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नव ऊर्जा और सकारात्मकता का पर्व: मौनी अमावस्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश

लखनऊ संगम नगरी प्रयागराज में 'मौनी अमावस्या' के महास्नान पर्व पर स्नान के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा नेताओं ने इस अवसर पर देश-दुनिया से आए करोड़ों श्रद्धालुओं को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "दान, व्रत और त्याग की प्रेरणा देने वाले आस्था के महापर्व मौनी अमावस्या की सभी श्रद्धालुओं और प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई। मोक्षदायिनी माँ गंगा और सूर्यदेव की कृपा से सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों, जीवन में नव ऊर्जा, नव उत्साह और नव उमंग का संचार हो, यही कामना है। हर हर गंगे!" उन्होंने आगे लिखा कि आस्था के महापर्व मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर पवित्र संगम स्नान के लिए पधारे सभी पूज्य अखाड़ों, धर्माचार्यों, संतगणों, साधकों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं का आत्मीय अभिनंदन। मोक्षदायिनी माँ गंगा और भगवान सूर्य की कृपा से सभी की मनोक्षणाएं पूर्ण हों, जीवन में नई ऊर्जा, नया उत्साह और नया संकल्प जगे, यही प्रार्थना है। हर हर गंगे! राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "लोक-आस्था के पावन पर्व मौनी अमावस्या पर सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं! पवित्र संगम और विभिन्न पावन नदियों में स्नान-दान के इस महापर्व पर भगवान श्रीहरि से प्रार्थना है कि वे सभी के जीवन में सुख, शांति और अटूट समृद्धि का संचार करें।" उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य व लोक आस्था के महापर्व मौनी अमावस्या की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेला में पावन स्नान हेतु पधारे समस्त साधु-संतों, कल्पवासियों एवं श्रद्धालुओं का सादर अभिनन्दन!" उन्होंने आगे लिखा कि माघ मेला के पवित्र अवसर पर प्रयागराज के पावन संगम में आस्था की डुबकी से समस्त पूज्य साधु-संतों एवं कल्पवासियों की तपस्या सफल हो तथा समस्त श्रद्धालुओं के जीवन में पुण्य, शांति और अभिलाषित फल की प्राप्ति हो, यही मंगलकामना है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री जसवन्त सिंह सैनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "दान, व्रत, मौन और त्याग की प्रेरणा देने वाले आस्था के पावन पर्व मौनी अमावस्या की समस्त श्रद्धालुओं एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। मोक्षदायिनी माँ गंगा एवं सूर्यदेव की कृपा से सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों तथा जीवन में नव ऊर्जा, नव उत्साह और नव उमंग का संचार हो, यही मंगलकामना है। हर हर गंगे!"

योगी सरकार की संवेदनशील पहल: गोवंश को मिल रहा पौष्टिक आहार, गोचर भूमि पर तेजी से बढ़ रहा हरा चारा उत्पादन

समग्र दृष्टि से पशु कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही योगी सरकार प्रदेश में 7140.37 हेक्टर चारागाह की भूमि को कब्जा मुक्त करके हरा चारा उत्पादन किया जा रहा, आगामी 2 वर्षों में 35000 हेक्टेयर भूमि का होगा उपयोग टैग्ड गोचर भूमि पर शत प्रतिशत हरे चारे का हो रहा उत्पादन, हाइब्रिड नेपियर और अन्य हरे चारे पर विशेष फोकस हरदोई, सुल्तानपुर, कानपुर नगर और रामपुर हरा चारा उत्पादन करने वाले शीर्ष 4 जनपदों में शामिल लखनऊ,  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पशु कल्याण और गोवंश संरक्षण को लेकर लगातार ठोस कदम उठा रही है। गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में गोचर एवं चारागाह भूमि पर हरा चारा उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका सकारात्मक असर अब ज़मीन पर साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश में उपलब्ध कुल 61118.815 हेक्टेयर गोचर एवं चारागाह भूमि है। जिसमें 7140.37 हेक्टर चारागाह की भूमि को कब्जा मुक्त करके हरा चारा उत्पादन किया जा रहा है।यह प्रयास न केवल पशुओं के पोषण स्तर को बेहतर बना रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। अगले दो वर्षों में 35 हजार हेक्टेयर पर होगा हरा चारा उत्पादन योगी सरकार ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। आने वाले दो वर्षों में 35000 हेक्टेयर कब्जामुक्त एवं सिंचित चारागाह भूमि पर हरा चारा उत्पादन कराया जाएगा। इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि प्रदेश में 1691.78 हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड नेपियर चारा और 5448.59 हेक्टेयर में अन्य हरे चारे (जई, बरसीम आदि) की बुआई की जा चुकी है। इससे गोवंश को सालभर पौष्टिक और संतुलित आहार उपलब्ध हो सकेगा। इन जनपदों में तेजी से बढ़ा हरा चारा उत्पादन प्रदेश के हरदोई, सुल्तानपुर, कानपुर नगर और रामपुर जनपदों में हरा चारा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं टैग्ड गोचर भूमि पर शत-प्रतिशत हरा चारा उत्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। गोचर एवं चारागाह भूमि का समतलीकरण, सुरक्षाबाड़ा एवं खाई निर्माण जैसे कार्य मनरेगा कन्वर्जेन्स के माध्यम से कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है और पशुओं के लिए सुरक्षित चारागाह भी विकसित हो रहे हैं। शीतलहर से बचाव के भी निर्देश योगी सरकार ने गोवंश के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शीतलहर से बचाव के लिए बोरा-चट्ट ओढ़ाने, तिरपाल लगाने और गो-आश्रय स्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पशु स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें। कुल मिलाकर हरा चारा उत्पादन, चारागाह विकास और गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं के माध्यम से योगी सरकार यह स्पष्ट संदेश दे रही है कि प्रदेश में विकास के साथ-साथ पशु कल्याण भी शासन की प्राथमिकता है। यह पहल न केवल गोवंश संरक्षण को मजबूती दे रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश को पशुपालन के क्षेत्र में एक सशक्त मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

