीं है- बस पहुंचाने वाला कोई नहीं था। जिस तरह रेडियो ने कभी कलाकारों को आवाज़ दी- 'Voice of UP' वही काम करेगा।' सीएम योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा, 'पहले लोग बताते नहीं थे कि वो UP के हैं, आज वही लोग गर्व से कहते हैं कि हम U.P. के हैं। अयोध्या और वाराणसी आज दुनिया के सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले शहरों में हैं। यह U.P. का नया दौर है, और इस दौर में गांव-देहात के कलाकारों को एक असली मंच मिलना चाहिए। 'Voice of U.P.' वही मंच है।' विजय विक्रम सिंह ने कहा कि UP की आवाज़ों में वो दम है जो पूरे देश को सुनाई देना चाहिए। शारिब हाश्मी और लक्ष माहेश्वरी ने भी नए क्रिएटर्स को कंटेंट और निरंतरता पर ध्यान देने की सलाह दी। हिंदुस्तान के चीफ ऑपरेटिंग अफसर रजत कुमार ने कहा, ‘101 साल पुराना Hindustan Times, 90 साल का Hindustan और 20 साल का Fever FM- यह तीनों मिलकर UP में जो Voice Of U.P. लाने जा रहे हैं, वो काबिले तारीफ होगा।’ HT मीडिया ग्रुप के रेडियो बिज़नेस के सीईओ रमेश मेनन ने कहा, 'Fever Network आज UP का सबसे बड़ा रेडियो नेटवर्क है- और 'Voice of U.P.' उसी का अगला कदम है। हमारा मानना है कि U.P. में वही जीतेगा, जो यहां के लोगों तक सिर्फ पहुंचे नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बने। 'Voice of U.P.' के जरिये हम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनना चाहते हैं, क्यूंकि जो आवाज़ यहां से उठेगी, वो पूरे देश को सुनाई देगी।' इस मौके पर मालिनी अवस्थी, विजय विक्रम सिंह, मारूफ कलमेन, छोटी फिलिम, अपेक्षा गुरनानी, और मेरी जिंदगी- द फीमेल बैंड को पहले Voice of U.P. के अवार्ड से नवाज़ा गया। साथ ही उत्तर प्रदेश के जाने-माने उद्योगपति और मीडिया एजेंसियों के प्रतिनिधि भी बड़ी तादाद में मौजूद रहे। राज्य के बड़े कारोबारी और एजेंसियों को उनके काम और योगदान के लिए भी 'Voice of U.P.' के खिताब से नवाज़ा गया। Voice of U.P. क्या है? Voice of U.P. उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा वॉयस टैलेंट हंट है, जो Fever FM और Hindustan मिलकर लाए हैं। इस मुहिम का मकसद सीधा है- उत्तर प्रदेश के हर उस इंसान को एक मंच देना, जिसकी आवाज़ में दम है, लेकिन मौका नहीं मिला। चाहे आप गाते हों, या शायरी लिखते हों, कॉमेडी करते हों या RJ बनने का सपना देखते हों- Voice of UP में सबकी जगह है। वॉयस ऑफ यूपी में कैसे हिस्सा लें? वॉयस ऑफ यूपी में भाग लेना बेहद आसान है। इसके लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें, वीडियो के साथ एंट्री सबमिट करें और अपनी आवाज को वो मंच दें, जिसका वो हकदार है। Voice of UP के लिए रजिस्ट्रेशन 1 मई, 2026 को खुलेगा कैसे Voice of UP में शामिल हो सकते हैं     सबसे पहले हिंदुस्तान ऐप को गूगल प्लेस्टोर या ऐप स्टोर से डाउनलोड करें     Voice of UP को सेलेक्ट करें     रजिस्टर करें 1 मई के बाद     अपना वीडियो अपलोड करें     ऐप कैसे डाउनलोड करें

960 मीटर लंबा फ्लाईओवर जाम से छुटकारा दिलाएगा, अयोध्या रोड-सीतापुर रोड की राह आसान

