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योगी सरकार ने राज्यकर्मियों की संपत्ति छुपाने पर वेतन रोका, लिया कड़ा निर्णय

लखनऊ   राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 68,236 राज्यकर्मियों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अब तक घोषित नहीं किया है। इस लापरवाही के चलते इन कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन फरवरी में नहीं मिलेगा। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के आदेशानुसार सभी राज्यकर्मियों को 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड करना अनिवार्य था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने समयसीमा का पालन नहीं किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें वेतन रोके जाने की कोई चिंता नहीं है। सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अपलोड न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है। योगी आदित्यनाथ सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्यकर्मियों की संपत्ति का विवरण जुटाने को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत प्रदेश के कुल 8,66,261 राज्यकर्मियों को वर्ष 2025 तक की अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक पोर्टल पर देना अनिवार्य था। इसके लिए विभागों के नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि जो कर्मचारी तय समयसीमा तक विवरण अपलोड न करें, उनका वेतन रोक दिया जाए। इन सभी का वेतन रोका जाएगा  रात तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, संपत्ति विवरण न देने वालों में सबसे अधिक 34,926 तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैं। इसके अलावा 22,624 चतुर्थ श्रेणी, 7,204 द्वितीय श्रेणी और 2,628 प्रथम श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। वहीं ‘अन्य’ श्रेणी के 1,612 कर्मचारियों में से 854 ने भी संपत्ति का विवरण नहीं दिया है। इन सभी का वेतन रोका जाएगा।  

‘सपा को सामाजिक न्याय नहीं, सिर्फ अपने परिवार की फिक्र’ — योगी आदित्यनाथ का हमला

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के 'पीडीए' नारे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी दल को 'पीडीए' से ज्यादा 'परिवार' की चिंता है। योगी ने तंज कसते हुए कहा, "पीडीए तो बहाना है, असली लक्ष्य तो 'परिवार' है…!" मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट में पीडीए को नजरअंदाज करने के सपा प्रमुख के आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा, "जो लोग यह दावा करते हैं, उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि जब सरकार ने उत्तर प्रदेश के छह करोड़ लोगों सहित पूरे देश में 25 करोड़ लोगों को गौरव और सम्मान के साथ आगे बढ़ने में मदद की, तो उनके कार्यकाल में ऐसा क्यों नहीं हो सका? पीडीए का मुद्दा तब भी जरूर रहा होगा।" उन्होंने कहा, "मैं पूछना चाहता हूं कि उस समय पीडीए पर चर्चा क्यों नहीं हुई? अपनी पार्टी (सपा) के शासनकाल में उन्हें (अखिलेश को) सिर्फ परिवार की ही चिंता क्यों थी?" योगी समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर वंशवादी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को परिवार के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। हमारा मुख्य उद्देश्य गरीबों, युवाओं और किसानों की सहायता करना है। हमारा लक्ष्य उच्च श्रेणी की अवसंरचना सुनिश्चित करना है, जो आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई गई है।" मुख्यमंत्री ने कहा, "यह दृष्टिकोण बजट में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, लेकिन दूरदृष्टिहीन लोग, भविष्य की कोई योजना न रखने वाले लोग ऐसी निरर्थक बातों में उलझे रहते हैं।" योगी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बजट की आलोचना को भी खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए बढ़ाए गए आवंटन से उत्तर प्रदेश को मदद मिलेगी, जो देश में रक्षा विनिर्माण का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के साथ-साथ निवेशकों को भी लाभ होगा। योगी ने कहा कि केंद्रीय बजट के आधार पर प्रदेश सरकार फरवरी में बजट प्रस्तुत करेग और डबल इंजन सरकार के इस बजट का लाभ देश की सबसे बड़ी आबादी को प्राप्त होगा।