‘स्टार्ट इन यूपी’ को मिली संस्थागत मजबूती, 7 स्वीकृत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को ₹27.18 करोड़ की धनराशि जारी

ब्लॉकचेन, एआई, 5जी/6जी, हेल्थटेक, ड्रोन, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस आईआईटी, आईआईएम और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से स्टार्टअप्स को मिल रहीं विश्वस्तरीय लैब्स, सुपरकंप्यूटिंग, एआई/एमएल प्लेटफॉर्म, टेस्टिंग फैसिलिटी, मेंटरशिप और इंडस्ट्री कनेक्ट सैकड़ों स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन, हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट से रोजगार के नए अवसर और स्वदेशी तकनीक विकास को मिल रहा बढ़ावा लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को देश के अग्रणी स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करने में जुटी है। योगी सरकार ने 'स्टार्ट इन यूपी' नीति के अंतर्गत प्रदेश में 7 अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति प्रदान की है, जिन्हें अब तक कुल ₹27.18 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है। इन केंद्रों की मदद से प्रदेश में नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिल रही है। इन सभी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से सैकड़ों स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन, हजारों युवाओं को स्किल डेवलपमेंट, नए रोजगार अवसर और स्वदेशी तकनीक विकास को बढ़ावा मिल रहा है। ब्लॉकचेन से ड्रोन टेक्नोलॉजी तक, भविष्य की तकनीकों पर फोकस प्रदेश में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5जी/6जी टेलीकॉम, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। ये सेंटर न केवल स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उन्हें ग्लोबल स्टैंडर्ड पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। आईआईटी और आईआईएम बने नवाचार के इंजन गौतम बुद्ध नगर, लखनऊ, कानपुर नगर, सहारनपुर और गाजियाबाद में स्थापित इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को आईआईटी कानपुर, आईआईटी रुड़की, आईआईएम लखनऊ, एसटीपीआई लखनऊ और एकेजीईसी गाजियाबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। इससे स्टार्टअप्स को विश्वस्तरीय लैब्स, सुपरकंप्यूटिंग, एआई/एमएल (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग) प्लेटफॉर्म, टेस्टिंग फैसिलिटी, मेंटरशिप और इंडस्ट्री कनेक्ट मिल रहा है। 5 वर्षों में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य, ₹10 करोड़ तक का संस्थागत सहयोग उत्तर प्रदेश सरकार की स्टार्टअप नीति के तहत प्रत्येक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्थापना की तिथि से 5 वर्षों की अवधि में अधिकतम ₹10 करोड़ तक की ग्रांट-इन-एड (पूंजीगत एवं संचालन व्यय सहित) प्रदान किए जाने का प्रावधान है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि ये सेंटर पांच वर्षों के भीतर आत्मनिर्भर बनें और दीर्घकालिक रूप से प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करें। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा गौतम बुद्ध नगर में स्थापित ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आईआईएम लखनऊ ईआईसी द्वारा माइक्रोसॉफ्ट के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। यह केंद्र 10,000 वर्ग फुट के अत्याधुनिक परिसर में अगले पांच वर्षों में 100 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करेगा। यहां स्टार्टअप्स को उच्च तकनीकी सुविधाओं के साथ ₹75 लाख तक की सीड फंडिंग, विशेषज्ञ मेंटरशिप और एंजेल व वेंचर कैपिटल नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से प्रदेश में एक सशक्त और टिकाऊ ब्लॉकचेन इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। मेडटेक और हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स से आत्मनिर्भर स्वास्थ्य व्यवस्था लखनऊ में स्थापित मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ इन्फॉर्मेटिक्स (मेडटेक) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को एसटीपीआई लखनऊ, एसजीपीजीआई, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग (उत्तर प्रदेश सरकार), एआईएमईडी, एएमटीजेड और केआईएचटी के सहयोग से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य मेडिकल डिवाइस और हेल्थ टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देकर आयात पर निर्भरता कम करना और मेक इन इंडिया व डिजिटल इंडिया को सशक्त करना है। यहां स्टार्टअप्स को तकनीकी विशेषज्ञों, डॉक्टरों, मेंटरशिप और वेंचर फंडिंग का सहयोग मिल रहा है। 5जी/6जी और एआई से भविष्य की तकनीकों पर फोकस कानपुर नगर में आईआईटी कानपुर द्वारा संचालित 5जी/6जी टेलीकॉम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों पर अनुसंधान और स्टार्टअप विकास को बढ़ावा दे रहा है। अत्याधुनिक आरएफ लैब्स, एआई/एमएल सर्वर, सुपरकंप्यूटिंग टूल्स और टेस्टिंग सुविधाओं से लैस यह केंद्र भारत को वैश्विक टेलीकॉम नवाचार में अग्रणी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में स्थापित एआई एवं इनोवेशन आधारित उद्यमिता (एआईआईडीई) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आईआईटी कानपुर और फिक्की के सहयोग से संचालित है, जहां हर वर्ष 50 एआई आधारित स्टार्टअप्स को प्रशिक्षण, मेंटरशिप और निवेश से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। सहारनपुर और गाजियाबाद से उभरता औद्योगिक नवाचार सहारनपुर में आईआईटी रुड़की द्वारा संचालित 5जी/6जी यूबिक्विटस वायरलेस कम्युनिकेशन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस 6जी विजन के अनुरूप कार्य कर रहा है। वहीं, गाजियाबाद में एकेजीईसी द्वारा स्थापित एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अत्याधुनिक थ्रीडी प्रिंटिंग और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों के माध्यम से एमएसएमई और स्टार्टअप्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहा है। ड्रोन और यूएवी तकनीक में यूपी को राष्ट्रीय हब बनाने की तैयारी कानपुर नगर में आईआईटी कानपुर द्वारा संचालित यूएवी डिजाइन, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ड्रोन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता, टेस्टिंग, डिजाइन वैलिडेशन और कंसल्टेंसी प्रदान कर रहा है। डीजीसीए अनुमोदित फ्लाइट टेस्टिंग जोन और उन्नत लैब्स के माध्यम से यह केंद्र प्रदेश को ड्रोन टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में अग्रसर है।