 लखनऊ  इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर अब जाम नहीं लगेगा, क्योंकि यहां फ्लाईओवर मई माह से बनने जा रहा है। कार्यदायी संस्था ने अपनी मशीनें जहां शहर के बाहर स्थित यार्ड में पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है। वहीं कर्मचारियों ने इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे के आसपास नाप जोख भी शुरू कर दी है। लोक निर्माण विभाग की एनएच शाखा इस फ्लाईओवर का निर्माण करवाने जा रही है। इसे डेढ़ साल से पौने दो साल में बनाकर तैयार कर लिया जाएगा। यह 960 मीटर लंबा होगा और इसके निर्माण पर करीब 108 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस फ्लाईओवर को बनवाने के लिए क्षेत्रीय विधायक डॉ. नीरज बोरा पिछले कई सालों से प्रयासरत थे। रक्षामंत्री व सांसद राजनाथ सिंह द्वारा खुर्रमनगर फ्लाईओवर के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के सामने ही रक्षामंत्री ने इंजीनियरिंग कालेज चौराहे का प्रस्ताव रखा था, विधायक ने भी नितिन गडकरी को पत्र लिखकर मांग की थी। अब यह बनने जा रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर बनने वाले फ्लाईओवर के मार्ग में यहां बना फुटओवर ब्रिज बाधा बना हुआ था, अब इसे भी लोक निर्माण विभाग स्थायी रूप से हटा देगा। फ्लाईओवर बनने से अयोध्या रोड से सीतापुर रोड के बीच वाहनों की रफ्तार और बेहतर होगी। लोक निर्माण विभाग की एनएच शाखा ने सभी प्रकार की औपचारिकताएं अपने स्तर से पूरी कर ली हैं। बिजली विभाग, जलकल की लाइनों को शिफ्ट करने के लिए संबंधित विभागों को भी निर्देशित कर दिया गया है। उद्देश्य है कि निर्माण के दौरान कोई टूट फूट न हो, जिससे आम नागरिकों को परेशानी उठनी पड़े। स्थानीय लोगों के मुताबिक चार लेन का फ्लाईओवर आईआईएम रोड फ्लाईओवर से मडियांव फ्लाइओवर, इंजीनियरिंग कालेज फ्लाइओवर, टेढ़ी पुलिया फ्लाईओवर, खुर्रमनगर फ्लाइओवर, मुंशी पुलिया फ्लाइओवर और पालीटेक्निक फ्लाइओवर होते हुए अयोध्या रोड पर सीधे पहुंच सकेंगे। अधिकारियों के मुताबिक इस सुविधा से हाईकोर्ट से लेकर सीतापुर रोड तक लगने वाला ट्रैफिक जहां काफी हद तक कम हो जाएगा, वहीं वाहनों को रफ्तार मिलेगी। इन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा मिलेगा लाभ इंजीनियरिंग कालेज चौराहे पर फ्लाइओवर बनने से विकास नगर, खुर्रमनगर, गुडंबा, जानकीपुरम व जानकीपुरम विस्तार के आसपास बसी पांच लाख आबादी को राहत मिलेगी और सर्विस लेन पर जो जाम लगता था, उस पर नियंत्रण काफी हद तक होगा।     मई 2026 से इंजीनियरिंग कालेज चौराहे पर बनने वाले फ्लाइओवर का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।- राज कुमार पिथौरिया, अधिशसाी अभियंता, एनएच (शाखा) पीडब्ल्यूडी  