CM योगी का क्रांतिकारी कृषि मॉडल: जानिए कैसे डबल फसल से दोगुनी कमाई होगी

लखनऊ यूपी में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने गन्ना आधारित तिलहनी और दलहनी अंतःफसली यानी इंटरक्रॉपिंग खेती को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर लागू करना है। यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि बहु-गुणित करने की क्षमता रखता है।   मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। सीएम ने बताया कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल (इंटरक्रॉपिंग) से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन मिलेगा। इससे खेती की लागत कम होगी और पूरे वर्ष स्थिर आय सुनिश्चित हो सकेगी।उन्होंने कहा कि इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना किसानों को अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और जोखिम से सुरक्षा मिलती है। प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है। ऐसे में ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने गन्ना आधारित अंतःफसली खेती को यूपी के कृषि भविष्य का नया मॉडल बताते हुए कहा कि यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश तथा देश को तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिलेगी। सीएम योगी ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से वैज्ञानिक आधार पर अंतःफसल का चयन किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी में सरसों-मसूर और जायद में उर्द-मूंग को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही वर्षवार रोडमैप और सहायता-अनुदान की स्पष्ट व्यवस्था करने के निर्देश दिए।  

सरदार पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन के विकास को समयबद्ध रूप से लागू करने के निर्देश

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औद्योगिक विकास को रोजगार से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर घोषित ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ के लिए सभी जनपदों में उपयुक्त भूमि शीघ्र चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को इस संबंध में हुई महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीति का लक्ष्य ऐसा सक्षम वातावरण तैयार करना है, जहां युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता के अवसर एक ही परिसर में सुलभ हों। उन्होंने निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी योजना को स्थानीय आवश्यकताओं और क्षेत्रीय संभावनाओं के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जोन उद्योग, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार तथा उद्योग-सहायता से जुड़े विभागों और सुविधाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने एमएसएमई, सेवा आधारित उद्योगों और नवाचार से जुड़े क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए प्लग-एंड-प्ले यूनिट और फ्लैटेड फैक्ट्री जैसी आधुनिक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया, जिससे उद्यमियों को प्रारंभ से ही आवश्यक अवसंरचना उपलब्ध हो सके। बैठक में अवगत कराया गया कि इस योजना के अंतर्गत कॉमन फैसिलिटी सेंटर, टेस्टिंग फैसिलिटी, डिस्प्ले एवं डिजाइन सेंटर, टूल रूम, ईटीपी/सीईटीपी, प्लग-एंड-प्ले यूनिट तथा फ्लैटेड फैक्ट्री की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही युवाओं के कौशल उन्नयन हेतु उद्यमिता प्रशिक्षण, मेंटरिंग, विभिन्न ऋण योजनाओं की जानकारी तथा हैंडहोल्डिंग की व्यवस्था भी इसी परिसर से की जाएगी। बैठक में यह भी बताया गया कि योजना को चरणबद्ध रूप से प्रदेश के सभी जनपदों में लागू किए जाने का प्रस्ताव है। प्रत्येक जनपद में न्यूनतम 50 एकड़ क्षेत्रफल में एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन विकसित किए जाएंगे। प्रस्तावित जोन के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र, फ्लैटेड फैक्ट्री, वाणिज्यिक क्षेत्र, सड़क, कॉमन फैसिलिटी, सर्विस सेक्टर, ग्रीन एरिया और कार्यालय स्पेस का संतुलित लेआउट तैयार किया गया है। इसके साथ ही ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ की स्थापना भी प्रस्तावित है, जिसमें प्रशिक्षण हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम, एक्सटेंशन काउंटर और उद्योग-सहायता से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि ऑपरेशनल मॉडल के अंतर्गत स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रशिक्षण, कौशल विकास, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप तथा संबंधित उद्योगों में वेतन आधारित रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और उद्यमिता का एक सशक्त केंद्र बनेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि संभावित स्थलों की शीघ्र पहचान कर परियोजना के क्रियान्वयन को गति दी जाए, ताकि यह पहल प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का एक प्रभावी मॉडल बन सके।