उत्तर प्रदेश से बढ़ेगी मेडिकल टेक्नोलॉजी की दौड़, मुख्यमंत्री योगी का बड़ा ऐलान

लखनऊ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ में यूपी हेल्थटेक कॉन्क्लेव 1.0 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सिर्फ 25 करोड़ की आबादी वाला राज्य ही नहीं, बल्कि देश व पड़ोसी राज्यों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र भी है। प्रदेश को मेडिकल टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर इनोवेशन और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का राष्ट्रीय तथा वैश्विक हब बनाने की दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है, जिसके परिणाम आज ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े हेल्थकेयर कंज्यूमर मार्केट के रूप में 35 करोड़ से अधिक लोगों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं का भार वहन करता है। उन्होंने कहा कि पिछले पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वह परिवर्तन किया है, जिसकी कल्पना पहले संभव नहीं थी। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 40 मेडिकल कॉलेज थे। आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज पूरी तरह क्रियाशील हैं। इसके अतिरिक्त दो एम्स, 100 से अधिक जिला अस्पताल, सैकड़ों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स की एक मजबूत श्रृंखला खड़ी की गई है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल भवन खड़े करना नहीं था, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना था, जिसमें अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को भी सम्मानजनक व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लागू होने से पहले किसी गरीब परिवार में यदि कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाता था, तो पूरा परिवार भय और आर्थिक संकट में घिर जाता था। इलाज अधूरा छूट जाता था, क्योंकि न सरकार का सहयोग होता था और न ही संसाधन। आज उत्तर प्रदेश में 5.5 करोड़ परिवारों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से प्रति परिवार ₹5 लाख तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जो पात्र परिवार किसी कारणवश आयुष्मान योजना में शामिल नहीं हो सके, उन्हें मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से कवर किया गया है। आयुष्मान कार्ड एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी तथा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। संस्थागत प्रसव अब राष्ट्रीय औसत के समकक्ष पहुंच चुका है। कई जनपद ऐसे हैं, जहां ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया है। एक समय उत्तर प्रदेश वेक्टर जनित रोगों की चपेट में रहता था। मानसून आते ही इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया व कालाजार जैसी बीमारियां विकराल रूप ले लेती थीं। इंसेफेलाइटिस के कारण पिछले 40 वर्षों में उत्तर प्रदेश में लगभग 50 हजार मासूम बच्चों की मृत्यु हुई थी। वर्ष 2017 में सरकार ने इसके खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू किया। समय पर पहचान, स्थानीय स्तर पर इलाज और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था लागू की गई। मात्र दो वर्षों के भीतर इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया और आज उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से ज़ीरो डेथ दर्ज की जा रही है। डेंगू, मलेरिया, कालाजार और चिकनगुनिया पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अगला लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ विजन को साकार करना है। इसके लिए टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग आवश्यक है। स्क्रीनिंग की प्रक्रिया गांव स्तर से शुरू होनी चाहिए, ताकि मरीज को अनावश्यक रूप से 40-50 किलोमीटर दूर न जाना पड़े। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर ही यह तय हो जाए कि मरीज को किस स्तर की चिकित्सा की आवश्यकता है। टेली कंसल्टेशन, टेलीमेडिसिन और एआई आधारित स्क्रीनिंग से यह संभव है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग फार्मा पार्क का विकास युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल आत्मनिर्भर भारत नहीं, बल्कि 'मेक इन इंडिया' से 'मेक फॉर द वर्ल्ड' की दिशा में आगे बढ़ना है। कोविड काल ने यह सिखाया कि संकट के समय दुनिया अपनी मोनोपोली दिखाती है। ऐसे में देश व प्रदेश को स्वास्थ्य और मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना ही होगा। मुख्यमंत्री ने तक्षशिला विश्वविद्यालय और वैद्य जीवक की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय मनीषा हमेशा यह मानती रही है कि “नास्ति मूलमनौषधम्” यानि कोई भी वनस्पति ऐसी नहीं, जिसमें औषधीय गुण न हों। उसी तरह “अयोग्य: पुरुषो नास्ति” यानि कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता, आवश्यकता केवल सही योजक की होती है। आज सरकार की नीतियां वही योग्य योजक हैं, जो युवाओं, स्टार्टअप्स व इनोवेटर्स को अवसर प्रदान कर रही हैं।

श्रद्धालुओं पर हुई पुष्पवर्षा, संगम में तैरती रही भक्ति की लहर

प्रयागराज उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के माघ मेले में आज मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर हेलीकॉप्टर के द्वारा श्रद्धालुओं के ऊपर और साधु संतों के ऊपर पुष्प वर्षा कराई गई। यह पुष्प वर्षा सनातन की आस्था को सम्मान के तौर पर कराई जा रही है। माघ महीने में मौनी अमावस्या पर करोड़ों की भीड़ को मैनेज करके स्नान कराया जा रहा है उसे श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। रात 12:00 बजे से अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई हुई है। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। चप्पे चप्पे पर पुलिस के जवान और पीएसी के जवान के साथ आर ए एफ के साथ यूपी एटीएस की टीम भी स्नान घाटों पर मुस्तैदी से श्रद्धालुओं का सहयोग कर रही है। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार खुद रात्रि 12:00 बजे से मेला क्षेत्र में स्नान घाट पर भ्रमण कर रहे हैं और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टीम को लाउड स्पीकर के माध्यम से दिशा निर्देश दे रहे हैं। ठंड पर भारी पड़ रही आस्था श्रद्धालु ठंड और कोहरे के बाद भी संगम में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु बड़ी तादाद में संगम पहुच रहे है। संगम क्षेत्र में स्नान करने के लिए लोगो के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है। त्रिवेणी के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाकर हर कोई पुण्य अर्जित करना चाहता है। मान्यता यह है कि… माघ के महीने को हिंदू धर्म ग्रंथों में बहुत पवित्र माना जाता है लेकिन माघ मास के ठीक मध्य में अमावस्या के दिन का तो बहुत विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता यह है कि इस दिन पवित्र नदी और मां का दर्जा रखने वाली गंगा मैया का जल अमृत बन जाता है। इस लिये माघ स्नान के लिये अमावस्या यानि मौनी अमावस्या को बहुत ही खास बताया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन की तरफ से भी चाक चौबंद प्रबंध किये गए है।

सेंट्रल रिसर्च सेंटर से एमओयू की चल रही कवायद, अति गंभीर बीमारियों पर होगा रिसर्च