तेज हवाओं ने बढ़ाई मुसीबत, कई जगह ट्रैक पर पेड़ गिरने से ट्रेनें प्रभावित

 लखनऊ  बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण बुधवार को बादलों की आवाजाही के बीच आंधी-पानी ने यातायात और ट्रेन के संचालन को काफी प्रभावित किया। आंधी और तेज हवा के कारण कई जगह रेलवे ट्रैक पर पेड़ गिरने से ट्रेनों को स्टेशनों पर रोक दिया गया। उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के कई सेक्शन पर बुधवार को दोपहर में आयी आंधी और पानी के कारण पेड़ ओएचई पर गिर गए। हावड़ा से लखनऊ आ रही दून एक्सप्रेस को अयोध्या धाम से अयोध्या कैंट स्टेशन के बीच एक घंटा रोका गया। इसी तरह लखनऊ आ रही गोरखधाम एक्सप्रेस को मगहर में रोका गया। भारी बारिश और आंधी के कारण कई जगह रेलवे लाइन पर भी पेड़ गिरे हैं, जिससे ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ा है। अमेठी में रेलवे लाइन पर पेड़ की डाल गिरने के कारण बेगमपुरा एक्सप्रेस ट्रेन घंटों खड़ी रही। आंधी के कारण पेड़ विद्युत पोल पर गिरे और लाइन ठीक होने के बाद ट्रेन रवाना हुई। अमेठी के फुन्दनपुर में आंधी-बारिश के चलते पेड़ की डालियां वाहनों पर गिर गईं, जिससे कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। अंबेडकनगर में करीब साढ़े तीन बजे धूल भरी आंधी आई। इसके बाद बारिश शुरू हो गई। इससे तेज धूप व गर्मी से राहत मिली। हालांकि, आंधी से शहर और दो सौ गांवों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। कुछ स्थानों पर पेड़ व खंभे भी गिर गए हैं। अब तक कहीं से जनहानि की सूचना नहीं है। लगातार प्रचंड गर्मी पड़ने के बाद सुलतानपुर में बुधवार को अपराह्न बाद आई आंधी-पानी ने तबाही मचाई। बल्दीराय क्षेत्र में पेड़ व छप्पर गिरने से एक बालिका समेत दो की मौत हो गई। वहीं पांच व्यक्ति घायल हो गए हैं। तेज आंधी के चलते कई जगह पेड़ धराशायी हो गए। इससे वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए। आंधी-पानी के बाद गिरे पेड़ों के चलते बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई। हरदोई में बुधवार को अचानक मौसम ने करवट बदल ली। सुबह होते ही आसमान में काले घने बादल छा गए और कुछ ही देर में धूल भरी तेज आंधी चलने लगी। देखते ही देखते हरियावां समेत अन्य क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गई और ओलावृष्टि हुई।  जिससे अधिकतम तापमान में करीब पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से गिरकर 35.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। इसके चलते लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। वहीं बिजली की आवाजाही बनी रही, जिससे लोगों को परेशानी हुई।  

नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक और महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा का हंगामेदार सत्र