सॉइल टू सिल्क की संपूर्ण प्रक्रिया का होगा जीवंत प्रदर्शन, शुद्ध रेशमी वस्त्रों के लिए बनेगा भरोसेमंद केंद्र

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के पारंपरिक और ग्रामीण उद्योगों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसके तहत, रेशम उद्योग के सुदृढ़ीकरण, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान तथा आमजन को रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ की स्थापना की गई है। स्थानीय कारीगरों को उपलब्ध होगा सीधा बाजार सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स में ‘सॉइल टू सिल्क’ की समस्त विधाओं, नर्सरी विकास, शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण से लेकर साड़ी एवं परिधान निर्माण तक का चरणबद्ध और व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह समझाना है कि शुद्ध रेशम क्या होता है, उसकी गुणवत्ता कैसे पहचानी जाए और बाजार में उपलब्ध नकली या मिश्रित रेशम से कैसे भेद किया जा सकता है। यह केन्द्र न केवल प्रशिक्षण और जागरूकता का माध्यम होगा, बल्कि एक्जीबिशन, मार्केटिंग कम सेल सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा, जहां शुद्ध रेशमी वस्त्रों और परिधानों का सीधा विक्रय किया जाएगा। इससे स्थानीय बुनकरों, कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार उपलब्ध होगा। हजारों परिवारों की आजीविका होगी सुदृढ़ योगी सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे रेशम उद्योग से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका सुदृढ़ होगी और प्रदेश की पारंपरिक कला एवं विरासत को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी केन्द्र का उद्घाटन सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रेशम निदेशालय परिसर में स्थापित यह सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जहां रेशम उत्पादन की पूरी श्रृंखला का प्रत्यक्ष एवं जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां रेशम कीट से धागा बनने की प्रक्रिया, धागाकरण एवं वस्त्र निर्माण की संपूर्ण विधि को एक ही स्थान पर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में यह स्थल अनुपयोगी अवस्था में था, जिसे विभागीय प्रयासों से आधुनिक, भव्य एवं उपयोगी स्वरूप प्रदान किया गया है। अब यह केन्द्र प्रदेश मुख्यालय पर देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के लिए रेशम उद्योग की पहचान का प्रमुख केन्द्र बनेगा। यहां एरी, शहतूती एवं टसर रेशम की उत्पादन प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सकेगा। प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन मंत्री सचान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार वर्ष 2022 से प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन हो रहा है, जिसे निरंतर बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को प्रशिक्षण देकर रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हों। भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रेशम उत्पादकों को अनुदान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं रेशम, उत्तर प्रदेश शासन, विशेष सचिव/निदेशक (रेशम), केन्द्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) के अधिकारी एवं वैज्ञानिकों सहित विभागीय एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात: जेवर एयरपोर्ट इस दिन से होगा शुरू, PM मोदी दिखा सकते हैं हरी झंडी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की संभावना है। इसके शुरू होने के बाद यह उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एयरपोर्ट तैयार है और एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री द्वारा इस महीने एयरपोर्ट का उद्घाटन कर किया जाएगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जिसे गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है। लगभग 1,300 हेक्टेयर में फैले इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का संचालन शुरू में सितंबर 2024 में शुरू होने वाला था और यह कई डेडलाइन चूक चुका है। निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे बता दें कि उत्तर प्रदेश में जल्द ही सबसे अधिक 21 हवाई अड्डों वाला प्रदेश बनने की राह पर है। लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के बाद अब जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शीघ्र चालू होने वाला है। जेवर एयरपोर्ट के शुभारंभ से उत्तर प्रदेश एयर कार्गो हब के रूप में उभरेगा और निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। जेवर एयरपोर्ट से पश्चिमी यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार जेवर एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर की वैश्विक कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने के लिए तैयार है। यह एयरपोर्ट नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य पर काम करने वाला अत्याधुनिक एयरपोर्ट होगा, जिसमें स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा। प्रारंभिक चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता वाला यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक आर्थिक हब का काम करेगा। यह एयरपोर्ट न केवल बुनियादी सुविधाओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि पश्चिमी यूपी के युवाओं के लिए रोजगार और संभावनाओं के अनगिनत द्वार खोलेगा।  