कैंसर, डायबबिटीज समेत अन्य बीमारियों पर होगा रिसर्च, अस्पतालों को रिसर्च-ओरिएंटेड सेंटर के रूप में विकसित करने पर मंथन   – रिसर्च के निष्कर्षों के आधार पर तैयार किया जाएगा स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल, इसे देश-विदेश में अपनाया जा सकेगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष चिकित्सा पद्धतियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। प्रदेश के आयुष अस्पताल अब केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें रिसर्च सेंटर हब के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए सेंट्रल रिसर्च सेंटर (केंद्रीय अनुसंधान संस्थान) के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया जाएगा। इस पहल के तहत कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग समेत कई अति गंभीर और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर आयुष चिकित्सा पद्धतियों से शोध किया जाएगा। आयुष आधारित इलाज की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ किया जाएगा स्थापित प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयुर्वेद, योग, यूनानी व होम्योपैथी को स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। योगी सरकार का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुष पद्धतियों का समन्वय न केवल इलाज को अधिक प्रभावी बनाएगा, बल्कि रोगों की रोकथाम और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में भी मददगार होगा। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इच्छा के अनुरूप प्रदेश के चयनित आयुष अस्पतालों को रिसर्च-ओरिएंटेड सेंटर के रूप में विकसित करने पर मंथन चल रहा है। यहां उपचार के साथ-साथ रोगों के कारण, प्रभाव, जीवनशैली, खानपान और आयुष आधारित उपचार पद्धतियों पर डाटा आधारित शोध किया जाएगा। इसका मुख्य उद्​देश्य आयुष आधारित उपचारों की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ स्थापित करना है। सेंट्रल रिसर्च सेंटर से एमओयू के बाद आयुष चिकित्सकों को रिसर्च ट्रेनिंग, आधुनिक लैब सुविधाएं और तकनीकी सहयोग मिलेगा। इस रिसर्च का फोकस उन बीमारियों पर होगा, जिनका बोझ तेजी से बढ़ रहा है। कैंसर और डायबिटीज के अलावा उच्च रक्तचाप, मोटापा, थायरॉइड, हृदय रोग, जोड़ों के रोग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी रिसर्च के दायरे में रहेंगी। रिसर्च प्रोजेक्ट्स से आयुष चिकित्सकों, शोधार्थियों और छात्रों को काम करने का मिलेगा मंच प्रमुख सचिव ने बताया कि सेंट्रल रिसर्च सेंटर से होने वाले एमओयू के बाद उत्तर प्रदेश आयुष रिसर्च के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बनने की ओर बढ़ेगा। इससे न केवल प्रदेश के चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को नई पहचान मिलेगी, बल्कि आयुष आधारित उपचारों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाने में भी मदद मिलेगी। योगी सरकार का उद्देश्य है कि रिसर्च के निष्कर्षों के आधार पर स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल तैयार किए जाएं, जिन्हें देश-विदेश में अपनाया जा सके। इससे आयुष चिकित्सा की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। इससे आयुष क्षेत्र में रोजगार और शोध के नए अवसर भी पैदा होंगे। रिसर्च प्रोजेक्ट्स के माध्यम से आयुष चिकित्सकों, शोधार्थियों और छात्रों को काम करने का मंच मिलेगा। साथ ही, आयुष कॉलेजों के छात्रों को प्रैक्टिकल रिसर्च का अवसर मिलेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। योगी सरकार की यह पहल प्रदेश को समग्र स्वास्थ्य मॉडल स्थापित करने दिशा में बड़ा कदम साबित होगा, जहां आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान का संतुलित उपयोग होगा।

उड़ते विमान के बाथरूम में मिली धमकी, बम की सूचना के बाद लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग

लखनऊ आसमान में उड़ते विमान में बम की सूचना से हड़कंप मच गया। दिल्ली से बागडोगरा के लिए उड़ान भर रही इस फ्लाइट की लखनऊ एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। यह फ्लाइट इंडिगो की है। फ्लाइट के बाथरूम में टिश्यू पेपर पर लिखा था कि फ्लाइट में बम है। यह टिश्यू पेपर एक यात्री ने देखा तो उसने तत्काल क्रू मेंबर को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पॉयलट ने इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत मांगी। लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग के बाद विमान के कोने-कोने को चेक किया जा रहा है। फ्लाइट में 230 यात्री, दो पायलट और पांच क्रू मेंबर सवार थे।   इंडिगो एयरलाइंस की 6E-6650 फ्लाइट से रविवार की सुबह करीब 8:46 बजे एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) को बम की सूचना मिली। यह सूचना मिलते ही लखनऊ एयरपोर्ट पर विमान की इमरजेंसी लैंडिंग की तैयारी की गई। लखनऊ एयरपोर्ट पर विमान की इमरजेंसी लैंडिंग के बाद इसे आइसोलेशन वे पर पार्क कराया गया। विमान को लखनऊ एयरपोर्ट पर रोककर सघन जांच कराई जा रही है। विमान के कोने-काने की जांच की जा रही है। फिलहाल, अभी तक कोई संदिग्ध वस्तु न मिलने से यात्रियों, क्र मेंबर और अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। क्या बोली पुलिस इस बारे में एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा ने बताया कि फायर ब्रिगेड और बीडीएस टीम से विमान की चेकिंग कराई जा रही है। अभी तक कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। टिश्यू पेपर पर बम की सूचना किसने लिखी, इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस इस घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। 24 जनवरी से नहीं जाएगी लखनऊ से अजमेर की सीधी फ्लाइट उधर, उड़ान’ योजना की रीजनल कनेक्टिविटी के अन्तर्गत शुरू की गई एक और फ्लाइट बंद हो रही है। छोटी एयरलाइंस की लखनऊ से किशनगढ़ यानी अजमेर की सीधी फ्लाइट 24 जनवरी के बाद नहीं जाएगी। इसके पीछे यात्रियों को परिचालन कारण बताया गया है। लखनऊ से किशनगढ़ (अजमेर) के बीच सीधी उड़ान सेवा वर्ष 2024 की 16 फरवरी को शुरू हुई थी। इस रूट पर स्टार एयर एकमात्र एयरलाइन है जो सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करती है। लखनऊ से फ्लाइट एस5-223 दिन में 10:45 बजे लखनऊ से रवाना हो कर 12:05 बजे किशनगढ़ पहुंचती है। वहीं, दिन में 3:35 बजे फ्लाइट एस5-222 किशनगढ़ से उड़ान भरकर 4:55 बजे लखनऊ पहुंचती है। दोनों शहरों के बीच मात्र 1 घंटा 20 मिनट का समय लेती है। यह फ्लाइट सप्ताह में 4 दिन (मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार) संचालित होती है।  

मौनी अमावस्या का विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रथ रोकने से भड़के समर्थक, बैरियर क्षतिग्रस्त

प्रयागराज मौनी अमावस्या पर संगम तट पर लगे माघ मेला-2026 में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह 9 बजे तक ही करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी स्नान पर्व पर आस्था की डुबकी लगा ली थी। श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश भी की गई। इस बीच मौनी अमावस्या पर राजसी स्नान की तरह जुलूस निकालने पर पुलिस ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को संगम के पहले रोक दिया। प्रशासन ने 17/18 जनवरी की रात 12 बजे मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित कर रखा है। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि रथ की अनुमति नहीं ली गई थी। उधर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस पर संतों से मारपीट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पैदल जाने का अनुरोध किया था लेकिन लोग दर्शन के लिए टूट पड़ते हैं, इससे भगदड़ की स्थिति हो जाती है। रथ रोके जाने पर शंकराचार्य समर्थकों और पुलिस-प्रशासन के बीच तीखी नोंकझोंक होने लगी। इसी दौरान सूचना आई कि पुल नंबर चार का बैरियर टूट गया है। कहा गया कि शंकराचार्य के समर्थकों ने इसे तोड़ा है। हालांकि शंकराचार्य ने समर्थकों द्वारा बैरियर तोड़े जाने के आरोपों को निराधार बताया है।   संगम पर हंगामे के चलते पुलिस ने पब्लिक को डायवर्ट भी किया है। आरएएफ ने कतार लगाकर भीड़ को डायवर्ट किया। पुलिस और शंकराचार्य के समर्थकों के बीच बहस की सूचना पर बड़ी संख्या में अधिकारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, मेलाधिकारी ऋषिराज सहित कई वरिष्ठ अधिकारी वहां पहुंचे। अधिकारियों की ओर से कहा गया कि जुलूस के साथ संगम तट पर जाने की अनुमति नहीं है। पांच लोगों के साथ जाकर स्नान करें। इस पर शंकराचार्य ने आपत्ति की और पुलिस प्रशासन पर मनमानीपूर्ण रवैए का आरोप लगाया। काफी देर तक चली खींचतान के बाद पुलिस ने समर्थकों को वहां से खदेड़ दिया। रथ अकेला रह गया तो पुलिसकर्मी खुद बाहर ले गए। तड़के चार बजे से चल रहा है स्नान माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या आज है। इस मौके पर प्रयागराज के संगम स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालु जुटे हैं। ब्रह्म मुहूर्त में तड़के चार बजे से स्नान शुरू हुआ जो दिन भर चलता रहेगा। स्थानीय प्रशासन के अनुमान के मुताबिक इस साल तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु मौनी अमावस्या के स्नान के लिए संगम क्षेत्र में पहुंचेगे। एक दिन पहले से ही उमड़ने लगे थे श्रद्धालु इस स्नान के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम एक दिन पहले ही संगमनगरी में पहुंच गया। अलसुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो दोपहर बाद काफी बढ़ गया। शाम को तो स्थिति यह हो गई थी कि लग रहा था मानो शनिवार को ही मौनी अमावस्या हो। सिर पर गठरी लादे हुए लोग मेले के भीतर प्रवेश करते हुए दिखाई दिए। प्रशासनिक अफसरों का अनुमान है कि रविवार को स्नान के लिए साढ़े तीन से चार करोड़ श्रद्धालु आएंगे। वहीं, अफसरों का यह भी दावा है कि मौनी अमावस्या से एक दिन पहले शनिवार शाम छह बजे तक 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई है। मेला क्ष्रेत्र में भीड़ बढ़ने पर लागू किए गए प्रतिबंध शनिवार को दोपहर बाद जब मेला क्षेत्र में भीड़ बढ़ने लगी तो पुलिस और मेला प्रशासन ने उन प्रतिबंधों को लागू कर दिया, जो भीड़ नियंत्रण के लिए बनाए गए हैं। जीटी जवाहर और तिकोनिया चौराहे से ही वाहनों का प्रवेश रोका गया। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार, डीएम मनीष कुमार वर्मा, मेलाधिकारी ऋषिराज व एसपी मेला नीरज पांडेय दोपहर 12:30 बजे संगम वॉच टावर पहुंचे और भीड़ का आकलन करते हुए दिखाई दिए। दिनभर संगम पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा और स्नान का क्रम भी जारी रहा। रविवार की भीड़ से बचने के लिए श्रद्धालुओं ने पर्व से एक दिन शनिवार को ही स्नान कर लिया। दोपहर एक बजे पांटून पुल पर इतने श्रद्धालु हो गए थे कि बहुत धीरे-धीरे चलना पड़ रहा था। पांटून पुल दो से संगम आने और तीन से झूंसी जाने वाले पुलों पर केवल पैदल श्रद्धालु ही दिख रहे थे।  