लखनऊ महिला आरक्षण मुद्दे पर उत्तर विधानसभा का 30 अप्रैल से शुरू होने सत्र खास होगा। सरकार ने सार्थक चर्चा की तैयारी की है। इसमें महिलाओं को ही अधिक बोलने का मौका दिया जाएगा। वहीं समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्ष ने जहां सदन और उसके बाहर सरकार को घेरने की योजना तैयार की है। सपा के तीखे तेवर से विधानसभा सत्र हंगामेदार होने का आसार हैं। गुरुवार को होने वाला विधानसभा सत्रपरिसीमन के साथ नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं होने के मामले पर महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर दोनों ही सदनों में अनवरत चर्चा होगी। 18वीं विधान सभा में कुल 51 महिला सदस्य हैं, इनमें सर्वाधिक 30 सदस्य भाजपा की हैं। सपा की 15, अपना दल की चार, कांग्रेस व रालोद की एक-एक महिला सदस्य हैं। वहीं, 100 सीटों वाली विधान परिषद में मात्र चार महिला सदस्य हैं। इनमें तीन भाजपा व एक निर्दलीय हैं। बुधवार 29 अप्रैल को विधानसभा व विधान परिषद की कार्यमंत्रणा समिति की अलग-अलग बैठक में विशेष सत्र का कार्यक्रम तय होगा, लेकिन यह माना जा रहा है कि महिला सदस्यों को ही ज्यादा बोलने का अधिक मौका दिया जाएगा। सबसे पहले संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना सदन में महिला सशक्तीकरण पर चर्चा का प्रस्ताव रखेंगे। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष व दलीय नेता भी इस पर अपने विचार रखेंगे। अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस विषय पर अपनी बात रखेंगे और महिलाओं के लिए डबल इंजन की सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों को गिनाएंगे। भाजपा महिला आरक्षण पर विपक्ष खासकर कांग्रेस व सपा को घेरेगी। विधान परिषद कार्य परामर्शदात्री समिति की बैठक गुरुवार 30 अप्रैल को होने जा रहे विधान परिषद के एकदिवसीय विशेष सत्र को लेकर सदन की कार्य परामर्शदात्री समिति की बुधवार को बैठक बुलाई गई है। विधान परिषद के विशेष सचिव संजय मेहरोत्रा ने इस संबंध में समिति के सदस्यों के नाम पत्र भेजा है। श्री मेहरोत्रा के अनुसार समिति की बैठक की अध्यक्षता सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह करेंगे जबकि बैठक में नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य व नेता विरोधी दल लाल बिहारी यादव सहित नेता अपना दल (सोनेलाल) आशीष पटेल, नेता निषाद पार्टी, नेता जनत्तता दल लोकतांत्रिक, अक्षय प्रताप सिंह, नेता राष्ट्रीय लोकदल योगेश चौधरी, नेता सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, बिच्छे लाल राम, नेता शिक्षक दल (गैर राजनीतिक) ध्रुव कुमार त्रिपाठी तथा नेता निर्दल समूह राज बहादुर चन्देल मौजूद रहेंगे। बैठक में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, सदन में उप नेता समाजवादी पार्टी, मो. जासमीन अंसारी, मुख्य सचेतक भारतीय जनता पार्टी अश्विनी त्यागी, समेत विधान परिषद सदस्य राजेन्द्र चौधरी, डा. महेन्द्र कुमार सिंह, सलिल विश्नोई और डा. जयपाल सिंह व्यस्त को भी आमंत्रित किया गया है।

गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण पर पीएम मोदी ने की सीएम योगी के नेतृत्व में हो रहे विकास की सराहना

गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण पर पीएम मोदी ने की सीएम योगी के नेतृत्व में हो रहे विकास की सराहना पीएम ने गंगा एक्सप्रेसवे को बताया विकास की नई लाइफलाइन, किसानों, उद्योग व युवाओं के लिए खुलेंगे अवसरों के द्वार हरदोई  गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में केवल एक्सप्रेसवे ही नहीं बन रहे, बल्कि इनसे भी तेज गति से प्रदेश का समग्र विकास हो रहा है। उन्होंने इसे “नए उत्तर प्रदेश” की पहचान बताते हुए कहा कि यह एक्सप्रेसवे प्रदेश की अर्थव्यवस्था, कनेक्टिविटी और रोजगार के लिए नई लाइफलाइन साबित होगा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक परिवर्तन का आधार है, जहां प्रदेश का विकास एक्सप्रेसवे की रफ्तार से भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। हरिद्वार तक विस्तार की योजना पर काम शुरू प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे का यह वरदान मां गंगा के आशीर्वाद से मिला है। अब लोग कुछ ही घंटों में संगम पहुंच सकते हैं और काशी में बाबा के दर्शन कर सकते हैं। उन्होंने खुशी जताई कि एक्सप्रेसवे का नाम मां गंगा के नाम पर रखा गया है, जो प्रदेश की विरासत और विकास दोनों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले किसानों की फसलें समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाती थीं, लेकिन अब एक्सप्रेसवे के माध्यम से कम समय में उत्पाद बाजारों तक पहुंचेंगे, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी। मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स, हरदोई का हैंडलूम, उन्नाव का लेदर और प्रतापगढ़ का आंवला जैसे उत्पादों को नई बाजार पहुंच मिलेगी। यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों में उद्योगों को आकर्षित करेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। गंगा एक्सप्रेसवे केवल पांच वर्षों में बनकर तैयार हुआ है और इसके विस्तार की योजना पर भी काम शुरू हो गया है, जिससे यह मेरठ से आगे हरिद्वार तक पहुंचेगा। साथ ही इसे अन्य एक्सप्रेसवे से जोड़कर एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर से बदल रही यूपी की तस्वीर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है। राज्य में 21 एयरपोर्ट विकसित हो रहे हैं, जिनमें 5 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। ब्रह्मोस मिसाइल जैसे बड़े प्रोजेक्ट यूपी की औद्योगिक शक्ति को नई पहचान दे रहे हैं। एक समय उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू’ राज्य कहा जाता था, लेकिन आज वही राज्य 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसरों के साथ प्रदेश की छवि पूरी तरह बदल रही है और अब यूपी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। पिछली सरकारों ने अपराध-जंगलराज को यूपी की पहचान बना दिया था प्रधानमंत्री ने कहा कि क्या पुरानी सरकारों में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की कल्पना भी की जा सकती थी? पहले पलायन होता था, आज यहां इन्वेस्टर समिट हो रहे हैं। भारत में जितने मोबाइल फोन बनाए जा रहे हैं, उनमें से आधे से अधिक केवल उत्तर प्रदेश में ही बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश ने पुरानी सियासत को बदल दिया है। हमारा उत्तर प्रदेश भगवान राम और कृष्ण की पावन धरती है। पिछली सरकारों ने अपराध और जंगलराज को यूपी की पहचान बना दिया था। जिनके हाथ से सत्ता गई है, वे आज फिर यूपी और समाज को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वे महिला विरोधी हैं, नारी शक्ति वंदन अधिनियम का भी उन्होंने विरोध किया। लेकिन इन विपक्षी दलों को यूपी की सीटें बढ़ने से आपत्ति है। वे आपके वोट से संसद पहुंचते हैं और फिर यूपी को गाली देने वालों के साथ खड़े हो जाते हैं।