फास्ट फूड का फितूर: मॉमोज खाने के चक्कर में बेटे ने ही खाली कर दी घर की तिजोरी

देवरिया यूपी के देवरिया से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां मोमोज खिलाने का झांसा देकर युवकों ने वाराणसी के एक पुजारी के किशोर बेटे से 85 लाख रुपये के जेवरात की ठगी कर ली। जब परिजनों को इस बारे में पता चला तो उनके होश ही उड़ गए। पुजारी ने थाने में इसकी तहरीर दी। जिसे बाद पुलिस ने रविवार को पुलिस ने एक युवक और एक युवती को देर शाम हिरासत में ले लिया। वहीं, उनकी निशानदेही पर कुछ जेवरात भी बरामद कर लिए।   ये मामला रामपुर कारखाना के भगवानपुर तिवारी गांव का है। यहां रहने वाले विमलेश मिश्र वाराणसी के एक मंदिर में पुजारी हैं। उनका नाबालिग बेटा गांव पर रहकर कक्षा सात में पढ़ाई करता है। कुछ दिनों से उसे मोमोज खाने की ऐसी लत लगी कि वह हर दिन देवरिया-कसया मार्ग पर डुमरी चौराहे पर जाने लगा। वहां दुकान लगाने वाले तीन युवकों ने किशोर को अपने झांसे में ले लिया और कुछ लाने पर ही मोमोज देने की बात कही। इसके बाद किशोर घर में रखे जेवरात निकालकर धीरे-धीरे उन्हें लाकर देने लगा। बदले में वे उसे मोमोज खिलाते रहे। आलमारी में पुजारी की पत्नी और बहन के जेवरात थे। बहन जब जेवर मांगने लिए घर आई और रविवार की सुबह अलमारी खोली गई तो परिजनों के होश उड़ गए। आलमारी के लॉकर से सभी जेवर गायब थे। पुजारी ने तहरीर में आरोप लगाया है कि जब बेटे से पूछताछ हुई तो उसने दुकानदारों को जेवरात देने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने एक युवक और एक युवती को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। थानाध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में है। जांच की जा रही है। जल्द ही घटना का पर्दाफाश कर दिया जाएगा। मोमोज की ऐसी लत कि खाली कर दी अलमारी किशोर को ऐसी मोमोज की लत लगी कि पहले वह घर के रुपये से खरीदारी करता रहा। बाद में जेवर लाकर देने लगा। परिवार में किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। वहीं, कुछ ही दिनों में दुकानदारों के रहन-सहन में भी बदलाव दिखने लगा।

29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में तिलहन-दलहन जोड़कर यूपी को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री

अन्तःफसली खेती को मिशन मोड में लागू करें, अन्नदाता की आय में होगा कई गुना इजाफा: मुख्यमंत्री गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों के लिए लाभकारी: मुख्यमंत्री 29.50 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में तिलहन-दलहन जोड़कर यूपी को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने रबी में सरसों-मसूर, जायद में उर्द-मूंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका 'गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अन्तःफसली खेती' को बड़े पैमाने पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि 'बहु-गुणित' करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय उपलब्ध कराती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है, इसलिए ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य के लिए उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इकाई क्षेत्रफल से अधिक फसल उत्पादन है। उन्होंने कहा कि 'गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल है। यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करती है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और साथ ही प्रदेश एवं देश की तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि  कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से क्रियान्वित करते हुए अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी सीजन में सरसों और मसूर तथा जायद सीजन में उर्द और मूंग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा, यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने इस योजना के लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय में वृद्धि करेगा और राज्य के जीवीए में बड़ा योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सहायता और अनुदान का ढांचा स्पष्ट होना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बड़े पैमाने पर अंतःफसलों को अपनाने से किसानों को तेज़ नकदी प्रवाह मिलेगा और एकल फसल जोखिम कम होगा, जिससे कृषि अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल गन्ना क्षेत्र से जुड़े किसानों के लाभ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रदेश के व्यापक कृषि परिदृश्य के परिवर्तन के रूप में लागू किया जाना चाहिए।