यूपी में न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कार्य पूरा होने में देर नहीं लगतीः मुख्यमंत्री

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने चंदौली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया एकीकृत न्यायालय परिसर का शिलान्यास व भूमि पूजन छह जिलों (चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस व औरैया) के एकीकृत न्यायालय परिसर का किया गया शिलान्यास मुख्यमंत्री ने किया आश्वस्तः सरकार के पास पैसे की कमी नहीं, पूरा सहयोग भी मिलेगा अब टूटे चैंबर नहीं, अधिवक्ताओं के लिए हाईराइज बिल्डिंग में होगी चैंबर की व्यवस्थाः मुख्यमंत्री चंदौली देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में शनिवार को चंदौली में छह जिलों (चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस व औरैया) के एकीकृत न्यायालय परिसर का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। सीएम योगी ने मुख्य न्यायाधीश को स्मृति चिह्न प्रदान किया और सभी न्यायमूर्तियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है कि न्यायपालिका भी उतनी ही सशक्त हो। आम आदमी को जितनी सहजता-सरलता से न्याय प्राप्त हो, उतना ही अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर होना भी आवश्यक है। यूपी सरकार के पास न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कोई भी कार्य आते हैं तो उसे पूरा होने में देर नहीं लगती। हमारा मानना है कि सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करना है तो न्यायिक सुविधा को सुदृढ़ करने के लिए कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए और यूपी इसे लेकर बेहतरीन दिशा में आगे बढ़ चुका है।  न्यायपालिका के इतिहास के नए पृष्ठ का हो रहा सृजन मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी की दृष्टि से आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज यहां न्यायपालिका के इतिहास के नए पृष्ठ का सृजन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की पुरानी बातों का जिक्र किया और बताया कि उन्होंने अपनी एक यात्रा के दौरान उल्लेख किया था कि न्याय सहजता के साथ प्रत्येक नागरिक को उपलब्ध हो सके, इसके लिए आवश्यक है कि कुछ ऐसे मॉडल बनने चाहिए, जो इंटीग्रेटेड (एक छत के नीचे) हों। मुख्य न्यायाधीश की प्रेरणा से यूपी के छह जनपदों (चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस व औरैया) में यह सुविधा उपलब्ध हो रही है। अगले कुछ महीने में चार अन्य जनपदों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। भारत के न्यायिक इतिहास में यह पृष्ठ नए स्वर्ण अक्षर के रूप में जुड़ेगा। यूपी में इसकी शुरुआत मुख्य न्यायमूर्ति के करकमलों से हो रही है।  2014 के बाद से इंफ्रास्ट्रक्चर को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में बढ़ाए गए कदम  सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में आने के बाद 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' व 'ईज ऑफ लिविंग' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तमाम सुधार किए। इंफ्रास्ट्रक्चर को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए। पीएम से हमें भी प्रेरणा मिली। प्रयागराज के एक कार्यक्रम में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि कोर्ट कॉम्प्लेक्स भी इंटीग्रेटेड होना चाहिए, इस पर हम लोगों ने यूपी के अंदर कार्य प्रारंभ किया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में बिंदल जी ने सकारात्मक सहयोग किया और यूपी सरकार ने एक साथ 10 जनपदों में (जहां स्वयं के जनपद न्यायालय नहीं थे) इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के लिए स्वीकृति दी।  अब टूटे चैंबर नहीं, अधिवक्ताओं के लिए हाईराइज बिल्डिंग में होगी चैंबर की व्यवस्था सीएम ने कहा कि पहले चरण में चंदौली समेत छह जनपदों के लिए धनराशि अवमुक्त हो गई है। डिजाइन अप्रूव होने के साथ ही सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। एलएंडटी जैसी विश्व विख्यात संस्थाओं के द्वारा अब निर्माण कार्य होगा। यहां एक ही छत के नीचे कोर्ट कॉम्प्लेक्स, अधिवक्ताओं के लिए अच्छे चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवास, कैंटीन, पार्किंग, खेल आदि की सुविधाएं रहेंगी। सीएम ने कहा कि न्याय के लिए जूझने वाले अधिवक्ता के चैंबर में जब वादकारी जाता था तो उसे सूर्य के दर्शन होते थे, लेकिन अब टूटे चैंबर्स नहीं, बल्कि हाईराइज बिल्डिंग में चैंबर की व्यवस्था होगी।   सरकार के पास पैसे की कमी नहीं, पूरा सहयोग भी मिलेगा सीएम योगी ने कहा कि हम चाहते हैं कि हर जनपद में ऐसे कोर्ट कॉम्प्लेक्स हों। अभी छह जनपदों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू कर रहे हैं। सरकार के पास पैसे की कमी नहीं है, आपको सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। चंदौली के जनप्रतिनिधि व अधिवक्ता लगातार आंदोलन करते थे, मैंने बार एसोसिएशन को लखनऊ बुलाकर कहा कि यह स्वीकृत हो गया है। आप न्यायिक कार्य में योगदान दीजिए। अब उच्च न्यायालय के साथ मिलकर यह कार्य शीघ्र आगे बढ़ेगा।  शिलान्यास व भूमि पूजन कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्र, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