तीर्थ, विरासत और इको-टूरिज्म स्थलों तक पहुंच होगी तेज और आसान

लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण होने के साथ उत्तर प्रदेश में विकास, आस्था और पर्यटन को नई रफ्तार मिल गई है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे केवल यातायात का आधुनिक मार्ग नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों को जोड़ने वाला मजबूत आध्यात्मिक कॉरिडोर बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साकार हुआ 594 किलोमीटर लंबा विश्वस्तरीय कॉरिडोर मेरठ से प्रयागराज तक पश्चिम, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को तेज रफ्तार संपर्क से जोड़ रहा है। करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने छह लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे से यात्रा समय में भारी कमी आएगी और मेरठ से प्रयागराज का सफर अब करीब 6 घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यावरण पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, साथ ही व्यापार, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी। मेरठ के हस्तिनापुर को मिला अधिक फायदा  गंगा एक्सप्रेसवे से सबसे अधिक लाभ पाने वाले क्षेत्रों में मेरठ जिले का हस्तिनापुर है। महाभारत काल से जुड़ा हस्तिनापुर जैन धर्म का भी प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां योगी सरकार 15 करोड़ रुपये से अधिक की एकीकृत पर्यटन विकास परियोजना चला रही है। बेहतर सड़क संपर्क से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। पाण्डेश्वर महादेव मंदिर, करण मंदिर, उल्टा खेड़ा उत्खनन स्थल और हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे स्थल अब नई पहचान पाएंगे। संभल क्षेत्र को भी इस परियोजना से नई ऊर्जा मिलेगी। यहां विकसित हो रहे कुरुक्षेत्र तीर्थ स्थल तक पहुंच आसान होने से धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा।  यह मार्ग धार्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन को एक साथ जोड़ता है   हापुड़ के ब्रजघाट गढ़मुक्तेश्वर, बुलंदशहर के अवंतिका देवी मंदिर, अमरोहा के वासुदेव मंदिर, बदायूं के श्रीरामचंद्र विराजमान मंदिर और शाहजहांपुर के परशुराम मंदिर जैसे स्थलों को भी इस कॉरिडोर से बड़ा लाभ मिलेगा। बागपत के लाक्षागृह जैसे ऐतिहासिक स्थलों के पर्यटन महत्व में भी वृद्धि होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरदोई के वनेश्वर महादेव मंदिर, उन्नाव के नवाबगंज इको-टूरिज्म क्षेत्र, रायबरेली के चामुंडा शक्तिपीठ, प्रतापगढ़ के मां ज्वाला देवी धाम और प्रयागराज तक यह मार्ग धार्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन को एक साथ जोड़ता है। प्रयागराज ब्लैकबक रिजर्व जैसे स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यावरण पर्यटन को भी गति मिलेगी। इको-टूरिज्म स्थलों को प्रदान करेगा नई ऊर्जा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि गंगा एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन आसान होगा। यह एक्सप्रेस-वे जैन सर्किट, महाभारत सर्किट और 'कल्कि धाम' संभल के अतिरिक्त मार्ग के आसपास के इको-टूरिज्म स्थलों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, गंगा एक्सप्रेस-वे अब केवल एक सड़क नहीं, यह एक सपने की मूर्त अभिव्यक्ति है। गंगा एक्सप्रेस वे से मेरठ और प्रयागराज की दूरी 10-12 घंटे से घटकर महज 5 घंटे रह जाने की उम्मीद है। मेरठ से एक्सप्रेस-वे की शुरुआत होगी जो हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज में समाप्त होगी।

राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान में कराया गया विशेष भ्रमण