प्रमाणित बीज की कमी न हो, संकर बीजों में बाहरी निर्भरता समाप्त कर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री

प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक बीज नीति तैयार करें: मुख्यमंत्री प्रमाणित बीज की कमी न हो, संकर बीजों में बाहरी निर्भरता समाप्त कर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाएं: मुख्यमंत्री कृषि उत्पादन की असली ताकत अच्छा और भरोसेमंद बीज: मुख्यमंत्री हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी अनिवार्य करें; मिलावटी और अमानक बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर, उपकार और निजी उद्योग को एक मंच पर लाने का निर्देश, बीज अनुसंधान, नवाचार और किस्म रिलीज़ प्रक्रिया तेज हो कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास से जोड़ने और हर क्लाइमेटिक ज़ोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने के निर्देश प्रगतिशील किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रम से जोड़कर स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्धता बढ़ाने पर जोर ट्यूबवेलों का सौर ऊर्जीकरण तेज़ हो, प्रदेश के सोलर पैनल निर्माताओं को प्राथमिकता देने के मुख्यमंत्री के निर्देश अगले पाँच वर्षों में पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की योजना, टिशू कल्चर लैब्स और प्रमाणित नर्सरी नेटवर्क सुदृढ़ करने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कृषि उत्पादन की वास्तविक शक्ति उच्च गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद और प्रमाणित बीजों में निहित है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के लिए नई और आधुनिक 'बीज नीति' समय की मांग है। भूमि जोत लगातार घट रही है, ऐसे में ध्यान केवल रकबे पर नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि उच्च उपज, रोग-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु किस्मों के विकास को प्राथमिकता देते हुए ऐसी बीज नीति तैयार की जाए जो आने वाले वर्षों की कृषि चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करे। बीज नीति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने अगले पाँच वर्षों के लिए प्रदेश की बीज उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और उपलब्धता को नए स्तर तक ले जाने के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण की पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग आवश्यक है, ताकि प्रमाणित बीज की कमी न हो और किसान सशक्त बन सकें। मुख्यमंत्री ने भरोसेमंद बीज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावटी या अमानक बीजों के प्रति कोई भी ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। किसानों तक पहुँचने वाला हर बीज पैकेट प्रमाणित, परीक्षणित और पूरी तरह मानक होना चाहिए। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, उपकार तथा निजी बीज उद्योग को एक साझा मंच पर लाकर बीज अनुसंधान, नवाचार और किस्म-रिलीज प्रक्रिया को तेज़ करने की आवश्यकता बताई। फसल विविधीकरण को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता हेतु विशेष रणनीति तैयार करने को कहा। इसी क्रम में प्रदेश में अगले पांच वर्षों में कम से कम पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए। ये सीड पार्क उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण की सभी सुविधाओं से सुसज्जित एकीकृत परिसर होंगे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास कार्यक्रमों से सीधे जोड़ा जाए, ताकि अनुसंधान, प्रशिक्षण और खेत-स्तर पर तकनीक के प्रसार के बीच सुदृढ़ समन्वय स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नौ क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप एक-एक कृषि विज्ञान केंद्र को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए, जिससे क्षेत्र-विशेष की फसलों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकें। मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों को भी बीज विकास कार्यक्रमों से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय अनुभव और आधुनिक तकनीक का प्रभावी समन्वय बन सके। मुख्यमंत्री ने कृषि में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जीकरण से जोड़ा जाए, जिससे किसानों का सिंचाई खर्च कम हो और कृषि में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़े। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में स्थापित सोलर पैनल इकाइयों को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्थानीय निर्माण को बढ़ावा मिलने से रोजगार, निवेश और कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।