कानपुर में खेती के साथ मोती उत्पादन, एक सीप से ₹200 तक का लाभ, 50% सब्सिडी का फायदा

कानपुर  कानपुर के किसानों के लिए नीली क्रांति अब एक नया मोड़ ले रही है। मत्स्य विभाग ने पारंपरिक मछली पालन को और अधिक लाभदायक बनाने के लिए 'मोती की खेती' (Pearl Farming) को बढ़ावा देने की अनूठी पहल शुरू की है। अब किसान एक ही तालाब में मछलियों के साथ-साथ सीप पालकर लाखों की अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे। एक तालाब, दोहरा मुनाफा कानपुर के शंभुआ गांव के किसान देवेंद्र वर्मा ने इस दिशा में मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने तालाब में मछली और सीप पालन का एकीकृत मॉडल अपनाया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अलग से किसी बड़े संसाधन की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लागत कम और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है। लागत और कमाई मत्स्य विभाग के अनुसार, मोती उत्पादन मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में होता है: हाफ ब्राउन, डिजाइनर और राउंड मोती। कानपुर में फिलहाल डिजाइनर मोतियों पर फोकस किया जा रहा है जिनकी बाजार में भारी मांग है।     उत्पादन क्षमता: एक सीप से औसतन 3 मोती तैयार होते हैं।     अनुमानित आय: एक सीप से किसान लगभग 200 रुपये तक कमा सकते हैं।     समय सीमा: सीप के भीतर मोती तैयार होने की प्रक्रिया में लगभग 18 महीने का समय लगता है। 50% सरकारी मदद किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए सरकार इस प्रोजेक्ट पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है।     उदाहरण: यदि कोई किसान 10 लाख रुपये का प्रोजेक्ट शुरू करता है, जिसमें लगभग 15 हजार सीप डाले जाएंगे, तो उसे सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।     नोडल एजेंसी: उत्तर प्रदेश में 'मणी एग्रो' को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंपनी के सीईओ डॉ. अय्यूब के मुताबिक, कानपुर से अब तक 9 किसानों ने इस अनुदान के लिए आवेदन किया है। डिजाइनर मोतियों का बढ़ता बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि राउंड मोती की तुलना में डिजाइनर मोतियों को तैयार करना थोड़ा आसान है और आभूषण उद्योग में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। एक सीप की खरीद लागत लगभग 62.14 रुपये आती है, जबकि तैयार होने के बाद इसकी वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है। बुंदेलखंड में मिली सफलता के बाद अब कानपुर मंडल के किसानों के लिए यह 'श्वेत क्रांति' आमदनी दोगुनी करने का सबसे ठोस जरिया साबित होने वाली है।     विभाग की ओर से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। आने वाले समय में और अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी है, ताकि मोती उत्पादन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सके- सुनील कुमार, मत्स्य निरीक्षक।