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुख-सुविधा और मानसिक प्रसन्नता के लिए लगातार नई पहल कर रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के तहत बुजुर्गों को प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, जिससे उनके जीवन में उत्साह और सकारात्मकता बनी रहे। इस तरह से 2022 से 2026 के वित्तीय वर्ष तक योगी सरकार यूपी के वृद्धाश्रमों में रहने वाले 2493 वरिष्ठ नागरिकों को भ्रमण करवा चुकी है।  राष्ट्रपति भवन का कराया गया भ्रमण  हाल ही में उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र के विभिन्न जनपदों से आए 211 वृद्धजनों को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के प्रसिद्ध अमृत उद्यान का भ्रमण कराया गया। इस दौरान बुजुर्गों ने उद्यान की सुंदरता, हरियाली और मनोहारी वातावरण का आनंद लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सुखद, ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान करना था। विभाग की ओर से आवागमन, जलपान, सुरक्षा और अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। बुजुर्गों ने संगम में लगाई डुबकी वहीं धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रयागराज में आयोजित प्रयागराज महाकुंभ 2025 में 1,515 वरिष्ठ नागरिकों को स्नान का अवसर उपलब्ध कराया। वहीं माघ मेला 2026 में 767 बुजुर्गों ने संगम में डुबकी लगाकर अपनी लंबे समय से संजोई इच्छा पूरी की। इन आयोजनों में भाग लेकर बुजुर्गों ने आध्यात्मिक संतोष और आत्मिक शांति का अनुभव किया। धार्मिक स्थलों के कराएं जाते हैं दर्शन योगी सरकार की यह पहल केवल बाहरी भ्रमण तक सीमित नहीं है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को समय-समय पर स्थानीय मंदिरों, धार्मिक स्थलों और दर्शनीय स्थानों के दर्शन भी कराए जाते हैं। इससे वृद्धजनों के मन में उत्साह बना रहता है, अकेलेपन की भावना कम होती है और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होती है। सम्मान और खुशहाली के लिए काम कर रही योगी सरकार  समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि  2022- 23 के वित्तीय वर्ष से 2025-26 के वित्तीय वर्ष तक कुल 2493 वरिष्ठ नागरिकों को प्रयागराज महाकुंभ, माघ मेला और राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान का भ्रमण कराया गया है। इसके अलावा समय- समय पर निकटतम धार्मिक स्थलों पर भी ले जाने का काम किया जाता है। योगी सरकार की यह पहल साबित कर रही है कि बुजुर्ग केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज की धरोहर हैं, जिनके सम्मान और खुशहाली के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) से अनाथ बच्चों को मिल रहा सहारा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेसहारा बेटियों के लिए अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के तहत योगी सरकार ने न सिर्फ अनाथ बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया है, बल्कि बेसहारा बेटियों की शादी कराकर उनके जीवन में माता-पिता की कमी को काफी हद तक पूरा करने का प्रयास किया है। इस योजना के तहत अब तक 60 से ज्यादा बेसहारा बेटियों की शादी कराई जा चुकी है। योजना के तहत योगी सरकार बेटियों की शादी के लिए 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद कर रही है। यह इस बात का प्रतीक है कि सरकार जमीनी स्तर पर जिम्मेदारी निभा रही है। बेटियों की शादी कराकर सरकार ने अभिभावक की भूमिका निभाई दरअसल मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) आज हजारों परिवारों के लिए उम्मीद का सहारा बन चुकी है। योगी सरकार ने इस योजना के तहत अब तक 66 बेसहारा बेटियों की शादी कराई है। इस तरह यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए एक भरोसा है, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। सरकार इन बेटियों के विवाह के लिए 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे उनका नया जीवन सम्मान के साथ शुरू हो सके। वर्तमान में 10 हजार से ज्यादा बच्चों को मिल रहा लाभ इस योजना की शुरुआत साल 2021 में की गई थी। इसका उद्देश्य उन बच्चों को सहारा देना है, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण 1 मार्च 2020 के बाद अपने माता-पिता या अभिभावकों को खो दिया था। ऐसे बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके भरण-पोषण, शिक्षा और भविष्य की होती है। इसे ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने एक व्यापक और संवेदनशील व्यवस्था तैयार की। वर्तमान समय में इस योजना के तहत 10,904 बच्चों को लाभ मिल रहा है, जबकि शुरुआत में यह संख्या 13,926 थी।  हजारों बच्चों को मिल रहा योजना का लाभ कई बच्चे समय के साथ वयस्क हो गए या योजना की अवधि पूरी कर चुके हैं, जिससे लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। इसके बावजूद हजारों बच्चों को निरंतर सहायता मिल रही है, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है। साथ ही बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिमाह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। यह सहायता 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने या 12वीं कक्षा पास करने तक (जो पहले हो) दी जाती है। इसके साथ ही शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने 8085 लैपटॉप भी वितरित किए हैं, जिससे बच्चे डिजिटल शिक्षा से जुड़ सकें और प्रतिस्पर्धी माहौल में पीछे न रहें। कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए निशुल्क आवास की व्यवस्था योजना के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। जिन बच्चों का कोई अभिभावक नहीं है, उनके लिए सरकारी बाल देखरेख संस्थाओं में निःशुल्क आवास की व्यवस्था की गई है। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कक्षा 12 तक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें 12,000 रुपये सालाना की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रहे। इसके लिए जिलाधिकारी को इन बच्चों का संरक्षक बनाया गया है, ताकि उनकी चल-अचल संपत्ति की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को भी योजना के दायरे में रखा गया है। उच्च शिक्षा, डिप्लोमा या प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट,जेईई और क्लैट की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई जारी रहती है, बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर भी मिलता है। योगी सरकार का लक्ष्यः कोई बेटी खुद को असहाय न महसूस करें महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) प्रदेश सरकार की एक संवेदनशील और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य उन बच्चों और बेटियों को संबल देना है, जिन्होंने महामारी में अपने अभिभावकों को खो दिया। डॉ. वर्मा ने बताया कि योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता, मुफ्त शिक्षा, डिजिटल संसाधन और सुरक्षित आवास जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही बालिग होने पर बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहयोग भी सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा या बेटी खुद को असहाय महसूस न करे और सभी को समान अवसर मिल सकें।