एक-एक कर सभी प्रार्थियों से मिले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, समस्याओं के उचित निस्तारण का दिया आश्वासन

जनता दर्शन :बच्ची ने किया सैल्यूट तो सीएम बोले- खूब मन लगाकर पढ़ाई करो अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर निरंतर करें कड़ी कार्रवाईः मुख्यमंत्री  एक-एक कर सभी प्रार्थियों से मिले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, समस्याओं के उचित निस्तारण का दिया आश्वासन  जनपदों में प्रशासन, पुलिस व राजस्व के अधिकारी मामलों को गंभीरता से लेते हुए करें कार्रवाई: मुख्यमंत्री बच्ची ने किया सैल्यूट तो सीएम बोले- खूब मन लगाकर पढ़ाई करो लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। एक-एक कर सभी प्रार्थियों से उन्होंने मुलाकात की, उनका प्रार्थना पत्र लिया और समस्याओं के उचित निस्तारण का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों, राजस्व से जुड़े अधिकारियों व पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए लोगों की समस्याएं सुनें और जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करें। ‘जनता दर्शन’ में पहुंची एक बच्ची ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सैल्यूट किया। इस पर सीएम योगी ने उसे आशीर्वाद देते हुए खूब मन लगाकर पढ़ाई करने को कहा। जनपदों में समस्याएं सुन दोषियों पर करें कार्रवाई  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष ‘जनता दर्शन’ में अवैध कब्जे से जुड़े कुछ प्रकरण भी आए। सीएम ने सभी लोगों की बातें सुनीं,  फिर प्रार्थना पत्र लेते हुए उचित कार्रवाई का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने जनपदों में तैनात अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे वहां भी समस्याएं सुनते हुए प्रार्थियों को न्याय दिलाएं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें।  बच्चे के इलाज के लिए सीएम ने दिया आर्थिक मदद का आश्वासन ‘जनता दर्शन’ में एक महिला अपने बच्चे के साथ पहुंचीं। उनके बच्चे का केजीएमयू में इलाज चल रहा है। महिला ने मुख्यमंत्री से इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने इलाज के लिए आर्थिक सहायता दिलाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ प्रदेशवासी मेरा परिवार हैं। सरकार सभी के सुख-दुख में खड़ी है। पहले दिन से ही इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। आगे भी यह क्रम चलता रहेगा। धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा।  बच्ची ने किया सैल्यूट, सीएम बोले- खूब मन लगाकर पढ़ाई करो ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी पहुंचे। प्रार्थियों से मिलने के क्रम में मुख्यमंत्री एक महिला के पास पहुंचे और उनका प्रार्थना पत्र लिया। महिला के साथ आई बच्ची ने सीएम योगी को देख उन्हें सैल्यूट किया। इस पर सीएम योगी ने मुस्कुराते हुए बच्ची से उसका नाम और पढ़ाई के बारे में पूछा। मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों को चॉकलेट दी और कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करो। बच्ची ने सुनाई सीएम को कविता ‘जनता दर्शन’ में मां के संग आई एक बच्ची ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कविता सुनाई। बच्ची की कविता सुनकर मुख्यमंत्री ने उसकी खूब तारीफ की। सीएम ने बच्ची से पूछा कि स्कूल जाएगी, मेहनत से पढ़ेगी? बच्ची के हां कहने पर सीएम ने एडमिशन कराने का आदेश दिया। बच्ची ने सीएम योगी को कविता भी सुनाई- “हम शेर बच्चे, शेर बच्चे, शेर बच्चे हैं। हम छोटे हैं तो क्या हुआ, हम दिल के सच्चे हैं। हम बड़े होकर देश की शान बढ़ाएंगे। जय हिंद।” कविता सुनकर सीएम ने बच्ची का उत्साहवर्धन भी किया।