गाजियाबाद में आग की घटना पर मुख्यमंत्री योगी ने लिया सख्त संज्ञान

गाजियाबाद में आग लगने की घटना पर मुख्यमंत्री योगी ने लिया संज्ञान अधिकारियों को मौके पर पहुंचने के दिए निर्देश सीएम योगी ने कहा, राहत कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी दमकल विभाग ने आग पर काबू पाया, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं लखनऊ  गाजियाबाद के इंदिरापुरम में बहुमंजिली आवासीय भवन में भीषण आग लगने की घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देश देते हुए राहत कार्य में तेजी लाने के लिए कहा। सीएम योगी ने कहा कि मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पुलिस कमिश्नर, डीएम को भी मौके पर पहुंचने के दिए निर्देश हैं। गौरतलब है कि बुधवार सुबह इंदिरापुरम थाना क्षेत्र स्थित गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में अचानक आग लग गई। आग की चपेट में कई फ्लैट आ गए। सूचना मिलते ही दमकल विभाग समेत अन्य टीमें बचाव के लिए मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया गया। फिलहाल आग में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने का कारण अभी पता नहीं चल पाया है।

107 बीएड सहायक आचार्य पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया का आगाज़

बीएड सहायक आचार्य के 107 पदों के लिए शुरू हुई प्रक्रिया योगी सरकार का रोजगार पर फोकस, उच्च शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया को मिली रफ्तार  न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में संशोधित विज्ञापन जारी, अर्हता स्पष्ट 27 मई तक आवेदन करने का मौका, 28 जुलाई को प्रस्तावित है परीक्षा प्रयागराज/लखनऊ  उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देशों के बाद प्रदेश में भर्तियों की प्रक्रिया तेज करते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज ने बीएड विषय के सहायक आचार्य के 107 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को पुनः शुरू कर दिया है। योगी सरकार की यह पहल योग्य युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण तो है ही, उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के सरकार के संकल्प को भी दर्शा रही है। योगी सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, समयबद्ध और परिणामोन्मुख बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में तेज होती यह रफ्तार युवाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोल रही है। यह भर्ती प्रक्रिया पूर्व में जारी विज्ञापन संख्या-51 के अंतर्गत आती है, जिसमें अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में सहायक आचार्य के कुल 1017 पद शामिल थे। न्यायालय के आदेशों एवं अर्हता संबंधी आपत्तियों के चलते पूर्व की प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ा था। अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) रेगुलेशन-2014 के अनुरूप अर्हताओं को स्पष्ट करते हुए संशोधित विज्ञापन जारी किया गया है। पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप होगी भर्ती, 27 मई तक कर सकेंगे आवेदन योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप होगी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेशों के आधार पर बीएड सहायक आचार्य पद के लिए नई शैक्षिक अर्हता तय की गई है, जिसके अनुसार केवल वही अभ्यर्थी आवेदन के पात्र होंगे, जिन्होंने 31 अगस्त 2022 तक निर्धारित अर्हता पूर्ण कर ली हो। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 28 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है और अभ्यर्थी 27 मई 2026 (रात्रि 11:59 बजे तक) आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में संशोधन एवं शुल्क समाधान की सुविधा 30 मई 2026 तक उपलब्ध रहेगी। आयोग द्वारा परीक्षा 28 जुलाई 2026 को आयोजित किए जाने की तैयारी है। पहले से आवेदन कर चुके पात्र अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन करना होगा, हालांकि उन्हें पुनः शुल्क जमा नहीं करना पड़ेगा। जिन अभ्यर्थियों की अर्हता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, वे शुल्क वापसी के लिए आवेदन कर सकते हैं।